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भारत तेज़ी से 6G, एआई और नवाचार आधारित भविष्य की ओर अग्रसर:मनोहर लाल

IISF पंचकूला में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल: भारत तेज़ी से 6G, एआई और नवाचार आधारित भविष्य की ओर अग्रसर नए युग की प्रौद्योगिकियाँ – विज़न 2047’ पर पैनल चर्चा में नई तकनीक को बढ़ावा देने का आह्वान ऊर्जा और आवासन क्षेत्रों में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका- श्री मनोहर लाल पंचकूला दिसंबर 8(संजय राय) केंद्रीय ऊर्जा, आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहरलाल ने पंचकूला में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) के तीसरे दिन ‘नए युग की प्रौद्योगिकियाँ – विज़न 2047’ पर पैनल चर्चा को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि नई तकनीक और नवाचार को आगे बढ़ाना और उन्हें समाज के हित में अधिक से अधिक लागू करना अब हमारे वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों की जिम्मेदारी बन गई है। मनोहर लाल ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव का आयोजन हरियाणा के पंचकूला में हो रहा है और हम सभी इस महोत्सव के साक्षी बन रहे हैं। इससे पहले भी हरियाणा को फरीदाबाद में इस महोत्सव का आयोजन करने का अवसर मिल चुका है। उन्होंने कहा कि इस फ़ेस्टिवल का उद्देश्य अकादमिक जगत और उद्योग जगत को एक मंच पर लाना है, ताकि दोनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में विज्ञान ने बहुत तरक्की की है। विज्ञान की ही बदौलत आज दुनिया बहुत छोटी लगने लगी है। दूरसंचार के माध्यम से हम वायर और वायरलेस तकनीक का उपयोग कर एक-दूसरे से बात कर सकते हैं और दुनिया में कहीं भी बैठे व्यक्ति को देख भी सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब इससे आगे बढ़ते हुए एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का दौर आ गया है, जिसे भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि एआई टूल्स का सही उपयोग करके किसी भी समस्या का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है । उन्होंने कहा कि वे वैज्ञानिकों से अनुरोध करते हैं कि एआई का प्रयोग सावधानीपूर्वक और समाजहित में करें, ताकि इसका सार्थक रूप से अधिकतम लाभ उठाया जा सके। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज एआई का उपयोग हर क्षेत्र में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भी इसके प्रयोग पर विशेष बल दिया गया है। स्मार्ट मीटरिंग और आवश्यकता के अनुसार बिजली उपकरणों के संचालन में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिससे खर्च में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के अलावा आवासन के क्षेत्र में भी एआई का प्रयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। मकानों की डिजाइन इस प्रकार तैयार की जा सकती है कि वे सर्दियों में अत्यधिक ठंडे न हों और गर्मियों में बहुत गर्म न हों। इसमें एआई की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। मनोहर लाल ने कहा की भारत सरकार ने 1 लाख करोड़ का अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष शुरू किया, जो एआई, क्वांटम, स्वच्छ ऊर्जा और बायोटेक जैसे रणनीतिक और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) के तहत पेशेवर निधि प्रबंधकों के माध्यम से संचालित, गहन तकनीक परियोजनाओं को वित्तपोषित करके और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर भारत को एक वैश्विक नवाचार केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि भारत अब संचार तकनीक में 5G से आगे बढ़कर तेज़ी से 6G की ओर अग्रसर हो रहा है। इस अवसर पर मनोहर लाल ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए। हरियाणा से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि हरियाणा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार और अनुसंधान को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री मोहनलाल ने विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी नारायण, आईआईटीएम के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र राव, सीएसआईआर-सीएसआईओ के निदेशक डॉ. शांतनु भट्टाचार्य सहित अन्य पैनलिस्ट भी उपस्थित थे।

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वंदेमातरम् सिर्फ नारा नहीं, जिम्मेदारी भी हैलोकसभा में अखिलेश का सत्ता पक्ष पर वार

नई दिल्ली(संजय राय )। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर आज लोकसभा मे विशेष चर्चा हुई. जिसने सियासी माहौल को गरमा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि आज सदन एक गौरवशाली क्षण का साक्षी बन रहा है। उन्होंने वंदे मातरम् को स्वतंत्र और समृद्ध भारत की आत्मा बताते हुए इसे आने वाले भारत की प्रेरणा करार दिया।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “देश के महापुरुषों का सपना था स्वतंत्र भारत और आज की पीढ़ी का सपना है समृद्ध भारत। आज़ाद भारत के सपने को वंदे मातरम् की भावना ने सींचा और समृद्ध भारत के सपने को भी यही भावना सींचेगी। हमें आत्मनिर्भर भारत बनाना है और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना है।”उन्होंने आगे कहा कि जब-जब देश पर संकट आया, वंदे मातरम् की भावना ने राष्ट्र को संबल दिया। 15 अगस्त, 26 जनवरी, हर घर तिरंगा जैसे अभियानों में वही भाव नजर आता है। जब आपातकाल के दौरान संविधान की गरिमा पर प्रहार हुआ, तब भी इसी चेतना ने देश को खड़े होने की ताकत दी। युद्ध के समय भी जवान इसी भावना के साथ सरहद पर डटे और विजय प्राप्त की।पीएम मोदी के बाद कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने अपनी बातें रखीं। इसके बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने देश को एक किया और आज़ादी की लड़ाई में जान फूंकी, लेकिन आज सत्ता पक्ष हर चीज पर कब्जा करना चाहता है।अखिलेश यादव ने कहा, “ये लोग हर बात का श्रेय लेना चाहते हैं। जो महापुरुष इनके नहीं हैं, उन पर भी कब्जा करने की कोशिश करते हैं। इनकी बातों से ऐसा लगता है मानो वंदे मातरम् भी इन्हीं का बनाया हुआ गीत हो।”उन्होंने आगे कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, उसे जीवन में उतारने के लिए है। “जिन्होंने कभी आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, वे वंदे मातरम् का महत्व क्या समझेंगे?

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बच्चों को अच्छी शिक्षा देना बीजेपी सरकार के एजेंडे में है ही नहीं: अभय सिंह चौटाला

कॉलेजों में नियमित प्रोफेसरों की कमी के लिए बीजेपी सरकार एवं एचपीएससी दोषी है: चौधरी अभय सिंह चौटाला प्रदेश के लगभग सभी कॉलेजों में प्रोफेसरों की भारी कमी है जिसके कारण बच्चे नहीं कर पा रहे हैं पढ़ाई प्रदेश के 180 कॉलेजों में 2400 से भी ज्यादा शिक्षकों के पद पड़े हैं खाली चंडीगढ़, 8 दिसंबर(संजय राय) । इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने प्रोफेसरों की कमी से जूझ रहे कॉलेजों में पीएचडी, रिसर्च स्कॉलर द्वारा बच्चों को पढ़ाए जाने के सरकार के निर्णय को बेहद बचकाना निर्णय बताते हुए कहा कि कॉलेज की पढ़ाई बच्चों का भविष्य तय करती है और वही बच्चे अब नियमित प्रोफेसर द्वारा पढ़ाए जाने से महरूम हैं। प्रदेश के लगभग सभी कॉलेजों में प्रोफेसरों की भारी कमी है जिसके कारण बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उन्हें पढ़ाने वाला कोई नहीं है। इसका दोषी कोई और नहीं बल्कि बीजेपी सरकार एवं एचपीएससी है। यही पीएचडी, रिसर्च स्कॉलर जब नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए पेपर देते हैं तो एचपीएससी द्वारा उन्हें फेल कर दिया जाता है। जिनको एचपीएससी ने फेल कर दिया अब उन्हीं लोगों को सरकार ने कॉलेजों में बच्चों को पढ़ाने के लिए अनुबंध पर रखने का फैसला किया है। ऐसा करना बीजेपी सरकार की दोगली मानसिकता को दिखाता है। आज प्रदेश के 180 कॉलेजों में 2400 से भी ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। बीजेपी सरकार नियमित पदों को क्यों नहीं भर रही है इसके पीछे इनकी ओच्छी मानसिकता साफ नजर आती है कि ये सरकार बेरोजगार योग्य युवाओं को नौकरी नहीं देना चाहते हैं। बच्चों को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा देने के लिए नियमित शिक्षक बेहद आवश्यक हैं न कि काम चलाने के लिए अनुबंध पर रखना। दरअसल बीजेपी सरकार की मंशा प्रदेश के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की है ही नहीं। बीजेपी का एकमात्र एजेंडा ही लोगों को जात-पात और धर्म के नाम पर बांटना है।

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जीडीपी की चमक के पीछे छिपा हिसाब—आय बनाम खर्च की सच्चाई

संजय राय, भारत में जीडीपी वृद्धि दर को अक्सर विकास के सूचक के रूप में शोर-शराबे के साथ प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन यह कम ही बताया जाता है कि यह वृद्धि किस आधार पर दर्ज की गई है और कुल (नोमिनल) तथा वास्तविक वृद्धि (रियल ग्रोथ) में कितना अंतर है। जुलाई–सितंबर तिमाही के ताजा आँकड़ों ने यही भ्रम और गहराया है। रुपया लगातार डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है, व्यापार घाटा बढ़ रहा है, वैश्विक परिस्थितियाँ अनिश्चित हैं—इन सबके बीच 8.2% वृद्धि दर किसी चमत्कार की तरह पेश की गई। लेकिन कहानी इससे कहीं जटिल है।दरअसल, 2024–25 के दौरान जीडीपी वृद्धि सात तिमाहियों के सबसे निचले पायदान पर थी। इसी कमज़ोर आधार ने मौजूदा वृद्धि को स्वाभाविक रूप से ऊँचा दिखा दिया। नोमिनल बनाम वास्तविक—कौन सा सच? इस तिमाही में नोमिनल जीडीपी 8.07% रही। सरकार ने इसमें से 0.5% मुद्रास्फीति घटाकर इसे 8.2% वास्तविक वृद्धि के रूप में पेश किया।लेकिन वास्तविकता यह है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 1.9% रही थी। यदि पहले की पद्धति अपनाई जाती और इसी दर से नोमिनल आंकड़ा घटाया जाता, तो जीडीपी वृद्धि केवल 6.3% बैठती।यानी आंकड़ों की व्याख्या बदलने से तस्वीर भी बदल जाती है। आईएमएफ की गंभीर टिप्पणी यह सिर्फ गणना की बहस नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के राष्ट्रीय खातों की गुणवत्ता को ‘सी ग्रेड’ दिया है।आईएमएफ का कहना है कि— डेटा संग्रहण की विधियों में खामियाँ हैं, आधार वर्ष उपयुक्त नहीं है, और कई क्षेत्रों में पारदर्शिता की कमी है। सबसे अहम बात यह कि भारत में आय (इनकम मेथड) और खर्च (एक्सपेंडिचर मेथड) के आधार पर निकाली गई जीडीपी में बड़ा अंतर आ जाता है।विश्वसनीय अर्थव्यवस्थाओं में दोनों तरीकों से प्राप्त आंकड़े लगभग समान होते हैं। लेकिन भारत में दोनों का मेल न बैठना यह संकेत देता है कि आर्थिक गतिविधि का वास्तविक चित्र अधूरा और असंगत है। संदेह बढ़ने की आशंका जब आय और खर्च के बीच इतना बड़ा अंतर हो, तो यह स्वाभाविक है कि निवेशक, वैश्विक एजेंसियाँ, और आर्थिक विश्लेषक भारत की उच्च वृद्धि दर को संदेह की दृष्टि से देख सकते हैं। वृद्धि दर ऊँची दिखाई दे सकती है, लेकिन सवाल यह है—क्या यह वृद्धि वास्तविक आर्थिक ऊर्जा का परिणाम है या सिर्फ आंकड़ों की कलाबाज़ी है?जब तक आय, उत्पादन और खर्च के आकलन में पारदर्शिता और स्थिरता नहीं आती, तब तक भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की कहानी दुनिया को पूरी तरह आश्वस्त नहीं कर पाएगी।

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पंचकूला में RIMC देहरादून सत्र 2026 की प्रवेश परीक्षा सुचारू रूप से संपन्न

हरियाणा के 244 छात्रों ने लिया भाग पंचकूला, 7 दिसंबर(ईशान राय)। राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय, देहरादून में जुलाई 2026 से शुरू होने वाले सत्र के लिए प्रवेश परीक्षा आज राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, सेक्टर-14 में निष्पक्ष, सुचारू और पारदर्शी तरीके से आयोजित की गई। इस परीक्षा में हरियाणा राज्य के 244 परीक्षार्थियों ने भाग लिया। इस संबंध में जानकारी देते हुए हरियाणा सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय, देहरादून की स्थापना वर्ष 1922 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय लड़कों और लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण समग्र शिक्षा प्रदान करना है, ताकि यह संस्थान भारतीय सेना के लिए अधिक से अधिक अधिकारी तैयार कर सके। भारत को स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद यह महाविद्यालय नेतृत्व का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहां से राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़गवासला; अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी, चेन्नई; और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून जैसी प्रमुख संस्थाओं की स्थापना को दिशा मिली। राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय, देहरादून में 11 से 18 वर्ष की आयु के छात्र-छात्राओं को सार्वजनिक स्कूल स्तर की शिक्षा प्रदान की जाती है। इनका चयन विशेष रूप से आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से किया जाता है।

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बच्चा गाड़ी में मां उतरी केले लेने ,ड्राइवर गाड़ी ले गया आगे पंचकूला पुलिस सुरक्षित मिलाया मां बेटे को

कैब ड्राइवर 2 वर्षीय बच्चे को लेकर आगे बढ़ा, खरीदारी करने उतरी मां रह गई पीछे, 15 किलोमीटर आगे पहुंचा चालक, ईआरवी टीम की सुझबूझ से बच्चे को सुरक्षित मां से मिलवाया पुलिस जांच में किसी भी प्रकार की संदिग्ध या आपराधिक मंशा की पुष्टि नहीं, पुलिस ने चालको से सचेत रहने की अपील की पंचकूला/ 06 दिसंबर :-देहरादून से हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ जा रही एक महिला उस समय घबरा गई जब उसका दो वर्षीय बच्चा कार में रह गया और ड्राइवर अनजाने में वाहन लेकर आगे बढ़ गया। डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने बताया कि महिला ने देहरादून से सुबह 6 बजे हिमाचल प्रदेश के लिए कैब बूक की थी, जब वे पिंजौर पहुंचे उस दौरान महिला रास्ते में कुछ केले व अन्य सामान खरीदने के लिए कार से उतरी और अपने छोटे बच्चे को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल फोन देकर बाहर आई। इसी दौरान ड्राइवर भी कुछ सामान लेने के उद्देश्य से नीचे उतर गया था। वापस आते ही उसने बिना पीछे देखे वाहन स्टार्ट किया और नालागढ़ की दिशा में रवाना हो गया। महिला ने जब लौटकर देखा कि कार वहाँ नहीं है, तो वह घबरा गई और तुरंत पुलिस को इस संबंध में करीब सुबह 10:30 बजे सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए ईआरवी 526 टीम तत्काल सक्रिय हो गई। जिसमें इन्चार्ज रिषी कुमार, एसपीओ रामचंदर व एसपीओ परवेश मसीह ने मौके पर पहुंचते ही वाहन का पीछा करना शुरू कर दिया और महिला के मोबाइल पर कॉल किया। फोन बच्चे के हाथ में था, जिसने कॉल रिसीव की। पुलिस ने बच्चे से ड्राइवर को फोन देने के लिए कहा और फिर ड्राइवर से संपर्क किया किया। ड्राइवर ने बताया कि उसे यह एहसास ही नहीं हुआ कि महिला वाहन में मौजूद नही है और वह गलती से कार लेकर आगे बढ़ गया। वह पिंजौर से नालागढ़ रोड पर लगभग 15 किलोमीटर आगे पहुंच चुका था। पुलिस के कहने पर उसने तुरंत वाहन रोक दिया। ड्राइवर से पूछताछ के दौरान उसने पूरी घटना को महज गलतफहमी बताया। पिंजौर थाना में कार्यरत सब इंस्पेक्टर रोशनलाल ने बताया कि हमारी जांच में किसी भी प्रकार की संदिग्ध या आपराधिक मंशा की पुष्टि नहीं हुई है। मामले को पूरी तरह सुलझाकर बच्चे को सुरक्षित वापस करने के बाद पुलिस ने महिला के हवाले दिया। पंचकूला पुलिस आमजन से अपील करती है कि इस प्रकार की स्थिति से बचने के लिए वाहन से उतरते समय बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और वाहन चालकों को भी पूरी तरह सचेत रहने की सलाह देती है।

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डीसीपी से बोली छात्रा, ‘मैने कभी थाना नही देखा’, इच्छुक छात्राओ को मिलेगा पुलिस स्टेशन कार्यशैली का वास्तविक अनुभव

पंचकूला पुलिस ने छात्राओ को महिला एवं बाल विरुद्ध अपराध, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा, बाल विवाह को लेकर जागरुक किया “धाकड बनो बेटियो” और अच्छे-बुरे अनुभव बात मां-बाप को जरुर बताओ, सीख हमेशा अच्छी ही मिलेगी: डीसीपी सृष्टि गुप्ता 6 से 9 दिसंबर को पंचकूला में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल: डीसीपी की अपील, विज्ञान को जानने का सुनहरा मौका, जरुर जाए छात्र पंचकूला( ईशान राय):-आज पंचकूला पुलिस बरवाला स्थित पीएम श्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जिसमे पुलिस टीम द्वारा छात्राओ को महिला एवं बाल विरुद्ध अपराधो के बारे में जानकारी, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा, बाल विवाह को लेकर जागरुक किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंची डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता का छात्राओं ने तिलक लगाकार स्वागत किया।डीसीपी ने छात्राओ के साथ खुलकर संवाद किया, उनको ‘धाकड़ बनने’ और अपने अधिकारों को समझकर निडरता से आगे बढ़ने के लिए कहा साथ ही उनकी जिज्ञासाओं को सुना और उन्हें निडर, जागरूक तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही बताया कि मां-बाप से बड़ा कोई दोस्त नही, उनसे दिल-खोलकर अपने मन की बात बताओ, अच्छा-बुरा अनुभव साझा करो, सीख अच्छी ही मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान जब डीसीपी ने छात्राओं से संवाद किया तो एक बच्ची ने बताया कि उसने कभी पुलिस स्टेशन नहीं देखा। इस पर डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने तत्काल इच्छुक छात्राओं के लिए पुलिस थाने के विशेष दौरे की घोषणा की, ताकि छात्राएं नजदीक से पुलिस की कार्यशैली, शिकायतों की प्रक्रिया और पुलिस द्वारा विभिन्न मामलों में की जाने वाली कार्रवाई के तरीकों को समझ सकें। डीसीपी ने जिला के सभी विद्यार्थियो खासकर कक्षा 10वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियो से अपील की कि वे 6 से 9 दिसंबर को पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित दशहरा ग्राउंड में आयोजित होने वाले 11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में अवश्य भाग लें, यह आपका सौभाग्य है कि इस बार यह फेस्टिवल पंचकूला में आयोजित हो रहा है। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सीखने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। कार्यक्रम में सब-इंस्पेक्टर रामू स्वामी ने भी प्रेरणादायक शब्दों से छात्राओं में उत्साह भरा और उन्हें बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और ऑनलाइन ठगी से बचने के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके अलावा एएसआई शिवानी और महिला मुख्य सिपाही आशा ने छात्राओं को आत्मरक्षा के विभिन्न गुर सिखाए तथा उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बाल विवाह न करने और इसकी रोकथाम के लिए हर संभव प्रयास करने की शपथ दिलाई गई। साथ ही महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़े कानून, जैसे—पॉक्सो एक्ट, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम आदि के बारे में जानकारी देकर इनके पालन की शपथ भी दिलवाई गई। इस अवसर पर बरवाला चौकी इंचार्ज गुरपाल सिंह, जिला युवा विकास संगठन की टीम से डॉ. मोनिका, स्कूल प्रशासन तथा लगभग 500 छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को जागरूक, सक्षम और सुरक्षित बनाना रहा, जिसे सभी ने बेहद सकारात्मक रूप से सराहा।

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इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल: पंचकूला पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंध

दशहरा ग्राउंड हाई-टेक सुरक्षा जोन में तब्दील 2 डीसीपी, 5 एसीपी, 13 इंस्पेक्टर के अलावा 420 पुलिसकर्मी संभाल रहे सुरक्षा का जिम्मा परिसर के अंदर 328 कैमरे, जबकि बाहर 58 कैमरे, 10 सोलर कैमरा से भी निगरानी 3 कोऑर्डिनेशन रूम बनाए, 3 ईआरवी, 2 पीसीआर, 6 राइडर आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में छात्र, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और आम नागरिक इस आयोजन में हो रहे शामिल पंचकूला/ 6 दिसंबर(ईशान राय):- सेक्टर-5 स्थित दशहरा ग्राउंड में 6 से 9 दिसंबर तक आयोजित हो रहे 11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल के सुचारु संचालन और आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पंचकूला पुलिस ने पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त किए हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को बहु-स्तरीय बनाते हुए पूरे परिसर को हाई-टेक सर्विलांस और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के साथ कवर किया गया है। फेस्टिवल स्थल और आसपास के क्षेत्रों में कुल 417 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा की निगरानी के लिए तैनात किया गया है। इनमें डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता, डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक मनप्रीत सिंह सूदन, 5 एसीपी, और 13 इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी स्वयं स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सुरक्षा तंत्र को दो हिस्सों में बांटा गया है, जिसके तहत कुल 420 पुलिसकर्मियों में से 320 पुलिसकर्मी फ़ेस्टिवल परिसर के अंदर और 100 पुलिसकर्मी बाहरी क्षेत्रों, पार्किंग और एंट्री-एग्ज़िट ज़ोन में सुरक्षा दायित्व संभाल रहे हैं। डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने बताया कि पूरे आयोजन स्थल को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। परिसर के अंदर 328 कैमरे, जबकि बाहर 58 कैमरे लगाए गए हैं, जो लगातार गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। बाहरी क्षेत्र में 10 सोलर कैमरे भी स्थापित किए गए हैं। सुरक्षा संचालन को बेहतर समन्वय देने के लिए 3 कोऑर्डिनेशन रूम बनाए गए हैं, जहां से सभी गतिविधियों पर रियल-टाइम निगरानी रखी जा रही है। भीड़ की स्थिति को देखते हुए मौके पर 3 ईआरवी, 6 राइडर, और 2 विशेष पीसीआर वाहनों को तैनात किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने कहा कि 11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल की मेजबानी करना पंचकूला के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में छात्र, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और आम नागरिक इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने सुरक्षा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तैयारी की है। उन्होंने आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि सभी प्रतिभागी, विशेषकर छात्र, इस वैज्ञानिक महाकुंभ से अधिकतम लाभ उठाएं।उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की सर्विलांस के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो।

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देसी पिस्टल के साथ नसरुद्दीन पकड़ा गया नालासोपारा में

मुंबई/नालासोपारा इलाके में वसई क्राइम ब्रांच ने एक 31 साल के युवक नसरुद्दीन खान को देसी पिस्टल और दो जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। हथियार की कीमत महज 50 हजार रुपये बताई गई, लेकिन जिस आसानी से यह हथियार उपलब्ध हो रहा है, उसकी कीमत समाज के लिए लाखों-करोड़ों में आंकी जा सकती है। सप्लायर कृष्णा चव्हाण भी पकड़ा गया। आरोपी पर पहले से दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। मामला शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज हुआ और जांच जारी है। यह कोई पहली घटना नहीं है। महाराष्ट्र हो या उत्तर प्रदेश, बिहार हो या राजस्थान , देसी कट्टा, देसी पिस्तौल अब गांव-कस्बों से लेकर मेट्रो शहरों तक आम हो चुके हैं। एक तरफ पुलिस इसे “सफल कार्रवाई” बताती है, दूसरी तरफ हर हफ्ते इसी तरह की खबरें आती हैं। सवाल यह है कि क्या हम सिर्फ पुलिस की पीठ थपथपाकर अपना कर्तव्य पूरा कर रहे हैं या असल बीमारी की जड़ तक जाना चाहते हैं! देसी हथियारों का कारोबार इतना सस्ता और इतना आसान क्यों हो गया है! मुंगेर, बुरहानपुर, मेरठ, अलीगढ़, खरड़ ,ये नाम अब अवैध हथियार उद्योग के पर्याय बन चुके हैं। एक छोटा सा वर्कशॉप, कुछ लोहे की रॉड, पुराने स्कूटर के पार्ट्स और यूट्यूब ट्यूटोरियल, बस देसी पिस्तौल तैयार! कीमत 15-20 हजार से शुरू, 50-60 हजार तक! डिलीवरी कोरियर से, पेमेंट UPI से। पुलिस पकड़ती है तो नया सप्लायर तैयार। इसकी मांग कौन पैदा कर रहा है! छोटे-मोटे अपराधी जो बैंक डकैती नहीं, मोहल्ले की रंगदारी करते हैं ,जमीन के विवाद सुलझाने वाले “बाहुबली! प्रेम प्रसंग में बदला लेने वाले युवा ! और सबसे डरावनी बात! वो किशोर जो सोशल मीडिया पर “गैंगस्टर लुक” दिखाने के लिए हथियार खरीदते हैंजब तक हथियार की “डिमांड” रहेगी, सप्लाई अपने आप रास्ता बना लेगी। पुलिस का रोल सराहनीय है, लेकिन यह आग बुझाने जैसा है , बाल्टी से पानी डाल रहे हैं जबकि जंगल की आग लगी है। असली इलाज चाहिए तो जमीनी स्तर पर काम करना होगा! सप्लाई चेन को तोड़ना ,अवैध वर्कशॉप पर लगातार छापे, कच्चा माल (लोहा, बारूद) की सप्लाई रोकना ! मांग को खत्म करना , समाज में हिंसा का ग्लैमराइजेशन बंद करना, फिल्मों-गीतों में बंदूक को “मर्दानगी” का प्रतीक बनाना बंद करना ! युवाओं को रोजगार और सम्मानजनक जीवन देना ,जब हाथ में हथियार की बजाय काम होगा, तब बंदूक की जरूरत खुद कम हो जाएगीनालासोपारा की यह गिरफ्तारी एक छोटी जीत है। लेकिन अगर हम हर बार सिर्फ ताली बजाकर रह गए तो कल कोई दूसरा नसरुद्दीन, कोई दूसरा कृष्णा फिर पकड़ा जाएगा। और शायद तब बहुत देर हो चुकी होगी। समाज को जगना होगा। पुलिस अकेली नहीं लड़ सकती। हमारे मोहल्ले, हमारे स्कूल-कॉलेज, हमारे घर , यहीं से बदलाव शुरू करना होगा।वरना देसी पिस्तौल की यह खबरें कभी खत्म नहीं होंगी। बस नाम और जगह बदलती रहेंगी।

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ठाणे में प्रेम प्रसंग के चलते महिला की हत्या!

डिलीवरी बॉय की माँ को ऑफिस टॉयलेट के पास पत्थर से कुचलकर मार डाला मुंबई/ठाणे के लोकमान्य नगर इलाके में आज सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई जब एक 42 वर्षीय मजदूर ने अपनी प्रेमिका को सरेआम पत्थर के फर्श से सिर कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। मृतका की उम्र 50 वर्ष थी और वह एक डिलीवरी बॉय की मां थीं। वर्तकनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के अनुसार, मृतका महिला की उम्र 50 थी । शिकायत उनके बेटे, उम्र 27 साल, डिलीवरी बॉय ने दर्ज कराई है! आरोपी की पहचान मनोज (42, पेशा बिगारी, लोकमान्य नगर क्षेत्र का ही निवासी ठाणे के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, महिला और मनोज के बीच काफी समय से अवैध प्रेम प्रसंग चल रहा था। आज सुबह करीब 10 बजे एक ऑफिस के पास सार्वजनिक टॉयलेट के निकट दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। गुस्साए मनोज ने पास पड़े पत्थर के फर्श के बड़े टुकड़े को उठाया और महिला के सिर पर जोरदार वार किया। एक ही वार में महिला का सिर बुरी तरह कुचल गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के समय इलाके में मौजूद कुछ लोग दौड़े, लेकिन तब तक मनोज फरार होने की कोशिश कर रहा था। स्थानीय लोगों ने ही उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी से गहन पूछताछ शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया मामला प्रेम प्रसंग में हुए विवाद का लग रहा है, लेकिन पुलिस अन्य कोणों से भी जांच कर रही है। इलाके में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोग बता रहे हैं कि मनोज और महिला को अक्सर साथ देखा जाता था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि बात हत्या तक पहुंच जाएगी। केस की आगे की जांच एसआई संजय पाटिल कर रहे हैं।

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