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जीडीपी की चमक के पीछे छिपा हिसाब—आय बनाम खर्च की सच्चाई

संजय राय, भारत में जीडीपी वृद्धि दर को अक्सर विकास के सूचक के रूप में शोर-शराबे के साथ प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन यह कम ही बताया जाता है कि यह वृद्धि किस आधार पर दर्ज की गई है और कुल (नोमिनल) तथा वास्तविक वृद्धि (रियल ग्रोथ) में कितना अंतर है। जुलाई–सितंबर तिमाही के ताजा आँकड़ों ने यही भ्रम और गहराया है। रुपया लगातार डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है, व्यापार घाटा बढ़ रहा है, वैश्विक परिस्थितियाँ अनिश्चित हैं—इन सबके बीच 8.2% वृद्धि दर किसी चमत्कार की तरह पेश की गई। लेकिन कहानी इससे कहीं जटिल है।दरअसल, 2024–25 के दौरान जीडीपी वृद्धि सात तिमाहियों के सबसे निचले पायदान पर थी। इसी कमज़ोर आधार ने मौजूदा वृद्धि को स्वाभाविक रूप से ऊँचा दिखा दिया। नोमिनल बनाम वास्तविक—कौन सा सच? इस तिमाही में नोमिनल जीडीपी 8.07% रही। सरकार ने इसमें से 0.5% मुद्रास्फीति घटाकर इसे 8.2% वास्तविक वृद्धि के रूप में पेश किया।लेकिन वास्तविकता यह है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति 1.9% रही थी। यदि पहले की पद्धति अपनाई जाती और इसी दर से नोमिनल आंकड़ा घटाया जाता, तो जीडीपी वृद्धि केवल 6.3% बैठती।यानी आंकड़ों की व्याख्या बदलने से तस्वीर भी बदल जाती है। आईएमएफ की गंभीर टिप्पणी यह सिर्फ गणना की बहस नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के राष्ट्रीय खातों की गुणवत्ता को ‘सी ग्रेड’ दिया है।आईएमएफ का कहना है कि— डेटा संग्रहण की विधियों में खामियाँ हैं, आधार वर्ष उपयुक्त नहीं है, और कई क्षेत्रों में पारदर्शिता की कमी है। सबसे अहम बात यह कि भारत में आय (इनकम मेथड) और खर्च (एक्सपेंडिचर मेथड) के आधार पर निकाली गई जीडीपी में बड़ा अंतर आ जाता है।विश्वसनीय अर्थव्यवस्थाओं में दोनों तरीकों से प्राप्त आंकड़े लगभग समान होते हैं। लेकिन भारत में दोनों का मेल न बैठना यह संकेत देता है कि आर्थिक गतिविधि का वास्तविक चित्र अधूरा और असंगत है। संदेह बढ़ने की आशंका जब आय और खर्च के बीच इतना बड़ा अंतर हो, तो यह स्वाभाविक है कि निवेशक, वैश्विक एजेंसियाँ, और आर्थिक विश्लेषक भारत की उच्च वृद्धि दर को संदेह की दृष्टि से देख सकते हैं। वृद्धि दर ऊँची दिखाई दे सकती है, लेकिन सवाल यह है—क्या यह वृद्धि वास्तविक आर्थिक ऊर्जा का परिणाम है या सिर्फ आंकड़ों की कलाबाज़ी है?जब तक आय, उत्पादन और खर्च के आकलन में पारदर्शिता और स्थिरता नहीं आती, तब तक भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की कहानी दुनिया को पूरी तरह आश्वस्त नहीं कर पाएगी।

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पंचकूला में RIMC देहरादून सत्र 2026 की प्रवेश परीक्षा सुचारू रूप से संपन्न

हरियाणा के 244 छात्रों ने लिया भाग पंचकूला, 7 दिसंबर(ईशान राय)। राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय, देहरादून में जुलाई 2026 से शुरू होने वाले सत्र के लिए प्रवेश परीक्षा आज राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय, सेक्टर-14 में निष्पक्ष, सुचारू और पारदर्शी तरीके से आयोजित की गई। इस परीक्षा में हरियाणा राज्य के 244 परीक्षार्थियों ने भाग लिया। इस संबंध में जानकारी देते हुए हरियाणा सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय, देहरादून की स्थापना वर्ष 1922 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय लड़कों और लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण समग्र शिक्षा प्रदान करना है, ताकि यह संस्थान भारतीय सेना के लिए अधिक से अधिक अधिकारी तैयार कर सके। भारत को स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद यह महाविद्यालय नेतृत्व का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहां से राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़गवासला; अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी, चेन्नई; और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून जैसी प्रमुख संस्थाओं की स्थापना को दिशा मिली। राष्ट्रीय भारतीय सैन्य महाविद्यालय, देहरादून में 11 से 18 वर्ष की आयु के छात्र-छात्राओं को सार्वजनिक स्कूल स्तर की शिक्षा प्रदान की जाती है। इनका चयन विशेष रूप से आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से किया जाता है।

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बच्चा गाड़ी में मां उतरी केले लेने ,ड्राइवर गाड़ी ले गया आगे पंचकूला पुलिस सुरक्षित मिलाया मां बेटे को

कैब ड्राइवर 2 वर्षीय बच्चे को लेकर आगे बढ़ा, खरीदारी करने उतरी मां रह गई पीछे, 15 किलोमीटर आगे पहुंचा चालक, ईआरवी टीम की सुझबूझ से बच्चे को सुरक्षित मां से मिलवाया पुलिस जांच में किसी भी प्रकार की संदिग्ध या आपराधिक मंशा की पुष्टि नहीं, पुलिस ने चालको से सचेत रहने की अपील की पंचकूला/ 06 दिसंबर :-देहरादून से हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ जा रही एक महिला उस समय घबरा गई जब उसका दो वर्षीय बच्चा कार में रह गया और ड्राइवर अनजाने में वाहन लेकर आगे बढ़ गया। डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने बताया कि महिला ने देहरादून से सुबह 6 बजे हिमाचल प्रदेश के लिए कैब बूक की थी, जब वे पिंजौर पहुंचे उस दौरान महिला रास्ते में कुछ केले व अन्य सामान खरीदने के लिए कार से उतरी और अपने छोटे बच्चे को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल फोन देकर बाहर आई। इसी दौरान ड्राइवर भी कुछ सामान लेने के उद्देश्य से नीचे उतर गया था। वापस आते ही उसने बिना पीछे देखे वाहन स्टार्ट किया और नालागढ़ की दिशा में रवाना हो गया। महिला ने जब लौटकर देखा कि कार वहाँ नहीं है, तो वह घबरा गई और तुरंत पुलिस को इस संबंध में करीब सुबह 10:30 बजे सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए ईआरवी 526 टीम तत्काल सक्रिय हो गई। जिसमें इन्चार्ज रिषी कुमार, एसपीओ रामचंदर व एसपीओ परवेश मसीह ने मौके पर पहुंचते ही वाहन का पीछा करना शुरू कर दिया और महिला के मोबाइल पर कॉल किया। फोन बच्चे के हाथ में था, जिसने कॉल रिसीव की। पुलिस ने बच्चे से ड्राइवर को फोन देने के लिए कहा और फिर ड्राइवर से संपर्क किया किया। ड्राइवर ने बताया कि उसे यह एहसास ही नहीं हुआ कि महिला वाहन में मौजूद नही है और वह गलती से कार लेकर आगे बढ़ गया। वह पिंजौर से नालागढ़ रोड पर लगभग 15 किलोमीटर आगे पहुंच चुका था। पुलिस के कहने पर उसने तुरंत वाहन रोक दिया। ड्राइवर से पूछताछ के दौरान उसने पूरी घटना को महज गलतफहमी बताया। पिंजौर थाना में कार्यरत सब इंस्पेक्टर रोशनलाल ने बताया कि हमारी जांच में किसी भी प्रकार की संदिग्ध या आपराधिक मंशा की पुष्टि नहीं हुई है। मामले को पूरी तरह सुलझाकर बच्चे को सुरक्षित वापस करने के बाद पुलिस ने महिला के हवाले दिया। पंचकूला पुलिस आमजन से अपील करती है कि इस प्रकार की स्थिति से बचने के लिए वाहन से उतरते समय बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और वाहन चालकों को भी पूरी तरह सचेत रहने की सलाह देती है।

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डीसीपी से बोली छात्रा, ‘मैने कभी थाना नही देखा’, इच्छुक छात्राओ को मिलेगा पुलिस स्टेशन कार्यशैली का वास्तविक अनुभव

पंचकूला पुलिस ने छात्राओ को महिला एवं बाल विरुद्ध अपराध, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा, बाल विवाह को लेकर जागरुक किया “धाकड बनो बेटियो” और अच्छे-बुरे अनुभव बात मां-बाप को जरुर बताओ, सीख हमेशा अच्छी ही मिलेगी: डीसीपी सृष्टि गुप्ता 6 से 9 दिसंबर को पंचकूला में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल: डीसीपी की अपील, विज्ञान को जानने का सुनहरा मौका, जरुर जाए छात्र पंचकूला( ईशान राय):-आज पंचकूला पुलिस बरवाला स्थित पीएम श्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छात्राओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जिसमे पुलिस टीम द्वारा छात्राओ को महिला एवं बाल विरुद्ध अपराधो के बारे में जानकारी, आत्मरक्षा प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा, बाल विवाह को लेकर जागरुक किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंची डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता का छात्राओं ने तिलक लगाकार स्वागत किया।डीसीपी ने छात्राओ के साथ खुलकर संवाद किया, उनको ‘धाकड़ बनने’ और अपने अधिकारों को समझकर निडरता से आगे बढ़ने के लिए कहा साथ ही उनकी जिज्ञासाओं को सुना और उन्हें निडर, जागरूक तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही बताया कि मां-बाप से बड़ा कोई दोस्त नही, उनसे दिल-खोलकर अपने मन की बात बताओ, अच्छा-बुरा अनुभव साझा करो, सीख अच्छी ही मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान जब डीसीपी ने छात्राओं से संवाद किया तो एक बच्ची ने बताया कि उसने कभी पुलिस स्टेशन नहीं देखा। इस पर डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने तत्काल इच्छुक छात्राओं के लिए पुलिस थाने के विशेष दौरे की घोषणा की, ताकि छात्राएं नजदीक से पुलिस की कार्यशैली, शिकायतों की प्रक्रिया और पुलिस द्वारा विभिन्न मामलों में की जाने वाली कार्रवाई के तरीकों को समझ सकें। डीसीपी ने जिला के सभी विद्यार्थियो खासकर कक्षा 10वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियो से अपील की कि वे 6 से 9 दिसंबर को पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित दशहरा ग्राउंड में आयोजित होने वाले 11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में अवश्य भाग लें, यह आपका सौभाग्य है कि इस बार यह फेस्टिवल पंचकूला में आयोजित हो रहा है। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सीखने का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा। कार्यक्रम में सब-इंस्पेक्टर रामू स्वामी ने भी प्रेरणादायक शब्दों से छात्राओं में उत्साह भरा और उन्हें बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और ऑनलाइन ठगी से बचने के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके अलावा एएसआई शिवानी और महिला मुख्य सिपाही आशा ने छात्राओं को आत्मरक्षा के विभिन्न गुर सिखाए तथा उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बाल विवाह न करने और इसकी रोकथाम के लिए हर संभव प्रयास करने की शपथ दिलाई गई। साथ ही महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़े कानून, जैसे—पॉक्सो एक्ट, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम आदि के बारे में जानकारी देकर इनके पालन की शपथ भी दिलवाई गई। इस अवसर पर बरवाला चौकी इंचार्ज गुरपाल सिंह, जिला युवा विकास संगठन की टीम से डॉ. मोनिका, स्कूल प्रशासन तथा लगभग 500 छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को जागरूक, सक्षम और सुरक्षित बनाना रहा, जिसे सभी ने बेहद सकारात्मक रूप से सराहा।

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इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल: पंचकूला पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंध

दशहरा ग्राउंड हाई-टेक सुरक्षा जोन में तब्दील 2 डीसीपी, 5 एसीपी, 13 इंस्पेक्टर के अलावा 420 पुलिसकर्मी संभाल रहे सुरक्षा का जिम्मा परिसर के अंदर 328 कैमरे, जबकि बाहर 58 कैमरे, 10 सोलर कैमरा से भी निगरानी 3 कोऑर्डिनेशन रूम बनाए, 3 ईआरवी, 2 पीसीआर, 6 राइडर आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में छात्र, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और आम नागरिक इस आयोजन में हो रहे शामिल पंचकूला/ 6 दिसंबर(ईशान राय):- सेक्टर-5 स्थित दशहरा ग्राउंड में 6 से 9 दिसंबर तक आयोजित हो रहे 11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल के सुचारु संचालन और आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पंचकूला पुलिस ने पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त किए हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को बहु-स्तरीय बनाते हुए पूरे परिसर को हाई-टेक सर्विलांस और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के साथ कवर किया गया है। फेस्टिवल स्थल और आसपास के क्षेत्रों में कुल 417 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा की निगरानी के लिए तैनात किया गया है। इनमें डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता, डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक मनप्रीत सिंह सूदन, 5 एसीपी, और 13 इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी स्वयं स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सुरक्षा तंत्र को दो हिस्सों में बांटा गया है, जिसके तहत कुल 420 पुलिसकर्मियों में से 320 पुलिसकर्मी फ़ेस्टिवल परिसर के अंदर और 100 पुलिसकर्मी बाहरी क्षेत्रों, पार्किंग और एंट्री-एग्ज़िट ज़ोन में सुरक्षा दायित्व संभाल रहे हैं। डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने बताया कि पूरे आयोजन स्थल को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। परिसर के अंदर 328 कैमरे, जबकि बाहर 58 कैमरे लगाए गए हैं, जो लगातार गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। बाहरी क्षेत्र में 10 सोलर कैमरे भी स्थापित किए गए हैं। सुरक्षा संचालन को बेहतर समन्वय देने के लिए 3 कोऑर्डिनेशन रूम बनाए गए हैं, जहां से सभी गतिविधियों पर रियल-टाइम निगरानी रखी जा रही है। भीड़ की स्थिति को देखते हुए मौके पर 3 ईआरवी, 6 राइडर, और 2 विशेष पीसीआर वाहनों को तैनात किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने कहा कि 11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल की मेजबानी करना पंचकूला के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में छात्र, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और आम नागरिक इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने सुरक्षा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तैयारी की है। उन्होंने आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि सभी प्रतिभागी, विशेषकर छात्र, इस वैज्ञानिक महाकुंभ से अधिकतम लाभ उठाएं।उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की सर्विलांस के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो।

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देसी पिस्टल के साथ नसरुद्दीन पकड़ा गया नालासोपारा में

मुंबई/नालासोपारा इलाके में वसई क्राइम ब्रांच ने एक 31 साल के युवक नसरुद्दीन खान को देसी पिस्टल और दो जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। हथियार की कीमत महज 50 हजार रुपये बताई गई, लेकिन जिस आसानी से यह हथियार उपलब्ध हो रहा है, उसकी कीमत समाज के लिए लाखों-करोड़ों में आंकी जा सकती है। सप्लायर कृष्णा चव्हाण भी पकड़ा गया। आरोपी पर पहले से दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। मामला शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज हुआ और जांच जारी है। यह कोई पहली घटना नहीं है। महाराष्ट्र हो या उत्तर प्रदेश, बिहार हो या राजस्थान , देसी कट्टा, देसी पिस्तौल अब गांव-कस्बों से लेकर मेट्रो शहरों तक आम हो चुके हैं। एक तरफ पुलिस इसे “सफल कार्रवाई” बताती है, दूसरी तरफ हर हफ्ते इसी तरह की खबरें आती हैं। सवाल यह है कि क्या हम सिर्फ पुलिस की पीठ थपथपाकर अपना कर्तव्य पूरा कर रहे हैं या असल बीमारी की जड़ तक जाना चाहते हैं! देसी हथियारों का कारोबार इतना सस्ता और इतना आसान क्यों हो गया है! मुंगेर, बुरहानपुर, मेरठ, अलीगढ़, खरड़ ,ये नाम अब अवैध हथियार उद्योग के पर्याय बन चुके हैं। एक छोटा सा वर्कशॉप, कुछ लोहे की रॉड, पुराने स्कूटर के पार्ट्स और यूट्यूब ट्यूटोरियल, बस देसी पिस्तौल तैयार! कीमत 15-20 हजार से शुरू, 50-60 हजार तक! डिलीवरी कोरियर से, पेमेंट UPI से। पुलिस पकड़ती है तो नया सप्लायर तैयार। इसकी मांग कौन पैदा कर रहा है! छोटे-मोटे अपराधी जो बैंक डकैती नहीं, मोहल्ले की रंगदारी करते हैं ,जमीन के विवाद सुलझाने वाले “बाहुबली! प्रेम प्रसंग में बदला लेने वाले युवा ! और सबसे डरावनी बात! वो किशोर जो सोशल मीडिया पर “गैंगस्टर लुक” दिखाने के लिए हथियार खरीदते हैंजब तक हथियार की “डिमांड” रहेगी, सप्लाई अपने आप रास्ता बना लेगी। पुलिस का रोल सराहनीय है, लेकिन यह आग बुझाने जैसा है , बाल्टी से पानी डाल रहे हैं जबकि जंगल की आग लगी है। असली इलाज चाहिए तो जमीनी स्तर पर काम करना होगा! सप्लाई चेन को तोड़ना ,अवैध वर्कशॉप पर लगातार छापे, कच्चा माल (लोहा, बारूद) की सप्लाई रोकना ! मांग को खत्म करना , समाज में हिंसा का ग्लैमराइजेशन बंद करना, फिल्मों-गीतों में बंदूक को “मर्दानगी” का प्रतीक बनाना बंद करना ! युवाओं को रोजगार और सम्मानजनक जीवन देना ,जब हाथ में हथियार की बजाय काम होगा, तब बंदूक की जरूरत खुद कम हो जाएगीनालासोपारा की यह गिरफ्तारी एक छोटी जीत है। लेकिन अगर हम हर बार सिर्फ ताली बजाकर रह गए तो कल कोई दूसरा नसरुद्दीन, कोई दूसरा कृष्णा फिर पकड़ा जाएगा। और शायद तब बहुत देर हो चुकी होगी। समाज को जगना होगा। पुलिस अकेली नहीं लड़ सकती। हमारे मोहल्ले, हमारे स्कूल-कॉलेज, हमारे घर , यहीं से बदलाव शुरू करना होगा।वरना देसी पिस्तौल की यह खबरें कभी खत्म नहीं होंगी। बस नाम और जगह बदलती रहेंगी।

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ठाणे में प्रेम प्रसंग के चलते महिला की हत्या!

डिलीवरी बॉय की माँ को ऑफिस टॉयलेट के पास पत्थर से कुचलकर मार डाला मुंबई/ठाणे के लोकमान्य नगर इलाके में आज सुबह उस वक्त सनसनी फैल गई जब एक 42 वर्षीय मजदूर ने अपनी प्रेमिका को सरेआम पत्थर के फर्श से सिर कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। मृतका की उम्र 50 वर्ष थी और वह एक डिलीवरी बॉय की मां थीं। वर्तकनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के अनुसार, मृतका महिला की उम्र 50 थी । शिकायत उनके बेटे, उम्र 27 साल, डिलीवरी बॉय ने दर्ज कराई है! आरोपी की पहचान मनोज (42, पेशा बिगारी, लोकमान्य नगर क्षेत्र का ही निवासी ठाणे के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, महिला और मनोज के बीच काफी समय से अवैध प्रेम प्रसंग चल रहा था। आज सुबह करीब 10 बजे एक ऑफिस के पास सार्वजनिक टॉयलेट के निकट दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया। गुस्साए मनोज ने पास पड़े पत्थर के फर्श के बड़े टुकड़े को उठाया और महिला के सिर पर जोरदार वार किया। एक ही वार में महिला का सिर बुरी तरह कुचल गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के समय इलाके में मौजूद कुछ लोग दौड़े, लेकिन तब तक मनोज फरार होने की कोशिश कर रहा था। स्थानीय लोगों ने ही उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी से गहन पूछताछ शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया मामला प्रेम प्रसंग में हुए विवाद का लग रहा है, लेकिन पुलिस अन्य कोणों से भी जांच कर रही है। इलाके में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोग बता रहे हैं कि मनोज और महिला को अक्सर साथ देखा जाता था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि बात हत्या तक पहुंच जाएगी। केस की आगे की जांच एसआई संजय पाटिल कर रहे हैं।

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यूपी में रक्षक अरुण राय ने खुद को मार डाला ! क्योंकि रक्षा करने वाला कोई नहीं था !

जालौन(उत्तर प्रदेश)। जन संख्या के हिसाब से भारत देश का सबसे बड़ा राज्य है उत्तर प्रदेश, और जहां कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता बताने वाली सरकार सत्ता में है, वहां पुलिस तंत्र की स्थिति कितनी दयनीय है, इसका ताजा प्रमाण जालौन जिले की घटना है। कुठौंद थाने के प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार राय ने 5-6 दिसंबर 2025 की देर रात अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। संत कबीर नगर के इस मूल निवासी ने, जो समाज की रक्षा के लिए तैनात थे, खुद अपनी जिंदगी क्यों छोड़ दी! यह सवाल न केवल उनके परिवार को सालता है, बल्कि पूरे पुलिस विभाग और सरकारी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। यह घटना कोई अपवाद नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक समस्या का हिस्सा है, जहां पुलिसकर्मी तनाव, अवसाद और सरकारी उदासीनता के शिकार हो रहे हैं। क्या योगी आदित्यनाथ सरकार, जो ‘बुलडोजर राज’ और ‘कानून का राज’ का दावा करती है, अपने ही रक्षकों की रक्षा करने में विफल हो रही है! घटना की हृदयविदारक सच्चाई है यह एक अधिकारी का अंतिम फैसला! यह दुखद घटना कुठौंद थाने में घटी, जहां गोली की आवाज ने साथी सिपाहियों को दौड़ाया। अरुण कुमार राय खून से लथपथ मिले। उन्हें तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, फिर उरई मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार और अपर पुलिस अधीक्षक प्रदीप कुमार वर्मा मौके पर पहुंचे, लेकिन जांच के बावजूद मौत को टाला नहीं जा सका। परिवार को सूचना दी गई, लेकिन अब उनके लिए जिंदगी का क्या मतलब बचा! यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं; यह पुलिसकर्मियों के दैनिक संघर्ष की झलक है। लंबी ड्यूटी, पारिवारिक दबाव, और कार्यस्थल की चुनौतियां उन्हें अंदर से तोड़ रही हैं। हालांकि, यह घटना अकेली नहीं है। हाल ही में सीतापुर में पीएसी कर्मी हिमांशु ने ड्यूटी के दौरान आत्महत्या की! कानपुर देहात में युवक और किशोरी के शव मिले, जिन्हें पुलिस आत्महत्या मान रही है। रामपुर में सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन की मौत को पुलिस आत्महत्या बता रही है, जबकि परिवार हत्या का आरोप लगा रहा है। ये घटनाएं बताती हैं कि उत्तर प्रदेश में आत्महत्याओं का सिलसिला थम नहीं रहा। आंकड़ों का काला सच,बढ़ती आत्महत्याएं और सरकारी दावे अलग ही रहती है! राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े इस समस्या की गहराई दर्शाते हैं। 2023 में भारत में कुल 1,71,418 ,आत्महत्याएं दर्ज हुईं, जो 2022 से 0.3% अधिक हैं, 2022 में यह संख्या 1,71,000 थी, जो 2018 से 27% बढ़ी है।6cc301 उत्तर प्रदेश में आत्महत्याओं का हिस्सा देश का 10% है, जबकि राज्य की आबादी 17% है। पुलिसकर्मियों में यह समस्या और गंभीर है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों,(सीएपीएफ) में सीआरपीएफ में 2018 में 36 आत्महत्याएं हुईं, जो 2021 में 57 पहुंच गईं। सीआईएसएफ में 2024 में आत्महत्या दर 9.87 प्रति लाख हो गई, जो 2023 के 16.98 से कम है, लेकिन राष्ट्रीय दर 12.4 प्रति लाख से ऊपर है। उत्तर प्रदेश पुलिस दावा करती है कि जनवरी 2023 से अप्रैल 2025 तक 875 आत्महत्याओं को रोका गया।e96cbd यह सराहनीय है, लेकिन पर्याप्त नहीं। 2019 में यूपी में कम से कम 19 पुलिसकर्मियों ने आत्महत्या की। के बीच भारत में 597 पुलिस अधिकारियों ने जान दी। प्रमुख कारण: पारिवारिक समस्याएं (31.9%), बीमारी, कार्यस्थल तनाव, प्रेम प्रसंग। सरकार ने 2019 में योजना बनाई, मेटा के साथ सहयोग किया, लेकिन क्या यह प्रभावी है! सीआईएसएफ की तरह सक्रिय प्रयास यूपी पुलिस में क्यों नहीं!कारणों की जड़ को ज्ञानी समझना नही चाहते है,वो बड़े लोग है! सरकारी उदासीनता और सिस्टम की कमियां ही मूल कारण है।पुलिसकर्मी 12-16 घंटे की ड्यूटी, कम वेतन, राजनीतिक हस्तक्षेप, भ्रष्टाचार और संसाधनों की कमी से जूझते हैं। कम स्टाफ, पुराने हथियार, कोई काउंसलिंग,ये सब अवसाद को बढ़ावा देते हैं। हथियार आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य सहायता नहीं। परिणाम,जहर, फांसी, जलना, गोली। सरकार राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को मजबूत क्यों नहीं करती! उत्तराखंड, दादरा एवं नगर हवेली, यूपी में आत्महत्या दर सबसे तेज बढ़ी। ‘स्टेटस ऑफ पुलिसिंग इन इंडिया रिपोर्ट 2025’ में यूपी पुलिस की स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। योगी सरकार कानून-व्यवस्था की चैंपियन है, लेकिन पुलिस सुधार कहां!राजनीतिक प्राथमिकताएं चुनाव, रैलियां हैं; पुलिसकर्मी आंकड़े बनकर रह जाते हैं। टूटता विश्वास और परिवारों का दर्द ,यह समस्या पुलिस तक सीमित नहीं है यह समाज पर असर डालती है। अच्छे अधिकारी खोने से अपराध बढ़ता है, विश्वास टूटता है। पुलिस की छवि पहले से खराब,भ्रष्टाचार, राजनीतिक दासता। अरुण कुमार के परिवार का दर्द कौन सुनेगा [ और सुनने वाला कौन है,होता कौन है ] बच्चे बिना पिता, माता-पिता बिना सहारे। सीतापुर की घटना में परिजनों का हड़कंप। आम आदमी सोचता है,अगर रक्षक असुरक्षित, तो हम सुरक्षित कैसे! मानसिक!स्वास्थ्य अब राष्ट्रीय संकट है। महिलाओं, युवाओं, किसानों में आत्महत्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन पुलिस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में उपेक्षा क्यों !बदलाव की जरूरत ज्ञानी सरकार, ठोस कदम और सामाजिक जागरूकता की! सरकार को पुलिस बैरकों में काउंसलिंग सेंटर, नियमित चेक-अप, कार्यभार कम करना अनिवार्य बनाना चाहिए। सीआईएसएफ की तरह 40% कमी लाई जा सकती है। राष्ट्रीय स्तर पर नीति, एनसीआरबी डेटा पर आधारित सुधार। समाज को भी जागना होगा! पुलिसकर्मियों को सम्मान दें, उनके दर्द समझें। अरुण कुमार राय की मौत चेतावनी है। अगर सरकार नहीं जागी, तो त्रासदियां बढ़ेंगी। श्रद्धांजलि देते हुए मांग! पुलिस सुधार लागू करो, मानसिक स्वास्थ्य प्राथमिकता बनाओ। अन्यथा, समाज का यह चक्रव्यूह टूटेगा नहीं, बल्कि मजबूत होगा। – Indra yadav/Correspondent – Ishan Times

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अब हवाई यात्रा भी आफत!

वैश्विक विमानन उद्योग की सबसे बड़ी परीक्षा संजय राय, हवाई यात्रा ने दुनिया को सिकोड़ा है, सीमाओं को छोटा किया है और अर्थव्यवस्था को गति दी है—लेकिन क्या यह उद्योग उतना सुरक्षित और मजबूत है, जितना हम रोज़ मान लेते हैं? एयरबस के ए320 फैमिली विमानों में आए हालिया संकट ने साबित कर दिया है कि उन्नत तकनीक से लैस यह क्षेत्र भीतर से कितना नाजुक है। 2025 की यह घटना न सिर्फ एक सॉफ्टवेयर त्रुटि का मामला है, बल्कि पूरी वैश्विक हवाई व्यवस्था की संरचनात्मक कमियों पर बड़ा सवाल भी खड़ा करती है। ए320 संकट: एक छोटी चिंगारी से वैश्विक हलचल नवंबर 2025 में एयरबस ने स्वीकार किया कि ए320 फैमिली के विमानों में एक गंभीर तकनीकी खामी है। जांच में सामने आया कि तीव्र सौर विकिरण के कारण फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम का महत्वपूर्ण डेटा क्षतिग्रस्त हो सकता है—यानी विमान की सुरक्षा सीधे जोखिम में आ सकती है। दुनिया भर के लगभग 6,000 विमान प्रभावित घोषित हुए और तत्काल सॉफ्टवेयर अपडेट अनिवार्य कर दिया गया। परिणाम साफ थे—● हजारों उड़ानें रद्द● यात्री दुनिया भर के एयरपोर्ट्स पर फंसे● एयरलाइनों को अरबों का नुकसान● और विमानन कंपनियों पर बढ़ता दबाव जब तक दिसंबर की शुरुआत आई, एयरबस ने कहा कि ज्यादातर विमान अपडेट हो चुके हैं, लेकिन अभी भी “जोखिम की छाया” पूरी तरह नहीं हटी है। इसके ठीक बाद, कुछ विमानों में फ्यूज़लेज पैनल की गुणवत्ता संबंधी खामी पाई गई। यह सीमित संख्या का मामला था, पर इसने यह साफ कर दिया कि तकनीकी गड़बड़ियों की श्रृंखला खत्म नहीं हुई है। उद्योग की असली कमजोरी: दो कंपनियों के भरोसे दुनिया दुनिया के 90% से ज्यादा व्यावसायिक विमान सिर्फ दो कंपनियाँ—एयरबस और बोइंग—बनाती हैं। ऐसे में इनमें से किसी एक की गलती पूरी वैश्विक उड़ान व्यवस्था के लिए खतरा बन जाती है। ● 2019 में बोइंग 737 मैक्स का संकट● 2025 में एयरबस ए320 का संकट यानी, दो कंपनियों की तकनीकी त्रुटियाँ—पूरी दुनिया को जकड़ लेती हैं। तकनीकी निर्भरता का साया आधुनिक विमान अब उड़ते कम और “सॉफ्टवेयर” के भरोसे चलते ज्यादा हैं। सेंसर, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स पर बेतहाशा निर्भरता ने उन्हें जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न नई चुनौतियों के प्रति बेहद संवेदनशील बना दिया है। ● सौर विकिरण● चुंबकीय तूफान● साइबर जोखिम● आपूर्ति श्रृंखला का दबाव एक छोटी चूक भी वैश्विक संकट पैदा कर सकती है—ठीक वैसे ही जैसे इस बार हुआ। नियामक एजेंसियों की भूमिका: क्या निगरानी कमजोर पड़ रही है? ईएएसए, एफएए और भारत की डीजीसीए जैसी एजेंसियाँ सुरक्षा मानकों की रक्षा करती हैं। एयरबस मामले में ईएएसए ने तेज़ी से आदेश जारी किए, लेकिन बड़ा सवाल यह है—क्या यह स्थिति पहले टाली जा सकती थी? 737 मैक्स दुर्घटनाओं के बाद एफएए पर भरोसा करने की आलोचना हुई थी। यह घटनाएँ दिखाती हैं कि ● स्वतंत्र जांच● नियमित ऑडिट● उभरते तकनीकी जोखिमों की पहचान इन सभी पर और सख़्ती की ज़रूरत है। भारत में डीजीसीए के लिए भी यह समय है कि वह स्थानीय एयरलाइनों पर मानकों की निगरानी और अधिक मजबूत करे, खासकर तब जब भारतीय हवाई यात्रा दुनिया में सबसे तेज़ बढ़ रही है। एयरलाइंस भी जिम्मेदार—सिर्फ लागत कम करने की दौड़ नहीं एयरलाइंस सिर्फ ग्राहक नहीं, बल्कि सुरक्षा की अंतिम कड़ी हैं। अमेरिकी एयरलाइंस ने तत्काल कदम उठाए, लेकिन भारतीय संदर्भ में— इंडिगो और स्पाइसजेट के लिए बड़ा सबक भारतीय एयरलाइंस ए320 विमानों पर भारी निर्भर हैं। ऐसे में— ● बेड़े का विविधीकरण● स्वायत्त तकनीकी जाँच● पायलट प्रशिक्षण● और यात्रियों के साथ पारदर्शी संचार ज़िम्मेदारी का हिस्सा है। लागत बचाने की होड़ में सुरक्षा को पीछे नहीं धकेला जा सकता। यह समझौता भविष्य में महंगा साबित होगा। भविष्य का रास्ता: मजबूत उद्योग, सुरक्षित उड़ान एयरबस संकट ने एक बड़ी चेतावनी दी है—हवाई यात्रा जितनी सुविधाजनक है, उतनी ही जोखिम भरी भी। तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय दबावों ने इस उद्योग को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहां हर कदम सावधानी से उठाना होगा। सरकारों को चाहिए— ● अनुसंधान में निवेश● मौसम–सौर विकिरण अध्ययन● स्मार्ट सुरक्षा सिस्टम● और उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने की रणनीति क्योंकि उड़ान सिर्फ एक यात्रा नहीं, भरोसे की ऊँचाई है—और उसमें गिरावट की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

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पंचकूला करेगा 11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) 2025 की मेजबानी- उपायुक्त

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी 6 दिसंबर को करेंगे इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल का उद्घाटन सेक्टर-5 स्थित दशहरा ग्राउंड मे आयोजित समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों छात्र, युवा शोधकर्ता, नीति निर्माता और विज्ञान प्रेमी लेंगे भाग 40 से 50 हजार लोग इस आयोजन के बनेंगे साक्षी पंचकूला, 5 दिसंबर(संजय राय): पंचकूला 6 दिसंबर से 9 दिसंबर तक 11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) 2025 की मेजबानी करेगा। सेक्टर-5 स्थित दशहरा ग्राउंड में आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों छात्र, युवा शोधकर्ता और विज्ञान प्रेमी भाग लेंगे। उपायुक्त सतपाल शर्मा ने यह जानकारी आज कार्यक्रम स्थल पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में दी। इस अवसर पर विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. शिव कुमार शर्मा, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र राव, नगराधीश जागृति, विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सचिव प्रवीण रामदास तथा आईआईटीएम के समन्वयक डॉ. अनुप महाजन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी 7 दिसंबर को आयोजित प्रथम सत्र को संबोधित करेंगे इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल का उद्घाटन 6 दिसंबर को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा किया जाएगा। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी 7 दिसंबर ,रविवार को आयोजित प्रथम सत्र को संबोधित करेंगे। हरियाणा के राज्यपाल श्री अशीम कुमार घोष 9 दिसंबर को समापन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। देशभर से आने वाले छात्रों के रहने-खाने, परिवहन तथा कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने की समुचित व्यवस्था की गई है उपायुक्त ने कहा कि यह पंचकूला के लिए गर्व की बात है कि भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए पंचकूला को चुना है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं। देशभर से आने वाले छात्रों के रहने-खाने, परिवहन तथा कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने की समुचित व्यवस्था की गई है। पंचकूला के स्कूली छात्रों और विज्ञान में रुचि रखने वाले नागरिकों को भी इस आयोजन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, ताकि वे विज्ञान की नवीनतम प्रगति और शोध कार्यों से रूबरू हो सकें। इस वर्ष इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल विज्ञान से समृद्धि – आत्मनिर्भर भारत थीम पर होगा आयोजित आईआईटीएम पुणे के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र राव ने बताया कि इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल का आयोजन पिछले 10 वर्षों से किया जा रहा है और इसका 11वां संस्करण इस वर्ष पंचकूला में 6 से 9 दिसंबर तक आयोजित होगा। इस वर्ष का थीम “विज्ञान से समृद्धि – आत्मनिर्भर भारत” रखा गया है। इसके तहत विभिन्न सब-थीमों पर इंटरएक्टिव सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि विज्ञान और तकनीक प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में कैसे सहायक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन के दौरान छात्र देशभर से आए विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर सकेंगे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पा सकेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि देश के विभिन्न प्रतिष्ठित शोध संस्थान आमजन के लिए प्रदर्शनी में स्टॉल लगाएंगे, जिनका अवलोकन कोई भी नागरिक कर सकता है। उत्सव का उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रसार और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अग्रसर प्रयास विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. शिव कुमार शर्मा ने बताया कि लगभग 40 से 50 हजार लोग इस आयोजन के साक्षी बनेंगे। विद्यार्थियों को इसरो एवं डीआरडीओ के वैज्ञानिकों से मिलने–जुलने और बातचीत करने का अवसर मिलेगा। फेस्टिवल के दौरान समुद्री यान से संबंधित एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है। उन्होंने बताया की समारोह में प्रथम दिन भारतीय अंतरिक्ष यात्री सुभांशु शुक्ला के साथ पॉपुलर टॉक एवं इंटरेक्शन का आयोजन होगा साइंस फेस्टिवल के चारों दिन विभिन्न विषयों पर इंटरएक्टिव सत्र होंगे। 6 दिसंबर को 11:30 से 12:30 बजे तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री सुभांशु शुक्ला के साथ पॉपुलर टॉक एवं इंटरेक्शन का आयोजन होगा। इसी प्रकार 7, 8 और 9 दिसंबर को फायर साइड चैट, ब्लू इकोनॉमी, इंटरनेशनल ओलंपियाड मीट, साइंस–टेक्नोलॉजी–डिफेंस–स्पेस एक्सपो, साइंस सफारी, हैकेथॉन, वुमन इन साइंस, न्यूक्लियर एनर्जी आदि विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे।

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