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पंकज चौधरी उत्तरप्रदेश के भाजपाध्यक्ष होने की संभावना

भाजपा ने आख़िरकार UP का प्रदेश अध्यक्ष फ़ाइनल कर दिया। भूपेंद्र चौधरी (जाट )इस वक्त प्रदेश अध्यक्ष हैं और पंकज चौधरी कुर्मी बिरादरी से आते हैं। भूपेन्द्र चौधरी को UP BJP का अध्यक्ष तब बनाया गया था जब जाट किसान आंदोलन को लेकर नाराज चल रहे थे। जाट वोटर को ख़ुश करने के लिए भूपेन्द्र चौधरी को प्रेसीडेंट बनाकर लाया गया था।इस बार कुर्मी वोटर को ख़ुश करने के लिये पंकज चौधरी को प्रेसीडेंट की कमान दी जा रही है। 2024 के लोक सभा चुनाव में कुर्मी वोटर अखिलेश यादव के साथ चले गये और सात कुर्मी MP जीत गये। BJP को कुर्मी वोटरों ने लोक सभा में बड़ा झटका दिया। 2027 के विधान सभा चुनाव में कुर्मी वोट को अपनी तरफ़ खींचने का बड़ा दाँव हैं पंकज चौधरी। BJP को लगता है कि सात बार के सांसद पंकज चौधरी के सेनापति बनने से कुर्मी भागकर BJP के साथ वापस आ जायेगा। वैसे कुर्मी 2022 के विधान सभा चुनाव से ही सपा की तरफ़ खिसक गया था। लेकिन 24 में पूरी तरह से वह सपा में चला गया। BJP पंकज के जरिये कुर्मी वोटर अपनी तरफ़ खींच सकती है। पंकज चौधरी बड़े कुर्मी नेता हैं और अपनी बिरादरी में उनकी काफ़ी पैठ है। सौम्य और सरल हैं यह भी BJP को फ़ायदा देगा।पंकज चौधरी कल सुबह की फ़्लाईट से लखनऊ पहुँच रहे हैं। उनका नामांकन फ़ार्म दिल्ली में ही तैयार हो रहा है प्रस्तावक के तौर पर मंत्री कमलेश पासवान दिल्ली में ही हैं। लखनऊ से प्रस्तावक विजय बहादुर पाठक और अश्वनी त्यागी भी दिल्ली गये हैं नामांकन पत्र पर प्रस्ताव करने के लिए। पंकज चौधरी अकेले नामांकन भरेंगे। बधाई पंकज चौधरी जी को।

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पंचकूला में यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के मामले में आरोपी 72 घंटे में गिरफ्तार, भेजा जेल

पंचकूला/ 9 दिसंबर(ईशान राय) :- पंचकूला पुलिस ने एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण और उसे ब्लैकमेल करने के गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए, घटना के एक आरोपी को तीन दिन के भीतर गिरफ्तार कर लिया है।यह मामला चंडीमंदिर थाने में 5 दिसंबर को एक पीड़िता की मां द्वारा दर्ज कराया गया था। अपनी शिकायत में महिला ने बताया कि वे परिवार के साथ पंचकूला में रहते है और उसके पति के दोस्त के बेटे ने उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए, जून से सितंबर माह के बीच उनकी 17 वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ कथित तौर पर विश्वासघात कर गलत काम किया। घटना के समय पीड़िता की आयु 17 वर्ष थी, हालांकि शिकायत दर्ज होने तक वह 18 वर्ष की हो चुकी थी। शिकायत के अनुसार आरोपी ने पीड़िता के निजी फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी थी जिसके डर से किशोरी इतने समय तक चुप रही। यह स्थिति तब सामने आई जब किशोरी को शारीरिक पीड़ा हुई और उसने अपनी मां को इस बारे में बताया। यह भी सामने आया है कि पीड़िता और आरोपी दोनों के परिवार मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं। डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने बताया कि शिकायत के आधार पर तुरंत पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के साथ-साथ धारा 351(3) और 77 के तहत मामला दर्ज किया गया। जिसमें मामले की जांच कर रही महिला एएसआई निर्दोष ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए शिकायत दर्ज होने के मात्र तीन दिन के अंदर यानी 8 दिसंबर को आरोपी को पंचकूला से गिरफ्तार कर लिया। किशोरी का मेडिकल परीक्षण करवाया गया है। डीसीपी ने आगे बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी को आज न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पीड़िता की काउंसलिंग करवाई जा रही है। साथ ही अपील भी की है कि धमकी व दबाव मे आए बिना ऐसे गंभीर मामलो की पुलिस या परिवार को तुरंत सूचना दे ताकि तुरंत कार्रवाई की जा सके।

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भदोही में ऑपरेशन में देरी, खून नहीं दिया, रेफर भी नहीं किया,प्रसूता को हुई मौत

उत्तर प्रदेश! भदोही जिले के पार्वती हॉस्पिटल में हुई एक प्रसूता की मौत ने न केवल अस्पताल प्रबंधन को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों के आरोपों के बीच, यह घटना ग्रामीण भारत में व्याप्त स्वास्थ्य संकट की एक और मिसाल बनकर उभरी है, जहां सरकारी निगरानी की कमी और निजी अस्पतालों की मनमानी गरीब परिवारों को मौत के मुंह में धकेल रही है। विशेषज्ञों का दावा है कि ऐसी घटनाएं मातृ मृत्यु दर (MMR) को कम करने के सरकारी दावों की पोल खोलती हैं, और अधिकारियों की उदासीनता इस समस्या को और गहरा बना रही है। पूरा मामला – एक मौत जो सिस्टम की विफलता का प्रतीक बन गईमंगलवार देर रात, भदोही के पार्वती हॉस्पिटल में भर्ती एक प्रसूता महिला की प्रसव के दौरान मौत हो गई। परिजनों का दावा है कि अस्पताल ने ऑपरेशन में देरी की, खून की कमी का हवाला देकर परिवार को खुद व्यवस्था करने को कहा, और स्थिति बिगड़ने पर समय से रेफर नहीं किया। हालांकि नवजात शिशु को बचाया गया और उसका इलाज जारी है, लेकिन इस मौत ने स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया है।यह घटना कोई अलग-थलग नहीं है, यह उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्वास्थ्य प्रणाली की जड़ों में सड़न को दर्शाती है।भारत का वर्तमान MMR (88) वैश्विक औसत (लगभग 197-223) से काफी कम है। भारत ने मातृ मृत्यु दर में भारी गिरावट देखी है, जो वैश्विक औसत गिरावट से कहीं अधिक है। हालांकि, भारत का लक्ष्य सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2030 तक MMR को 70 से नीचे लाना है!जो वैश्विक औसत से काफी ऊपर है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में निजी अस्पतालों पर निर्भरता बढ़ रही है, लेकिन सरकारी अस्पतालों की कमी और गुणवत्ता की गिरावट इस संकट को बढ़ावा दे रही है। भदोही जैसे जिलों में, जहां सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं अपर्याप्त हैं, निजी अस्पताल अक्सर गरीब मरीजों को ‘कैश काऊ’ के रूप में देखते हैं, जिससे लापरवाही के मामले बढ़ते जा रहे हैं। परिजनों के आरोप, अस्पताल की लापरवाही से आगे, सिस्टम की नाकामी!/मृतका के परिवार ने अस्पताल पर निम्न आरोप लगाए हैं,- ऑपरेशन में अनावश्यक देरी, जिससे रक्तस्राव बढ़ा! खून की व्यवस्था के लिए कोई सहायता न प्रदान करना, जबकि अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा का दावा किया जाता है। मरीज की हालत बिगड़ने पर तुरंत उच्च स्तरीय अस्पताल में रेफर न करना। पूर्व में भी अस्पताल की लापरवाही के कई मामले, जैसे स्टाफ द्वारा अनुचित व्यवहार और छेड़छाड़ के आरोप।परिजनों का दर्द बयां करते हुए एक सदस्य ने कहा, “हम गरीब हैं, इसलिए हमारी जान की कोई कीमत नहीं? अधिकारियों को पता है कि ऐसे अस्पताल कैसे चल रहे हैं, फिर भी कुछ नहीं करते।” यह आरोप न केवल अस्पताल पर हैं, बल्कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और जिला प्रशासन पर भी, जो नियमित निरीक्षण और शिकायतों पर कार्रवाई में कथित रूप से ढिलाई बरतते हैं।अधिकारियों की ‘क्लास’, निगरानी की कमी और जवाबदेही का अभावइस घटना ने स्वास्थ्य अधिकारियों की कार्यशैली पर सीधा हमला किया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि CMO कार्यालय को पार्वती हॉस्पिटल की पूर्व शिकायतों की जानकारी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। क्या जिला स्वास्थ्य विभाग नियमित ऑडिट करता है? क्या निजी अस्पतालों के लाइसेंस की समीक्षा समय पर होती है? ये सवाल अब जोर पकड़ रहे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाएं कागजों पर तो प्रभावी हैं, लेकिन ग्रामीण स्तर पर क्रियान्वयन में भारी खामियां हैं। एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “अधिकारी अस्पतालों से ‘समझौते’ करते हैं, जिससे लापरवाही बढ़ती है। मातृ स्वास्थ्य में रक्तस्राव (hemorrhage) सबसे बड़ा कारण है, जो 25% मौतों के लिए जिम्मेदार है, लेकिन ब्लड बैंक की कमी और इमरजेंसी प्रोटोकॉल की अनदेखी अधिकारियों की नाकामी है।”राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के दिशानिर्देशों के बावजूद, ग्रामीण इलाकों में प्रसव केंद्रों की कमी है। भदोही में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों की कमी 30% है, जिससे मरीज निजी अस्पतालों की ओर रुख करते हैं। अधिकारियों पर आरोप है कि वे राजनीतिक दबाव में जांच को दबा देते हैं, जिससे दोषी बच निकलते हैं। यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लापरवाही साबित होती है, तो क्या CMO और जिला मजिस्ट्रेट जवाबदेह होंगे! स्थानीय नागरिकों की मांग है कि उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जाए, और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो।स्वास्थ्य समस्या की गहराई,मातृ स्वास्थ्य संकट का व्यापक परिदृश्य! यह मौत मातृ स्वास्थ्य की बड़ी तस्वीर का हिस्सा है। विश्वनस्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित 80% से अधिक मौतें रोकी जा सकती हैं, यदि समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सहायता मिले।प्रमुख समस्याएं!रक्तस्राव और एनीमिया,ग्रामीण महिलाओं में एनीमिया की दर 50% से अधिक है, जो प्रसव में जोखिम बढ़ाता है। सरकारी कार्यक्रम जैसे ‘अनमोल’ (एनीमिया मुक्त भारत) कागजों पर हैं, लेकिन ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ASHA) अपर्याप्त संसाधनों से जूझते हैं।निजी अस्पतालों का अनियमित विनियमन!निजी अस्पताल अक्सर ओवरचार्जिंग और अनावश्यक सर्जरी करते हैं। क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के बावजूद, कई राज्यों में इसका पालन नहीं होता। भदोही जैसे जिलों में, निजी अस्पतालों की संख्या सरकारी से दोगुनी है, लेकिन गुणवत्ता नियंत्रण शून्य है।गरीबी और पहुंच की असमानता!गरीब परिवार आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं उठा पाते, क्योंकि कई अस्पताल इसमें शामिल नहीं होते। NFHS डेटा दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 40% प्रसव अस्पतालों में होते हैं, और उनमें भी लापरवाही के मामले बढ़ रहे हैं।मानसिक स्वास्थ्य प्रभाव!ऐसी मौतें परिवार पर गहरा असर डालती हैं, जिससे अवसाद और आर्थिक संकट बढ़ता है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सरकार को मातृ स्वास्थ्य के लिए अलग बजट और ट्रेनिंग प्रोग्राम बढ़ाने चाहिए। यह संकट कोरोना महामारी के बाद और गहराया है, जब स्वास्थ्य बजट में कटौती हुई। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसी घटनाओं को रोकें, लेकिन बार-बार होने वाली मौतें उनकी विफलता को उजागर करती हैं।स्थानीय प्रतिक्रिया और कार्रवाई की मांग!घटना के बाद अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए, जहां लोगों ने अधिकारियों के खिलाफ नारे लगाए। मांगें हैं!CMO द्वारा तत्काल जांच और अस्पताल सील। मेडिकल बोर्ड से स्वतंत्र पोस्टमार्टम। स्वास्थ्य मंत्री स्तर पर ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार!दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई।फिलहाल, अस्पताल प्रशासन या अधिकारियों का

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मोस्ट वांटेड गैंगस्टर संदीप उर्फ लाठिया को अरेस्ट

दिल्ली और हरियाणा में संदीप पर हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, आर्म्स एक्ट के 11 केस दर्ज , गुरुग्राम( ईशान टाइम्स)।गुरुग्राम पुलिस ने मोस्ट वांटेड गैंगस्टर संदीप उर्फ लाठिया को अरेस्ट किया है। दिल्ली और हरियाणा में संदीप पर हत्या, हत्या का प्रयास, लूट, आर्म्स एक्ट के 11 केस विभिन्न थानों में दर्ज हैं।पुलिस ने उसके गैजेट्स सर्विलांस पर लगा रखे थे। तकनीकी का प्रयोग करते हुए पुलिस ने उसे दिल्ली से पकड़ लिया। वह मूल रूप से सोनीपत जिले के लाठ गांव का रहने वाला है। इसी वजह से वह अपने गैंग में लाठिया नाम से पहचाना जाता है।गुरुग्राम जिला कोर्ट ने उसे भगौड़ा भी घोषित कर रखा था। उसकी गिरफ्तारी से पुलिस को कई अनसुलझे मामलों में नई सुराग मिलने की उम्मीद है।

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नकली डॉक्टर दे रहा था अवैध गर्भपात की गोलियाँ, पुलिस ने दर्ज किया केस!

मुंबई। पालघर,नालासोपारा पूर्व के शाहीना क्लिनिक में उस वक्त हड़कंप मच गया जब वसई-विरार महानगरपालिका की स्वास्थ्य टीम ने अचानक छापा मारा। क्लिनिक चलाने वाले डॉ. खान झभीउल्ला उब्दुला के पास न तो स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) की डिग्री थी और न ही गर्भपात कराने का कानूनी अधिकार, फिर भी वे महीनों से महिलाओं को खतरनाक गर्भपात की गोलियाँ बेच रहे थे।महानगरपालिका के वैद्यकीय अधिकारी डॉ. कृष्णा गोस्वामी की शिकायत पर पेल्हार पुलिस ने तुरंत डॉ. खान के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। उन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा ३१८ (धोखाधड़ी से नुकसान पहुँचाना) और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।गरीब और डरी हुई महिलाएँ बन रही थीं शिकार!इलाके की कई महिलाओं ने बताया कि वे शर्म या परिवार के डर से बड़े अस्पताल नहीं जाना चाहती थीं। डॉ. खान कम पैसे में (करीब २-३ हजार रुपए) “दो गोली खाओ, घर पर ही सब हो जाएगा” कहकर दवा दे देते थे। कई महिलाएँ तो इस प्रक्रिया के बाद भयंकर रक्तस्राव और दर्द से अस्पताल पहुँचीं। कुछ की हालत इतनी गंभीर हो गई कि जान पर बन आई।कानून क्या कहता है!भारत में गर्भपात पूरी तरह कानूनी है, लेकिन सिर्फ २४ हफ्ते तक और केवल रजिस्टर्ड गायनेकोलॉजिस्ट या प्रशिक्षित डॉक्टर ही दवा दे सकते हैं या ऑपरेशन कर सकते हैं। बिना योग्यता वाला कोई भी व्यक्ति अगर गर्भपात की दवा देता है तो यह अपराध है और उसकी सजा ७ साल तक की कैद हो सकती है।असुरक्षित गर्भपात हर साल हजारों भारतीय महिलाओं की जान ले लेता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में हर साल करीब १५-२० लाख असुरक्षित गर्भपात होते हैं जिनमें ज्यादातर गरीब और ग्रामीण इलाकों की महिलाएँ होती हैं।प्रशासन की सख्ती, मगर सवाल अभी भी बाकी!यह कार्रवाई महानगरपालिका आयुक्त मनोज कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भक्ति चौधरी के नेतृत्व में हुई। टीम ने क्लिनिक से अवैध दवाएँ, नकली प्रिस्क्रिप्शन पैड और बिना बिल की हजारों गोलियाँ जब्त कीं।लोग पूछ रहे हैं!आखिर इतने दिन तक यह क्लिनिक कैसे चलता रहा?आस-पास के दूसरे फर्जी क्लिनिकों पर कब कार्रवाई होगी?गरीब महिलाओं को सुरक्षित और मुफ्त गर्भपात की सुविधा सरकारी अस्पतालों में क्यों नहीं मिलती, इसलिए वे ऐसे झोला-छाप डॉक्टरों के पास जाती हैं – इस समस्या का हल कब निकलेगा?पुलिस अब डॉ. खान से पूछताछ कर रही है कि ये गोलियाँ वे कहाँ से लाते थे और कितनी महिलाओं को दे चुके हैं। उम्मीद है कि यह मामला सिर्फ एक क्लिनिक तक सीमित न रहे और पूरे इलाके में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ बड़ा अभियान चले।महिलाओं से अपील है – अपनी जान को जोखिम में न डालें। अगर गर्भपात कराना ही है तो सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पताल में ही जाएँ, जहाँ मुफ्त और सुरक्षित सुविधा मिलती है। आपातकाल में १०८ या १०२ नंबर पर कॉल करें।आपकी जान अनमोल है। उसे झोला-छाप के हाथों न सौंपें ।

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समाज और पुलिस व्यवस्था पर एक दर्दभरा चिंतन!

जालौन,कभी हम पुलिस थाने को सुरक्षित जगह मानते थे—जहाँ न्याय की उम्मीद जगती है, और अपराध का अंधेरा दरवाज़े के बाहर ही रुक जाता है। लेकिन हाल की घटनाएँ यह सवाल उठाती हैं कि क्या वाकई पुलिस की दीवारें उतनी मजबूत हैं, जितना समाज सोचता है? क्या इन दीवारों में कहीं कोई ऐसा दरार बन चुका है, जिससे विश्वास का उजाला रिसता जा रहा है!उत्तर प्रदेश के जालौन ज़िले में तैनात महिला सिपाही से जुड़े हालिया मामले ने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि नैतिकता, प्रणाली और समाज – तीनों पर गहरे सवाल छोड़ जाती है। जाँच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं, और कई अधिकारी भी सवालों के घेरे में हैं। लेकिन यह कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं है; यह कहानी उस तंत्र की है, जिसे समाज अपना संरक्षक मानता है।जब रक्षक ही सवालों में घिर जाएंपुलिस समाज का पहला सहारा है। लेकिन जब उसी सहारे में दरारें दिखने लगें, तो जनता किस पर भरोसा करे?जांच में सामने आए कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल बदलने की घटनाएँ, और विभिन्न अधिकारियों से संबंधों की चर्चाएँ – ये सब समाज का मन झकझोर देते हैं। यह सब अभी जाँच के अधीन है, और सच क्या है, यह कानून तय करेगा। मगर घटना ने जो भरोसे का खून किया है, वह किसी अदालत की कॉपी में नहीं लिखा जाएगा—वह लोगों के दिल में दर्ज हो चुका है।एक मौत, एक परिवार और अनगिनत सवालSHO अरुण कुमार राय की मौत ने मामले को और भी भारी बना दिया। शुरुआत में घटना आत्महत्या समझी गई, लेकिन बाद में परिस्थितियों और पारिवारिक आरोपों ने इसे उलझा दिया। पुलिस जांच जारी है, लेकिन एक पत्नी का दर्द, एक परिवार का बिखराव—यह सब किसी भी समाज को अंदर तक हिला देता है।एक इंसान की मौत सिर्फ एक समाचार नहीं होती—वह पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ देती है। और जब मामला पुलिस तंत्र के भीतर का हो, तो समाज का विश्वास भी टूटता है।क्या यह सिर्फ लोगों की गलती है, या सिस्टम की!हम अकसर ऐसे मामलों में व्यक्तिगत व्यक्तियों को दोषी मान लेते हैं। लेकिन असल सवाल है—क्या पुलिस तंत्र में ऐसा माहौल बनने दिया गया, जहाँ व्यक्तिगत संबंध, प्रभाव, और कमजोरियाँ कर्तव्य पर भारी पड़ने लगें!अगर व्यवस्था के भीतर ही अनुशासन ढीला हो जाए, निगरानी कमज़ोर हो जाए, और नैतिकता के लिए कोई स्थान न बचे—तो ऐसी घटनाएँ कभी-कभी नहीं, बार-बार होती रहेंगी।महिलाएँ और पुलिस, सम्मान और जिम्मेदारी दोनों जरूरी!हम महिलाओं को पुलिस में इसलिए शामिल करते हैं कि वे मजबूत आवाज़ बनें, न्याय की प्रतीक बनें।लेकिन जब किसी मामले में महिला कर्मी का नाम आता है—even अगर मामला अभी जांच के अधीन ही क्यों न हो—समाज तुरंत पूरे महिला समुदाय पर उंगली उठाने लगता है। यह गलत है।एक या दो गलतियाँ पूरी मेहनती, ईमानदार महिला पुलिस बल की छवि को धूमिल नहीं कर सकतीं।सवाल किसी महिला-पुरुष का नहीं—सवाल है पूरी व्यवस्था की नैतिक रीढ़ का।हनी ट्रैप—एक सामाजिक बीमारीहनी ट्रैप कोई नया शब्द नहीं, लेकिन सत्ता और पुलिस तंत्र में इसका इस्तेमाल खतरनाक रूप धारण कर लेता है।जब भावनाएँ, लालच, निजी संबंध और पद—सब मिलकर एक जाल में बदल जाएं, तो उसमें फंसने वाला सिर्फ व्यक्ति नहीं होता, बल्कि पूरा सिस्टम कमजोर पड़ जाता है।और इसका असर सीधा जनता पर पड़ता है—उन लोगों पर, जिन्हें अपराध से बचाने का जिम्मा पुलिस का है।समाज को क्या सीख मिले!यह घटना हमें याद दिलाती है कि सिस्टम मजबूत तभी होगा जब उसमें काम करने वाले लोग मजबूत होंगे।टेक्निकल ट्रेनिंग से अधिक हमें भावनात्मक, नैतिक और मानव मूल्य की ट्रेनिंग की जरूरत है।पुलिस में आंतरिक अनुशासन को और कड़ा करना होगा।जांच निष्पक्ष और तेज़ होनी चाहिए, ताकि सच सामने आए।सिस्टम में ऐसी व्यवस्थाएँ हों, जो व्यक्तिगत लालच और दुरुपयोग को रोक सकें।मीडिया और समाज दोनों को जांच पूरी होने से पहले किसी को पूर्ण दोषी ठहराने से बचना चाहिए।अंधेरे में भी उम्मीद हैयह घटना दर्द देती है, लेकिन चेताती भी है।अगर समाज अब भी नहीं जागा, तो आने वाले कल में ऐसी घटनाएँ और घाव देंगी।लेकिन अगर आज हम ईमानदारी, अनुशासन और नैतिकता को फिर से केंद्र में लाएँ—तो पुलिस और जनता के बीच टूटता भरोसा फिर से जुड़ सकता है।सुधार असंभव नहीं—बस इरादे की जरूरत है।

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सिपाही पति ने प्रेमिका के लिए पत्नी को उतारा मौत के घाट, 50 लाख इंश्योरेंस हड़पने की भी थी साजिश !

उत्तर प्रदेश! गोरखपुर, पुलिस की वर्दी पर एक और काला धब्बा। सीआईडी में तैनात महिला हेड कांस्टेबल सरोज यादव की हत्या का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। हत्यारा कोई और नहीं, उनका अपना पति और यूपी पुलिस का ही सिपाही अष्टभुज कुमार यादव है, जिसने प्रेमिका के लिप्तता बनाए रखने और 50 लाख रुपये के बीमा की रकम हड़पने के लालच में पत्नी को जहर देकर मार डाला। घटना इस साल की है। सरोज यादव की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में मौत हो गई थी। शुरू में इसे सामान्य मौत बताया गया, लेकिन परिजनों के शक और पोस्टमार्टम-फॉरेंसिक रिपोर्ट ने सच उजागर कर दिया। रिपोर्ट में शरीर में खतरनाक कीटनाशक एल्युमीनियम फॉस्फाइड (सेल्फॉस) जहर मिला। मामला हत्या में बदल गया। दबाव बढ़ा तो कई महीने फरार चल रहा सिपाही अष्टभुज यादव आखिरकार कोर्ट में सरेंडर कर दिया। मृतका के पिता हरिलाल यादव ने जो आरोप लगाए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं,अष्टभुज की खलीलाबाद पोस्टिंग के दौरान एक महिला कांस्टेबल से अवैध संबंध थे। सरोज ने जब इसका विरोध किया तो उसे बुरी तरह मारता-पीटता था। शादी के बाद सरोज के नाम पर 50 लाख का टर्म लाइफ इंश्योरेंस, 41 लाख का संयुक्त होम लोन और एक अन्य बैंक से 20 लाख का कर्ज लिया गया। मौत के बाद अष्टभुज ने इंश्योरेंस क्लेम के लिए भी आवेदन कर दिया था। यानी पत्नी को सिर्फ प्रेमिका के रास्ते से हटाने के लिए नहीं, बल्कि करोड़ों की संपत्ति और बीमा राशि पर कब्जा करने के लिए भी साजिश रची गई। यह किसी फिल्मी कहानी नहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस के अंदर की काली सच्चाई है। जिस वर्दी को समाज की रक्षा के लिए पहनी जाती है, उसी वर्दी ने एक बेटी, एक पत्नी और एक महिला पुलिसकर्मी की जान ले ली। सवाल सिर्फ एक हत्यारे सिपाही का नहीं है। सवाल उन सिस्टम का है जो ऐसे हैवानों को वर्दी देता है, उनके चरित्र की जांच नहीं करता और महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को संरक्षण देता रहता है। सरोज यादव की चीखें अब चीखें नहीं रहीं, सबूत बन चुकी हैं। अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश पुलिस इस कलंक को धोने के लिए कितनी सख्ती दिखाती है या फिर इसे भी “पर्सनल मैटर” बताकर दबा दिया जाएगा।समाज शर्मसार है। वर्दी शर्मसार है। और न्याय की उम्मीद अभी भी जिंदा है।

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भारत तेज़ी से 6G, एआई और नवाचार आधारित भविष्य की ओर अग्रसर:मनोहर लाल

IISF पंचकूला में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल: भारत तेज़ी से 6G, एआई और नवाचार आधारित भविष्य की ओर अग्रसर नए युग की प्रौद्योगिकियाँ – विज़न 2047’ पर पैनल चर्चा में नई तकनीक को बढ़ावा देने का आह्वान ऊर्जा और आवासन क्षेत्रों में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका- श्री मनोहर लाल पंचकूला दिसंबर 8(संजय राय) केंद्रीय ऊर्जा, आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहरलाल ने पंचकूला में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) के तीसरे दिन ‘नए युग की प्रौद्योगिकियाँ – विज़न 2047’ पर पैनल चर्चा को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि नई तकनीक और नवाचार को आगे बढ़ाना और उन्हें समाज के हित में अधिक से अधिक लागू करना अब हमारे वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों की जिम्मेदारी बन गई है। मनोहर लाल ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव का आयोजन हरियाणा के पंचकूला में हो रहा है और हम सभी इस महोत्सव के साक्षी बन रहे हैं। इससे पहले भी हरियाणा को फरीदाबाद में इस महोत्सव का आयोजन करने का अवसर मिल चुका है। उन्होंने कहा कि इस फ़ेस्टिवल का उद्देश्य अकादमिक जगत और उद्योग जगत को एक मंच पर लाना है, ताकि दोनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में विज्ञान ने बहुत तरक्की की है। विज्ञान की ही बदौलत आज दुनिया बहुत छोटी लगने लगी है। दूरसंचार के माध्यम से हम वायर और वायरलेस तकनीक का उपयोग कर एक-दूसरे से बात कर सकते हैं और दुनिया में कहीं भी बैठे व्यक्ति को देख भी सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब इससे आगे बढ़ते हुए एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का दौर आ गया है, जिसे भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि एआई टूल्स का सही उपयोग करके किसी भी समस्या का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है । उन्होंने कहा कि वे वैज्ञानिकों से अनुरोध करते हैं कि एआई का प्रयोग सावधानीपूर्वक और समाजहित में करें, ताकि इसका सार्थक रूप से अधिकतम लाभ उठाया जा सके। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज एआई का उपयोग हर क्षेत्र में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भी इसके प्रयोग पर विशेष बल दिया गया है। स्मार्ट मीटरिंग और आवश्यकता के अनुसार बिजली उपकरणों के संचालन में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जिससे खर्च में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के अलावा आवासन के क्षेत्र में भी एआई का प्रयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। मकानों की डिजाइन इस प्रकार तैयार की जा सकती है कि वे सर्दियों में अत्यधिक ठंडे न हों और गर्मियों में बहुत गर्म न हों। इसमें एआई की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। मनोहर लाल ने कहा की भारत सरकार ने 1 लाख करोड़ का अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष शुरू किया, जो एआई, क्वांटम, स्वच्छ ऊर्जा और बायोटेक जैसे रणनीतिक और उभरते तकनीकी क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) के तहत पेशेवर निधि प्रबंधकों के माध्यम से संचालित, गहन तकनीक परियोजनाओं को वित्तपोषित करके और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर भारत को एक वैश्विक नवाचार केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि भारत अब संचार तकनीक में 5G से आगे बढ़कर तेज़ी से 6G की ओर अग्रसर हो रहा है। इस अवसर पर मनोहर लाल ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए। हरियाणा से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि हरियाणा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार और अनुसंधान को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री मोहनलाल ने विज्ञान प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी नारायण, आईआईटीएम के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र राव, सीएसआईआर-सीएसआईओ के निदेशक डॉ. शांतनु भट्टाचार्य सहित अन्य पैनलिस्ट भी उपस्थित थे।

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वंदेमातरम् सिर्फ नारा नहीं, जिम्मेदारी भी हैलोकसभा में अखिलेश का सत्ता पक्ष पर वार

नई दिल्ली(संजय राय )। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर आज लोकसभा मे विशेष चर्चा हुई. जिसने सियासी माहौल को गरमा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि आज सदन एक गौरवशाली क्षण का साक्षी बन रहा है। उन्होंने वंदे मातरम् को स्वतंत्र और समृद्ध भारत की आत्मा बताते हुए इसे आने वाले भारत की प्रेरणा करार दिया।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “देश के महापुरुषों का सपना था स्वतंत्र भारत और आज की पीढ़ी का सपना है समृद्ध भारत। आज़ाद भारत के सपने को वंदे मातरम् की भावना ने सींचा और समृद्ध भारत के सपने को भी यही भावना सींचेगी। हमें आत्मनिर्भर भारत बनाना है और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना है।”उन्होंने आगे कहा कि जब-जब देश पर संकट आया, वंदे मातरम् की भावना ने राष्ट्र को संबल दिया। 15 अगस्त, 26 जनवरी, हर घर तिरंगा जैसे अभियानों में वही भाव नजर आता है। जब आपातकाल के दौरान संविधान की गरिमा पर प्रहार हुआ, तब भी इसी चेतना ने देश को खड़े होने की ताकत दी। युद्ध के समय भी जवान इसी भावना के साथ सरहद पर डटे और विजय प्राप्त की।पीएम मोदी के बाद कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने अपनी बातें रखीं। इसके बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने सत्ता पक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने देश को एक किया और आज़ादी की लड़ाई में जान फूंकी, लेकिन आज सत्ता पक्ष हर चीज पर कब्जा करना चाहता है।अखिलेश यादव ने कहा, “ये लोग हर बात का श्रेय लेना चाहते हैं। जो महापुरुष इनके नहीं हैं, उन पर भी कब्जा करने की कोशिश करते हैं। इनकी बातों से ऐसा लगता है मानो वंदे मातरम् भी इन्हीं का बनाया हुआ गीत हो।”उन्होंने आगे कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, उसे जीवन में उतारने के लिए है। “जिन्होंने कभी आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, वे वंदे मातरम् का महत्व क्या समझेंगे?

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बच्चों को अच्छी शिक्षा देना बीजेपी सरकार के एजेंडे में है ही नहीं: अभय सिंह चौटाला

कॉलेजों में नियमित प्रोफेसरों की कमी के लिए बीजेपी सरकार एवं एचपीएससी दोषी है: चौधरी अभय सिंह चौटाला प्रदेश के लगभग सभी कॉलेजों में प्रोफेसरों की भारी कमी है जिसके कारण बच्चे नहीं कर पा रहे हैं पढ़ाई प्रदेश के 180 कॉलेजों में 2400 से भी ज्यादा शिक्षकों के पद पड़े हैं खाली चंडीगढ़, 8 दिसंबर(संजय राय) । इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने प्रोफेसरों की कमी से जूझ रहे कॉलेजों में पीएचडी, रिसर्च स्कॉलर द्वारा बच्चों को पढ़ाए जाने के सरकार के निर्णय को बेहद बचकाना निर्णय बताते हुए कहा कि कॉलेज की पढ़ाई बच्चों का भविष्य तय करती है और वही बच्चे अब नियमित प्रोफेसर द्वारा पढ़ाए जाने से महरूम हैं। प्रदेश के लगभग सभी कॉलेजों में प्रोफेसरों की भारी कमी है जिसके कारण बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उन्हें पढ़ाने वाला कोई नहीं है। इसका दोषी कोई और नहीं बल्कि बीजेपी सरकार एवं एचपीएससी है। यही पीएचडी, रिसर्च स्कॉलर जब नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए पेपर देते हैं तो एचपीएससी द्वारा उन्हें फेल कर दिया जाता है। जिनको एचपीएससी ने फेल कर दिया अब उन्हीं लोगों को सरकार ने कॉलेजों में बच्चों को पढ़ाने के लिए अनुबंध पर रखने का फैसला किया है। ऐसा करना बीजेपी सरकार की दोगली मानसिकता को दिखाता है। आज प्रदेश के 180 कॉलेजों में 2400 से भी ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। बीजेपी सरकार नियमित पदों को क्यों नहीं भर रही है इसके पीछे इनकी ओच्छी मानसिकता साफ नजर आती है कि ये सरकार बेरोजगार योग्य युवाओं को नौकरी नहीं देना चाहते हैं। बच्चों को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा देने के लिए नियमित शिक्षक बेहद आवश्यक हैं न कि काम चलाने के लिए अनुबंध पर रखना। दरअसल बीजेपी सरकार की मंशा प्रदेश के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की है ही नहीं। बीजेपी का एकमात्र एजेंडा ही लोगों को जात-पात और धर्म के नाम पर बांटना है।

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