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लोकतंत्र में सवाल पूछना गुनाह कब से हो गया

। । लखनऊ (इंद्र यादव ,ईशान टाइम्स )। बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि शायर मुनव्वर राना साहब की बेटी सुमैय्या राना को आज लखनऊ पुलिस द्वारा उनके घर में नजरबंद (House Arrest) कर दिया गया। यूपी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने बीते दिनों समाज के एक वर्ग और महान विभूतियों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणी की थी। सुमैय्या राना इसी बयान के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के लिए थाने जा रही थीं, लेकिन उन्हें पुलिस ने घर से निकलने ही नहीं दिया।क्या सत्ता में बैठे लोगों को कुछ भी बोलने की आजादी है, लेकिन आम नागरिक को कानून का दरवाजा खटखटाने का हक भी नहीं।जब आपत्तिजनक बयान सार्वजनिक है, तो उस पर कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता को ही रोकना किस तरह का न्याय है।क्या अब थानों तक जाना भी प्रशासन की अनुमति पर निर्भर करेगा।किसी की भावनाओं को आहत करना और फिर आवाज उठाने वाले को नजरबंद कर देना, स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान नहीं है। प्रशासन को चाहिए कि वह निष्पक्षता से काम करे और कानून के दायरे में सबको अपनी बात रखने का मौका दे। SumaiyaRana #SanjayNishad #UttarPradesh #LucknowPolice #Democracy #FreedomOfSpeech #Justice

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फर्जी दारोगा बनकर शादी करने और ठगी करने वाला हुआ गिरफ्तार

आजमगढ़(ईशान टाइम्स)।जनपद के थाना निजामाबाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी उप-निरीक्षक बनकर शादी करने और ठगी करने वाले एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। अभियुक्त के कब्जे से उप-निरीक्षक की वर्दी, फर्जी पहचान पत्र, कूटरचित नियुक्ति व ज्वाइनिंग लेटर सहित कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक नगर मधुवन कुमार सिंह तथा क्षेत्राधिकारी सदर आस्था जायसवाल के पर्यवेक्षण में की गई। थाना निजामाबाद क्षेत्र निवासी पीड़िता काजल यादव ने 04 सितंबर को शिकायत दर्ज कराई थी कि अभियुक्त प्रदीप यादव ने स्वयं को पीएसी सिपाही/उप-निरीक्षक बताकर 16 फरवरी 2022 को उससे विवाह किया। विवाह के दौरान करीब 8 लाख रुपये नकद, सोने के आभूषण और घरेलू सामान दहेज में लिया गया। बाद में अतिरिक्त दहेज और वाहन की मांग को लेकर पीड़िता को प्रताड़ित किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि अभियुक्त ने UPSI 2023 में चयन का झांसा देकर मेडिकल के नाम पर एक लाख रुपये और वसूल लिए। पुलिस जांच में सामने आया कि अभियुक्त का पुलिस विभाग से कोई संबंध नहीं है। मामले में थाना निजामाबाद पर मुकदमा दर्ज किया गया। न्यायालय द्वारा अभियुक्त के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। शनिवार को सूचना मिली कि अभियुक्त पुलिस वर्दी पहनकर पीड़िता को धमकाने आया है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने अभियुक्त प्रदीप यादव पुत्र मोतीलाल यादव, निवासी ग्राम मड़ना, थाना अहरौला को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में अभियुक्त ने स्वीकार किया कि उसने अच्छी शादी और धन लाभ के लालच में फर्जी सिपाही व उप-निरीक्षक के पहचान पत्र और नियुक्ति पत्र बनवाए थे। वह प्रयागराज में किराए के कमरे में रहकर पुलिस वर्दी पहन लोगों को गुमराह कर ठगी करता था। बरामदगी में फर्जी पुलिस पहचान पत्र, ज्वाइनिंग लेटर, उप-निरीक्षक की पूरी वर्दी, आधार व पैन कार्ड, एटीएम/डेबिट कार्ड, मोबाइल फोन, नकद ₹1117 सहित अन्य सामग्री शामिल हैं।

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पंचकूला सेक्टर-5 में स्वदेशी मेले का भव्य शुभारंभ

पंचकूला दिसंबर 19(ईशान टाइम्स): पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित परेड ग्राउंड में आज स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित भव्य स्वदेशी मेले का विधिवत शुभारंभ किया गया। उत्तर क्षेत्र के समन्वयक राजेश गोयल ने मुख्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। मेले का उद्घाटन हरियाणा भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉक्टर सतीश पूनिया , स्वामी संपूर्णानंद जी महाराज, आरएसएस के प्रांत प्रमुख पवन जिंदल , हरियाणा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल कौशिक प्रदेश महामंत्री डॉक्टर अर्चना गुप्ता ने किया । कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता, पंचकूला के मेयर कुलभूषण गोयल, मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष रजनीश गर्ग, उत्तर क्षेत्र समन्वयक स्वदेशी संचालक राजेश गोयल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में शहरवासी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और युवा वर्ग ने भाग लिया। अपने संबोधन में हरियाणा भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉक्टर सतीश पूनिया ने कहा कि “स्वदेशी आज की नहीं, बल्कि आने वाले समय की सबसे बड़ी मांग है। आने वाला समय पूरी तरह स्वदेशी का समय है और इस मेले में वही स्वदेशी दिखाई दे रहा है। यहां मौजूद हर वस्तु आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है।”उन्होंने कहा कि स्वदेशी अपनाने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और स्थानीय कारीगरों व छोटे उद्योगों को सीधा लाभ मिलता है। आरएसएस के प्रमुख वक्ता पवन जिंदल ने कहा कि स्वदेशी मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का माध्यम है। उन्होंने कहा,“वैश्वीकरण के इस दौर में स्वदेशी ही भारत को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बना सकता है। स्वदेशी मेला लोगों को यह संदेश देता है कि अगर हम देश में बने उत्पादों को अपनाएं, तो भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेगा। यह आने वाले समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”उन्होंने युवाओं से स्वदेशी आंदोलन को जन-आंदोलन बनाने की अपील की। स्वदेशी जागरण मंच के उत्तर क्षेत्र समन्वयक राजेश गोयल ने कहा कि स्वदेशी मेला आने वाले समय की मुख्य मांग बन चुका है। उन्होंने कहा,“स्वदेशी मेला देश के कारीगरों, लघु उद्योगों और घरेलू उत्पादकों को एक मजबूत मंच देता है। हमारा मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वदेशी के प्रति जागरूक करना और विदेशी उत्पादों के विकल्प के रूप में स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित करना है। ऐसे मेले भारत को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” स्वामी संपूर्णानंद महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि स्वदेशी केवल व्यापार नहीं, बल्कि एक संस्कार और विचारधारा है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी अपनाकर ही समाज आत्मनिर्भर बन सकता है और इस तरह के मेले हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त माध्यम हैं। स्वदेशी मेले के पहले ही दिन भारी संख्या में लोग पहुंचे। लोगों में स्वदेशी उत्पादों और भारतीय संस्कृति को नज़दीक से देखने को लेकर खासा उत्साह नजर आया। मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए कारीगरों और उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्टॉल लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। खादी वस्त्र, हस्तशिल्प, आयुर्वेदिक उत्पाद, जैविक खाद्य सामग्री, देसी मसाले, पारंपरिक सजावटी सामान और स्वदेशी उद्योगों से जुड़े उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला मेले में उपलब्ध है। मेले का सबसे बड़ा आकर्षण हेरिटेज कॉर्नर रहा, जहां भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ी पुरानी वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है। इस कॉर्नर में दादी-नानी और नाना के जमाने में उपयोग होने वाले मिट्टी के चूल्हे, मिट्टी व पीतल के बर्तन, पुराने रसोई उपकरण और पारंपरिक घरेलू सामग्री रखी गई है। इन्हें देखकर बुजुर्ग अपनी पुरानी यादों में खोते नजर आए, वहीं नई पीढ़ी को भारतीय जीवनशैली की झलक देखने को मिली। मेले में भारतीय संस्कृति और परंपराओं को दर्शाते सांस्कृतिक कार्यक्रम और लोक प्रस्तुतियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। यह स्वदेशी मेला आगामी दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें प्रतिदिन नए उत्पाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष आकर्षण देखने को मिलेंगे। इस मौके पर पार्षद हरिंदर मलिक, श्यामलाल बंसल, डॉ . वेणु राव,मेला प्रमुख रजनीश गर्ग ,जिला सामान्य अरुण गर्ग, राजीव कुमार,टोनी गुप्ता, विकास जिंदल, संजय आहूजा,प्रदीप गोयल,दीपक गोयल, अरुण गर्ग, दिनेश शर्मा, रंजीता मेहता, प्रदीप गर्ग सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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Press Club of India Condemns Seizure of Journalist Jehangir Ali’s Mobile Phone in J&K

New Delhi, December 19, 2025 (Ishan Times Bureau): The Press Club of India (PCI) has strongly condemned the Jammu and Kashmir Police for seizing the mobile phone of senior journalist Jehangir Ali, The Wire’s long-time correspondent in the region, from his residence in Budgam on the evening of December 17. Although the phone was returned after 24 hours, the PCI expressed serious concern that the seizure was carried out without any FIR, warrant, court order, or legal documentation, and without disclosing any reason to the journalist. The Club further pointed out that the police failed to follow mandatory legal safeguards laid down by the Supreme Court, including the recording and sharing of the hash value of the seized electronic device, a critical step to ensure data integrity and prevent tampering. The PCI noted with alarm that the action occurred while Jehangir Ali was engaged in investigative reporting on allegations of nepotism and corruption related to a hydropower project in Kishtwar. According to The Wire, Ali was actively pursuing another lead in the same investigation at the time of the police action, raising serious concerns about intimidation and retaliation against journalists involved in public-interest reporting. Describing the incident as part of a broader pattern of harassment of journalists in Jammu and Kashmir, the PCI said such actions have intensified since the abrogation of Article 370 and have created a chilling effect on press freedom in the region. The organisation warned that such practices undermine constitutional guarantees of free speech and the public’s right to information. The Press Club of India urged the Jammu and Kashmir administration to ensure that journalists can carry out their professional duties without fear, intimidation, or unlawful interference.

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एक बेटी की चीख और तिरंगे में लिपटा बाप…

उधमपुर 【इंद्र यादव】 मजालता में आतंकियों से लोहा लेते हुए देश के वीर सपूत अजमल अली खान शहीद हो गए। आज जब उनका पार्थिव शरीर घर पहुँचा, तो पूरा इलाका गमगीन था। लेकिन सबसे हृदयविदारक मंजर तब था, जब उनकी मासूम बेटी को आखिरी बार पिता का चेहरा दिखाने के लिए पास लाया गया।वह मासूम, जिसे शायद ‘शहादत’ का मतलब भी ठीक से नहीं पता, अपने पिता के बेजान शरीर को देख कर “पापा… पापा…” चिल्लाने लगी। उसकी वह एक-एक पुकार वहां मौजूद हर शख्स की आंखों में आंसू दे गई।एक सिपाही का फर्ज: सरहद की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी।एक बेटी का दर्द: उम्र भर के लिए पिता का साया छिन गया।* देश का कर्ज: यह बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता।शहीद अजमल अली खान जी की वीरता को कोटि-कोटि नमन। ईश्वर इस मासूम बच्ची और पूरे परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति दे।

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“सहकारिता हमारे जीवन का मूल संस्कार है” : संजय पंचपोर

विष्णु चौहान।पानीपत। अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पानीपत में आयोजित सहकार भारती की प्रांतीय बैठक में राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय पंचपोर ने सहकारिता को भारतीय जीवन पद्धति का मूल संस्कार बताते हुए कहा कि सहकारिता हमारे जीवन के मूल में समाहित है, आवश्यकता केवल इसे समझने और व्यवहार में उतारने की है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का प्रत्येक कार्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से एक-दूसरे के सहयोग से और एक-दूसरे के लिए ही होता है। कार्यक्रम की शुरुआत दीपप्रज्वलन के साथ की गई। कार्यक्रम में मंच संचालन प्रान्त सह संगठन प्रमुख अनुपम कुमार ने किया। कार्यक्रम में पधारे मुख्य अतिथियों का स्वागत पानीपत अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के संस्थापक ओमप्रकाश शर्मा ने पुष्प गुच्छे, स्मृति चिन्ह देकर एवं शाल उढ़ाकर किया। कार्यकताओं को संबोधित करते हुए संजय पंचपोर ने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि परिवार सहकारिता का सबसे शाश्वत और सशक्त स्वरूप है। परिवार में सभी निर्णय और व्यवस्थाएं परस्पर हितों को ध्यान में रखकर की जाती हैं, जहाँ सहयोग, समर्पण और जिम्मेदारी की भावना स्वाभाविक रूप से विकसित होती है। यही सहकारिता की वास्तविक आत्मा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहकारिता के लिए संस्कार नींव का कार्य करते हैं। जब समाज में सहयोग और सेवा के संस्कार मजबूत होते हैं, तभी सहकारिता दीर्घकाल तक प्रभावी रह सकती है। बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संरक्षक ठाकुर दीनानाथ ने कहा कि समाज में सहकारिता को मजबूत करने के लिए सहयोगी और समर्पित भाव से कार्य करने वाले लोगों की पहचान कर प्रयास शुरू करने होंगे। उन्होंने कहा कि सहकारिता का आधार ही समावेशी है, जिसमें सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित होती है और यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। प्रांतीय अध्यक्ष राजवीर गोदारा ने अपने वक्तव्य में कहा कि सहकारिता के लिए अर्थ नहीं, बल्कि कर्म प्रधान है। उन्होंने कहा कि सहकारिता केवल लाभ की अवधारणा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, विश्वास और सामूहिक उत्थान का माध्यम है। बैठक में प्रांत प्रमुख (मीडिया) विष्णु चौहान ने राष्ट्रीय अधिकारियों को अवगत कराया कि प्रदेश के 20 जिलों में जिला मीडिया प्रमुख की नियुक्ति हो चुकी है और जिला मीडिया प्रमुख अपने कर्तव्य का निर्वहन पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ निर्भय कर रहे हैं। प्रदेश महासचिव डॉ. सौरव भीष्म ने कहा कि हमारे देहवाक्यों में ही सहकारिता का सार निहित है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” जैसे विचार भारतीय समाज को सहयोग और सामूहिकता की दिशा में प्रेरित करते हैं। बैठक में वक्ताओं ने सहकारिता को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान करते हुए कहा कि सहयोग, समर्पण और संस्कारों के आधार पर ही एक सशक्त, समावेशी और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण संभव है। इस अवसर पर प्रांत महिला प्रमुख शीला लाकड़ा, प्रांत सह महिला प्रमुख तृप्ति शेओरान, प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्ण शर्मा, प्रांत उपभोक्ता प्रकोष्ठ प्रमुख नीलम कश्यप, प्रांत हाउसिंग प्रकोष्ठ प्रमुख ब्रह्म प्रकाश, सह प्रचार प्रमुख कपिल मदान, स्वयं सहायता ग्रुप प्रमुख डॉ परविंदर सिंह, प्रांत मंत्री मोहित पाठक सहित सभी जिलों के अध्यक्ष व महामंत्री मौजूद रहे।

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रिटायर्ड रेलवे ड्राइवर और पत्नी की हत्या का सनसनीखेज खुलासा

8 दिसंबर की रात को बेटे ने मां-बाप की हत्या कर शवों के टुकड़े कर नदी में फेंकाहत्या में प्रयुक्त सिलबट्टा और आरी बरामद ईशान टाइम्स ब्यूरो, जौनपुर जिले के जफराबाद थाना क्षेत्र के अहमदपुर गांव में रिश्तों को शर्मसार करने वाली वारदात सामने आई है। यहां 37 वर्षीय अम्बेश कुमार ने 8 दिसंबर की रात पहले अपनी मां बबिता (60) और फिर पिता श्यामलाल (62) की हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी ने दोनों शवों के टुकड़े कर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर सई और गोमती नदी में फेंक दिया। इस क्रूरतापूर्ण घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है।एएसपी सिटी आयुष श्रीवास्तव के मुताबिक, आरोपी ने पहले मां पर हमला किया, फिर रेलवे से सेवानिवृत्त लोको पायलट पिता को निशाना बनाया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घर से सिलबट्टा और शवों को काटने में प्रयुक्त आरी बरामद की है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि सिलबट्टा रसोई से और आरी मकान के बेसमेंट में चल रहे निर्माण स्थल से लाई गई थी।पुलिस के अनुसार, 8 दिसंबर की शाम रुपयों को लेकर पिता-पुत्र में विवाद हुआ था, जो हाथापाई तक पहुंच गया। इसी के बाद आरोपी ने वारदात को अंजाम दिया। शवों के हिस्सों को प्लास्टिक की बोरियों में भरकर नदियों में फेंकने की बात भी सामने आई है।जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने लॉकडाउन के दौरान कोलकाता की युवती से प्रेम विवाह किया था। पारिवारिक असहमति के चलते तलाक को लेकर दबाव और आर्थिक मांगें विवाद का कारण बनीं। फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहन जांच जारी है।

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विजय दिवस के अवसर पर ECHS कार्ड होल्डर एक्स-सर्विसमैन के लिए भव्य स्वास्थ्य शिविर

लगभग 270 पूर्व सैनिकों को मिला निःशुल्क परामर्श, उपचार व दवाइयां रसड़ा(ईशान टाइम्स), विजय दिवस 16 दिसम्बर 2025 के अवसर पर प्रकाश हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर द्वारा आशीर्वाद मैरेज हाल, नाथ बाबा मठ, रसड़ा में ECHS कार्ड होल्डर आर्मी के एक्स-सर्विसमैन के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में लगभग 270 पूर्व सैनिकों को निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श, जांच, उपचार एवं दवाइयों का वितरण किया गया। शिविर के दौरान सभी एक्स-सर्विसमैन को ECHS कार्ड के माध्यम से प्रकाश हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर में उपलब्ध निःशुल्क ऑपरेशन एवं इलाज की सुविधा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस जानकारी से पूर्व सैनिकों में विशेष खुशी देखने को मिली और लंबे समय से जुड़े उनके कई सवालों व शंकाओं का समाधान हुआ। स्वास्थ्य शिविर में अनुभवी चिकित्सकों की टीम ने पूर्व सैनिकों की विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं की जांच कर उचित चिकित्सकीय सलाह दी। मौके पर ही आवश्यक दवाइयां भी नि:शुल्क प्रदान की गईं। कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता रही CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) की विशेष ट्रेनिंग, जिसमें एक्स-सर्विसमैन को आपात स्थिति में जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी दी गई। इस आयोजन में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों की सहभागिता रही। सभी ने प्रकाश हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के शिविर पूर्व सैनिकों के सम्मान और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अत्यंत सराहनीय हैं।

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संसद में उठना चाहिए दम घोंटती हवा का सवाल

संजय राय, देश में वायु प्रदूषण अब किसी मौसम-विशेष की समस्या नहीं रहा, बल्कि यह एक स्थायी और गहराता हुआ जनस्वास्थ्य संकट बन चुका है। यह वह संकट है जो बिना शोर किए लोगों की उम्र घटा रहा है, बीमारियों को सामान्य बना रहा है और आने वाली पीढ़ियों की सेहत पर स्थायी असर डाल रहा है। विडंबना यह है कि इतना बड़ा खतरा होते हुए भी वायु प्रदूषण पर नीति-निर्माण के उच्चतम मंच—संसद—में वह गंभीर और निरंतर चर्चा नहीं हो पा रही, जिसकी यह मांग करता है। आज शहरों से लेकर गांवों तक हवा में घुले सूक्ष्म जहरीले कण हर सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, कोयला आधारित बिजली संयंत्र, निर्माण गतिविधियों की धूल और घरेलू ईंधन से निकलने वाला धुआं—सब मिलकर हवा को धीरे-धीरे ज़हर में बदल चुके हैं। इसकी सबसे भयावह विशेषता यह है कि इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन यह शरीर को भीतर से खोखला करता चला जाता है। वायु प्रदूषण को अब केवल पर्यावरणीय समस्या के रूप में देखना एक बड़ी भूल होगी। यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति है, जिसका बोझ सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ता है जो इसके लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं। झुग्गियों में रहने वाले परिवार, सड़क किनारे काम करने वाले मजदूर, औद्योगिक इलाकों के आसपास बसने वाले समुदाय—यही वे लोग हैं जो सबसे जहरीली हवा सांस में लेते हैं। इस तरह वायु प्रदूषण सामाजिक असमानता को और गहरा करता है। आज सांस की बीमारियां जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी असाधारण नहीं रहीं। दिल का दौरा, उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक जैसे रोगों में भी वायु प्रदूषण की भूमिका तेजी से सामने आ रही है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण रक्त में घुलकर हृदय और मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं। बच्चों पर इसका प्रभाव और भी खतरनाक है। उनके विकसित हो रहे फेफड़े प्रदूषित हवा को सहन नहीं कर पाते, जिससे उनकी श्वसन क्षमता जीवनभर के लिए कम हो सकती है। बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अंतरराष्ट्रीय आंकड़े इस संकट की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 90 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण से जुड़ी होती है। लैंसेट में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2022 में भारत में ही करीब 17 लाख मौतें वायु प्रदूषण के कारण हुईं—जो 2010 की तुलना में लगभग 38 प्रतिशत अधिक हैं। इनमें से बड़ी संख्या जीवाश्म ईंधन, विशेषकर कोयले से उत्पन्न प्रदूषण से जुड़ी है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब दिल्ली और उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा एक बार फिर शीतकालीन धुंध की चादर में लिपटा हुआ है। कई इलाकों में पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक दर्ज किया गया है। हरियाणा जैसे राज्यों में प्रदूषण के कारण समय से पहले प्रसव के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो यह दिखाता है कि वायु प्रदूषण केवल सांसों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन की शुरुआत को भी प्रभावित कर रहा है। भारत में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कानूनों और योजनाओं की कमी नहीं है। वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) जैसे ढांचे मौजूद हैं। लेकिन समस्या नीति के अभाव की नहीं, बल्कि उसके कमजोर क्रियान्वयन की है। स्वीकृत बजट का पूरा उपयोग न होना और लक्ष्य प्राप्ति में ढिलाई यह संकेत देती है कि वायु प्रदूषण अभी भी प्राथमिकता की सूची में ऊपर नहीं है। राज्यों की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में “स्वच्छ शहर” का तमगा पाने वाले नगरों की हवा भी लगातार खराब हो रही है। आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों तक प्रदूषण का दायरा फैलना बताता है कि यह संकट अब शहरी सीमाओं से बाहर निकल चुका है। इसके साथ ही, विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। एक ओर नगर वन जैसी योजनाओं की घोषणा होती है, तो दूसरी ओर हजारों पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव सामने आते हैं। यह दोहरा रवैया दर्शाता है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन अभी भी नीति-निर्माण में सही जगह नहीं पा सका है। असल सवाल यह है कि क्या हम वायु प्रदूषण को उतनी गंभीरता से ले रहे हैं, जितनी इसकी मांग है? जब तक इसे संसद में स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में नहीं देखा जाएगा, तब तक समाधान आधे-अधूरे ही रहेंगे। वायु प्रदूषण कोई भविष्य की चुनौती नहीं, बल्कि वर्तमान की आपदा है। यदि नीति, राजनीति और समाज ने मिलकर इसे प्राथमिकता नहीं बनाया, तो आने वाले वर्षों में इसका मूल्य हमें सांसों, जीवन और उत्पादकता—तीनों से चुकाना पड़ेगा। अब समय आ गया है कि दम घोंटती हवा का सवाल संसद के केंद्र में आए—क्योंकि यह केवल पर्यावरण का नहीं, देश के अस्तित्व और नागरिकों के जीवन का प्रश्न है।

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Sangeeta Barooah Pisharoty Elected First Woman President of Press Club of India

New Delhi,(Ishan Times):In a landmark development for Indian journalism, senior journalist Sangeeta Barooah Pisharoty was on Sunday elected as the first woman President of the Press Club of India (PCI), marking a historic step toward inclusive leadership and gender representation in one of the country’s most influential media institutions. The elections, held on December 13, witnessed an overwhelming mandate in favor of Pisharoty’s panel, which secured a clean sweep of all 21 positions, including office-bearers and Managing Committee seats. Pisharoty won the presidential race decisively, polling 1,019 votes, while her nearest rivals Atul Mishra and Arun Sharma received 129 and 89 votes, respectively. For the post of Secretary-General, Afzal Imam registered a comprehensive victory with 948 votes, defeating Gyan Prakash, who polled 290 votes.Jatin Gandhi was elected Vice-President with 1,029 votes, winning by a margin of over 900 votes.Meanwhile, Aditi Rajput (Treasurer) and PR Sunil (Joint Secretary) were elected unopposed. Managing Committee Results In the elections for the 16-member Managing Committee, Niraj Kumar topped the list with 932 votes, followed by Abhishek Kumar Singh (911), Jahanvi Sen (903), Ashok Kaushik (892), Kallol Bhattacharjee (882), Praveen Jain (878), Agraj Pratap Singh (865), Manoj Sharma (861), Nyanima Basu (851), PB Suresh (838), VP Pandey (833), Prem Bahukhandi (831), Sneha Bhura (829), Javed Akhtar (823), Rezaul Hasan Laskar (781), and Sunil Kumar (780). The results were formally announced at the PCI lawns by Chief Election Commissioner MMC Sharma in the presence of a large gathering of journalists. Reacting to the outcome, Pisharoty said the verdict reflected the members’ collective confidence in the panel’s vision to uphold the values of free, fair, and responsible journalism. Outgoing PCI President Gautam Lahiri and former Secretary-General Neeraj Thakur welcomed the outcome, calling the election of the first woman President a strong reaffirmation of PCI’s commitment to equality, diversity, and democratic ideals.

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