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सफाई मित्रों को निगम ने बकाया एरियर का तोहफा नहीं दिया: मनोज अग्रवाल

पंचकूला 27नवंबर( संजय राय ,ईशान टाइम्स)।पंचकूला नगर निगम द्वारा 2017 से सफाई मित्रों के एरियर के लगभग 9 करोड रूपए हरियाणा अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग ने दिलवाए हैं ना कि पंचकूला नगर निगम ने उन्हें कोई तोहफा दिया है ! मंत्री, मेयर आदि ने तो नकली वाहवाही लूटने की कवायद की है क्यों कि पंचकूला नगर निगम के चुनाव शीघ्र ही होने वाले हैं !यह आरोप लगाते हुए इंडियन नेशनल लोकदल के जिलाध्यक्ष शहरी पंचकूला एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा कि सफाई मित्रों द्वारा एरियर देने की मांग को लेकर दिए गए ज्ञापनों तथा किए गए धरना प्रदर्शनों के बावजूद निगम द्वारा विभिन्न बहानों से टालमटोल की जा रही थी ! वर्ष 2017 से यानि लगभग 9 वर्ष से मामला लटकाया गया था ! आखिर हार कर सफाई मित्रों ने हरियाणा अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग में गुहार लगाई ! आयोग ने त्वरित कार्यवाही करते हुए मेयर कुलभूषण गोयल, कमिश्नर नगर निगम तथा महानिदेशक स्थानीय निकाय विभाग को 11 नवम्बर को व्यक्तिगत तौर पर पेश होकर रिपोर्ट देने को कहा ! लेकिन उपरोक्त में से कोई भी पेश नहीं हुआ ! अतिरिक्त कमिश्नर विनोद ने पेश होकर एरियर देने के लिए और समय की मांग की !मनोज अग्रवाल ने कहा कि आयोग ने पुन: आदेश जारी करते हुए मेयर, कमिश्नर, महानिदेशक को 27.11 को व्यक्तिगत तौर पर हाजिर हो कर स्थिति स्पष्ट करने तथा उसी दिन केस का निपटारा करने का पत्र जारी कर दिया ! पेश ना होने की स्थिति में अनुसूचित जाति एवं जनजाति कानून के तहत कार्यवाही कर वारंट जारी किए जाने का संकेत भी दिया !मनोज अग्रवाल ने कहा कि गिरफ्तारी के भय से अफसरों ने मात्रा आठ दिन में एरियर देने का फैसला कर दिया जबकि गरीब सफाई मित्रों का मामला नो साल से लंबित था !

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पंचकूला में ग्रीन बेल्ट पर कांग्रेस घास ,भांग एवं अन्य जंगली जड़ी बूटियों व गन्दगी की भरमार

पंचकूला, 27 नवंबर ( ईशान राय , ईशान टाइम्स): जननायक जनता पार्टी जिला पंचकूला के अध्यक्ष ओ पी सिहाग ने पंचकूला के सबसे व्यस्तम मार्ग जो चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड चौक से जीरकपुर – कालका हाई वे से मिलता है जो सेक्टर 12 एवं सेक्टर 12 ए से गुजरता है जिसकी डिवाइडिग रोड के सेक्टर 12 की तरफ की ग्रीन बेल्ट की खस्ता हालत पर रोष जताते हुए कहा कि प्रशानिक अधिकारियों की लापरवाही , अकर्मण्यता एवं ढुलमुल रवैये के कारण पंचकूला अपनी पहचान खोता जा रहा है । ओ पी सिहाग ने कहा कि लगभग दो महीने पहले उन्होंने पंचकूला मेट्रोपोलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी एवं नगर निगम पंचकूला के वरिष्ठ अधिकारियों को शहर में जगह जगह बढ़ रही गन्दगी एवं ग्रीन बेल्ट में घास एवं फूल पौधों की जगह उगी हुई कॉंग्रेस घास, भांग एवं अन्य जंगली खर-पतवार ने डेरा डाल दिया है तथा इस बारे अधिकारियों से तुरंत उचित कार्रवाई करने की मांग की थी। उन्होंने हैरान होते हुए कहा कि शहर के घघर पार सेक्टरो सहित आज भी हालात ज्यों के त्यों हैं। जजपा जिला अध्यक्ष ओ पी सिहाग ने आज सेक्टर 12 एवं सेक्टर 12ए पंचकूला के डिवाइडिग रोड पर सेक्टर 12 की तरफ ग्रीन बेल्ट का एक वीडियो जारी करते हुए प्रशासन के अधिकारियों से पुनः अनुरोध किया कि पंचकूला की सुन्दरता का ध्यान रखते हुए उन्हें कार्यवाही करनी चाहिए। उन्होंने नगर निगम पंचकूला,हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण एवं पी एम डी ए के सम्बंधित अधिकारियों से अनुरोध किया कि वो पूरे शहर में जहां जहां गन्दगी है या ग्रीन बेल्ट एवं खाली प्लॉटों में कांग्रेस घास या भांग ने क़ब्ज़ा कर रखा है तो उसको समयबद्ध तरीके से साफ़ करवाने का काम करे।

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गढ़मुक्तेश्वर में “मौत का मेकओवर”! जब लाश भी बन गई “मेड इन चाइना”!

मरा हुआ था, फिर भी ज़िन्दा बच गया! उत्तर प्रदेश का नया विश्व रिकॉर्ड”! गढ़मुक्तेश्वर(उत्तर प्रदेश) इंद्र यादव ,ईशान टाइम्स ।उत्तरप्रदेश तो पहले से ही विश्व रिकॉर्ड धारक था , सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री, सबसे ज्यादा बिजली चोरी, सबसे ज्यादा गोबर ,लेकिन अब एक और कीर्तिमान जोड़ लिया ,दुनिया का पहला ऐसा अंतिम संस्कार जहाँ मुर्दा खुद जलने से बचकर निकल गया। बधाई हो हमें! मंगलवार को गढ़मुक्तेश्वर के घाट पर दो होनहार युवा एक कार में “शव” लेकर पहुँचे। कार का डिग्गी खोला, कंधा दिया, लकड़ी सजाई, अगरबत्ती जलाने ही वाले थे कि एक सजग नागरिक को शक हुआ। भाईसाहब ने कफनखी से देखा – कफन के नीचे से प्लास्टिक की चमक दिख रही थी। कफन हटाया तो सामने था एकदम ताज़ा-ताज़ा प्लास्टिक का पुतला, जो शायद अलीएक्सप्रेस से “डेड बॉडी रिप्लिका – फ्री शिपिंग” पर मंगाया गया था। लोगों ने तुरंत दोनों कलाकारों को दबोच लिया। पुलिस आई। पूछताछ शुरू हुई। अब सवाल ये है कि ये दोनों महानुभाव आखिर करना क्या चाहते थे। तीन संभावनाएँ सबसे मज़बूत चल रही हैं । बीमा घोटाला, प्रीमियम वर्ज़न,किसी रिश्तेदार को ज़िंदा रखो, पुतला जला दो, बीमा कंपनी को बिल्कुल हाई-डेफिनिशन में रोते हुए फोटो भेज दो। कंपनी वाले तो वैसे भी पोस्टमार्टम नहीं करवाते, बस फोटो देखकर पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। नया बिज़ , “प्लास्टिक की लाश, असली मुनाफा।”कोई गैंगस्टर भागा हुआ है, पुलिस तलाश कर रही है। तो उसका पुतला जला दो, ढोल नगाड़े बजाओ, अंतिम संस्कार कर दो। अगले दिन अखबार में हेडलाइन , “कुख्यात गुंडा अग्नि को समाहित।” गुंडा हँसते हुए दुबई में बिरयानी खा रहा होता है। शायद ये दोनों स्टार्टअप वाले थे। नाम सोच लिया था , “अन्तिमयात्राडॉटकाम”। स्लोगन ,“अब अपने दुश्मन को भी ज़िंदा जलाए बिना जेल गए।” सर्विस पैकेज , बेसिक : सिर्फ पुतला – ₹8,999 , प्रीमियम : पुतला + कफन + रोने वाली औरतें – ₹24,999, अल्ट्रा प्रीमियम : पुतला + फेक पोस्टमार्टम रिपोर्ट + अखबार में विज्ञापन , ₹99,999- पुलिस अब पूछ रही है ,“पुतला कहाँ से लाये।जवाब मिला , “सर, लोकल मार्केट से। वहाँ लिखा था , ‘ह्यूमन लाइक फिगर, बहुत रियलिस्टिक, शादी-ब्याह और अंतिम संस्कार दोनों के लिए परफेक्ट’।अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर ये पुतला सच में जल जाता तो क्या होता।गंगा मैया को पहली बार प्लास्टिक प्रदूषण नहीं, प्लास्टिक मुर्दा प्रदूषण झेलना पड़ता। मछलियाँ खातीं, हम खाते, फिर हम भी प्लास्टिक बन जाते। पूरी मानवजाति अमर हो जाती – क्योंकि प्लास्टिक तो सड़ता नहीं। फिर भी, हमारे दोनों नवोदित कलाकारों को सलाम। कम से कम उन्होंने साबित कर दिया कि इस देश में “मेक इन इंडिया” नहीं, “फेक इन इंडिया” ज़्यादा चल रहा है।पुतला जलाने से पहले पुलिस पकड़ ले, वरना आज गढ़मुक्तेश्वर में अंतिम संस्कार होता एक ऐसे शव का जिसने कभी जन्म ही नहीं लिया था। सचमुच, हमारा देश अद्भुत है , यहाँ मरने के लिए भी ओरिजनल होना पड़ता है, नकली चलता नहीं। जय हो प्लास्टिक मुक्त भारत की… नहीं-नहीं, प्लास्टिक मुर्दा मुक्त भारत की!

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मालवण में “पैसा बोलता है”

मालवण में “पैसा बोलता है” का लाइव डेमो: शिवसेना-भाजपा का नया रियलिटी शो! इंद्र यादव ( ईशान टाइम्स ) महाराष्ट्र/मुंम्बई की राजनीति तो अब रोज़ नया सीज़न लॉन्च कर रही है। इस बार एपिसोड का टाइटल है ,“ऑपरेशन ग्रीन बैग”। हीरो हैं हमारे एकनाथ शिंदे गुट के विधायक निलेश राणे, जो अचानक सीधे भाजपा नेता के घर में घुस गए और एक हरा बैग पकड़ लिया। बैग खोला तो अंदर से निकले चमचमाते नोटों की बारिश! लगभग 25 लाख रुपये। निलेश भाई तुरंत चिल्लाए , “देखो-देखो, लोकतंत्र को लूटने का सामान मिल गया!” अब सबसे मज़ेदार ट्विस्ट तो ये है कि निलेश राणे के पिताजी नारायण राणे और भाई नितेश राणे दोनों भाजपा में बड़े-बड़े कुर्सियों पर विराजमान हैं। मतलब घर में भाजपा का झंडा लहरा रहा है और बेटा बाहर भाजपा को ही “चोर-चोर” चिल्ला रहा है। ये क्या है! फैमिली ड्रामा का महाराष्ट्र वर्ज़न! पापा-भाई कह रहे होंगे ,“बेटा, कम से कम घर में तो चुप रहता, बाहर जाके शोर मचा रहा है! निलेश भाई ने तो स्टिंग ऑपरेशन का पूरा क्रेडिट ले लिया। बोले, “मैंने भंडाफोड़ कर दिया। ये पैसा वोटरों को बांटने के लिए था।” अरे भाई, स्टिंग ऑपरेशन में कैमरा छिपाकर किया जाता है, आप तो सीधे घंटी बजाकर, “सरप्राइज़!” बोलते हुए घुस गए। ये स्टिंग नहीं, “होम डिलीवरी रेड” है! भाजपा वाले भी पीछे कहाँ रहने वाले। विजय किंजवडेकर जी ने तपाक से जवाब दिया ,“अरे ये पैसा तो मेरे बिज़नेस का है भाई, चुनाव का नहीं।” वाह! क्या बिज़नेस है जनाब! हरे बैग में 25-25 लाख रखकर घर में स्टोर करते हैं! कोई नया स्टार्टअप है क्या ,“कैश होम डिलीवरी सर्विस”! और वो भी ठीक नगर परिषद चुनाव के पहले! ग्राहक तो तैयार बैठे होंगे, “भैया, दो हज़ार का नोट चाहिए, UPI से नहीं, कैश में!” फिर आशीष शेलार जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा , “ये सब झूठ है, निलेश राणे ड्रामा कर रहे हैं।” अरे भाई, ड्रामा तो पूरा महाराष्ट्र कर रहा है! एक तरफ़ शिवसेना (शिंदे) और भाजपा गले-गले मिलकर सरकार चला रहे हैं, दूसरी तरफ़ लोकल चुनाव में एक-दूसरे के घर में छापा मार रहे हैं। ये गठबंधन नहीं, “लव-हेट रिलेशनशिप” है , दिन में साथ खाना, रात में साथ मारपीट! सबसे हास्यास्पद बात , निलेश राणे बोले, “अगर भाजपा जीती तो नगर परिषद में लूट होगी।” अरे भाई, आप भी तो उसी महायुति में हो! यानी अगर आपकी गठबंधन सरकार जीतेगी तो लूट होगी! मतलब वोटरों को सीधा मैसेज ,“चाहे जिसे वोट दो, लूट तो पक्की है!”/अंत में चुनाव आयोग और पुलिस वाले वहाँ पहुँचे, वीडियो बन रहे हैं, फोटो खिंच रहे हैं, पर अभी तक FIR तक नहीं हुई। क्यों! क्योंकि सबको पता है ,ये पैसा किसी का भी हो, अंत में तो “सेटिंग” में चला जाएगा। बैग हरा था ना! शायद इसलिए ग्रीन सिग्नल मिल गया हो! महाराष्ट्र की जनता अब थक चुकी है भाई। रोज़ नया ड्रामा, नया स्टिंग, नया बैग। बस एक ही सवाल है , अगले एपिसोड में कौन सा रंग का बैग खुलेगा! लाल, केसरी या फिर नीला!-2 दिसंबर को वोट डालिए, पर याद रखिए – जिसे भी डालोगे, बैग तो किसी न किसी के घर में भरा ही मिलेगा!

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निरीक्षण

; सीईओ यमुना प्राधिकरण राकेश कुमार सिंह के कार्यों से संतुष्ट नजर आए योगी आदित्यनाथ गौतमबुद्धनगर( मनोज वत्स )उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को जेवर स्थित निर्माणाधीन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री विशेष रूप से यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह द्वारा किए जा रहे कार्यों से संतुष्ट दिखाई दिए। एयरपोर्ट क्षेत्र से संबंधित अवसंरचना, कनेक्टिविटी और भूमि विकास कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री ने उनकी सराहना की। व्यापक निरीक्षण—टर्मिनल, सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक प्लान की समीक्षा मुख्यमंत्री ने एयरपोर्ट टर्मिनल, उद्घाटन स्थल, सुरक्षा प्रबंधन, ट्रैफिक व्यवस्था और निर्माण प्रगति का बारीकी से निरीक्षण किया।उन्होंने संबंधित सभी विभागों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। एयरपोर्ट बोर्डरूम में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक निरीक्षण के बाद सीएम ने एयरपोर्ट बोर्डरूम में समीक्षा बैठक की। बैठक में उपस्थित थे— मा0 मंत्री नगर विमानन मंत्रालय सचिव एवं अपर मुख्य सचिव नागरिक उड्डयन डीजी, डीजीसीए डीजी, BCAS DIG, CISF एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) के सीईओ व नोडल अधिकारी जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग के अधिकारी निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि बैठक में परियोजना की वर्तमान स्थिति और उद्घाटन तैयारियों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया। सीईओ राकेश कुमार सिंह के काम की मुख्यमंत्री ने की सराहना मुख्यमंत्री योगी ने समीक्षा के दौरान कहा कि—“यमुना प्राधिकरण द्वारा एयरपोर्ट से जुड़े कार्यों को तेज़ी और बेहतर समन्वय के साथ आगे बढ़ाया गया है। सीईओ राकेश कुमार सिंह और उनकी टीम ने अपेक्षित कार्यों को समय से पूरा किया है।” सीएम ने आगे निर्देश दिया कि यमुना प्राधिकरण, NIAL, BCAS व CISF सभी मिलकर सुरक्षा व तकनीकी तैयारियों को सर्वोत्तम स्तर पर जल्द से जल्द पूरा करें। सुरक्षा मानकों को शीघ्र पूर्ण करने पर जोर मुख्यमंत्री ने BCAS व CISF अधिकारियों के साथ समन्वय मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी सुरक्षा मानक तुरंत सर्वोत्तम गुणवत्ता के साथ पूरे हों और सिक्योरिटी क्लीयरेंस शीघ्र प्राप्त किया जाए। एयरपोर्ट उद्घाटन—एक रनवे के साथ शुरुआत बैठक में दी गई प्रमुख जानकारी: उद्घाटन के समय एयरपोर्ट एक रनवे के साथ शुरू होगा। प्रारंभिक यात्री क्षमता 1.2 करोड़ वार्षिक होगी। पूर्ण विकास के बाद इसमें 5 रनवे होंगे। एयरपोर्ट 11,750 एकड़ क्षेत्र में फैलेगा। पूर्ण क्षमता पर एयरपोर्ट 30 करोड़ यात्रियों को सेवा देगा, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल होगा। वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति इस अवसर पर उपस्थित रहे— मा0 मंत्री लोक निर्माण विभाग बृजेश सिंह मा0 विधायक जेवर धीरेन्द्र सिंह मा0 राज्यसभा सांसद सुरेन्द्र नागर अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश दीपक कुमार मंडलायुक्त मेरठ भानू चंद्र गोस्वामी पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह जिलाधिकारी मेधा रूपमसाथ ही शासन, प्रशासन एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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रक्षा क्षेत्र के लिए चुनौती है तेजस का हादसा

संजय राय भारतीय युद्धक वायुयान तेजस दुबई में आयोजित हो रही वायुयान कौशल प्रदर्शनी में अज्ञात कारणों से दुर्घटनाग्रस्त होकर भूमि पर गिरा तथा तीव्र ध्वनि विस्फोट के साथ अग्नि गोले में परिवर्तित हो गया। यह दुर्घटना भारतीय समयानुसार अपराह्न 3.40 पर हुई। दुबई के अल मकतूम वायुस्थल पर वायुयान प्रदर्शनी गत 17 नवंबर से आयोजित की जा रही थी। युद्धक तेजस के संचालक पायलेट पैंतीस वर्षीय नमांश स्याल की इस दुर्घटना में दु:खद मृत्यु हो गई है। वायु यानों के उड़ान कौशल की प्रदर्शनी में उपस्थित एक दर्शक ने वक्तव्य दिया है कि दुर्घटनाग्रस्त तेजस के पायलेट ने यान में उत्पन्न त्रुटि को भांपकर भरसक प्रयास किया कि वो प्रदर्शनी देख रहे व्यक्तियों तथा अन्य संरचनाओं से दूर जाकर यान को भूमि पर उतारे। यदि ऐसा है, तो इससे यही सिद्ध होता है कि नमांश ने आत्मरक्षा की तुलना में सार्वजनिक जीवन एवं संरचनाओं की सुरक्षा का विचार ध्यान में रखते हुए ही यान को आपातिक स्थिति में दूर भूमि पर उतारने का प्रयास किया, किंतु भूतल पर गिरने से पहले ही उसमें अग्नि विस्फोट हुआ और वह विस्तृत अग्नि ज्वालाओं में परिवर्तित हो गया। तेजस यान के साथ यह पहली दुर्घटना नहीं है। इससे पूर्व 2024 में पोखरण में भी एक शस्त्र परीक्षण अभियान में तेजस अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है। सैन्य क्षेत्र में सेवारत् अधिसंख्य पदाधिकारिक सैन्य कर्मचारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, युद्धक यानों के परिचालन एवं अपरिचालन संबंधी प्रौद्योगिकियों से परिचित प्रौद्योगिकीविदों के लिए वायुयानों की दुर्घटना हमेशा ही एक जांच का विषय होता है। तेजस जैसे यान के विषय में विशिष्ट जानकारी रखने वाले तथा ऐसे यान के वास्तविक चालन, परिचालन अथवा संचालन के संपूर्ण विद्याधारक यही मान रहे हैं कि वायु प्रदर्शनी में लडख़ड़ा कर गिरे तेजस के गिरने व अनियंत्रित होने की सघन जांच किए बिना, शीघ्र ही किसी व्यर्थ निष्कर्ष पर पहुंचना अनुचित है। दुर्घटना की जांच हरसंभव कोण से होनी चाहिए। तकनीकी, प्रौद्योगिकीय कोण से तो जांच हो ही, साथ ही षड्यंत्रपरक दृष्टिकोण के साथ भी पड़ताल होना अति आवश्यक है। तेजस यान की अपने क्षेत्र में जो कार्य विशिष्टता है, जो सिंहस्थिति है तथा जो युद्धक प्रभावशीलता है, वह शत्रु देशों के लिए वायु व नौ सैन्य युद्धों की स्थिति में एक भयंकर चुनौती है। अत: यह शंका भी है ही कि वायु प्रदर्शनी में तेजस के प्रभाव को त्रुटिपूर्ण सिद्ध करके इसे युद्धक सामग्रियों के बाजार में निष्प्रभावी कर दिया जाए। ऐसा करने की मंशा रखने वाले, तेजस यान के अंदर और बाहर कोई भी मानवनिर्मित तात्कालिक त्रुटि उत्पन्न कर सकते हैं अथवा करवा सकते हैं। अत: भारत को, विशेषकर भारतीय वायु सेना को तेजस की दुर्घटना के कारणों में एक कारण ऐसे षड्यंत्र को भी मानना चाहिए। अभी तो भारतीय वायु सेना ने यान दुर्घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी घटना पर आश्चर्यमिश्रित दु:ख-शोक प्रकट किया है। गत दस-बारह वर्षों में जिस प्रकार देश में स्वदेशी तकनीक, प्रौद्योगिकी पर आधारित अस्त्रों-शस्त्रों तथा आवश्यक सैन्य सामग्रियों का विनिर्माण हो रहा है और साथ ही साथ रक्षा-सुरक्षा उपकरण बनाने वाली विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्ति व सहयोग पर आधारित यानों, विमानों, अस्त्र-शस्त्रों, युद्धक यानों के विनिर्माण व भारत की ओर से इनके निर्यात में भी उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है, उस स्थिति में दुर्घटना के स्वरूप में तेजस की लडख़ड़ाहट भारत के लिए गहन आघात है। चिंता का विषय यह भी है कि तेजस ने अभी किसी युद्धक स्थिति अथवा अभियान में अपना शौर्यमुखी प्रदर्शन करते हुए अपने नवोन्नत कौशल का परिचय नहीं दिया है। देशी-विदेशी यानों के आधुनिक वैशिष्ट्य के प्रदर्शन हेतु दुबई में उड़ान भर रहे तेजस के साथ हुई नवीनतम घटना अति विचारणीय है। यह यान भारत का स्वदेशी उत्पाद है। अत: इसके नवोन्नत होने के साथ-साथ हर स्थिति में सुरक्षित होने का व्यावहारिक प्रमाण भी अनिवार्य है। यदि इसमें तकनीकी त्रुटियां उभरेंगी तो यह युद्धक विमानों के बाजार में अयोग्य सिद्ध हो सकता है। भविष्य में ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न न हो, जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए। तेजस युद्धक विमान को गत कई वर्षों से एक विश्वसनीय एवं प्रभावी वायुयान माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि तेजस एक मल्टीरोल कम भार वाला, चौथी से भी आगे की पीढ़ी का, डेल्टा विंग धारी, कांमबैट एयरक्रॉफ्ट है। इसका भार 6500 किलोग्राम है। भारतीय मुद्रा में इसका मूल्य चार सौ करोड़ है। वायु सेना के पास कई तेजस हैं, जो युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसे मूलत: वायु-सुरक्षा, भूमिगत आक्रमण एवं अल्प भौगोलिक दूरी में होने वाली युद्धावधि में विविध सैन्य अभियानों की सफलता की दृष्टि से बनाया गया है। भारतीय विनिर्माता कंपनी हिंदुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड इसका निर्माण करती है। ऐरोनोटिकल डेवलपमेंट एजेंसी इस विमान की डिजाइनर है। यह भारतीय वायु तथा नौ सेना के लिए निर्मित किया गया सर्वाधिक उन्नत, आधुनिक एवं युद्ध कौशल में आधुनिक मानकों से सुसज्जित विमान है। सन् 2001 में इस विमान ने अपनी पहली उड़ान भरी तथा 2015 में यह भारतीय वायु सेना की सेवा में संलग्न हुआ था। यह अपनी पीढ़ी का सबसे लघु आकार वाला एवं कम भार वाला सुपरसोनिक युद्धक यान है। तेजस संबोधन के साथ इसका आधिकारिक नामकरण 2003 में पहली बार किया गया। यह एचएएल द्वारा एचएफ-24 मारुत के बाद निर्मित द्वितीय यान है, जो काम्बैट तकनीक के साथ वायुक्षेत्र से युद्ध में सम्मिलित होने के लिए शक्तिसंपन्न किया गया है। जैसा कि इसके बारे में उल्लेखनीय है कि यह भार में हल्का एवं उड़ान में लचीला है तथा इसमें एक विशेषता के रूप में मार्टिन-बेकर की जीरो-जीरो इजेक्शन सीट भी है, जो पायलेट को शून्य गति व शून्य ऊंचाई पर भी सुरक्षित बाहर निकालने की क्षमता से युक्त है, किंतु दुबई में पायलेट को तेजस की ऐसी अंतर्निहित सुविधा से वंचित होकर अपने प्राण गंवाने पड़े हैं। दुर्घटना के संबंध में इस मानवीय पहलू को विस्मृत नहीं किया जा सकता है कि विमान के क्षतिग्रस्त होने की तुलना में भारत की प्रमुख चिंता पायलेट के जीवन के संदर्भ में हो, और यदि वास्तव में नमांश ने यानों का प्रदर्शन देखने वाले लोगों तथा प्रदर्शनी स्थल पर विद्यमान लघु-विशाल संरचनाओं को सुरक्षित रखने की कामना के साथ अनियंत्रित यान को दूर ले जाकर आत्माहुति दी है,

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डिजिटल ठगी का दर्द! बुजुर्ग दंपती की जीवनभर की मेहनत लुट गई

मुंबई/गोरेगांव(इंद्र यादव ,ईशान टाइम्स)। कल्पना कीजिए, जीवनभर की मेहनत से जमा की गई बचत, जो बुढ़ापे की लाठी बननी थी, वो एक झटके में साइबर ठगों के जाल में फंसकर उड़ जाए। गोरेगांव के एक सेवानिवृत्त बुजुर्ग दंपती की कहानी सुनकर दिल दहल जाता है। महज 19 दिनों में 4 करोड़ 5 लाख 80 हजार रुपये की ठगी! यह सिर्फ पैसे की चोरी नहीं, बल्कि विश्वास की हत्या है, सपनों का कत्ल है। डिजिटल दुनिया के इस अंधेरे पक्ष ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारे बुजुर्ग, जो समाज की नींव हैं, कितने असुरक्षित हैं।यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज का आईना है। बुजुर्ग दंपती, जिन्होंने सालों की कड़ी मेहनत से अपना घर बनाया, बच्चों को पढ़ाया-लिखाया, अब रिटायरमेंट के दिनों में शांति की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन एक अनजान कॉल ने सब कुछ उलट दिया। 27 अक्टूबर को शुरू हुआ यह सिलसिला, जहां ठगों ने खुद को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई के अधिकारी बताकर बुजुर्ग को जाल में फंसाया। “आपके दस्तावेज मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहे हैं,” कहकर उन्होंने डराया। वीडियो कॉल पर फर्जी पूछताछ, व्हाट्सएप पर सरकारी लेटरहेड वाले नोटिस, एफआईआर, कोर्ट वारंट,सब कुछ इतना असली लगता था कि बुजुर्ग का दिल धड़क उठा। “पत्नी समेत गिरफ्तारी होगी, डिजिटल अरेस्ट हो जाएगा,” ऐसी धमकियां देकर ठगों ने बुजुर्ग को इतना सहमा दिया कि उन्होंने अपनी सारी बचत,जो बुढ़ापे की दवा, बच्चों की शादी या पोते-पोतियों की पढ़ाई के लिए थी,उनके ‘सीक्रेट अकाउंट’ में ट्रांसफर कर दी। 14 नवंबर तक 4 करोड़ से ज्यादा रुपये गायब! कल्पना कीजिए उस बुजुर्ग की आंखों में आंसू, जब उन्हें एहसास हुआ कि जीवनभर का संघर्ष व्यर्थ हो गया। उनकी पत्नी, जो शायद बीमार या कमजोर होंगी, वो कैसे सहन कर पाईंगी यह सदमा! यह ठगी सिर्फ आर्थिक नहीं, भावनात्मक तबाही है। परिवार टूट जाता है, रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं, और बुजुर्ग अकेलेपन की गहराई में डूब जाते हैं। उत्तर प्रदेश की साइबर सेल ने इस मामले में तीन आरोपियों,विलास गेणू मोरे उर्फ रेहान खान, रिजवान शौकत अली खान और कासिम रिजवान शेख,को गिरफ्तार किया है। ये लोग विदेशी साइबर हैंडलरों के लिए बैंक अकाउंट मुहैया कराते थे, जहां ठगी की रकम जमा होती थी। डीसीपी पुरुषोत्तम कराड और सीनियर पीआई किरण आहेर की टीम इस नेटवर्क को तोड़ने में जुटी है। लेकिन सवाल उठता है,कितने और परिवार ऐसे जाल में फंसेंगे!भारत में साइबर क्राइम की दर हर साल बढ़ रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में ही लाखों मामले दर्ज हुए, और बुजुर्ग सबसे आसान शिकार बन रहे हैं। वे तकनीक से अनजान होते हैं, विश्वास जल्दी कर लेते हैं, और परिवार अक्सर दूर रहता है।यह घटना समाज को झकझोरती है। हमारा समाज, जहां बुजुर्गों को पूज्य माना जाता है, क्या उन्हें अकेला छोड़ सकता है! युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वे अपने माता-पिता को साइबर जागरूक बनाएं। अनजान कॉल पर विश्वास न करें, सरकारी एजेंसियां कभी फोन पर पैसे मांगती नहीं,ऐसी बेसिक बातें सिखाएं। सरकार को भी सख्त कदम उठाने चाहिए: साइबर शिक्षा अभियान चलाएं, बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन बनाएं, और ठगों पर कड़ी सजा दें। क्या हम इंतजार करेंगे अगली त्रासदी का! डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सुरक्षा है। अगर आपके परिवार में बुजुर्ग हैं, तो आज ही बात कीजिए। याद रखिए, ठगी से ज्यादा दर्दनाक है विश्वास का टूटना। समाज एकजुट हो, तभी ऐसे अपराध रुकेंगे।

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संविधानदिवस पर दिल्ली में ‘तिरंगा’पुस्तक का भव्य विमोचन पूर्व CJI के.जी. बालकृष्णन ने किया

नई दिल्ली(इंद्र यादव,ईशान टाइम्स ग्रुप)।संविधान दिवस के पावन अवसर पर नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के.जी. बालकृष्णन ने जगद्गुरु कृष्णानंद सरस्वती एवं अन्य संभ्रांत अतिथियों की उपस्थिति में चर्चित पुस्तक “तिरंगा” का विधिवत विमोचन किया। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री श्याम जाजू की विशेष उपस्थिति रही। मंच पर जगद्गुरु कृष्णानंद सरस्वती, जस्टिस के.जी. बालकृष्णन तथा अन्य गणमान्य नागरिक एक साथ उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर तिरंगे के प्रतीक चिह्न वाली इस पुस्तक का लोकार्पण किया।पुस्तक “तिरंगा” राष्ट्रीय ध्वज के गौरव, उसके इतिहास और भारतीय संविधान में निहित मूल्यों को समर्पित है। विमोचन के बाद उपस्थित लोगों ने इसे राष्ट्रप्रेम और संवैधानिक चेतना को जगाने वाली महत्वपूर्ण रचना बताया। कार्यक्रम में कांस्टीट्यूशन क्लब के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा उपस्थित रहे। संविधान दिवस और “रत्न” थीम के साथ आयोजित इस समारोह ने राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों को फिर से याद दिलाया। पुस्तक के लेखक ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट श्री अनिल कुमार यादव जी ने विमोचन के बाद कहा कि “तिरंगा सिर्फ़ कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं और बलिदानों का प्रतीक है। इस पुस्तक के माध्यम से नई पीढ़ी तक यह संदेश पहुँचाना मेरा उद्देश्य है।”कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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‘विपक्ष-मुक्त लोकतंत्र’ की लहर: राजनीतिक परिदृश्य में एक खतरनाक प्रवृत्ति

संजय राय, भारतीय राजनीति में पिछले एक दशक के दौरान एक ऐसी भाषा और सोच विकसित होती दिखाई दी है, जिसका मूल उद्देश्य व्यवस्था से विपक्ष की प्रभावी भूमिका को धीरे-धीरे समाप्त करना या कमज़ोर करना प्रतीत होता है। इसकी शुरुआत 2013 में उस समय हुई जब गोवा में भाजपा की बैठक के दौरान नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार अभियान का नेतृत्व सौंपा गया और उन्होंने अपने संबोधन में पहली बार “कांग्रेस-मुक्त भारत” का विचार देश के सामने रखा। उसके बाद वही विचार विभिन्न रूपों, नारों और स्वरूपों में बार-बार दोहराया जाता रहा—कभी “कांग्रेस संस्कृति” को खत्म करने की बात, कभी “पंजा-छोड़ो” अभियान, कभी परिवारवाद और भ्रष्टाचार समाप्त करने के नाम पर विपक्ष को लगातार कटघरे में खड़ा करना। हालाँकि 2024 के चुनावों में कांग्रेस ने 99 सीटों के साथ अपनी उपस्थिति दिखाई, फिर भी विपक्ष को कमजोर करने के राजनीतिक प्रयास रुकते नहीं दिखे। उत्साह से भरी भाजपा अब बिहार की जीत के बाद दिल्ली से लेकर दक्षिण भारत तक विपक्षी दलों को राजनीतिक रूप से कमजोर करने में जुटी है। इसी बीच प्रधानमंत्री द्वारा सूरत में दिए एक बयान ने राजनीतिक विमर्श को फिर गर्मा दिया। उन्होंने विपक्षी सांसदों—खासतौर पर कांग्रेस के युवा नेताओं—के “करियर” को लेकर चिंता जताई और दावा किया कि उन्हें पार्टी में बोलने तक का अवसर नहीं मिलता। लेकिन इस बयान ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है: क्या सत्तापक्ष, जो अपने ही वरिष्ठ नेताओं को हाशिए पर धकेलने का लंबा इतिहास रखता है, सच में विपक्षी नेताओं के भविष्य को लेकर चिंतित हो सकता है? राजनीति के भीतर का विरोधाभास प्रधानमंत्री की यह “चिंता” इसलिए भी सवालों के घेरे में है क्योंकि भाजपा के भीतर ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जहाँ वरिष्ठ नेताओं को या तो सक्रिय politics से दूर किया गया या ऐसी स्थिति में पहुँचा दिया गया जहाँ वे औपचारिक रूप से मौजूद तो रहे, पर प्रभावहीन हो गए। 2002 के बाद जब अटल बिहारी वाजपेयी मोदी को गुजरात की कुर्सी से हटाना चाहते थे, तब लालकृष्ण आडवाणी वह नेता थे जिन्होंने मोदी का बचाव किया। लेकिन आगे चलकर आडवाणी स्वयं ऐसे “मार्गदर्शन मंडल” में पहुँचा दिए गए, जिसकी कोई वास्तविक भूमिका नहीं थी। मुरली मनोहर जोशी को वाराणसी में मोदी की उम्मीदवारी के लिए सीट छोड़नी पड़ी, बाद में वे भी इसी मंडल का हिस्सा बन गए। यही तर्क 75 वर्ष की उम्र सीमा पर भी लागू हुआ—लेकिन वही सीमा आज स्वयं मोदी के लिए अप्रासंगिक हो चुकी है। दूसरी ओर 80 वर्ष से अधिक उम्र के कई नेताओं को राज्यपाल या मंत्री बनाया गया। परन्तु सुब्रमण्यम स्वामी, शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी जैसे नेताओं को दरकिनार करने में कोई झिझक नहीं दिखाई गई। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक था कि यदि भाजपा अपने ही वरिष्ठों के राजनीतिक भविष्य की परवाह नहीं करती, तो विपक्ष के करियर को लेकर उसकी “विचारशीलता” कैसे वास्तविक हो सकती है? सत्ता बनाम आवाज़: संसद में क्या होता है? प्रधानमंत्री के इस बयान का एक दूसरा पहलू भी है। वे कहते हैं कि विपक्षी सांसदों को बोलने नहीं दिया जाता—पर देश ने कई बार यह भी देखा है कि जब विपक्ष सवाल उठाता है, तो सत्ता पक्ष के व्यवधानों के कारण बहस अधूरी रह जाती है। जहाँ तक राहुल गांधी का सवाल है—उनका बोलना इसलिए खटकता है क्योंकि वे भ्रष्टाचार, उद्योगपति-पक्षपात, नोटबंदी, जीएसटी, संस्थाओं पर नियंत्रण, चुनावी प्रक्रियाएँ, किसान आंदोलन, जातीय जनगणना और आर्थिक असमानता जैसे विषयों को खुलकर उठाते हैं। यह वे मुद्दे हैं जिनसे सत्ता पक्ष असहज रहता है। और शायद यही वजह है कि राहुल गांधी के खिलाफ लगातार वैचारिक व राजनीतिक मोर्चेबंदी की जा रही है—नवीनतम उदाहरण 272 पूर्व अधिकारियों के हस्ताक्षर वाला वह पत्र है जिसमें राहुल पर “संविधान-विरोधी” टिप्पणियों का आरोप लगाया गया। लेकिन कांग्रेस ने उसी पत्र में शामिल कई अधिकारियों पर गंभीर अनैतिक आचरण और भ्रष्टाचार के आरोप उजागर कर दिए, जिससे इस कथित नैतिक अभियान की विश्वसनीयता स्वयं संदिग्ध हो गई। परिवारवादी राजनीति पर “रणनीतिक हस्तक्षेप” इन दिनों बिहार की राजनीति में भी यही प्रवृत्ति देखी जा रही है। लालू यादव के परिवार में उठे मतभेदों को हवा देने की कोशिशें साफ दिखाई देती हैं। इन प्रयासों के पीछे विपक्ष को कमजोर करने की उसी बड़ी रणनीति का संकेत मिलता है, जिसकी जड़ें 2013 के “कांग्रेस-मुक्त भारत” नारे में ही छिपी हुई हैं। वास्तविक चुनौती: लोकतंत्र को विपक्ष की आवश्यकता है लोकतंत्र की सेहत तभी मजबूत होती है जब उसमें सत्ता का दुरुपयोग न हो और विपक्ष निर्भय होकर सवाल पूछ सके।आज स्थिति उल्टी दिखती है— विपक्षी दलों को कमजोर करने के प्रयास उनके नेताओं को तोड़ने की राजनीति आलोचनाओं को संस्थागत हमलों के रूप में चित्रित करना असहमति को “देश-विरोध” या “अस्थिरता” से जोड़ना ये सब संकेत हैं कि लोकतंत्र को विपक्ष से नहीं, बल्कि विपक्ष-मुक्त वातावरण बनाने की कोशिशों से खतरा है। प्रधानमंत्री द्वारा विपक्षी सांसदों के “राजनीतिक भविष्य” को लेकर जताई गई चिंता न तो स्वाभाविक लगती है और न ही परिस्थितियों से मेल खाती है। यह उन लगातार चल रहे प्रयासों की अगली कड़ी लगती है जो देश के राजनीतिक संतुलन को एक-दलीय प्रभुत्व की ओर ढकेलना चाहते हैं। विपक्ष, चाहे वह कांग्रेस हो, क्षेत्रीय दल हों या कोई अन्य राजनीतिक शक्ति—लोकतंत्र का सुरक्षा कवच होता है।और यही कारण है कि आज असली खतरा किसी एक नेता या दल में नहीं, बल्कि उस सोच में है जो विपक्ष-मुक्त राजनीति को लोकतंत्र की उपलब्धि मानती है।

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अब शिकायतों पर होगी ईमानदार कार्रवाई तय:महंत मनोज शर्मा

चंडीगढ़( ईशान राय)।विश्व हिंदू परिषद ,चंडीगढ़(पंजाब प्रांत) के पूर्व सोशल मीडिया प्रभारी महंत मनोज शर्मा ने चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 में शामिल करने के केंद्रीय प्रस्ताव का दमदार और ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए जोरदार स्वागत किया है।महंत मनोज शर्मा ने कहा कि लंबे समय से उठाए जा रहे उनके मुद्दों और भेजी गई शिकायतों पर अब निश्चित, पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई होना तय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस प्रस्ताव ने उनके विश्वास को और अधिक मजबूत कर दिया है कि अब चंडीगढ़ प्रशासन में जवाबदेही से समझौता नहीं होगा।उन्होंने इसे चंडीगढ़ के भविष्य, सुशासन और जनहित के लिए गेम–चेंजर फैसला बताया और कहा कि यह कदम वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान की गति को कई गुना बढ़ा देगा।

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