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नदियों में डूबती ज़िंदगियाँ : हादसों का सिलसिला कब थमेगा?

नदियों में डूबती ज़िंदगियाँ: हादसों का सिलसिला कब थमेगा? संजय राय नदियाँ जीवनदायिनी कही जाती हैं, मगर अब वे अकसर दर्दनाक हादसों की खबरों में बदल जाती हैं। गर्मियों में नहाने और सैर-सपाटे के लिए लोग नदी-नालों में उतरते हैं, लेकिन ज़रा सी असावधानी उनकी जान ले लेती है। हर साल दर्जनों नहीं, सैकड़ों परिवार ऐसे हादसों से उजड़ जाते हैं। पांवटा साहिब का ताज़ा मामला हाल ही में हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में तीन युवकों की जान यमुना नदी ने ले ली। एक युवक डूबने लगा तो दो साथी उसे बचाने कूद पड़े, लेकिन तीनों ही वापस नहीं लौटे। कई दिनों तक गोताखोर और पुलिस उनकी तलाश में जुटे रहे, मगर हादसे ने तीन परिवारों को हमेशा के लिए शोक में डाल दिया। क्यों दोहराए जाते हैं ऐसे हादसे? यह पहली बार नहीं हुआ। 2014 में मंडी ज़िले के थलौट में हैदराबाद से घूमने आए 24 छात्र लारजी प्रोजेक्ट से छोड़े गए पानी की तेज़ धारा में बह गए थे। 2019 में चंबा, नादौन और बरोट जैसे स्थानों पर एक ही दिन तीन अलग-अलग जगहों पर लोग डूबकर मर गए। आगरा की यमुना नदी में भी कई बच्चों की ज़िंदगी ऐसे ही बह गई। चेतावनी बोर्ड और प्रशासनिक अपीलें होने के बावजूद लोग इन्हें नज़रअंदाज़ करते हैं। जिम्मेदारी किसकी? इन घटनाओं के पीछे दोहरी लापरवाही साफ झलकती है। लोगों की लापरवाही: मनाही के बावजूद नदियों और खड्डों में नहाने जाना। प्रशासन की ढिलाई: सुरक्षा प्रबंध, चेतावनी और निगरानी की कमी। अगर दोनों पक्ष अपनी ज़िम्मेदारी निभाएँ तो अधिकतर हादसों को रोका जा सकता है। क्या होना चाहिए? नदियों और खड्डों के किनारे रेलिंग, बैरिकेड और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएँ। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिस और गोताखोरों की तैनाती हो। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को लगातार जागरूक किया जाए। नियम तोड़ने वालों पर सख़्त कार्रवाई हो। सबक कब सीखा जाएगा? हर हादसे के बाद कुछ दिन चर्चा होती है, फिर सब भूल जाते हैं। लेकिन जो परिवार अपने बच्चों और अपनों को खो देते हैं, उनके लिए यह दर्द हमेशा का होता है। ज़रूरत है कि लोग भी सावधान हों और प्रशासन भी सख़्ती बरते, ताकि नदियाँ जीवन देने वाली धारा बनी रहें, मौत का जाल नहीं।

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मुख्यमंत्री ने पंचकूला में किया राज्य स्तरीय खेल महाकुंभ के द्वितीय चरण का उद्घाटन

सरकार का लक्ष्य हरियाणा को न केवल भारत की बल्कि विश्व की खेल राजधानी बनाना: मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी 9 हजार 959 खिलाड़ी 17 विभिन्न खेल प्रतिस्पर्धाओं में ले रहे हैं भाग मुख्यमंत्री ने पेरिस में हुए पैरा-ओलम्पिक खेलों में पदक जीतने वाले हरियाणा के 8 खिलाड़ियों को 42 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर किया सम्मानित पंचकूला , 24 सिंतबर(ईशान टाइम्स)– हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हरियाणा को न केवल भारत की बल्कि विश्व की खेल राजधानी बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले सालों में हरियाणा में खेलों के लिए एक विजन विकसित किया , जिसका उद्देश्य हर बच्चे को खेल से जोड़ने, हर गांव में खेल का मैदान बनाने और हर उस युवा को अवसर देना है जिसमें खेल के प्रति ललक है। मुख्यमंत्री आज ताउ देवीलाल खेल स्टेडियम, पंचकूला में राज्य स्तरीय खेल महाकुम्भ के द्वितीय चरण के उद्घाटन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को मुख्यातिथि के रूप में संबांधित कर रहे थे। इस अवसर पर श्री नायब सिंह सैनी ने राज्य स्तरीय खेल महाकुम्भ के द्वितीय चरण के उद्घाटन की घोषणा की और खिलाड़ियों से खेल भावना से खेलते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने का आह्वान किया। इस मौके पर खेल मंत्री श्री गौरव गौतम भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल महाकुंभ सिर्फ ऐक खेल का आयोजन नहीं बल्कि हरियाणा के युवाओं के सपनों को उड़ान देने का मंच है। यह उस भावना का प्रतीक है, जो खेलों में हरियाणा को नंबर वन बनाती है। उन्होंने कहा कि खेल महाकुम्भ की शुरुआत हरियाणा के स्वर्ण जयंती वर्ष 2017 में की गई थी। तब से अब तक पांच खेल महाकुम्भों का सफलतापूर्वक आयोजन किया जा चुका है। गत 2 अगस्त से 4 अगस्त तक चले खेल महाकुम्भ के पहले चरण में 26 खेलों में प्रदेश के कुल 15 हजार 410 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। आज इसके दूसरे चरण में 9 हजार 959 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के लिए खेलने का सपना हर खिलाड़ी का होता है, परंतु उस सपने को सच करने के लिए लगातार अभ्यास, अनुशासन और आत्मबल चाहिए। खिलाड़ियों में इन गुणों को निखारने के लिए ही सरकार द्वारा खेल प्रतियोगिताओं का निरंतर आयोजन किया जा रहा है। इनमें खिलाड़ियों को अपनी दक्षता और क्षमता को और अधिक ऊंचा उठाने का अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2036 के ओलम्पिक खेलों में भारत को खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने उन खेलों को भारत में करवाने की इच्छा भी व्यक्त की है। मुझे विश्वास है कि उस समय हरियाणा के खिलाड़ी सबसे अधिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन करेंगे। इसके लिए हम पहले से ही तैयारियां शुरू कर चुके हैं। हमारा सपना है कि हरियाणा का हर गांव एक ऐसा खिलाड़ी दे, जो विश्व मंच पर भारत का परचम लहराए। मुझे गर्व है कि हमने इस सपने को साकार करने की दिशा में लगातार काम किया है और आज खेल महाकुंभ उसी कड़ी का एक स्वर्णिम अध्याय है। श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि खेल प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। बचपन से ही खिलाड़ियों को तराशने के लिए प्रदेश में खेल नर्सरियां खोली हुई हैं। इनमें उन्हें वित्तीय सहायता व प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इस समय प्रदेश में 1 हजार 489 खेल नर्सरियां कार्यरत हैं। इनमें 37 हजार 225 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन नर्सरियों में नामांकित 8 से 14 वर्ष की आयु के खिलाड़ियों को 1500 रुपये तथा 15 से 19 वर्ष की आयु के खिलाड़ियों को दो हजार रुपये प्रति माह दिये जाते हैं। यही नहीं खेल नर्सरी प्रशिक्षकों को 25 हजार रुपये तक मानदेय भी दिया जा रहा है। इसके अलावा उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित रोजगार सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा उत्कृष्ट खिलाड़ी सेवा नियम 2021 बनाये हैं। इसके तहत खेल विभाग में 550 नए पद बनाए गये हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने गत वर्ष पेरिस में हुए पैरा-ओलम्पिक में पदक जीतने वाले हरियाणा के 8 खिलाड़ियों को 42 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया। इस प्रतियोगिता में हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 स्वर्ण पदक और 3 रजत पदक अर्जित किए। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 31 प्रशिक्षकों को 3 करोड़ 56 लाख रुपये की राशि देकर सम्मानित किया। उन्होंने कार्यक्रम में हरियाणा के उत्कृष्ट खिलाड़ियों, राष्ट्रीय खेल-2025 के स्वर्ण पदक विजेताओं, 75 उत्कृष्ट खेल नर्सरियों के इंचार्ज और खेल विभाग के 75 उत्कृष्ट कोच को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इससे पूर्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खेल मंत्री श्री गौरव गौतम ने कहा कि खेल महाकुंभ 2025 के दूसरे चरण में 9959 खिलाड़ी तीन दिनों तक 17 विभिन्न खेल प्रतिस्पर्धाओं में अपना दमखम दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रतिस्पर्धाएं प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा की खेल नीती देश मे सर्वश्रेष्ठ है। खिलाड़ियों के परिश्रम और हरियाणा की खेल नीति का ही परिणाम है कि आज हरियाणा के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में 15 साल बाद नवंबर में हरियाणा ओलंपिक खेलों का आयोजन होने जा रहा है। इस अवसर पर विधायक जगमोहन आंनद और रणधीर पनिहार, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता, बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष बंतो कटारिया, जिला अध्यक्ष अजय मितल, खेल विभाग के प्रधान सचिव नवदीप सिंह विर्क, महानिदेशक संजीव वर्मा, उपायुक्त सतपाल शर्मा, पुलिस उपायुक्त सृष्टि गुप्ता, एसडीएम चंद्रकांत कटारिया, जे एस नैन, जिला खेल अधिकारी नील कमल, मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रे, मीडिया कार्डिनेटर अशोक छाबडा के अलावा अन्य गणमान्य व्यक्ति और खिलाडी उपस्थित थे।

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स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती पर 17 महिला छात्राओं के यौन शोषण (मौलेशन) का आरोप

राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले में लिया स्वत: संज्ञान दिल्ली( इंद्र यादव )। 4 अगस्त 2025 को वसंत कुंज नॉर्थ थाने में पीए मुरली (श्री शृंगेरी मठ के प्रशासक) की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। इसमें BNS की धारा 75(2), 79 और 351(1) के तहत यौन उत्पीड़न, अश्लील मैसेज भेजना, अनचाही शारीरिक संपर्क और धमकी जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस ने 32 छात्राओं के बयान दर्ज किए, जिनमें से 17 ने शिकायत की।अतिरिक्त खुलासा: जांच के दौरान संस्थान के बेसमेंट से एक वॉल्वो कार जब्त हुई, जिस पर फर्जी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट “39 UN 1” लगी थी। इसके लिए 25 अगस्त 2025 को अलग FIR दर्ज की गई (धारा 345(3), 318(4), 336(3), 340(2) BNS) स्वामी चैतन्यानंद फरार हैं और दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान व उत्तराखंड में उनकी तलाश की जा रही है। श्री शारदा पीठम (शृंगेरी) ने उन्हें सभी पदों से हटा दिया है और उनके कार्यों को “अवैध व अनुचित” बताया है। आरोपी पर पहले भी मौलेशन और फ्रॉड के मामले दर्ज हो चुके हैं, जो अब फिर से सामने आ रहे हैं।पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच में चैतन्यानंद की whatsapp chat हाथ लगी है, कुछ चैट उसने छात्राओं पर दबाव बनवाकर डिलीट भी करवा दी है।चैट से खुलासा हुआ कि वह छात्राओं को रात में मैसेज करता था. उसने एक छात्रा को मैसेज किया कि मेरे कमरे में आ जाओ, एक अन्य चैट में वह छात्रा को विदेश घूमने का झांसा देता नजर आया. राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले में स्वत: संज्ञान ले लिया है। आयोग ने पुलिस से इस केस में तीन दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है।

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राम के तीर से ढेर हुई ताड़का, पंडाल में गूंजे जयकारे

राम के बाण से गिरी ताड़का, गूंजे ‘जय श्रीराम’ के नारेराम-लक्ष्मण के पराक्रम से कांपी ताड़का मोहाली, 24 सितम्बर(संजय राय): श्री रामलीला एवं दशहरा कमेटी फेज़-1 मोहाली की रामलीला की तीसरी रात्रि में रामलीला एवं दशहरा मैदान में मंचित ताड़का वध प्रसंग ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। तीसरी रात्रि के मुख्य अतिथि स्काई हाइट रिलेटर की मालिक काक्षी सुखीजा थी। उन के साथ शिवानी मनचंदा, विवेक मनचंदा, सौरव सूद और प्रिया सूद आए थे। कार्यक्रम की शुरुआत छोटे राम और लक्ष्मण के मंच पर आगमन के साथ हुई। ऋषि विश्वामित्र के मार्गदर्शन में दोनों भाइयों ने ताड़का और उसके अनुचरों से संघर्ष किया। मंचन के दौरान जब राम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर तीर छोड़ा और ताड़का का वध किया, तो पूरा मैदान “जय श्रीराम” के जयकारों से गूंज उठा। ताड़का की भूमिका अजय कुमार ने निभाई, जिनके दमदार संवाद और प्रभावशाली अदाकारी ने पूरे पंडाल का ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं छोटे राम और लक्ष्मण के साहस और शौर्यपूर्ण अभिनय ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात्, मंचन में मारीच, सुबाहु और अन्य राक्षसों के साथ हुए युद्ध को भी शानदार ढंग से प्रस्तुत किया गया। दर्शकों ने हर दृश्य का उत्साहपूर्वक स्वागत किया और तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का हौसला बढ़ाया। आज के मंचन में — छोटे राम की भूमिका यश सोढ़ी ने, छोटे लक्ष्मण की भूमिका अर्णव ने, राजा दशरथ का अभिनय अमरिंदर सिंह ने, सुमंत की भूमिका मोनू भारती ने, गुरु वशिष्ठ का अभिनय आयुष शर्मा ने किया। मंत्रियों की भूमिकाएँ रुद्र, आर्यन भाटिया, आनंद और रंजीत अरमानी ने निभाईं। द्वारपाल की भूमिका भी मंच पर प्रस्तुत की गई। ऋषि विश्वामित्र के रूप में सिकंदर राणा, मारीच के रूप में मनीष कपुरिया, सुबाहु के रूप में आदित्य खन्ना, जबकि अन्य राक्षसों की भूमिकाएँ विक्रमजीत, यतिन खट्टर और रोहित ने निभाईं। कमेटी के प्रेसिडेंट आशु सूद ने बताया कि ताड़का वध प्रसंग यह सिखाता है कि अधर्म और अन्याय चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः धर्म और सत्य की ही विजय होती है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दिनों में अहिल्या उद्धार और सीता स्वयंवर जैसे प्रसंग मंचित किए जाएंगे।

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हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारिणी बैठक संपन्न

चंडीगढ़/पंचकूला 24सितंबर ,संजय राय ।हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुधा भारद्वाज की अध्यक्षता में आज पंचकुला में प्रदेश की सभी प्रदेश कार्यकारिणियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पर्यवेक्षक उमा सोनी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। बैठक में संगठन विस्तार और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश की प्रत्येक प्रदेश कार्यकारिणी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और संगठन को मज़बूत करने के लिए अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रदेश अध्यक्ष सुधा भारद्वाज ने कहा कि महिला कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य घर-घर तक कांग्रेस की नीतियों और विचारधारा को पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि हर कार्यकर्ता को संगठन की रीढ़ की हड्डी बनकर काम करना होगा ताकि जनता के मुद्दे मजबूती से उठाए जा सकें। बैठक के दौरान सभी पदाधिकारियों ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि संगठन को मज़बूती देने के साथ-साथ लोकतंत्र पर हो रहे हमलों और वोट चोरी जैसी घटनाओं के खिलाफ़ मज़बूत आवाज़ उठाई जाएगी।इसी कड़ी में बैठक के दौरान ही वोट चोरी के खिलाफ़ हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जिसमें सभी उपस्थित पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

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गाजीपुर के पूर्व विधायक अवधेश राय शास्‍त्री के निधन से छाई शोक की लहर

गाजीपुर के पूर्व विधायक अवधेश राय शास्‍त्री के निधन पर रुक नहीं रहा मातमकल होगा उनका अंतिम संस्कारलोगों का कहना है कि कभी अवधेश को नेहरू जी ने गोद लेकर दुलारा थाआज अँग्रेजी हुकूमत से लड़ने वाले शहीद परिवार का अंतिम योद्धा भी चला गया गाजीपुर शहीद पुत्र व कांग्रेस के पूर्व विधायक अवधेश राय शास्‍त्री का निधन आज मंगलवार को दोपहर एक बजे उनके निवास स्‍थान इंद्रपुरी कालोनी शास्‍त्रीनगर लंका गाजीपुर में हो गया। उनके निधन के खबर से उनके शुभचिंतकों और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गयी। उनके निधन की खबर सुनकर बड़ी संख्‍या में कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता उनके घर पहुंच रहे हैं। यह जानकारी उनके पुत्र एडो. राजेश राय ने दी है। उन्‍होने बताया कि उनका अंतिम संस्‍कार बुद्धवार 24 सितंबर को गाजीपुर के श्‍मशान घाट पर सुबह में किया जायेगा। कांग्रेस पार्टी के वरिष्‍ठ नेता रविकांत राय ने उनके निधन पर शोक व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि अवधेश राय शास्त्री 1984 से 1989 तक दिलदारनगर विधानसभा से कांग्रेस पार्टी के विधायक रहे। वह एक ईमानदार और कर्मठ नेता थे। अवधेश राय शास्‍त्री ने आजीवन कार्यकर्ताओं के हक की लड़ाई लड़ी।जवाहर लाल नेहरू ने दो माह के शहीद पुत्र अवधेश राय शास्‍त्री को गोद में लेकर की थी भविष्‍यवाणीआज़ादी के बाद भारत के प्रधानमंत्री बने जवाहर लाल नेहरू ने दो माह के शहीद पुत्र अवधेश राय शास्‍त्री को गोद में लेकर भविष्यवाणी की थी. उन्हें अपनी गोद में उठाकर उन्‍हे पुचकारते हुए शेरपुर में कहा था कि शेरपुर के जो आठ लोग शहीद हुए है अगर यह 18 अगस्‍त 1942 को मुहम्‍मदाबाद तहसील पर शहीद नही होते तो आजादी विधवा बनकर रह जाती और यह बच्‍चा शहीदो का नाम रोशन करेगा। नेहरू जी का यह वाक्‍य आगे चलकर शत-प्रतिशत सही हुए। अवधेश राय शास्‍त्री ने जीवनपर्यत्‍न अपने ईमानदारी और नीति सिद्धांत से समझौता नही किया और अष्‍ट शहीदो का नाम कभी भी झुकने नही दिया। 18 अगस्‍त 1942 को मुहम्‍मदाबाद तहसील मुख्‍यालय पर अंग्रेजो का झंडा लहरा रहा था, पूरे देश में क्रांति की ज्‍वाल धधक रही थी, हर तरफ अंग्रेजो भारत छोड़ो का नारा लग रहा था, ऐसे वातावरण शिवपूजन राय के नेतृत्‍व में शेरपुर के आठ भारत माता के वीर सपूत तहसील मुख्‍यालय पर लगा अंग्रेजो का झंडा उतारकर भारत का तिरंगा लहराने के लिए लगाने लगें तभी अंग्रेज सिपाहियो ने गोलियां चलानी शुरू कर दी, एक के बाद एक आठ वीर सपूत शहीद हो गये लेकिन भारत मां का झंडा नीचे गिरने नही दिया। इन शहीदो में अवधेश राय शास्‍त्री के पिता नारायण राय भी थे। इस दुखद घटना की खबर जवाहर लाल नेहरू को लगी तो वह तुरंत शेरपुर आये और शहीद परिवारो से मिलें। उस समय में अवधेश राय शास्‍त्री केवल दो माह के थे। नेहरू जी ने उनको गोदी में उठाकर उनकी भविष्‍यवाणी की थी कि शहीदो को नाम यह बच्‍चा रोशन करेगा। तत्‍कालीन कांग्रेस के राष्‍ट्रीय महासचिव स्‍व. राजीव गांधी का कार्यक्रम मुहम्‍मदाबाद शहीद पार्क में था जब राजीव गांधी ने वहां पर आठ शहीदो के कलश को देखा तो इसके बारे में जानकारी प्राप्‍त की। उन्‍होने कहा कि शहीद के परिवार से किसी लड़के का नाम भेजिए पार्टी एमएलए का टिकट देगी। इसके बाद तत्‍कालीन प्रदेश अध्‍यक्ष बीपी सिंह ने अष्‍ट शहीद को आधार मानकर अवधेश राय शास्‍त्री को टिकट दिया और वह दिलदारनगर विधानसभा से विधायक बनें। अवधेश राय शास्‍त्री के निधन पर पूरा गाजीपुर ग़मगीन है l

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25सितंबर को ताऊ देवीलाल की 112वीं जयंती मनाएगी जे जे पी

25 सितंबर को पंचकूला ताऊ देवीलाल स्टेडियम में श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी श्रद्धेय स्व. चौधरी देवी लाल की जयंती – ओ पी सिहाग पंचकूला, 23 सितंबर(ईशान राय,ईशान टाइम्स )। जगत ताऊ हिन्दुस्तान के किसानों , गरीबों एवं आम आदमी के दिलों पर राज करने वाले भारत के पूर्व उप -प्रधानमंत्री श्रद्धेय स्व. चौधरी देवीलाल की 112 वीं जयंती पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में सुबह 8 बजे पूरी श्रद्धा के साथ मनाई जायेगी। इस बारे चर्चा करते हुए जननायक जनता पार्टी जिला पंचकूला के जिला अध्यक्ष ओ पी सिहाग ने बताया कि 25 सितंबर को श्रद्धेय ताऊ देवीलाल का 112 वां जन्म दिन है तथा जननायक जनता पार्टी ने निर्णय लिया है कि उनके जन्मदिन पर पूरे प्रदेश में 112 स्थानो पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सिहाग ने कहा कि पंचकूला में ताऊ देवीलाल स्टेडियम में सुबह 8 बजे जननायक जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं तथा ताऊ देवीलाल को चाहने वाले द्वारा उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन भेंट करके उनको याद किया जाएगा तथा उनको श्रद्धांजलि दी जाएगी । उनकी जीवनी पर विभिन्न वक्ताओं द्वारा प्रकाश डाला जायेगा , तत्पश्चात सेक्टर 12- ए अनाथ बच्चों के आश्रम में जाकर उनको फ्रूट्स एवं मिठाई वितरित की जाएगी। जजपा जिला अध्यक्ष सिहाग ने कहा कि जिले में दूसरा कार्यक्रम पिंजोर कालका में जाकर गौशाला में गौ माता को हरा चारा डाला जाएगा तथा वहां पर श्रद्धालूओ द्वारा उनका जन्मदिन मनाया जाएगा। ताऊ देवीलाल स्टेडियम पंचकूला में श्रद्धेय देवीलाल की प्रतिमा तथा आसपास के क्षेत्र की साफ सफाई का जायजा लेने पहुँचे जजपा जिला अध्यक्ष ओ पी सिहाग एवं जिला प्रधान महासचिव ईश्वर सिंहमार ।

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दो साल से बंद आज़म खान अखिरकार जेल से हुए रिहा सपा नेताओं ने कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

सीतापुर(ईशान टाइम्स ब्यूरो)। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की सीतापुर जेल से रिहाई मंगलवार को आखिरकार हो गई। उनकी रिहाई लंबित अदालती कार्यवाही के कारण तड़के टल गई थी, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।आजम खान की रिहाई के कुछ ही मिनट बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “समाजवादियों को विश्वास है कि अदालत न्याय करेगी। हम न्यायालय का आभार व्यक्त करते हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में भाजपा द्वारा कोई झूठा मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि एक अधिकारी को लगातार सेवा विस्तार दिया जा रहा था, लेकिन आज समाजवादियों के लिए खुशी की बात है कि आजम खान रिहा हो गए हैं।वहीं सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि आजम खान को गलत मामलों में फंसाया गया था। उन्होंने कहा, “सरकार ने उन पर सैकड़ों केस लगाए, लेकिन कोर्ट ने उन्हें राहत दी। इसके लिए हम न्यायालय का स्वागत करते हैं। समाजवादी पार्टी उनकी पूरी मदद कर रही है।”आजम खान की रिहाई को लेकर सीतापुर जेल के बाहर सुबह से ही समर्थकों की भीड़ जुटी रही। उनके बड़े बेटे अदीब खान ने कहा, “आजम खान आज के नायक हैं। हम सब उनका स्वागत करने आए हैं। बाकी बातें वे खुद जेल से बाहर आने के बाद कहेंगे।”रामपुर की सियासत में आजम खान का दबदबा हमेशा से रहा है। वह इतने प्रभावशाली रहे हैं कि इलाके के उम्मीदवारों का ऐलान तक रामपुर स्थित उनके कार्यालय से होता था। अक्टूबर 2023 में जेल जाने के बाद उनके विरोधियों ने सियासी और आर्थिक रूप से अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की, लेकिन आजम के कद को कम नहीं कर पाए।प्रशासन ने रिहाई को लेकर सतर्कता बरती और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सीतापुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई। इसके बावजूद समर्थक वाहनों के साथ जेल के पास पहुंचने में सफल रहे।करीब दो साल की कैद के बाद आजम खान की जमानत पर हुई रिहाई ने सपा खेमे में नई ऊर्जा भर दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आजम खान जेल से बाहर आने के बाद क्या रुख अपनाते हैं और प्रदेश की राजनीति में उनकी क्या नई भूमिका सामने आती है। आजम खां को जेल से रिहा कराने गए 73,सपा समर्थकों की गाडियों का हुआ चालान समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां 23 महीने के बाद मंगलवार को सीतापुर की जेल से रिहा हो गए। लेकिन मंगलवार को उनकी रिहाई कराने गए समर्थक व सपा नेता व कार्यकर्ता बड़ी संख्या मे गाडियों से गए थे. उनमे से पुलिस ने उनकी 73 गाड़ियों का चालान कर दिया है। सभी गाड़ियों का नो पार्किंग में चालान किया गया है और करीब एक लाख 49 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।आजम खां का जेल से बाहर स्वागत करने के लिए उनके दोनों बेटों अब्दुल्ला और अदीब के साथ ही सैकड़ों समर्थक मौजूद रहे। वहीं, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स की तैनाती की गई थी।

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दिखावा ही दिखावा है :जीएसटी सुधार और स्वदेशी का नारा

संजय राय जीएसटी सुधारों की प्रक्रिया हमेशा से स्पष्ट रही है—निर्णय जीएसटी परिषद के माध्यम से ही लिया जाता है, जिसमें सभी राज्यों की भागीदारी अनिवार्य होती है। लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे राष्ट्रीय भाषण में घोषणा कर दी कि ‘सस्ते दिनों’ का आगाज हो गया है। यानी, बिना परिषद की औपचारिक सहमति के ही जनता को यह संदेश दिया गया कि अब सब कुछ बेहतर होगा। कुछ हफ्तों बाद केंद्र सरकार के दबाव में परिषद ने सिर्फ औपचारिक मंजूरी देकर इसे वैधता का आवरण दे दिया। मोदी सरकार और भाजपा की इस शैली में बड़े झूठ की रणनीति साफ झलकती है—‘बार-बार झूठ बोलो, और लोग मान लें कि सच है’। जीएसटी सुधारों को ‘बचत का उत्सव’ बताकर प्रचारित किया गया, मानो आठ साल तक जटिल और असमान कर प्रणाली के कारण आम जनता से वसूली का यह छोटा सा हिस्सा बड़ी कृपा हो। इसे हिंदू त्योहारों के मौसम से जोड़कर प्रचारित करना और ‘नवरात्रि से लागू’ होने का theatrics, सिर्फ जनता का ध्यान भटकाने और इसे एक सुखद तोहफे की तरह दिखाने की कोशिश है। सवाल उठता है—प्रधानमंत्री को खुद राष्ट्रीय भाषण में आकर यह घोषणा क्यों करनी पड़ी? पिछले छह महीनों में स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से और सूत्रों के जरिए यह जानकारी पहले ही दी जा चुकी थी। फिर भी दोबारा इसे याद दिलाना, मोदी सरकार की राजनीतिक असुरक्षा और प्रचार की रणनीति को उजागर करता है। इस बार के सुधारों का असली प्रभाव छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) पर लगभग नगण्य है। 2017 में लागू जीएसटी ने इस क्षेत्र को सबसे अधिक प्रभावित किया, जो रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्त्रोत है। कथित सुधारों से कीमतों में मामूली कमी आएगी, लेकिन इससे एमएसएमई के वित्तीय संकट में कोई वास्तविक राहत नहीं मिलेगी। यह उतना ही असरदार है जितना मुर्दे का हल्का करने के लिए बाल काटना—प्रतीकात्मक और दिखावटी। वास्तविकता यह है कि इस मामूली कटौती का लाभ गरीब या मध्यम वर्ग को सीमित रूप से ही मिलेगा, जबकि संपन्न वर्ग के हिस्से में भी यह जाएगा। इस कारण अर्थव्यवस्था में वास्तविक मांग या निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं होगी। ट्रंप के टैरिफ और एच1बी वीसा शुल्क में वृद्धि जैसे अंतरराष्ट्रीय दबावों के सामने, यह जीएसटी सुधार महज प्रचार और दिखावे का उपकरण साबित हो रहा है। स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के उद्घोष भी इसी तरह का प्रचार प्रतीत होते हैं। पिछले तीन-चार सालों में मोदी सरकार ने इसे कई बार दोहराया—कोरोना संकट में आत्मनिर्भरता का दावा, 20 लाख करोड़ रुपये का निवेश, रक्षा और बीमा क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को अवसर देना—असल में ये कदम स्वदेशी की दिशा में नहीं, बल्कि विदेशी पूंजी पर निर्भरता बढ़ाने वाले रहे। संक्षेप में कहा जाए तो, मोदी सरकार का यह “जीएसटी सुधार और स्वदेशी” अभियान वास्तविक लाभ से अधिक प्रचार का खेल है। यह जनता को दिखावे में खुश करने, मीडिया कवरेज पाने और चुनावी समर्थन जुटाने का प्रयास है, लेकिन आर्थिक और औद्योगिक संकटों को हल करने में इसकी सीमित क्षमता ही है।

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आजम खान 23 महीने बाद जेल से हुए रिहा

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान 23 महीने बाद जेल से रिहा हो गए हैं। जेल के अंदर से ही कार में बैठकर बाहर निकले और हाथ हिलाकर अपने समर्थकों का अभिवादन किया। जेल से निकलते ही उनके दोनों बेटे अदीब और फरहान उल्ला खान उन्हें लेने पहुंचे। अदीब ने कहा, “आज के हीरो आजम साहब हैं।” रिहाई में हुई देरी था जुर्माने का मामला आज सुबह 9 बजे आजम खान की रिहाई तय थी, लेकिन कागजी कार्रवाई के दौरान एक नया पेंच सामने आया। रामपुर कोर्ट में चल रहे एक केस में आजम पर 6 हजार रुपये का जुर्माना था, जिसे उन्होंने अभी तक नहीं भरा था। इसी कारण उनकी रिहाई रोक दी गई। कोर्ट खुलते ही रिश्तेदारों ने जुर्माने की रकम जमा करवाई और ईमेल के जरिए जेल को सूचना भेजी गई, जिसके बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया।

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