ishantimes

Author name: admin

Breaking News

अखिल भारतीय दुर्गा पूजा सेवा समिति द्वारा भव्य नव दिवसीय नवरात्र उत्सव

ठाणे,महाराष्ट्र (इंद्र यादव )30सितंबर। शरद ऋतु की मंद सुगंध और आसमान पर घने बादलों के बीच,ठाणे जिले के वागले एस्टेट इलाके में रूपादेवी क्षेत्र एक बार फिर भक्ति की लहरों से सराबोर हो गया है। यहां की “अखिल भारतीय दुर्गा पूजा सेवा समिति” द्वारा आयोजित सार्वजनिक नव दिवसीय नवरात्र उत्सव ने स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं को एकजुट कर दिया है। यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक एकता और सामुदायिक सद्भाव का भी जीवंत उदाहरण बन गया है।समिति के अनुसार, रूपादेवी के इस सार्वजनिक पंडाल में पारंपरिक विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाएगी।वागले एस्टेट का यह इलाका, जो ठाणे शहर का एक व्यस्त आवासीय क्षेत्र है, नवरात्र के दौरान एक आध्यात्मिक केंद्र में बदल जाता है। आसपास की सड़कें रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों की सजावट से जगमगा उठती हैं। पूर्व नागसेवक श्री.राज कुमार यादव जी ने बताया कि, “यहां का उत्सव हमें अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ता है। समिति के अध्यक्ष श्री.राज कुमार मिश्रा जी ने बताया, “यह उत्सव मात्र पूजा,अर्चना तक सीमित नहीं है। हमने नौ दिनों के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया है, जिसमें गुजराती गरबा, बंगाली धुनों पर आधारित नृत्य और महाराष्ट्रीयन लोकगीतों की प्रस्तुतियां शामिल हैं। इस मौके पर समाजसेवी- श्री.महेंद्र सोडारी जी,श्री राधा फ़त्ते बहादुर सिंह ,श्री. सचिन पटवा, पं. बदिनाथ शुक्ला, श्री. लक्ष्मण चौहान,श्री. फुलचंद साड़ी,श्री. गुलाबचंद गुप्ता,श्री. गोकुल रावत, श्री. अरुण विश्वकर्मा,श्री. प्रदिप चौहान, श्री. शशिकांत भगवान, श्री. बबलु मिश्रा, श्री. संतीप राय, श्री. विक्की उपाध्याय,श्री. यशश्रीराम राजभर,श्री बेचन प्रसाद यादव उपस्थित रहे।यदि आप भी इस दिव्य उत्सव का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो वागले एस्टेट, रूपादेवी पहुंचें।

Breaking News

उत्तर प्रदेश के बादलों में उड़ रहे “ड्रोनों की क्या है “साजिश” ?

(इंद्र यादव), उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रात का सन्नाटा अब डरावना हो चला है। आकाश में टिमटिमाती लाइटों के साथ उड़ते संदिग्ध ड्रोन न केवल नींद चुरा रहे हैं, बल्कि पूरे परिवारों की शांति भी हराम कर रहे हैं। संभल, अमरोहा, मुरादाबाद, बिजनौर, हापुड़, जौनपुर, भदोही और गोरखपुर जैसे जिलों से ऐसी खबरें लगातार आ रही हैं, जहां ग्रामीण रातभर लाठियां-डंडे थामे पहरा दे रहे हैं। आखिर ये ड्रोन कौन उड़ा रहा है? क्या ये चोरी की साजिश का हिस्सा हैं, या सिर्फ अफवाहों का शिकार? और सबसे बड़ा सवाल-क्या ड्रोन नियमों का पालन हो रहा है। यह “राज”चोरों की ‘रेकी’ या सरकारी सर्वे है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले दो महीनों से रात के अंधेरे में ड्रोन उड़ने की घटनाएं बढ़ गई हैं। संभल और अमरोहा के ग्रामीणों का कहना है कि ये ड्रोन घरों के ऊपर मंडराते हैं, जैसे किसी नजर रख रहे हों। एक ग्रामीण ने बताया, “रात के 12 बजे आसमान में लाल-नीली लाइटें चमक रही थीं। हमने सोचा चोर रेकी कर रहे हैं। पूरे गांव ने रात गुजार दी जागते हुए।” इसी तरह, बिजनौर के 50 से अधिक गांवों में ड्रोन की अफवाह ने दहशत मचा दी है। यहां तक कि कुछ जगहों पर निर्दोष लोगों को ड्रोन उड़ाने का शक लगने पर पीट दिया गया तो वंही जौनपुर के तियारी गांव में शुक्रवार रात कई ड्रोन देखे गए, जिसके बाद ग्रामीण हथियारों से लैस हो गए। भदोही में तो एक ड्रोन खेत में गिरा भी, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया। गोरखपुर के कैंपियरगंज क्षेत्र में राप्ती नदी के किनारे बसे गांवों में चार ड्रोन उड़ते देखे गए, जिससे लोग छतों पर चढ़कर निगरानी करने लगे। फतेहपुर के घिनवांखेड़ा गांव में ग्रामीणों ने ड्रोन का पीछा किया, लेकिन वस्तु गायब हो गई। पुलिस का कहना है कि ज्यादातर मामलों में ये अफवाहें ही हैं। हापुड़ में जो ड्रोन समझा गया, वो पतंग या प्लास्टिक बैग निकला। मुजफ्फरनगर में दो युवकों ने कबूतरों पर लाइटें बांधकर उड़ाए, जिससे भ्रम फैला। फिर भी, कुछ जगहों पर असली ड्रोन पाए गए हैं। गोरखपुर पुलिस ने स्पष्ट किया कि ये भारतीय सर्वेक्षण विभाग के नदियों के सर्वे के लिए हैं। लेकिन सवाल यह है कि रात में सर्वे क्यों? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्च स्तरीय बैठक में निर्देश दिए हैं कि बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा गरम है। एक यूजर ने लिखा, “भदोही में रात के ड्रोन ने दहशत फैला दी। पुलिस को सूचना दो, अफवाह मत फैलाओ।” वहीं, रायबरेली के सेमरी रना पुर गांव से शिकायत आई कि दो दिनों से ड्रोन उड़ रहे हैं, महिलाएं-बच्चे डरे हुए हैं। बस्ती के गौर थाना क्षेत्र में चोरी की घटनाओं के बाद ड्रोन उड़ान ने आक्रोश बढ़ा दिया। तो क्या बिना अनुमति के उड़ान भर रहे है ड्रोन। ड्रोन तकनीक ने कृषि, सर्वे और आपदा प्रबंधन में क्रांति ला दी है, लेकिन बिना नियंत्रण के ये खतरा बन सकती है। भारत सरकार के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के 2025 अपडेटेड दिशानिर्देशों के अनुसार, सभी ड्रोन को डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करना अनिवार्य है। प्रत्येक ड्रोन को यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) मिलना चाहिए। रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस – 250 ग्राम से अधिक वजन वाले ड्रोन के लिए रिमोट पायलट सर्टिफिकेट (RPC) जरूरी। ट्रेनिंग और परीक्षा पास करनी पड़ती है। ” फ्लाइट परमिशन” डिजिटल स्काई ऐप से अनुमति लें। रेड जोन (हवाई अड्डे, सैन्य क्षेत्र) में उड़ान प्रतिबंधित। जनसंख्या घनी जगहों पर स्थानीय पुलिस की मंजूरी चाहिए। रात में उड़ान के लिए विशेष अनुमति। अधिकतम ऊंचाई 400 फीट। नो-फ्लाई जोन में प्रवेश पर जुर्माना या जेल। बिना अनुमति उड़ान पर 1 लाख रुपये तक जुर्माना। यदि जासूसी या चोरी से जुड़ा, तो आईटी एक्ट और IPC के तहत मुकदमा।यूपी में बिजनौर प्रशासन ने ड्रोन उड़ाने पर 1 लाख का जुर्माना लगाने की एडवाइजरी जारी की है। फिर भी, शरारती तत्व खिलौना हेलीकॉप्टर या कबूतरों से भ्रम फैला रहे हैं। DGCA के अनुसार, 2025 में ड्रोन उपयोग बढ़ा है, लेकिन नियमों की अनदेखी से ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में आम नागरिक को चाहिए कि संदिग्ध ड्रोन देखें तो वीडियो बनाएं और पुलिस को सूचित करें।बअफवाहें न फैलाएं। ड्रोन खरीदने से पहले DGCA गाइडलाइंस पढ़ें। यह दहशत सिर्फ तकनीक का दुरुपयोग नहीं, बल्कि जागरूकता की कमी का परिणाम है। सरकार को ड्रोन रजिस्टर अनिवार्य कर स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। ताकि उत्तर प्रदेश का आकाश विकास का माध्यम बने, डर का नहीं। पुलिस की सक्रियता से स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है। क्या ये ड्रोन चोरों के हैं, या सर्वे के? समय जवाब देगा, लेकिन तब तक रातें जागरण की रहेंगी।

Breaking News

माता मनसा देवी मंदिर से दर्शन कर लौट के जा रहे श्रद्धालुओं की गाड़ी पिकअप पलटी

पंचकूला,कमल कलसी , 35 से ज्यादा श्रद्धालु एक पिकअप गाड़ी में माता मनसा देवी के दर्शनों को गए थे। जब सभी श्रद्धालु पिकअप गाड़ी से माता के दर्शन कर लौट रहे थे तो पंचकूला के सेक्टर 3 के सामने शिमला जीरकपुर हाईवे पर अनियंत्रित होकर पलट गई।जिसमें सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई और करीब 25 से 30 घायलों को सेक्टर 6 हॉस्पिटल में उपचार के लिए लाया गया। जिनमें करीब दर्जन भर घायलों को चंडीगढ़ सेक्टर 32 हॉस्पिटल और चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किए गए है। सूचना मिलने पर उपायुक्त पंचकूला सतपाल शर्मा और पुलिस उपायुक्त सृष्टि गुप्त व सेक्टर 21पुलिस चौंकी दीदार सिंह मरीजों का हाल जानने सेक्टर 6 के हॉस्पिटल पहुंचे। बताया जा रहा है। मनसा देवी मंदिर से दर्शन करके सभी श्रद्धालु जीरकपुर के प्रभात गांव अपने घर जा रहे थे। और जैसे ही पुराने पंचकूला से आगे गाड़ी मोड़ते वक्त मोहिंदरा पिकअप अनियंत्रित होकर पलट गई। डॉक्टर मनीदर ने बताया कि घायलों के नाम जिनमें एक बिना नाम व्यक्ति 40 साल, अमित 17 साल, गौरव 11 साल को चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया गया। और शाम सुंदर 32 साल, विजय 20 साल, रिशु 12 साल, प्रिंस 18 साल को चंडीगढ़ के सेक्टर 32 रेफर किया गया। काजल 20 साल, रेणु देवी 20 साल, कंवर पाल 28 साल, अंकुश 15 साल, निर्दोष कुमार 45 साल, धर्मेद्र 35 साल, नीतीश 18 साल, राम कृष्ण 24 साल, अमन कुमार 9 साल, दर्शन 11 साल, शिवम 22 साल, ऋतिक सिंह 8 साल, रूम सिंह 38 साल, रेखा सिंह 40 साल, उमेश 50 साल, पिंटू 27 साल, अमृत 15 साल है जिनका इलाज सेक्टर 6 हॉस्पिटल में चल रहा है। सभी जीरकपुर के गांव प्रभात के रहने वाले बताए जा रहे है। स्थानीय समाज सेवी द्वारा चलाई जा रही एम्बुलेंस ने जायदा मरीजों को पंचकुला हॉस्पिटल पहुचाने में मदद की है।

Breaking News

निगम कमिश्नर डा. आनंद शर्मा ने डांडिया नाईट कार्यक्रम में दिया स्वच्छता संदेश, जूट के बने बैग किए वितरित

रोहतक (ईशान टाइम्स )। नगर निगम आयुक्त डा0 आनंद कुमार शर्मा ने बताया कि रोहतक के ओल्ड आई.टी.आई. में स्थित मदनलाल ढींगरा कम्युनिटी सेंटर में एंकर सुकर्म जग्गा द्वारा डांडिया नाइट 2025 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में निगम आयुक्त ने स्वच्छता संदेश देने के लिए भाग लिया तथा उन्होने अपने संबोधन में कहा कि स्वच्छता किसी एक संस्था या विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा यदि हम सब मिलकर छोटे-छोटे प्रयास करेंगे, तो रोहतक को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ शहर बनाने का सपना शीघ्र ही साकार होगा। कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों व प्रतिभागियों को नगर निगम द्वारा जूट से बने पर्यावरण अनुकूल बैग वितरित किए गए तथा कहा कि अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर ‘‘प्लास्टिक को ना और जूट जैसे विकल्पों को हाँ’’ कहें। इसका उद्देश्य लोगों को प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग से हतोत्साहित करना और दैनिक जीवन में टिकाऊ विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना था। नगर निगम आयुक्त डा0 आनंद कुमार शर्मा ने लोगों से नगर निगम के स्वच्छता ऐप से जुड़ने का भी आह्वान किया। उन्होंने बताया कि इस ऐप के माध्यम से घर या आस-पास से सफाई से सम्बन्धित अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। कार्यक्रम में यह संकल्प भी लिया गया कि आने वाले दिनों में सभी नागरिक स्वच्छता अभियान को जन-आंदोलन बनाएंगे और अपने-अपने मोहल्लों, वार्डों व कालोनियों को स्वच्छ व प्लास्टिक मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएँगे तथा अपने घरो/संस्थानो में डस्टबीन अवश्य रखेगें।

Breaking News

अमरनाथ गुप्ता कार्यकारी निदेशक नियुक्त हुए

अखिल भारतीय छावा संगठन, ठाणे जिला के कार्यकारी निदेशक नियुक्त हुए अमरनाथ गुप्ता महाराष्ट्र ठाणे:(इंद्र यादव )। अखिल भारतीय छावा संगठन, ठाणे जिला ने अमर गुप्ता जी को अपना नया कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया है। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए उनकी नियुक्ति संगठन के प्रति उनके समर्पण, नेतृत्व कौशल और सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है। अखिल भारतीय छावा संगठन ठाणे जिला कार्यकारी अध्यक्ष पद्दी अमरनाथ गुप्ता को केंद्रीय अध्यक्ष – नानासाहेब जावले पाटिल द्वारा नियुक्त किया गया, इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष – पंजाबराव काले पाटिल, पश्चिम महाराष्ट्र अध्यक्ष – मच्छिन्द्र भाऊ चिंचोले, मराठवाड़ा कार्यकारी अध्यक्ष विलास बापू कोल्हे, जालना अध्यक्ष – राधेश्याम पावल, जालना संपर्क प्रमुख – मच्छिन्द्र भाऊ घोगरे पाटिल- संभाजी नगर जिला अध्यक्ष – अशोक भाऊ मोरे, पश्चिम महाराष्ट्र संयुक्त सचिव श्रीकांत मलिशे, पिंपरी उपस्थित थे। चिंचवड़ शहर अध्यक्ष संजय भाऊ कांबले, पिंपरी चिंचवड़ शहर अध्यक्ष टीचर्स एलायंस – सीताराम वाघ सर, ठाणे जिला कार्यकारी अध्यक्ष – अमरनाथ गुप्ता, बुलढाणा जिला अध्यक्ष – अशोक राजे जाधव, बुलढाणा जिला कार्यकारी अध्यक्ष – कृष्णा कोल्हे, शिदानखेड राजा तालुका अध्यक्ष – बालासाहेब शेलके, शिंदखेड राजा तालुका आयोजक – शंकरराव शिंदे ठाणे जिला – रोशन ढाडे उपस्थित थे रहे। अमर गुप्ता जी ने हमेशा सामाजिक उत्थान और संगठन के उद्देश्यों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है। उनकी इस नई भूमिका में संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद है। अखिल भारतीय छावा संगठन के सभी सदस्यों, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों की ओर से अमर गुप्ता जी को इस उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। हम उनके कुशल नेतृत्व में संगठन के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

Breaking News

90के दशक की टपोरी भाषा और टपोरीगिरी बोले तो हंसी का डोज़ है (लेख :हास्यऔर यादें )

[ इंद्र यादव अरे भाई…भाई,सुन न, 90 का दशक, वो भी मुंबई में! वो भी क्या ज़माना था जब टपोरी भाषा और टपोरीगिरी ने शहर की गलियों को ऐसा रंग दिया कि हर गली में एक ‘भाई’ और हर नुक्कड़ पर एक ‘खतरनाक’ स्टाइल मारता हुआ नौजवान मिल ही जाता। टपोरीगिरी सिर्फ़ एक स्टाइल नहीं था, यार, वो तो एक मूड था, एक मस्ती थी, एक जिंदगी जीने का तरीक़ा था! तो चल, थोड़ा टाइम मशीन में बैठकर उस दौर में झांकते हैं 90 के दशक में मुंबई की गलियों में अगर आप बिना ‘भाई’, ‘रापचिक’, ‘झकास’, या ‘खतरनाक’ बोले चले गए, तो समझ लो आप मुंबई में थे ही नहीं! टपोरी भाषा का जादू ऐसा था कि आम बात को भी मसालेदार बना दे। मान लो, कोई दोस्त बाइक पर आया और बोला, “क्या, भाई, किधर को चला?” तो जवाब मिलता, “अरे, बस रापचिक माल देखने जा रहा हूँ, तू भी चल!” अब ये ‘माल’ कोई ज्वेलरी नहीं, बल्कि टपोरी कोड में कुछ और ही होता था, समझे ना । ये भाषा बॉलीवुड से भी खूब प्रेरित थी। अनिल कपूर की “झकास!” चीख और मिथुन के डॉयलाग के साथ साथ संजय दत्त का “खतरनाक!” अंदाज़ टपोरी भाषा के लिए ऑक्सीजन का काम करता था। गुलशन ग्रोवर और रजा मुराद जैसे विलेन भी टपोरी डायलॉग्स में जान डालते थे। “अपुन को तो बस एक मौका चाहिए, फिर देख कैसे सीन पलटता है!” – ये डायलॉग सुनकर तो गली का हर लड़का खुद को मोगैंबो समझने लगता था। और हाँ, टपोरी भाषा में गालियाँ भी थीं, लेकिन वो गालियाँ नहीं, प्यार का इज़हार थीं! जैसे, “साला, तू तो एकदम टकाटक है!” ये सुनकर सामने वाला शरमाता नहीं, बल्कि सीना चौड़ा करके बोलता, “अरे, अपुन तो बिंदास है, भाई!” टपोरीगिरी सिर्फ़ बोलने का ढंग नहीं, बल्कि जीने का स्टाइल था। टपोरी का लुक तो ऐसा कि मानो फैशन डिज़ाइनर ने गलती से सारी रोब एक साथ डाल दी हो। चमकीली शर्ट, जिसके बटन खुले हों ताकि बनियान की झलक दिखे, टाइट जीन्स, और अगर जूते नहीं मिले तो कोल्हापुरी चप्पल! ऊपर से माथे पर तिरछा टोपी या फिर बालों में इतना तेल कि मक्खियाँ भी फिसल जाएँ। और हाँ, गले में सोने की चेन, भले ही वो असली हो या नकली, लेकिन चमक ऐसी कि सूरज भी शरमा जाए।टपोरी का चलना भी अपने आप में एक कला था। कंधे हिलाते हुए, एक तरफ़ झुके हुए, जैसे अभी-अभी किसी फिल्म के सेट से निकलकर आए हों। और अगर जेब में पैसे नहीं थे, तो भी टपोरी का कॉन्फिडेंस ऐसा कि सामने वाला सोचे, “लगता है, ये भाई किसी बिजनेसमैन का बेटा है! 90 के दशक में टपोरीगिरी का असली मज़ा था गली-मोहल्लों में। मान लो, कोई टपोरी अपने दोस्तों के साथ नुक्कड़ पर खड़ा है, चाय की टपरी पर गप्पें मार रहा है। बात शुरू होती थी क्रिकेट से, फिर बॉलीवुड, और आखिर में पहुँचती थी ‘लव स्टोरी’ पर। “अरे, वो सामने वाली गली की शीला, भाई, उसने मुझे लाइन दी!” अब शीला ने सचमुच लाइन दी हो या ना दी हो, टपोरी की कहानी में तो वो माधुरी दीक्षित से कम नहीं होती थी।और अगर कोई टपोरी को टक्कर देने की कोशिश करता, तो बस एक डायलॉग, “अपुन को टेंशन मत दे, वरना इंजेक्शन दे दूँगा!” सुनकर सामने वाला हँसते-हँसते भाग जाता। टपोरीगिरी में मारपीट कम, मस्ती ज़्यादा थी। 90 के दशक में बॉलीवुड ने टपोरीगिरी को और चमकाया। ‘रंगीला’ का मुन्ना (आमिर खान) हो या ‘सत्या’ का भिकू म्हात्रे (मनोज बाजपेयी), इन किरदारों ने टपोरी को हर घर में पहुँचाया। मुन्ना का “हाय, रापचिक माल!” और भिकू का “मुंबई का किंग कौन? भिकू म्हात्रे!” सुनकर तो गली का हर लड़का अपने आप को हीरो समझने लगता था।और सिर्फ़ हीरो ही नहीं, विलेन भी टपोरी स्टाइल में बोलते थे। “बड़े बड़े शहरों में छोटी छोटी बातें होती रहती हैं,” गब्बर का ये डायलॉग भले ही 70 के दशक का था, लेकिन 90 में भी टपोरी इसे अपने स्टाइल में यूज़ करते थे।बआज भले ही मुंबई बदल गई हो, मॉल्स और मेट्रो ने गलियों को थोड़ा पीछे धकेल दिया हो, लेकिन टपोरीगिरी का जादू अभी भी बाकी है। आज भी कोई दोस्त मिले और बोले, “क्या, भाई, एकदम झकास लग रहा है!” तो मन में वही 90 का वाला वाइब आ जाता है। टपोरी भाषा और टपोरीगिरी मुंबई की धड़कन थी, है, और रहेगी।तो भाई, अगली बार जब तू मुंबई की गलियों में निकले, थोड़ा टपोरी स्टाइल मारना तो बोलना, “अपुन तो बिंदास है भाय ” और देख, कैसे सारा सीन पलट जाता है!

Breaking News

लाड़ो लक्ष्मी योजना महिलाओं के साथ बड़ा छलावा” – सुधा भारद्वाज

: पंचकुला 27 सितंबर (ईशान राय ईशान टाइम्स हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुधा भारद्वाज ने भाजपा सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई “दीन दयाल लाड़ो लक्ष्मी योजना” को महिलाओं के साथ चुनावी छलावा और धोखा करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले यह वादा किया था कि हरियाणा की हर महिला को 2100 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे, लेकिन योजना में लगाई गई कड़ी शर्तों ने अधिकांश महिलाओं को इससे बाहर कर दिया है। मुख्य आपत्तियां: आय सीमा केवल 1 लाख – जबकि हरियाणा में बीपीएल की सीमा 1.80 लाख है। इससे बीपीएल परिवार की महिलाएं भी योजना से वंचित हो जाएंगी। अनावश्यक शर्तें – हर महीने मोबाइल ऐप पर जाकर फेस रिकॉग्निशन और बायोमेट्रिक के ज़रिए जीवित होने का प्रमाण देना होगा। पेंशनधारियों को बाहर – बुजुर्ग पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन लेने वाली महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा। लाभ की देरी – योजना का पैसा 1 नवंबर से नहीं, बल्कि आईडी बनने के एक महीने बाद से मिलेगा। सीमित दायरा – हरियाणा की 1.4 करोड़ महिलाओं में से मुश्किल से 10–12% महिलाओं को ही लाभ मिलेगा। सुधा भारद्वाज ने कहा: “यह योजना महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय उन्हें कागज़ों और शर्तों की बेड़ियों में जकड़ने का प्रयास है। भाजपा सरकार ने महिलाओं से किया वादा तोड़ा है और अब केवल चुनावी लाभ के लिए योजनाओं का ढोल पीटा जा रहा है। यह महिलाओं के अधिकारों का सीधा अपमान है।” कांग्रेस का संकल्प हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस का मानना है कि महिला सशक्तिकरण का मतलब बिना शर्त सहायता और सम्मानजनक समर्थन देना है।कांग्रेस पार्टी हरियाणा की हर महिला को उसके अधिकार और सुरक्षा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Breaking News

रामलीला को परिवार सहित लोगों का देखने आना हमारी संस्कृति और धर्म के लिए अच्छी बात: जगद्गुरु कुमार स्वामी

पंचकूला में महिलाओं द्वारा किया जा रहा श्री रामलीला का मंचन रामलीला को परिवार सहित लोगों का देखने आना हमारी संस्कृति और धर्म के लिए अच्छी बात:महाराजधर्म,संस्कृति और महिलाओं को समान और सम्मान को बरकरार रखना ही हमारी प्राथमिकता:नागपालदर्शकों की तालियां और जय श्रीराम जयघोष कलाकारों के लिए पुरूस्कार से कम नहीं:अरुण सूद पंचकूला,(ईशान टाइम्स ) ” प्रभु श्री राम की असीम कृपा से गत चार दिनों से 6 माह से लेकर 83 वर्ष की बुजुर्ग महिलाओं द्वारा मंचित की जा रही श्री रामलीला में सभी कलाकारों का जोश देखते ही बनता है। उनके अदम्य अभिनय को देखने के उपरान्त उपस्थित सभी दर्शकगण आत्मविभोर हुए बिना नहीं रहते।” ये बात जगद्गुरु महाब्रह्मऋषिश्री कुमार स्वामी महाराज ने पत्रकार वार्ता के दौरान कही। इस वार्ता में उनके साथ संस्थापक एकता नागपाल और अध्यक्ष अरुण सूद, परवीन सरदाना, उपस्थित थे।महाराज ने कहा कि हाल ही में जिस प्रकार से रामलीलाओं का मंचन बढ़ा है और लोग इनको देखने के लिए अपने परिवारों के साथ निकल रहे हैं ये एक अच्छी बात है, ये हिन्दू धर्म और हमारी संस्कृति के प्रचार और प्रसार के लिए बहुत ही उत्तम है।वार्ता के दौरान एकता नागपाल ने बताया कि 91 महिलाओं की टोली ने अभी तक नारद कथा, राम कथा सुनाते शिवजी, रावण वेदवती संवाद, रावण नंदी व् शिव जी संवाद, राजा दशरथ द्वारा संतान प्राप्ति का यज्ञ, राम जन्म, अहिल्या को शिला से मुक्ति, सीता स्वयंवर, लक्ष्मण परशुराम संवाद, राम विवाह, विवाह उपरान्त अयोध्या आगमन, मंदता कैकेयी संवाद, दशरथ के 2 वचन, राम बनवास का सफल मंचन किया है जिसको दर्शकों ने खूब सराहा। उन्होंने कहा कि इस अनूठी रामलीला में हम सभी महिलाओं का एक लक्ष्य है कि महिला सशक्तिकरण अभियान में देश की सभी महिलाओं को इसके लिए प्रेरित करना और जिस प्रकार से हमारे वेद पुराणों में हमारे धर्म और संस्कृति के महत्व और महिलाओं को समानता, सम्मानता का स्थान प्राप्त है उसको बनाये रखना और भावी पीढ़ी को मंचन के माध्यम से संजोय रखना और उसकी अनुपालना करने के लिए प्रेरित करना है।इस मौके पर रामलीला आयोजन समिति के अध्यक्ष अरुण सूद ने पत्रकारों के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि जिस प्रकार से हमारी मातृ शक्ति अपनी अद्भुत प्रतिभा के चलते श्री रामलीला का मंचन कर रही हैं उसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम है।महिलाओं द्वारा रचित इस राम लीला को देखने के लिए लगातार लोगों का तांता लगा रहता है। उन्होंने कहा हजारों की संख्या में लोग इसका मंचन देखने के उपरान्त अपने भावों को नहीं रोक पा रहे और जब दर्शकगण पुरजोर आवाज के साथ जय श्री राम के जय घोष और तालियों के साथ खड़े होकर सभी कलाकारों का अभिवादन करते हैं तो मुझे लगता है इस से बड़ा पुरस्कार किसी कलाकार के लिए और कोई नहीं हो सकता। रामलीला के सभी सदस्यगण पारस्परिक तालमेल के साथ इसके आयोजन को सफल बनाने में दिन रात एक किये हुए है।जिसका परिणाम आज ये है कि महिलाओं द्वारा मंचित इस राम लीला को देखने चंडीगढ़, पंचकूला मोहाली और आसपास तो छोड़िये अन्य क्षेत्रों से भी इसको देखने आ रहे है। हमारा भी यही उद्देश्य है कि देश में सभी लोगों को राम लीला को देखने के लिए जाना चाहिए और प्रभु श्री राम द्वारा दर्शाये मार्ग पर चलने का स्वयं और अपने बच्चों को भी उसका अनुसरण करने के लिए प्रेरित करना चाहिए |उन्होंने बताया कि महिलाओं द्वारा मंचित इस रामलीला को देखने के लिए आमजन के अलावा विभिन्न प्रबुद्ध लोग हरियाणा के राज्यपाल माहिम की धर्मपत्नी प्रथम प्रदेश महिला नागरिक मित्रा घोष, विश्वविख्यात सुप्रसिद्ध जगद्गुरु महाब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी महाराज, हरियाणा विधानसभा के उप स्पीकर कृष्णा लाल मिड्डा, राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू, हरियाणा भाजपा पंचकुला के जिलाध्यक्ष अजय मित्तल और नगर निगम चंडीगढ़ की महापौर हरप्रीत कौर बबला, जी बी रियलिटी के चेयरमैन गुरवींदेट भट्टी, हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी सुमन सैनी, भारतीय जनता पार्टी हरियाणा उपाध्यक्ष बन्तो कटारिया, सामाजिक समरसता उत्तर क्षेत्र के प्रमोद कुमार और महामंडलेश्वर सोनाक्षी महाराज,गौरव गौतम, खेल मंत्री हरियाणा और चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ आई पी एस, आई जी पुलिस, पुष्पेंद्र कुमार,चंडीगढ़ सासंद मनीष तिवारी, स्वामी रमणीक जी महाराज, वागीश स्वरूप स्वामी जी , पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के जज जगमोहन बंसल,पूर्व हरियाणा विधानसभा स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता, एस.एस.पी चंडीगढ़ कंवरदीप कौर आई.पी.एस रोशन लाल जिंदल, जगदगुरु स्वामी विकास दास महाराज, मां कमली माई पीठा हरिश्वर श्री श्री 1008 महा मंडलेश्वर, मां कमलीनंद गिरी महाराज,डॉक्टर दिनेश गर्ग, काशी विद्युत परिषद कोषाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता, रमणीक महाराज रोशन लाल जिंदल ने रामलीला में मुख्यातिथि के रूप में भाग लिया।

Breaking News

भारत की धरती पर सजीव होता विविधताओं का उत्सव

विश्व पर्यटन दिवस 2025 : विशेष मनोज वत्स हर साल 27 सितम्बर को मनाया जाने वाला विश्व पर्यटन दिवस यह याद दिलाता है कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसी राष्ट्र की आर्थिक सुदृढ़ता, सामाजिक साझेदारी और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने वाला स्तंभ है। इस वर्ष की थीम “पर्यटन और हरित निवेश” भविष्य के लिए उस सोच को बल देती है, जिसमें पर्यटन का विकास पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत प्रथाओं के साथ हो। भारत: विविधता में एकता का पर्यटन स्थल भारत के पास दुनिया के सबसे अनूठे पर्यटन अनुभव मौजूद हैं। उत्तर में हिमालय की बर्फीली चोटियाँ हैं, तो दक्षिण में समुद्र के विस्तृत तट। वाराणसी, बोधगया और अमृतसर जैसे तीर्थ स्थल आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं, वहीं जयपुर, उदयपुर और आगरा जैसे शहर इतिहास और स्थापत्य कला की कहानियाँ सुनाते हैं। केरल के बैकवाटर्स हों या लद्दाख की वादियाँ, भारत का हर कोना पर्यटकों के लिए नया अनुभव है। अर्थव्यवस्था और रोजगार का आधार भारत का पर्यटन उद्योग आज तेजी से उभरते क्षेत्रों में गिना जाता है। यह देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देता है और करोड़ों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का साधन बन चुका है। ग्रामीण इलाकों में होम-स्टे, स्थानीय गाइडिंग, हस्तशिल्प और लोककला से जुड़ी पहलें न केवल रोजगार बढ़ा रही हैं बल्कि पलायन की समस्या को भी कम कर रही हैं। सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व पर्यटन ने भारतीय समाज में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सद्भावना को नया आयाम दिया है। विभिन्न धर्मों, भाषाओं और परंपराओं के बीच संवाद बढ़ा है। महिला सशक्तिकरण और युवा उद्यमिता को पर्यटन ने विशेष बल दिया है। यह क्षेत्र स्थानीय कला, खानपान और संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में सेतु का काम कर रहा है। सॉफ्ट पावर और भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करता है। इनक्रेडिबल इंडिया और देखो अपना देश जैसे अभियानों ने भारत की छवि को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। जी-20 जैसे वैश्विक आयोजनों ने हमारे सांस्कृतिक वैभव और आधुनिक सुविधाओं को विश्व समुदाय के सामने रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति मिली है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और प्रयागराज का महाकुंभ न केवल आस्था का केंद्र बने हैं, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की धार्मिक पर्यटन शक्ति को भी उजागर किया है। भविष्य की संभावनाएँ भारत अब दुनिया के सबसे बड़े पर्यटन बाजारों में शामिल होने की राह पर है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, वर्चुअल टूर, एआई आधारित यात्रा मार्गदर्शन और बेहतर परिवहन सुविधाओं ने पर्यटन को नई दिशा दी है। खासकर युवाओं और मिलेनियल्स के लिए साहसिक खेल, वेलनेस टूरिज्म और अनुभव-आधारित यात्रा नए अवसर लेकर आ रहे हैं। भारत के पास प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक धरोहर का अनूठा संगम है। यदि पर्यटन विकास को पर्यावरण-संवेदनशील और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए तो भारत न केवल वैश्विक पर्यटन शक्ति बनेगा, बल्कि अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के दम पर विश्व का नेतृत्व भी करेगा।विश्व पर्यटन दिवस हमें यही संदेश देता है—भारत की धरती हर यात्री के लिए एक नया अनुभव, एक नई प्रेरणा और एक नई ऊर्जा संजोए हुए है।

Breaking News

“सफेद मोर से भी कम दिखाई देते हैं विधायक चंद्रमोहन” – ओ. पी. सिहाग का तंज

लंबे समय बाद पंचकूला की जनता ने देखे अपने विधायक, पीपल्स फ्रंट व जजपा जिला अध्यक्ष ने कहा – अब सिर्फ दिखने से काम नहीं चलेगा, धरातल पर करना होगा काम पंचकूला, 26 सितंबर (ईशान राय ,ब्यूरो ईशान टाइम्स), पंचकूला की राजनीति में हलचल उस समय तेज़ हो गई जब पीपल्स फ्रंट पंचकूला के अध्यक्ष एवं जननायक जनता पार्टी (जजपा) के जिला अध्यक्ष ओ. पी. सिहाग ने स्थानीय विधायक चंद्रमोहन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “जिस तरह सफेद मोर कभी-कभार ही दिखाई देता है, वैसे ही पंचकूला के लोग अपने विधायक के दर्शन करते हैं। आज तो लोगों ने लंबे समय बाद उन्हें देखा है।” सिहाग ने कहा कि पंचकूला की जनता कई महीनों से अपने मुद्दों और समस्याओं के समाधान के लिए विधायक को तलाश रही थी, लेकिन वे शायद ही कभी क्षेत्र में दिखाई देते हैं। “आज जब लोग उन्हें देखकर चौंक उठे तो माहौल कुछ वैसा ही था जैसा बरसात के बाद अचानक सफेद मोर नजर आ जाए।” जनता की समस्याओं पर उठाए सवाल ओ. पी. सिहाग ने कहा कि पंचकूला की जनता पानी-बिजली की किल्लत, टूटे-फूटे रास्ते, ट्रैफिक जाम, गंदगी, सेक्टरों की बदहाल व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रही है। इन गंभीर मुद्दों पर विधायक की चुप्पी और अनुपस्थिति ने नागरिकों को निराश किया है। उन्होंने कहा कि जनता विधायक से उम्मीद करती है कि वे सिर्फ चुनाव के समय ही नहीं बल्कि हर वक्त उनके बीच मौजूद रहें और समस्याओं के हल की दिशा में ठोस कदम उठाएं। अब जनता को दिखाना होगा भरोसा सिहाग ने कहा कि विधायक को अब केवल दिखावे से आगे बढ़कर वास्तव में काम करना होगा। “जनता ने राहत की सांस तो ली है कि आखिरकार उन्हें अपने विधायक दिख गए, लेकिन असली राहत तब मिलेगी जब उनकी परेशानियों का समाधान धरातल पर होगा। पंचकूला जैसे वीआईपी शहर की समस्याओं को अनदेखा करना जनता के साथ अन्याय है।” गंभीर होकर निभाएं जिम्मेदारी ओ. पी. सिहाग ने उम्मीद जताई कि विधायक चंद्रमोहन अब पंचकूला की जनता के बीच ज्यादा सक्रिय रहेंगे और जिम्मेदारी निभाने में गंभीरता दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि विधायक का कर्तव्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि जनता के दुख-दर्द को दूर करना है।

Scroll to Top