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90के दशक की टपोरी भाषा और टपोरीगिरी बोले तो हंसी का डोज़ है (लेख :हास्यऔर यादें )

[ इंद्र यादव अरे भाई…भाई,सुन न, 90 का दशक, वो भी मुंबई में! वो भी क्या ज़माना था जब टपोरी भाषा और टपोरीगिरी ने शहर की गलियों को ऐसा रंग दिया कि हर गली में एक ‘भाई’ और हर नुक्कड़ पर एक ‘खतरनाक’ स्टाइल मारता हुआ नौजवान मिल ही जाता। टपोरीगिरी सिर्फ़ एक स्टाइल नहीं था, यार, वो तो एक मूड था, एक मस्ती थी, एक जिंदगी जीने का तरीक़ा था! तो चल, थोड़ा टाइम मशीन में बैठकर उस दौर में झांकते हैं 90 के दशक में मुंबई की गलियों में अगर आप बिना ‘भाई’, ‘रापचिक’, ‘झकास’, या ‘खतरनाक’ बोले चले गए, तो समझ लो आप मुंबई में थे ही नहीं! टपोरी भाषा का जादू ऐसा था कि आम बात को भी मसालेदार बना दे। मान लो, कोई दोस्त बाइक पर आया और बोला, “क्या, भाई, किधर को चला?” तो जवाब मिलता, “अरे, बस रापचिक माल देखने जा रहा हूँ, तू भी चल!” अब ये ‘माल’ कोई ज्वेलरी नहीं, बल्कि टपोरी कोड में कुछ और ही होता था, समझे ना । ये भाषा बॉलीवुड से भी खूब प्रेरित थी। अनिल कपूर की “झकास!” चीख और मिथुन के डॉयलाग के साथ साथ संजय दत्त का “खतरनाक!” अंदाज़ टपोरी भाषा के लिए ऑक्सीजन का काम करता था। गुलशन ग्रोवर और रजा मुराद जैसे विलेन भी टपोरी डायलॉग्स में जान डालते थे। “अपुन को तो बस एक मौका चाहिए, फिर देख कैसे सीन पलटता है!” – ये डायलॉग सुनकर तो गली का हर लड़का खुद को मोगैंबो समझने लगता था। और हाँ, टपोरी भाषा में गालियाँ भी थीं, लेकिन वो गालियाँ नहीं, प्यार का इज़हार थीं! जैसे, “साला, तू तो एकदम टकाटक है!” ये सुनकर सामने वाला शरमाता नहीं, बल्कि सीना चौड़ा करके बोलता, “अरे, अपुन तो बिंदास है, भाई!” टपोरीगिरी सिर्फ़ बोलने का ढंग नहीं, बल्कि जीने का स्टाइल था। टपोरी का लुक तो ऐसा कि मानो फैशन डिज़ाइनर ने गलती से सारी रोब एक साथ डाल दी हो। चमकीली शर्ट, जिसके बटन खुले हों ताकि बनियान की झलक दिखे, टाइट जीन्स, और अगर जूते नहीं मिले तो कोल्हापुरी चप्पल! ऊपर से माथे पर तिरछा टोपी या फिर बालों में इतना तेल कि मक्खियाँ भी फिसल जाएँ। और हाँ, गले में सोने की चेन, भले ही वो असली हो या नकली, लेकिन चमक ऐसी कि सूरज भी शरमा जाए।टपोरी का चलना भी अपने आप में एक कला था। कंधे हिलाते हुए, एक तरफ़ झुके हुए, जैसे अभी-अभी किसी फिल्म के सेट से निकलकर आए हों। और अगर जेब में पैसे नहीं थे, तो भी टपोरी का कॉन्फिडेंस ऐसा कि सामने वाला सोचे, “लगता है, ये भाई किसी बिजनेसमैन का बेटा है! 90 के दशक में टपोरीगिरी का असली मज़ा था गली-मोहल्लों में। मान लो, कोई टपोरी अपने दोस्तों के साथ नुक्कड़ पर खड़ा है, चाय की टपरी पर गप्पें मार रहा है। बात शुरू होती थी क्रिकेट से, फिर बॉलीवुड, और आखिर में पहुँचती थी ‘लव स्टोरी’ पर। “अरे, वो सामने वाली गली की शीला, भाई, उसने मुझे लाइन दी!” अब शीला ने सचमुच लाइन दी हो या ना दी हो, टपोरी की कहानी में तो वो माधुरी दीक्षित से कम नहीं होती थी।और अगर कोई टपोरी को टक्कर देने की कोशिश करता, तो बस एक डायलॉग, “अपुन को टेंशन मत दे, वरना इंजेक्शन दे दूँगा!” सुनकर सामने वाला हँसते-हँसते भाग जाता। टपोरीगिरी में मारपीट कम, मस्ती ज़्यादा थी। 90 के दशक में बॉलीवुड ने टपोरीगिरी को और चमकाया। ‘रंगीला’ का मुन्ना (आमिर खान) हो या ‘सत्या’ का भिकू म्हात्रे (मनोज बाजपेयी), इन किरदारों ने टपोरी को हर घर में पहुँचाया। मुन्ना का “हाय, रापचिक माल!” और भिकू का “मुंबई का किंग कौन? भिकू म्हात्रे!” सुनकर तो गली का हर लड़का अपने आप को हीरो समझने लगता था।और सिर्फ़ हीरो ही नहीं, विलेन भी टपोरी स्टाइल में बोलते थे। “बड़े बड़े शहरों में छोटी छोटी बातें होती रहती हैं,” गब्बर का ये डायलॉग भले ही 70 के दशक का था, लेकिन 90 में भी टपोरी इसे अपने स्टाइल में यूज़ करते थे।बआज भले ही मुंबई बदल गई हो, मॉल्स और मेट्रो ने गलियों को थोड़ा पीछे धकेल दिया हो, लेकिन टपोरीगिरी का जादू अभी भी बाकी है। आज भी कोई दोस्त मिले और बोले, “क्या, भाई, एकदम झकास लग रहा है!” तो मन में वही 90 का वाला वाइब आ जाता है। टपोरी भाषा और टपोरीगिरी मुंबई की धड़कन थी, है, और रहेगी।तो भाई, अगली बार जब तू मुंबई की गलियों में निकले, थोड़ा टपोरी स्टाइल मारना तो बोलना, “अपुन तो बिंदास है भाय ” और देख, कैसे सारा सीन पलट जाता है!

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लाड़ो लक्ष्मी योजना महिलाओं के साथ बड़ा छलावा” – सुधा भारद्वाज

: पंचकुला 27 सितंबर (ईशान राय ईशान टाइम्स हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुधा भारद्वाज ने भाजपा सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई “दीन दयाल लाड़ो लक्ष्मी योजना” को महिलाओं के साथ चुनावी छलावा और धोखा करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले यह वादा किया था कि हरियाणा की हर महिला को 2100 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे, लेकिन योजना में लगाई गई कड़ी शर्तों ने अधिकांश महिलाओं को इससे बाहर कर दिया है। मुख्य आपत्तियां: आय सीमा केवल 1 लाख – जबकि हरियाणा में बीपीएल की सीमा 1.80 लाख है। इससे बीपीएल परिवार की महिलाएं भी योजना से वंचित हो जाएंगी। अनावश्यक शर्तें – हर महीने मोबाइल ऐप पर जाकर फेस रिकॉग्निशन और बायोमेट्रिक के ज़रिए जीवित होने का प्रमाण देना होगा। पेंशनधारियों को बाहर – बुजुर्ग पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन लेने वाली महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा। लाभ की देरी – योजना का पैसा 1 नवंबर से नहीं, बल्कि आईडी बनने के एक महीने बाद से मिलेगा। सीमित दायरा – हरियाणा की 1.4 करोड़ महिलाओं में से मुश्किल से 10–12% महिलाओं को ही लाभ मिलेगा। सुधा भारद्वाज ने कहा: “यह योजना महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय उन्हें कागज़ों और शर्तों की बेड़ियों में जकड़ने का प्रयास है। भाजपा सरकार ने महिलाओं से किया वादा तोड़ा है और अब केवल चुनावी लाभ के लिए योजनाओं का ढोल पीटा जा रहा है। यह महिलाओं के अधिकारों का सीधा अपमान है।” कांग्रेस का संकल्प हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस का मानना है कि महिला सशक्तिकरण का मतलब बिना शर्त सहायता और सम्मानजनक समर्थन देना है।कांग्रेस पार्टी हरियाणा की हर महिला को उसके अधिकार और सुरक्षा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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रामलीला को परिवार सहित लोगों का देखने आना हमारी संस्कृति और धर्म के लिए अच्छी बात: जगद्गुरु कुमार स्वामी

पंचकूला में महिलाओं द्वारा किया जा रहा श्री रामलीला का मंचन रामलीला को परिवार सहित लोगों का देखने आना हमारी संस्कृति और धर्म के लिए अच्छी बात:महाराजधर्म,संस्कृति और महिलाओं को समान और सम्मान को बरकरार रखना ही हमारी प्राथमिकता:नागपालदर्शकों की तालियां और जय श्रीराम जयघोष कलाकारों के लिए पुरूस्कार से कम नहीं:अरुण सूद पंचकूला,(ईशान टाइम्स ) ” प्रभु श्री राम की असीम कृपा से गत चार दिनों से 6 माह से लेकर 83 वर्ष की बुजुर्ग महिलाओं द्वारा मंचित की जा रही श्री रामलीला में सभी कलाकारों का जोश देखते ही बनता है। उनके अदम्य अभिनय को देखने के उपरान्त उपस्थित सभी दर्शकगण आत्मविभोर हुए बिना नहीं रहते।” ये बात जगद्गुरु महाब्रह्मऋषिश्री कुमार स्वामी महाराज ने पत्रकार वार्ता के दौरान कही। इस वार्ता में उनके साथ संस्थापक एकता नागपाल और अध्यक्ष अरुण सूद, परवीन सरदाना, उपस्थित थे।महाराज ने कहा कि हाल ही में जिस प्रकार से रामलीलाओं का मंचन बढ़ा है और लोग इनको देखने के लिए अपने परिवारों के साथ निकल रहे हैं ये एक अच्छी बात है, ये हिन्दू धर्म और हमारी संस्कृति के प्रचार और प्रसार के लिए बहुत ही उत्तम है।वार्ता के दौरान एकता नागपाल ने बताया कि 91 महिलाओं की टोली ने अभी तक नारद कथा, राम कथा सुनाते शिवजी, रावण वेदवती संवाद, रावण नंदी व् शिव जी संवाद, राजा दशरथ द्वारा संतान प्राप्ति का यज्ञ, राम जन्म, अहिल्या को शिला से मुक्ति, सीता स्वयंवर, लक्ष्मण परशुराम संवाद, राम विवाह, विवाह उपरान्त अयोध्या आगमन, मंदता कैकेयी संवाद, दशरथ के 2 वचन, राम बनवास का सफल मंचन किया है जिसको दर्शकों ने खूब सराहा। उन्होंने कहा कि इस अनूठी रामलीला में हम सभी महिलाओं का एक लक्ष्य है कि महिला सशक्तिकरण अभियान में देश की सभी महिलाओं को इसके लिए प्रेरित करना और जिस प्रकार से हमारे वेद पुराणों में हमारे धर्म और संस्कृति के महत्व और महिलाओं को समानता, सम्मानता का स्थान प्राप्त है उसको बनाये रखना और भावी पीढ़ी को मंचन के माध्यम से संजोय रखना और उसकी अनुपालना करने के लिए प्रेरित करना है।इस मौके पर रामलीला आयोजन समिति के अध्यक्ष अरुण सूद ने पत्रकारों के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि जिस प्रकार से हमारी मातृ शक्ति अपनी अद्भुत प्रतिभा के चलते श्री रामलीला का मंचन कर रही हैं उसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम है।महिलाओं द्वारा रचित इस राम लीला को देखने के लिए लगातार लोगों का तांता लगा रहता है। उन्होंने कहा हजारों की संख्या में लोग इसका मंचन देखने के उपरान्त अपने भावों को नहीं रोक पा रहे और जब दर्शकगण पुरजोर आवाज के साथ जय श्री राम के जय घोष और तालियों के साथ खड़े होकर सभी कलाकारों का अभिवादन करते हैं तो मुझे लगता है इस से बड़ा पुरस्कार किसी कलाकार के लिए और कोई नहीं हो सकता। रामलीला के सभी सदस्यगण पारस्परिक तालमेल के साथ इसके आयोजन को सफल बनाने में दिन रात एक किये हुए है।जिसका परिणाम आज ये है कि महिलाओं द्वारा मंचित इस राम लीला को देखने चंडीगढ़, पंचकूला मोहाली और आसपास तो छोड़िये अन्य क्षेत्रों से भी इसको देखने आ रहे है। हमारा भी यही उद्देश्य है कि देश में सभी लोगों को राम लीला को देखने के लिए जाना चाहिए और प्रभु श्री राम द्वारा दर्शाये मार्ग पर चलने का स्वयं और अपने बच्चों को भी उसका अनुसरण करने के लिए प्रेरित करना चाहिए |उन्होंने बताया कि महिलाओं द्वारा मंचित इस रामलीला को देखने के लिए आमजन के अलावा विभिन्न प्रबुद्ध लोग हरियाणा के राज्यपाल माहिम की धर्मपत्नी प्रथम प्रदेश महिला नागरिक मित्रा घोष, विश्वविख्यात सुप्रसिद्ध जगद्गुरु महाब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी महाराज, हरियाणा विधानसभा के उप स्पीकर कृष्णा लाल मिड्डा, राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू, हरियाणा भाजपा पंचकुला के जिलाध्यक्ष अजय मित्तल और नगर निगम चंडीगढ़ की महापौर हरप्रीत कौर बबला, जी बी रियलिटी के चेयरमैन गुरवींदेट भट्टी, हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी सुमन सैनी, भारतीय जनता पार्टी हरियाणा उपाध्यक्ष बन्तो कटारिया, सामाजिक समरसता उत्तर क्षेत्र के प्रमोद कुमार और महामंडलेश्वर सोनाक्षी महाराज,गौरव गौतम, खेल मंत्री हरियाणा और चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ आई पी एस, आई जी पुलिस, पुष्पेंद्र कुमार,चंडीगढ़ सासंद मनीष तिवारी, स्वामी रमणीक जी महाराज, वागीश स्वरूप स्वामी जी , पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के जज जगमोहन बंसल,पूर्व हरियाणा विधानसभा स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता, एस.एस.पी चंडीगढ़ कंवरदीप कौर आई.पी.एस रोशन लाल जिंदल, जगदगुरु स्वामी विकास दास महाराज, मां कमली माई पीठा हरिश्वर श्री श्री 1008 महा मंडलेश्वर, मां कमलीनंद गिरी महाराज,डॉक्टर दिनेश गर्ग, काशी विद्युत परिषद कोषाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता, रमणीक महाराज रोशन लाल जिंदल ने रामलीला में मुख्यातिथि के रूप में भाग लिया।

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भारत की धरती पर सजीव होता विविधताओं का उत्सव

विश्व पर्यटन दिवस 2025 : विशेष मनोज वत्स हर साल 27 सितम्बर को मनाया जाने वाला विश्व पर्यटन दिवस यह याद दिलाता है कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसी राष्ट्र की आर्थिक सुदृढ़ता, सामाजिक साझेदारी और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने वाला स्तंभ है। इस वर्ष की थीम “पर्यटन और हरित निवेश” भविष्य के लिए उस सोच को बल देती है, जिसमें पर्यटन का विकास पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा और सतत प्रथाओं के साथ हो। भारत: विविधता में एकता का पर्यटन स्थल भारत के पास दुनिया के सबसे अनूठे पर्यटन अनुभव मौजूद हैं। उत्तर में हिमालय की बर्फीली चोटियाँ हैं, तो दक्षिण में समुद्र के विस्तृत तट। वाराणसी, बोधगया और अमृतसर जैसे तीर्थ स्थल आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं, वहीं जयपुर, उदयपुर और आगरा जैसे शहर इतिहास और स्थापत्य कला की कहानियाँ सुनाते हैं। केरल के बैकवाटर्स हों या लद्दाख की वादियाँ, भारत का हर कोना पर्यटकों के लिए नया अनुभव है। अर्थव्यवस्था और रोजगार का आधार भारत का पर्यटन उद्योग आज तेजी से उभरते क्षेत्रों में गिना जाता है। यह देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देता है और करोड़ों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का साधन बन चुका है। ग्रामीण इलाकों में होम-स्टे, स्थानीय गाइडिंग, हस्तशिल्प और लोककला से जुड़ी पहलें न केवल रोजगार बढ़ा रही हैं बल्कि पलायन की समस्या को भी कम कर रही हैं। सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व पर्यटन ने भारतीय समाज में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सद्भावना को नया आयाम दिया है। विभिन्न धर्मों, भाषाओं और परंपराओं के बीच संवाद बढ़ा है। महिला सशक्तिकरण और युवा उद्यमिता को पर्यटन ने विशेष बल दिया है। यह क्षेत्र स्थानीय कला, खानपान और संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में सेतु का काम कर रहा है। सॉफ्ट पावर और भारत की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करता है। इनक्रेडिबल इंडिया और देखो अपना देश जैसे अभियानों ने भारत की छवि को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। जी-20 जैसे वैश्विक आयोजनों ने हमारे सांस्कृतिक वैभव और आधुनिक सुविधाओं को विश्व समुदाय के सामने रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति मिली है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और प्रयागराज का महाकुंभ न केवल आस्था का केंद्र बने हैं, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की धार्मिक पर्यटन शक्ति को भी उजागर किया है। भविष्य की संभावनाएँ भारत अब दुनिया के सबसे बड़े पर्यटन बाजारों में शामिल होने की राह पर है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, वर्चुअल टूर, एआई आधारित यात्रा मार्गदर्शन और बेहतर परिवहन सुविधाओं ने पर्यटन को नई दिशा दी है। खासकर युवाओं और मिलेनियल्स के लिए साहसिक खेल, वेलनेस टूरिज्म और अनुभव-आधारित यात्रा नए अवसर लेकर आ रहे हैं। भारत के पास प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक धरोहर का अनूठा संगम है। यदि पर्यटन विकास को पर्यावरण-संवेदनशील और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए तो भारत न केवल वैश्विक पर्यटन शक्ति बनेगा, बल्कि अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के दम पर विश्व का नेतृत्व भी करेगा।विश्व पर्यटन दिवस हमें यही संदेश देता है—भारत की धरती हर यात्री के लिए एक नया अनुभव, एक नई प्रेरणा और एक नई ऊर्जा संजोए हुए है।

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“सफेद मोर से भी कम दिखाई देते हैं विधायक चंद्रमोहन” – ओ. पी. सिहाग का तंज

लंबे समय बाद पंचकूला की जनता ने देखे अपने विधायक, पीपल्स फ्रंट व जजपा जिला अध्यक्ष ने कहा – अब सिर्फ दिखने से काम नहीं चलेगा, धरातल पर करना होगा काम पंचकूला, 26 सितंबर (ईशान राय ,ब्यूरो ईशान टाइम्स), पंचकूला की राजनीति में हलचल उस समय तेज़ हो गई जब पीपल्स फ्रंट पंचकूला के अध्यक्ष एवं जननायक जनता पार्टी (जजपा) के जिला अध्यक्ष ओ. पी. सिहाग ने स्थानीय विधायक चंद्रमोहन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “जिस तरह सफेद मोर कभी-कभार ही दिखाई देता है, वैसे ही पंचकूला के लोग अपने विधायक के दर्शन करते हैं। आज तो लोगों ने लंबे समय बाद उन्हें देखा है।” सिहाग ने कहा कि पंचकूला की जनता कई महीनों से अपने मुद्दों और समस्याओं के समाधान के लिए विधायक को तलाश रही थी, लेकिन वे शायद ही कभी क्षेत्र में दिखाई देते हैं। “आज जब लोग उन्हें देखकर चौंक उठे तो माहौल कुछ वैसा ही था जैसा बरसात के बाद अचानक सफेद मोर नजर आ जाए।” जनता की समस्याओं पर उठाए सवाल ओ. पी. सिहाग ने कहा कि पंचकूला की जनता पानी-बिजली की किल्लत, टूटे-फूटे रास्ते, ट्रैफिक जाम, गंदगी, सेक्टरों की बदहाल व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रही है। इन गंभीर मुद्दों पर विधायक की चुप्पी और अनुपस्थिति ने नागरिकों को निराश किया है। उन्होंने कहा कि जनता विधायक से उम्मीद करती है कि वे सिर्फ चुनाव के समय ही नहीं बल्कि हर वक्त उनके बीच मौजूद रहें और समस्याओं के हल की दिशा में ठोस कदम उठाएं। अब जनता को दिखाना होगा भरोसा सिहाग ने कहा कि विधायक को अब केवल दिखावे से आगे बढ़कर वास्तव में काम करना होगा। “जनता ने राहत की सांस तो ली है कि आखिरकार उन्हें अपने विधायक दिख गए, लेकिन असली राहत तब मिलेगी जब उनकी परेशानियों का समाधान धरातल पर होगा। पंचकूला जैसे वीआईपी शहर की समस्याओं को अनदेखा करना जनता के साथ अन्याय है।” गंभीर होकर निभाएं जिम्मेदारी ओ. पी. सिहाग ने उम्मीद जताई कि विधायक चंद्रमोहन अब पंचकूला की जनता के बीच ज्यादा सक्रिय रहेंगे और जिम्मेदारी निभाने में गंभीरता दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि विधायक का कर्तव्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि जनता के दुख-दर्द को दूर करना है।

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लद्दाख : आंदोलन की आग या शांति का संदेश?

संजय राय, लद्दाख, जिसे आमतौर पर शांति, ठंडे मौसम और आध्यात्मिक सुकून की धरती माना जाता है, हाल के दिनों में अचानक चर्चा का केंद्र बन गया। लेह-कारगिल की ऊँचाइयों पर जहां अब तक बौद्ध मठों की घंटियाँ और पर्यटकों की चहल-पहल सुनाई देती थी, वहीं अब पत्थरबाज़ी, सरकारी गाड़ियों में आगज़नी और तनावपूर्ण नारे गूंज उठे। यह वही इलाका है, जो भारत-चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नज़दीक है और जहाँ कुछ समय पहले तक दोनों देशों की सेनाएँ आमने-सामने खड़ी थीं। हालाँकि अब हालात सामान्य बनाने के लिए कई दौर की वार्ताएँ हो चुकी हैं। लेकिन लद्दाख के भीतर का असंतोष एक अलग ही कहानी कह रहा है। आंदोलन की जड़ें स्थानीय लोगों की मुख्य मांगें हैं—लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए और उसे संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत विशेष संरक्षण मिले। 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग कर जब लद्दाख को केंद्रशासित क्षेत्र बनाया गया, तब लोगों ने सोचा था कि अब क्षेत्र का विकास तेजी से होगा और स्थानीय आकांक्षाएँ पूरी होंगी। लेकिन राज्य का दर्जा न मिलने और राजनीतिक अधिकारों के सीमित होने से असंतोष लगातार पनपता रहा। सोनम वांगचुक की भूमिका प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पर्यावरण चिंतक सोनम वांगचुक का आमरण अनशन इस असंतोष का प्रतीक बना। हालांकि उन्होंने शांति की अपील करते हुए अपना अनशन तोड़ा, लेकिन उनके आंदोलन ने युवाओं में उबाल पैदा किया। हाल की हिंसक घटनाओं को देखकर यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर शांत माने जाने वाले लद्दाख में इस तरह की आग कैसे भड़क उठी? प्रशासनिक सख्ती विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों में कई लोगों की जान गई और दर्जनों घायल हुए। हालात काबू में रखने के लिए प्रशासन को कर्फ़्यू और इंटरनेट बंदी जैसे कदम उठाने पड़े। लेह और कारगिल में अब रैलियों और बड़े जमावड़ों पर पाबंदी लागू है। इस बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। आगे का रास्ता लद्दाख भले ही भौगोलिक रूप से छोटा और जनसंख्या के लिहाज़ से सीमित क्षेत्र हो, लेकिन इसकी सामरिक और सांस्कृतिक अहमियत बेहद बड़ी है। भारत सरकार के लिए यह आसान नहीं होगा कि वह इसे पूर्ण राज्य बना दे, क्योंकि इसी तरह की मांगें जम्मू-कश्मीर और दिल्ली से भी उठ रही हैं। फिर भी लद्दाख के लोगों की उम्मीदें और उनका आक्रोश अनदेखा भी नहीं किया जा सकता। निष्कर्ष लद्दाख के मौजूदा हालात हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या हिंसक प्रदर्शन वास्तव में किसी समाधान की ओर ले जाएंगे, या फिर संवाद और धैर्य ही इस ठंडी धरती की असल पहचान को बनाए रख पाएंगे। सवाल यही है—लद्दाख का भविष्य ‘जेन ज़ी’ अंदाज़ की सड़क पर तय होगा, या फिर वह अपनी प्राचीन शांति और धैर्य की परंपरा को जीवित रखेगा?

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लघु फिल्म ‘चलो जीते है’ को युवाओं ने खूब सराहा

पंचकूला,कमल कलसी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाल्यकाल पर आधारित लघु फिल्म ‘चलो जीते है’ को पंचकूला के युवाओ ने खूब पसंद किया है। भाजपा जिला अध्यक्ष अजय मित्तल ने जानकारी देते हुए बताया कि नई पीढ़ी को उनके सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करने और जीवन में कुछ बड़ा करने की प्रेरणा देने के लिए भाजपा जिला संगठन की तरफ से ज़िले के हर वर्ग और आयु के युवाओ, स्कूली छात्र छात्रों और आर्थिक दृष्टी से कमज़ोर बच्चो को ‘चलो जीते है’ फिल्म को निःशुल्क दिखाने की व्यवस्था की गयी थी। अजय मित्तल ने बताया, ‘चलो जीते है’ फिल्म को ज्यादा से ज्यादा युवाओ को दिखाने के लिए एक जिला स्तरीय टीम का भी गठन किया था, जिसमे संगीता बैंसला को जिला संयोजक, जसवीर गोयत और मंगत राम स्याल को सह संयोजक की ज़िम्मेदारी दी गयी थी। जिला संयोजक संगीता बैंसला ने बताया, सप्ताह भर दिखाए गए इस फ्री शो को ज़िले के लगभग दो से तीन हज़ार युवाओ के साथ साथ पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओ ने भी देखा और इसकी सराहना की।

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अजय मित्तल धर्मपत्नी संग पहुंचे कालका शक्तिपीठ, हवन-यज्ञ कर ज़िले की खुशहाली की कि कामना

पंचकूला,कमल कलसी,भाजपा जिला अध्यक्ष अजय मित्तल ने धर्मपत्नी बिंदु मित्तल संग शारदीय नवरात्रि के पांचवे दिन कालका के प्राचीन काली माता मंदिर में हवन यज्ञ कर जिले की सुख-समृद्धि की कामना की। इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष तेजिंदर गुप्ता (टोनी), जिला प्रवक्ता तेजिंदर गुप्ता, वरिष्ठ नेता विजय कालिया, वरिष्ठ नेत्री बबली शर्मा, मंडल अध्यक्ष हरीश मोंगा, जिला सोशल मीडिया प्रमुख चंदा शर्मा, पम्मी कोहली, किशोरी लाल सहित तमाम पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने यज्ञ में आहुति दी। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष अजय मित्तल ने कहा कि नवरात्रि का पर्व शक्ति, साधना और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है। उन्होंने कहा, कालका शक्ति पीठ की पूरे उत्तर भारत में बड़ी महिमा है, सैकड़ो किलोमीटर की यात्रा तय करके माँ काली के भक्त बड़ी संख्या में कालका आते है। मित्तल ने कहा, हरियाणा टूरिज्म के दृष्टिकोण से कालका धार्मिक पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा धार्मिक स्थान है।

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हरियाणा राज्य के रायपुररानी निवासी राजन शर्मा ने किया नाम रोशन

NPC Mr. Haryana Championship 2025 में शानदार प्रदर्शन पंचकूला,(कमल कलसी,ईशान टाईम्स)।जिला पंचकूला के ब्लॉक रायपुररानी निवासी बॉडीबिल्डर और पावरलिफ्टर युवा राजन शर्मा ने एक बार फिर प्रदेश का नाम रोशन किया है। 23 वर्षीय राजन ने हाल ही में कुरुक्षेत्र में आयोजित NPC Mr. Haryana Championship 2025 में शानदार प्रदर्शन कर Men’s Physique कैटेगरी में 2nd स्थान और Bodybuilding कैटेगरी में 3rd स्थान हासिल किया है।23 साल की उम्र में हासिल किया बड़ा मुकाम पंचकूला पावरलिफ्टिंग एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी व सफल फिटनेस ओर हेल्थ कोच बनेराजन अब युवाओं को नशे से दूर रहने और फिटनेस अपनाने का संदेश देते हैं, ये उनका कहना है।राजन शर्मा कहते है “सपनों को हक़ीक़त में बदलने के लिए मेहनत, अनुशासन और सही सोच ज़रूरी है। अगर आप ठान लो तो कुछ भी असंभव नहीं।” गाँव और परिवार की ख़ुशी राजन के पिता अश्वनी कुमार ने कहा “राजन ने हमेशा हमें गर्व करने का मौका दिया है। उसकी मेहनत रंग लाई है।” गाँववाले भी राजन की उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे और कहते हैं कि वे अब युवाओं के आदर्श बन चुके हैं। विशेषज्ञों की राय युवाओं के लिए संदेश राजन का मानना है कि –✔ रोज़ व्यायाम करें✔ संतुलित आहार लें✔ नशे से दूर रहें✔ मेहनत और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाएँ निष्कर्ष राजन शर्मा ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत और समर्पण से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। NPC Mr. Haryana Championship 2025 में उनकी यह जीत न सिर्फ़ उनके करियर का सुनहरा अध्याय है बल्कि हरियाणा के खेल जगत में नई ऊर्जा भरने वाली उपलब्धि भी है।

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श्री राम जी ने उठाया शिव धनुष पंडाल में गूंज उठे जयकारे

सीता स्वयंवर की लीला ने मन मोहा चंडीगढ़ (ईशान राय , ईशान टाईम्स): उत्तराखंड जनसेवा एवं सांस्कृतिक मंच चंडीगढ़ द्वारा,आज सैक्टर 28 बी में रामलीला के तीसरे दिन के सीता स्वयंवर,अहिल्या उद्धार,दिखाया गया जिसे देखने जन सैलाब उमड़ पड़ा।आधुनिक तकनीक, प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुति और भक्ति माहौल ने रामलीलाओं को सभी के लिए अविस्मरणीय बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। रामलीला मंचन देखने के लिएआसपास के सेक्टरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धा और भक्ति के इस माहौल में मंचन देर रात तक चलता रहा। जनकपुरी में राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर की घोषणा की और शर्त रखी कि जो शिव जी के धनुष को उठा कर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता से विवाह करेगा। बड़े-बड़े राजाओं ने प्रयास किया, पर धनुष हिला तक न सके। इसी बीच प्रभु श्रीराम ने सहजता से धनुष उठा लिया, जो टूट गया। शहर में पहली बार पारम्‍परिक एवं आधुनिक नाट्य प्रस्‍तुति के संगम से आयोजित यह रामलीला शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी ​हुई है।मुख्य अतिथि साहिब सिंह पंवार व जब्बर सिंह नेगी  रामलीला की तारीफ की और खुशी जताई कि रामलीला मंचन कर रहे कलाकारों ने मर्यादित भाषाशैली का प्रयोग कर जनता का मन मोहा लिया । इस मौके पर सभा के समस्त पदाधिकारी, सदस्य मौजूद थे।

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