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कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह की कोठी पर सुसाइड

गुरुग्राम कांस्टेबल ने किया सुसाइडकैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह की कोठी पर सुसाइडरात 2:00 बजे की घटनाकांस्टेबल का शव गार्ड रूम से बरामदझज्जर के सुखपुरा गांव का रहने वाला था मृतकमौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहींपुलिस मामले की जांच में जुटीशव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया

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फिलीपींस में अगले 24घंटे में भयंकर तूफान की चेतावनी

फिलीपींस में अगले 24 घंटों के भीतर एक प्रचंड तूफान के उत्पात मचाने की संभावना जताई जा रही है, जो हवा की गति 215 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक होगी। इसके चलते समुद्र में लहरें लगभग 10 फीट ऊंची उठेंगी, जिससे व्यापक तबाही का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने को कहा है। इस खबर के बाद ग्रामीण इलाके खाली होते जा रहे हैं और हजारों लोग अपने घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।  यह ‘सुपर तूफान’ फिलीपींस में इस साल के सबसे शक्तिशाली तूफानों में से एक माना जा रहा है, जिसका नाम ‘रागासा’ रखा गया है। यह तूफान तेजी से दक्षिण-पूर्वी चीन की ओर बढ़ रहा है। बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए, उत्तरी फिलीपींस के कई गांवों से बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। पड़ोसी ताइवान में भी सुरक्षा के मद्देनजर सभी स्कूल और कार्यालय बंद कर दिए गए हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, रागासा तूफान की हवा की रफ्तार 215 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, और यह तट पर पहुंचने के बाद 265 किलोमीटर प्रति घंटे तक तेज हो सकती है। इस तूफान के सोमवार दोपहर या रात के समय कागायन के बाबुयान द्वीपों के आसपास से गुजरने या सीधे टकराने की संभावना है। फिलीपींस की मौसम एजेंसी ने समुद्री इलाकों में खतरनाक लहरों के बारे में भी आगाह किया है। अगले 24 घंटों में उत्तरी प्रांतों जैसे कागायन, बाटानेस, इलोकोस नॉर्टे और इलोकोस सुर के खुले और तटीय क्षेत्रों में तीन मीटर से अधिक ऊंची तूफानी लहरें उठने की संभावना है। कागायन द्वीपों और अपायाओ में बिजली आपूर्ति बाधित हो चुकी है, लेकिन अभी तक किसी जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने राजधानी समेत उत्तर लूजोन के 29 प्रांतों में सरकारी कामकाज और शैक्षणिक संस्थान बंद करने के आदेश जारी किए हैं। 8,200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचायाआपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि कागायन प्रांत में 8,200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि अपायाओ में 1,220 लोगों को शेल्टर होम में रखा गया है। बाढ़ और भूस्खलन के खतरे के मद्देनजर यह कदम उठाए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, और समुद्री जहाजों को बंदरगाह छोड़ने की अनुमति नहीं है। इस तूफान को इस वर्ष फिलीपींस में दर्ज 14वीं प्राकृतिक आपदा माना जा रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह तूफान कम से कम बुधवार तक दक्षिणी चीन सागर में सक्रिय रहेगा और फिर ताइवान और हांगकांग के दक्षिणी इलाकों से होते हुए चीनी मुख्यभूमि तक पहुंचेगा। हांगकांग और मकाऊ में भी तूफान की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोग अतिरिक्त भोजन और आपातकालीन सामग्री जमा करने लगे हैं। हांगकांग सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रेत के बोरे दोगुनी मात्रा में उपलब्ध कराए हैं। मकाऊ पुलिस ने निवासियों से सुरक्षा के लिए तैयार रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने का आग्रह किया है। अधिकारियों ने कहा है कि लोग अपने दरवाजे और खिड़कियों को मजबूत करें और जो लोग भूमिगत इलाकों में रहते हैं, वे तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।

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गुरबत के सितारे” स्लम एरिया के बच्चों ने गाजियाबाद में जीते गोल्ड मेडल

“पंचकूला,(कमल कलसी ब्यूरो ईशान टाइम्स)एएमएटी ताइक्वांडो सोसाइटी पंचकूला के बच्चों ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में आयोजित 5वीं ओपन नेशनल ताइक्वांडो कप में शानदार प्रदर्शन किया। पंचकूला के स्लम एरिया खड़क मंगोली के रहने वाले इन बच्चों ने कुल 8 मेडल हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इन बच्चों में गोविंद, विपिन, अंशु और अर्पिता ने गोल्ड मेडल जीते, जबकि कोमल नाम की बच्ची ने भी एक गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं, रानी और संजना ने कांस्य पदक हासिल किए।सोसाइटी की हेड कोच अमिता मारवाह ने इसे बच्चों के समर्पण की जीत बताया। उन्होंने कहा, “आर्थिक हालातों की तंगी कई बार प्रतिभा को खत्म कर देती है, लेकिन सही मार्गदर्शन और मदद से न केवल इन बच्चों, बल्कि उनके परिवारों की भी किस्मत बदल जाती है।”सोसाइटी की असिस्टेंट कोच हिमांशि मारवाह ने बच्चों के प्रदर्शन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद इन बच्चों ने यह साबित कर दिया है कि सफलता जज्बे से हासिल होती है, न कि संसाधनों से।यह प्रतियोगिता सब-जूनियर कैटेगरी (14 वर्ष से कम) और कैडेट कैटेगरी में हुई थी, जिसमें एएमएटी ताइक्वांडो सोसाइटी के कुल 7 बच्चों ने भाग लिया था।गौरतलब है कि एएमएटी ताइक्वांडो सोसाइटी पिछले कई सालों से स्लम एरिया के बच्चों को मुफ्त प्रशिक्षण और किट उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही, यह सोसाइटी इन बच्चों के प्रतियोगिता में भाग लेने से जुड़े अन्य खर्चों का भी वहन करती है। वर्ष 2011 से अब तक, सोसाइटी द्वारा प्रशिक्षित 1000 से अधिक बच्चों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं।

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पेसमेकर इम्प्लांट सर्जरी से 1.6 किलोग्राम के नाज़ुक नवजात शिशु की जान बचाई

फोर्टिस मोहाली के डॉक्टरों ने परमानेंट पेसमेकर इम्प्लांट सर्जरी से 1.6 किलोग्राम के नाज़ुक नवजात शिशु की जान बचाई–धीमी धड़कन को नियंत्रित करने के लिए बच्चे के दिल में एक बैटरी-पॉवर्ड डिवाइस डाली गई पंचकूला,कमल कलसी, नवजात बच्चों की कार्डिक केयर (दिल की देखभाल) में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली के डिपार्टमेंट ऑफ पीडियाट्रिक कार्डिक साइंसिज ने परमानेंट पेसमेकर इम्प्लांट सर्जरी के माध्यम से 1.6 किलोग्राम कम वज़न वाले नवजात शिशु की जान सफलतापूर्वक बचाई है। सर्जरी के बाद फॉलोअप जांच के दौरान, 24 सप्ताह की गर्भवती महिला को सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (एसएलई) का पता चला – एक ऑटोइम्यून रोग, जिसमें शरीर के इम्यून सिस्टम पर हमला होता है और ये हेल्दी टिश्यूज, जोड़ों, किडनियों, फेफड़ों और मस्तिष्क पर हमला करते है।मामले से जुड़े उच्च जोखिम को देखते हुए, महिला की साप्ताहिक जांच के साथ बारीकी से निगरानी की गई। 29वें सप्ताह में, अल्ट्रासाउंड से पता चला कि शिशु की हार्ट बीट यानि दिल की धड़कन बेहद कम होकर 32 धड़कन प्रति मिनट (गंभीर ब्राडकार्डिया) हो गई थी, और उसमें कंजेस्टिव हार्ट फेलियर (हृदय शरीर की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता) के लक्षण दिखाई दिए, साथ ही हाइड्रॉप्स फीटालिस (फीटस के टिश्यूज और अन्य प्रमुख अंगों में अत्यधिक तरल पदार्थ जमा होना) भी दिखाई दिया।महिला का तुरंत एक इमरजेंसी लोअर सेगमेंट सीजेरियन सेक्शन (एलएससीएस) किया गया और शिशु को नियोनटाल इंटेसिव केयर यूनिट में ट्रांसफर कर दिया गया, जहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। उसके बाद डॉ. रजत गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, डिपार्टमेंट ऑफ पीडियाट्रिक कार्डिक साइंसिज, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली द्वारा एक टेम्प्ररेरी पेसमेकर लगाया गया।इस तरह के इंटरवेंशंस के दौरान, जहां नवजात शिशु का वजन कम होता है, पेसमेकर इमप्लांट के लिए अत्यधिक सटीकता की आवश्यकता होती है। नवजात शिशु के हृदय गति रुकने और समय से पहले जन्म के लिए भी एनआईसीयू में उसका प्रबंधन किया गया। स्थिर होने के बाद, शिशु की परमानेंट पेसमेकर इमप्लांट सर्जरी डॉक्टरों की एक टीम द्वारा की गई। इस टीम का नेतृत्व डॉ. टीएस महंत, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस), फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली; डॉ. आलोक सूर्यवंशी, सीनियर कंसल्टेंट, सीटीवीएस, फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली; और डॉ. रजत गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, डिपार्टमेंट ऑफ पीडियाट्रिक कार्डिक साइंसिज, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली ने किया। इससे शिशु के दिल की धड़कन को स्थिर करने और दिल के कार्य को सहारा देने में मदद मिली।सर्जरी में धीमी या क्षतिग्रस्त हार्टबीट को नियंत्रित करने के लिए शिशु के दिल में एक बैटरी-पॉवर्ड डिवाइस लगाया गया। सर्जरी के बाद शिशु की रिकवरी काफी बेहतर रही और सर्जरी के पांच दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।इस मामले पर चर्चा करते हुए, डॉ. टीएस महंत, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, सीटीवीएस, फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली ने कहा कि “यह असाधारण मामला जल्दी डायग्नोसिस, कोऑर्डिनेटेड मल्टीडिसप्लनरी केयर और एडवांस्ड कार्डिक इंटरवेंशंस की उपलब्धता के महत्व को उजागर करता है। बच्चा अब तीन महीने का है और स्वस्थ जीवन जी रहा है। जन्मजात ही हार्ट में होने वाले विकारों का जल्द पता लगाने के बारे में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। इन जन्मजात दोषों का समय पर इलाज न करने से बच्चे के दिल को कभी बेहतर न होने वाली क्षति हो सकती है।”फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली का डिपार्टमेंट ऑफ पीडियाट्रिक कार्डिक साइंसिज इस क्षेत्र का एकमात्र सेंटर है जहां न केवल पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश, बल्कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, मंगोलिया और दक्षिण अफ्रीका से भी मरीज आते हैं।

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नेपाली जनता का उग्र रूप देखकर वहां के मलाईदार नेताओँ की धुंधला गई आखें

पिछले दिनों नेपाल की सत्ता के विरोध मे वहा के नागरिको ने जो आक्रोष बगावती तेवर दिखाया उसका कारण वहां के हुक्मरान थे .जो जनता की सुध लेने के बदले,सत्ता की मलाई खाने मे मशगूल थे l नेपाली लोगों ने उनकी जड़े खोद दी l नेपाल मे चार दिन पहले तक जो हिंसा का तांडव हुआ .उससे नेपाल मे वही लोग दुखी है जो सेक्युलर वादी एवं हिन्दू विरोधी मानसिकता रखते थे।नेपाल मे सत्ता के विरोध मे जो कुछ हुआ उसकी एक बानगी देखकर कोई भी समझ जायेगा,कि वहा की जनता इतनी इतनी गुस्से मे क्यों थी lवहां के कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष व 5 बार नेपाल के प्रधानमंत्री रहे शेर बहादुर देउबा जिन्होंने सत्ता के लिए कम्युनिस्ट पार्टी से गठबंधन करके फिर से सत्ता की मलाई चाटने लगे.थे l परंतु नेपाल के मासूम और शांतिपसंद लोगों का वहां शोषण एवं अत्याचार,होने लगा व गौमाता का वध किया जाने लगा था।जनता को य़ह सहन नहीं हो रहा था l इसलिए बग़ावत पर उतरने के अलावा बड़े नेताओं व वीआईपी लोगों की जी भरकर हजामत कर दिए lशेर बहादुर देउबा,जो 5 बार प्रधानमंत्री थे साथ ही वर्तमान में नेपाली संसद के अध्यक्ष और उनकी पत्नी आरजू विदेश मंत्री थी उनकी भीड़ ने उसकी खतरनाक मोबलीचिंग की है पूरा शरीर लहूलुहान है हड्डियों में कई जगह फैक्चर हुएl साथ में उसकी पत्नी थींवह भी लहूलोहान हुईंउसका बड़ा बेटा साथ था उसके कपड़े फाड़ दिए गए ।नेपाली सैनिक अपनी जान पर खेल कर उन्हें बचाने की पूरी कोशिश करते रहे l जनता का गुस्सा इतना अधिक था कि उनके रेस्क्यू के लिए एक हेलीकॉप्टर आया तो नेपाल की भीड़ में हेलीकॉप्टर पर पत्थरबाजी कर दिया जिससे हेलीकॉप्टर लैंड नहीं हो पाया है बाद में उन लोगों बड़ी मुश्किल से उनकी जान बचाई गईlइससे ज़ाहिर होता है कि भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे नेताओं कि दशा नेपाल और बांग्लादेश की तरह जनता कर देगी । नेपाल की घटना से हिंदुस्तान को सबक़ लेना चाहिये जनता को उसकी भावनाओं का निरादर करना भारी पड सकता है । जनता का विरोध भारी पड़ सकता है । मुद्दा पुराना नहीं हुआ इतिहास में दर्ज हो गया । संजय राय, एडिटर ईशान टाइम्स ग्रुप

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मैं तो प्रकृति का आशिक हूं, इन महलों में तो मेरा दम घुटता है साहब.

दुनियां की इस मिट्टी से लेकर जल,वायु हर जगह जीवों का बसेरा है,प्रकृति हमारे जीवन का आधार है। यह पेड़-पौधों, नदियों, पहाड़ों और जंगलों के रूप में हमें शुद्ध हवा, पानी और भोजन प्रदान करती है। आधुनिक जीवन में जहां तनाव और भागदौड़ बढ़ती जा रही है, वहीं प्रकृति एक शांतिपूर्ण आश्रय बनकर उभरती है। सुबह की पहली किरण, पक्षियों की चहचहाहट, और हरी-भरी घास का स्पर्श मन को सुकून देता है।प्रकृति में सुख और शांति का कारण इसका सादगी और संतुलन है। जब हम जंगल में टहलते हैं या नदी के किनारे बैठते हैं, तो हमारा मन अतीत और भविष्य की चिंताओं से मुक्त हो जाता है। वैज्ञानिक शोध भी बताते हैं कि प्रकृति के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। यह हमें तरोताजा कर देती है और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। हालांकि, आज हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। शहरीकरण, प्रदूषण और वनों की कटाई ने इस संतुलन को बिगाड़ दिया है। हमें अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना होगा—पेड़ लगाना, प्लास्टिक का कम इस्तेमाल करना, और प्रकृति के साथ समय बिताना। केवल तभी हम सच्चे सुख और शांति को प्राप्त कर सकते हैं, जो प्रकृति में ही छिपा है।आप कभी शुकुन से प्रकृति पर विचरण करनें वाले जीवों के जीवन को परखकर एहसास करनें की कोशिश तो करें।प्रकृति को संरक्षित करें, क्योंकि यह न केवल हमारी दुनिया है, बल्कि हमारी शांति का भी स्रोत है।

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मोदी सरकार ने भविष्य के सपनों के मुताबिक किया जीएसटी रिफॉर्म : मोहन लाल बड़ौली

BREAKING NEWS अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार मोदी सरकार का जनता को नवरात्रि पर्व का तोहफा : मोहन लाल बड़ौली चंडीगढ़, 21 सितंबर(संजय राय )। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंडित मोहन लाल बड़ौली ने कहा कि मोदी सरकार ने भविष्य के सपनों के मुताबिक जीएसटी रिफार्म किया है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि पर्व के पहले ही दिन से अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार लागू हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश की जनता को मोदी सरकार का यह बड़ा उपहार है। उन्होंने कहा कि यह जीएसटी उत्सव जनता की बचत को बढ़ाएगा, प्रदेश के हर गरीब, मध्यम वर्ग, किसान व सभी परिवार को इसका लाभ मिलेगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सभी प्रदेशवासियों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं भी दी।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बड़ौली ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में अलग-अलग तरह के कई टैक्स थे। जनता टैक्स के बोझ के नीचे दबी हुई थी। व्यापारी और कारोबारी भी वैट के जाल में जकड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने वैट के टैक्स जाल को खत्म जीएसटी लागू की और जनता को बड़ी राहत पहुंचाई है।श्री बड़ौली ने कहा कि कांग्रेस टैक्स स्ट्रक्चर शोषण करने वाला था। वैट के जरिए लोगों को लूटा जाता था। अब मोदी सरकार ने अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार को लागू करके लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त किया है। अब नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म से व्यापारी, उधोगपति और आम आदमी आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत होगा। यह मोदी सरकार का देश के लोगों को दीवाली का बड़ा तोहफा है जो नवरात्रि के पहले दिन से मिलना शुरू हो जाएगा।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत चौथी अर्थव्यवस्था वाला देश बना। अब जीएसटी रिफार्म से भारत की अर्थ व्यवस्था विश्व मे तजी से आगे बढ़ेगी। सामान्य लोगों की खरीद पॉवर बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत बनाने की दिशा में मोदी सरकार का यह स्वागत योग्य और बढ़ा कदम है।श्री बड़ौली ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान देश भ्रष्टाचार का बोलबाला था। समाचार पत्र घोटालों की खबरों से भरे रहते थे। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने 2014 में भाजपा की सरकार बनाई। पीएम मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ाने का काम किया।श्री बड़ौली ने कहा जीएसटी सुधारों का हर क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलने वाला है। किसान के उपकरणों सहित रोजमर्रा की चीजें सस्ती होगी। जीएसटी में सुधार करने से मांग बढ़ेगी, मांग बढ़ने से पूर्ति बढ़ेगी और पूर्ति बढ़ने से निवेश बढ़ेगा और निवेश बढ़ने से अर्थव्यवस्था बढ़ेगी व अर्थव्यवस्था के बढ़ने से देश आगे बढ़ेगा।जीएसटी रिफार्म से टैक्स सिस्टम आसान हुआ है जिसका फायदा व्यापारियों को भी मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले की प्राचीर से जो वादा किया था वह पूरा करके दिखाया है। उन्होंने कहा हकि हमारी सरकार का लक्ष्य सिर्फ राजस्व संग्रह नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक की जीवन गुणवत्ता सुधारना है। टैक्स दरों की इस बड़े पैमाने पर समीक्षा से आम आदमी की रोजमर्रा की खर्चों में कमी आएगी, स्वास्थ्य और बीमा सेवाएं सस्ती होंगी, और व्यापारिक माहौल में सुगमता बढ़ेगी। यह कदम निश्चित तौर पर देश की आर्थिक ताकत को मजबूत करेगा और नई उम्मीदें जगाएगा।

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भारत में सूद पर पैसा लेनें वाला इंसान मूर्ख है या चालाक

17 सितंबर 2025 (इंद्र कुमार ,ईशान टाइम्स) भारत में अवैध सूदखोरी (साहूकारी) एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक समस्या है, जो सदियों से चली आ रही है। यह प्रथा, जिसमें लोग उच्च ब्याज दरों पर कर्ज देते हैं, ग्रामीण समुदायों में गरीबी, शोषण और सामाजिक असमानता को बढ़ावा देती है।आर्थिक शोषण और गरीबी का दुष्चक्र अवैध सूदखोरी का सबसे बड़ा दुष्परिणाम आर्थिक शोषण है। साहूकार अक्सर 50% से 100% या उससे भी अधिक ब्याज दरों पर कर्ज देते हैं। ग्रामीण लोग, जो ज्यादातर छोटे किसान, मजदूर या गरीब परिवारों से होते हैं, इन कर्जों को चुकाने में असमर्थ रहते हैं। नतीजतन, वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं, जहां मूलधन के साथ-साथ ब्याज का बोझ बढ़ता जाता है। यह स्थिति उन्हें और गहरी गरीबी में धकेल देती है, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाता है। साहूकार अक्सर कर्ज न चुका पाने वालों पर दबाव डालने के लिए हिंसा, धमकी और अपमानजनक व्यवहार का सहारा लेते हैं। ग्रामीण इलाकों में, जहां सामाजिक संरचना और पारिवारिक सम्मान महत्वपूर्ण होता है, कर्जदारों को सामाजिक बहिष्कार, अपमान और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। कई बार कर्जदार आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं, क्योंकि वे इस बोझ से मुक्ति का कोई रास्ता नहीं देख पाते। अवैध सूदखोरी के कारण कई ग्रामीण परिवार अपनी जमीन, मवेशी या अन्य संपत्ति खो देते हैं। साहूकार अक्सर कर्ज के बदले संपत्ति को हड़प लेते हैं, जिससे परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ जाती है। छोटे किसानों के लिए जमीन उनकी सबसे बड़ी पूंजी होती है, और इसका नुकसान उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर सकता है। ग्रामीण इलाकों में अवैध सूदखोरी के खिलाफ कानूनी जागरूकता और पहुंच की कमी होती है। साहूकार अक्सर अनपढ़ और कमजोर वर्गों का शोषण करते हैं, क्योंकि इन लोगों को अपने अधिकारों और कानूनी उपायों की जानकारी नहीं होती। भले ही भारत में साहूकारी को नियंत्रित करने के लिए कानून (जैसे, मनी लेंडिंग एक्ट) मौजूद हैं, लेकिन इनका कार्यान्वयन ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर है। कर्ज के बोझ तले दबे परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा साहूकारों को चुकाने में खर्च कर देते हैं, जिसके कारण बच्चों की शिक्षा और परिवार के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाते। बच्चों को स्कूल छोड़कर मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, और परिवारों को चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है। यह स्थिति सामाजिक और आर्थिक विकास को और अधिक बाधित करती है। अवैध सूदखोरी सामाजिक असमानता को और गहरा करती है। साहूकार, जो अक्सर समाज के धनी और प्रभावशाली वर्ग से होते हैं, गरीब और कमजोर वर्गों का शोषण करते हैं। इससे समाज में शक्ति का असंतुलन बढ़ता है, और गरीब समुदायों का उत्थान और भी मुश्किल हो जाता है।इस समस्या से निपटने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं जैसे कि ग्रामीण लोगों को वित्तीय प्रबंधन और उनके कानूनी अधिकारों के बारे में शिक्षित करना। सरकार को चाहिए कि गरीबों के लिए सहकारी बैंकों और माइक्रोफाइनेंस की पहुंच व सस्ते और वैध कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराना। अवैध साहूकारी के खिलाफ कानूनों का प्रभावी प्रभावी से लागू करना। रोजगार के नए अवसर पैदा करके लोगों की आर्थिक निर्भरता कम करना।ग्रामीण इलाकों में अवैध सूदखोरी एक गंभीर समस्या है, जो आर्थिक, सामाजिक और मानसिक स्तर पर लोगों को प्रभावित करती है। यह न केवल व्यक्तियों और परिवारों को नष्ट करती है, बल्कि पूरे समुदाय के विकास को बाधित करती है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार, सामाजिक संगठनों और समुदायों को मिलकर काम करना होगा। शिक्षा, जागरूकता और वैध वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के माध्यम से इस कुप्रथा को जड़ से खत्म किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण भारत में एक समृद्ध और समान समाज का निर्माण हो सके। सुतखोरों से पीड़ित पीड़िता को ध्यान देना जरूरी है कि भारत में अवैध सूदखोर (illegal moneylenders या loan sharks) वे होते हैं जो बिना लाइसेंस के पैसे उधार देते हैं, अत्यधिक ब्याज वसूलते हैं या जबरन वसूली के तरीके अपनाते हैं। इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई राज्य-विशेष कानूनों, भारतीय दंड संहिता (IPC) और अन्य केंद्रीय कानूनों के तहत की जाती हैसूदखोरों द्वारा धमकी, जबरन वसूली या धोखाधड़ी के मामलों में IPC की धाराएं लागू होती हैं,धारा 420: धोखाधड़ी (cheating) सजा,7 साल तक की कैद और जुर्माना।धारा 506: आपराधिक धमकी (criminal intimidation) सजा,2 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों।बधारा 383-384 जबरन वसूली (extortion) सजा, 3 साल तक की कैद और जुर्माना ।धारा 340-342: गलत तरीके से कैद (wrongful confinement) सजा, 1 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों।अगर सूदखोर हिंसा या धमकी का इस्तेमाल करते हैं, तो ये धाराएं सीधे लागू होती हैं।

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रामलीला बनेगी प्रेरणा: इस बार मंच से गूँजेगा संदेश – पर्यावरण बचाओ

रामलीला में इस बार विशेष संदेश: ‘पर्यावरण संरक्षण ही धर्म आस्था के संग पर्यावरण का पाठ पढ़ाएगी मोहाली की रामलीला बाढ़ की त्रासदी से सबक: रामलीला मंच से उठेगी पर्यावरण बचाने की आवाज़ मोहाली, 17 सितंबर:(ईशान राय ,Ishan Times) श्रीरामलीला एवं दशहरा कमेटी, मोहाली (फेज-1) इस साल अपने भव्य आयोजन में एक विशेष पहल करने जा रही है। पारंपरिक मंचन और रावण दहन के साथ-साथ इस बार का मुख्य थीम रखा गया है – “पर्यावरण संरक्षण” । हाल ही में कई राज्यों में आई बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रकृति से खिलवाड़ इंसान को भारी पड़ सकता है। ऐसे में रामलीला के मंच से लोगों को पर्यावरण बचाने का संदेश देना समय की ज़रूरत भी है और सामाजिक ज़िम्मेदारी भी। समिति अध्यक्ष आशु सूद ने बताया कि इस बार मंचन के कई दृश्यों को इस तरह से प्रस्तुत किया जाएगा कि दर्शक उनसे प्रेरित होकर पर्यावरण को बचाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि रामायण के आदर्शों के साथ-साथ समाज को यह भी समझाया जाए कि वृक्ष, जल और वायु की रक्षा करना भी उतना ही बड़ा धर्म है।” समिति के प्रेस सचिव प्रिंस मिश्रा ने बताया कि रामलीला मैदान में हर दिन पर्यावरण जागरूकता से जुड़े संदेश पोस्टर और बैनर के माध्यम से दिखाए जाएंगे। साथ ही, कार्यक्रम स्थल पर ‘ग्रीन ज़ोन’ भी बनाया जाएगा, जहाँ पौधारोपण और स्वच्छता अभियान से जुड़ी जानकारी लोगों को दी जाएगी। बुज़ुर्ग दर्शक और वरिष्ठ सदस्य बताते हैं कि पहले रामलीला केवल धार्मिक आयोजन मानी जाती थी, लेकिन अब इसे समाज को दिशा देने वाले मंच के रूप में देखा जा रहा है। मोहाली की रामलीला इस बार केवल प्रभु श्रीराम के आदर्श ही नहीं, बल्कि पर्यावरण बचाने का संकल्प भी घर-घर तक पहुँचाएगी।इस अवसर पर उपाध्यक्ष प्रतीक, कोषाध्यक्ष उपेंद्र सोढी, जनरल सचिव कमल शर्मा, कार्यकारी सदस्य अमित वर्मा, सिकंदर, संदीप राणा, यतिन खट्टर, आयुष, युवराज कोच्चर व अन्य सदस्य और कलाकार मौजूद थे।

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डॉ. रत्नेश लाल आईडीएसए के चेयरमैन, अपराजिता सरकार वाईस चेयरमैन निर्वाचित

नई दिल्ली, 17 सितम्बर ( संजय राय, ईशान टाइम्स ) हर्बालाईफ के कार्पोरेट मामलों के वरिष्ठ निदेशक डा. रत्नेश लाल को भारत में डायरेक्ट सैलिंग क्षेत्र की शीर्ष संस्था इंडियन डायरेक्ट सैलिंग एसोसिएशन (आईडीएसए) का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। वह निर्वतमान चेयरमैन और ओरिफ्लेम के एशिया संभाग के कार्पोरेट मामले और पब्लिक पॉलिसी निदेशक विवेक कटोच का स्थान लेंगे।आईडीएसए की आज यहां आयोजित 29वीं वार्षिक आम बैठक में नई कार्यकारिणी के लिये हुये चुनावों में डा. लाल का सर्वसम्मति से चेयरमैन पद के लिए चयन हुआ। अन्य पदों के चुनाव में मोदीकेयर की ग्रोथ ऑफिस प्रमुख सुश्री अपराजिता सरकार को वाईस चेयरमैन तथा एमवे इंडिया के कार्पोरेट मामलों के वाईस प्रैज़ीडेंट रजत बनर्जी को सचिव पद के लिये चुना गया। नई कार्यकारिणी का कार्यकाल दो वर्ष के लिये होगा।अपनी नई भूमिका को लेकर डा. लाल ने कहा “आईडीएसए उपभोक्ता संरक्षण के अपने मूल उदेश्य के साथ देश के आर्थिक विकास में अपना योगदान मज़बूत करने तथा शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में रोज़गार और उद्यमिता के समान अवसर पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उपभोक्ता संरक्षण (प्रत्यक्ष बिक्री) नियम, 2021 लागू होने और राज्य-स्तरीय निगरानी तंत्र विकसित होने के साथ, हमारा अब अगला ध्यान इसमें स्पष्टता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रव्यापी सामंजस्य स्थापित करने पर है।”निवर्तमान अध्यक्ष श्री कटोच ने कहा, “मेरे कार्यकाल के दौरान, इस उद्योग ने एक विश्वसनीय रिटेल चैनल के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने के साथ उपभोक्ताओं के साथ बेहतर जुड़ाव और विश्वास पैदा करने तथा डिजिटल क्षेत्र की नवीनताओं को अपनाया। मुझे इन उपलब्धियों पर गर्व है और विश्वास है कि उपलब्धियों की कड़ी उतरोत्तर जारी रहने के साथ डायरेक्ट सैलिंग लोगों को सशक्त बनाने के साथ देश की विकास गाथा में सार्थक योगदान देती रहेगी।”अमरीका के वाशिंटन स्थित वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (WFDSA) की रैंकिंग के अनुसार भारत का डायरेक्ट सेलिंग उद्योग अब वैश्विक स्तर पर 11वें स्थान पर है। वर्तमान में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के बाज़ार आकार के साथ, यह देशभर में करीब 90 लाख लोगों को आजीविका के अवसर प्रदान कर रहा है।

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