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हरियाणा बनेगा औद्योगिक विकास की धुरी : राव नरबीर सिंह

प्रदेश में 10 नए औद्योगिक मॉडल टाउनशिप स्थापित करने की तैयारी, गुरुग्राम में होगा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट चंडीगढ़, 25 अक्तूबर(ईशान टाइम्स)— हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि दुनिया का कोई भी देश उद्योगों के बिना विकसित नहीं बन सकता। कृषि प्रधान हरियाणा को औद्योगिक विकास की नई पहचान देने के लिए राज्य सरकार ने आने वाले पांच वर्षों की विस्तृत औद्योगिक रूपरेखा तैयार की है, जिसके तहत 10 नए औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (IMTs) विकसित किए जाएंगे। इनमें से दो गुरुग्राम के आसपास स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही, अप्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर गुरुग्राम में “ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट” का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विश्वभर के निवेशकों को हरियाणा में उद्योग लगाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। गुरुग्राम बनेगा “लघु विश्व”, औद्योगिक और पर्यावरणीय विकास का मॉडल शहर उद्योग मंत्री ने कहा कि गुरुग्राम अब ग्लोबल सिटी का रूप ले चुका है, जहां लघु भारत ही नहीं बल्कि लघु विश्व की झलक दिखाई देती है। हमारा उद्देश्य है कि यह शहर औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन का आदर्श उदाहरण बने। इसके लिए “हरित गुरुग्राम अभियान” के तहत बड़ी औद्योगिक कंपनियों से CSR फंड के माध्यम से सहयोग लिया जाएगा। हाइटेक नर्सरियों से सजेगा गुरुग्राम और सोहना राव नरबीर ने कहा कि वन विभाग ने गुरुग्राम और सोहना की सभी नर्सरियों को आदर्श हाइटेक नर्सरी के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की है। इनमें ऐसे पौधे तैयार किए जाएंगे जिन्हें एक-दो वर्ष बाद शहर के विभिन्न हिस्सों में रोपा जा सके। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत की आधुनिक नर्सरियों का अध्ययन कर हरियाणा में वैसी ही मॉडर्न नर्सरियों को विकसित किया जाएगा। नए उद्यमों को मिलेगा बढ़ावा — पीएमईजीपी से 5064 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत उद्योग मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) को और अधिक सक्रियता से लागू किया जाए ताकि नए उद्यमों को ऋण के रूप में वित्तीय सहायता मिल सके। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 761 से अधिक मामलों को मंजूरी दी गई है और बैंकों के माध्यम से अब तक कुल लगभग 5064.40 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया जा चुका है। कृषि और उद्योग — विकास के दो पूरक स्तंभ राव नरबीर ने कहा कि हरियाणा हरित क्रांति का अग्रदूत रहा है, और अब समय है कि राज्य औद्योगिक क्रांति का प्रतीक बने। उन्होंने कहा कि उद्योग और कृषि एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए दोनों क्षेत्रों को समान गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण (PMFME) योजना के तहत 1300 से अधिक आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जिससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

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हरियाणा में विकास नहीं जंगलराज है, तेजी से बढ़ रहे है अपराध और भाजपा सरकार सो रही है: कुमारी सैलजा

चंडीगढ़, 25 अक्तूबर(ईशान टाइम्स)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार भने ही विकास राज की बात कर रही है पर हकीकत से हैै प्रदेश में जंगलराज है। सरकार की अधिकारी नहीं सुन रहे है, अधिकारी जनता की नहीं सुन रहे है। अपराधियों को खाकी का कोई डर नहीं है, प्रदेश में रोजाना हत्याएं, लूट, डकैती, अपहरण, बलात्कार जैसे वारदातें सरेआम हो रही है। सारे अपराधों की जड़ नशे का धंधा आज भी फल फूल रहा है। रोज नशे से मौत हो रही है। सिरसा में तो युवाओं की जिंदगी से नशा तस्कर खिलवाड़ कर रहे हैं। मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में सरकार चल नहीं रही, बल्कि सोई हुई है। केंद्र सरकार की सोशल प्रोग्रेस इंडेक्स (एसपीआई) रिपोर्ट में हरियाणा देश के सबसे असुरक्षित राज्यों में शामिल है। प्रदेश में अपराध बड़ी तेजी के साथ बढ़ते जा रहे हैं और अपराधी बेखौफ हैं। कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का ध्यान अपराध रोकने पर नहीं है और पुलिस पर सरकार का कोई अंकुश नहीं रह गया, जिस कारण अपराधी निरंकुश हो चुके हैं। जब जनता शोर मचाती है तो मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक दावा करते है कि अपराध नियंत्रण में है अगर कोई कानून तोड़ेगा तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। प्रदेश के हालात ये है कि रोजाना हत्याएं, लूट, डकैती, अपहरण, बलात्कार जैसे वारदातें सरेआम हो रही है। सोनीपत के खरखौदा में दिनदहाड़े कल सरेआम 12 गोलियां मारकर पिता पुत्र की हत्याएं कर दी गई और पुलिस बाद में पहले की तरह लकीर पीटने में लगे रही। इतना ही नहीं प्रदेश में रोजाना काफी लोग लापता हो रहे है, उनका आंकड़ा बहुत चिंताजनक है। सिर्फ इस साल जनवरी से मार्च तक प्रदेश से 4100 लोग लापता हुए हैं और 1000 से ज्यादा लोगों का अपहरण हुआ है। साथ ही हत्या और गैर इरादतन हत्या की घटनाओं में पिछले वर्षों की तुलना में चौंकाने वाली वृद्धि देखी गई है। यह आंकड़े प्रदेश की बीजेपी सरकार के तहत आने वाले सार्वजनिक सुरक्षा तंत्र के विफल होने की गंभीर स्थिति का स्पष्ट प्रमाण हैं। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि ये केवल वे मामले हैं, जो पुलिस थानों में दर्ज हैं। बड़ी संख्या में ऐसे मामले भी होते हैं, जो न तो थानों तक पहुंचते हैं और न कहीं रिपोर्ट दर्ज होती है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि पिछले साल केंद्र सरकार की सोशल प्रोग्रेस इंडेक्स रिपोर्ट में हरियाणा को देश का सबसे असुरक्षित राज्य करार दिया गया था। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में हरियाणा महिलाओं, बच्चों के खिलाफ अपराध, दुष्कर्म, अपहरण, डकैती के मामलों में नंबर-1 पर रहा। सांसद ने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में रोज तीन से चार लोगों की हत्या होती है। रोज 04 से 05 महिलाओं के साथ दुष्कर्म होता है। एक दर्जन अपहरण और करीब 100 चोरी, लूट, डकैती व फिरौती की वारदातें होती हैं। सांसद सैलजा ने कहा कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, करनाल, सोनीपत, रोहतक और पानीपत जैसे जिले उच्च अपराध वाले क्षेत्रों के रूप में उभरे हैं। जहां आपराधिक मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

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हरियाणा सरकार की गलत नीतियों से किसान व आढ़ती बर्बादी की कगार पर है- बजरंग गर्ग

सरकार धान, बाजरा व कपास की खरीद एमएसपी पर नहीं कर रही है- बजरंग गर्ग सरकार ने कपास व सरसों की कमीशन खत्म करके आढ़तियों को बर्बाद करने पर तुली हुई है- बजरंग गर्ग सरकार को हर अनाज की खरीद पहले की तरह आढ़तियों के माध्यम से करनी चाहिए- बजरंग गर्ग हिसार(ईशान टाइम्स )।व्यापार मंडल के व्यापारी प्रतिनिधियों की मीटिंग हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष व हरियाणा कांन्फैड के पूर्व चेयरमैन बजरंग गर्ग की अध्यक्षता में हुई। इस मीटिंग में धान, बाजरा व कपास खरीद पर विचार किया गया व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि हरियाणा सरकार की गलत नीतियों से किसान व आढ़ती बर्बादी की कगार पर है। सरकार धान, बाजरा व कपास की खरीद एमएसपी पर नहीं कर रही है। बजरंग गर्ग ने कहा कि धान का एमएसपी 2389 रुपए है मगर किसान का धान 1750 रुपए से 2200 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। कपास की एमएसपी 8100 रुपए है मगर कपास 6500 रुपए से लेकर 7000 रुपए तक प्रति क्विंटल तक बाजार में बिक रहा है। इसी प्रकार बाजरे का एमएसपी 2775 रुपए है मगर बाजार 1500 रुपए से लेकर 2000 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। सरकार ने किसान का एक-एक फसल का दाना खरीदने का वादा किया था। सरकार द्वारा धान, बाजरा व कपास एमएसपी पर सरकारी खरीद ना करने से किसान मजबूरी में अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। जिसके कारण किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। बजरंग गर्ग ने कहा कि सरकार ने कपास व सरसों की कमीशन खत्म करके आढ़तियों को बर्बाद करने पर तुली हुई है जब सरसों व कपास की आढ़तियों के माध्यम से नहीं होगी और आढ़तियों को ढाई प्रतिशत कमीशन नहीं मिलेगा तो आढ़ती मंडी में दुकान करके क्या करेगा। सरकार को हर अनाज की खरीद पहले की तरह आढ़तियों के माध्यम से करनी चाहिए। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने धान की खरीद 3100 रुपए प्रति क्विंटल करने की घोषणा की थी सरकार ने धान की खरीद 3100 रुपए करना तो दूर की बात 2389 रुपए एमएसपी पर भी नहीं की। मुख्यमंत्री की घोषणा झूठ का पुलिंदा है। भाजपा सरकार झूठ व जुमलेबाजी की सरकार है। भाजपा सरकार ने झूठे वादे करके जनता को सिर्फ ठगने का काम किया है। इस मीटिंग में अनाज मंडी एसोसिएशन के जिला प्रधान पवन गर्ग, प्रदेश संगठन मंत्री राजेंद्र बंसल, प्रदेश सचिव निरंजन गोयल, जींद जिला प्रधान महावीर कंप्यूटर, सिरसा जिला प्रधान हीरालाल शर्मा, फतेहाबाद प्रधान अशोक नारंग, प्रदेश प्रचार सचिव राजीव गुप्ता कैथल, प्रदेश महासचिव पवन बुवानीवाला भिवानी, हरियाणा गाड़ी एसोसिएशन के प्रधान गौरव मित्तल रोहतक आदि व्यापारी प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखें।

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26अक्तूबर को रोहतक में होगा जीएसटी बचत महोत्सव और आत्मनिर्भर भारत अभियान सम्मेलन

राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह होंगे कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जीएसटी अब ’बचत उत्सव’ से ’रोजगार उत्सव’ में बदल रहा है चंडीगढ़,    (ईशान टाइम्स)। रविवार को रोहतक में होगा जीएसटी बचत महोत्सव और आत्मनिर्भर भारत अभियान सम्मेलन : शमशेर खरकर(। भाजपा जीएसटी सुधारों को जीएसटी बचत महोत्सव के रूप में मना रही है। इसी कड़ी में रविवार को रोहतक में जीएसटी बचत महोत्सव और आत्मनिर्भर भारत अभियान सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में भाजपा के राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह मुख्य अतिथि होंगे। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। इससे पहले भाजपा प्रदेश कार्यालय “मंगल कमल” में राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह तीन बजे प्रेसवार्ता को भी संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में प्रतिष्ठित व्यापारी, गणमान्य लोगों के अलावा भाजपा के कार्यकर्ता और वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे।भाजपा के प्रदेश मीडिया सह प्रभारी शमशेर सिंह खरक ने बताया कि महामंत्री अरुण सिंह आत्मनिर्भर भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक भी हैं। वो जीएसटी बचत महोत्सव एवं आत्मनिर्भर भारत अभियान सम्मेलन 26 अक्टूबर को सायं 4 बजे श्री लालनाथ हिंदू कालेज के सभागार,भिवानी चुंगी रोहतक में पहुंच कर कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह जीएसटी सुधारों और आत्मनिर्भर भारत अभियान को लेकर सम्मेलन में व्यापारियों और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करेंगे।शमशेर सिंह खरक ने बताया कि जीएसटी की दरें कम होने से समाज के सभी वर्गों को लाभ मिल रहा है। अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाने की दिशा में मोदी सरकार द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ये सुधार हर क्षेत्र में लोगों को लाभान्वित कर रहे हैं। खरक ने कहा कि जीएसटी अब ’बचत उत्सव’ से ’रोजगार उत्सव’ में बदल रहा है। व्यापार आसान हो गया है। जीएसटी को सरलीकरण और पारदर्शिता का प्रतीक बताते हुए खरक ने कहा कि जीएसटी ’आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर रहा है।भाजपा प्रदेश सह मीडिया प्रभारी खरक ने बताया कि भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ के लिए स्वदेशी का मंत्र जरूरी है। आज समय की मांग है कि हम स्वदेशी अपनाएं। वही खरीदें जो देश में बना हो। वही बेचें, जो देश में बना हो। उन्होंने कहा कि स्वदेशी अपनाना अपने देश के कारीगरों, किसानों, छोटे व्यापारियों, और उद्यमियों का सम्मान करना है। जब हम स्वदेशी अपनाते हैं, तो हम अपने देश की मिट्टी से जुड़ते हैं, अपने लोगों की मेहनत को सम्मान देते हैं और अपने देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम बढ़ाते हैं।कार्यक्रम में अशोक चौधरी, सुरेश मदान, गुलशन निझावन, सुशील बंसल, सुबेर सैनी, जितेश लोहचब, राजेन्द्र मदान, विनोद आहुजा, अनिल अरोड़ा, राजकुमार साहनी, राजकुमार चावला, अनिल मित्तल, अंगद कोचर भी मौजूद रहेंंगें। इसके अलावा अमित मग्गू रॉकी सहगल मनीष शर्मा (अध्यक्ष, श्री मंगलसेन मंडल) (अध्यक्ष, महाराजा शूरसेन मंडल) (अध्यक्ष, महाराजा अग्रसेन मंडल) द्वारा अतिथियों का स्वागत किया जाएगा।

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यूपी की ‘पवित्र’ प्रेम कहानी: मामी-भांजे का ‘अमर’ इश्क, पुलिस चौकी में ‘बलिदान’ का ड्रामा!

अरे वाह, उत्तर प्रदेश की मिट्टी में प्रेम की ऐसी फसल उग रही है कि बॉलीवुड वाले भी शर्मा जाएं! सीतापुर जिले से आई ये ताजा खबर तो जैसे ‘फैमिली ड्रामा’ का नया चैप्टर है – जहां रिश्तों की पवित्रता को ‘अवैध इश्क’ की खाद से इतना हरा-भरा किया गया कि अब उसमें रुसवाई के कांटे उग आए हैं। मामी पूजा मिश्रा और उनके 15 साल छोटे भांजे आलोक मिश्रा की ये ‘रोमांटिक’ सागा सुनकर आपका दिल धड़क उठेगा… या शायद हंसते-हंसते फट जाएगा!…कहानी शुरू होती है क्लासिक तरीके से – पति ललित मिश्रा, जो शायद सोचते होंगे कि परिवार को मजबूत बनाने के लिए भांजे को घर बुलाना अच्छा आइडिया है। काम में हाथ बंटाने के बहाने आलोक गांव से शहर आया, और ललित मिश्रा जी काम पर निकलते, तो घर में ‘अय्याशी’ का फुल-टाइम प्रोग्राम चलता। अरे भाई, दिन भर क्या-क्या करते थे ये दोनों। घर संभालते। या ‘फैमिली टाइम’ को नए लेवल पर ले जाते। खैर, जब ये राज खुला, तो ललित मिश्रा ने भांजे को भगा दिया – सही भी है, कौन रखे ऐसे ‘हेल्पर’ को जो घर की ‘मालकिन’ को ही हेल्प कर दे! लेकिन यहीं ट्विस्ट आता है, दो बच्चों की मां पूजा मिश्रा का दिल तो युवा आलोक मिश्रा पर आ ही गया था। ‘प्यार अंधा होता है’ – यहां तो इतना अंधा कि रिश्ते की सारी लकीरें मिटा दीं। दोनों घर से भाग निकले और 7 महीने बरेली में ‘हनीमून’ मनाया। सोचिए, कितना रोमांटिक! एक तरफ दो बच्चे घर पर मां का इंतजार कर रहे होंगे, दूसरी तरफ मामी-भांजे का ‘लाइव-इन’ रिलेशनशिप। यूपी में ऐसे ‘मॉडर्न’ परिवार कहां मिलते हैं। शायद ये वो ‘सांस्कृतिक क्रांति’ है जिसकी बात नेता लोग करते रहते हैं!…फिर आया क्लाइमैक्स – आलोक मिश्रा ने कहा, “बस हो गया, अब नहीं अपनाऊंगा!” उम्र का फर्क। या शायद ‘अय्याशी’ की एक्सपायरी डेट आ गई। विवाद हुआ, मामला पुलिस चौकी पहुंचा। वहां भांजे ने फिर दोहराया कि अब नहीं चलेगा ये सब। और मामी पूजा मिश्रा । वो तो ‘ट्रू लव’ की दीवानी! चौकी में ही ब्लेड निकाला और कलाई काट ली। वाह, क्या डेडिकेशन! बॉलीवुड की हीरोइनों को चैलेंज है – पुलिस स्टेशन में सुसाइड अटेम्प्ट से बड़ा ‘सैक्रिफाइस’ क्या हो सकता है। अब वो अस्पताल में एडमिट हैं, शायद सोच रही होंगी कि अगला एपिसोड क्या होगा।… ये कहानी हमें क्या सिखाती है? कि यूपी में प्रेम की कोई सीमा नहीं – न उम्र की, न रिश्तों की, न कानून की। एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ’ चला रही है, दूसरी तरफ ऐसे ‘फैमिली अफेयर्स’ से समाज ‘बचाओ’ चिल्ला रहा है। आलोक मिश्रा जैसे ‘युवा’ तो बस ‘एक्सपीरियंस’ लेते हैं और भाग जाते हैं, लेकिन पूजा मिश्रा जैसी ‘एक्सपीरियंस्ड’ महिलाएं। वो तो दिल की सुनती हैं, भले पुलिस चौकी में ‘ब्लड डोनेशन’ क्यों न करना पड़े!…खैर, मजाक एक तरफ – ये घटना दुखद है, लेकिन सोचिए, अगर ऐसे रिश्तों को ‘नॉर्मल’ मान लिया जाए तो क्या होगा? शायद अगली बार कोई ‘मामा-भांजी’ की स्टोरी आएगी! समाज को आईना दिखाने वाली ये खबर बताती है कि ‘प्यार’ के नाम पर कितनी आसानी से रिश्ते तार-तार हो जाते हैं। सीतापुर पुलिस अब क्या करेगी। जांच। या नया ‘लव जिहाद’ कानून बना देगी ‘फैमिली जिहाद’ के लिए। इसलिए आप लोगों से निवेदन है कि असल जीवन में ऐसे रिश्तों से दूर रहें, वरना पुलिस चौकी आपका अगला ‘डेट स्पॉट’ बन सकता है!

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भारत में “नारी” शक्ति का ढोंग ! भारत के वेश्याओं की पीड़ा को अनदेखा करता जाहिल समाज

भारत, जो अपने आपको विश्वगुरु और नारी शक्ति का प्रतीक बताता है, एक ऐसी भूमि है जहां संस्कृति, सभ्यता और आध्यात्मिकता की गंगा बहती है। मगर इसी देश की गलियों, सायों और अंधेरे कोनों में एक ऐसी सच्चाई छिपी है, जो समाज की चमक-दमक के पीछे की काली सच्चाई को उजागर करती है। यह है वेश्यावृत्ति में फंसी उन असंख्य नारियों की कहानी, जिनका दर्द न तो समाज सुनता है, न ही सत्ता की गलियारों में उसकी गूंज पहुंचती है। वेश्यावृत्ति, जिसे समाज “पाप” का पर्याय मानता है, उन औरतों के लिए अक्सर मजबूरी का परिणाम होती है। गरीबी, भुखमरी, पारिवारिक हिंसा, तस्करी और सामाजिक उपेक्षा ऐसी जंजीरें हैं, जो इन महिलाओं को इस दलदल में धकेल देती हैं। एक बार इस दुनिया में कदम रखने के बाद, न तो समाज उन्हें अपनाता है, न ही उनके लिए कोई रास्ता छोड़ता है। उनकी जिंदगी नरक बन जाती है, जहां हर रात एक नया दर्द, एक नई यातना लेकर आती है। भारत में वेश्यावृत्ति कोई नई समस्या नहीं है। मुंबई के कमाठीपुरा, दिल्ली के जीबी रोड, कोलकाता के सोनागाछी जैसे क्षेत्र दशकों से इस कड़वी सच्चाई के गवाह हैं। यहां लाखों महिलाएं और बच्चियां, जिनमें से कई नाबालिग हैं, हर दिन शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक शोषण का शिकार होती हैं। उनकी आवाजें उन तंग गलियों में दबकर रह जाती हैं, जहां समाज की नजरें पहुंचने से कतराती हैं। भारत में नारी को देवी का दर्जा देने की बात तो खूब होती है, लेकिन इन महिलाओं को न तो देवी माना जाता है, न ही इंसान। समाज उन्हें तिरस्कार की नजरों से देखता है, मानो वे इस दुनिया में सबसे निचले पायदान की हकदार हों। पुलिस और कानून व्यवस्था, जो उनकी रक्षा के लिए होनी चाहिए, अक्सर उनके साथ सबसे क्रूर व्यवहार करती है। दलालों और ग्राहकों के हाथों शोषण के बाद, समाज और सिस्टम का यह रवैया उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम करता है।कई बार इन महिलाओं को इस पेशे में धकेलने वाले उनके अपने ही होते हैं—पति, पिता, भाई या प्रेमी। मानव तस्करी के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल हजारों लड़कियां और महिलाएं इस दलदल में फंस जाती हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, 2022 में मानव तस्करी के 2,250 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें से ज्यादातर पीड़ित महिलाएं और बच्चियां थीं। यह केवल आंकड़े हैं; असल संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामले तो दर्ज ही नहीं होते। वेश्यावृत्ति में फंसी महिलाओं को न केवल सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है, बल्कि उनकी सेहत भी खतरे में रहती है। एचआईवी/एड्स, यौन संचारित रोग, और अनचाहे गर्भधारण जैसी समस्याएं उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं तक उनकी पहुंच सीमित होती है, और अगर होती भी है, तो डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ का रवैया अक्सर अमानवीय होता है। इन महिलाओं के बच्चों का भविष्य भी अंधेरे में डूबा होता है। मां की “पहचान” उनके माथे पर एक कलंक बनकर चिपक जाती है। शिक्षा, सम्मान और सामान्य जीवन उनके लिए एक सपना बनकर रह जाता है। कई बच्चियां, जो इस माहौल में पलती हैं, वही रास्ता अपनाने को मजबूर हो जाती हैं, और यह दुष्चक्र पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है। भारत में वेश्यावृत्ति को कानूनी रूप से नियंत्रित करने की बात लंबे समय से चल रही है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कुछ लोग इसे वैध करने की वकालत करते हैं, ताकि इन महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान मिल सके। लेकिन वैधता का सवाल भी अपने आप में जटिल है, क्योंकि यह मानव तस्करी और शोषण को और बढ़ावा दे सकता है। सबसे जरूरी है इन महिलाओं को इस दलदल से निकालने के लिए ठोस पुनर्वास योजनाएं। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक स्वीकृति के अवसर प्रदान किए बिना, केवल कानून बनाकर इस समस्या का हल नहीं निकल सकता। गैर-सरकारी संगठन (NGOs) जैसे प्रयास और संवेदना इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी पहुंच सीमित है। सरकार को इन संगठनों के साथ मिलकर एक व्यापक नीति बनानी होगी, जो इन महिलाओं को नया जीवन दे सके। भारत, जो नारी शक्ति की बात करता है, उसे इन महिलाओं की पीड़ा को समझना होगा। विश्वगुरु बनने की राह में, हमें सबसे पहले अपने समाज के उन हिस्सों को उठाना होगा, जो सबसे नीचे दबे हुए हैं। इन महिलाओं को न तो अपराधी माना जाए, न ही समाज का बोझ। वे भी इस देश की बेटियां हैं, जिन्हें सम्मान और अवसर का हक है। उनके दर्द को सुनने का समय अब आ गया है। क्या हम, एक समाज के रूप में, उनकी आवाज बन सकते हैं? क्या हम उनके लिए वह रोशनी ला सकते हैं, जो उनकी जिंदगी के अंधेरे को मिटा दे? यह सवाल हर उस भारतीय से है, जो अपने देश को सच्चा विश्वगुरु बनते देखना चाहता है।

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सूर्य और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का उत्सव व भारतीय संस्कृति का एक अनमोल रत्न है “छठ” पर्व

छठ पर्व भारतीय संस्कृति का एक अनमोल रत्न है, जो सूर्यदेव और छठी मइया की उपासना का प्रतीक है। यह पर्व मुख्यतः बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह चार दिवसीय उत्सव परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए समर्पित है। वर्ष में दो बार मनाए जाने वाले इस पर्व को चैत्र मास में ‘चैती छठ’ और कार्तिक मास में ‘कार्तिकी छठ’ के रूप में जाना जाता है, जिसमें कार्तिकी छठ विशेष लोकप्रियता रखती है। छठ पर्व की शुरुआत भैया दूज के तीसरे दिन ‘नहाय-खाय’ से होती है। इस दिन व्रती (व्रत करने वाले) स्नान कर शुद्धता के साथ पर्व की शुरुआत करते हैं। भोजन में सेंधा नमक और घी से तैयार अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है। यह सात्विक भोजन पवित्रता और अनुशासन का प्रतीक है। दूसरे दिन, जिसे ‘खरना’ कहते हैं, व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। सूर्यास्त के बाद, लगभग सायं सात बजे, गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल प्रसाद के रूप में ग्रहण किए जाते हैं। इस प्रसाद को परिवार और पड़ोसियों में बांटा जाता है। खरना का प्रसाद भक्ति और पवित्रता का प्रतीक है, और इस दिन घरों में भक्ति भजनों की मधुर ध्वनि गूंजती है।तीसरा दिन छठ पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन है, जब व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। नदी, तालाब या किसी जलाशय के किनारे एकत्रित होकर, व्रती बांस की टोकरी में फल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद के साथ सूर्यदेव को दूध और जल अर्पित करते हैं। इस दौरान पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है, और लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजनों से परहेज किया जाता है। भक्ति गीतों और मंत्रों का गायन वातावरण को आध्यात्मिक बनाता है। पर्व का समापन चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ होता है। व्रती सुबह जल्दी उठकर जलाशय पर पहुंचते हैं और सूर्य की प्रथम किरणों को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद व्रत खोला जाता है और प्रसाद वितरित किया जाता है। यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावनात्मक होता है, जो सूर्यदेव के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। छठ पर्व का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व गहरा है। बिहार के मुंगेर में गंगा नदी के बीच स्थित सीता चरण मंदिर इस पर्व का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि माता सीता ने मुंगेर में छठ व्रत किया था, जिससे इस पर्व की शुरुआत हुई। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना राजपाट हार गए थे, तब द्रौपदी ने श्रीकृष्ण के सुझाव पर छठ व्रत रखा, जिसके फलस्वरूप उन्हें उनका खोया हुआ राजपाट वापस मिला। लोक परंपरा में सूर्यदेव और छठी मइया को भाई-बहन माना जाता है। कहा जाता है कि सूर्यदेव ने सबसे पहले छठी मइया की पूजा की थी, जिससे इस पर्व की नींव पड़ी। यह पर्व सामाजिक एकता का भी प्रतीक है, क्योंकि इसमें स्त्री और पुरुष समान रूप से भाग लेते हैं। छठ पर्व का वैज्ञानिक महत्व भी उल्लेखनीय है। यह पर्व कार्तिक और चैत्र मास की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, जब सूर्य की पराबैगनी किरणें पृथ्वी पर सामान्य से अधिक मात्रा में पहुंचती हैं। सूर्यास्त और सूर्योदय के समय जल में खड़े होकर अर्घ्य देने से शरीर को इन किरणों का सीमित और लाभकारी प्रभाव प्राप्त होता है। सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में ऑक्सीजन को ओजोन में परिवर्तित करता है, जो पर्यावरण को शुद्ध करता है और हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करता है। इस प्रकार, छठ पर्व आध्यात्मिकता के साथ-साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा देता है। छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है। इसमें पवित्रता, अनुशासन और भक्ति का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। नदियों के किनारे एकत्रित श्रद्धालु, भक्ति भजनों की मधुर ध्वनि और प्रसाद का आदान-प्रदान इस पर्व को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाता है। मुंगेर और बेगूसराय जैसे क्षेत्रों में यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है, जहां यह सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। छठ पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, आत्म-अनुशासन और सामुदायिक एकता का संदेश देता है। यह उत्सव न केवल आस्था को बल देता है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाता है। सूर्यदेव की ऊर्जा और छठी मइया की कृपा के साथ, यह पर्व हमारे जीवन को समृद्ध और सार्थक बनाता है।

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बिहार में तेजस्वी यादव: युवा नेतृत्व की अनिवार्यता या गठबंधन की विवशता?

-संजय राय बिहार की राजनीति इन दिनों एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई है। महीनों से जिस घोषणा का इंतज़ार था, आखिरकार वह हो ही गई — महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। साथ ही विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के अध्यक्ष मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया गया है। यह घोषणा कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने की, लेकिन यह स्वीकारोक्ति जितनी राजनीतिक थी, उतनी ही विवशता से भरी हुई भी प्रतीत होती है। कांग्रेस का यह फैसला किसी उत्साह का नहीं, बल्कि मजबूरी का परिणाम लगता है। लंबे समय से यह चर्चा थी कि क्या कांग्रेस तेजस्वी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने को तैयार होगी। आखिरकार उसने हामी तो भरी, पर इस सहमति में वह आत्मविश्वास नहीं झलकता जो एक मजबूत सहयोगी से अपेक्षित होता है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि बिहार में कांग्रेस की संगठनात्मक और जनाधार की स्थिति कमजोर है। दरअसल, तेजस्वी यादव के नेतृत्व को स्वीकार करने के पीछे कांग्रेस के पास कोई ठोस विकल्प नहीं था। आज बिहार में विपक्षी राजनीति का केंद्र राजद ही है। नीतीश कुमार के घटते जनाधार और भाजपा-जेडीयू गठबंधन की चुनौतियों के बीच तेजस्वी ही वह चेहरा हैं जो बदलाव का प्रतीक बन सकते हैं। तेजस्वी ने अपने राजनीतिक सफर में उल्लेखनीय परिपक्वता दिखाई है। उन्होंने बेरोज़गारी, पलायन और सम्मान जैसे मुद्दों को जनता की आकांक्षाओं से जोड़ा है। उनकी भाषा में युवाओं की बेचैनी और बेहतर अवसरों की तलाश झलकती है। यह बदलाव बताता है कि वे अब केवल लालू यादव के उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बन चुके हैं। महागठबंधन की इस घोषणा से एनडीए के भीतर भी हलचल तेज हुई है। अब तक एनडीए ने अपना मुख्यमंत्री चेहरा तय नहीं किया है। यह वही एनडीए है जिसने पिछले दो दशकों तक नीतीश कुमार पर भरोसा जताया, लेकिन अब उनके नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। बार-बार गठबंधन बदलना, अवसरवाद और सुशासन की फीकी होती छवि ने नीतीश कुमार की विश्वसनीयता को कमजोर किया है। ऐसे में एनडीए का बिना चेहरे के चुनाव मैदान में उतरना उसके आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है। दूसरी ओर, महागठबंधन की ओर से तेजस्वी की घोषणा ने युवाओं के बीच नई ऊर्जा पैदा की है। लेकिन यह उत्साह उतना ही सीमित है जितनी गठबंधन की आंतरिक मजबूरियां। कांग्रेस और वामदलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर असहमति की फुसफुसाहट पहले ही शुरू हो चुकी है। महागठबंधन की एकता उतनी मजबूत नहीं दिखती जितनी प्रचार में दिखाई जा रही है। यह भी सवाल उठता है कि अगर महागठबंधन सत्ता में आता है, तो क्या तेजस्वी ही सर्वमान्य मुख्यमंत्री बन पाएंगे? फिलहाल यह कहना कठिन है कि यह निर्णय महागठबंधन के लिए कितना लाभदायक साबित होगा। लेकिन यह तय है कि इस घोषणा ने बिहार की राजनीति को एक नया विमर्श दे दिया है — युवा नेतृत्व बनाम पारंपरिक सत्ता। तेजस्वी यादव का उदय केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की आवाज़ है जो जातीय राजनीति से आगे बढ़कर विकास, शिक्षा, और रोजगार की बात करना चाहती है। फिर भी, तेजस्वी के सामने चुनौतियाँ कम नहीं हैं। जनता अब केवल वादों से नहीं, बल्कि काम और विश्वसनीयता से प्रभावित होती है। भ्रष्टाचार, परिवारवाद और अस्थिरता जैसे पुराने आरोप अब भी उनकी छवि पर साया बनकर मंडरा रहे हैं। उन्हें यह साबित करना होगा कि वे केवल ‘लालू के बेटे’ नहीं, बल्कि बिहार की नई उम्मीद हैं। कांग्रेस की स्थिति इस चुनाव में कमजोर है। वीआईपी महज 15 सीटों पर लड़ रही है, जबकि कांग्रेस उससे कहीं अधिक सीटों पर, फिर भी उसकी भूमिका गौण है। इससे गठबंधन में असमानता साफ झलकती है। अशोक गहलोत द्वारा यह कहना कि “और भी उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे” कांग्रेस की कमज़ोरी को छिपाने का एक राजनीतिक बयान मात्र लगता है। बिहार की राजनीति का यह दौर केवल सत्ता परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि मानसिकता परिवर्तन का भी सूचक है। अगर तेजस्वी यादव इस बदलाव को जनविश्वास में बदल पाने में सफल हुए, तो यह बिहार की राजनीति में एक नई पीढ़ी के नेतृत्व का युग आरंभ होगा। परंतु यदि यह अवसर केवल चुनावी रणनीति बनकर रह गया, तो यह गठबंधन उसी पुराने चक्र में फंस जाएगा जहाँ समझौते, मतभेद और अवसरवाद सब कुछ निगल जाते हैं। तेजस्वी यादव का नामांकन बिहार के लिए आशा और अनिश्चितता — दोनों का प्रतीक है। यह निर्णय केवल महागठबंधन की रणनीति नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम भी है। अब देखना यह है कि क्या यह युवा चेहरा सचमुच बदलाव ला पाएगा या फिर यह भी एक और “मजबूरी भरी स्वीकृति” बनकर रह जाएगा।

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आत्ममंथन’ की ज्योति से आलोकित निरंकारी संत समागम की तैयारियाँ समापन की ओर

चंडीगढ़/ पंचकूला /मोहाली, 24 अक्टूबर, 2025(ईशान टाइम्स):- सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में 78वां वार्षिक निरंकारी संत समागम 31 अक्टूबर से 3 नवम्बर, 2025 तक संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा (हरियाणा) में अद्भुत दिव्यता और भव्यता के साथ आयोजित होने जा रहा है। आत्मीयता के इस उत्सव में देश-विदेश से असंख्य श्रद्धालु भाग लेकर आनंद का अनुभव प्राप्त करेंगे। श्रद्धा, समर्पण के साथ हज़ारों श्रद्धालुजन अपने-अपने क्षेत्रों से आकर पूर्ण तन्मयता और समर्पण भाव के साथ दिन रात सेवाओं में रत हैं; जिससे यह आयोजन अपनी अंतिम तैयारियों की ओर अग्रसर है। यह समागम केवल एक धार्मिक या वार्षिक आयोजन नहीं, अपितु ज्ञान, प्रेम और भक्ति का ऐसा पावन संगम है, जो ब्रह्मज्ञान द्वारा आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनता है। यहाँ श्रद्धालु न केवल आध्यात्मिक जागृति पाते हैं, बल्कि मानवता, विश्वबंधुत्व और आपसी सौहार्द की भावनाओं को भी आत्मसात करते हैं। यह आयोजन ‘आत्ममंथन’ की वह दिव्य भूमि है, जहाँ प्रत्येक साधक अपने अंतर्मन में झाँकने, आत्मचिंतन करने और आत्मिक चेतना को जागृत करने की प्रेरणा प्राप्त करता है। यह सम्पूर्ण आयोजन सतगुरु माता जी की दिव्य प्रेरणा और आशीर्वाद से संचालित हो रहा है। सतगुरु की यही मंगलकामना रहती है कि हर श्रद्धालु इस समागम में प्रेम, सम्मान और समुचित सुविधा का अनुभव करते हुए आध्यात्मिक रूप से परिपूर्ण हो। संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा के अनुसार एक समय पर जो स्थल केवल एक सामान्य मैदान था, वह अब संतो की कर्मठ सेवा भावना के कारण एक भव्य शामियानों की सुंदर नगरी में परिवर्तित हो चुका है। यह दिव्य वातावरण प्रत्येक आगंतुक को अपनी ओर आकर्षित करता है। समागम स्थल को एक दिव्य नगरी का रूप दिया गया है। विशाल पंडालों में भक्तों के लिए सुव्यवस्थित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। समागम मंच पर हो रहे प्रेरणादायक प्रवचन, भावपूर्ण भजन और विचारों को समूचे परिसर में और अधिक प्रभावी रूप से दर्शाने हेतु समूचे परिसर में अत्याधुनिक एल.ई.डी. स्क्रिनें स्थापित की जा रही हैं, जिससे दूरस्थ स्थानों पर बैठे श्रद्धालु भी उसी भाव, ऊर्जा और अनुभूति से सत्संग का लाभ प्राप्त कर सकें। पूरे समागम परिसर को चार प्रमुख खंडों में विभाजित किया गया है, जिससे संचालन, आवागमन और सुविधाओं का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। पिछले वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष भी मुंबई के श्रद्धालु भक्तों द्वारा निर्मित मुख्य स्वागत द्वार अपनी कलात्मक भव्यता के साथ समागम की आध्यात्मिक रूपरेखा का प्रतिबिंब बनकर उभरा है। यह द्वार न केवल सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि समर्पण, सेवा और सृजनशीलता का सजीव उदाहरण भी है। जैसे-जैसे समागम में श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह स्वागत द्वार भी अपने स्वरूप, विेस्तार और गरिमा में और अधिक भव्यता धारण करता जा रहा है, मानो यह समस्त मानवता को प्रेम, अपनत्व और समभाव से आमंत्रित करने हेतु तत्पर हो। इस पावन संत समागम में हर सज्जन महात्मा एवं श्रद्धालु भक्त का सादर आमंत्रण है। आइए, इस आत्मिक मिलन और भक्ति के महासंगम का हिस्सा बनें, सतगुरु के दिव्य दर्शन करें, उनके अमृतमय प्रवचनों का लाभ प्राप्त करें, और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की इस अनुपम यात्रा में सहभागी बनकर जीवन को धन्य करें। निसंदेह यह संत समागम केवल एक आयोजन नहीं बल्कि आत्म मंथन, आत्मबोध और आंतरिक शुद्धि का अवसर है।

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हर थाना बनेगा विश्वास का प्रतीक, हर पुलिसकर्मी रहेगा सुरक्षित — डीजीपी ओ.पी. सिंह

हरियाणा के डीजीपी ओ पी सिंह की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित, प्रदेश भर के अधिकारियों ने वी सी के माध्यम से लिया बैठक में भाग– कहा- हरियाणा पुलिस का नया संकल्प: प्रोएक्टिव पुलिसिंग और ‘फाइटिंग फिट और वर्किंग आर्डर (fighting fit & working order)’ की नीति– सेवा भी, सुरक्षा भी: हरियाणा पुलिस की कार्यशैली में बड़ा बदलाव चंडीगढ़, (ईशान टाइम्स)— हरियाणा पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री ओ.पी. सिंह ने पुलिस मुख्यालय में सभी पुलिस आयुक्तों (CPs), पुलिस अधीक्षकों (SPs) और थाना प्रभारियों (SHOs) की बैठक ली। उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस की कार्यशैली पूरी तरह बदलेगी। पुलिस को अब प्रोएक्टिव, समाधान देने वाली, समन्वयित और जनता के हित में काम करने वाली बनना होगा। साथ ही पुलिसकर्मियों के रहने और काम करने की स्थिति में भी सुधार किया जाएगा। थानों की हालत सुधारने के दिए आदेशडीजीपी ने हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन (HPHC) के अधिकारियों को आदेश दिए कि वे दो सप्ताह में सभी थानों और चौकियों की स्थिति में सुधार सुनिश्चित करें। रसोई, शौचालय, बिजली की वायरिंग और सुरक्षा व्यवस्था को ठीक किया जाए। उन्होंने कहा कि हर थाना साफ, सुरक्षित और व्यवस्थित दिखना चाहिए। इसके लिए इंजीनियरों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे हर थाना खुद जाकर देखें और रिपोर्ट दें। जनता की सुरक्षा के लिए फाइटिंग फिट और वर्किंग आर्डर (fighting fit & working order)’ की नीतिहरियाणा पुलिस को फाइटिंग फिट और वर्किंग ऑर्डर में रखना मेरा प्रमुख ध्येय है। ड्यूटी के दौरान गलती होना स्वाभाविक है, पर अनुशासनहीनता या बदमाशी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं होगी।हरियाणा पुलिस 365 दिन, 24 घंटे जनता की सेवा में तत्पर है। मैं अपने किसी भी पुलिसकर्मी को नुकसान में नहीं देख सकता — हम यहाँ जान देने नहीं, बल्कि जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए हैं।अपराधी को कानून के अनुसार सलाखों के पीछे भेजा जाएगा, लेकिन यदि कोई प्रतिकार करेगा, तो उसे तुरंत और उचित जवाब मिलेगा। हरियाणा पुलिस जनता और अपराधियों के बीच मजबूत ढाल बनकर खड़ी है। शहीद परिवारों की मदद में तेजीपुलिसकर्मियों के कल्याण संबंधी उन्होंने निर्देश दिए कि शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को नियमानुसार तुरंत मदद दी जाए। किसी काम में देरी न हो और हर 15 दिन में उनकी स्थिति की रिपोर्ट दी जाए। शहीदों के परिवार के काम रुकने नहीं चाहिए। जनता से संवाद और पुलिसकर्मियों से जुड़ावडीजीपी ने कहा कि जिले के सभी अधिकारी नियमित फील्ड विज़िट करें, पुलिसकर्मियों से बात करें और उनका मनोबल बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जनता से अच्छा व्यवहार बहुत ज़रूरी है। पुलिसकर्मी “Please, Sorry, Thank You” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करें — इससे पुलिस की छवि बेहतर होगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। सोशल मीडिया पर सतर्कता और संवादडीजीपी ने कहा कि अब पुलिस को सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहना होगा। अफवाह फैलाने वालों और पुलिस विरोधी गलत जानकारी फैलाने वालों पर शुरुआत से ही नज़र रखी जाए। जिले के अधिकारी रोजाना सोशल मीडिया या टीवी के ज़रिए जनता से संवाद करें ताकि पारदर्शिता और भरोसा बना रहे। सहयोग से अपराध नियंत्रणसभी थाना और चौकियां मिलकर काम करें और आस पास के क्षेत्र में अपराध कम करने के लिए साझा रणनीति बनाएं। हरियाणा पुलिस अकादमी के निदेशक श्री अर्शिंदर चावला को नए पुलिस सब-इंस्पेक्टरों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए, ताकि वे फिल्मी नहीं बल्कि वास्तविक पुलिसिंग सीखें। अपराध में कमी और उपलब्धियां डीजीपी ने बताया कि हरियाणा में रेप के मामलों में 50 प्रतिशत की कमी आई है और कुल अपराधों में भी गिरावट दर्ज हुई है। नए आपराधिक कानूनों का सफल क्रियान्वयन गृह मंत्री ने सराहा है। सीसीटीएनएस सिस्टम में भी हरियाणा पूरे देश में शीर्ष पर है। अनुशासन और जिम्मेदारी डीजीपी ने कहा — विभाग पहले, सुविधा बाद में। उन्होंने निर्देश दिए कि संवेदनशील इलाकों में तैनात अधिकारी बिना सूचना के छुट्टी पर न जाएं। SHO को छुट्टी से पहले IG को और SP को ADG (L&O) को सूचित करना होगा। डीजीपी श्री ओ.पी. सिंह ने कहा कि हरियाणा पुलिस का लक्ष्य है – हर पुलिसकर्मी सुरक्षित रहे, जनता निडर रहे, और हर थाना जनता के विश्वास का प्रतीक बने।

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