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आत्ममंथन’ की ज्योति से आलोकित निरंकारी संत समागम की तैयारियाँ समापन की ओर

चंडीगढ़/ पंचकूला /मोहाली, 24 अक्टूबर, 2025(ईशान टाइम्स):- सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में 78वां वार्षिक निरंकारी संत समागम 31 अक्टूबर से 3 नवम्बर, 2025 तक संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा (हरियाणा) में अद्भुत दिव्यता और भव्यता के साथ आयोजित होने जा रहा है। आत्मीयता के इस उत्सव में देश-विदेश से असंख्य श्रद्धालु भाग लेकर आनंद का अनुभव प्राप्त करेंगे। श्रद्धा, समर्पण के साथ हज़ारों श्रद्धालुजन अपने-अपने क्षेत्रों से आकर पूर्ण तन्मयता और समर्पण भाव के साथ दिन रात सेवाओं में रत हैं; जिससे यह आयोजन अपनी अंतिम तैयारियों की ओर अग्रसर है। यह समागम केवल एक धार्मिक या वार्षिक आयोजन नहीं, अपितु ज्ञान, प्रेम और भक्ति का ऐसा पावन संगम है, जो ब्रह्मज्ञान द्वारा आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनता है। यहाँ श्रद्धालु न केवल आध्यात्मिक जागृति पाते हैं, बल्कि मानवता, विश्वबंधुत्व और आपसी सौहार्द की भावनाओं को भी आत्मसात करते हैं। यह आयोजन ‘आत्ममंथन’ की वह दिव्य भूमि है, जहाँ प्रत्येक साधक अपने अंतर्मन में झाँकने, आत्मचिंतन करने और आत्मिक चेतना को जागृत करने की प्रेरणा प्राप्त करता है। यह सम्पूर्ण आयोजन सतगुरु माता जी की दिव्य प्रेरणा और आशीर्वाद से संचालित हो रहा है। सतगुरु की यही मंगलकामना रहती है कि हर श्रद्धालु इस समागम में प्रेम, सम्मान और समुचित सुविधा का अनुभव करते हुए आध्यात्मिक रूप से परिपूर्ण हो। संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा के अनुसार एक समय पर जो स्थल केवल एक सामान्य मैदान था, वह अब संतो की कर्मठ सेवा भावना के कारण एक भव्य शामियानों की सुंदर नगरी में परिवर्तित हो चुका है। यह दिव्य वातावरण प्रत्येक आगंतुक को अपनी ओर आकर्षित करता है। समागम स्थल को एक दिव्य नगरी का रूप दिया गया है। विशाल पंडालों में भक्तों के लिए सुव्यवस्थित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। समागम मंच पर हो रहे प्रेरणादायक प्रवचन, भावपूर्ण भजन और विचारों को समूचे परिसर में और अधिक प्रभावी रूप से दर्शाने हेतु समूचे परिसर में अत्याधुनिक एल.ई.डी. स्क्रिनें स्थापित की जा रही हैं, जिससे दूरस्थ स्थानों पर बैठे श्रद्धालु भी उसी भाव, ऊर्जा और अनुभूति से सत्संग का लाभ प्राप्त कर सकें। पूरे समागम परिसर को चार प्रमुख खंडों में विभाजित किया गया है, जिससे संचालन, आवागमन और सुविधाओं का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। पिछले वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष भी मुंबई के श्रद्धालु भक्तों द्वारा निर्मित मुख्य स्वागत द्वार अपनी कलात्मक भव्यता के साथ समागम की आध्यात्मिक रूपरेखा का प्रतिबिंब बनकर उभरा है। यह द्वार न केवल सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि समर्पण, सेवा और सृजनशीलता का सजीव उदाहरण भी है। जैसे-जैसे समागम में श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह स्वागत द्वार भी अपने स्वरूप, विेस्तार और गरिमा में और अधिक भव्यता धारण करता जा रहा है, मानो यह समस्त मानवता को प्रेम, अपनत्व और समभाव से आमंत्रित करने हेतु तत्पर हो। इस पावन संत समागम में हर सज्जन महात्मा एवं श्रद्धालु भक्त का सादर आमंत्रण है। आइए, इस आत्मिक मिलन और भक्ति के महासंगम का हिस्सा बनें, सतगुरु के दिव्य दर्शन करें, उनके अमृतमय प्रवचनों का लाभ प्राप्त करें, और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की इस अनुपम यात्रा में सहभागी बनकर जीवन को धन्य करें। निसंदेह यह संत समागम केवल एक आयोजन नहीं बल्कि आत्म मंथन, आत्मबोध और आंतरिक शुद्धि का अवसर है।

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हर थाना बनेगा विश्वास का प्रतीक, हर पुलिसकर्मी रहेगा सुरक्षित — डीजीपी ओ.पी. सिंह

हरियाणा के डीजीपी ओ पी सिंह की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित, प्रदेश भर के अधिकारियों ने वी सी के माध्यम से लिया बैठक में भाग– कहा- हरियाणा पुलिस का नया संकल्प: प्रोएक्टिव पुलिसिंग और ‘फाइटिंग फिट और वर्किंग आर्डर (fighting fit & working order)’ की नीति– सेवा भी, सुरक्षा भी: हरियाणा पुलिस की कार्यशैली में बड़ा बदलाव चंडीगढ़, (ईशान टाइम्स)— हरियाणा पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री ओ.पी. सिंह ने पुलिस मुख्यालय में सभी पुलिस आयुक्तों (CPs), पुलिस अधीक्षकों (SPs) और थाना प्रभारियों (SHOs) की बैठक ली। उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस की कार्यशैली पूरी तरह बदलेगी। पुलिस को अब प्रोएक्टिव, समाधान देने वाली, समन्वयित और जनता के हित में काम करने वाली बनना होगा। साथ ही पुलिसकर्मियों के रहने और काम करने की स्थिति में भी सुधार किया जाएगा। थानों की हालत सुधारने के दिए आदेशडीजीपी ने हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन (HPHC) के अधिकारियों को आदेश दिए कि वे दो सप्ताह में सभी थानों और चौकियों की स्थिति में सुधार सुनिश्चित करें। रसोई, शौचालय, बिजली की वायरिंग और सुरक्षा व्यवस्था को ठीक किया जाए। उन्होंने कहा कि हर थाना साफ, सुरक्षित और व्यवस्थित दिखना चाहिए। इसके लिए इंजीनियरों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे हर थाना खुद जाकर देखें और रिपोर्ट दें। जनता की सुरक्षा के लिए फाइटिंग फिट और वर्किंग आर्डर (fighting fit & working order)’ की नीतिहरियाणा पुलिस को फाइटिंग फिट और वर्किंग ऑर्डर में रखना मेरा प्रमुख ध्येय है। ड्यूटी के दौरान गलती होना स्वाभाविक है, पर अनुशासनहीनता या बदमाशी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं होगी।हरियाणा पुलिस 365 दिन, 24 घंटे जनता की सेवा में तत्पर है। मैं अपने किसी भी पुलिसकर्मी को नुकसान में नहीं देख सकता — हम यहाँ जान देने नहीं, बल्कि जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए हैं।अपराधी को कानून के अनुसार सलाखों के पीछे भेजा जाएगा, लेकिन यदि कोई प्रतिकार करेगा, तो उसे तुरंत और उचित जवाब मिलेगा। हरियाणा पुलिस जनता और अपराधियों के बीच मजबूत ढाल बनकर खड़ी है। शहीद परिवारों की मदद में तेजीपुलिसकर्मियों के कल्याण संबंधी उन्होंने निर्देश दिए कि शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को नियमानुसार तुरंत मदद दी जाए। किसी काम में देरी न हो और हर 15 दिन में उनकी स्थिति की रिपोर्ट दी जाए। शहीदों के परिवार के काम रुकने नहीं चाहिए। जनता से संवाद और पुलिसकर्मियों से जुड़ावडीजीपी ने कहा कि जिले के सभी अधिकारी नियमित फील्ड विज़िट करें, पुलिसकर्मियों से बात करें और उनका मनोबल बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जनता से अच्छा व्यवहार बहुत ज़रूरी है। पुलिसकर्मी “Please, Sorry, Thank You” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करें — इससे पुलिस की छवि बेहतर होगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। सोशल मीडिया पर सतर्कता और संवादडीजीपी ने कहा कि अब पुलिस को सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहना होगा। अफवाह फैलाने वालों और पुलिस विरोधी गलत जानकारी फैलाने वालों पर शुरुआत से ही नज़र रखी जाए। जिले के अधिकारी रोजाना सोशल मीडिया या टीवी के ज़रिए जनता से संवाद करें ताकि पारदर्शिता और भरोसा बना रहे। सहयोग से अपराध नियंत्रणसभी थाना और चौकियां मिलकर काम करें और आस पास के क्षेत्र में अपराध कम करने के लिए साझा रणनीति बनाएं। हरियाणा पुलिस अकादमी के निदेशक श्री अर्शिंदर चावला को नए पुलिस सब-इंस्पेक्टरों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए, ताकि वे फिल्मी नहीं बल्कि वास्तविक पुलिसिंग सीखें। अपराध में कमी और उपलब्धियां डीजीपी ने बताया कि हरियाणा में रेप के मामलों में 50 प्रतिशत की कमी आई है और कुल अपराधों में भी गिरावट दर्ज हुई है। नए आपराधिक कानूनों का सफल क्रियान्वयन गृह मंत्री ने सराहा है। सीसीटीएनएस सिस्टम में भी हरियाणा पूरे देश में शीर्ष पर है। अनुशासन और जिम्मेदारी डीजीपी ने कहा — विभाग पहले, सुविधा बाद में। उन्होंने निर्देश दिए कि संवेदनशील इलाकों में तैनात अधिकारी बिना सूचना के छुट्टी पर न जाएं। SHO को छुट्टी से पहले IG को और SP को ADG (L&O) को सूचित करना होगा। डीजीपी श्री ओ.पी. सिंह ने कहा कि हरियाणा पुलिस का लक्ष्य है – हर पुलिसकर्मी सुरक्षित रहे, जनता निडर रहे, और हर थाना जनता के विश्वास का प्रतीक बने।

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हरियाणा में 26 नवंबर से 6 दिसंबर तक  ‘सरदार@150 एकता मार्च’

*राष्ट्रीय एकता दिवस पर जिला स्तर पर निकाली जाएंगी पदयात्राएँ* *मुख्य सचिव ने की तैयारियों की समीक्षा* चंडीगढ़, 24 अक्तूबर–(ईशान टाइम्स ब्यूरो)।राष्ट्र की एकता और अखंडता के सूत्रधार सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में हरियाणा में ‘सरदार@150 एकता मार्च’ का आयोजन किया जाएगा। यह अभियान अमृत काल की अमृत पीढ़ी यानी युवाओं को सरदार पटेल की एकता, अखंडता और शक्ति की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज  दो माह तक चलने वाले इस राष्ट्रीय अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। कार्यक्रम के अंतर्गत 31 अक्तूबर, 2025 को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर जिला स्तर पर पदयात्राएँ निकाली जाएंगी। इसके बाद 26 नवंबर से 6 दिसंबर, 2025 तक राष्ट्रीय स्तर पर ‘सरदार@150 एकता मार्च’ का आयोजन किया जाएगा। गौरतलब है कि सरदार@150 एकता मार्च’ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘राष्ट्र निर्माण में जन भागीदारी’ के विज़न से प्रेरित ‘विकसित भारत पदयात्रा’ पहल का हिस्सा है। युवा मामले मंत्रालय के अधीन ‘माई भारत’ द्वारा यह पहल युवाओं में राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति और नागरिक दायित्व की भावना को सशक्त करने के उद्देश्य से की जा रही है। इस अभियान का लक्ष्य युवाओं को ‘एक भारत, आत्मनिर्भर भारत’ के आदर्शों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिसमें सरदार पटेल के  सशक्त और एकजुट भारत के विज़न की गूंज है। पदयात्रा गतिविधियों का प्रभावी समन्वय और संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, मुख्य सचिव ने सभी जिलों में जिला कोर समितियों के गठन के निर्देश दिए।  उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित इन समितियों में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, जिला युवा अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी, एनएसएस, माई  भारत प्रतिनिधि तथा जनप्रतिनिधियों (सांसद/विधायक) सहित संबंधित विभागों के अधिकारी बतौर सदस्य शामिल होंगे। अतिरिक्त निदेशक श्री राज कुमार को राज्य नोडल अधिकारी नामित किया गया है, जबकि सरकारी आईटीआई के प्राचार्य  जिला नोडल अधिकारी होंगे। ये अधिकारी युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग, हरियाणा के माध्यम से युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। सभी जिलों में यह अभियान माई भारत के जिला युवा अधिकारी द्वारा चलाया जाएगा और सभी विभाग उनसे समन्वय स्थापित करेंगे। माई भारत के जिला युवा अधिकारी जिला कोर समिति के सदस्य सचिव के तौर पर पदयात्रा की सभी तैयारियों की देखरेख करेंगे। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने सभी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और युवा संगठनों से इस राष्ट्रीय उत्सव को सफल और प्रभावशाली बनाने के लिए पूरा सहयोग देने का आह्वान किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और स्कूलों की इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। यह बैठक केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्रालय तथा श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले मंत्री के कार्यालय से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित की गई।

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हरियाणा के राज्यपाल ने वर्ल्ड पोलियो दिवस पर बच्चों को पीएससी कोट में पिलाई दवा

पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश पंचकूला, 24 अक्तूबर( ईशान टाइम्स)- हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती मित्रा घोष सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गांव कोट में वर्ल्ड पोलियो दिवस के अवसर पर बच्चों को पोलियो बचाव की दवा पिलाई इसके अलावा प्रो. घोष ने रुद्राक्ष व आंवला के पौधे भी लगाए । हरियाणा के राज्यपाल ने कहा कि पोलियो टीकाकरण का उद्देश्य पोलियो के प्रति जागरूकता फैलाना और बच्चों को पोलियो से बचाना है। इसी मकसद से टीकाकरण की मुहिम चलाई जा रही है, उन्होंने बताया कि पोलियो मुख्य रूप से पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। वर्ल्ड पोलियो दिवस के अवसर पर राज्यपाल और उनकी धर्मपत्नी ने बच्चों को दावा पिलाई ओर खिलौने और फल बांटे। उन्होंने कहा कि पौधारोपण पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पौधा लगाने के साथ साथ उसका संरक्षण भी आवश्यक है तभी वह पौधा एक वृक्ष बनकर हमें छाया देगा और पर्यावरण को स्वच्छ व साफ रखने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि सभी कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल भी करें। इसके उपरांत हरियाणा के राज्यपाल ने सेक्टर 20 के शहीद मेजर अनुज राजपूत गवर्मेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को टीकाकरण उपरांत चॉकलेट वितरित की। प्रो. घोष ने स्कूल के बच्चों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बच्चों से बात कर विस्तार से जानकारी ली और उन्हें चॉकलेट वितरित की। उन्होंने पूरे स्कूल का दौरा भी किया। इसके बाद प्रो. घोष ने मेंटली डिसएबल्ड बच्चों से भी बातचीत कर उनका हाल चाल जाना ओर उन्हें भी चॉकलेट वितरित की। इससे पूर्व हरियाणा के राज्यपाल ने शहीद मेजर अनुज राजपूत की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर शहीद के पिता कुलबंश सिंह भी मौजूद थे। इस अवसर पर उपायुक्त श्री सतपाल शर्मा, पुलिस उपायुक्त सृष्टि गुप्ता, सिविल सर्जन डॉक्टर मुक्ता कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी संध्या मालिक, प्रिंसिपल सेक्टर 20 स्कूल श्रीमती नीलू कत्याल, तहसीलदार सुरेश कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

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हरियाणा बनेगा वाटर स्मार्ट स्टेट, सरकार लाएगी जल संरक्षण के लिए नया कानून — जनस्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा

रणबीर गंगवा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की दो दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर मुख्यतिथि के रूप में हुए शामिल महाग्राम योजना के तहत अगले दो वर्षों में सभी गांवों में शहरी की तर्ज पर सुविधाओं की जायेंगी सुनिश्चित पंचकूला, 24 अक्तूबर ( ईशान टाइम्स ब्यूरो)– हरियाणा के जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि राज्य सरकार आमजन को स्वच्छ, पर्याप्त और निर्बाध जलापूर्ति उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। पीने के पानी की बर्बादी रोकने, लीकेज की समस्या दूर करने तथा जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार एक नया अधिनियम लाने पर गंभीरता से कार्य कर रही है। रणबीर गंगवा आज स्थानीय रैड बिशप, पंचकूला में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की दो दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना और नागरिकों तक निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित करना है । उन्होंने बताया कि अधिनियम का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है, जिसके बाद अब इसे विधानसभा में पारित किया जाएगा। मंत्री ने आमजन से अपील की कि वे जल संरक्षण में सरकार का सहयोग करें और पानी को व्यर्थ न बहने दें। गंगवा ने बताया कि यह विभाग द्वारा आयोजित अपनी तरह की पहली कार्यशाला है, जिसमें जेई से लेकर ईआईसी स्तर तक के अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान प्रतिभागियों ने तकनीकी अनुभव साझा किए और सेवा गुणवत्ता सुधारने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। आईआईटी रूड़की से आए विशेषज्ञों ने भी अधिकारियों का तकनीकी मार्गदर्शन किया। कार्यशाला में तकनीकी दक्षता बढ़ाने, जल गुणवत्ता सुधार, परियोजना निष्पादन में पारदर्शिता, आधुनिक जल प्रबंधन, सीवरेज व बाढ़ नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति की गति व निगरानी प्रणाली सुदृढ़ करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में भी शहरों जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि ग्रामीणों को आवश्यकताओं के लिए शहरों की ओर न जाना पड़े। इसके तहत महाग्राम योजना में 10,000 से अधिक आबादी वाले 148 गांव चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 17 गांवों में पेयजल, सीवरेज एवं एसटीपी की व्यवस्था पूरी की जा चुकी है, जबकि 30 गांवों में कार्य प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि अगले दो वर्षों में योजना के सभी गांवों में शहरी सुविधाओं की तर्ज पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। गंगवा ने बताया कि विभाग को बरसात के बाद जलभराव की समस्या से निपटने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा को “वाटर स्मार्ट स्टेट”बनाना हमारा संकल्प है, जिससे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “हर घर नल से जल” के विजन को साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रत्येक अधिकारी यदि आमजन की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहेगा तो किसी भी समस्या का समाधान तुरंत हो सकेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी अधिकारियों , कर्मचारियों एवं आमजन के सामूहिक प्रयासों से हरियाणा देश का अग्रणी वाटर स्मार्ट स्टेट बनेगा, जिसका अनुसरण अन्य राज्य भी करेंगे। एक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि सीवरेज की सफाई मैन्युअल रूप से ना करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि ऐसे कार्यों के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। इसके साथ ही अधिकारियों को आगामी 30 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सीवरेज और पेयजल आपूर्ति की दीर्घकालिक योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत गांवों में वॉटर वर्क्स, पाइपलाइन बदलने तथा बूस्टिंग स्टेशन स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसा कोई गांव नहीं है जहाँ एक से पाँच करोड़ रुपये तक के विकास कार्य न करवाए गए हों। विभाग द्वारा वर्तमान में 55 प्रतिशत ट्यूबवेल आधारित तथा 45 प्रतिशत नहर आधारित जलापूर्ति की जा रही है।

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नशा तस्करों को केवल जेल की सलाख़ों में ही नहीं भेजा जाएगा उनकी संपत्तियों को भी अटैच करके किया जाएगा ध्वस्त-वरुण सिंगला

क्राइम ब्रांच पलवल पुलिस ने करीब 50 लाख कीमत के 109.856 किलोग्राम गांजा सहित दो तस्कर आरोपियों को दबोचा एसपी पलवल वरुण सिंगला का नशा तस्करों को कड़ा संदेश- नशा तस्करों को केवल जेल की सलाख़ों में ही नहीं भेजा जाएगा उनकी संपत्तियों को भी अटैच करके किया जाएगा ध्वस्तपलवल (ईशान टाइम्स)।पलवल पुलिस को मिली इस बड़ी कामयाबी का खुलासा प्रेस वार्ता में करते हुए पुलिस अधीक्षक पलवल वरुण सिंगला ने बताया कि जिला पुलिस न केवल नशे के खिलाफ आमजन को जागरुक कर रही है साथ ही नशा तस्करों पर भी कड़ा प्रहार कर रही है। इसी कड़ी में क्राइम ब्रांच पलवल के प्रभारी दीपक गुलिया टीम ने 109.856 किलोग्राम गांजा की आठवीं वाणिज्यिक मात्रा के साथ दो नशा तस्करों को धर दबोचने में सफलता हासिल की है। लीड- दिनांक 24 अक्टूबर की अलसुबह, CIA पलवल टीम प्रभारी P/SI दीपक गुलिया की टीम के ASI लक्ष्मन सिंह टीम साथ अपराधों की रोकथाम हेतु बाबरी मोड होडल पर मौजूद था जहां उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई कि सुन्दर पुत्र देवीराम व उमेद पुत्र कलवा निवासीयान गाँव अलावलपुर थाना चादहट जिला पलवल जो अवैध गांजा (नशीला पदार्थ) बेचने का काम करते है जो ये दोनो आज भी अपनी गाडी स्कारपियो नंबर-HR51CF-8878 में काफी मात्रा में गांजा लेकर कोसी (यु०पी०) की तरफ से पलवल आयेगे। अगर करमन बोर्डर टोल टैक्स के नजदीक नाकाबन्दी की जाये तो गांजा (नशीला पदार्थ) सहित काबू आ सकते है। सूचना के आधार पर टीम ने तुरंत नाकाबंदी कर गाड़ी सहित दोनों आरोपियों को धर दबोचा। बरामदगी- राजपत्रित अधिकारी DSP होडल श्री सुरेन्द्र कुमार के समक्ष तलासी में गाडी स्कारपियो में मिले पांच प्लास्टिक कटटों में कुल 109.856 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। जिसकी अनुमानित कीमत करीब 50 ला ख रुपए है।

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हरियाणा के जेलों में बंद गैंगस्टर्स का बदल दिया गया है हुलिया

हरियाणा कारागार महानिदेशक आलोक कुमार राय ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जानकारी पंचकूला (कमल कलसी , ईशान टाइम्स) गैंग्स्टर्स कल्चर पर हरियाणा के जेल विभाग का डंडा… हरियाणा के जेलों में बंद गैंगस्टर्स का बदल दिया गया है हुलिया। जेल मैन्युअल के अनुसार बना दिये गए हैं गैंगस्टरों और कुख्यात अपराधियों के बाल, दाढ़ी ,वर्दी, पहनावा और रूप। अब आम कैदियों जैसी है जेलों में बंद गैंगस्टरों की लुक। अब हरियाणा की जेलों में गैंग्स्टर्स भी करने लगे हैं आम कैदियों की तरह साफ सफाई जैसे साधारण काम। हरियाणा की जेलों में बंद है 400 गैंगस्टर… हरियाणा की जेलों में अपराधियों की जिंदगी का क्या हाल है और किसी जुर्म का क्या होता है अंजाम, इसको लेकर जेल विभाग लगाएगा प्रदर्शनी… पंचकूला में राज्यस्तरीय प्रदर्शनी लगाकर आम लोगों को दिखाया जाएगा जेल में कैदियों का हाल और जेलों का रख रखाव और व्यवस्था। जेल महानिदेशक आलोक कुमार राय बोले जेल विभाग का इसके पीछे मकसद है गैंग्स्टर्स कल्चर पर लगे रोक… अपराध की तरफ युवा न हों आकर्षित…

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नैशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट ने भ्रामक वेबसाइटों और यूट्यूब चैनलों पर रोक की मांग की

नई दिल्ली(ईशान टाइम्स)।नैशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट (इंडिया) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं ईशान टाइम्स समूह (नई दिल्ली व चंडीगढ़) के संपादक/प्रकाशक संजय राय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर भ्रामक वेबसाइटों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। श्री राय ने कहा कि कुछ वेबसाइटें बिना आरएनआई पंजीकरण के फर्जी अखबारों के नाम से संचालित हो रही हैं और ब्लैकमेलिंग व अधिकारियों की छवि धूमिल करने जैसे कार्यों में लिप्त हैं। चुनाव के समय ये वेबसाइटें भ्रामक समाचारों के माध्यम से जनता को गुमराह करने की कोशिश करती हैं, जिससे पत्रकारिता की साख पर बुरा असर पड़ता है।कुछ लोग यूट्यूब चैनल का नाम दे कर भ्रामक ऊटपटांग खबरों को चला कर सरकार ,किसी वर्ग विशेष,या व्यक्तियों को टारगेट कर बिना सबूतों झूठ अनर्गल पोस्ट को,वीडियो को वायरल करते हैं उस भी गहन नजर रखने की आवश्यकता है । उन्होंने मंत्रालय से ऐसे अवैध पोर्टलों की जांच कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। श्री राय ने कहा कि 2015 में भी इसी तरह की प्रवृत्तियों का विरोध यूनियन ने किया था और तब सकारात्मक परिणाम सामने आए थे। उन्होंने बताया कि छठ पूजा के बाद इस विषय पर जंतर मंतर पर चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

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पत्रकारों पर केस की धमकी देकर क्या साबित करना चाहते है भारत के रेल मंत्री

भारतीय रेलवे की खामियां उजागर करने वाली आवाज़ों को चुप कराने की कोशिश ? मोदी सरकार के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया पर रेलवे से जुड़े ‘फर्जी वीडियो’ फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी जारी की है। लेकिन क्या यह चेतावनी केवल फेक न्यूज़ पर है, या रेलवे की जमीन पर सच्ची समस्याओं को उठाने वाले पत्रकारों और आम यात्रियों की आवाज़ को दबाने का नया हथियार बन रही है? हाल के बयानों से ऐसा लगता है कि मंत्री जी अब सवालों से ज्यादा ‘धमकी’ की भाषा बोल रहे हैं, जबकि रेलवे की बुनियादी सुविधाएं यात्रियों को परेशान करती जा रही हैं। रविवार को दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन का औचक निरीक्षण करने के बाद वैष्णव ने कहा, “रेलवे से जुड़े फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।” यह बयान त्योहारों के सीजन में यात्रियों की भीड़ प्रबंधन के बीच आया, जब स्टेशन पर सफाई और सुविधाओं की कमी साफ नजर आ रही थी। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर वीडियो जो शौचालयों की गंदगी, पानी की कमी या दलाली के वीडियो दिखाता है, वह ‘फर्जी’ है? या यह सरकार की नाकामियों को छिपाने का बहाना है ? रेलवे में यात्रियों की शिकायतें पुरानी हो चुकी हैं। टिकट बुकिंग में दलाली का बाजार गर्म है—IRCTC पर आसानी से सीट न मिलने पर एजेंटों को हजारों रुपये चुकाने पड़ते हैं। ट्रेनों में पानी की बोतलें खत्म हो जाती हैं, शौचालय गंदे पड़े रहते हैं, और सफर के दौरान बुनियादी सुविधाओं की कमी से लाखों यात्री परेशान हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे अनगिनत वीडियो वायरल होते हैं, जो इन समस्याओं को उजागर करते हैं। लेकिन अब मंत्री की चेतावनी से पत्रकार और एक्टिविस्ट डर के साए में हैं। क्या सच्चाई दिखाना अब ‘फर्जी’ कहलाकर मुकदमे का सबब बनेगा ? यह पहली बार नहीं है जब वैष्णव ने आलोचना का जवाब ‘कार्रवाई’ से दिया हो। संसद में विपक्ष के रेल हादसों पर सवालों पर वे भड़क उठे थे—”चुप बैठो… एकदम!” अब सोशल मीडिया पर भी यही तेवर। पत्रकारिता, जो लोकतंत्र का चौथा खंभा मानी जाती है, आज सत्ता के दबाव में सिकुड़ रही है। मोदी सरकार के दौर में मीडिया पर मुकदमों और ट्रोलिंग की बाढ़ आ गई है। रेल मंत्री का यह रुख न सिर्फ प्रेस फ्रीडम पर सवाल उठाता है, बल्कि रेलवे की जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ने जैसा लगता है। यात्रियों और पत्रकार संगठनों ने इसकी निंदा की है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने कहा, “सच्ची खबरों को फर्जी ठहराकर चुप कराना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।” क्या रेल मंत्री इन शिकायतों का समाधान करेंगे, या ‘सख्त कार्रवाई’ की धमकी से ही सब ठीक हो जाएगा? देश के करोड़ों रेल यात्रियों को इंतजार है—कि उनकी आवाज़ दबी न रहे, और ट्रेनें सिर्फ ‘वंदे भारत’ की चमक तक सीमित न रहें। इंद्र यादव,स्वतंत्र लेखक, indrayadavrti@gmail.com

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महिलाओं की आजादी, एक सशक्तिकरण की दिशा या सामाजिक भ्रम ?

आज के दौर में समाज में महिलाओं की भूमिका और उनकी आजादी को लेकर बहसें छिड़ी हुई हैं। हाल ही में एक लेख में महिलाओं की “अश्लीलता” को आजादी के नाम पर बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है, जहां लेखक ने महिलाओं को सलाह दी है कि वे समाज में वैसा ही व्यवहार करें जैसा घर के परिजनों के साथ। यह दृष्टिकोण पुरातनवादी लगता है, जो महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करने की कोशिश करता है। लेकिन क्या वाकई आजादी का मतलब सिर्फ “नंगा नाच” है, या यह एक गहरी सामाजिक क्रांति का हिस्सा है ? सबसे पहले, आजादी के नाम पर क्या हो रहा है? एक लेखक का कहना है कि महिलाओं की “अश्लीलता” देश को गलत दिशा दे रही है। लेकिन “अश्लीलता” की परिभाषा क्या है? क्या मॉडर्न कपड़े पहनना, क्लब जाना या सोशल मीडिया पर अपनी राय रखना अश्लील है? इतिहास गवाह है कि महिलाओं की आजादी की लड़ाई हमेशा से सामाजिक मानदंडों के खिलाफ रही है। 19वीं सदी में जब महिलाएं वोट का अधिकार मांग रही थीं, तब भी उन्हें “असभ्य” कहा जाता था। भारत में सती प्रथा, बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ राजा राममोहन रॉय और सावित्रीबाई फुले जैसी महिलाओं ने आवाज उठाई, तो समाज ने उन्हें “अश्लील” ठहराया। आज की महिलाएं उसी क्रम में आगे बढ़ रही हैं – शिक्षा, करियर, और व्यक्तिगत चुनावों में स्वतंत्रता पा रही हैं। लेखक का तर्क है कि हर चीज का “पैमाना” होना चाहिए, वरना जीवन व्यर्थ हो जाता है। सहमत हूं, लेकिन यह पैमाना पुरुषों द्वारा थोपा गया क्यों हो ? महिलाओं को क्यों हमेशा “समाज के लिए क्या हो” की याद दिलाई जाती है ? पुरुषों को क्लब जाना, देर रात बाहर रहना सामान्य लगता है, लेकिन महिलाओं के लिए यह “अश्लीलता” क्यों ? एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महिलाओं की भागीदारी कार्यबल में केवल 25% है, जबकि पुरुषों की 80% से ज्यादा। यह असमानता आजादी की कमी से आती है, न कि ज्यादा आजादी से। यदि महिलाएं अपनी पसंद के कपड़े पहनें या अपनी सेक्सुअलिटी को एक्सप्रेस करें, तो यह समाज को कमजोर नहीं बनाता, बल्कि उसे समावेशी बनाता है। अब बात “सरकारी सुविधा” की। लेखक कहते हैं कि अश्लीलता फैलाने के लिए मॉल और क्लब हैं। लेकिन क्या ये जगहें सिर्फ “अश्लीलता” के लिए हैं ? नहीं, ये आधुनिक जीवन के हिस्से हैं, जहां लोग सोशल इंटरैक्शन करते हैं। भारत जैसे देश में, जहां महिलाओं पर घरेलू हिंसा के मामले सालाना लाखों में हैं (एनसीआरबी डेटा के अनुसार), आजादी का मतलब सुरक्षा और समानता है। महिलाएं जब समाज में “घर के परिजनों जैसा” व्यवहार करेंगी, तो क्या पुरुष भी वैसा ही करेंगे? क्या वे महिलाओं को बराबरी का दर्जा देंगे, या सिर्फ नियंत्रण करेंगे ? मानव जीवन की लंबाई पर सोचने की सलाह अच्छी है, लेकिन इसे सिर्फ महिलाओं पर क्यों लागू करें ? जीवन छोटा है, इसलिए हर व्यक्ति को अपनी पसंद से जीने का हक है – बिना किसी के फैसले के। सेक्सुअल आकर्षण को “ढोल पीटना” कहना गलत है; यह प्राकृतिक है और दोनों लिंगों में मौजूद है। समाज को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं की आजादी जरूरी है, क्योंकि शिक्षित और स्वतंत्र महिलाएं परिवार, समाज और देश को मजबूत बनाती हैं। उदाहरण के तौर पर, स्कैंडिनेवियाई देशों में महिलाओं की उच्च आजादी के कारण लिंग समानता सूचकांक में वे शीर्ष पर हैं, और उनका समाज अधिक खुशहाल है। अंत में, महिलाओं की आजादी “नंगा नाच” नहीं, बल्कि सशक्तिकरण है। समाज को बदलने के लिए पुरानी सोच को छोड़ना होगा। महिलाएं घर में भी सम्मान पाएं और बाहर भी, तभी सच्ची प्रगति होगी। लेखक की बातों में सच्चाई हो सकती है अगर अति हो, लेकिन अति हर जगह बुरी है – चाहे आजादी में हो या नियंत्रण में। सोचिए, एक समान समाज कैसा होगा जहां महिलाएं बिना डर के जी सकें ? यही सच्ची आजादी है। – इंद्र यादव ,स्वतंत्र लेखक, indrayadavrti@gmail.com

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