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26अक्तूबर को रोहतक में होगा जीएसटी बचत महोत्सव और आत्मनिर्भर भारत अभियान सम्मेलन

राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह होंगे कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जीएसटी अब ’बचत उत्सव’ से ’रोजगार उत्सव’ में बदल रहा है चंडीगढ़,    (ईशान टाइम्स)। रविवार को रोहतक में होगा जीएसटी बचत महोत्सव और आत्मनिर्भर भारत अभियान सम्मेलन : शमशेर खरकर(। भाजपा जीएसटी सुधारों को जीएसटी बचत महोत्सव के रूप में मना रही है। इसी कड़ी में रविवार को रोहतक में जीएसटी बचत महोत्सव और आत्मनिर्भर भारत अभियान सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में भाजपा के राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह मुख्य अतिथि होंगे। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। इससे पहले भाजपा प्रदेश कार्यालय “मंगल कमल” में राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह तीन बजे प्रेसवार्ता को भी संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में प्रतिष्ठित व्यापारी, गणमान्य लोगों के अलावा भाजपा के कार्यकर्ता और वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे।भाजपा के प्रदेश मीडिया सह प्रभारी शमशेर सिंह खरक ने बताया कि महामंत्री अरुण सिंह आत्मनिर्भर भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक भी हैं। वो जीएसटी बचत महोत्सव एवं आत्मनिर्भर भारत अभियान सम्मेलन 26 अक्टूबर को सायं 4 बजे श्री लालनाथ हिंदू कालेज के सभागार,भिवानी चुंगी रोहतक में पहुंच कर कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह जीएसटी सुधारों और आत्मनिर्भर भारत अभियान को लेकर सम्मेलन में व्यापारियों और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करेंगे।शमशेर सिंह खरक ने बताया कि जीएसटी की दरें कम होने से समाज के सभी वर्गों को लाभ मिल रहा है। अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाने की दिशा में मोदी सरकार द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ये सुधार हर क्षेत्र में लोगों को लाभान्वित कर रहे हैं। खरक ने कहा कि जीएसटी अब ’बचत उत्सव’ से ’रोजगार उत्सव’ में बदल रहा है। व्यापार आसान हो गया है। जीएसटी को सरलीकरण और पारदर्शिता का प्रतीक बताते हुए खरक ने कहा कि जीएसटी ’आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर रहा है।भाजपा प्रदेश सह मीडिया प्रभारी खरक ने बताया कि भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ के लिए स्वदेशी का मंत्र जरूरी है। आज समय की मांग है कि हम स्वदेशी अपनाएं। वही खरीदें जो देश में बना हो। वही बेचें, जो देश में बना हो। उन्होंने कहा कि स्वदेशी अपनाना अपने देश के कारीगरों, किसानों, छोटे व्यापारियों, और उद्यमियों का सम्मान करना है। जब हम स्वदेशी अपनाते हैं, तो हम अपने देश की मिट्टी से जुड़ते हैं, अपने लोगों की मेहनत को सम्मान देते हैं और अपने देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम बढ़ाते हैं।कार्यक्रम में अशोक चौधरी, सुरेश मदान, गुलशन निझावन, सुशील बंसल, सुबेर सैनी, जितेश लोहचब, राजेन्द्र मदान, विनोद आहुजा, अनिल अरोड़ा, राजकुमार साहनी, राजकुमार चावला, अनिल मित्तल, अंगद कोचर भी मौजूद रहेंंगें। इसके अलावा अमित मग्गू रॉकी सहगल मनीष शर्मा (अध्यक्ष, श्री मंगलसेन मंडल) (अध्यक्ष, महाराजा शूरसेन मंडल) (अध्यक्ष, महाराजा अग्रसेन मंडल) द्वारा अतिथियों का स्वागत किया जाएगा।

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यूपी की ‘पवित्र’ प्रेम कहानी: मामी-भांजे का ‘अमर’ इश्क, पुलिस चौकी में ‘बलिदान’ का ड्रामा!

अरे वाह, उत्तर प्रदेश की मिट्टी में प्रेम की ऐसी फसल उग रही है कि बॉलीवुड वाले भी शर्मा जाएं! सीतापुर जिले से आई ये ताजा खबर तो जैसे ‘फैमिली ड्रामा’ का नया चैप्टर है – जहां रिश्तों की पवित्रता को ‘अवैध इश्क’ की खाद से इतना हरा-भरा किया गया कि अब उसमें रुसवाई के कांटे उग आए हैं। मामी पूजा मिश्रा और उनके 15 साल छोटे भांजे आलोक मिश्रा की ये ‘रोमांटिक’ सागा सुनकर आपका दिल धड़क उठेगा… या शायद हंसते-हंसते फट जाएगा!…कहानी शुरू होती है क्लासिक तरीके से – पति ललित मिश्रा, जो शायद सोचते होंगे कि परिवार को मजबूत बनाने के लिए भांजे को घर बुलाना अच्छा आइडिया है। काम में हाथ बंटाने के बहाने आलोक गांव से शहर आया, और ललित मिश्रा जी काम पर निकलते, तो घर में ‘अय्याशी’ का फुल-टाइम प्रोग्राम चलता। अरे भाई, दिन भर क्या-क्या करते थे ये दोनों। घर संभालते। या ‘फैमिली टाइम’ को नए लेवल पर ले जाते। खैर, जब ये राज खुला, तो ललित मिश्रा ने भांजे को भगा दिया – सही भी है, कौन रखे ऐसे ‘हेल्पर’ को जो घर की ‘मालकिन’ को ही हेल्प कर दे! लेकिन यहीं ट्विस्ट आता है, दो बच्चों की मां पूजा मिश्रा का दिल तो युवा आलोक मिश्रा पर आ ही गया था। ‘प्यार अंधा होता है’ – यहां तो इतना अंधा कि रिश्ते की सारी लकीरें मिटा दीं। दोनों घर से भाग निकले और 7 महीने बरेली में ‘हनीमून’ मनाया। सोचिए, कितना रोमांटिक! एक तरफ दो बच्चे घर पर मां का इंतजार कर रहे होंगे, दूसरी तरफ मामी-भांजे का ‘लाइव-इन’ रिलेशनशिप। यूपी में ऐसे ‘मॉडर्न’ परिवार कहां मिलते हैं। शायद ये वो ‘सांस्कृतिक क्रांति’ है जिसकी बात नेता लोग करते रहते हैं!…फिर आया क्लाइमैक्स – आलोक मिश्रा ने कहा, “बस हो गया, अब नहीं अपनाऊंगा!” उम्र का फर्क। या शायद ‘अय्याशी’ की एक्सपायरी डेट आ गई। विवाद हुआ, मामला पुलिस चौकी पहुंचा। वहां भांजे ने फिर दोहराया कि अब नहीं चलेगा ये सब। और मामी पूजा मिश्रा । वो तो ‘ट्रू लव’ की दीवानी! चौकी में ही ब्लेड निकाला और कलाई काट ली। वाह, क्या डेडिकेशन! बॉलीवुड की हीरोइनों को चैलेंज है – पुलिस स्टेशन में सुसाइड अटेम्प्ट से बड़ा ‘सैक्रिफाइस’ क्या हो सकता है। अब वो अस्पताल में एडमिट हैं, शायद सोच रही होंगी कि अगला एपिसोड क्या होगा।… ये कहानी हमें क्या सिखाती है? कि यूपी में प्रेम की कोई सीमा नहीं – न उम्र की, न रिश्तों की, न कानून की। एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ’ चला रही है, दूसरी तरफ ऐसे ‘फैमिली अफेयर्स’ से समाज ‘बचाओ’ चिल्ला रहा है। आलोक मिश्रा जैसे ‘युवा’ तो बस ‘एक्सपीरियंस’ लेते हैं और भाग जाते हैं, लेकिन पूजा मिश्रा जैसी ‘एक्सपीरियंस्ड’ महिलाएं। वो तो दिल की सुनती हैं, भले पुलिस चौकी में ‘ब्लड डोनेशन’ क्यों न करना पड़े!…खैर, मजाक एक तरफ – ये घटना दुखद है, लेकिन सोचिए, अगर ऐसे रिश्तों को ‘नॉर्मल’ मान लिया जाए तो क्या होगा? शायद अगली बार कोई ‘मामा-भांजी’ की स्टोरी आएगी! समाज को आईना दिखाने वाली ये खबर बताती है कि ‘प्यार’ के नाम पर कितनी आसानी से रिश्ते तार-तार हो जाते हैं। सीतापुर पुलिस अब क्या करेगी। जांच। या नया ‘लव जिहाद’ कानून बना देगी ‘फैमिली जिहाद’ के लिए। इसलिए आप लोगों से निवेदन है कि असल जीवन में ऐसे रिश्तों से दूर रहें, वरना पुलिस चौकी आपका अगला ‘डेट स्पॉट’ बन सकता है!

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भारत में “नारी” शक्ति का ढोंग ! भारत के वेश्याओं की पीड़ा को अनदेखा करता जाहिल समाज

भारत, जो अपने आपको विश्वगुरु और नारी शक्ति का प्रतीक बताता है, एक ऐसी भूमि है जहां संस्कृति, सभ्यता और आध्यात्मिकता की गंगा बहती है। मगर इसी देश की गलियों, सायों और अंधेरे कोनों में एक ऐसी सच्चाई छिपी है, जो समाज की चमक-दमक के पीछे की काली सच्चाई को उजागर करती है। यह है वेश्यावृत्ति में फंसी उन असंख्य नारियों की कहानी, जिनका दर्द न तो समाज सुनता है, न ही सत्ता की गलियारों में उसकी गूंज पहुंचती है। वेश्यावृत्ति, जिसे समाज “पाप” का पर्याय मानता है, उन औरतों के लिए अक्सर मजबूरी का परिणाम होती है। गरीबी, भुखमरी, पारिवारिक हिंसा, तस्करी और सामाजिक उपेक्षा ऐसी जंजीरें हैं, जो इन महिलाओं को इस दलदल में धकेल देती हैं। एक बार इस दुनिया में कदम रखने के बाद, न तो समाज उन्हें अपनाता है, न ही उनके लिए कोई रास्ता छोड़ता है। उनकी जिंदगी नरक बन जाती है, जहां हर रात एक नया दर्द, एक नई यातना लेकर आती है। भारत में वेश्यावृत्ति कोई नई समस्या नहीं है। मुंबई के कमाठीपुरा, दिल्ली के जीबी रोड, कोलकाता के सोनागाछी जैसे क्षेत्र दशकों से इस कड़वी सच्चाई के गवाह हैं। यहां लाखों महिलाएं और बच्चियां, जिनमें से कई नाबालिग हैं, हर दिन शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक शोषण का शिकार होती हैं। उनकी आवाजें उन तंग गलियों में दबकर रह जाती हैं, जहां समाज की नजरें पहुंचने से कतराती हैं। भारत में नारी को देवी का दर्जा देने की बात तो खूब होती है, लेकिन इन महिलाओं को न तो देवी माना जाता है, न ही इंसान। समाज उन्हें तिरस्कार की नजरों से देखता है, मानो वे इस दुनिया में सबसे निचले पायदान की हकदार हों। पुलिस और कानून व्यवस्था, जो उनकी रक्षा के लिए होनी चाहिए, अक्सर उनके साथ सबसे क्रूर व्यवहार करती है। दलालों और ग्राहकों के हाथों शोषण के बाद, समाज और सिस्टम का यह रवैया उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम करता है।कई बार इन महिलाओं को इस पेशे में धकेलने वाले उनके अपने ही होते हैं—पति, पिता, भाई या प्रेमी। मानव तस्करी के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल हजारों लड़कियां और महिलाएं इस दलदल में फंस जाती हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, 2022 में मानव तस्करी के 2,250 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें से ज्यादातर पीड़ित महिलाएं और बच्चियां थीं। यह केवल आंकड़े हैं; असल संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामले तो दर्ज ही नहीं होते। वेश्यावृत्ति में फंसी महिलाओं को न केवल सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है, बल्कि उनकी सेहत भी खतरे में रहती है। एचआईवी/एड्स, यौन संचारित रोग, और अनचाहे गर्भधारण जैसी समस्याएं उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं तक उनकी पहुंच सीमित होती है, और अगर होती भी है, तो डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ का रवैया अक्सर अमानवीय होता है। इन महिलाओं के बच्चों का भविष्य भी अंधेरे में डूबा होता है। मां की “पहचान” उनके माथे पर एक कलंक बनकर चिपक जाती है। शिक्षा, सम्मान और सामान्य जीवन उनके लिए एक सपना बनकर रह जाता है। कई बच्चियां, जो इस माहौल में पलती हैं, वही रास्ता अपनाने को मजबूर हो जाती हैं, और यह दुष्चक्र पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रहता है। भारत में वेश्यावृत्ति को कानूनी रूप से नियंत्रित करने की बात लंबे समय से चल रही है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कुछ लोग इसे वैध करने की वकालत करते हैं, ताकि इन महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान मिल सके। लेकिन वैधता का सवाल भी अपने आप में जटिल है, क्योंकि यह मानव तस्करी और शोषण को और बढ़ावा दे सकता है। सबसे जरूरी है इन महिलाओं को इस दलदल से निकालने के लिए ठोस पुनर्वास योजनाएं। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक स्वीकृति के अवसर प्रदान किए बिना, केवल कानून बनाकर इस समस्या का हल नहीं निकल सकता। गैर-सरकारी संगठन (NGOs) जैसे प्रयास और संवेदना इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी पहुंच सीमित है। सरकार को इन संगठनों के साथ मिलकर एक व्यापक नीति बनानी होगी, जो इन महिलाओं को नया जीवन दे सके। भारत, जो नारी शक्ति की बात करता है, उसे इन महिलाओं की पीड़ा को समझना होगा। विश्वगुरु बनने की राह में, हमें सबसे पहले अपने समाज के उन हिस्सों को उठाना होगा, जो सबसे नीचे दबे हुए हैं। इन महिलाओं को न तो अपराधी माना जाए, न ही समाज का बोझ। वे भी इस देश की बेटियां हैं, जिन्हें सम्मान और अवसर का हक है। उनके दर्द को सुनने का समय अब आ गया है। क्या हम, एक समाज के रूप में, उनकी आवाज बन सकते हैं? क्या हम उनके लिए वह रोशनी ला सकते हैं, जो उनकी जिंदगी के अंधेरे को मिटा दे? यह सवाल हर उस भारतीय से है, जो अपने देश को सच्चा विश्वगुरु बनते देखना चाहता है।

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सूर्य और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का उत्सव व भारतीय संस्कृति का एक अनमोल रत्न है “छठ” पर्व

छठ पर्व भारतीय संस्कृति का एक अनमोल रत्न है, जो सूर्यदेव और छठी मइया की उपासना का प्रतीक है। यह पर्व मुख्यतः बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह चार दिवसीय उत्सव परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए समर्पित है। वर्ष में दो बार मनाए जाने वाले इस पर्व को चैत्र मास में ‘चैती छठ’ और कार्तिक मास में ‘कार्तिकी छठ’ के रूप में जाना जाता है, जिसमें कार्तिकी छठ विशेष लोकप्रियता रखती है। छठ पर्व की शुरुआत भैया दूज के तीसरे दिन ‘नहाय-खाय’ से होती है। इस दिन व्रती (व्रत करने वाले) स्नान कर शुद्धता के साथ पर्व की शुरुआत करते हैं। भोजन में सेंधा नमक और घी से तैयार अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है। यह सात्विक भोजन पवित्रता और अनुशासन का प्रतीक है। दूसरे दिन, जिसे ‘खरना’ कहते हैं, व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। सूर्यास्त के बाद, लगभग सायं सात बजे, गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल प्रसाद के रूप में ग्रहण किए जाते हैं। इस प्रसाद को परिवार और पड़ोसियों में बांटा जाता है। खरना का प्रसाद भक्ति और पवित्रता का प्रतीक है, और इस दिन घरों में भक्ति भजनों की मधुर ध्वनि गूंजती है।तीसरा दिन छठ पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन है, जब व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। नदी, तालाब या किसी जलाशय के किनारे एकत्रित होकर, व्रती बांस की टोकरी में फल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद के साथ सूर्यदेव को दूध और जल अर्पित करते हैं। इस दौरान पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है, और लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजनों से परहेज किया जाता है। भक्ति गीतों और मंत्रों का गायन वातावरण को आध्यात्मिक बनाता है। पर्व का समापन चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ होता है। व्रती सुबह जल्दी उठकर जलाशय पर पहुंचते हैं और सूर्य की प्रथम किरणों को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद व्रत खोला जाता है और प्रसाद वितरित किया जाता है। यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावनात्मक होता है, जो सूर्यदेव के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। छठ पर्व का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व गहरा है। बिहार के मुंगेर में गंगा नदी के बीच स्थित सीता चरण मंदिर इस पर्व का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि माता सीता ने मुंगेर में छठ व्रत किया था, जिससे इस पर्व की शुरुआत हुई। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना राजपाट हार गए थे, तब द्रौपदी ने श्रीकृष्ण के सुझाव पर छठ व्रत रखा, जिसके फलस्वरूप उन्हें उनका खोया हुआ राजपाट वापस मिला। लोक परंपरा में सूर्यदेव और छठी मइया को भाई-बहन माना जाता है। कहा जाता है कि सूर्यदेव ने सबसे पहले छठी मइया की पूजा की थी, जिससे इस पर्व की नींव पड़ी। यह पर्व सामाजिक एकता का भी प्रतीक है, क्योंकि इसमें स्त्री और पुरुष समान रूप से भाग लेते हैं। छठ पर्व का वैज्ञानिक महत्व भी उल्लेखनीय है। यह पर्व कार्तिक और चैत्र मास की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, जब सूर्य की पराबैगनी किरणें पृथ्वी पर सामान्य से अधिक मात्रा में पहुंचती हैं। सूर्यास्त और सूर्योदय के समय जल में खड़े होकर अर्घ्य देने से शरीर को इन किरणों का सीमित और लाभकारी प्रभाव प्राप्त होता है। सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में ऑक्सीजन को ओजोन में परिवर्तित करता है, जो पर्यावरण को शुद्ध करता है और हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करता है। इस प्रकार, छठ पर्व आध्यात्मिकता के साथ-साथ पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा देता है। छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है। इसमें पवित्रता, अनुशासन और भक्ति का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। नदियों के किनारे एकत्रित श्रद्धालु, भक्ति भजनों की मधुर ध्वनि और प्रसाद का आदान-प्रदान इस पर्व को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाता है। मुंगेर और बेगूसराय जैसे क्षेत्रों में यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है, जहां यह सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। छठ पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, आत्म-अनुशासन और सामुदायिक एकता का संदेश देता है। यह उत्सव न केवल आस्था को बल देता है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाता है। सूर्यदेव की ऊर्जा और छठी मइया की कृपा के साथ, यह पर्व हमारे जीवन को समृद्ध और सार्थक बनाता है।

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बिहार में तेजस्वी यादव: युवा नेतृत्व की अनिवार्यता या गठबंधन की विवशता?

-संजय राय बिहार की राजनीति इन दिनों एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई है। महीनों से जिस घोषणा का इंतज़ार था, आखिरकार वह हो ही गई — महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। साथ ही विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के अध्यक्ष मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया गया है। यह घोषणा कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने की, लेकिन यह स्वीकारोक्ति जितनी राजनीतिक थी, उतनी ही विवशता से भरी हुई भी प्रतीत होती है। कांग्रेस का यह फैसला किसी उत्साह का नहीं, बल्कि मजबूरी का परिणाम लगता है। लंबे समय से यह चर्चा थी कि क्या कांग्रेस तेजस्वी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने को तैयार होगी। आखिरकार उसने हामी तो भरी, पर इस सहमति में वह आत्मविश्वास नहीं झलकता जो एक मजबूत सहयोगी से अपेक्षित होता है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि बिहार में कांग्रेस की संगठनात्मक और जनाधार की स्थिति कमजोर है। दरअसल, तेजस्वी यादव के नेतृत्व को स्वीकार करने के पीछे कांग्रेस के पास कोई ठोस विकल्प नहीं था। आज बिहार में विपक्षी राजनीति का केंद्र राजद ही है। नीतीश कुमार के घटते जनाधार और भाजपा-जेडीयू गठबंधन की चुनौतियों के बीच तेजस्वी ही वह चेहरा हैं जो बदलाव का प्रतीक बन सकते हैं। तेजस्वी ने अपने राजनीतिक सफर में उल्लेखनीय परिपक्वता दिखाई है। उन्होंने बेरोज़गारी, पलायन और सम्मान जैसे मुद्दों को जनता की आकांक्षाओं से जोड़ा है। उनकी भाषा में युवाओं की बेचैनी और बेहतर अवसरों की तलाश झलकती है। यह बदलाव बताता है कि वे अब केवल लालू यादव के उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बन चुके हैं। महागठबंधन की इस घोषणा से एनडीए के भीतर भी हलचल तेज हुई है। अब तक एनडीए ने अपना मुख्यमंत्री चेहरा तय नहीं किया है। यह वही एनडीए है जिसने पिछले दो दशकों तक नीतीश कुमार पर भरोसा जताया, लेकिन अब उनके नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। बार-बार गठबंधन बदलना, अवसरवाद और सुशासन की फीकी होती छवि ने नीतीश कुमार की विश्वसनीयता को कमजोर किया है। ऐसे में एनडीए का बिना चेहरे के चुनाव मैदान में उतरना उसके आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है। दूसरी ओर, महागठबंधन की ओर से तेजस्वी की घोषणा ने युवाओं के बीच नई ऊर्जा पैदा की है। लेकिन यह उत्साह उतना ही सीमित है जितनी गठबंधन की आंतरिक मजबूरियां। कांग्रेस और वामदलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर असहमति की फुसफुसाहट पहले ही शुरू हो चुकी है। महागठबंधन की एकता उतनी मजबूत नहीं दिखती जितनी प्रचार में दिखाई जा रही है। यह भी सवाल उठता है कि अगर महागठबंधन सत्ता में आता है, तो क्या तेजस्वी ही सर्वमान्य मुख्यमंत्री बन पाएंगे? फिलहाल यह कहना कठिन है कि यह निर्णय महागठबंधन के लिए कितना लाभदायक साबित होगा। लेकिन यह तय है कि इस घोषणा ने बिहार की राजनीति को एक नया विमर्श दे दिया है — युवा नेतृत्व बनाम पारंपरिक सत्ता। तेजस्वी यादव का उदय केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की आवाज़ है जो जातीय राजनीति से आगे बढ़कर विकास, शिक्षा, और रोजगार की बात करना चाहती है। फिर भी, तेजस्वी के सामने चुनौतियाँ कम नहीं हैं। जनता अब केवल वादों से नहीं, बल्कि काम और विश्वसनीयता से प्रभावित होती है। भ्रष्टाचार, परिवारवाद और अस्थिरता जैसे पुराने आरोप अब भी उनकी छवि पर साया बनकर मंडरा रहे हैं। उन्हें यह साबित करना होगा कि वे केवल ‘लालू के बेटे’ नहीं, बल्कि बिहार की नई उम्मीद हैं। कांग्रेस की स्थिति इस चुनाव में कमजोर है। वीआईपी महज 15 सीटों पर लड़ रही है, जबकि कांग्रेस उससे कहीं अधिक सीटों पर, फिर भी उसकी भूमिका गौण है। इससे गठबंधन में असमानता साफ झलकती है। अशोक गहलोत द्वारा यह कहना कि “और भी उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे” कांग्रेस की कमज़ोरी को छिपाने का एक राजनीतिक बयान मात्र लगता है। बिहार की राजनीति का यह दौर केवल सत्ता परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि मानसिकता परिवर्तन का भी सूचक है। अगर तेजस्वी यादव इस बदलाव को जनविश्वास में बदल पाने में सफल हुए, तो यह बिहार की राजनीति में एक नई पीढ़ी के नेतृत्व का युग आरंभ होगा। परंतु यदि यह अवसर केवल चुनावी रणनीति बनकर रह गया, तो यह गठबंधन उसी पुराने चक्र में फंस जाएगा जहाँ समझौते, मतभेद और अवसरवाद सब कुछ निगल जाते हैं। तेजस्वी यादव का नामांकन बिहार के लिए आशा और अनिश्चितता — दोनों का प्रतीक है। यह निर्णय केवल महागठबंधन की रणनीति नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम भी है। अब देखना यह है कि क्या यह युवा चेहरा सचमुच बदलाव ला पाएगा या फिर यह भी एक और “मजबूरी भरी स्वीकृति” बनकर रह जाएगा।

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आत्ममंथन’ की ज्योति से आलोकित निरंकारी संत समागम की तैयारियाँ समापन की ओर

चंडीगढ़/ पंचकूला /मोहाली, 24 अक्टूबर, 2025(ईशान टाइम्स):- सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में 78वां वार्षिक निरंकारी संत समागम 31 अक्टूबर से 3 नवम्बर, 2025 तक संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा (हरियाणा) में अद्भुत दिव्यता और भव्यता के साथ आयोजित होने जा रहा है। आत्मीयता के इस उत्सव में देश-विदेश से असंख्य श्रद्धालु भाग लेकर आनंद का अनुभव प्राप्त करेंगे। श्रद्धा, समर्पण के साथ हज़ारों श्रद्धालुजन अपने-अपने क्षेत्रों से आकर पूर्ण तन्मयता और समर्पण भाव के साथ दिन रात सेवाओं में रत हैं; जिससे यह आयोजन अपनी अंतिम तैयारियों की ओर अग्रसर है। यह समागम केवल एक धार्मिक या वार्षिक आयोजन नहीं, अपितु ज्ञान, प्रेम और भक्ति का ऐसा पावन संगम है, जो ब्रह्मज्ञान द्वारा आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनता है। यहाँ श्रद्धालु न केवल आध्यात्मिक जागृति पाते हैं, बल्कि मानवता, विश्वबंधुत्व और आपसी सौहार्द की भावनाओं को भी आत्मसात करते हैं। यह आयोजन ‘आत्ममंथन’ की वह दिव्य भूमि है, जहाँ प्रत्येक साधक अपने अंतर्मन में झाँकने, आत्मचिंतन करने और आत्मिक चेतना को जागृत करने की प्रेरणा प्राप्त करता है। यह सम्पूर्ण आयोजन सतगुरु माता जी की दिव्य प्रेरणा और आशीर्वाद से संचालित हो रहा है। सतगुरु की यही मंगलकामना रहती है कि हर श्रद्धालु इस समागम में प्रेम, सम्मान और समुचित सुविधा का अनुभव करते हुए आध्यात्मिक रूप से परिपूर्ण हो। संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा के अनुसार एक समय पर जो स्थल केवल एक सामान्य मैदान था, वह अब संतो की कर्मठ सेवा भावना के कारण एक भव्य शामियानों की सुंदर नगरी में परिवर्तित हो चुका है। यह दिव्य वातावरण प्रत्येक आगंतुक को अपनी ओर आकर्षित करता है। समागम स्थल को एक दिव्य नगरी का रूप दिया गया है। विशाल पंडालों में भक्तों के लिए सुव्यवस्थित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। समागम मंच पर हो रहे प्रेरणादायक प्रवचन, भावपूर्ण भजन और विचारों को समूचे परिसर में और अधिक प्रभावी रूप से दर्शाने हेतु समूचे परिसर में अत्याधुनिक एल.ई.डी. स्क्रिनें स्थापित की जा रही हैं, जिससे दूरस्थ स्थानों पर बैठे श्रद्धालु भी उसी भाव, ऊर्जा और अनुभूति से सत्संग का लाभ प्राप्त कर सकें। पूरे समागम परिसर को चार प्रमुख खंडों में विभाजित किया गया है, जिससे संचालन, आवागमन और सुविधाओं का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। पिछले वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष भी मुंबई के श्रद्धालु भक्तों द्वारा निर्मित मुख्य स्वागत द्वार अपनी कलात्मक भव्यता के साथ समागम की आध्यात्मिक रूपरेखा का प्रतिबिंब बनकर उभरा है। यह द्वार न केवल सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि समर्पण, सेवा और सृजनशीलता का सजीव उदाहरण भी है। जैसे-जैसे समागम में श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह स्वागत द्वार भी अपने स्वरूप, विेस्तार और गरिमा में और अधिक भव्यता धारण करता जा रहा है, मानो यह समस्त मानवता को प्रेम, अपनत्व और समभाव से आमंत्रित करने हेतु तत्पर हो। इस पावन संत समागम में हर सज्जन महात्मा एवं श्रद्धालु भक्त का सादर आमंत्रण है। आइए, इस आत्मिक मिलन और भक्ति के महासंगम का हिस्सा बनें, सतगुरु के दिव्य दर्शन करें, उनके अमृतमय प्रवचनों का लाभ प्राप्त करें, और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की इस अनुपम यात्रा में सहभागी बनकर जीवन को धन्य करें। निसंदेह यह संत समागम केवल एक आयोजन नहीं बल्कि आत्म मंथन, आत्मबोध और आंतरिक शुद्धि का अवसर है।

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हर थाना बनेगा विश्वास का प्रतीक, हर पुलिसकर्मी रहेगा सुरक्षित — डीजीपी ओ.पी. सिंह

हरियाणा के डीजीपी ओ पी सिंह की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित, प्रदेश भर के अधिकारियों ने वी सी के माध्यम से लिया बैठक में भाग– कहा- हरियाणा पुलिस का नया संकल्प: प्रोएक्टिव पुलिसिंग और ‘फाइटिंग फिट और वर्किंग आर्डर (fighting fit & working order)’ की नीति– सेवा भी, सुरक्षा भी: हरियाणा पुलिस की कार्यशैली में बड़ा बदलाव चंडीगढ़, (ईशान टाइम्स)— हरियाणा पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री ओ.पी. सिंह ने पुलिस मुख्यालय में सभी पुलिस आयुक्तों (CPs), पुलिस अधीक्षकों (SPs) और थाना प्रभारियों (SHOs) की बैठक ली। उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस की कार्यशैली पूरी तरह बदलेगी। पुलिस को अब प्रोएक्टिव, समाधान देने वाली, समन्वयित और जनता के हित में काम करने वाली बनना होगा। साथ ही पुलिसकर्मियों के रहने और काम करने की स्थिति में भी सुधार किया जाएगा। थानों की हालत सुधारने के दिए आदेशडीजीपी ने हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन (HPHC) के अधिकारियों को आदेश दिए कि वे दो सप्ताह में सभी थानों और चौकियों की स्थिति में सुधार सुनिश्चित करें। रसोई, शौचालय, बिजली की वायरिंग और सुरक्षा व्यवस्था को ठीक किया जाए। उन्होंने कहा कि हर थाना साफ, सुरक्षित और व्यवस्थित दिखना चाहिए। इसके लिए इंजीनियरों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे हर थाना खुद जाकर देखें और रिपोर्ट दें। जनता की सुरक्षा के लिए फाइटिंग फिट और वर्किंग आर्डर (fighting fit & working order)’ की नीतिहरियाणा पुलिस को फाइटिंग फिट और वर्किंग ऑर्डर में रखना मेरा प्रमुख ध्येय है। ड्यूटी के दौरान गलती होना स्वाभाविक है, पर अनुशासनहीनता या बदमाशी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं होगी।हरियाणा पुलिस 365 दिन, 24 घंटे जनता की सेवा में तत्पर है। मैं अपने किसी भी पुलिसकर्मी को नुकसान में नहीं देख सकता — हम यहाँ जान देने नहीं, बल्कि जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए हैं।अपराधी को कानून के अनुसार सलाखों के पीछे भेजा जाएगा, लेकिन यदि कोई प्रतिकार करेगा, तो उसे तुरंत और उचित जवाब मिलेगा। हरियाणा पुलिस जनता और अपराधियों के बीच मजबूत ढाल बनकर खड़ी है। शहीद परिवारों की मदद में तेजीपुलिसकर्मियों के कल्याण संबंधी उन्होंने निर्देश दिए कि शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को नियमानुसार तुरंत मदद दी जाए। किसी काम में देरी न हो और हर 15 दिन में उनकी स्थिति की रिपोर्ट दी जाए। शहीदों के परिवार के काम रुकने नहीं चाहिए। जनता से संवाद और पुलिसकर्मियों से जुड़ावडीजीपी ने कहा कि जिले के सभी अधिकारी नियमित फील्ड विज़िट करें, पुलिसकर्मियों से बात करें और उनका मनोबल बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जनता से अच्छा व्यवहार बहुत ज़रूरी है। पुलिसकर्मी “Please, Sorry, Thank You” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करें — इससे पुलिस की छवि बेहतर होगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा। सोशल मीडिया पर सतर्कता और संवादडीजीपी ने कहा कि अब पुलिस को सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहना होगा। अफवाह फैलाने वालों और पुलिस विरोधी गलत जानकारी फैलाने वालों पर शुरुआत से ही नज़र रखी जाए। जिले के अधिकारी रोजाना सोशल मीडिया या टीवी के ज़रिए जनता से संवाद करें ताकि पारदर्शिता और भरोसा बना रहे। सहयोग से अपराध नियंत्रणसभी थाना और चौकियां मिलकर काम करें और आस पास के क्षेत्र में अपराध कम करने के लिए साझा रणनीति बनाएं। हरियाणा पुलिस अकादमी के निदेशक श्री अर्शिंदर चावला को नए पुलिस सब-इंस्पेक्टरों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए, ताकि वे फिल्मी नहीं बल्कि वास्तविक पुलिसिंग सीखें। अपराध में कमी और उपलब्धियां डीजीपी ने बताया कि हरियाणा में रेप के मामलों में 50 प्रतिशत की कमी आई है और कुल अपराधों में भी गिरावट दर्ज हुई है। नए आपराधिक कानूनों का सफल क्रियान्वयन गृह मंत्री ने सराहा है। सीसीटीएनएस सिस्टम में भी हरियाणा पूरे देश में शीर्ष पर है। अनुशासन और जिम्मेदारी डीजीपी ने कहा — विभाग पहले, सुविधा बाद में। उन्होंने निर्देश दिए कि संवेदनशील इलाकों में तैनात अधिकारी बिना सूचना के छुट्टी पर न जाएं। SHO को छुट्टी से पहले IG को और SP को ADG (L&O) को सूचित करना होगा। डीजीपी श्री ओ.पी. सिंह ने कहा कि हरियाणा पुलिस का लक्ष्य है – हर पुलिसकर्मी सुरक्षित रहे, जनता निडर रहे, और हर थाना जनता के विश्वास का प्रतीक बने।

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हरियाणा में 26 नवंबर से 6 दिसंबर तक  ‘सरदार@150 एकता मार्च’

*राष्ट्रीय एकता दिवस पर जिला स्तर पर निकाली जाएंगी पदयात्राएँ* *मुख्य सचिव ने की तैयारियों की समीक्षा* चंडीगढ़, 24 अक्तूबर–(ईशान टाइम्स ब्यूरो)।राष्ट्र की एकता और अखंडता के सूत्रधार सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में हरियाणा में ‘सरदार@150 एकता मार्च’ का आयोजन किया जाएगा। यह अभियान अमृत काल की अमृत पीढ़ी यानी युवाओं को सरदार पटेल की एकता, अखंडता और शक्ति की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज  दो माह तक चलने वाले इस राष्ट्रीय अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। कार्यक्रम के अंतर्गत 31 अक्तूबर, 2025 को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर जिला स्तर पर पदयात्राएँ निकाली जाएंगी। इसके बाद 26 नवंबर से 6 दिसंबर, 2025 तक राष्ट्रीय स्तर पर ‘सरदार@150 एकता मार्च’ का आयोजन किया जाएगा। गौरतलब है कि सरदार@150 एकता मार्च’ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘राष्ट्र निर्माण में जन भागीदारी’ के विज़न से प्रेरित ‘विकसित भारत पदयात्रा’ पहल का हिस्सा है। युवा मामले मंत्रालय के अधीन ‘माई भारत’ द्वारा यह पहल युवाओं में राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति और नागरिक दायित्व की भावना को सशक्त करने के उद्देश्य से की जा रही है। इस अभियान का लक्ष्य युवाओं को ‘एक भारत, आत्मनिर्भर भारत’ के आदर्शों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिसमें सरदार पटेल के  सशक्त और एकजुट भारत के विज़न की गूंज है। पदयात्रा गतिविधियों का प्रभावी समन्वय और संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, मुख्य सचिव ने सभी जिलों में जिला कोर समितियों के गठन के निर्देश दिए।  उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित इन समितियों में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, जिला युवा अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी, एनएसएस, माई  भारत प्रतिनिधि तथा जनप्रतिनिधियों (सांसद/विधायक) सहित संबंधित विभागों के अधिकारी बतौर सदस्य शामिल होंगे। अतिरिक्त निदेशक श्री राज कुमार को राज्य नोडल अधिकारी नामित किया गया है, जबकि सरकारी आईटीआई के प्राचार्य  जिला नोडल अधिकारी होंगे। ये अधिकारी युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग, हरियाणा के माध्यम से युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। सभी जिलों में यह अभियान माई भारत के जिला युवा अधिकारी द्वारा चलाया जाएगा और सभी विभाग उनसे समन्वय स्थापित करेंगे। माई भारत के जिला युवा अधिकारी जिला कोर समिति के सदस्य सचिव के तौर पर पदयात्रा की सभी तैयारियों की देखरेख करेंगे। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने सभी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और युवा संगठनों से इस राष्ट्रीय उत्सव को सफल और प्रभावशाली बनाने के लिए पूरा सहयोग देने का आह्वान किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और स्कूलों की इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। यह बैठक केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्रालय तथा श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले मंत्री के कार्यालय से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित की गई।

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हरियाणा के राज्यपाल ने वर्ल्ड पोलियो दिवस पर बच्चों को पीएससी कोट में पिलाई दवा

पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश पंचकूला, 24 अक्तूबर( ईशान टाइम्स)- हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती मित्रा घोष सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गांव कोट में वर्ल्ड पोलियो दिवस के अवसर पर बच्चों को पोलियो बचाव की दवा पिलाई इसके अलावा प्रो. घोष ने रुद्राक्ष व आंवला के पौधे भी लगाए । हरियाणा के राज्यपाल ने कहा कि पोलियो टीकाकरण का उद्देश्य पोलियो के प्रति जागरूकता फैलाना और बच्चों को पोलियो से बचाना है। इसी मकसद से टीकाकरण की मुहिम चलाई जा रही है, उन्होंने बताया कि पोलियो मुख्य रूप से पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। वर्ल्ड पोलियो दिवस के अवसर पर राज्यपाल और उनकी धर्मपत्नी ने बच्चों को दावा पिलाई ओर खिलौने और फल बांटे। उन्होंने कहा कि पौधारोपण पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पौधा लगाने के साथ साथ उसका संरक्षण भी आवश्यक है तभी वह पौधा एक वृक्ष बनकर हमें छाया देगा और पर्यावरण को स्वच्छ व साफ रखने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि सभी कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल भी करें। इसके उपरांत हरियाणा के राज्यपाल ने सेक्टर 20 के शहीद मेजर अनुज राजपूत गवर्मेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को टीकाकरण उपरांत चॉकलेट वितरित की। प्रो. घोष ने स्कूल के बच्चों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बच्चों से बात कर विस्तार से जानकारी ली और उन्हें चॉकलेट वितरित की। उन्होंने पूरे स्कूल का दौरा भी किया। इसके बाद प्रो. घोष ने मेंटली डिसएबल्ड बच्चों से भी बातचीत कर उनका हाल चाल जाना ओर उन्हें भी चॉकलेट वितरित की। इससे पूर्व हरियाणा के राज्यपाल ने शहीद मेजर अनुज राजपूत की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर शहीद के पिता कुलबंश सिंह भी मौजूद थे। इस अवसर पर उपायुक्त श्री सतपाल शर्मा, पुलिस उपायुक्त सृष्टि गुप्ता, सिविल सर्जन डॉक्टर मुक्ता कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी संध्या मालिक, प्रिंसिपल सेक्टर 20 स्कूल श्रीमती नीलू कत्याल, तहसीलदार सुरेश कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

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हरियाणा बनेगा वाटर स्मार्ट स्टेट, सरकार लाएगी जल संरक्षण के लिए नया कानून — जनस्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा

रणबीर गंगवा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की दो दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर मुख्यतिथि के रूप में हुए शामिल महाग्राम योजना के तहत अगले दो वर्षों में सभी गांवों में शहरी की तर्ज पर सुविधाओं की जायेंगी सुनिश्चित पंचकूला, 24 अक्तूबर ( ईशान टाइम्स ब्यूरो)– हरियाणा के जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि राज्य सरकार आमजन को स्वच्छ, पर्याप्त और निर्बाध जलापूर्ति उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। पीने के पानी की बर्बादी रोकने, लीकेज की समस्या दूर करने तथा जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार एक नया अधिनियम लाने पर गंभीरता से कार्य कर रही है। रणबीर गंगवा आज स्थानीय रैड बिशप, पंचकूला में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की दो दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना और नागरिकों तक निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित करना है । उन्होंने बताया कि अधिनियम का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है, जिसके बाद अब इसे विधानसभा में पारित किया जाएगा। मंत्री ने आमजन से अपील की कि वे जल संरक्षण में सरकार का सहयोग करें और पानी को व्यर्थ न बहने दें। गंगवा ने बताया कि यह विभाग द्वारा आयोजित अपनी तरह की पहली कार्यशाला है, जिसमें जेई से लेकर ईआईसी स्तर तक के अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान प्रतिभागियों ने तकनीकी अनुभव साझा किए और सेवा गुणवत्ता सुधारने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। आईआईटी रूड़की से आए विशेषज्ञों ने भी अधिकारियों का तकनीकी मार्गदर्शन किया। कार्यशाला में तकनीकी दक्षता बढ़ाने, जल गुणवत्ता सुधार, परियोजना निष्पादन में पारदर्शिता, आधुनिक जल प्रबंधन, सीवरेज व बाढ़ नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति की गति व निगरानी प्रणाली सुदृढ़ करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में भी शहरों जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि ग्रामीणों को आवश्यकताओं के लिए शहरों की ओर न जाना पड़े। इसके तहत महाग्राम योजना में 10,000 से अधिक आबादी वाले 148 गांव चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 17 गांवों में पेयजल, सीवरेज एवं एसटीपी की व्यवस्था पूरी की जा चुकी है, जबकि 30 गांवों में कार्य प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि अगले दो वर्षों में योजना के सभी गांवों में शहरी सुविधाओं की तर्ज पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। गंगवा ने बताया कि विभाग को बरसात के बाद जलभराव की समस्या से निपटने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा को “वाटर स्मार्ट स्टेट”बनाना हमारा संकल्प है, जिससे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “हर घर नल से जल” के विजन को साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रत्येक अधिकारी यदि आमजन की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहेगा तो किसी भी समस्या का समाधान तुरंत हो सकेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी अधिकारियों , कर्मचारियों एवं आमजन के सामूहिक प्रयासों से हरियाणा देश का अग्रणी वाटर स्मार्ट स्टेट बनेगा, जिसका अनुसरण अन्य राज्य भी करेंगे। एक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि सीवरेज की सफाई मैन्युअल रूप से ना करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि ऐसे कार्यों के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। इसके साथ ही अधिकारियों को आगामी 30 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सीवरेज और पेयजल आपूर्ति की दीर्घकालिक योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत गांवों में वॉटर वर्क्स, पाइपलाइन बदलने तथा बूस्टिंग स्टेशन स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसा कोई गांव नहीं है जहाँ एक से पाँच करोड़ रुपये तक के विकास कार्य न करवाए गए हों। विभाग द्वारा वर्तमान में 55 प्रतिशत ट्यूबवेल आधारित तथा 45 प्रतिशत नहर आधारित जलापूर्ति की जा रही है।

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