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हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुधा भारद्वाज ने ली पंचकुला

पंचकूला, (ईशान राय)– हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुश्री सुधा भारद्वाज ने आज पंचकुला जिला महिला कांग्रेस की कार्यकारिणी की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में संगठन को मज़बूत बनाने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में विशेष रूप से “वोट चोरी हस्ताक्षर अभियान” को लेकर जानकारी दी गई और कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे इस अभियान को घर-घर तक पहुँचाएं। सुधा भारद्वाज ने कहा कि यह अभियान लोकतंत्र की रक्षा और जनमत के सम्मान के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हर महिला कांग्रेस कार्यकर्ता को इस मुहिम में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए ताकि जनता को यह संदेश दिया जा सके कि कांग्रेस पार्टी लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि महिला कांग्रेस समाज के हर वर्ग की आवाज़ बुलंद कर रही है, चाहे वह महिलाओं के अधिकार हों, बेरोजगारी का मुद्दा हो या महंगाई से जूझती जनता की परेशानी। संगठन जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ और मजबूत करेगा ताकि हर घर तक कांग्रेस का संदेश पहुंच सके।

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हरियाणा के एडीजीपी वाई पूरन कुमार ने सुसाइड किया

हरियाणा कैडर के एक एडीजीपी स्तर के आईपीएस की खुद को गोली मारने से हुई मौत चंडीगढ़ (संजय राय )।आज दोपहर लगभग डेढ़ बजे सेक्टर 11 स्थित अपनी कोठी के बेसमेंट में हरियाणके ए डी जी पी, आई . ए. एस . वाई पी कुमार ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली । वे पुलिस महानिरीक्षक पी टी सी सुनारिया में पोस्टेड थे। गोली की आवाज सुन उनकी बेटी ने नीचे आ कर देखा फिर उसने पुलिस को फोन किया । थाना सेक्टर 11और सेक्टर15,की टीम सी एफ एस एल की टीम ने मौके पर पहुंच कर साक्ष्य इकट्ठा लिए ।मृतक वाई पूरन कुमार की आईएएस पत्नी अमनीत पी कुमार है । अमनीत पी कुमार सीएम के साथ जापान गए अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल में विदेश दौरे पर हैं।आइपीएस सुसाइड मामले में एमएसपी चंडीगढ़ कंवर दीप कौर ने बताया कि आज करीब डेढ़ बजे गोली चलने की खबर मिली थी ।जांच में गोली मारकर आत्महत्या की ख़बर मिली थी मृतक का नाम वाई पूरण कुमार है जो कि हरियाणा कैडर के 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। मामले की जांच की जा रही है ।सीएफएल टीम जांच कर रही है. घटना के वक्त कौन कौन मौजूद था इसकी जांच की जा रही है।आई पी एस अधिकारी वाई पूरण कुमार का शव घर से ले जाया जा रहा है शव को एंबुलेंस में रखकर पोस्ट मॉर्टम के लिए ले जाया गया है।सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि उनके घर से सुसाइड नोट 9 पेज का मिला है। सुसाइड नोट में हरियाणा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम भी है शामिल है । जिसकी जांच जारी है ।वाई पूरण कुमार के रोहतक रेंज आईजी रहते हुए रहे रीडर पर करप्शन का मामला दर्ज है। वाई पूरण कुमार को आशंका थी कि उन्हें भी फंसाया जा सकता है । एडीजीपी की बॉडी का कल सेक्टर 16 अस्पताल में पोस्टमार्टम होगा ।

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किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. नीरज गोयल को ‘इमर्जिंग स्टार इन रीनल ट्रांसप्लांट एक्सीलेंस’ अवार्ड से सम्मानित

पंचकुला, ईशान राय: अल्केमिस्ट हॉस्पिटल, पंचकुला के एसोसिएट डायरेक्टर एवं चीफ किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. नीरज गोयल को नई दिल्ली में आयोजित स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 2025 के दौरान ‘इमर्जिंग स्टार इन रीनल ट्रांसप्लांट एक्सीलेंस’ अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार इस क्षेत्र से किसी किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन को मिली अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय मान्यता है। डॉ. गोयल को क्षेत्र में किडनी ट्रांसप्लांटेशन प्रोग्राम की स्थापना और उसे निरंतर आगे बढ़ाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। अपने करियर में वे अब तक 1000 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक कर चुके हैं। इस अवसर पर डॉ. गोयल ने कहा, “पहले क्षेत्र के मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली-एनसीआर या अन्य मेट्रो शहरों की यात्रा करनी पड़ती थी, जिससे उन्हें लंबी प्रतीक्षा सूची, लॉजिस्टिक कठिनाइयों और भावनात्मक तनाव का सामना करना पड़ता था। अब पंचकुला में ट्रांसप्लांट सेवाओं की उपलब्धता ने हरियाणा के साथ-साथ चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और यूपी के मरीजों के लिए नई उम्मीद जगाई है।” इससे पहले, नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर भी डॉ. नीरज गोयल को किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

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हरिहर मंदिर प्रांगण में गरबा-डांडिया नाइट का भव्य आयोजन किया गया

जगाधरी/पंचकुला 05अक्टूबर (संजय राय ): सेक्टर 12 ए स्थित यंगस्टर योग ग्रुप की ओर से हरिहर मंदिर प्रांगण में गरबा-डांडिया नाइट का भव्य आयोजन किया गया। क्लास इंचार्ज डॉ. शिव प्रशार और गीता यादव ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई और मधुर गायन मीनाक्षी कुंद्रा ने किया, जबकि पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन उषा रावत ने किया। महिलाओं की मनमोहक डांडिया प्रस्तुति का कोरियोग्राफ नीलिमा पसरीजा ने किया, वहीं पुरुषों का जोशीला भांगड़ा नृत्य गौरव गोयल के निर्देशन में हुआ। पलक सुखीजा ने रैम्प वॉक का आयोजन किया और सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण भी दिया। कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने हेतु मुख्य अतिथि योग के ज्ञानी कर्नल सुरेंद्र आनंद और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शशि, पतंजलि जिला प्रमुख प्रेम आहूजा और उनकी पत्नी श्रीमती अमिता आहूजा के साथ, योग शिक्षक विनोद बजाज और उनकी पत्नी श्रीमती सरोज के साथ तथा समाजसेविका सुनीता गर्ग भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।पूरे आयोजन में एडमिन मधु और इंदु वर्मा के विशेष प्रयास रहे। श्रीमती किरण बाला ने भी रौनक लगाई।समारोह में स्नैक्स, कॉफी और रात्रिभोज की सुंदर व्यवस्था की गई। प्रतिभागियों को सम्मानित करने के लिए डांडिया किंग और डांडिया क्वीन की उपाधियाँ प्रदान की गईं।कक्षा संचालकों ने विशेष धन्यवाद प्रकट किया।रमेश गुप्ता, मोहन सैनी, भीम सैन कक्कड़ , रजनीश चौधरी , दीपक पसरीजा , हरिओम , श्रीमती मंजू कक्कड़ , श्रीमती रेखा गुप्ता , श्रीमती किरण गुप्ता , श्रीमती प्रिंसी, श्रीमती आशा , श्रीमती अरुणा , श्रीमती मीना चौधरी, श्रीमती संध्या , श्रीमती अरुणा गर्ग, ऋतु जैन।स्थानीय निवासियों ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन न केवल त्योहारों की रौनक बढ़ाते हैं बल्कि आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवंत रखते हैं।

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वोट” और “मतदान” का मतलब है की आप नेता के गुलाम हो

“ भारत के लोकतंत्र में मतदान को सबसे शक्तिशाली हथियार माना जाता है। यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से नागरिक अपने नेताओं का चयन करते हैं और देश के भविष्य को आकार देने में अपनी भूमिका निभाते हैं। लेकिन क्या मतदान का मतलब केवल एक वोट डालना है, या इसके पीछे कोई गहरा अर्थ छिपा है? कुछ लोग कहते हैं कि मतदान करना यानी नेताओं के गुलाम बनना, क्योंकि हम अपनी स्वतंत्र इच्छा से चुने गए नेताओं के निर्णयों पर निर्भर हो जाते हैं। मतदान केवल एक कागजी प्रक्रिया या इलेक्ट्रॉनिक बटन दबाने का कार्य नहीं है। यह एक नागरिक का अधिकार, कर्तव्य और जिम्मेदारी है। मतदान के जरिए हम अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं, जो हमारी आवाज को सरकार तक पहुंचाते हैं। लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या हम वास्तव में स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद व्यक्त करते हैं, या फिर हम सामाजिक दबाव, प्रचार, या भावनात्मक प्रभावों के गुलाम बन जाते हैं? कई बार लोग नेताओं के वादों, जाति, धर्म, या क्षेत्रीय भावनाओं के आधार पर वोट देते हैं। ऐसे में मतदान स्वतंत्र इच्छा की अभिव्यक्ति कम और बाहरी प्रभावों का परिणाम ज्यादा बन जाता है। अगर हम बिना सोचे-समझे वोट डालते हैं, तो यह संभव है कि हम उन नेताओं के हाथों में शक्ति सौंप दें जो हमारे हितों की बजाय अपने निजी स्वार्थों को प्राथमिकता दें। इस दृष्टि से, मतदान हमें नेताओं का “गुलाम” बना सकता है, अगर हम अपनी शक्ति का उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से नहीं करते। मतदान की कीमत को दो दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है: एक, वह मूल्य जो यह लोकतंत्र को देता है, और दूसरा, वह लागत जो इसके गलत उपयोग से समाज को चुकानी पड़ती है।मतदान लोकतंत्र का आधार है। इसके जरिए हर नागरिक को समान अधिकार मिलता है, चाहे वह किसी भी सामाजिक, आर्थिक या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से हो। एक वोट की कीमत एक पूरे देश के भविष्य को बदलने की ताकत रखती है। यह वह शक्ति है जो सरकारों को बनाती और गिराती है। इतिहास में कई उदाहरण हैं जहां एक-एक वोट ने बड़े बदलाव लाए। मतदान करने का मतलब केवल एक दिन के लिए मतदान केंद्र जाना नहीं है। यह एक ऐसी जिम्मेदारी है जो हमें अपने नेताओं के प्रति जवाबदेह बनाती है। अगर हम गलत व्यक्ति को चुनते हैं, तो हमें अगले पांच साल तक उनके निर्णयों का परिणाम भुगतना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, भ्रष्टाचार, नीतिगत असफलताएं, या सामाजिक अस्थिरता जैसी समस्याएं गलत मतदान का परिणाम हो सकती हैं। कई बार लोग वोट देने के लिए समय, पैसा, और मेहनत खर्च करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग लंबी दूरी तय करके मतदान केंद्रों तक जाते हैं। लेकिन अगर मतदान का परिणाम अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होता, तो यह निराशा और अविश्वास को जन्म देता है। इसके अलावा, गलत नेतृत्व के कारण समाज में असमानता, बेरोजगारी, और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं, जो मतदान की गलत पसंद की कीमत होती हैं। ऐसे में हमें मतदान को गुलामी से बचानें की जरूरत है।मतदान को नेताओं की गुलामी बनने से बचाने के लिए हमें जागरूक और विवेकपूर्ण होना होगा। निम्नलिखित कदम मदद कर सकते है,जैसे कि उम्मीदवारों के पिछले कार्यों, उनके दृष्टिकोण, और नीतियों का अध्ययन करें। प्रचार और भावनात्मक भाषणों से प्रभावित होने की बजाय तथ्यों पर ध्यान दें। जाति, धर्म, या क्षेत्रीयता के आधार पर वोट देने से बचें। अपने और समाज के हित को प्राथमिकता दें,मतदान के बाद भी नेताओं के कामकाज पर नजर रखें। लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल वोट देने तक सीमित नहीं है। मतदान के महत्व और इसके प्रभाव को समझाने के लिए समाज में जागरूकता फैलाएं। मतदान कोई गुलामी नहीं है, बल्कि यह हमारी शक्ति और स्वतंत्रता का प्रतीक है। लेकिन इस शक्ति का सही उपयोग तभी संभव है जब हम जागरूक, शिक्षित, और विवेकपूर्ण ढंग से अपने वोट का उपयोग करें। मतदान की कीमत तब सार्थक होती है जब यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाए, न कि नेताओं के गलत इरादों को बढ़ावा दे। आइए, हम अपने मत का उपयोग एक मजबूत, समावेशी, और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए करें, न कि किसी की गुलामी स्वीकार करने के लिए।एक वोट बदल सकता है सब कुछ, बशर्ते वह सोच-समझकर डाला जाए। -इंद्र यादव – स्वतंत्र लेखक,महाराष्ट्रindrayadavrti@gmail.com

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भाजपा सरकार की नाकामी का खामियाज़ा किसान भुगत रहे हैं: कुमारी सैलजा

दी चेतावनी- सरकार ने तुरंत ठोस कदम न उठाए तो कांग्रेस किसानों के हक की लड़ाई लड़ेगी चंडीगढ़, 04 अक्तूबर(ईशान टाइम्स)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि हरियाणा में भाजपा सरकार की नाकामी का खामियाज़ा एक बार फिर मेहनतकश किसानों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 12.79 लाख किसानों ने 73.48 लाख एकड़ धान का पंजीकरण कराया है, लेकिन इनमें से लगभग 30 प्रतिशत किसानों का डेटा पोर्टल पर अब तक मिलान ही नहीं हो पाया। नतीजतन, किसानों को अपनी उपज बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सांसद ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए तो कांग्रेस किसानों के साथ मिलकर सड़कों पर उतरेगी और उनके हक की लड़ाई लड़ेगी। मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि बारिश से भीगा हुआ धान मंडियों में पड़ा सड़ रहा है और उसकी बोली तक नहीं लग रही। किसानों को जबरन अतिरिक्त कटौती झेलनी पड़ रही है। नाम के सत्यापन के नाम पर उनसे 150 से 250 रुपये तक काटे जा रहे हैं और तभी खरीद हो रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसानों के साथ सरासर अन्याय है और भाजपा सरकार की लापरवाही व अव्यवस्थित खरीद प्रणाली का जीता-जागता प्रमाण है। सांसद ने कहा कि किसान खेतों में खून-पसीना बहाकर अन्न पैदा करते हैं, लेकिन उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल रहा। लाखों टन धान मंडियों में खराब हो रहा है और सरकार केवल पोर्टल और कागजी कार्यवाही तक सीमित रह गई है। सरकार की संवेदनहीनता के कारण आज किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सांसद कुमारी सैलजा ने मांग की कि मंडियों में तुरंत प्रभाव से गीले धान की खरीद सुनिश्चित की जाए, किसानों को अवैध कटौती से राहत दी जाए और पंजीकृत किसानों की खरीद में आ रही पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर किया जाए। साथ ही मंडियों में धान की सुरक्षा और भंडारण की ठोस व्यवस्था की जाए। हरियाणा में धान उत्पादक किसानों को कई समस्याओं और मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें फसल का उचित मूल्य न मिलना, सरकारी खरीद में देरी, डिजिटल तराजू और गेट पास जैसी सुविधाओं का अभाव, और प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाला फसल नुकसान शामिल है। किसानों द्वारा इन समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे है और अधिकारी तथा सरकार से त्वरित समाधान की मांग कर रहे है है पर उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। किसानों की मांगें स्पष्ट और जायज़ हैं कि उन्हें उनकी फसल का सही दाम और सही वजन मिलना चाहिए। सांसद ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए तो कांग्रेस किसानों के साथ मिलकर सडक़ों पर उतरेगी और उनके हक़ की लड़ाई लड़ेगी। फोटो कुमारी सैलजा

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मुंबई का “वड़ा पाव” प्रवासी मजदूरों की “महाराजा थाली” है

मुंबई एक ऐसा शहर जो सपनों का पीछा करने वालों का घर है। यहाँ की सड़कों पर भागमभाग, ट्रेनों की रफ्तार और लोगों की जिंदगी का रंग हर कोने में बिखरा हुआ है। इस शहर की आत्मा में बस्ता है उसका वड़ा पाव, जो न सिर्फ़ एक नाश्ता है, बल्कि मुंबई की संस्कृति और प्रवासी श्रमिकों की जिंदगी का एक अनमोल हिस्सा है। लेकिन समय बदल रहा है, और इसके साथ ही मुंबई की गलियों में स्वाद का स्वरूप भी बदलता नजर आ रहा है। मुंबई की सड़कों पर चलते हुए अगर आपको भूख लगे, तो वड़ा पाव से बेहतर और सस्ता विकल्प शायद ही मिले। यह मसालेदार आलू का वड़ा, जिसे नरम पाव में लपेटकर लाल चटनी और हरी मिर्च के साथ परोसा जाता है, हर प्रवासी श्रमिक की थाली का हिस्सा रहा है। चाहे वह दिहाड़ी मजदूर हो,रिक्शावाला हो, या फिर ऑफिस जाने वाला कर्मचारी, वड़ा पाव ने सबके पेट और दिल को जीता है। जयराम वालनकर, जिन्हें लोग प्यार से “वड़ा पाव वाले मामा” कहते हैं, पिछले 25 सालों से मुंबई में वड़ा पाव बेच रहे हैं। वह बताते हैं सुबह-शाम मजदूर भाई लोग 10-15 रुपये में पेट भर लेते थे। वड़ा पाव उनका भोजन था, उनका साथी था। लेकिन अब समय बदल रहा है। जयराम मामा की बातों में एक सच्चाई छिपी है। आज की युवा पीढ़ी और नई जनरेशन के प्रवासी श्रमिकों की पसंद बदल रही है। मुंबई की गलियों में अब वड़ा पाव के साथ-साथ पिज्जा, बर्गर और चायनीज खाने की खुशबू भी तैरने लगी है। मॉल्स, फूड कोर्ट्स और फास्ट-फूड चेन्स ने युवाओं को अपनी ओर खींच लिया है। जयराम मामा कहते हैं, “अब लोग वड़ा पाव के साथ-साथ नूडल्स, मंचूरियन और पिज्जा माँगते हैं। मेरे कुछ ग्राहक तो कहते हैं, ‘मामा, कुछ नया लाओ! यह बदलाव सिर्फ़ स्वाद का नहीं, बल्कि जीवनशैली का एक हिसा भी है। पहले जहाँ प्रवासी श्रमिक अपनी मेहनत की कमाई से सस्ता और पेट भरने वाला खाना ढूँढते थे, वहीं अब नई पीढ़ी के श्रमिक, जो स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के साथ बड़े हुए हैं, वैश्विक स्वाद का अनुभव चाहते हैं। पिज्जा और बर्गर उनके लिए सिर्फ़ खाना नहीं, बल्कि एक स्टेटस और आधुनिकता का प्रतीक बन गया है। हालाँकि, इस बदलते स्वाद का असर प्रवासी श्रमिकों की जेब पर भी पड़ रहा है। वड़ा पाव, जो 10-15 रुपये में मिल जाता है, अब भी उनके लिए सबसे किफायती विकल्प है। वहीं, एक पिज्जा या बर्गर की कीमत 100 रुपये से शुरू होती है, जो कई श्रमिकों के लिए रोज़मर्रा का खर्च नहीं हो सकता। जयराम मामा कहते हैं, “कई मजदूर भाई मेरे पास आते हैं और कहते हैं, ‘मामा, वड़ा पाव ही दे दो, बाकी चीज़ें तो सपना हैं। इसके बावजूद, कुछ युवा प्रवासी श्रमिक, जो बेहतर आय और नौकरियों के साथ शहर में आए हैं, फास्ट फूड को अपनाने लगे हैं। यह उनके लिए सिर्फ़ खाना नहीं, बल्कि मुंबई की चकाचौंध भरी ज़िंदगी का हिस्सा बनने का एक तरीका है। हमनें पूछा क्या वड़ा पाव अपनी जगह खो रहा है? जयराम मामा मुस्कुराते हुए कहते हैं, “नहीं, वड़ा पाव तो मुंबई की जान है। लोग पिज्जा खाएँ, बर्गर खाएँ, लेकिन जब पेट और जेब दोनों को संतुष्ट करना हो, तो वड़ा पाव ही याद आता है।” वह यह भी मानते हैं कि बदलते समय के साथ उन्हें भी कुछ नया करना होगा। अब वह अपनी गुमटी में वड़ा पाव के साथ-साथ चायनीज वड़ा और पाव-भाजी जैसे नए व्यंजन भी शामिल करने की सोच रहे हैं।मुंबई का वड़ा पाव सिर्फ़ एक खाना नहीं, बल्कि इस शहर की विविधता, मेहनत और सपनों का प्रतीक है। यह प्रवासी श्रमिकों की थाली का आधार रहा है और रहेगा। लेकिन बदलते समय और नई पीढ़ी की पसंद ने यह दिखा दिया है कि मुंबई की गलियाँ अब सिर्फ़ वड़ा पाव की खुशबू से नहीं, बल्कि पिज्जा, बर्गर और चायनीज के स्वाद से भी महक रही हैं। जयराम मामा जैसे लोग इस बदलाव को अपनाने को तैयार हैं, लेकिन उनका मानना है कि वड़ा पाव का स्थान कोई नहीं ले सकता। आखिर, यह मुंबई की धड़कन है, जो हर प्रवासी के दिल में बसती है।

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वन औषधीय पौधारोपण कार्यक्रम किया आरोग्यभारती चंडीगढ़ ने

BREAKING NEWS चंडीगढ़ (ईशान टाइम्स )।आरोग्य भारती चंडीगढ़ महानगर द्वारा वन औषधि वाटिका पौधारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया किया गया, कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन समाज में वन औषधि पौधों ,वृक्षों का प्रचार प्रसार व इनके अध्यात्मिक धार्मिक व वैज्ञानिक गुणों को हर भारतीय के घर तक पहुंचा जाये। आज लोग इन्हें खर पतवार समझकर काट रहे है, प्राचीन समय से औषधीय विज्ञान भारतीय संस्कृति की धरोहर रही है ।इसलिए आरोग्य भारती पूरे भारत वर्ष में इस धरोहर को संजोय रखने के लिए प्रयासरत है। हर्बल पौधों में तुलसी, इल्लाची, ब्रह्मी, लैमन ग्रास,अश्वगंधा, शतावरी व लाजवंती और पीपल,नीम व वरगद की त्रिवेणी लगाई। कार्यक्रम में आरोग्य भारती के राजस्थान एवं उत्तर क्षेत्र संयोजक, राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य व आरोग्य मित्र योजना के अखिल भारतीय प्रमुख संजीवन कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे । चंडीगढ़ म्युनिस्पल कॉरपोरेशन के कमिश्नर अमित कुमार मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहे । प्रितपाल सिंह एक्सियन आरोग्य भारती चंडीगढ़ महानगर के अध्यक्ष डॉक्टर संतोष कुमार व सचिव प्रोफेसर शिवानी शर्मा व उपाध्यक्ष अधिवक्ता करमजीत चौधरी , पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर सुशील कुमार तौमर, प्रोफेसर श्री मति अनुपम बाहरी संयोजिका पंजाब विश्वविद्यालय, सुरिंदर पाल चौहान चंडीगढ़ व हरियाणा प्रांत प्रचार प्रसार व सम्पर्क प्रमुख, कार्यालय प्रमुख जगत राम , अमित दीवान संयोजक पीजीआईएमईआर चण्डीगढ़ कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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नकली एवं मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी : आरती सिंह राव

दूध से बने उत्पाद बेचने वालों की जांच करने के दिए निर्देश चंडीगढ़, 4 अक्तूबर(संजय राय) – हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री श्रीमती आरती सिंह राव ने स्पष्ट कहा है कि त्योहारी सीजन में आमजन को शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि नकली एवं मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि त्योहारों के अवसर पर दूध, दूध से बने उत्पादों तथा मिठाइयों की मांग में अचानक वृद्धि हो जाती है। ऐसे में कुछ असामाजिक तत्व एवं व्यापारी मिलावटखोरी करने से भी बाज नहीं आते, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से मिठाई की दुकानों, डेयरियों, पैक्ड मिल्क प्रोडक्ट्स बनाने वाली फैक्ट्रियों एवं अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों पर नजर रखी जाएगी। अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे नियमित अंतराल पर जांच करें, संदिग्ध खाद्य सामग्री के नमूने भरें और रिपोर्ट आने पर दोषी पाए जाने वाले विक्रेताओं को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि आमजन का स्वास्थ्य और सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि यदि कहीं मिलावटी खाद्य पदार्थ की बिक्री होती दिखाई दे तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचना दें। इस अवसर पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त ने जानकारी दी कि विभाग द्वारा वर्ष 2025 में अब तक व्यापक स्तर पर निरीक्षण किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी 2025 से 31 अगस्त 2025 तक कुल 1289 नमूने लिए गए, जिनमें से 987 नमूने सही पाए गए जबकि 302 नमूने फेल पाए गए। इन फेल नमूनों पर संबंधित दुकानदारों एवं विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। आयुक्त ने यह भी कहा कि नियमित रूप से चलाए जा रहे इस अभियान के चलते प्रदेश में मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर कड़ा शिकंजा कसा जा रहा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि किसी भी दुकानदार या खाद्य व्यवसायी को स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

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पारदर्शिता व जनभागीदारी की दिशा में हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया ‘म्हारी सड़क मोबाइल एप’

डिजिटल एप से नागरिक सीधे सरकार तक पहुँचा सकेंगे सड़क से संबंधित समस्याएं ‘म्हारी सड़क ऐप’में जी.आई.एस आधारित डिजिटल मैपिंग से सड़क की स्थिति पर होगी सीधी नजर पंचकूला, 4 अक्टूबर (संजय राय)– हरियाणा में ढांचागत विकास को नई गति देने के लिए पारदर्शिता व जनभागीदारी की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आज म्हारी सड़क मोबाइल एप्लीकेशन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐप नागरिक और सरकार के बीच सेतु का काम करेगा। सरकार का लक्ष्य प्रदेश में बेहतर सड़कों का जाल बिछाकर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों को मजबूत आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सड़कें विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं और इस दिशा में हरियाणा सरकार दृढ़ संकल्पित है। पंचकूला में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐप नागरिकों को सड़कों की स्थिति की जानकारी सीधे सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है। इस ऐप के माध्यम से नागरिक सड़कों पर गड्ढे, टूटी सड़क या सड़क पर जलभराव की समस्या की लोकेशन के साथ शिकायत दर्ज कर सकेंगे। संबंधित विभाग को तत्काल सूचना मिलते ही सड़क के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाएगा। इस ऐप के माध्यम से शिकायत की टाइम बाउंड मॉनिटरिंग होगी। म्हारी सड़क ऐप में जी.आई.एस आधारित डिजिटल मैपिंग से सड़क की स्थिति पर होगी सीधी नजर उन्होंने कहा कि हरियाणा के आधारभूत ढांचे को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है और पारदर्शिता, जवाबदेही एवं जनभागीदारी को अपनी प्राथमिकता बना रही है। उन्होंने कहा कि हमने एक नया हरियाणा बनाने का संकल्प लिया है, एक ऐसा हरियाणा जहां हर नागरिक को बेहतर जीवन मिले, जहां विकास की गति कभी न थमे और विकास की गति के लिए सबसे पहली जरूरत है अच्छी सड़कें। सड़कें किसी भी राज्य की जीवन रेखा होती हैं। ये न सिर्फ लोगों को जोड़ती हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी गति देती हैं। उन्होंने कहा कि म्हारी सड़क ऐप में जी.आई.एस-आधारित तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे राज्य की सभी सड़कों का डिजिटल मानचित्रण संभव हुआ है। इससे नागरिकों को सड़कों की स्थिति की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। प्रादेशिक सड़क उत्थान परियोजना बनेगी विकसित हरियाणा का आधारस्तंभ नायब सिंह सैनी ने कहा कि गत 21 सितम्बर को हिसार में ‘प्रादेशिक सड़क उत्थान परियोजना’ का शुभारंभ किया था। यह परियोजना आने वाले वर्षों में ‘विकसित भारत-विकसित हरियाणा’ के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। इस परियोजना के तहत चालू वित्त वर्ष में 4,827 करोड़ रुपये की लागत से 9,410 किलोमीटर लंबी 4,227 सड़कों की मरम्मत एवं उत्थान का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि ‘यदि देश को गति देनी है, तो सड़कों को मजबूती देनी होगी। सड़कें सिर्फ यात्रा का साधन नहीं होतीं, बल्कि यह अर्थव्यवस्था की धमनियां होती हैं।’ इसी सोच के तहत, पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में भारत ने सड़क अवसंरचना में अभूतपूर्व क्रांति देखी है। आज, देशभर में डिफेंस कॉरिडोर से लेकर फ्रेट कॉरिडोर तक, भारतमाला से सागरमाला तक, रोडवेज, रेलवेज और एयरवेज कनेक्टिविटी का जाल पूरे देश में मिशन मोड पर काम कर रहे हैं। साथ ही, पी.एम. गतिशक्ति के माध्यम से आधारभूत परियोजनाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश में पिछले 11 वर्षों में 28,651 करोड़ रुपये की लागत से 43,703 किलोमीटर लंबी सड़कों का सुधार किया है। इसके साथ ही, 2,534 करोड़ रुपये की लागत से 2,417 किलोमीटर लंबी नई सड़कों का निर्माण भी किया है। इनके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रदेश में 1, 077 करोड़ रुपये की लागत से 2,432 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। हरियाणा में 21 नये राष्ट्रीय राजमार्ग स्वीकृत किए हैं। इनमें से 12 राजमार्ग बन चुके हैं। प्रदेश में पिछले 11 वर्षों में 28,582 करोड़ रुपये की लागत से 1,719 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है। जबकि, 2014 से पहले की सरकार के 10 साल के शासनकाल में 1,713 करोड़ रुपये की लागत से 451 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए गए। इतना ही नहीं, यातायात को सुगम बनाने के लिए 27 टोल टैक्स बैरियर हटाने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिक टेक्नोलॉजी से जुड़े, उनकी भागीदारी इस ऐप को सफल बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी। हर स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी में इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘हरियाणा ए.आई. मिशन’ के तहत ई-गवर्नेस को बढ़ावा दे रही है। इस मिशन के तहत गुरुग्राम और पंचकूला में ए.आई. हब स्थापित किए जाएंगे, जहां 50 हजार से अधिक युवाओं को उन्नत तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस डिजिटल पहल से न केवल सड़कें बेहतर होंगी, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत होगा – लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि किसी भी प्रदेश के विकास का आंकलन उसकी सड़कों की स्थिति से लगाया जा सकता है और हरियाणा लगातार अपने सड़क तंत्र को मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग प्रदेश में सड़कों की रिपेयर, नवनिर्माण, सुदृढ़ीकरण और पैच-वर्क के कार्य को युद्ध स्तर पर कररहा है। उन्होंने कहा कि गत दिनों ही मुख्यमंत्री द्वारा प्रादेशिक सड़क उत्थान परियोजना का शुभारंभ किया गया। ये परियोजना विकसित हरियाणा के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल यातायात का साधन नहीं हैं, बल्कि यह गांवों और शहरों को जोड़ने के साथ-साथ राज्य के समग्र विकास की धुरी भी हैं। रणबीर गंगवा ने कहा कि नागरिक फोटो के साथ सड़क संबंधित शिकायतें इस एप पर अपलोड कर सकते हैं। इस डिजिटल सिस्टम में जेई से लेकर विभागाध्यक्ष तक सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की गई है। शिकायत प्राप्त होने के बाद निर्धारित समय में संबंधित अधिकारी सड़क सुधार कार्य पूरा करने के बाद की फोटो भी एप पर अपलोड करेंगे और शिकायतकर्ता को सूचित किया जाएगा। इस पहल से न केवल सड़कें बेहतर होंगी, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत होगा। इस अवसर पर

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