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ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने आईपीएस वाई पुरन कुमार की दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की

BREAKING NEWS विज ने चंडीगढ़ स्थित निवास पहुंच कर परिजनों को ढांडस बंधाया,परिजनों के दुख में शामिल हुए चंडीगढ़, 11 अक्टूबर(संजय राय ,ईशान टाइम्स)। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने आज पर आईपीएस अधिकारी वाई पुरन कुमार की दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके चंडीगढ़ स्थित निवास पहुंच कर परिजनों को ढांडस बंधाया। इस मौके पर उन्होंने वाई पुरन कुमार के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। इसके पश्चात, मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि वे आज यहां परिजनों के दुख में शामिल होने के लिए आए है। उल्लेखनीय है कि श्री विज ने वाई पुरन कुमार की पत्नी आईएएस अधिकारी अमनित पी कुमार से मुलाकात कर सांत्वना दी। इसके अलावा, श्री विज आज अमनित पी कुमार के भाई, दोनों बेटियों और वाई पुरन कुमार के भाईयों सहित अन्य परिजनों से भी मिले और उनके दुख में शामिल हुए।……..

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78वें वार्षिक निरंकारी संत समागम की तैयारियाँ व्यापक स्तर पर

चंडीगढ़/पंचकुला/मोहाली, 10 अक्टूबर, (संजय राय ,ईशान टाइम्स)।- संत निरंकारी मिशन का 78वां वार्षिक संत समागम, पूर्ववर्ती वर्षों की दिव्यता और गरिमा के अनुरूप, इस वर्ष भी 31 अक्टूबर से 3 नवम्बर, 2025 तक समालखा (हरियाणा) स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर अत्यंत भव्यता, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजित होने जा रहा है। यह दिव्य आयोजन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा, जिसकी शुभ सूचना ने समस्त श्रद्धालु भक्तों के हृदयों में अपार हर्ष और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया है। यह जानकारी चंडीगढ़ ज़ोन के ज़ोनल इंचार्ज श्री ओ पी निरंकारी जी ने दी और उन्होने बताया की इस समागम में सेवा के लिए ट्राईसिटी से सकड़ों सेवादल के सदस्य गए हुए है। ‘आत्ममंथन’ विषय पर आधारित इस वर्ष का वार्षिक संत समागम अपने आप में एक अद्भुत एवं अनुपम आध्यात्मिक यात्रा है, जहां श्रद्धालु ब्रह्मज्ञान की आंतरिक ज्योति में सेवा, सिमरन और सत्संग करते हुए आनंद और प्रेमाभक्ति का अनुभव प्राप्त करेंगे। इस दिव्य उत्सव की तैयारियां अत्यंत श्रद्धा, लगन एवं निःस्वार्थ भावना से की जा रही हैं। श्रद्धालु भक्त, चाहे वे वृद्ध हों या युवा, पुरुष हों या महिलाएं, हर पृष्ठभूमि के भक्त सेवा में पूर्ण रूप से रत हैं। प्रातः काल की प्रथम किरण से लेकर संध्या के अंतिम प्रकाश तक, हर ओर भक्ति भाव से समर्पित सेवा का अपूर्व आलोक दिखाई देता है। कोई मिट्टी के तसले ढो रहा है, कोई शामियाने गाढ़ रहा है, तो कोई सफाई, जल प्रबंधन या भोजन व्यवस्था में जुटा है। 78वें वार्षिक संत समागम की भव्यता को प्रकट करता हुआ मुख्य गेट भी आकार लेने लगा है – एक ऐसा प्रवेश-द्वार, जो प्रेम, समरसता और आत्मिक एकत्व की यात्रा का प्रतीक बनेगा।’ यह सब कुछ समर्पण की उस भावना का प्रमाण है, जो सतगुरु के ज्ञान से उत्पन्न होती है। जिस प्रकार कहा भी गया है कि ‘जहाँ सेवा में समर्पण जुड़ जाता है, वहीं हर क्षण उत्सव बन जाता है।’ सेवा भाव की गरिमा को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि इन सेवकों के मुखमंडलों पर कोई थकान नहीं, अपितु आनंद और उल्लास की आभा झलक रही है। यह वही दिव्य आनंद है, जिसे केवल सतगुरु की छत्रछाया में रहकर, सेवा और भक्ति के माध्यम से अनुभव किया जा सकता है। सतगुरु माता जी भी अपने प्रवचनों में बारंबार यही प्रेरणा देती हैं कि ‘तन पवित्र सेवा किये, धन पवित्र दिये दान, मन पवित्र हरि भजन सों, त्रिबिध होई कल्याण।‘ देश के कोने-कोने से ही नहीं, अपितु विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु भक्त इस संत समागम में सम्मिलित होने के लिए पधारते हैं। उनके स्वागत एवं सुविधाओं हेतु सभी आवश्यक प्रबंध अत्यंत सुचारू रूप से किए जा रहे हैं। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और हवाई अड्डों पर निरंकारी सेवादल के अनुशासित, मर्यादित एवं सुसज्जित सेवादार अपनी नीली और खाकी वर्दियों में श्रद्धालुओं का हार्दिक अभिनंदन करते हुए उन्हें उनके निर्धारित निवास स्थलों तक ससम्मान पहुँचाने हेतु सतत तत्पर रहेंगे। निसंदेह यह समागम केवल एक साधारण आयोजन नहीं, अपितु मानवता के उत्थान और समरसता के जागरण का एक अनुपम पर्व है, जहाँ विविध संस्कृतियों, भाषाओं और परिवेशों से आए श्रद्धालु भक्त ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को आत्मसात करते हुए, सतगुरु की अमृतवाणी से अपनी अंतरात्मा को जागृत करते हैं। इस पावन अवसर पर हर उस सज्जन, भाई व बहन का हृदय से स्वागत है, जो प्रेम, शांति, समरसता के इस दिव्य महायज्ञ का हिस्सा बनना चाहती है।

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हरियाणा के IPS सुसाइड केस में SIT का गठन

चंडीगढ़ (संजय राय, ईशान टाइम्स)।चंडीगढ़ पुलिस के IG पुष्पेंद्र के नेतृत्व में 6 सदस्यी टीम बनाई, जिसमें SSP कंवरदीप कौर भी शामिल हैं । #Chandigarh Police #Constitutes SIT in IPS Y #Puran Kumar Suicide Case Chandigarh Police #Constitutes SIT in IPS Y #Puran Kumar Suicide हरियाणा के ADGP रैंक के सीनियर आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार के सुसाइड केस में कार्रवाई शुरू हो चुकी है। चंडीगढ़ पुलिस ने केस को लेकर 6 सदस्यी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कर दिया है। चंडीगढ़ IG पुष्पेंद्र SIT का नेतृत्व करेंगे। वहीं टीम में 5 अन्य सदस्यों में SSP कंवरदीप कौर, SP सिटी केएम प्रियंका, DSP चरणजीत सिंह विर्क, SDPO साउथ गुरजीत कौर और SHO सेक्टर 11 वेस्ट इंस्पेक्टर जयवीर राणा को शामिल किया गया है। चंडीगढ़ पुलिस की यह SIT टीम ही अब IPS सुसाइड केस में हर तरह से जांच को आगे बढ़ाएगी। गौरतलब है की IPS वाई पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में हरियाणा के जिन आईपीएस और आईएएस अफसरों के नाम छोड़े हैं, उनके खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस ने गुरुवार देर रात FIR दर्ज कर ली थी। हालांकि चंडीगढ़ पुलिस की दर्ज FIR में IAS अमनीत पी कुमार ने आपत्ति जताई है और SSP कंवरदीप कौर को पत्र लिखकर इसमें संसोधन की मांग की है। अमनीत पी कुमार का कहना है कि FIR में स्पष्ट रूप से आरोपियों के नामों का उल्लेख नहीं किया गया है। FIR में आरोपियों के कॉलम में सुसाइड नोट में शामिल अफसरों के नाम नहीं लिखे गए हैं। इसके अलावा SC-ST एक्ट के तहत जो धाराएं लगाई जानी चाहिए थीं वो नहीं नहीं लगाई गईं हैं। अमनीत पी कुमार ने चंडीगढ़ पुलिस से निष्पक्ष और न्यायपूर्ण ढंग से कार्रवाई की मांग की है। बता दें कि अभी तक वाई पूरन कुमार का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। वहीं वाई पूरन कुमार का सुसाइड केस अब पूरे देश में गरमा गया है। इस केस को लेकर दलित सियासत भी गर्म नजर आ रही है। फिलहाल इस सुसाइड (Haryana IPS Y Puran Kumar) से हरियाणा के शासकीय और प्रशासनिक प्रणाली सवालों के घेरे में है। इस पूरे घटनाक्रम ने हरियाणा की ब्यूरोक्रेशी को बड़े स्टार पर प्रभावित किया है। मेरे पति को प्रताड़ित और अपमानित किया वाई पूरन कुमार की IAS पत्नी अमनीत पी कुमार का कहना है कि हरियाणा के उच्च पदस्थ अधिकारियों ने मेरे पति को न सिर्फ मानसिक प्रताड़ित किया बल्कि अनुसूचित जाति से आने के चलते सार्वजनिक और जातिगत रूप से अपमानित भी किया। उन्होंने अपनी पुलिस सेवा में हमेशा ईमानदारी और निष्ठा से काम किया और खुद को बेदाग रखा। लेकिन उन्हें साजिश रचकर झूठे केसों में फंसाने की कोशिश की गई। अमनीत पी कुमार ने कहा कि मेरे पति को मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया गया कि उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। एक पत्नी के रूप में मेरी आत्मा न्याय के लिए रो रही है। मेरे पति और हमारे परिवार को न्याय मिलना चाहिए। वाई पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर को सुसाइड किया आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार (Haryana IPS Y Puran Kumar) ने 7 अक्टूबर को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास सुसाइड किया था। IPS वाई पूरन कुमार ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से खुद को गोली मारी। जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं उन्होंने जब यह कदम उठाया तो उस समय में घर में पत्नी की मौजूदगी नहीं थी. दरअसल, वाई पूरन कुमार की आईएएस पत्नी अमनीत कुमार उस बीच मुख्यमंत्री नायब सैनी के साथ जापान के दौरे पर गई हुईं थीं। सुसाइड के बाद वाई पूरन कुमार के सेक्टर-11 स्थित आवास से 8 पन्नों का फाइनल नोट मिला था। चंडीगढ़ पुलिस और सीएफएसएल की टीम ने कई सबूत एकत्रित किए। 2001 बैच के IPS अफसर थे वाई पूरन कुमार वाई पूरन कुमार हरियाणा कैडर 2001 बैच के सीनियर IPS अफसर थे। पिछले महीने ही उन्हें ADGP रोहतक रेंज से ट्रांसफर कर IG पीटीसी सुनारिया (रोहतक) नियुक्त किया गया था। वाई पूरन कुमार इससे पहले रोहतक रेंज के IG भी रहे हैं। वह IG HAP मधुबन और IG होम गार्ड्स भी रहे। मसलन वाई पूरन कुमार ने अपने आईपीएस करियर में हरियाणा पुलिस के कई अहम और बड़े पदों पर काम किया। इस दौरान वह (IPS Y Puran Kumar) हरियाणा की अफसरशाही में काफी चर्चा में बने रहे।

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भूमिहार ब्राह्मण समाज परिवार मिलन समारोह होगा 12अक्टूबर को चंडीगढ़ में

चंडीगढ़(ईशान राय,ईशान टाइम्स)। ट्राई सीटी चंडीगढ़ में भूमिहार ब्राह्मण समाज परिवार मिलन समारोह 12अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है ।जिसमें अनंत विभूषित जगतगुरु शंकराचार्य राजगुरु मठ काशी पीठाधीश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती जी मुख्य अतिथि हैं । वे राष्ट्र निर्माण में भूमिहार समाज की भूमिका विषय पर अपना वक्तव्य देंगे । इस समारोह में समाज के बहुत से उद्योगपति, उच्च पदों पर आसीन अधिकारी ,प्रोफेसर, पत्रकार मौजूद रहेंगे ।इस कार्यक्रम के आयोजक भूमिहार सेवा समिति चंडीगढ़ (रजिस्टर्ड) है जिसके चेयरमैन राजनरायन पांडे ,अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण पांडे ,महासचिव अरविंद कुमार सिंह और प्रवक्ता विनय सिंह है । स्वागत समिति में मुकेश राय, शशिकांत शर्मा,संतोष सिंह , राजकुमार सिंह, नवलीन सिंह,धर्मेंद्रकुमार,बलबीर शर्मा ने समाज के सभी जनमानस को अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम स्थल सुबह 10 बजे दीप प्रज्वलित कर शुरू होगा। स्थान *देश सेवक भवन सेक्टर 29 डी चंडीगढ़ में पहुंचने की अपील की है ।

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100 टीबी से ग्रस्त मरीज़ो के लिए विश्वास फाउंडेशन ने डोनेट की प्रोटीनयुक्त पोषक डाइट

पंचकूला 10 अक्टूबर ( संजय राय,ईशान टाइम्स)। स्टेट टीबी ऑफिसर राजेश राजू व सीएमओ मुक्ता कुमार की अध्यक्षता में विश्वास फाउंडेशन द्वारा गुरुदेव श्री विश्वास जी के आशीर्वाद से 100 टीबी से ग्रस्त मरीज़ों के लिए प्रोटीन युक्त पोषण डाइट दी गई। डिटीओ संदीप छाबड़ा द्वारा सभी सदस्यों का आभार जताते हुए टीबी मुक्त अभियान के लिए एक सराहनीय कदम बताया।विश्वास फाउंडेशन की अध्यक्ष साध्वी नीलिमा विश्वास ने बताया कि यह पोषण डाइट के 16 पैकेट पीएससी ओल्ड पंचकूला, गाँव नाड़ा की डिस्पेंसरी में 7 पैकेट दिए गए, यूडी 19 में 30 पैकेट, गवर्नमेंट डिस्पेंसरी 12 ए में 12 पैकेट व 15 पोषण किट पॉलीक्लिनिक 26 में मरीजों के लिए दिए गए। वहीँ गवर्नमेंट डिस्पेंसरी 8 में 6 पैकेट, जीडी 21 में 8 पैकेट व सेक्टर 6 टीबी हट में 6 पैकेट दिए गए। इस अवसर पर विश्वास फाउंडेशन से ऋषि सरल विश्वास, रणधीर सिंह, मदन नागपाल व टीबी विभाग से सतीश वत्स मौजूद रहे।उन्होंने बताया कि इस पैक्ड किट में मरीजों के लिए 1 किलो सोया दाल, 1 किलो सोया आटा, 500 ग्राम सोयाबीन बड़ी, 500 ग्राम भूना चना, 500 ग्राम गुड़ व 1 डिब्बा प्रोटीन पाउडर होता है। संस्था द्वारा जून 2022 से मरीजों को डाइट देनी शुरू की गई थी और यह प्रक्रिया आगे भी इसी तरह जारी रहेगी। संस्था ने टीबी के मरीजों को अतिरिक्त पोषण, सोशल, मोरल सपोर्ट व टीबी मुक्त भारत के लिए कम्युनिटी सपोर्ट देने का काम किया है।

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पत्रकार समीर पाल का निधन हुआ ,एन यू जे आई ने जताया शोक

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2025(ईशान टाइम्स) दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार और हिंदुस्तान टाइम्स के पूर्व वरिष्ठ सदस्य समीर पाल का 90 वर्ष की आयु में आज निधन हो गया। वे लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन से दिल्ली-एनसीआर के पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। समीर पाल न केवल एक सधे हुए पत्रकार थे बल्कि उन्होंने पत्रकारिता को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। अंग्रेज़ी में परास्नातक डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की थी, लेकिन जल्द ही उन्होंने पत्रकारिता को जीवन का उद्देश्य बना लिया। हिंदुस्तान टाइम्स में कई दशकों तक सेवा देने के दौरान उन्होंने अपने लेखन और संपादकीय दृष्टिकोण से पत्रकारिता के उच्च मानक स्थापित किए। वे National Union of Journalists (India) [NUJ-I] के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और हमेशा नैतिक पत्रकारिता के हिमायती रहे। समीर पाल अपने सहयोगियों के बीच एक अनुशासित, संवेदनशील और प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। पत्रकारिता जगत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनकी पत्नी, जो Indian Council for Cultural Relations (ICCR) में वरिष्ठ अधिकारी थीं, पहले ही उनका साथ छोड़ चुकी हैं। समीर पाल अपने पीछे एक पुत्र, परिवारजन और प्रियजनों को छोड़ गए हैं। राष्ट्रीय पत्रकार संघ (NUJ-I) ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। संघ ने उन्हें “नैतिक पत्रकारिता के पथ प्रदर्शक और संगठन के प्रेरक स्तंभ” के रूप में श्रद्धांजलि दी है। NUJ-I के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने अपने शोक संदेश में कहा, “समीर पाल का निधन न केवल NUJ-I परिवार के लिए बल्कि संपूर्ण मीडिया जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने पत्रकारिता में सत्य, सादगी और नैतिकता को सर्वोपरि रखा। उनके मार्गदर्शन और विचार हमें हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।” संघ की ओर से शिवाजी सरकार (अध्यक्ष), उप्पला लक्ष्मण (राष्ट्रीय सलाहकार),संजय राय (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष) ,धर्मपाल धनखड़ (सचिव)और रवि मीनाक्षी सुंदरम (महासचिव) सहित सभी पदाधिकारियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। “ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिवार को इस दुख की घड़ी में शक्ति दे। समीर पाल (1935–2025) — एक शिक्षक, एक पत्रकार, एक मार्गदर्शक, और सच्चे अर्थों में पत्रकारिता के कर्मयोगी थे

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उत्तर प्रदेश की योगी पुलिस रक्षक से भक्षक बनने की दुःखद कहानी

इंद्र यादव ,ईशान टाइम्स भारतीय समाज में एक पुरानी कहावत है – “सरकार के रक्षक जब बने भक्षक तब जनता कहां जाए?” यह कहावत आज उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था पर बिल्कुल फिट बैठती है। पुलिस, जिसे जनता की सुरक्षा और न्याय की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वही आज शोषण, हत्या और लूट का माध्यम बन रही है। इससे न केवल राज्य की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय पुलिस की साख पर सवाल उठ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा किए जा रहे इन कृत्यों से समाज को क्या संदेश मिल रहा है? क्या यह संदेश है कि कानून कमजोरों के लिए जंजीर है और ताकतवरों के लिए हथिउत्तर प्रदेश, भारत का सबसे बड़ा राज्य, जहां आबादी करोड़ों में है, वहां पुलिस की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। लेकिन हाल के वर्षों में यहां पुलिस की कार्रवाइयों में शोषण और हिंसा के मामले बढ़ते जा रहे हैं। मिसाल के तौर पर, मुजफ्फरनगर में एक 13 वर्षीय नाबालिग लड़के को पुलिस हिरासत में इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। लड़के का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने मस्जिद के माइक से एक घोषणा की, जिसे पुलिस ने “संवेदनशील” माना।लड़के के पिता का कहना है कि पुलिस अब शिकायत करने पर उन्हें धमका रही है। इसी तरह, एक अन्य घटना में अमेरिकी मुस्लिम नेटवर्क ने उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के खिलाफ पुलिस की गिरफ्तारियों और हिंसा की निंदा की है, जहां “आई लव प्रॉफेट मुहम्मद” जैसे पोस्टर लगाने पर लोगों को पीटा गया। ये घटनाएं बताती हैं कि पुलिस अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित हो रही है।पुलिस की हिंसा सिर्फ अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है। दलितों और पिछड़ों के खिलाफ अत्याचारों के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। एनसीआरबी के डेटा के अनुसार, उत्तर प्रदेश महिलाओं और दलितों के खिलाफ अपराधों में शीर्ष पर है, जहां पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। हाल ही में जौनपुर में एक गर्भवती मुस्लिम महिला को इलाज से वंचित किया गया, और एक दलित युवक की लिंचिंग हुई।गाजियाबाद में पुलिस ने पत्रकारों को गालियां दीं और उन्हें “दलाल” कहा, जो प्रेस की आजादी पर हमला है। प्रयागराज के शंभूनाथ मिश्रा के घर में पुलिस ने कथित रूप से घुसकर महिलाओं को पीटा, फर्जी मुकदमा दर्ज किया, और घायल महिलाओं (जिनमें दूधमुंहे बच्चों की मांएं शामिल हैं) को बिना मेडिकल जांच के जेल भेज दिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ब्राह्मणों के खिलाफ पक्षपाती है।फर्जी एनकाउंटरों की बात करें तो, राज्य में 190 से ज्यादा पुलिस एनकाउंटर मौतें हुई हैं, ज्यादातर गरीब और पिछड़े समुदायों से। फिरोजाबाद में दो करोड़ की लूट के आरोपी को एनकाउंटर में मार गिराया गया,जबकि मेरठ में हत्या के आरोपी को गोली मारकर गिरफ्तार किया गया।ये एनकाउंटर न्याय की जगह बदला लेने जैसे लगते हैं, जो पुलिस की छवि को और खराब कर रहे हैं। ये घटनाएं समाज को ये संदेश दे रही हैं कि कानून सबके लिए समान नहीं है। अमीर और ताकतवर लोग पुलिस का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर सकते हैं, जबकि गरीब और कमजोर लोग इसका शिकार बनते हैं। अलीगढ़ में एक हिंदू महासभा की नेता पर हत्या का आरोप लगा, लेकिन पुलिस की जांच में देरी हो रही है।बाराबंकी में एक भीम आर्मी कार्यकर्ता ने पुलिस की अवैध मांग से तंग आकर आत्महत्या कर ली। ये मामले बताते हैं कि पुलिस भ्रष्टाचार में डूबी हुई है, जहां रिश्वत और धमकी आम है। समाज में इससे डर का माहौल बनता है – लोग पुलिस से मदद मांगने की बजाय डरते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर,मानवाधिकार संगठन जैसे एमनेस्टी और यूएन ह्यूमन राइट्स ने उत्तर प्रदेश में फर्जी एनकाउंटर और हिरासत में मौतों की जांच की मांग की है।इससे भारत की छवि एक लोकतांत्रिक देश के रूप में खराब हो रही है। पिछले शासनकालों में भी उत्तर प्रदेश में अपराध और पुलिस भ्रष्टाचार था, लेकिन वर्तमान में “सर्वश्रेष्ठ कानून व्यवस्था” का दावा किया जाता है, जबकि जमीनी हकीकत जंगल राज जैसी है। महिलाओं के खिलाफ अपराध 15% बढ़े हैं, और दलितों के खिलाफ लाख से ज्यादा मामले दर्ज हैं। कानपुर में एक छात्र को बाइक जब्त करने पर पुलिस ने बुरी तरह पीटा,जबकि रायबरेली में सादे कपड़ों में पुलिस ने भाई-बहन को पीटा और गिरफ्तार किया। ये घटनाएं बताती हैं कि पुलिस की मनमानी बढ़ रही है, जो समाज में असमानता और अन्याय को बढ़ावा दे रही है।समाज को मिल रहा संदेश स्पष्ट है की अगर पुलिस ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद कहां से करें? इससे युवा पीढ़ी में कानून के प्रति अविश्वास बढ़ता है, और अपराधी तत्व मजबूत होते हैं। जरूरत है पुलिस सुधार की – पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवाधिकारों का सम्मान। जब तक पुलिस रक्षक की भूमिका में वापस नहीं आएगी, तब तक समाज का विश्वास बहाल नहीं होगा। सरकार को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, वरना “रक्षक से भक्षक” बनने की यह कहानी और दुःखद मोड़ लेगी।

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सरकारी नौकरी का मोह : स्थिरता के नाम पर स्थिर सोच

– संजय राय , संपादक भारत के युवाओं के बीच सरकारी नौकरी की चाहत किसी जुनून से कम नहीं। हाल ही में उत्तराखंड में हुए पेपर लीक आंदोलन ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सरकारी नौकरी सिर्फ एक रोजगार नहीं, बल्कि एक सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुकी है। जब परीक्षा में गड़बड़ी हुई, तो युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा और सरकार को अंततः सीबीआई जांच की घोषणा करनी पड़ी। लेकिन यह कहानी केवल उत्तराखंड की नहीं है – यह उस मानसिकता की कहानी है, जिसमें सरकारी नौकरी को जीवन की अंतिम मंज़िल मान लिया गया है। 🎯 नौकरी या सुरक्षा का भ्रम? देश में सरकारी नौकरियों की संख्या करीब 1.4 करोड़ है, यानी कामकाजी आबादी का सिर्फ 1.4 प्रतिशत हिस्सा ही सरकारी कर्मचारी है। फिर भी हर साल लाखों युवा इसी दिशा में दौड़ लगाते हैं। वजह साफ़ है — सरकारी नौकरी में स्थिरता, पेंशन, सुरक्षा और सम्मान की गारंटी दिखती है।दूसरी ओर, निजी क्षेत्र में अस्थिरता, लक्ष्य का दबाव और छँटनी का डर हावी है।लेकिन विडंबना यह है कि जिन सरकारी व्यवस्थाओं को हम “धीमी, भ्रष्ट और अकुशल” कहकर कोसते हैं, उन्हीं में शामिल होने के लिए करोड़ों युवा सालों तक तैयारी करते हैं। 🧩 आंकड़े जो सोचने पर मजबूर करते हैं संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा को ही देखें — हर साल लगभग 15 लाख अभ्यर्थी आवेदन करते हैं। प्रारंभिक परीक्षा से मुख्य परीक्षा तक पहुँचते हैं लगभग 12,000, साक्षात्कार के लिए बुलाए जाते हैं करीब 3,000, और अंत में सफलता पाते हैं मात्र 900 से 1000 उम्मीदवार।आईएएस जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए यह संख्या 100 के आसपास सिमट जाती है।यानी सफलता की संभावना 0.006 प्रतिशत से भी कम।फिर भी हर साल लाखों युवा अपनी युवावस्था, समय और ऊर्जा इसी एक संभावना के पीछे लगा देते हैं। राजस्थान में हाल ही में ग्रुप–डी की 53,747 नौकरियों के लिए 21 लाख आवेदन आए। इनमें अधिकांश उम्मीदवार स्नातक या परास्नातक थे। यह आँकड़ा बताता है कि आज सरकारी नौकरी केवल आजीविका नहीं रही — यह मानसिक सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुकी है। 🧠 कोचिंग संस्कृति और “माई-बाप सरकार” की सोच भारत में कोचिंग संस्थान अब एक समानांतर शिक्षा व्यवस्था बन चुके हैं। लाखों छात्र सालों तक “सरकारी नौकरी” के लिए तैयारी करते हुए अपनी युवावस्था का सबसे ऊर्जावान दौर कक्षाओं और टेस्ट सीरीज में गुज़ार देते हैं।समस्या यह है कि शिक्षा और कोचिंग प्रणाली दोनों ने युवाओं में यह धारणा मजबूत की है कि “सरकार ही सब कुछ देगी।” यही “माई-बाप सरकार” वाली सोच आत्मनिर्भर भारत की राह में सबसे बड़ी बाधा है। 🚀 बदलते भारत में बदलनी होगी सोच भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ रहा है। लेकिन अगर हमारे युवा सिर्फ सरकारी कुर्सी की प्रतीक्षा करते रहेंगे, तो देश का निजी क्षेत्र, स्टार्टअप और नवाचार कौन संभालेगा?सरकारी नौकरी सीमित हैं, पर अवसर असीमित — कृषि, तकनीक, सेवा क्षेत्र, डिजिटल उद्यम और कौशल-आधारित कार्य अब नए करियर मार्ग खोल रहे हैं। सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह युवाओं को नौकरी की प्रतीक्षा से बाहर निकालकर कौशल विकास, स्व-रोजगार और उद्यमिता की दिशा में मार्गदर्शन दे। वहीं युवाओं को भी समझना होगा कि स्थिरता की चाह अगर प्रगति की गति को रोक दे, तो वह स्थिरता नहीं, ठहराव बन जाती है। सरकारी नौकरी कोई बुरी चीज़ नहीं, लेकिन उसे जीवन का अंतिम लक्ष्य बना लेना, अपने सामर्थ्य का अपमान है।समय आ गया है कि युवा सरकारी नौकरी के भ्रम से बाहर निकलें और यह समझें कि असली सफलता किसी पद पर नहीं, बल्कि अपनी योग्यता से अवसर बनाने में है। “सरकारी नौकरी स्थिर कर सकती है, पर बढ़ा नहीं सकती।बढ़ना हो, तो जोखिम लेना ही पड़ेगा।”

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