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अवैध’ संबंध और उससे उत्पन्न अपमान के चलते पति नें जहर खाकर आत्महत्या की

‘पत्नी’ जानकी के कथित ‘अवैध’ संबंध और उससे उत्पन्न अपमान के चलते पति नें जहर खाकर आत्महत्या कर ली ! उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में घाट कोटरा गांव की यह घटना एक सामान्य पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि समाज की गहरी जड़ों में फैले विश्वासघात, लैंगिक असमानता और मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा का दर्दनाक प्रमाण है। डालचंद अहिरवार नामक युवक ने अपनी पत्नी जानकी के कथित अवैध संबंध और उससे उत्पन्न अपमान के चलते जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मरने से पहले बनाए वीडियो में उसने पत्नी को दोषी ठहराते हुए कहा, “जानकी, मेरे जैसा धोखा किसी को मत देना।” यह वाक्य न केवल व्यक्तिगत पीड़ा की चीख है, बल्कि समाज में बढ़ते वैवाहिक धोखे और उसके परिणामों पर एक करारा तमाचा है। इस घटना से हमें सामाजिक स्तर पर गहन चिंतन करने की आवश्यकता है – क्यों वैवाहिक संस्था टूट रही है? क्यों पुरुषों की मानसिक पीड़ा को अनदेखा किया जाता है? और क्यों परिवार, कानून तथा समाज मिलकर ऐसे हादसों को रोकने में असफल हो रहे! भारतीय समाज में विवाह को पवित्र बंधन माना जाता है, जहां विश्वास और निष्ठा आधारस्तंभ हैं। लेकिन आधुनिकता के नाम पर बढ़ते अवैध संबंध इस बंधन को खोखला कर रहे हैं। डालचंद की कहानी में पत्नी का मकान मालिक से अफेयर, पति को पिटवाना और मोबाइल छीनना – ये केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि वैवाहिक विश्वासघात की उस श्रृंखला के अंग हैं जो तलाक, हिंसा और आत्महत्या को जन्म दे रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल हजारों आत्महत्याएं पारिवारिक विवादों से जुड़ी होती हैं, जिनमें वैवाहिक धोखा प्रमुख कारण है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां डालचंद जैसे मजदूर वर्ग के पुरुष प्रवास पर जाते हैं, पत्नियां अकेली रहती हैं – वहां अवसरवाद और सामाजिक दबाव मिलकर धोखे को बढ़ावा देते हैं। समाज को चिंतन करना चाहिए क्या हमारी शिक्षा और संस्कार प्रणाली युवाओं को निष्ठा सिखा रही है, या सोशल मीडिया और शहरीकरण के प्रभाव में नैतिकता खो रही है। मीडिया और समाज अक्सर महिलाओं की घरेलू हिंसा पर चर्चा करता है, लेकिन पुरुषों का अपमान, धोखा और मानसिक यातना कहां दर्ज होती है। डालचंद ने हरियाणा में नौकरी की, परिवार को साथ रखा, पत्नी के नाम जमीन खरीदी – फिर भी विरोध करने पर पिटवाया गया। उसका रोना, एक महीने पहले ममेरे भाई के पास आकर फूटना, बताता है कि वह टूट चुका था। भारतीय कानून में दहेज प्रताड़ना या घरेलू हिंसा के प्रावधान महिलाओं के लिए मजबूत हैं, लेकिन पुरुषों के लिए कोई विशिष्ट संरक्षण नहीं। क्या यह लैंगिक पूर्वाग्रह नहीं। समाज को स्वीकार करना होगा कि पुरुष भी भावनात्मक रूप से कमजोर होते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुष आत्महत्या की दर महिलाओं से दोगुनी है, क्योंकि वे अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर पाते – “मर्द को दर्द नहीं होता” वाली मानसिकता उन्हें अंदर से खा जाती है। समझौते की कमीघटना में ससुराल वालों का पत्नी का साथ देना और जमीन बेचने का दबाव दर्शाता है कि परिवार अब संयुक्त नहीं, स्वार्थी इकाई बन गए हैं। डालचंद के बच्चे – 8 साल का बेटा और 7 साल की बेटी – अब अनाथ हो गए। क्या यह केवल पति-पत्नी का विवाद था, या परिवार की विफलता। ग्रामीण भारत में पंचायतें और बुजुर्ग समझौते कराते थे, लेकिन आज कानूनी हथियार और सामाजिक अलगाव बढ़ रहा है। पत्नी का मायके चले जाना और पति का अकेले रहना – यह प्रवासी मजदूरों की जिंदगी की कड़वी सच्चाई है। समाज को चिंतन करना चाहिए क्या हम परिवारों में संवाद की संस्कृति खो रहे हैं। काउंसलिंग सेंटर, सामुदायिक मध्यस्थता और स्कूलों में वैवाहिक शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए। पुलिस ने जांच शुरू की है, लेकिन क्या यह पर्याप्त है। आत्महत्या के लिए उकसाने (IPC 306) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, सरकार को वैवाहिक धोखे को गंभीर अपराध मानना चाहिए, पुरुषों के लिए हेल्पलाइन शुरू करनी चाहिए और मानसिक स्वास्थ्य को राष्ट्रीय एजेंडा बनाना चाहिए। NCRB डेटा बताता है कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पारिवारिक विवाद से आत्महत्याएं सबसे अधिक हैं – यह चेतावनी है। डालचंद की मौत एक व्यक्ति की नहीं, समाज की हार है। यह हमें सिखाती है कि विश्वास टूटने पर जीवन नहीं टूटना चाहिए। आइए, हम वैवाहिक निष्ठा को मजबूत करें, लैंगिक पूर्वाग्रह त्यागें और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। तभी ऐसी घटनाएं रुकेंगी, वरना हर “जानकी” और “डालचंद” की कहानी समाज की किताब में काली स्याही बनकर रहेगी। यह चिंतन का समय है – सुधार का नहीं, तो कम से कम संवेदना का।

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दोषी को ‘सांसें’ टूटने तक लटकाया जाए, वरना समाज में गलत संदेश जाएगा और ‘न्याय’ पर सवाल उठेंगे !

‘जज’ की सख्त टिप्पणी थी! “दोषी को ‘सांसें’ टूटने तक लटकाया जाए, वरना समाज में गलत संदेश जाएगा और ‘न्याय’ पर सवाल उठेंगे ! उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में सात साल की मासूम और उसकी पांच साल की छोटी बहन के साथ हुई क्रूर वारदात ने एक बार फिर पूरे देश को झकझोर दिया है। 22 फरवरी 2021 को गांव के प्राथमिक स्कूल के नल पर नहाने गईं इन सगी बहनों में से एक की लाश खेत में मिली, सिर से बहता खून और दूसरी बच्ची लहूलुहान हालत में सौ मीटर दूर। शहद बेचने वाले अनिल चमेली को पुलिस ने गिरफ्तार किया और 57 महीनों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने इसे ‘विरलतम श्रेणी’ का मामला मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। जज की सख्त टिप्पणी थी: “दोषी को सांसें टूटने तक लटकाया जाए, वरना समाज में गलत संदेश जाएगा और न्याय पर सवाल उठेंगे। यह फैसला निश्चित रूप से राहत की सांस देता है, लेकिन क्या सिर्फ फांसी की सजा से बच्चियों पर होने वाले अत्याचार रुक जाएंगे! यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक विफलता को उजागर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चियां स्कूल जाती हुईं, नल पर नहाती हुईं या खेलती हुईं – ये दैनिक गतिविधियां कितनी असुरक्षित हो गई हैं! शाहजहांपुर जैसी घटनाएं दुर्लभ नहीं हैं; निर्भया से लेकर हाथरस, कठुआ और अब यह – हर बार हम गुस्से में सड़कों पर उतरते हैं, हैशटैग चलाते हैं, लेकिन अगली वारदात तक सब भूल जाते हैं! सामाजिक चिंता यही है कि हमारी सुरक्षा व्यवस्था बच्चियों को घर के बाहर कदम रखने लायक नहीं बना पा रही। गांवों में स्कूलों के आसपास कोई सीसीटीवी नहीं, कोई सुरक्षित खेल मैदान नहीं। माता-पिता काम पर जाते हैं तो बच्चियां अकेली पड़ जाती हैं। अपराधी जैसे अनिल – जो शहद बेचकर घूमते हैं – आसानी से शिकार बनाते हैं। पोक्सो एक्ट सख्त है, फास्ट-ट्रैक कोर्ट हैं, लेकिन जांच में देरी, गवाहों का डरना और सबूतों की कमी से कितने केस कमजोर पड़ जाते हैं। इस मामले में भी चार्जशीट लगने में समय लगा, लेकिन अदालत ने सजा सुनाकर उदाहरण पेश किया। क्या हम सिर्फ सजा पर निर्भर रहेंगे या समाज बदलेगा! स्कूलों में सेक्स एजुकेशन अनिवार्य हो, जहां बच्चियां ‘गुड टच-बैड टच’ सीखें। गांव स्तर पर महिला स्वयं सहायता समूह और पंचायतें चौकसी करें। पुलिस पेट्रोलिंग बढ़े, हेल्पलाइन नंबर हर बच्ची की जुबान पर हो। माता-पिता को जागरूक करें कि बच्चियों को अकेला न छोड़ें, लेकिन क्या हर पल निगरानी संभव है! नहीं, इसलिए सामुदायिक निगरानी जरूरी है – पड़ोसी, शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सभी की भूमिका। यह फैसला एक संदेश है: अपराधी बख्शे नहीं जाएंगे। लेकिन असली जीत तब होगी जब ऐसी वारदातें ही न हों। बच्चियां सुरक्षित खेलें, पढ़ें और बड़ा हों – यही समाज की सच्ची प्रगति होगी। सरकार, एनजीओ और हम सब मिलकर इस चेन को तोड़ें, वरना फांसी की रस्सी कितनी भी लंबी हो, मासूमों की चीखें नहीं रुकेंगी। जागो समाज, वरना अगली खबर तुम्हारे घर से आएगी!

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गड्ढों में सड़कें हैं मुंबई की क्या है हालत पढ़िए

मानों ‘सरकार’ का प्लान है, “सड़कें बनाओ, बारिश आने दो, गड्ढे खुद-ब-खुद तैयार!” अरे, ठेकेदारों को तो ‘गड्ढा स्पेशलिस्ट’ का अवॉर्ड मिलना चाहिए न मुंबई! अरे भाई, मुंबई को तो भारत की आर्थिक राजधानी कहते हैं ना। हाँ, वही जो बॉलीवुड की चकाचौंध, अमीरों की लग्जरी गाड़ियों और ट्रैफिक जाम की मशहूर है। लेकिन असल में ये शहर एक ‘खूनी डांस फ्लोर’ बन चुका है! सड़कें नहीं, बल्कि गड्ढों का मेला लगता है। सरकार हर साल करोड़ों खर्च करके ‘नई सड़कें’ बनवाती है, लेकिन मानो वो सड़कें कोई जादूगर की ट्रिक हों – बनते ही गायब! साल भर बाद देखो तो पुरानी वाली गड्ढेदार सड़कें फिर से ‘हैलो’ कह रही होती हैं। अरे, क्या बात है! सरकार की सड़कें तो ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ स्टाइल में बनती हैं और ‘गायब एंड मिसिंग’ हो जाती हैं। महाराष्ट्र में जब एकनाथ शिंदे जी सीएम बने, तो लगा था कि अब तो ‘सख्त फैसले’ वाले नेता आए हैं। लोग सोचने लगे, “अब गड्ढों पर बुलडोजर चलेगा!” शिंदे जी तो निर्णय लेने में ‘रॉकेट’ जैसे तेज माने जाते थे। फिर शिंदे जी सीएम पद से जैसे ही हटे वैसे ही सब वैसा का वैसा। गड्ढे तो और गहरे हो गए, जैसे सरकार कह रही हो, “भाई, हमने तो सड़क बनाई थी, तुम्हारी गाड़ी ने ही खा ली!” ठाणे से नालासोपारा की रिटर्न जर्नी की तो गाड़ी नहीं, लग रहा था कोई भोजपुरी स्टार डांस कर रहा हो – “चलेलु डहरिया त नदी बीचे नईया हिलोर मारे, हिलोर मारे, करीहईयां ऐ गोरी हिलोर मारे!” हाँ, घोडबंदर रोड पर तो गाड़ी हिलती है कि क्या बताएं – स्पीड ब्रेकर नहीं, ‘हिलोर ब्रेकर’ लगे हैं। गड्ढों में पानी भर जाए तो लगता है, सरकार ने ‘स्विमिंग पूल’ प्रोजेक्ट लॉन्च कर दिया! सरकार तो दिन भर मोबाइल पर व्यस्त – अपनी ‘वाह-वाही’ वाली खबरें देखती रहती है। टीवी पर ऐलान: “हमने 1000 किमी सड़कें बनाईं!” लेकिन जमीनी हकीकत? गड्ढों का साम्राज्य! दावे आसमान छूते हैं, वादे हवा में उड़ते हैं, और कर्म? वो तो गड्ढों में दफन हो जाते हैं। मानो सरकार का प्लान हो, “सड़कें बनाओ, बारिश आने दो, गड्ढे खुद-ब-खुद तैयार!” अरे, ठेकेदारों को तो ‘गड्ढा स्पेशलिस्ट’ का अवॉर्ड मिलना चाहिए। हर साल नई टेंडर, नई सड़क, और नई ‘गायब’ कहानी। मुंबई की सड़कें अब ‘टूरिस्ट स्पॉट’ बन गईं – विदेशी आते हैं और कहते हैं, “वाह, इंडियन मून क्रेटर्स!” हे सरकार, जरा मोबाइल नीचे रखो और सड़कों पर उतरो! या फिर अगली बार ऐलान करो “हमारी सड़कें ‘हिलोर वाली’ हैं – फ्री मसाज के साथ!” वरना जनता अगले चुनाव में ‘हिलोर’ मारेगी… तुम्हारी कुर्सी को!

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माँ’ की ‘ममता’ और टूटते ‘रिश्ते’ की करुण गाथा

चार मासूम ‘बच्चों’ की ‘माँ’ मुकेश यादव के साथ नया घर बसाने चली! ‘! उत्तर प्रदेश के एटा जिले की एक छोटी-सी दुनिया में, जहां जीवन की सादगी और संघर्ष रोज की कहानी बनते हैं, वहां एक मां का दिल पत्थर हो गया। मनीषा, चार मासूम बच्चों की मां, जिसके आंचल में कभी विहान (दो साल), सचिन (तीन साल), निखिल (सात साल) और प्राची (पांच साल) की हंसी गूंजती थी, आज उनसे दूर चली गई। इंस्टाग्राम के एक फ्रेंड मुकेश यादव के साथ नया घर बसाने की चाह में उसने पुराना आशियाना छोड़ दिया। पति भूप सिंह पर शराब पीने का आरोप लगाकर वह कोर्ट से सीधे प्रेमी के साथ निकल गई। लेकिन पीछे छूट गए चार बच्चे, जो बिलख-बिलख कर मां को पुकार रहे हैं। मां का दिल नहीं पसीजा। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि ममता की उस पवित्र भावना की है, जो कभी-कभी जीवन की कठोर सच्चाइयों में खो जाती है। ममता क्या है वह धागा जो मां और बच्चे को जन्म से पहले ही बांध देता है। गर्भ में पलते शिशु की पहली धड़कन से लेकर जीवन की आखिरी सांस तक, मां का प्यार अटूट होता है। वह भूखे बच्चे के लिए रोटी छोड़ती है, बीमार संतान के लिए रातें जागती है, और दुनिया की हर तूफान से उसे बचाती है। लेकिन एटा की इस घटना में मनीषा की ममता कहां खो गई? क्या इंस्टाग्राम की चमकदार दुनिया ने उसके दिल को इतना कठोर कर दिया कि चार मासूमों की आंसू भरी पुकार अनसुनी रह गई? विहान, जो अभी चलना सीख रहा है, सचिन जो खेल-खेल में मां की गोद मांगता है, निखिल जो स्कूल की कहानियां सुनाता है, और प्राची जो गुड़िया से मां बनने का सपना देखती है—ये बच्चे अब अनाथ जैसे हो गए। उनके बापू भूप सिंह शराब के आरोपों से घिरे हैं, लेकिन बच्चों का क्या? उनकी आंखों में मां की छवि अब धुंधली हो रही है। यह दर्द सिर्फ एटा का नहीं, बल्कि हर उस घर का है जहां मां का जाना परिवार को तोड़ देता है। मनीषा ने कोर्ट में साफ कहा, “मैं मुकेश के साथ रहूंगी।” लेकिन क्या प्रेम की यह आग बच्चों की मासूमियत को जला सकती है? पति की कमजोरी—शराब—को आधार बनाकर भागना आसान है, लेकिन मां का फर्ज? वह तो बच्चों की जिंदगी का आधार होती है। 25 दिन की तलाश के बाद पुलिस ने मनीषा को ढूंढ लिया, लेकिन मां को वापस लाना पुलिस के बस में नहीं। कोर्ट की दीवारों के बाहर बच्चे रोते रहे, मां अंदर प्रेमी का हाथ थामे चली गई। यह दृश्य दिल दहला देता है। क्या सोशल मीडिया की दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि खून के रिश्ते भूल गए। ममता की यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है। आज की दुनिया में जहां इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म रिश्तों को जोड़ते-तोड़ते हैं, वहां मां का प्यार परीक्षा की घड़ियों में टिकता है या नहीं? मनीषा जैसे मामले बढ़ रहे हैं, जहां वैवाहिक कलह में बच्चे पीसते हैं। पति की गलती हो या पत्नी की, लेकिन मां का जाना बच्चों के लिए मौत समान है। विहान की दो साल की उम्र में मां की गोद की गर्माहट खो जाना, प्राची की पांच साल की दुनिया में मां का साथ छिन जाना—यह दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। बच्चे बिलख उठे, लेकिन मां का दिल पत्थर बन गया। क्या यह ममता की हार है या समाज की। ओ मां, तेरी ममता अमर है, लेकिन कभी-कभी जीवन की लहरें उसे बहा ले जाती हैं। एटा के इन चार मासूमों की आंसू हमें जगाती हैं—रिश्तों को संभालो, ममता को जीवित रखो। नहीं तो टूटे दिलों की यह गाथा अनंत तक चलती रहेगी। बच्चों की पुकार अनसुनी न रह जाए, यही प्रार्थना है।

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बोरीवली रेलवे स्टेशन पर बैग चोरी की कोशिश नाकाम, RPF ने चोर को दबोचा

मुंबई के बोरीवली रेलवे स्टेशन पर रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) की सतर्क टीम ने एक बैग चोर को गिरफ्तार कर यात्रियों की सुरक्षा का उदाहरण पेश किया। आरोपी ने कुछ दिन पहले ही एक यात्री का कीमती बैग और लैपटॉप चुराया था, लेकिन CCTV फुटेज और त्वरित पूछताछ से उसका भंडाफोड़ हो गया। RPF की क्राइम प्रिवेंशन एंड डिटेक्शन स्क्वॉड (CPDS) टीम के सदस्यों – कांस्टेबल कमलेश स्वामी, हेड कांस्टेबल विनोद मोयल और कांस्टेबल हरिशंकर यादव – ने आज प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर गश्त के दौरान संदिग्ध रूप से घूमते प्रेम सागर हीरा चौहान (उम्र 29 वर्ष) को देखा। वह जीवदानी नगर, पालघर का निवासी है। टीम ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। आरोपी ने शुरू में टालमटोल किया, लेकिन जब RPF ने स्टेशन के CCTV फुटेज दिखाए, तो वह टूट गया। उसने कबूल किया कि 1 नवंबर 2025 को एक पैसेंजर ट्रेन से उसने एक यात्री का बैग चुराया था, जिसमें लैपटॉप भी था। चोरी गए सामान की कीमत करीब 18,070 रुपये आंकी गई है। RPF ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया के लिए गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) बोरीवली को सौंप दिया। GRP ने उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305(c) के तहत गिरफ्तार कर लिया। यह पूरी ऑपरेशन “यात्री सुरक्षा” अभियान के तहत की गई, जो रेलवे में चोरी और अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए चलाया जा रहा है। RPF अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन पर CCTV और सतर्क गश्त की वजह से ऐसे अपराधियों को पकड़ना आसान हो रहा है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे अपने सामान पर नजर रखें और किसी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत RPF को सूचित करें। इस गिरफ्तारी से बोरीवली जैसे व्यस्त स्टेशन पर यात्रियों का भरोसा और मजबूत हुआ है।

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लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में एक 15 साल की किशोरी के साथ दुष्कर्म

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में एक 15 साल की किशोरी के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है, जो न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज की गहरी खामियों को उजागर करता है। किशोरी खुर्दही बाजार में फुफेरी बहन के यहां रह रही थी। परिवार से नाराज होकर देर रात अकेली घर से निकल पड़ी। रास्ते में आरोपी मनोज साहू ने उसे शरण का लालच देकर होटल अमन सागर ले गया और हवस का शिकार बना लिया। होटल मालिक की लापरवाही तो अलग से चर्चा का विषय है – आधी रात नाबालिग लड़की और युवक को बिना किसी आईडी चेक किए रूम दे दिया। अब होटल मालिक भी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। लेकिन असली सवाल यह है: क्या सिर्फ आरोपी और होटल मालिक ही जिम्मेदार हैं? नहीं, इसमें लड़कियों की नादानी और सरकार की घोर नाकामी भी बराबर की भागीदार है। यह किशोरी महज 15 साल की है, लेकिन देर रात अकेली सड़क पर निकलना क्या कोई समझदारी भरा फैसला था? परिवार से नाराजगी होना स्वाभाविक है, खासकर किशोरावस्था में, जहां भावनाएं उफान पर होती हैं। लेकिन क्या गुस्से में घर छोड़कर अंधेरे में भटकना समाधान है? आजकल की लड़कियां सोशल मीडिया और फिल्मों से प्रभावित होकर खुद को ‘स्वतंत्र’ समझती हैं, लेकिन सड़कों पर छिपे भेड़ियों की हकीकत से अनजान रहती हैं। मनोज साहू जैसे शिकारी तो इंतजार में बैठे रहते हैं – एक अकेली, नादान लड़की मिली और मौका हाथ लग गया। यह कोई पहला मामला नहीं। देशभर में हजारों लड़कियां हर साल ऐसी ही नादानी का शिकार होती हैं। स्कूलों में सेक्स एजुकेशन तो दूर, बेसिक सेफ्टी नियम भी नहीं सिखाए जाते। माता-पिता व्यस्तता में बच्चों को भावनात्मक सपोर्ट नहीं देते, नतीजा – बच्चे गलत कदम उठाते हैं। लड़कियां सोचती हैं कि ‘मैं संभाल लूंगी’, लेकिन रात के अंधेरे में अजनबी पर भरोसा करना आत्महत्या के बराबर है। अगर यह किशोरी थोड़ी समझदारी दिखाती, किसी विश्वसनीय रिश्तेदार या पुलिस हेल्पलाइन (1098 या 112) पर कॉल करती, तो शायद यह हादसा टल जाता। नादानी की यह कीमत समाज को चुकानी पड़ रही है – एक मासूम जिंदगी तबाह, परिवार बर्बाद। अब बात सरकार की। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार दावा करती है कि महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। एंटी-रोमियो स्क्वॉड, 1090 हेल्पलाइन, पिंक पेट्रोलिंग – कितने ढोल पीटे गए! लेकिन ग्राउंड पर क्या? लखनऊ जैसे मेट्रो शहर में देर रात सड़कें असुरक्षित, होटल बिना आईडी चेकिंग के रूम बांट रहे हैं। होटल मालिक फरार है, लेकिन सवाल यह है कि होटल लाइसेंस देने वाली पुलिस और प्रशासन ने कभी चेकिंग की क्या? POCSO एक्ट के तहत नाबालिग के साथ ऐसे मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है, लेकिन रोकथाम कहां है। रात में स्ट्रीट लाइट्स खराब, सीसीटीवी कैमरे नाकारा। अकेली लड़की भटक रही थी, कोई पेट्रोलिंग नहीं। बिना आईडी रूम देना अवैध है, फिर भी हजारों होटल धड़ल्ले से चल रहे हैं। लाइसेंस सस्पेंड करने की बजाय, इंस्पेक्शन कभी होते ही नहीं। स्कूलों में लड़कियों को सेफ्टी ट्रेनिंग नहीं, एनजीओ को फंड मिलता है लेकिन जमीन पर कुछ नहीं। निर्भया फंड के अरबों रुपये कहां गायब। घटना के बाद होटल मालिक की तलाश ‘जारी’ है – मतलब अभी तक पकड़ा नहीं। ऐसे कितने केस में आरोपी सालों फरार घूमते हैं। योगी सरकार अपराधियों पर बुलडोजर चलाती है, पर फोकस जीरो। अगर सड़कों पर असली पेट्रोलिंग होती, होटलों पर सख्त नियम लागू होते, तो मनोज साहू जैसे दरिंदे खुलेआम शिकार नहीं करते। केंद्र की मोदी सरकार भी महिलाओं के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, लेकिन पढ़ाई के साथ सुरक्षा की पढ़ाई कहां। लड़कियां नादानी छोड़ें, भावनाओं को काबू में रखें और खतरे की घंटी बजते ही मदद मांगें। माता-पिता जिम्मेदारी लें, बच्चों से बात करें। लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार की है। कानून बनाना आसान, अमल मुश्किल। अगर यूपी सरकार सच में महिलाओं की सुरक्षा चाहती है, तो होटलों पर ताला लगाए, रात की पेट्रोलिंग दोगुनी करे, स्कूलों में अनिवार्य सेफ्टी कोर्स शुरू करे। वरना ऐसे कांड रोज सामने आते रहेंगे, और हम सिर्फ अफसोस करते रह जाएंगे। समय है सुधार का, वरना नादानी और नाकामी की यह चेन कभी नहीं टूटेगी।

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क्या इस बार मतदाता वादों से आगे बढ़कर विकास को चुनेंगे?बिहार में

बिहार चुनाव 2025: जनता के फैसले पर टिकी विकास की नई परिभाषा बिहार एक बार फिर चुनावी रंग में रंग चुका है। सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक हर ओर राजनीति की गूंज है। 6 नवम्बर को पहले चरण का मतदान है, और इस बार का मुद्दा जातीय समीकरणों से अधिक, विकास, रोजगार और जनकल्याण के इर्द-गिर्द घूमता दिख रहा है। पिछले एक दशक में बिहार ने बुनियादी ढांचे, शिक्षा और बिजली जैसी सेवाओं में सुधार ज़रूर देखा है, लेकिन बेरोज़गारी, पलायन और किसानों की समस्याएँ अब भी गहराई में मौजूद हैं। ऐसे में मतदाता अब सिर्फ़ नारों से नहीं, बल्कि नतीजों से जवाब चाहते हैं। 🔹 सत्ता पक्ष की रणनीति : “विकास के निरंतरता” का नारा सत्तारूढ़ दल भाजपा ने इस चुनाव को “विकास की निरंतरता बनाम अवरोध” की लड़ाई का रूप दिया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शीर्ष नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि केंद्र और राज्य में एक जैसी विचारधारा की सरकार होने से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है। एनडीए के घोषणा-पत्र में कई बड़े वादे शामिल हैं — प्रत्येक परिवार को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए ‘लखपति योजना’ के तहत ₹2 लाख तक सहायता, हर ज़िले में औद्योगिक विनिर्माण इकाई, एक करोड़ युवाओं को रोजगार, और 50 लाख पक्के मकान का निर्माण। इन वादों के ज़रिए भाजपा ने कोशिश की है कि जनता को यह भरोसा दिलाया जाए कि केंद्र की योजनाओं और राज्य की ज़रूरतों का संयोजन ही बिहार की असली ताकत है। 🔹 विपक्ष की चुनौती : “विकास अधूरा है” दूसरी ओर राजद और कांग्रेस गठबंधन ने इस चुनाव में सरकार को घेरने के लिए महंगाई, रोजगार और भ्रष्टाचार के मुद्दों को मुख्य हथियार बनाया है।तेजस्वी यादव बेरोज़गारी को चुनाव का केंद्रीय मुद्दा बनाकर युवा वर्ग को साधने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिहार में “जंगलराज” नहीं, बल्कि “रोज़गार राज” चाहिए। कांग्रेस, जो लंबे समय से राज्य की राजनीति के हाशिए पर रही है, इस बार खुद को प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों बिहार में सक्रिय हैं, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर पार्टी अभी भी कमजोर दिख रही है। 🔹 जनता की नज़र में चुनाव मतदाता अब जागरूक हैं। वे जानते हैं कि योजनाएँ कितनी धरातल पर उतरीं और कितनी सिर्फ़ घोषणा-पत्र में रह गईं।बिहार की जनता अब नए अवसरों, बेहतर शिक्षा और स्थायी रोजगार चाहती है।युवाओं के बीच यह भावना स्पष्ट है कि राज्य को अब राजनीति नहीं, नीति चाहिए। महिलाओं में आत्मनिर्भरता और सुरक्षा को लेकर अपेक्षाएँ भी बढ़ी हैं। ग्रामीण इलाकों में जनकल्याणकारी योजनाओं का असर तो है, पर असमानता अब भी एक बड़ी चुनौती है। 🔹 तकनीकी और पारदर्शिता पर फोकस चुनाव आयोग ने इस बार पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए सख्त कदम उठाए हैं।मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है और सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ की निगरानी के लिए विशेष सेल बनाए गए हैं।फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सऐप अब राजनीतिक युद्धभूमि बन चुके हैं, जहाँ हर दल अपनी रणनीति के साथ मतदाताओं तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है। उम्मीदों का बिहार बिहार चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि विकास की दिशा तय करने वाला फैसला है।यह चुनाव बताएगा कि क्या बिहार जातीय राजनीति की पुरानी सीमाओं से आगे निकलकर विकास की नई परिभाषा लिखने को तैयार है या नहीं। सवाल अब यह नहीं कि कौन जीतेगा, बल्कि यह है कि कौन बिहार को आगे ले जाएगा — योजनाओं के वादों से परे, नीतियों की सच्चाई तक।

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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंत्रिमंडल की बैठक में लिए फैसले की जानकारी दी

आज की बैठक में कुल 14 एजेंडे रखे गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों के दर्द को समझते हुए उनके परिवार के किसी एक सदस्य को रोज़गार- प्रदान करने का निर्णय लिया इसकी घोषणा मैंने हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान 25 अगस्त, 2025 को सदन में की थी ऐसे पीड़ित परिवार के एक सदस्य को एचकेआरएन के माध्यम से नौकरी दी जाएगी मंत्रीमंडल ने यह भी निर्णय लिया है कि उस समय जो हरियाणा के निवासी (Domicile) थे, जिनकी मृत्यु दंगों के दौरान चाहे हरियाणा से बाहर हुई हो, उनके आश्रितों को भी सरकार नौकरी देगी इनको 58 साल की आयु तक नौकरी से नहीं हटाया जाएगा,आज की बैठक में मंत्रिमंडल ने इस संबंध में अपनी सहमति दी बैठक में आबादी देह क्षेत्रों में कब्जा धारकों को स्वामित्व अधिकार प्रदान करने के लिए स्वामित्व योजना और ड्रोन आधारित सर्वेक्षणों के परिणामों को कानूनी आधार प्रदान करने का निर्णय लिया इस संबंध में आज की बैठक में एक अध्यादेश को मंजूरी दी गई है बैठक में विकास परियोजनाओं हेतु स्वेच्छा से दी जाने वाली भूमि की खरीद संबंधी नीति, में संशोधन को मंजूरी दी गई इस नीति में अब एक नया प्रावधान जोड़ा गया है, इसके अनुसार, यदि कोई भू-मालिक स्वयं या किसी एग्रीगेटर के माध्यम से ई-भूमि पोर्टल पर अपनी सहमति अपलोड करता है और सभी शर्तों को पूरा करता है, तो ऐसी सहमति को वैध माना जाएगा मौजूदा प्रावधानों के अंतर्गत, भू-मालिक या एग्रीगेटर कलेक्टर रेट के तीन गुणा की अधिकतम सीमा तक ही प्रस्ताव दे सकता था आज की बैठक में नई टीचर ट्रांसफर पॉलिसी- 2025 को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत पॉलिसी का सरलीकरण किया गया नई पॉलिसी के तहत, ज़ोनिंग का कॉन्सेप्ट हटा दिया गया है, जिससे शिक्षक सीधे कोई भी स्कूल चुन सकते हैं आज की बैठक में हरियाणा मूल के युद्ध में जान गंवाने वाले शहीद सैनिकों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए हरियाणा सरकार की नीति में छूट प्रदान की गई है, जो निर्धारित तीन साल की अवधि के भीतर आवेदन नहीं कर सके इस फैसले से आज 2 आश्रितों को अनुकंपा आधार पर नियुक्ति की मंजूरी दी गई इससे पहले भी हमारी सरकार ने 26 जून, 2025 को मंत्रिमंडल की बैठक में शहीद सैनिकों के 8 आश्रितों को अनुकंपा आधार पर नियुक्ति दी है हरियाणा में श्रमिकों के कल्याण और औद्योगिक विकास में संतुलन स्थापित करने के लिए ‘कारखाना (संशोधन) अध्यादेश, 2025’ को भी मंजूरी दी गई अब, कारखाना प्रबंधन को हर श्रमिक को नियुक्ति के समय नियुक्ति पत्र अनिवार्य करने का प्रावधान है उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी प्रावधान किया गया है इसके अनुसार अब, महिला श्रमिक भी मशीनरी पर आवश्यक सुरक्षात्मक उपकरण उपलब्ध होने पर कार्य कर सकेंगी संशोधन में प्रति तिमाही ओवर टाइम सीमा को 115 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे किया गया है सभी ओवरटाइम कार्य स्वैच्छिक रहेंगे। सामान्य मजदूरी दर से दोगुनी दर से मुआवजा दिया जाएगा, जिससे श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बैठक में हरियाणा दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान (संशोधन) अध्यादेश, 2025 को मंज़ूरी दी गई संशोधन के तहत 20 से कम कर्मचा​री वाले प्रतिष्ठान/ दुकान पर हरियाणा दुकान एवं वाणिज्य प्रतिष्ठान लागू नहीं होंगे पंजीकरण, संशोधन और अन्य कार्य पूरी तरह से एक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होंगे क्रिमीनल प्रोविजन को हटा दिया गया है सभी कर्मचारियों को Identity Card व appointment लैटर दिए जाएंगे पंजाब ग्राम शामलात भ‌ूमि नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी गई अब, पंचायत द्वारा खेती के लिए पट्टे पर दी जाने वाली प्रस्तावित भूमि में से 5 प्रतिशत भूमि 60 प्रतिशत से अधिक विकलांगता वाले व्यक्तियों के लिए आरक्षित होगी इसी प्रकार, पंचायत भूमि पर गौ अभ्यारण्य स्थापित करने के उद्देश्य से पशुपालन एवं डेयरी विभाग या हरियाणा गौ सेवा आयोग को 20 वर्ष की अवधि के लिए 5100 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से कुछ नियमों और शर्तों पर भूमि पट्टे पर देने का प्रावधान किया गया है बैठक में हरियाणा मंत्रिमंडल ने ईज ऑफ डुइंग बिजनेस के तहत इंडस्ट्रीय जोन में उद्योग स्थापित करने के लिए self- certification से कागजात लिए जाएंगे पारदर्शी व्यवस्था हमारी सरकार का मुख्य उद्देश्य रहा है। उद्योगों को इससे बहुत आसानी हो जाएगी

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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर पत्रकार वार्ता

मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम हरियाणा की बेटी शेफाली वर्मा को महिला वर्ल्ड कप फाइनल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर जीत के लिए बधाई एवम शुभकामनाएं दी गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज की प्रेरणा और प्रयासों से मॉरीशस, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का हो चुका है भव्य आयोजन 10वां अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव धर्म क्षेत्र कुरुक्षेत्र में 15 नवंबर से हो रहा है शुरू और 5 दिसंबर तक चलेगा पहली बार यह महोत्सव 21 दिन तक चलेगा इस महोत्सव में संस्कृति ज्ञान और आध्यात्मिकता का अलग ही संगम मिलेगा देखने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से गीता महोत्सव को कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाने की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई इस बार अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में मध्य प्रदेश सहयोगी राज्य की भूमिका में रहेगा मध्य प्रदेश द्वारा ब्रह्म सरोवर पर स्थित पुरुषोत्तमपुरा बाग में सांस्कृतिक पवेलियन बनाया जा रहा है 24 नवंबर को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय गीता संगोष्ठी का भी किया जाएगा शुभारंभ इस वर्ष भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय गीता संगोष्ठी में 16 देशों के 25 विद्वान रहेंगे उपस्थित विदेश मंत्रालय के माध्यम से 51 देश में गीता महोत्सव के कार्यक्रम भी होंगे आयोजित जिनका रहेगा लाइव प्रसारण फिजी और त्रिनिदाद एवं टोबैगो से 20 पंडित 2 दिन के लिए कुरुक्षेत्र आ रहे हैं जो महोत्सव के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में लेंगे भाग महोत्सव के दौरान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग हरियाणा द्वारा एक यूट्यूब चैनल चलाया जाएगा 15 नवंबर से 5 दिसंबर तक ब्रह्म सरोवर के पावन तट पर भाव गीत महा आरती का किया जाएगा आयोजन 1 दिसंबर को ज्योतिसर तीर्थ पर गीता यज्ञ गीता पाठ एवं भागवत कथा का होगा आयोजन उसी दिन 18 हजार विद्यार्थियों द्वारा गीता का वैश्विक पाठ किया जाएगा और सभी 182 तीर्थ पर दीपोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ब्रह्म सरोवर पर 24 नवंबर से 1 दिसंबर तक गीता पुस्तक मेले का किया जाएगा आयोजन 7 देशों के 25 शिल्पकारों द्वारा अपनी शिल्प का प्रदर्शन महोत्सव के दौरान किया जाएगा गीता महोत्सव में बलराम कुश्ती दंगल का करवाया जाएगा आयोजन जिसमें देश के बड़े-बड़े कुश्ती खिलाड़ियों को भी किया जाएगा आमंत्रित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के कार्यक्रम 28 नवंबर से सभी जिला मुख्यालयों पर होंगे शुरू सभी जिला मुख्यालयों में 1 दिसंबर को गीता जयंती के दिन 1800 विद्यार्थियों द्वारा किया जाएगा गीता का वैश्विक पाठ गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर भी कुरुक्षेत्र में होगा कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोनों आयोजनों में रहेगी गरिमामयी उपस्थिति अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के आयोजन में सहभागिता हेतु समस्त हरियाणा वासियों तथा देशवासियों के मंगल भविष्य की करता हूं कामना – मुख्यमंत्री

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हरियाणा दिवस के अवसर पर पंचकूला में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का हुआ आगाज

प्रदेशवासियों की कड़ी मेहनत से समृद्ध हुआ हरियाणा : राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष बोले, हरियाणा की संस्कृति एवं विरासत का भविष्य सुनहरा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्यपाल को पगड़ी व राज्य की प्रगति के प्रतीकों को दर्शाता अनूठा स्मृति चिह्न और शाल भेंट कर किया सम्मानित पंचकूला , 1 नवंबर-(ईशान टाइम्स)- हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष ने कहा कि हरियाणा राज्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समर्पित प्रयासों से, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, औद्योगिक विकास, निवेश प्रोत्साहन, बुनियादी ढाँचे के उन्नयन और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए, राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के सिद्धांत के साथ पूर्ण समन्वय के साथ कार्य कर रही है, जो विकसित भारत व विकसित हरियाणा के विजन को साकार करने का रोडमैप है। राज्यपाल आज हरियाणा के 60वें स्थापना दिवस के अवसर पर पंचकूला में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने हरियाणा के लोगों को हरियाणा दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इससे पूर्व राज्यपाल ने अपनी धर्मपत्नी एवं लेडी गवर्नर श्रीमती मित्रा घोष व मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ हरियाणा की संस्कृति एवं विरासत को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर पर्यटन एवं विसारत मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता भी उनके साथ थे। राज्यपाल ने हरियाणा की विरासत पर लगी प्रदर्शनी व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रस्तुतियों से यह प्रतीत होता है कि हरियाणा की संस्कृति एवं विरासत का भविष्य बहुत सुनहरा है। उन्होंने कहा कि राजभवन से उनको हरियाणा के लोगों की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है। यह उनके लिए यह बहुत ही गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर, 1966 को अपने गठन के बाद से, हरियाणा सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियों के साथ विकास और समृद्धि के साथ तीव्र विकास के पथ पर अग्रसर है। यह यात्रा हरियाणा के लोगों की कड़ी मेहनत, दृढ़ता और उद्यमशीलता से संभव हुई है। जब हम राज्य की 59 वर्षों की विकास यात्रा के इतिहास की समीक्षा करते हैं, तो पाते हैं कि राज्य ने गरीबी से समृद्धि तक कई मील के पत्थर स्थापित किए हैं। हरियाणा देश के क्षेत्रफल का केवल 1.34 प्रतिशत और जनसंख्या का 2.09 प्रतिशत होने के बावजूद भी देश के सकल घरेलू उत्पाद में 3.6 प्रतिशत योगदान दे रहा है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय बड़े राज्यों में सबसे ज़्यादा है, जो लगभग 3 लाख 53 हज़ार है, जबकि 1966 में यह मात्र 343 रुपये थी। 1966 में राज्य का निर्यात केवल 4 करोड़ 50 लाख रुपये था, जो अब बढ़कर 2 लाख 75 हज़ार करोड़ से ज़्यादा हो गया है। इसी प्रकार हरियाणा प्रति व्यक्ति GST संग्रह में बड़े राज्यों में भी अग्रणी हैं। दुनिया की 250 से अधिक फॉर्च्यून कंपनियों के कार्यालय हरियाणा में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश का पहला राज्य है जहाँ 24 फसलों की खरीद MSP पर की जाती है। देश में गन्ने का सर्वाधिक मूल्य 415 रुपये प्रति क्विंटल देने वाला राज्य भी हरियाणा ही है। राज्य में 3,200 रुपये प्रति माह की सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है, जो देश में सबसे ज्यादा है। हरियाणा का हर जिला राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है। पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देकर हरियाणा ने देश के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत किया है। राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और अनुसूचित जातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्गों जैसे समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा की जा रही पहल सराहनीय है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि हरियाणा के लोग इस बात से सहमत होंगे कि सही और सतत विकास तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब प्रत्येक कल्याणकारी योजना और सेवा का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचे और हरियाणा सरकार भी यह सुनिश्चित करने पर अडिग है कि विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक को मिले। राज्यपाल ने कहा कि सामूहिक प्रयासों में हम समानता, समता, न्याय और बंधुत्व के आदर्शों को कायम रखेंगे और अपने हरियाणा के गौरव को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाएँगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्यपाल को हरियाणा की आन- बान -शान का प्रतीक पगड़ी व किसान, खिलाड़ी, महिला सशक्तिकरण में राज्य की प्रगति के प्रतीकों को दर्शाता अनूठा स्मृति चिह्न और शाल भेंट कर सम्मानित किया। जिसे देखकर राज्यपाल गदगद हो गए। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने 28 मार्च 2025 को अपनाए गए राज्य गीत “जय जय जय हरियाणा, जय जय जय हरियाणा। पावन धरती वेदों की, जहां हुआ हरिका आना।।“ के फिल्मांकन का रिमोट से बटन दबाकर लोकार्पण भी किया। *त्वरित ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से हरियाणा ने देश के समक्ष प्रस्तुत किया डिजिटल मॉडल : अनुराग रस्तोगी * मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अपने स्वागत भाषण में राज्यपाल व मुख्यमंत्री सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों का हरियाणा दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पहुंचने पर स्वागत व अभिनन्दन किया और हरियाणा के लोगों को 60 वें स्थापना दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज का दिन हरियाणा के लोगों के लिए गर्व और गौरव दिन है। हम आज राज्य का 60वां स्थापना दिवस मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हरियाणा पहली नवंबर 1966 को तत्कालीन पंजाब राज्य से अलग राज्य बना तो उस समय लोग सोचते थे कि हरियाणा अपना अस्तित्व बचा पाएगा या नहीं। राज्य की अपनी आय इतनी कम है कि कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पाएगा। वर्ष 1967-68 में हरियाणा का पहला बजट 19.30 करोड़ रुपये का था। उन लोगों को यह पता नहीं था कि हरियाणा के लोग कितने मेहनती, कर्मठ व दृढ इच्छाशक्ति वाले हैं ना तो वे कठिनाइयों से घबराते हैं और ना ही उपलब्धियों से रुकते हैं। ऐसे लोगों की बदौलत ही हरियाणा आज देश के कई बड़े राज्यों से अधिक राजस्व

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