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करनाल में सरकारी धान घोटाले में लगातार एक्शन जारी

अब जिला प्रबंधक (डीएम) अमित कुमार को निलंबित किया करनाल (ईशान राय)।जिले में सरकारी धान घोटाले का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। धान खरीद में हुई गड़बड़ी के बाद अब हैफेड विभाग में बड़ा एक्शन लिया गया है। विभाग के प्रबंध निदेशक ने जिला प्रबंधक (डीएम) अमित कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हैफेड मुख्यालय पंचकूला से 4 नवंबर 2025 को जारी आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि के दौरान वे नियम अनुसार वेतन और भत्ते प्राप्त करेंगे। इस दौरान उनका मुख्यालय पंचकूला रहेगा। करनाल और तरावड़ी मंडियों में धान खरीद में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पहले ही कई अधिकारी नप चुके हैं। फूड एंड सप्लाई विभाग के 4 इंस्पेक्टर, 1 सब इंस्पेक्टर,तरावड़ी मार्केट कमेटी के सचिव संजीव सचदेवा,करनाल मंडी की सचिव आशा रानी, 2 मंडी सुपरवाइजर, 1 ऑक्शन रिकॉर्डर और 3 ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। अब हैफेड के जिला प्रबंधक अमित कुमार पर भी गाज गिरी है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और भी अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना है।

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जनता घबराई,”अब तो कुछ कीजिए!” वो बोले,”बस एक रैली

जनता घबराई,”अब तो कुछ कीजिए!” वो बोले,”बस एक रैली और,फकीर को पकड़कर लाए, ताज सिर पर रखा ! फकीर का सिंहासन।जब झोला उठाकर भागने की तैयारी हो! एक राज्य था, जहाँ पुराना राजा चल बसा।उत्तराधिकार की लड़ाई शुरू हुई, तो दरबारियों ने सोचा क्यों न किसी बाहरी को ताज पहना दें। तभी महल के बाहर से एक फकीर गुजर रहा था – न घर, न परिवार, न कोई जिम्मेदारी। “इसे राजा बना दो,” किसी ने सलाह दी, “यह तो सादा जीवन जीता है, राज्य को लूटेगा नहीं!” फकीर को पकड़कर लाए, ताज सिर पर रखा, और घोषणा हो गई नया महाराज! अब फकीर की मौज! सुबह-सुबह सात तरह के पकवान, रेशमी बिस्तर पर नींद, सोने के कपड़े, और दिन भर दरबार में चोपड़ की बाजियां। पड़ोसी राज्य के राजा को खबर लगी “अरे, ये तो फकीर है, जो सिर्फ पासे फेंकता रहता है!” उसने सेना भेज दी – हमला हो गया!सेनापति दौड़ा “महाराज, दुश्मन आ गया, कुछ कीजिए!” फकीर बोला, “अरे, चिंता मत करो, एक बाजी और खेल लूं!” सेनापति फिर आया “महराज, सेना द्वार पर है!” फकीर: “बस एक बाजी और!” आखिर सेनापति चिल्लाया, “महराज, दुश्मन महल में घुस आया!” फकीर मुस्कुराया: “अच्छा। तो मेरे कौन से बाल-गोपाल रो रहे हैं।मैं तो फकीर हूं, झोला उठाकर निकल लूंगा!” और खिड़की से कूदकर फरार! कहानी पुरानी है, लेकिन भारत की राजनीति में आजकल ऐसे फकीरों की भरमार है। चुनाव आते ही कोई ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ वाला चेहरा उभरता है – न कोई पुराना बोझ, न परिवारवाद की जंजीरें। जनता सोचती है: “ये तो हमारा मसीहा है, भ्रष्टाचार मिटा देगा!” वोट डालो, ताज पहनाओ, और शुरू हो जाता है चोपड़ का खेल – नहीं, माफ कीजिए, ‘जनसेवा’ का ड्रामा! पड़ोसी ‘राज्य’ (यानी विपक्ष या कोई संकट) हमला करता है – महंगाई की सेना, बेरोजगारी का घेरा, या भ्रष्टाचार का तूफान। नेता जी चिल्लाते हैं “चिंता मत करो, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और कर लूं!” जनता घबराई,”अब तो कुछ कीजिए!” वो बोले,”बस एक रैली और!” आखिर जब ‘सेना’ सिंहासन तक पहुंचती है – मतलब जनता का गुस्सा सड़कों पर – तो फकीर मुस्कुराते हैं, “अरे, मेरे कौन से वोटर रो रहे हैं। मैं तो ‘फकीर’ हूं, झोला उठाकर अगले राज्य (या पार्टी) चला जाऊंगा! देखिए न, कितने ‘फकीर’ आजकल सत्ता के महल में बैठे हैं। एक कहता है “मैं तो फकीर हूं, झोला लेकर चल दूंगा” – लेकिन झोला तो हीरे-जवाहरात से भरा रहता है! दूसरा ‘आम आदमी’ बनकर आता है, लेकिन सिंहासन पर बैठते ही रेशमी कुर्सी चिपक जाती है। हमला होता है – अर्थव्यवस्था डूबती है, युवा बेरोजगार सड़कों पर – नेता जी: “एक योजना और लॉन्च कर लूं!” जनता चिल्लाए: “अब तो बचाओ!” वो, “बस एक चुनाव और जीत लूं!”कटाक्ष ये कि फकीरों के भरोसे राज्य नहीं चलता, भई! फकीर तो आते हैं, मौज करते हैं, और भाग जाते हैं। असली राजा वो जो जिम्मेदारी निभाए, न कि झोला तैयार रखे। वरना भारत का महल खाली हो जाएगा, और हम फिर किसी नए फकीर की तलाश में लग जाएंगे। संयोग मात्र। हां, बिलकुल – जैसे हर चुनाव में नया ‘मसीहा’ आता है, और पुराना झोला उठाकर फरार। अंत में ,नोट”:इस लेख से भारत की राजनीति से कोई लेना देना नही है यह एक काल्पनिक सोच हैं।

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भदोही जहाँ जाम ‘राजा’ है और अधिकारी ‘रानी’ सो रही हैं!लेकिन असली ‘क्लाइमेक्स’ तो तब आता है जब एंबुलेंस फंस जाती है!

भदोही,(उत्तरप्रदेश)। आजकल कालीन नगरी भदोही शहर का लिप्पन तिराहा किसी जंगल की भूलभुलैया से कम नहीं। यहाँ वाहनों की लंबी-लंबी कतारें ऐसी लगती हैं मानो कोई ‘ट्रैफिक महाकाव्य’ लिखा जा रहा हो – बस, इसमें हीरो की जगह हॉर्न बजाने वाले ड्राइवर हैं और विलेन हैं वो अतिक्रमणकारी दुकानदार जो सड़क को अपनी ‘प्राइवेट पार्किंग’ समझ बैठे हैं। लेकिन असली ‘क्लाइमेक्स’ तो तब आता है जब एंबुलेंस फंस जाती है – जी हाँ, वो एंबुलेंस जो किसी की जान बचाने दौड़ रही होती है, लेकिन यहाँ तो वो भी ‘ट्रैफिक सिग्नल’ की तरह रुक जाती है। कल्पना कीजिए: मरीज तड़प रहा है, सायरन चीख रही है, लेकिन अधिकारी महोदयों के कानों में जूँ तक नहीं रेंग रही!पिछले हफ्ते ही, 1 नवंबर को, लिप्पन तिराहे और गजिया ओवरब्रिज पर ऐसा ही तमाशा हुआ। आम आदमी के साथ-साथ बड़े-बड़े अधिकारी भी घंटों फंसे रहे – हाँ, वही अधिकारी जो ‘यातायात सुधार’ के नाम पर मीटिंग्स में चाय पीते हैं। एंबुलेंस फंसी, स्कूली बच्चे रोते-बिलखते, लेकिन ट्रैफिक पुलिस के जवान तो जैसे ‘जादूगर’ बन गए – कड़ी मशक्कत के बाद जाम खुला, लेकिन अगले दिन फिर वही पुरानी कहानी। क्या यह ओवरब्रिज बनवाने का मतलब था! कि जाम को ‘उन्नत’ स्तर पर ले जाया जाए? फरवरी में तो कई अखबारों ने भी चिल्ला-चिल्लाकर कहा था कि ‘ओवरब्रिज ही समस्या बन गया है’, लेकिन सरकार के कानों पर तो जैसे ‘साइलेंसर’ लगा है – कुछ सुनाई ही नहीं देता!?अब जरा सोचिए, हमारे माननीय अधिकारियों का क्या हाल होगा। वो तो एसी कारों में घूमते हैं, जहाँ जाम का मतलब है ‘जल्दी अमीर’ होना! लिप्पन तिराहे पर जाम लगे तो वो सोचते होंगे, “अरे, ये तो जनता का ‘एक्सरसाइज’ है – रोजाना वॉकिंग ट्रेनिंग!” या फिर, “ओवरब्रिज बन गया, अब तो सब सेट। बाकी तो ड्राइवरों की गलती है।” हाँ भाई, गलती तो हमारी ही है जो हम टैक्स देते हैं, लेकिन सड़कें बनाने की बजाय ‘सेल्फी पॉइंट्स’ बनवा देते हैं। जुलाई में तो तीन घंटे स्कूली वाहन फंसे थे – बच्चे तो डर से काँप रहे होंगे, लेकिन शिक्षा विभाग के बाबूजी शायद ‘ऑनलाइन क्लास’ की योजना बना रहे होंगे। और सरकार। अरे वाह! ‘उत्तर प्रदेश विकास का इंजन’ – लेकिन यह इंजन तो लिप्पन तिराहे पर ही पटरी से उतर गया। चुनावी वादों में ‘स्मार्ट सिटी’ का जाप तो करते हैं, लेकिन यहाँ तो ‘स्मार्ट जाम’ चल रहा है – हर दिन नया रिकॉर्ड तोड़ता। क्या कोई मंत्री साहब कभी पैदल चलकर देख लें। या फिर, ट्रैफिक पुलिस को ‘सुपरपावर’ दे दें – जैसे, जाम को ‘हाइप्नोटाइज’ करने की। नहीं तो जनता की कराहें तो जारी रहेंगी, और अधिकारी महोदयों के ‘कान साफ’ करने का इंतजार ही करते रहेंगे। कहते हैं न, ‘जब तक जूँ न रेंगे, तब तक कान न खुजलाएँगे।’ लेकिन भदोही की जनता के लिए तो ये जूँ ही नहीं, पूरा ‘ट्रैफिक सर्कस’ रेंग रहा है! कब सुधरेंगे ये ‘विकास के पहिए’। या फिर, अगले चुनाव तक इंतजार करें – तब शायद ‘जाम-मुक्त भदोही’ का वादा फिर सुनाई दे। तब तक, हॉर्न बजाते रहिए, भाइयों-बहनों। क्योंकि यही तो हमारा ‘राष्ट्रीय गान’ बन गया है!

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डिप्टी एसपी ऋषिकांत शुक्ला निलंबित, 10 साल में 100 करोड़ की ‘कानूनी’ संपत्ति का ‘आरोप’!

उत्तर प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार का ‘मेगा खुलासा’ लखनऊ/कानपुर(इंद्र यादव,ईशान टाइम्स)। अरे वाह! योगी सरकार ने एक बार फिर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर दी – इस बार भ्रष्टाचार के ‘आइसबर्ग’ की नुकीली चोटी पर! मैनपुरी के डिप्टी एसपी ऋषिकांत शुक्ला को निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने मात्र 10 साल में 100 करोड़ की संपत्ति जोड़ ली। अरे भाई, ये तो कोई ताज्जुब की बात नहीं – पुलिस वाले तो ‘सेवा’ करते हैं ना, सेवा का फल जो मिलता है! एसआईटी की रिपोर्ट कहती है कि ये संपत्ति ‘आय से अधिक’ है। अरे, आय से अधिक। शायद उनकी ‘अज्ञात आय के स्रोत’ कोई लॉटरी टिकट या क्रिप्टो माइनिंग थे, जो रिपोर्ट में छूट गए! कानपुर का ‘कानूनी माफिया’ कनेक्शनशुक्ला जी 1998 से सब-इंस्पेक्टर बने, फिर प्रमोशन पर प्रमोशन – जैसे कोई आईएएस अफसर की तरह! कानपुर में 10 साल गुजारे, जहां वे ‘चर्चित वकील’ अखिलेश दुबे के ‘करीबी’ थे। दुबे भू-माफिया। अरे नहीं, वो तो ‘प्रॉपर्टी कंसल्टेंट’ होंगे! आरोप है कि शुक्ला ने दुबे गैंग के साथ मिलकर लोगों को ‘झूठे मुकदमों’ में फंसाया, जमीनें ‘कब्जा’ करवाईं और ठेकेदारी से ‘काला धन’ कमाया। वाह, क्या मल्टी-टास्किंग! पुलिसिंग, माफिया मैनेजमेंट, रियल एस्टेट – सब एक साथ! पत्नी प्रभा शुक्ला तो दुबे के बेटे-भतीजे के साथ कंस्ट्रक्शन कंपनी चला रही थीं। फैमिली बिजनेस, भाई! बेनामी संपत्ति। वो तो ‘टैक्स प्लानिंग’ का नया नाम है! 12 जमीनें, 11 दुकानें – कुल 92 करोड़ की ‘बाजार मूल्य’! कानपुर के आर्यनगर में दुकानें पड़ोसी देवेंद्र दुबे के नाम पर बेनामी। अरे, पड़ोसी मदद कर रहे हैं, क्या गुनाह। तीन संपत्तियां दस्तावेजों के बिना, लेकिन पैन नंबर से जुड़ीं। पैन कार्ड तो जादू की छड़ी है – कुछ भी जोड़ देता है! और हां, बेटे की शादी ‘ईटरनिटी रिसॉर्ट’ में – 200-250 करोड़ की! बारात में एडीजी, एसपी नाचे। अरे, पुलिस वाले तो ‘ड्यूटी’ पर थे – डांस फ्लोर की सुरक्षा कर रहे थे! काला धन फ्लैट्स में निवेश। वो तो ‘स्मार्ट इन्वेस्टमेंट’ है, स्टॉक मार्केट से बेहतर रिटर्न! गृह सचिव जगदीश ने ‘तत्काल’ निलंबन का आदेश दिया – वाह, क्या स्पीड! डीजीपी को विजिलेंस जांच की सिफारिश। बैंक खाते, ट्रांजेक्शन चेक हो रहे हैं। अन्य अधिकारी जैसे संतोष पांडेय भी लाइन में। शुक्ला कहते हैं आरोप ‘बेबुनियाद’। बिल्कुल, शायद वो ‘ईमानदार भ्रष्टाचार’ कर रहे थे! मैनपुरी से हटाए गए – अब शायद ‘रिटायरमेंट होम’ में आराम करेंगे, अपनी 100 करोड़ की ‘पेंशन’ के साथ। ये मामला पुलिस में भ्रष्टाचार की ‘पोल खोल’ रहा है। अरे, पोल तो पहले से खुली है – बस अब ‘सेल्फी’ ले रहे हैं! योगी जी की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ – कितनी हुईं अब तक! 10 -100 विपक्ष कहता है ‘टिप ऑफ द आइसबर्ग’। हां, बाकी आइसबर्ग तो ‘फ्रीज’ में सुरक्षित है, अगले चुनाव तक! लंबी तैनातियां, माफिया गठजोड़ – ये तो यूपी पुलिस का ‘ट्रेडिशनल डांस’ है, जैसे बारात में नाचना!पुलिस महकमे में ‘हड़कंप’! नहीं भाई, ‘हंसी का माहौल’ है – अगला नंबर किसका! शासन कहता है ‘कोई समझौता नहीं’। हां, समझौता तो सिर्फ माफिया से होता है! आगे और ‘चौंकाने वाले तथ्य’ आएंगे – जैसे, शुक्ला जी ने 100 करोड़ से ‘चंदा’ दिया था किसी मंदिर को! उत्तर प्रदेश पुलिस जहां सेवा का मतलब ‘सेविंग्स’ है, और भ्रष्टाचार ‘बिजनेस मॉडल’! जय हो! — इंद्र यादव (ईशान टाइम्स),indrayadavrti@gmail.com ……🖊️…..🙏

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आपदा ग्रस्त घोषित करने की मांग,सौपा ज्ञापन

बांदा-(सनम खान )।कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिल कर ज्ञापन सौपा।ज्ञापन के माध्यम से जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि जनपद आजादी के 78 वर्ष व्यतीत हो जाने के उपरांत भी अति पिछड़ा जिला है।यहां किसी भी प्रकार का कोई उधोग धंधा नही है।यहां की 80 प्रतिशत जनता कृषि पर निर्भर है।बे मौसम 5 दिनों तक निरंतर चली बारिश से प्रमुख फसलें जैसे धान,अरहर,मूंगफली सहित हरी सब्जियां नष्ट हो गई है।जिससे किसानों को करोड़ों की आर्थिक छति पहुंची है।मांग की गई कि जनपद के प्रत्येक परगना मजिस्ट्रेट को निर्देशित किया जाए कि लेखपालों के माध्यम से जिले के अंदर सर्वे कराकर अभिलंब किसानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए व जिले को आपदा ग्रस्त घोषित किया जाए।जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया है कि हमने निर्देश जारी किए हैं कि प्रत्येक लेखपाल जिम्मेवारी से सर्वे कर तहसील व एसडीएम को अवगत कराएंगे।उचित मुआवजा निर्धारित कर किसानों को दिया जाएगा। प्रतिनिधि मंडल में संकठा प्रसाद त्रिपाठी,मो0 इदरीश खान,सत्य प्रकाश द्विवेदी,भैया लाल पटेल रहे।

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जिलाधिकारी कार्यालय पहुच मुआवजें की मांग की

बांदा-(सनम खान)।बेमौसम बरसात से किसानों की सैकड़ो बीघे की फसल बर्बाद हो गयी है।धान की खराब हुई फसल हाथ में लेकर जिलाधिकारी कार्यालय किसान पहुच गए।जौरही गांव के दो दर्जन किसानों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुचकर ज्ञापन देते हुए अपनी पीड़ा बतायी।किसानों ने बताया कि बेमौसम बरसात के कारण पूरे तरीके से हमारी फसलें खराब हो चुकी है।बरसात के कारण ही किसान आगे भी रवि की बुवाई नही कर पा रहे है।जिलाधिकारी के माध्यम से किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।ज्ञापन देने मे अशोक कुमार राजपूत,जीतू सिंह,लवलेश,रामबाबू,छोटेलाल, जितेन्द्र सिंह,केशन,युवराज,चुन्नीलाल,सत्यम शर्मा आदि दो दर्जन किसान मौजूद रहे।

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तालाब में निकला मगरमच्छ,मचा हड़कंप

बांदा-(सनम खान)।ओरन कस्बे के तिलहर माता मंदिर के तालाब में मगरमच्छ निकलने से आस पास के लोगो मे हड़कंप फैल गया।सूचना देने के बाद करीब पांच घंटे के बाद वन विभाग टीम के दो जवान पहुंचे।लेकिन मगरमच्छ का कुछ नहीं कर पाए।बबेरूपुलिस क्षेत्राधिकारी कार्यालय क्षेत्र अंतर्गत ओरन कस्बे के तिलहर माता मंदिर के तालाब में सोमवार की दोपहर एक मगरमच्छ दिखाई दिया।जैसे ही आसपास के लोगों ने देखा तो वन विभाग व ओरन चौकी पुलिस को सूचना दिया।ओरन चौकी पुलिस पहुंच गई।लेकिन दो से तीन घंटे बीत जाने के बाद भी वन विभाग का कोई भी कर्मचारी व विभाग की टीम नहीं पहुंची है।जिससे आसपास दहशत का माहौल बन गया है। वही मगरमच्छ देखने वालों की भीड़ बढ़ने लगी है।ग्रामीणों का कहना है कि अगर मगरमच्छ जल्दी नहीं पकड़ा गया तो कोई बड़ी घटना को अंजाम मगरमच्छ दे सकता है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग किया है कि जल्द से जल्द विभाग की टीम मौके पर बुलाकर मगरमच्छ को पकड़ने का काम करें।मिली जानकारी के मुताबिक वन विभाग की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मौके पर पहुंची है लेकिन अभी भी मगरमच्छ की पहुंच से दूर है।

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माई की अत्यंत कृपा से यहां की फिजा है निराली यहां पर सब शांति शांति है

विंध्याचल …उत्तरप्रदेश शासन के मंशा अनुरूप वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोमेन वर्मा जी के दिशा निर्देशन में थाना प्रभारी विंध्याचल वेद प्रकाश पांडे पुलिस मय फोर्स के साथ रात्री गस्त पर निकले वाहन चेकिंग अभियान के साथ ही अटल चौराहा,बंगाली चौराहा,बावली चौराहा,बरतर तिराहा गंगा घाट व सदर मार्केट में सघन चेकिंग अभियान चला आम जनमानस से सीधे संवाद कर सुरक्षा शांति व्यवस्था का भी लिया जायजा साथ में धाम चौकी प्रभारी अजय कुमार मिश्रा व सब इंस्पेक्टर संतोष उपाध्याय व सब इंस्पेक्टर संजय सिंह व कांस्टेबल गोपाल सिंह के साथ ही भारी संख्या में पुलिस बल दिख रही थी समय-समय पर होटल व ढाबाओ का भी चेकिंग अभियान आपके द्वारा निरंतर चलाया जाता रहा है भास्कर भट्ट की कलम से✍️

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सत्या रानी रामपाल ट्रस्ट नशा मुक्ति केन्द द्वारा नशा मुक्ति जागरूकता कैम्प का किया गया आयोजन

नशे को रोकने के लिए परिवार, समाज और देश को मिलकर करना होगा प्रयास- डा0 अभिमन्यु रामपाल पंचकूला, 4 नवंबर(,ईशान राय,ईशान टाइम्स ): सत्या रानी रामपाल ट्रस्ट नशा मुक्ति केन्द के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डा0 अभिमन्यु रामपाल की अध्यक्षता में राजकीय माध्यमिक विद्यालय, हरिपुर सैक्टर-4 में नशा मुक्ति जागरूकता कैम्प का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बडी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।इस मौके पर नशा मुक्ति केन्द के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डा0 अभिमन्यु रामपाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि नशा एक ऐसा जहर है जो युवाओं के भविष्य को अंधकारमय बनाता है। पूरे देश में नशे को रोकने के लिए नशा मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। उन्होने कहा कि इसे रोकने के लिए परिवार, समाज और देश को मिलकर प्रयास करना होगा।उन्होंने सभी को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में अवगत करवाते हुए कहा कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने मित्रों, पडोसियों को भी इसके दुष्परिणाम से अवगत करवाएं। उन्होंने स्कूल के प्रधानाचार्य व अध्यापकगण से भी सभी कक्षाओं में नशा मुक्ति से सम्बन्धित स्लोगन, पैंटिंग, लेखन, आदि प्रतियोगिताएं आयोजित करने बारे अपील की और नशा मुक्ति की शपथ लेने बारे बताया गया।इस मौके पर डा0 अभिमन्यु रामपाल के साथ उपस्थित युवा जो कि पूर्व में नशे के आदि थे उन द्वारा बताया गया कि नशे के कारण सिर्फ आर्थिक ही नहीं बल्कि शारीरिक व मानसिक रूप से भी क्षति होती है। जो भी नशे की समस्या से जूझ रहे है उन्हें सकारात्मक विचार अपनाने, योगाभ्यास, व्यायाम करने, विशेषज्ञ से सलाह लेने, खुद में व्यवहार परिवर्तन कर अच्छी आदतें को अपनाने की जरूरत है।इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षक एवं काउंसलर मौजूद थे।

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दो दिवसीय जिला युवा महोत्सव 2025 का समापन

एस. डी. एम. श्री चंद्रकात कटारिया ने विजेता छात्र-छात्राओं को किया सम्मानित पंचकूला नवंबर 4(ईशान राय): दो दिवसीय जिला युवा महोत्सव 2025 का आज रेस्ट हाउस सेक्टर-1, पंचकूला के ऑडिटोरियम में समापन समारोह हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पंचकूला के एस. डी. एम. श्री चंद्रकात कटारिया ने शिरकत की।श्री चंद्रकात कटारिया ने विजेता छात्र-छात्राओं को प्रथम, ‌द्वितीय तथा तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया। कार्यक्रम की सराहना करते हुए उन्होंने छात्र-छात्राओं को अपने लक्ष्य की तरफ लगातार प्रगतिशील होने का संदेश दिया उन्होंने कहा कि यदि कोई छात्र-छात्रा लगातार अपने लक्ष्य की तरफ चाहे धीमे-धीमे ही चलता रहता है तो सफलता एक दिन अवश्य ही उसके कदम चूमती है। छात्र-छात्राओं को उन्होंने विशेष रूप से नशे और बुराइयों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया और जीवन में हमेशा अनुशासित जीवन जीने के लिए प्रेरणा दी।दो दिन तक चले इस रंगारंग कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं में तथा दर्शको में हरियाणा प्रदेश की सस्कृति को प्रदर्शित करते हुए एक बहुत ही बेहतरीन समा बांधा। इस कार्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतियोगी सीधे अब राज्य स्तर पर होने वाले युवा महोत्सव की प्रतियोगिता में भाग लेंगे।कार्यक्रम के अंत में राजकीय औ‌द्योगिक प्रशिक्षण सस्थान पचकूला की प्रधानाचार्य श्रीमती रजनी मल्होत्रा ने आए हुए सभी नेहमानों तथा जिले की अन्य औ‌द्योगिक प्रशिक्षण सस्थानों के प्रधानाचार्यों का इस कार्यक्रम में सहयोग देने हेतु हार्दिक धन्यवाद किया।

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