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बिहार के एग्जिट पोल क्या परिणाम में बदल पाएगा ?

एग्जिट पोल की गूंज : राजनीति में भरोसे की गिरती रेखा संजय राय चुनावी मौसम में जब मतपेटियाँ बंद हो जाती हैं और जनता का फैसला ईवीएम के भीतर कैद रहता है, तभी एक नया खेल शुरू होता है — एग्जिट पोल का। यह खेल अब केवल अनुमान भर नहीं रहा, बल्कि सियासी माहौल गढ़ने का औजार बन चुका है। इस बार बिहार चुनाव में भी यही दृश्य देखने को मिला। लगभग सभी चैनलों और एजेंसियों के एग्जिट पोल्स ने एनडीए को भारी बहुमत दिला दिया। कुछ ने तो बीजेपी को ऐसी सीटें दे दीं, जो गणित और तर्क दोनों से परे हैं। विश्वसनीयता पर सवाल एग्जिट पोल का अर्थ होता है जनता की राय का पूर्वानुमान। लेकिन अब यह “जनता की राय” नहीं, बल्कि “जनता की राय को प्रभावित करने” का माध्यम बन गया है। 2015 के बिहार चुनाव को याद कीजिए — तब भी टीवी चैनलों ने एनडीए की सरकार बनवा दी थी। जैसे-जैसे असली नतीजे आए, वैसे-वैसे वही एंकर अपने स्क्रीन पर दिखाए जा रहे आंकड़ों को दबाने लगे। जनता की आंखों के सामने झूठ हार गया, लेकिन मीडिया की साख भी वहीं दफन हो गई। राजनीतिक मनोविज्ञान का खेल इस बार एग्जिट पोल सिर्फ आंकड़े नहीं दिखा रहे, वे एक मनोवैज्ञानिक माहौल बना रहे हैं — “मोदी लहर अब भी कायम है।” जबकि असल में यह लहर थमी है, और ज़मीन पर जनता के मुद्दे बदल चुके हैं। बेरोजगारी, महंगाई, किसानों का संकट और सामाजिक असमानता जैसे विषय हर गली में गूंज रहे हैं। लेकिन एग्जिट पोल इन सवालों को पीछे धकेलकर एक “जीत की कथा” गढ़ रहे हैं। यह वही रणनीति है जो हरियाणा चुनाव में देखी गई थी — जहां स्थानीय पत्रकार कांग्रेस की बढ़त बता रहे थे, वहीं चैनलों ने बीजेपी की जीत का ढोल पीटा। बाद में जब नतीजे सामने आए, तो सवाल उठा कि क्या यह जीत जनता की थी या ‘व्यवस्थाओं’ की? मीडिया और सत्ता का संगम पत्रकारिता का अर्थ कभी सत्ता से सवाल करना था, लेकिन अब यह सत्ता के प्रचार का जरिया बन चुकी है। एग्जिट पोल का मंच, जनता की राय की जगह सियासी पटकथा पढ़ने का माध्यम बन गया है। यह संयोग नहीं कि हर बार बीजेपी के लिए आंकड़े “अनुकूल” निकलते हैं। यह राजनीतिक मनोविज्ञान को दिशा देने की सुनियोजित कोशिश है, ताकि जनता यह मान ले कि हवा बीजेपी के पक्ष में है। लेकिन हवा केवल आंकड़ों से नहीं, जमीनी सच्चाई से बनती है। वही सच्चाई जो गांवों में, मजदूर बस्तियों में और किसानों के बीच है — जहां लोग अब यह पूछने लगे हैं कि “देश के मुद्दे कब उठेंगे?” लोकतंत्र का असली इम्तिहान भारत जैसे लोकतंत्र में चुनाव केवल वोटों का नहीं, बल्कि भरोसे का पर्व होता है। जब मीडिया जनता का भरोसा खो देता है, तो लोकतंत्र का संतुलन डगमगाने लगता है। आज जब एग्जिट पोल इतने पक्षपाती और योजनाबद्ध नजर आते हैं, तो सवाल उठना लाज़मी है कि यह आंकड़े हैं या अभियान? 14 नवंबर को जब असली नतीजे सामने आएंगे, तब यह साफ हो जाएगा कि जनता ने क्या फैसला किया। लेकिन उससे पहले जो माहौल बनाया जा रहा है, वह हमारे लोकतांत्रिक विवेक के लिए खतरे की घंटी है। सिर्फ बीजेपी या विपक्ष की बात नहीं यह सवाल किसी दल विशेष का नहीं है। अगर कल को यही एग्जिट पोल किसी दूसरे दल के पक्ष में झुक जाएं, तो समस्या वही रहेगी। लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका एक दर्पण की होती है — लेकिन आज यह दर्पण धुंधला कर दिया गया है। नतीजा चाहे जो हो, सबक जरूरी है नतीजे आने के बाद सरकार चाहे जिसकी बने, सबसे बड़ा सबक यही होना चाहिए कि “विश्वसनीयता” किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ होती है। जब पत्रकारिता सत्ताधारी दल के सुर में सुर मिलाने लगे, तो जनता को खुद सतर्क होना पड़ेगा। एग्जिट पोल शायद जीत-हार बता दें, लेकिन जनता का भरोसा किसके पास रहेगा — यही असली चुनाव है।

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मुंबईकर अलर्ट ! बीएमसी दो दिन नहीं करेगी पानी की सप्लाई, जानें किन इलाकों में होगी दिक्कत !

मुंबई: बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने बड़ा ऐलान किया है कि 14 नवंबर (शुक्रवार) सुबह 10 बजे से 15 नवंबर (शनिवार) सुबह 8 बजे तक कुल 22 घंटे शहर के कई प्रमुख इलाकों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप रहेगी। यह कटौती पुरानी और नई तानसा पाइपलाइन तथा विहार ट्रंक मुख्य जलवाहिनी पर 5 बड़े वाल्व बदलने के रखरखाव कार्य के कारण की जा रही है। BMC ने मुंबईवासियों से अपील की है कि वे पहले से पानी स्टोर कर लें और समझदारी से उपयोग करें, ताकि वीकेंड पर पानी की कमी से परेशानी न हो। ये क्षेत्र रहेंगे सबसे ज्यादा प्रभावितBMC की जल आपूर्ति विभाग के मुताबिक, यह बंदी मुख्य रूप से चार वार्डों – एन (N), एल (L), एम पश्चिम (M West) और एफ उत्तर (F North) के हिस्सों में लागू होगी। प्रमुख प्रभावित इलाके,राजावाड़ी,विद्याविहार,कुर्ला पूर्व,चुनाभट्टी,तिलक नगर,वडाला,दादर पूर्व,सायन,माटुंगा पूर्व,प्रतीक्षा नगर,एमएमआरडीए एसआरए कॉलोनी,इनके अलावा आसपास के रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में भी कम दबाव या पूर्ण कटौती का सामना करना पड़ सकता है। BMC अधिकारियों का कहना है कि यह काम लंबे समय से लंबित था और जल आपूर्ति प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए अनिवार्य है। वाल्व बदलने से पाइपलाइनों में रिसाव कम होगा और भविष्य में पानी की बर्बादी रुकेगी। हालांकि, इस दौरान असुविधा होगी, इसलिए BMC ने वैकल्पिक व्यवस्था जैसे टैंकर सप्लाई पर विचार करने की बात कही है, लेकिन मुख्य रूप से लोगों से खुद तैयारी करने की सलाह दी है। घरों में पहले से पानी भरकर रखें, अनावश्यक उपयोग से बचें और अगर जरूरी हो तो BMC हेल्पलाइन पर संपर्क करें। यह कटौती शुक्रवार-शनिवार को होने से वीकेंड प्लान्स पर भी असर डालेगी। BMC का वादा है कि काम समय पर पूरा कर आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

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उपायुक्त सतपाल शर्मा की अध्यक्षता में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन को लेकर जिला चौकसी समिति की बैठक आयोजित

उपायुक्त ने दिए त्वरित और सख्त कार्रवाई के निर्देश 16 श्रमिक बच्चों का करवाया गया स्कूल में दाखिला पंचकूला, 12 नवंबर(ईशान टाइम्स): उपायुक्त सतपाल शर्मा की अध्यक्षता में आज लघु सचिवालय स्थित सभागार में बंधुआ मजदूर उन्मूलन अधिनियम के तहत गठित जिला चौकसी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त ने अधिनियम के अंतर्गत समिति द्वारा अब तक किए गए निरीक्षणों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि यदि जिले में बंधुआ मजदूरी से संबंधित कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाए और दोषियों के विरुद्ध अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि इस प्रकार की गतिविधियों की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने समिति के गैर-सरकारी सदस्यों से भी आह्वान किया कि यदि उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला आता है, तो वे तुरंत प्रशासन को सूचित करें। इस अवसर पर सहायक श्रम आयुक्त श्रीमती अंजना ने जानकारी दी कि अक्टूबर माह में टोका, कालका, रायपुररानी और चरनियां क्षेत्रों में कुल चार निरीक्षण किए गए, जिनमें कहीं भी बंधुआ मजदूरी का कोई मामला नहीं पाया गया। बैठक में बताया गया कि उपायुक्त के निर्देश पर सहायक श्रम आयुक्त श्रीमती अंजना और लेबर इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार द्वारा ईंट भट्ठों पर निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कुछ श्रमिकों के बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सूचना दी गई, जिसके बाद श्रमिक परिवारों के 16 बच्चों का स्कूलों में दाखिला करवाया गया है ताकि वे शिक्षा प्राप्त कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त श्रीमती निशा यादव, एसडीएम पंचकूला चंद्रकांत कटारिया, एसडीएम कालका संयम गर्ग, एसीपी राकेश कुमार, सहायक श्रम आयुक्त श्रीमती अंजना, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी विशाल पराशर, तहसीलदार सुरेश कुमार, लेबर इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार व सुभाष वर्मा सहित गैर-सरकारी सदस्य राजकुमार सैनी और सुशील कुमार उपस्थित रहे।

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सभी प्ले स्कूलों के लिए मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य

बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों ने प्ले स्कूलों से संबंधित विषयों पर की बैठक की अध्यक्षता पंचकूला नवंबर 12(ईशान टाइम्स): हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य श्री अनिल कुमार एवं श्री श्याम सुंदर ने आज लघु सचिवालय में प्ले स्कूल से संबंधित मुद्दों पर आयोजित एक बैठक की अध्यक्षता की । बैठक में संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं जिले के प्ले स्कूल संचालकों ने भाग लिया। बैठक में आयोग के सदस्यों ने सभी संचालकों को सुरक्षित स्कूल वाहन नीति का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी परिस्थिति में नियमों की अवहेलना स्वीकार्य नहीं होगी। आयोग ने इस बात पर बल दिया कि सभी प्ले स्कूलों को मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य है। जो भी व्यक्ति या संस्था प्ले स्कूल का संचालन करना चाहती है, उन्हें अपने जिले के जिला कार्यक्रम अधिकारी से मान्यता लेना आवश्यक है। अधिक जानकारी एवं प्रक्रिया संबंधी मार्गदर्शन के लिए डीपीओ कार्यालय या जिला बाल संरक्षण अधिकारी, पंचकूला से संपर्क किया जा सकता है। आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि जिले में बिना अनुमति चल रहे प्ले स्कूलों की पहचान की जाए, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर मान्यता प्राप्त करने को कहा जाए, और यदि निर्धारित समय के बाद भी वे मान्यता नहीं लेते हैं तो ऐसे प्ले स्कूलों के संचालन को बाल अधिकारों के उल्लंघन के रूप में बंद किया जाए।

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सरस मेला, पंचकूला में आकर्षक हस्तशिल्प और सजावटी वस्तुएं

पंचकूला नवम्बर 12(ईशान टाइम्स): पंचकूला में चल रहे सरस मेला में देशभर से आए शिल्पकारों और कारीगरों ने अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति का अनोखा संगम प्रस्तुत किया है। मेले में विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प, हैंडलूम, ज्वेलरी, सजावटी वस्तुएं, गृह सज्जा सामग्री, मिट्टी के बर्तन और लोक उत्पाद विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सरस मेला न केवल ग्रामीण उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को मंच प्रदान करता है, बल्कि आगंतुकों को भारतीय संस्कृति की झलक भी दिखाता है। मेले में रंग-बिरंगे स्टॉल, पारंपरिक संगीत, लोकनृत्य और स्वादिष्ट व्यंजन दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। यह मेला कला और संस्कृति के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। पंचकूला और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे देश की विविधता और हस्तकला की समृद्ध परंपरा का अनुभव करें।

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मनुष्य का स्वर वह भी प्रकृति का स्वर-वन्दना झा

किसानों को एग्रो फारेस्ट्री पर जोर देना होगा तभी धरती की सेहत ठीक रहेगी-गणवीर धम्मशील पंचकूला नवम्बर 12(ईशान टाइम्स): पुस्तक मेंले के पांचवे दिन महानिदेशक श्री राज नारायण कौशिक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के मार्गदर्शन में ‘‘जैविक खेती सुरक्षित एवं स्वस्थ भविष्य का आधार’’ विषय पर विमर्श एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। पुस्तक मेंले के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के आई एफ एस अधिकारी गणवीर धम्मशील ने कहा कि अभी के समय में किसानों को एग्रो फारेस्ट्री पर जोर देना चाहिए इससे खेती में पानी और खाद का इस्तेमाल कम होगा प्राकृतिक संसाधन के संचय से न सिर्फ जल बल्कि हमारी धरती की सेहत भी ठीक रहेगी। विमर्श सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन संस्थान की अध्यक्ष प्रो. वन्दना झा ने कहा कि प्रकृति और साहित्य के अन्र्तसम्बन्ध का कोई एक उदाहरण नहीं है उन्होंने रविन्द्र नाथ टैगोर, प्रेमचंद की पूस की रात कहानी का उदाहरण देते हुए कहा कि जो मनुष्य का स्वर है वह भी प्रकृति का स्वर है। इसलिए सारी की सारी कहानियां और सारा स्वर प्रकृति का स्वर है। अतः समय आ गया है कि प्रकृति की रक्षा के लिए साहित्य का लेखन करना होगा। वरिष्ठ पत्रकार श्री हरवीर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के समय में जो कृषि ज्ञान है विश्वविद्यालय से निकलकर खेत की मेड़ तक जाना चाहिए । हमारे देश की परंपरा प्रकृति हितैषी की रही है हम ऐसी खेती परंपरा को अपनाये जहां जल, जंगल जमीन की रक्षा हो और मनुष्य समकालीन बिमारियों का शिकार न होना पड़े। वरिष्ठ पत्रकार अजीत सिंह ने कहा कि आज समाज को जागरूक करने में मीडिया एक बड़ा योगदान है। सोसल मीडिया के जरिये ऐसे आयोजनों का प्रचार-प्रसार होना चाहिए। कलाकारों से संवाद करते हुए हरियाणा लोक सेवा आयोग की सदस्य सोनिया त्रिखा ने कहा कि मनुष्य को कलायें सृजन की ओर ले जाती हैं। कला का निर्माण होते देखना ऐसा महसूस होता है कि हमारी सभ्यता कैसे विकास की राह पर जा रही है उन्होंने पुस्तक मेंले में सभी स्टालों का भ्रमण किया और एक-एक प्रकाशक से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि आप किताबें बेचने नहीं आये हैं आप हरियाणा की नयी पीढ़ी को ज्ञान से सींचने आये हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक मेला हिन्दी, अंग्रेजी, पंजाबी उर्दू भाषाओं का संगम बन गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सहयोग से हरियाणवी संस्कृति पर विवाह परंपरा पर आधारित प्रस्तुति दी गई जिसमें हरियाणवी शादी रंगों, संगीत और पुरानी परंपराओं को दिखाया गया। कार्यशाला की शुरूआत नृत्य साधना स्कूल के कलाकार बेदांग मेहता ने गणेश वंदना, कत्थक नैरिति ढोगरा और उसकी टीम, शुरूआत समिति ने बसुन्धरा बोली नाटक एवं डी ए वी पुलिस पब्लिक स्कूल मधुवन द्वारा हरियाणवी ग्रूप डांस विकल्प रंजन द्वारा फैज की गजल प्रस्तुत की। डिप्टी डायरैक्टर एच ई आर सी विशेष रूप से मौजूद थे और उन्होने अपने विचार साझा किये। विमर्श एवं कार्यशाला के सफल संयोजन में डॉ. सुभाष चन्द्र, सुमित्रा रानी, डा. राजेश लाठर, डॉ. विजय लोहान, मंगत राम, इन्दू रानी एस एण्ड एस आर्गैनिक फार्म अहिरका जीन्द का विशेष सहयोग रहा।

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बिहार में चुनाव और दिल्ली में विस्फोट

अमरेंद्र कुमार राय(वरिष्ठ पत्रकार/राजनीतिक विश्लेषक) बिहार में मंगलवार को 11 नवंबर को दूसरे और आखिरी दौर का मतदान है। इससे एक दिन पहले सोमवार को दिल्ली में लाल किले के पास एक चलती कार में बम विस्फोट हुआ जिसमें नौ लोगों की मृत्यु की खबर है। देश की राजधानी नई दिल्ली से बिहार की राजधानी पटना की दूरी करीब एक हजार किलो मीटर है। क्या इन दोनों घटनाओं का आपस में कोई रिश्ता है ?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद देश में बहुत कुछ नया हो रहा है। सबसे खास बात यह है कि यह सरकार घटनाओं या कार्यक्रमों को आयोजन के रूप में पेश करती है। कुछ इस अंदाज में कि इससे पहले न तो देश में ऐसा कुछ हुआ न भविष्य में ऐसा कुछ हो सकता है। बात-बात में कहा जाता है कि पिछले सत्तर सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ। हालांकि यह सब बेकार की मनगढ़ंत और झूठी बातें होती हैं, लेकिन दावा जरूर किया जाता है। इसे आप वर्तमान शासक वर्ग की कुंठा कह सकते हैं। ये हर मामले में अपनी तुलना उस क्षेत्र के ताकतवर व्यक्ति से करते हैं। जैसे देश में आम धारणा है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू देश के सबसे सुयोग्य और विद्वान प्रधानमंत्री रहे हैं। उन्होंने तीन बार आम चुनाव जीते और प्रधानमंत्री बने। देश में अभी तक सबसे ज्यादा समय तक वही प्रधानमंत्री रहे। अब यहां दो काम किया जा रहा है। एक, हर मामले में नेहरू से अपनी तुलना और दो नेहरू जैसा जो काम नहीं कर सकते वहां उनकी बनाई लकीर को छोटा करना। आजकल आप आम तौर पर सुनते रहते होंगे कि नेहरू ने कितनी बड़ी-बड़ी गलतियां कीं। यहां तक कि अगर नेहरू नहीं प्रधानमंत्री बने होते तो देश का वंटवारा भी नहीं हुआ होता। हालांकि इन बातों में कोई सच्चाई नहीं है। इन बातों को वही लोग मानते हैं जिनका इतिहास का ज्ञान शून्य है। किताबों से दूर-दूर तक वास्ता नहीं है। इसी तरह देश की सबसे ताकतवर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को माना जाता है। उन्होंने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया था। तो ताकतवर प्रधानमंत्री की बात होती है तो अब का शासक वर्ग अपनी तुलना इंदिरा गांधी से करता है। वे बताते हैं कि देश अब आतंकवाद बर्दाश्त नहीं करेगा। घर में घुसकर मारेगा। 2019 में पुलवामा की घटना के बाद घर में घुसकर मारा। अभी पीछे भी पहलगाम की घटना के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया। कुल मिलाकर यह बताने की कोशिश की जाती है कि पिछले सत्तर सालों में इतना सुयोग्य और ताकतवर प्रधानमंत्री दूसरा नहीं हुआ। जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। जो व्यक्ति डर कर संसद का सामना न कर पाता हो, देश का एक राज्य मणिपुर जल रहा हो और वहां जाने की हिम्मत न जुटा पा रहा हो, विदेशों में लगातार अपमानित हो रहा हो, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि व्यापार की धौंस जमाकर हमने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया और अपने प्रधानमंत्री में इतना भी साहस नहीं है कि वो कह सकें कि ट्रंप झूठ बोल रहे हैं, वो नेहरू और इंदिरा गांधी की योग्यता और साहस का मुकाबला कहां से करेंगे ?सचमुच इससे पहले देश में चुनाव और आतंकवादी घटनाओं का जुड़ाव नहीं होता था। आतंकवादी घटनाएं होती थीं, खूब होती थीं लेकिन शासक वर्ग की मंशा पर संदेह नहीं होता था कि किसी लाभ के लिए शासक वर्ग खुद इस तरह की घटनाएं करा रहा है या इन घटनाओं का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन जब से पुलवामा की घटना घटी है तब से लोगों के मन में यह संदेह है कि इन घटनाओं के पीछे सरकार की कुछ न कुछ मंशा अवश्य है। यह सरकार अपने आप को बहुत ज्यादा ताकतवर बताती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब विपक्ष में थे और गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो सवाल उठाते थे कि सेना केंद्र के अधीन है। सीमाओं पर केंद्रीय बल तैनात हैं। फिर आतंकवादी भारत में घुस कैसे जाते हैं ? लेकिन वही मोदी जी अब जब खुद केंद्र में हैं यह नहीं बताते कि आतंकवादी कैसे भारत में घुस जाते हैं और आतंकवादी हरकत करके वापस भी चले जाते हैं। पुलवामा की घटना जहां हुई वह हाई सिक्योरिटी जोन है। वहां बिना चेकिंग के आम आदमी नहीं जा सकता। उस घटना को हुए छह साल हो चुके लेकिन आजतक यह पता नहीं चला कि वे आतंकवादी पाकिस्तान से भारत में कैसे घुसे ? उतने हाई सिक्योरिटी जोन में कैसे पहुंचे ? जिन जवानों को वायुयान के जरिये भेजा जाना चाहिए था, उन्हें सड़क के रास्ते क्यों भेजा गया ? इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री कहां से आई ? कुछ लोग शक जताते हैं कि मोदी जी की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से गिर रहा था। 2016 की नोटबंदी और 2017 में जीएसटी कानून लगाने के बाद मोदी जी से देश की जनता निराश थी और 2019 में इनके चुनाव जीतने की उम्मीद बिलकुल भी नहीं थी। चुनाव जीतने के लिए ही पुलवामा की साजिश रची गई। नतीजा यह हुआ कि चुनाव में इसका बखूबी लाभ उठाया गया और जहां बीजेपी और नरेंद्र मोदी के हारने की आशंका थी वहां पुलवामा के जरिये माहौल बनाकर पहले से भी ज्यादा सीटें जीती गईं। इसी तरह 2024 के चुनाव में चार सौ सीटें जीतने का दावा किया गया। लेकिन जनता ने मोदी जी को बहुमत भी नहीं दिया। सरकार बैसाखी पर आ गई। कुछ लोगों का कहना है कि तब जनता का ध्यान देश की समस्याओं से हटाने और लोकप्रियता बढ़ाने के लिए पहलगाम की घटना का उपयोग किया गया। ऐसे भी बहुत सारे लोग हैं जो मानते हैं कि पहलगाम की घटना भी राजनीतिक लाभ के लिए कराई गई। उस घटना के बाद मोदी जी ने पूरे देश में सिंदूर बंटवाने का अभियान छेड़ने की घोषणा की। पूरे देश में तिरंगा यात्रा निकाली गई। मतलब ये कि उस आतंकवादी घटना का राजनीतिक लाभ लेने की पूरी कोशिश की गई। अब जब बिहार में दूसरे चरण का मतदान है और उससे ठीक एक दिन पहले जब दिल्ली में बम विस्फोट हुआ है तो बहुत सारे लोगों के मन में

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रहेंगे हिन्दुस्तान मे, खाएंगे यहां, लेकिन वंदे मातरम का विरोध करेंगे:योगी आदित्यनाथ

यूपी के बाराबंकी मेंसीएम योगी आदित्यनाथ ने वंदे मातरम का विरोध करने वालों पर जमकर हमला बोला.कहा ‘रहेंगे हिन्दुस्तान मे, खाएंगे यहां, लेकिन वंदे मातरम का विरोध करेंगेबाराबंकी (ईशान टाइम्स)।.बाराबंकी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने आज बन्देमाँ तरम का विरोध करने वाले पर जमकर भड़ास निकालीसीएम ने कहा इन चेहरों को पहचानो, जो शासकीय योजना में हड़पने की होड़ में पहली लाइन में खड़े होते हैं, लेकिन जब ‘वंदे मातरम’ गान की बात होती है तो कहते हैं कि हम नहीं गाएंगे.’सीएम योगी ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों के साथ अपने भाषण की शुरुआत की. इसके साथ ही उन्होंने सरदार पटेल और डॉ. आंबेडकर के योगदान को भी याद किया. सीएम ने कहा कि अंग्रेजों और मुगलों ने देश को बांटने का काम किया.सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीतापुर की महमूदाबाद स्टेट को शत्रु संपत्ति बताते हुए कहा कि ये महमूदाबाद का नवाब (राजा) मुस्लिम लीग का कोषाध्यक्ष था. इसने पाकिस्तान बनवाने में बड़ा सहयोग दिया था. आज इसकी सारी संपत्ति शत्रु संपत्ति है.सीएम यहीं नहीं रुके, उन्होंने सरदार पटेल की प्रशंसा करते हुए कहा कि हैदराबाद का निजाम और जूनागढ़ का नवाब अपनी स्टेट को पाकिस्तान में मिलाना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने इनको समझाया तो ये लोग पाकिस्तान चले गए.कांग्रेस पर किया वारसीएम योगी ने आगे कहा कांग्रेस ने कभी सरदार पटेल का सम्मान नहीं किया. देश के 14 राज्यों ने कहा था सरदार पटेल को देश का प्रधानमंत्री बना दो. लेकिन इन लोगों ने नहीं बनने दिया. ये परिवार की राजनीति करने वाले लोग हैं. जातीय राजनीति, परिवार की राजनीति, मजहब की राजनीति और विभाजनकारी नीतियों जैसी बातों को कतई स्वीकार नहीं करना चाहिए.फ़ैमिली गेमसीएम बोले- बाराबंकी में विकास की बहाई गंगासीएम योगी ने बाराबंकी जिले के विकास को लेकर कहा कि यहां किसान खूब तरक्की कर रहा है. हमने मेंथा की फसल में 18% जीएसटी घटाकर 5% कर दिया है. उन्होंने बाराबंकी की दरियाबाद विधानसभा के विधायक सतीश शर्मा के कहने पर रामसनेही घाट में 232 एकड़ का इंडस्ट्रियल एरिया का निर्माण कराए जाने की घोषणा की. इसके अलावा हैदरगढ़ विधानसभा के पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर विधायक दिनेश रावत के प्रस्ताव पर 100 एकड़ में इंडस्ट्रियल और स्किल डेवलपमेंट के विकास के निर्माण करवाया जाएगा.सीएम योगी का पोस्टअपने पोस्ट में सीएम योगी ने लिखा- ‘राष्ट्रीय एकता, केवल एक शब्द नहीं, हम सभी की आन, बान और शान है, हमारा अस्तित्व है, हमारा और आने वाली पीढ़ी का भविष्य है. लौह पुरुष, ‘भारत रत्न’ सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की 150वीं जयंती समारोह अभियान के अंतर्गत आज जनपद बाराबंकी की विकास यात्रा को गति देते हुए ₹1,734 करोड़ लागत की 254 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया. इस अवसर पर विभिन्न लोक-कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को चेक एवं प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए. बाबा लोधेश्वर महादेव जी की पावन धरा को कोटि-कोटि नमन एवं सभी लाभार्थियों को हार्दिक बधाई.’

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ठंडी रात में 16घर जल के हुए राख

कुल्लू (ईशान टाइम्स )।कुल्लू घाटी की ठंडी रातों में झनियार गांव के 16 परिवारों की उम्मीदें पलभर में राख हो गई। भीषण अग्निकांड में पीडि़त परिवारों की जिंदगी की सारी जमा-पूंजी आग की लपटों में जलकर राख के ढेर में तबदील हो गई। सोमवार दोपहर करीब दो बजे जब पहाड़ खामोश थे, तब एक घर से उठी चिंगारी ने पलक झपकते ही पूरे गांव को अपने चपेट में ले लिया। लोगों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए खुद को घरों से बाहर निकाला, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। आग इतनी भयंकर थी कि देखते ही देखते सारी कमाई आंखों के सामने तबाह हो गई। अग्निकांड में मासूम बच्चों के खिलौने व स्कूल बैग भी जल गए। अग्निकांड के बाद गांव में सन्नाटा छा गया। अब हर चेहरे पर एक ही सवाल है। इस सर्दी में रात कैसे कटेगी। जहां कभी रसोई की आंच से घर गर्म रहता था। वहां अब राख उड़ रही है और ठंडी हवाएं सीने को चीर जाती हैं। इन जले हुए घरों से उठता धुआं सिर्फ आग का नहीं उन लोगों की मजबूरी, बेबसी और टूटे हुए सपनों की निशानी है। अब प्रभावितों की नजर सरकार पर टिकी हुई है कि अब सरकार ही उन्हें उनके गांव व घर को बसाने में मदद कर पाएगी। प्रभावितों को अब सरकार से ही उम्मीद है कि फिर से पूरा गांव बसाने में सरकार ही प्रभावितों की मदद कर पाएगी।

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पत्नी की डिमांड बढ़ रही थी राहुल झूल गया फंदे से

उत्तर प्रदेश की मिट्टी फिर से खून से लाल हो गई। बदायूं में 22 साल का राहुल दुबे, जो जागरण पार्टी में गाता था और ईको गाड़ी चलाकर परिवार पालता था, फांसी के फंदे पर लटक गया। मौत से ठीक पहले उसने ऑडियो रिकॉर्ड किया “पत्नी दुर्गा और ससुराल वाले जिम्मेदार हैं। सात लाख मांग रही है, दिल्ली में भाइयों के साथ रहने का दबाव, दहेज केस की धमकी, तलाक की जिद!” भाई शिवम रोते हुए कहता है, “भाई मेहनती था, लेकिन भाभी नहीं रहना चाहती थीं।” पुलिस पोस्टमॉर्टम करा रही है, ऑडियो फॉरेंसिक में जाएगा, और ससुराल पर केस बनेगा। घर में कोहराम, मातम का माहौल। लेकिन हे सरकार! हे हमारे “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” वाले महानायकों! यह सब देखकर आपकी हंसी नहीं रुकती! आखिर यह तो आपकी “महिला सशक्तिकरण” नीति का जीता-जागता प्रमाण है न!सोचिए जरा, शादी के दो साल भी नहीं हुए, 21 मई 2023 को ब्याह हुआ, और पत्नी सीधे दिल्ली भाग गई भाइयों के पास। राहुल अकेला कमरे में बंद, तीन लाख देने को तैयार, लेकिन नहीं! सात लाख चाहिए, वरना दहेज उत्पीड़न का मुकदमा, घरेलू हिंसा का केस, पूरे परिवार को जेल! अरे, क्या खूबसूरत “सशक्तिकरण” है यह! सरकार जी, आपने तो कानून बनाए हैं, IPC 498A, दहेज निषेध अधिनियम, घरेलू हिंसा कानून। लेकिन ये कानून तो सिर्फ एक तरफ की तलवार हैं न! पति की गर्दन पर लटकती है, पत्नी की हाथ में चाबुक। राहुल जैसे हजारों युवक रोज आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन आंकड़े! ओह, वो तो “महिलाओं के खिलाफ अपराध” में गिने जाते हैं। पुरुषों की आत्महत्या! वो तो “मानसिक तनाव” है, “व्यक्तिगत समस्या”। सरकार की रिपोर्ट्स में “दहेज से मौत” सिर्फ बहू की होती है, दामाद की नहीं। राहुल का ऑडियो सुना! वो चीख रहा है ,”मैं तंग आ गया!” लेकिन कानून कहता है, “महिला की बात पहले मानो, सबूत बाद में। हे माननीयों! आपकी सभाओं में भाषण देते हो, “महिलाओं को अधिकार दो!” लेकिन अधिकार के नाम पर धमकी! सात लाख की मांग को “अधिकार” कहोगे! दिल्ली में भाई-भाभी के साथ रहने की जिद को “स्वतंत्रता”! और अगर पति ने तीन लाख दिए, तो क्या! वो तो “दहेज देना” अपराध है न! कानून कहता है, दहेज लेना-देना दोनों गुनाह। लेकिन पत्नी मांगती है तो “उसका हक”, पति देता है तो “अपराधी”। राहुल ने नहीं दिया, तो फंदा लगा लिया। अगर दे देता, तो जेल जाता। दोनों तरफ मौत! सरकार जी, आपकी यह “लैंगिक समानता” क्या है! पुरुषों के लिए फांसी का फंदा, महिलाओं के लिए धमकी का हथियार! परिवार बिखर रहे हैं, युवक मर रहे हैं। बदायूं का यह मामला अकेला नहीं ,हरियाणा, राजस्थान, यूपी में रोज ऐसी खबरें। लेकिन आप क्या कर रहे हो? “महिला हेल्पलाइन” तो है, “पुरुष हेल्पलाइन” कहां! कानून में संशोधन कब, कि झूठे केस पर सजा हो! नहीं, आप तो वोटबैंक की राजनीति में व्यस्त हो। “बेटियों को सशक्त बनाओ” कहकर कानून एकतरफा बनाए, अब बेटों की लाशें गिनो। राहुल का भाई रो रहा है, मां बेसुध है, लेकिन ससुराल वाले, शायद दिल्ली में पार्टी मना रहे होंगे “जीत गए! दहेज का दानव कानून के कठघरे में छिपा है, और आप चुप हो। राहुल जैसे युवकों की आत्मा चीख रही है, “न्याय दो!” लेकिन न्याय! वो तो सिर्फ बहू के लिए है न! हे सरकार, जागो! वरना अगला फंदा कोई और राहुल लगाएगा, और तुम्हारी “सशक्त भारत” की इमारत लाशों पर खड़ी होगी। दर्दभरा सत्य यह कि कानून सुधारो, वरना यह व्यंग्य शोकगीत बन जाएगा , हर घर का। जय हिंद! नहीं, जय न्याय!

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