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इंसान ही इंसान के साथ अन्याय करे, तो किससे शिकाय ! धर्मेंद्र-अमिताभ की मुलाकात से उपजा दर्द !

मुंबई! बॉलीवुड के धाकड़ हीरो धर्मेंद्र अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटे, तो उनकी मुस्कान में छिपी थकान किसी को नजर नहीं आई। लेकिन अगले ही दिन, उनके चिरपरिचित दोस्त अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली, जो दिल को छू गई। “धर्मेंद्र से मिलने के बाद… इंसान ही इंसान के साथ अन्याय करे, तो किससे शिकायत करें! ” ये शब्द सिर्फ एक पोस्ट नहीं, बल्कि एक गहरा दर्द थे। अमिताभ की आंखों में आंसू और आवाज में कंपकंपी, धर्मेंद्र की कमजोर हालत देखकर उमड़ी थी। दो दिग्गजों की ये मुलाकात हमें याद दिलाती है कि जिंदगी की जंग में सबसे बड़ा दुश्मन कभी-कभी हमारा अपना शरीर ही बन जाता है , और उससे लड़ते हुए इंसान अकेला पड़ जाता है।/कल्पना कीजिए, वो धर्मेंद्र जो कभी स्क्रीन पर घोड़ों को दौड़ाते, दुश्मनों को धूल चटाते नजर आते थे, आज अस्पताल की चारदीवारी में कैद हैं। उम्र का बोझ, बीमारियों का साया , ये वो अन्याय है जो प्रकृति करती है, लेकिन अमिताभ का सवाल इससे कहीं गहरा है। इंसान ही इंसान के साथ अन्याय करे… शायद वो उस दर्द की बात कर रहे हैं जो अपनों से मिलता है। बॉलीवुड की चकाचौंध दुनिया में कितने ही सितारे अकेले लड़ते हैं। धर्मेंद्र जैसे योद्धा को देखकर अमिताभ को अपना दर्द याद आया होगा, वो दौर जब वो खुद कोमा में थे, और दुनिया ने उन्हें अलविदा कह दिया था। लेकिन असल अन्याय तो वो है जब अपनों की उदासीनता घाव पर नमक छिड़कती है। दोस्ती की ये मुलाकात बताती है कि सच्ची दोस्ती में दर्द बांटा जाता है, न कि छिपाया। समाज में देखिए तो ये दर्द हर घर में बिखरा पड़ा है। बुजुर्ग माता-पिता अस्पताल के बिस्तर पर तड़पते हैं, और बच्चे फोन पर व्यस्त। पड़ोसी की बीमारी पर हम सहानुभूति जताते हैं, लेकिन मदद की हाथ नहीं बढ़ाते। इंसान का इंसान के साथ अन्याय यही है ,भावनात्मक उपेक्षा। अमिताभ की पोस्ट एक आईना है, जो हमें पूछती है, किससे शिकायत करें! सरकार से! डॉक्टरों से! या खुद से! धर्मेंद्र की डिस्चार्ज की खुशी में भी एक सबक है , जिंदगी क्षणभंगुर है। वो 12 नवंबर का दिन हमें सिखाता है कि स्वास्थ्य खोने के बाद पैसा, शोहरत कुछ नहीं रह जाता। बस अपनों का साथ चाहिए, जो दर्द में साथ खड़ा हो।ये कहानी सिर्फ दो सितारों की नहीं, हम सबकी है। हर उस इंसान की जो अकेले लड़ रहा है। अमिताभ का भावुक संदेश चेतावनी है, अन्याय मत करो, क्योंकि कल तुम्हारा नंबर आ सकता है। धर्मेंद्र को देखकर रोएं नहीं, बल्कि अपने बुजुर्गों से मिलें, दोस्तों को गले लगाएं। क्योंकि इंसानियत का असली धर्म यही है , दर्द में साथ निभाना। वरना, किससे शिकायत करेंगे हम !

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लक्जरी गाड़ी पे लिखा था विधायक, और बजा रहे थे हूटर पुलिस ने किया सीज

‘यूपी’ के ‘छपरी’ युवा के बीएमडब्ल्यू का भौकाल ! बसंतपुर वाला बाबू मैं, जो चाहूं वो करूं! हूटर का हंगामा ! लखनऊ में एक रईसज़ादे की ‘शोले’ वाली सजा! अरे भाई, ये लखनऊ की गोमतीनगर विस्तार की गलियां नहीं, बॉलीवुड की कोई एक्शन फिल्म का सेट लग रहा था! आधी रात, चांदनी रात में एक चमचमाती बीएमडब्ल्यू दौड़ रही है। हूटर बज रहा है – वीं-वूं-वीं! मानो कोई मंत्री जी का काफिला गुजर रहा हो। ऊपर से स्टीकर चिपका, विधायक! अंदर बैठा रईसज़ादा, शीशे नीचे करके हवा खा रहा है, सोच रहा है , “बसंतपुर वाला बाबू मैं, जो चाहूं वो करूं!” लेकिन भाई, यहां तो उत्तर प्रदेश पुलिस का गब्बर सिंह तैनात है , इंस्पेक्टर सुधीर अवस्थी! इंस्पेक्टर साहब कार रोकते हैं। रोशनी की किरणें पड़ती हैं रईसज़ादे के चेहरे पर। इंस्पेक्टर गरजते हैं,”अरे ओ संभाजी… लग्जरी गाड़ी है, हूटर बज रहा है, विधायक लिखा है… कौन हो तुम!विधायक हो! लड़का घबराकर, हाथ जोड़कर,”नहीं सर, गाड़ी खरीदी है… हूटर पहले से लगा है… विधायक भी पहले से लिखा था…”इंस्पेक्टर की आंखें तरेरती हैं,तो हटाया क्यों नहीं!!”लड़का अब रोने की एक्टिंग, “सर गलती हो गई… माफ कर दीजिए…”इंस्पेक्टर मुस्कुराते हैं, लेकिन वो मुस्कान जिसमें दांत दिखते हैं, खतरे की! “ऐसी गलती के लिए तो पुलिस है… पुलिस सिखाएगी तुम्हें कि दोबारा गलती नहीं करनी है… कितने आदमी थे!अरे, सिर्फ तू! चलो, गाड़ी सीज़!” और बस, दरोगा और सिपाही दौड़े। बीएमडब्ल्यू पर ताला! रईसज़ादा की घिग्गी बंध गई। पहले तो भोकाल मचा रहा था, “मेरा बाप कौन है!” वाला सीन। अब, “सर, एक मौका और… मैं सुधर जाऊंगा!” लेकिन इंस्पेक्टर सुधीर अवस्थी तो वो शेर हैं, जो जंगल के राजा नहीं, कानून के राजा हैं। बड़े-बड़े स्टंटबाजों को आसमान के तारे दिखा चुके हैं। फर्जी विधायक बनकर हूटर बजाना! “ये पुलिस की चौकी है, यहां फर्जीवाड़ा नहीं चलता… जय-वीरू भी आ जाएं, तो भी गाड़ी सीज़! सच्चाई है भाई! आजकल के रईसज़ादे सोचते हैं , पैसा है तो भोकाल है। हूटर लगा लो, स्टीकर चिपका लो, रात में राजा बन जाओ। लेकिन यूपी पुलिस के सामने! “तुम्हारा नाम क्या है, बेटा! …फर्जी! अब जाओ, थाने में ‘कुत्ते-बिल्ली’ वाला गाना गाओ!” इंस्पेक्टर सुधीर जैसे अफसर बताते हैं ,कानून अमीर-गरीब नहीं देखता, सिर्फ गलती देखता है। और गलती की सजा! “गाड़ी जब्त, भोकाल खत्म… अब पैदल चलो, विधायक जी! इंस्पेक्टर की जीत! रईसज़ादा की हार! और हम दर्शकों का मनोरंजन। “ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर… नहीं, ये गाड़ी मुझे दे दे रईसज़ादे!” लखनऊ की रातें अब सुरक्षित , क्योंकि सुधीर अवस्थी हैं ना! बस, अगली बार हूटर बजाओ तो असली वाला बजाओ… वरना पुलिस का डंडा बज जाएगा! पिछवाड़े!

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होनहार’ दरोगा 30 हजार में बिका, अब जेल में ‘फाइनल रिपोर्ट’ लगेगी!

उत्तर प्रदेश लखनऊ। अरे दरोगा जी, ये क्या, वर्दी पहनकर ‘डॉन’ बनने चले थे, अब तो ‘जेल की रोटी’ खानी पड़ेगी!” फिल्मी अंदाज में कहें तो, शोले का गब्बर होता तो बोलता, “तुम्हारा नाम क्या है, बसंती! नहीं, कर्मवीर! 30 हजार में बिक गए रे!” लखनऊ की चकाचौंध भरी सड़कों पर, फीनिक्स पलासियो मॉल के गेट नंबर 7 के सामने, एक ‘हीरो’ बनने का सपना देख रहा था अमेठी का सब-इंस्पेक्टर कर्मवीर सिंह। पुराना मुकदमा, फाइनल रिपोर्ट (एफआर) का लालच, और गंगाराम भाईसाहब से 30 हजार की ‘डिमांड’! पहले भी मोटी रकम वसूल चुके थे, लेकिन लालच तो देवदास की तरह थमता नहीं, “एक बार और, एक बार और!” धमकी की स्क्रिप्ट रटी हुई: “जेल भेज दूंगा!” अरे भाई, खुद ही जेल की हवा खाने पहुंच गए! “पैसे दो, केस क्लोज! नहीं तो… जेल की सलाखें गिनो!” ये डायलॉग तो सिंघम का लगता है, लेकिन असल में घूसखोर दरोगा का था। गंगाराम तंग आकर एंटी करप्शन टीम के पास पहुंचे। टीम ने जाल बिछाया , सादे कपड़ों में, कोई शक न हो। दरोगा जी मॉल के सामने आए, पैसे लिए, और… “हाथ ऊपर करो! तुम गिरफ्तार हो!” धूम स्टाइल में छापा! घबराए कर्मवीर कुछ बोल भी न पाए, रकम बरामद, और सीधे जेल की ‘एंट्री’! ये कोई अकेला ‘विलेन’ नहीं। पिछले हफ्ते मऊ का अजय सिंह 20 हजार में पकड़ा गया। प्रतापगढ़, प्रयागराज, वाराणसी (मोदी जी का गढ़!) दर्जनों दरोगा-कॉन्स्टेबल घूस के ‘नेक्सस’ में फंसे। “ये पुलिस नहीं, ‘बिजनेस’ है भाई!” , गैंग्स ऑफ वासेपुर की तरह पूरा डिपार्टमेंट ‘फैमिली बिजनेस’ लगता है। ऊपर से ‘मेहरबानी’, नीचे जांच की कमी , भ्रष्टाचार का सांप विभाग की जड़ों तक फैल चुका। शिकायतें आला अफसरों तक पहुंचती हैं, लेकिन कई को ‘दबाव’ में दबा दिया जाता। “कानून के रखवाले खुद कानून तोड़ें, तो जनता क्या करे!भागे या घूस दे,योगी जी सुधार के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं , जीरो टॉलरेंस, सख्त कार्रवाई! लेकिन जमीन पर! “बड़े-बड़े दावे, छोटे-छोटे रेट! 30 हजार में दरोगा, 20 हजार में कॉन्स्टेबल!” एंटी करप्शन की टीम तो ‘हीरो’ बन रही, रंगे हाथ पकड़कर। लेकिन सवाल वही, कब तक ऐसे ‘होनहार’ वर्दी पर दाग लगाते रहेंगे!जड़ से खात्मा चाहिए ,पारदर्शी जांच, सख्त सजा, और लालच पर ‘फाइनल रिपोर्ट’!”अंत में, दरोगा जी को सबक, लालच बुरी बला है! अगली बार ‘फ्री’ में केस सॉल्व करना, वरना जेल में ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट’ मिलेगा!”, लगे रहो मुन्नाभाई स्टाइल में कहें तो, गांधीगिरी अपनाओ, घूसगिरी छोड़ो! वरना, योगी राज में ‘बिकना’ महंगा पड़ेगा रे बाबा.

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धीरेंद्र शास्त्री से मिलवाने के नाम पर किया महिला का बलात्कार और ब्लैकमेल का आरोप

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री से मिलवाने के नाम पर महेंद्र दुबे नें महिला का किया बलात्कर और ब्लैकमेल का आरोप मध्य प्रदेश! छतरपुर की उस 27 वर्षीय महिला की कहानी सुनकर दिल दहल जाता है। धीरेंद्र शास्त्री जैसे आध्यात्मिक नेता से मिलने की आस में उसने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया,पैसे, सम्मान, शरीर और आत्मा। महेंद्र दुबे नाम का शख्स, जो खुद को बागेश्वर धाम का सक्रिय शिष्य बताता था, ने ठगी का ऐसा जाल बिछाया कि महिला न केवल ढाई लाख रुपये गंवा बैठी, बल्कि दुष्कर्म की शिकार हुई, ब्लैकमेल का सामना किया और अंत में मारपीट-लूट की गवाह बनी। यह सिर्फ एक महिला की त्रासदी नहीं, बल्कि हमारे समाज की उस गहरी बीमारी का आईना है, जहां आस्था को हथियार बनाकर कमजोरों को लूटा जाता है। कितने दर्दनाक है कि भगवान के नाम पर इंसान इंसान का शिकार बन जाता है! सोचिए, उस महिला के मन में क्या चल रहा होगा। आध्यात्मिक सांत्वना की तलाश में वह ऑनलाइन और ऑफलाइन दुनिया में भटक रही थी। शादी का झूठा वादा, मिलने का लालच , ये वे हथकंडे हैं जो रोजाना हजारों महिलाओं को फंसाते हैं। महेंद्र दूबे ने न केवल पैसे ऐंठे, बल्कि चुपके से वीडियो बनाकर ब्लैकमेल की। फिर शनिवार रात बड़े बगराजन में बुलाकर मारपीट की, फोन, चेन और बाली छीन ली। यह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक निर्दयी खेल है जहां पीड़िता की चीखें अनसुनी रह जाती हैं। पुलिस ने दो थानों में केस दर्ज किया है, छापेमारी चल रही है, लेकिन क्या गिरफ्तारी से उस महिला का खोया सम्मान लौट आएगा! क्या उसके जख्म भर जाएंगे!यह घटना हमें समाज की कड़वी सच्चाई से रूबरू कराती है। हमारा समाज आस्था का कितना दुरुपयोग करता है! बागेश्वर धाम जैसे स्थान लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण हैं, लेकिन ऐसे ठग उन्हें बदनाम करते हैं। महिलाएं सबसे ज्यादा शिकार बनती हैं क्योंकि सामाजिक दबाव उन्हें चुप रहने पर मजबूर करता है। शादी का वादा, ब्लैकमेल, दुष्कर्म , ये पुरानी कहानियां हैं, लेकिन हर बार नई पीड़ा लेकर आती हैं। क्यों हमारी बेटियां, बहनें सुरक्षित नहीं! क्यों आस्था के नाम पर ठगी को रोकने के लिए सख्त कानून नहीं! पुलिस कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन हमें जागरूकता फैलानी होगी , ऑनलाइन ठगों से सावधान रहें, अजनबियों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।हे समाज, जागो! उस महिला की आंसू हमें जगाने चाहिए। आस्था को मजबूत बनाओ, लेकिन अंधभक्ति को नहीं। पीड़िता को न्याय मिले, आरोपी को सजा। तभी हम कह सकेंगे कि हम इंसानियत के हकदार हैं। यह दर्द हम सबका है! इसे सहते रहें या बदलें!चुनाव तुम्हारा ! इस खबर से संबंधित वीडियो देखिए

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जान से मारने की धमकी,“लश्कर-ए-खालसा और आईएसआई करवा सकते हैं हमला, तुरंत सुरक्षा दी जाए”: महंत मनोज शर्मा

हिंदू नेता महंत मनोज शर्मा को मिल चुकी है,जान से मारने की धमकी,बोले — “लश्कर-ए-खालसा और आईएसआई करवा सकते हैं हमला, तुरंत सुरक्षा दी जाए” चंडीगढ़(संजय राय,ईशान टाइम्स )राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक, विश्व हिंदू परिषद,चंडीगढ़ (पंजाब प्रांत) के पूर्व सोशल मीडिया प्रभारी महंत मनोज शर्मा ने खुलासा किया है कि उन्हें खालिस्तानियों और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा तैयार किए गए आतंकवादी संगठन ‘लश्कर-ए-खालसा’ से जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं।महंत मनोज शर्मा ने बताया कि इस गंभीर मामले की जानकारी उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस को पहले ही दे दी है, लेकिन अब तक उन्हें किसी प्रकार की सुरक्षा प्रदान नहीं की गई। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जिस तरह हिंदुओं,विशेष रूप से ब्राह्मणों को टारगेट किया जा रहा है, उससे उन्हें आशंका है कि आतंकवादी किसी भी वक्त उन पर हमला करवा सकते हैं।उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि मौजूदा हालात को देखते हुए तुरंत प्रभाव से उन्हें केंद्रीय सुरक्षा, एक बुलेटप्रूफ जैकेट, और रिवॉल्वर जारी की जाए ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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बिहार के एग्जिट पोल क्या परिणाम में बदल पाएगा ?

एग्जिट पोल की गूंज : राजनीति में भरोसे की गिरती रेखा संजय राय चुनावी मौसम में जब मतपेटियाँ बंद हो जाती हैं और जनता का फैसला ईवीएम के भीतर कैद रहता है, तभी एक नया खेल शुरू होता है — एग्जिट पोल का। यह खेल अब केवल अनुमान भर नहीं रहा, बल्कि सियासी माहौल गढ़ने का औजार बन चुका है। इस बार बिहार चुनाव में भी यही दृश्य देखने को मिला। लगभग सभी चैनलों और एजेंसियों के एग्जिट पोल्स ने एनडीए को भारी बहुमत दिला दिया। कुछ ने तो बीजेपी को ऐसी सीटें दे दीं, जो गणित और तर्क दोनों से परे हैं। विश्वसनीयता पर सवाल एग्जिट पोल का अर्थ होता है जनता की राय का पूर्वानुमान। लेकिन अब यह “जनता की राय” नहीं, बल्कि “जनता की राय को प्रभावित करने” का माध्यम बन गया है। 2015 के बिहार चुनाव को याद कीजिए — तब भी टीवी चैनलों ने एनडीए की सरकार बनवा दी थी। जैसे-जैसे असली नतीजे आए, वैसे-वैसे वही एंकर अपने स्क्रीन पर दिखाए जा रहे आंकड़ों को दबाने लगे। जनता की आंखों के सामने झूठ हार गया, लेकिन मीडिया की साख भी वहीं दफन हो गई। राजनीतिक मनोविज्ञान का खेल इस बार एग्जिट पोल सिर्फ आंकड़े नहीं दिखा रहे, वे एक मनोवैज्ञानिक माहौल बना रहे हैं — “मोदी लहर अब भी कायम है।” जबकि असल में यह लहर थमी है, और ज़मीन पर जनता के मुद्दे बदल चुके हैं। बेरोजगारी, महंगाई, किसानों का संकट और सामाजिक असमानता जैसे विषय हर गली में गूंज रहे हैं। लेकिन एग्जिट पोल इन सवालों को पीछे धकेलकर एक “जीत की कथा” गढ़ रहे हैं। यह वही रणनीति है जो हरियाणा चुनाव में देखी गई थी — जहां स्थानीय पत्रकार कांग्रेस की बढ़त बता रहे थे, वहीं चैनलों ने बीजेपी की जीत का ढोल पीटा। बाद में जब नतीजे सामने आए, तो सवाल उठा कि क्या यह जीत जनता की थी या ‘व्यवस्थाओं’ की? मीडिया और सत्ता का संगम पत्रकारिता का अर्थ कभी सत्ता से सवाल करना था, लेकिन अब यह सत्ता के प्रचार का जरिया बन चुकी है। एग्जिट पोल का मंच, जनता की राय की जगह सियासी पटकथा पढ़ने का माध्यम बन गया है। यह संयोग नहीं कि हर बार बीजेपी के लिए आंकड़े “अनुकूल” निकलते हैं। यह राजनीतिक मनोविज्ञान को दिशा देने की सुनियोजित कोशिश है, ताकि जनता यह मान ले कि हवा बीजेपी के पक्ष में है। लेकिन हवा केवल आंकड़ों से नहीं, जमीनी सच्चाई से बनती है। वही सच्चाई जो गांवों में, मजदूर बस्तियों में और किसानों के बीच है — जहां लोग अब यह पूछने लगे हैं कि “देश के मुद्दे कब उठेंगे?” लोकतंत्र का असली इम्तिहान भारत जैसे लोकतंत्र में चुनाव केवल वोटों का नहीं, बल्कि भरोसे का पर्व होता है। जब मीडिया जनता का भरोसा खो देता है, तो लोकतंत्र का संतुलन डगमगाने लगता है। आज जब एग्जिट पोल इतने पक्षपाती और योजनाबद्ध नजर आते हैं, तो सवाल उठना लाज़मी है कि यह आंकड़े हैं या अभियान? 14 नवंबर को जब असली नतीजे सामने आएंगे, तब यह साफ हो जाएगा कि जनता ने क्या फैसला किया। लेकिन उससे पहले जो माहौल बनाया जा रहा है, वह हमारे लोकतांत्रिक विवेक के लिए खतरे की घंटी है। सिर्फ बीजेपी या विपक्ष की बात नहीं यह सवाल किसी दल विशेष का नहीं है। अगर कल को यही एग्जिट पोल किसी दूसरे दल के पक्ष में झुक जाएं, तो समस्या वही रहेगी। लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका एक दर्पण की होती है — लेकिन आज यह दर्पण धुंधला कर दिया गया है। नतीजा चाहे जो हो, सबक जरूरी है नतीजे आने के बाद सरकार चाहे जिसकी बने, सबसे बड़ा सबक यही होना चाहिए कि “विश्वसनीयता” किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ होती है। जब पत्रकारिता सत्ताधारी दल के सुर में सुर मिलाने लगे, तो जनता को खुद सतर्क होना पड़ेगा। एग्जिट पोल शायद जीत-हार बता दें, लेकिन जनता का भरोसा किसके पास रहेगा — यही असली चुनाव है।

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मुंबईकर अलर्ट ! बीएमसी दो दिन नहीं करेगी पानी की सप्लाई, जानें किन इलाकों में होगी दिक्कत !

मुंबई: बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने बड़ा ऐलान किया है कि 14 नवंबर (शुक्रवार) सुबह 10 बजे से 15 नवंबर (शनिवार) सुबह 8 बजे तक कुल 22 घंटे शहर के कई प्रमुख इलाकों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप रहेगी। यह कटौती पुरानी और नई तानसा पाइपलाइन तथा विहार ट्रंक मुख्य जलवाहिनी पर 5 बड़े वाल्व बदलने के रखरखाव कार्य के कारण की जा रही है। BMC ने मुंबईवासियों से अपील की है कि वे पहले से पानी स्टोर कर लें और समझदारी से उपयोग करें, ताकि वीकेंड पर पानी की कमी से परेशानी न हो। ये क्षेत्र रहेंगे सबसे ज्यादा प्रभावितBMC की जल आपूर्ति विभाग के मुताबिक, यह बंदी मुख्य रूप से चार वार्डों – एन (N), एल (L), एम पश्चिम (M West) और एफ उत्तर (F North) के हिस्सों में लागू होगी। प्रमुख प्रभावित इलाके,राजावाड़ी,विद्याविहार,कुर्ला पूर्व,चुनाभट्टी,तिलक नगर,वडाला,दादर पूर्व,सायन,माटुंगा पूर्व,प्रतीक्षा नगर,एमएमआरडीए एसआरए कॉलोनी,इनके अलावा आसपास के रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में भी कम दबाव या पूर्ण कटौती का सामना करना पड़ सकता है। BMC अधिकारियों का कहना है कि यह काम लंबे समय से लंबित था और जल आपूर्ति प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए अनिवार्य है। वाल्व बदलने से पाइपलाइनों में रिसाव कम होगा और भविष्य में पानी की बर्बादी रुकेगी। हालांकि, इस दौरान असुविधा होगी, इसलिए BMC ने वैकल्पिक व्यवस्था जैसे टैंकर सप्लाई पर विचार करने की बात कही है, लेकिन मुख्य रूप से लोगों से खुद तैयारी करने की सलाह दी है। घरों में पहले से पानी भरकर रखें, अनावश्यक उपयोग से बचें और अगर जरूरी हो तो BMC हेल्पलाइन पर संपर्क करें। यह कटौती शुक्रवार-शनिवार को होने से वीकेंड प्लान्स पर भी असर डालेगी। BMC का वादा है कि काम समय पर पूरा कर आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

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उपायुक्त सतपाल शर्मा की अध्यक्षता में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन को लेकर जिला चौकसी समिति की बैठक आयोजित

उपायुक्त ने दिए त्वरित और सख्त कार्रवाई के निर्देश 16 श्रमिक बच्चों का करवाया गया स्कूल में दाखिला पंचकूला, 12 नवंबर(ईशान टाइम्स): उपायुक्त सतपाल शर्मा की अध्यक्षता में आज लघु सचिवालय स्थित सभागार में बंधुआ मजदूर उन्मूलन अधिनियम के तहत गठित जिला चौकसी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त ने अधिनियम के अंतर्गत समिति द्वारा अब तक किए गए निरीक्षणों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि यदि जिले में बंधुआ मजदूरी से संबंधित कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाए और दोषियों के विरुद्ध अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि इस प्रकार की गतिविधियों की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने समिति के गैर-सरकारी सदस्यों से भी आह्वान किया कि यदि उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला आता है, तो वे तुरंत प्रशासन को सूचित करें। इस अवसर पर सहायक श्रम आयुक्त श्रीमती अंजना ने जानकारी दी कि अक्टूबर माह में टोका, कालका, रायपुररानी और चरनियां क्षेत्रों में कुल चार निरीक्षण किए गए, जिनमें कहीं भी बंधुआ मजदूरी का कोई मामला नहीं पाया गया। बैठक में बताया गया कि उपायुक्त के निर्देश पर सहायक श्रम आयुक्त श्रीमती अंजना और लेबर इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार द्वारा ईंट भट्ठों पर निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कुछ श्रमिकों के बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सूचना दी गई, जिसके बाद श्रमिक परिवारों के 16 बच्चों का स्कूलों में दाखिला करवाया गया है ताकि वे शिक्षा प्राप्त कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त श्रीमती निशा यादव, एसडीएम पंचकूला चंद्रकांत कटारिया, एसडीएम कालका संयम गर्ग, एसीपी राकेश कुमार, सहायक श्रम आयुक्त श्रीमती अंजना, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी विशाल पराशर, तहसीलदार सुरेश कुमार, लेबर इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार व सुभाष वर्मा सहित गैर-सरकारी सदस्य राजकुमार सैनी और सुशील कुमार उपस्थित रहे।

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सभी प्ले स्कूलों के लिए मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य

बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों ने प्ले स्कूलों से संबंधित विषयों पर की बैठक की अध्यक्षता पंचकूला नवंबर 12(ईशान टाइम्स): हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य श्री अनिल कुमार एवं श्री श्याम सुंदर ने आज लघु सचिवालय में प्ले स्कूल से संबंधित मुद्दों पर आयोजित एक बैठक की अध्यक्षता की । बैठक में संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं जिले के प्ले स्कूल संचालकों ने भाग लिया। बैठक में आयोग के सदस्यों ने सभी संचालकों को सुरक्षित स्कूल वाहन नीति का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी परिस्थिति में नियमों की अवहेलना स्वीकार्य नहीं होगी। आयोग ने इस बात पर बल दिया कि सभी प्ले स्कूलों को मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य है। जो भी व्यक्ति या संस्था प्ले स्कूल का संचालन करना चाहती है, उन्हें अपने जिले के जिला कार्यक्रम अधिकारी से मान्यता लेना आवश्यक है। अधिक जानकारी एवं प्रक्रिया संबंधी मार्गदर्शन के लिए डीपीओ कार्यालय या जिला बाल संरक्षण अधिकारी, पंचकूला से संपर्क किया जा सकता है। आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि जिले में बिना अनुमति चल रहे प्ले स्कूलों की पहचान की जाए, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर मान्यता प्राप्त करने को कहा जाए, और यदि निर्धारित समय के बाद भी वे मान्यता नहीं लेते हैं तो ऐसे प्ले स्कूलों के संचालन को बाल अधिकारों के उल्लंघन के रूप में बंद किया जाए।

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सरस मेला, पंचकूला में आकर्षक हस्तशिल्प और सजावटी वस्तुएं

पंचकूला नवम्बर 12(ईशान टाइम्स): पंचकूला में चल रहे सरस मेला में देशभर से आए शिल्पकारों और कारीगरों ने अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति का अनोखा संगम प्रस्तुत किया है। मेले में विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प, हैंडलूम, ज्वेलरी, सजावटी वस्तुएं, गृह सज्जा सामग्री, मिट्टी के बर्तन और लोक उत्पाद विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सरस मेला न केवल ग्रामीण उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को मंच प्रदान करता है, बल्कि आगंतुकों को भारतीय संस्कृति की झलक भी दिखाता है। मेले में रंग-बिरंगे स्टॉल, पारंपरिक संगीत, लोकनृत्य और स्वादिष्ट व्यंजन दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। यह मेला कला और संस्कृति के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। पंचकूला और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे देश की विविधता और हस्तकला की समृद्ध परंपरा का अनुभव करें।

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