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श्री राम जी ने उठाया शिव धनुष पंडाल में गूंज उठे जयकारे

सीता स्वयंवर की लीला ने मन मोहा चंडीगढ़ (ईशान राय , ईशान टाईम्स): उत्तराखंड जनसेवा एवं सांस्कृतिक मंच चंडीगढ़ द्वारा,आज सैक्टर 28 बी में रामलीला के तीसरे दिन के सीता स्वयंवर,अहिल्या उद्धार,दिखाया गया जिसे देखने जन सैलाब उमड़ पड़ा।आधुनिक तकनीक, प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुति और भक्ति माहौल ने रामलीलाओं को सभी के लिए अविस्मरणीय बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। रामलीला मंचन देखने के लिएआसपास के सेक्टरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धा और भक्ति के इस माहौल में मंचन देर रात तक चलता रहा। जनकपुरी में राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर की घोषणा की और शर्त रखी कि जो शिव जी के धनुष को उठा कर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता से विवाह करेगा। बड़े-बड़े राजाओं ने प्रयास किया, पर धनुष हिला तक न सके। इसी बीच प्रभु श्रीराम ने सहजता से धनुष उठा लिया, जो टूट गया। शहर में पहली बार पारम्‍परिक एवं आधुनिक नाट्य प्रस्‍तुति के संगम से आयोजित यह रामलीला शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी ​हुई है।मुख्य अतिथि साहिब सिंह पंवार व जब्बर सिंह नेगी  रामलीला की तारीफ की और खुशी जताई कि रामलीला मंचन कर रहे कलाकारों ने मर्यादित भाषाशैली का प्रयोग कर जनता का मन मोहा लिया । इस मौके पर सभा के समस्त पदाधिकारी, सदस्य मौजूद थे।

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70 पुलिस कर्मियों व आमजन ने किया रक्तदान

पंचकूला,कमल कलसी, 26 सितंबर सेवा पखवाड़ा के तहत सेक्टर-1 स्थित पुलिस उपायुक्त कार्यालय के बाहर पंचकूला पुलिस की ओर से भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। पुलिस कमिश्नर शिवास कविराज के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में इंस्पेक्टर रैंक से लेकर सिपाही रैंक तक के पुलिसकर्मियों सहित आम नागरिकों ने भी स्वेच्छा से रक्तदान किया। कार्यक्रम की शुरुआत डीसीपी श्रीमती सृष्टि गुप्ता ने की। उन्होंने रक्तदान करने वालों से मुलाकात कर उनकी सराहना की और उन्हें असली ‘दानवीर’ बताया। इस दौरान जिला उपायुक्त सतपाल शर्मा भी शिविर में पहुंचे और रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाया। कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा संगठन का भी विशेष योगदान रहा, जिसमें अध्यक्ष अंकुर कपूर ने सक्रिय भागीदारी निभाई। वहीं सेक्टर-32, चंडीगढ़ स्थित सरकारी मेडिकल अस्पताल की टीम ने संपूर्ण चिकित्सकीय सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर एसीपी दिनेश भी मौजूद रहे।शिविर में पुलिस कर्मियों और नागरिकों सहित 70 ने रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। कार्यक्रम के समापन पर डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने रक्तदाताओं को सर्टिफिकेट वितरित किए और उनका धन्यवाद व्यक्त किया।डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने कहा– “रक्तदान सेवा का सबसे सुंदर तरीका है, जो न केवल जीवन बचाता है बल्कि समाज में मानवता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करता है। मैं उन सभी का आभार व्यक्त करती हूँ जिन्होंने इस नेक कार्य में भाग लेकर दूसरों के जीवन में रोशनी बिखेरने का संकल्प लिया।,

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नेताओं के चमचे और भक्त मानव समाज के लिए खतरा है

इंद्र यादव – स्वतंत्र लेखक,भदोही ( यूपी ), भारत की राजनीति एक रंगमंच है, और इस मंच पर दो ऐसे पात्र हैं जो बिना स्क्रिप्ट के भी हर दृश्य में चमकते हैं—चमचे और भक्त। ये वो लोग हैं जो न तो संविधान में दर्ज हैं, न ही सरकारी रजिस्टर में, मगर फिर भी हर रैली, हर टीवी डिबेट, और हर सोशल मीडिया थ्रेड में इनकी उपस्थिति अनिवार्य है।चमचा बोले तो वफादारी का दूसरा नाम है गुरु। चमचा कोई नई प्रजाति नहीं है। ये वो लोग हैं जो अपने नेता के हर फैसले को, चाहे वह कितना भी अव्यवहारिक हो, सिर-आंखों पर चढ़ाते हैं। अगर नेता कहे कि चांद पर खेती होगी, तो चमचा तुरंत ट्रैक्टर की बुकिंग शुरू कर देगा। इनकी खासियत है कि ये सवाल नहीं करते, सिर्फ तारीफ करते हैं। चाहे नेता जी की नीति से महंगाई आसमान छूए या सड़कों पर गड्ढे गहरे हों, चमचा हर हाल में कहेगा, “ये सब तो दीर्घकालिक रणनीति है, तुम्हें क्या समझ आएगा!” चमचे हर पार्टी में हैं। ये रंग-बिरंगे झंडों के पीछे एकजुट होकर नारे लगाते हैं, और अगर मौका मिले तो विरोधियों को ट्रोल करने में भी पीछे नहीं हटते। इनका सबसे बड़ा हथियार है—तर्कहीन तर्क। जैसे, “हमारे नेता ने ये गलत किया, लेकिन तुम्हारे नेता ने तो वो गलत किया था!” इस तर्क का जवाब देना वैसा ही है जैसे समुद्र में नमक की मात्रा गिनना। चमचे का उन्नत संस्करण है। जहां चमचा वफादारी में डूबा रहता है, वहीं भक्त आस्था के सागर में गोते लगाता है। भक्त के लिए नेता सिर्फ एक इंसान नहीं, बल्कि एक अवतार है। अगर नेता जी ने ट्वीट किया कि “सूरज आज नीला है,” तो भक्त न सिर्फ नीले सूरज की तस्वीरें ढूंढ लेगा, बल्कि विरोधियों को “सूरज-अंधा” भी करार दे देगा। भक्तों की खासियत है कि वे हर आलोचना को देशद्रोह और हर सवाल को साजिश मानते हैं। अगर आप कहें कि “नेता जी की नीति से बेरोजगारी बढ़ी,” तो भक्त तुरंत जवाब देगा, “तुम्हें क्या पता, ये सब 2047 के विकसित भारत का मास्टरप्लान है!” भक्तों का सोशल मीडिया अकाउंट एक तीर्थस्थल है, जहां हर पोस्ट में “जय श्री” से लेकर “विकास की गंगा” तक का जिक्र होता है। चमचे और भक्त में अंतर समझना मुश्किल है, लेकिन अगर गौर करें तो चमचा जमीनी स्तर का सिपाही है, जो रैलियों में पानी की बोतलें बांटता है और स्थानीय कार्यकर्ताओं को खुश रखता है। वहीं भक्त डिजिटल योद्धा है, जो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से डिग्री लेकर हर ऑनलाइन बहस में कूद पड़ता है। चमचा ज्यादातर व्यक्तिगत लाभ के लिए निष्ठा दिखाता है—शायद एक टिकट, एक ठेका, या कम से कम एक सेल्फी। भक्त का मकसद बड़ा होता है—वो अपने नेता को इतिहास के पन्नों में अमर करना चाहता है, भले ही इसके लिए उसे तथ्यों को थोड़ा मोड़ना पड़े। ऐसा लगता है जैसे स्कूल में जब ज्ञान बंट रहा था तो उस समय चमचे और भक्त नेताजी के रैली की तैयारी में जुटे थे।चमचे और भक्त भारतीय राजनीति के मसाले हैं। बिना इनके, रैलियां सूनी, टीवी डिबेट बेस्वाद, और ट्विटर शांत होता। लेकिन इनकी अतिशयोक्ति कई बार लोकतंत्र के लिए चुनौती बन जाती है। जब सवाल पूछने की जगह तारीफ करने की होड़ लगती है, तो जवाबदेही कमजोर पड़ती है। फिर चाहे सड़क पर गड्ढा हो या नीति में खामियां, सब “नेता जी की माया” में ढक जाता है। हमें लगता है जैसे चमचे और भक्त, दोनों ही भारतीय राजनीति के रंग हैं। इनके बिना शायद हमारा लोकतंत्र इतना जीवंत न होता। लेकिन अगर आप भी कभी चमचागिरी या भक्ति के रास्ते पर निकलें, तो एक बार रुककर सोच लें—क्या आप अपने नेता के लिए बोल रहे हैं, या अपने विवेक के लिए।

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उपायुक्त ने अधिकारियों को लंबित शिकायतों का त्वरित समाधान करने के दिए निर्देश

आयुक्त एव सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी उपायुक्तों के साथ समाधान शिविरों में लंबित शिकायतों को लेकर समीक्षा बैठक की करी अध्यक्षता पंचकूला, 26 सितंबर(ईशान राय )। हरियाणा हाउसिंग फॉर आल विभाग के आयुक्त एव सचिव मोहम्मद शाईन ने आज चंडीगढ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी उपायुक्तों के साथ समाधान शिविरों में लंबित शिकायतों को लेकर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होने प्रदेश के सभी उपायुक्तों को लंबित शिकायतों का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि प्रत्येक शिकायत का एक तय समय सीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाए। वीडियो कांफ्रेंसिंग के उपरांत उपायुक्त श्री सतपाल शर्मा ने लघु सचिवालय के सभागार में विभिन्न विभागों के जिला अधिकारियों की बैठक ली। उन्होने संबंधित विभाग के नोडल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि वे समाधान शिविर में आने वाली शिकायतों का बारीकी से अध्ययन कर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। उन्होने कहा कि वे रि-ओपन शिकायतों की शीघ्र ही समीक्षा करेंगे ताकि ऐसी शिकायतों का स्थाई समाधान किया जा सके। उन्होने निर्देश दिए कि अधिकारी एसडीएम कालका से मिलकर कालका उपमंडल से संबंधित शिकायतों का निवारण करवाएं ताकि कोई शिकायत लंबित न रहे। उपायुक्त ने कहा कि लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर प्रत्येक सोमवार और वीरवार को प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक लघु सचिवालय के सभागार में समाधान शिविर का आयोजन किया जाता है। इस दौरान सभी विभागों के संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहते हैं। उन्होने कहा कि समाधान शिविर का उदेश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को अपनी समस्याओं के निवारण के लिए अलग अलग कार्यालयों में न जाना पड़े और एक स्थान पर उनकी समस्याओं का एक तय समय सीमा में समाधान हो । उन्होने अधिकारियों से आहवान किया कि वे समाधान शिविर में आने वाली प्रत्येक समस्या को गंभीरता से लें और उसका प्राथमिकता के आधार पर समाधान करें। मुख्यमंत्री का सपना समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े गरीब से गरीब व्यक्ति तक सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहंुचाना है। इस अवसर पर एसडीएम पंचकूला चंद्रकांत कटारिया, एसडीएम कालका संयम गर्ग, तहसीलदार सुरेश कुमार, नायब तहसीलदार हरदेव, जनस्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग के कार्यकारी अभियंता समीर शर्मा सहित अन्य विभागों के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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भाजपा का महिलाओं के साथ छलावा, 2100 रुपये की घोषणा केवल चुनावी जुमला: कुमारी सैलजा

क्या भाजपा महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है या केवल चुनावी राजनीति करना चाहती है? चंडीगढ़, 26 सितंबर(संजय राय )।अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा सहित देशभर की करोड़ों महिलाओं के साथ भाजपा सरकार बार-बार छलावा कर रही है। अब लाड़ो लक्ष्मी योजना और 2100 रुपये देने का जो शोर मचाया जा रहा है, वह भी जनता को गुमराह करने का एक और चुनावी हथकंडा है। योजना में आय सीमा रखकर अधिकतर गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाओं को बाहर कर दिया गया है। मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा का संकल्प पत्र सभी महिलाओं को 2100 रुपये देने की बात करता है, लेकिन हकीकत में योजना इतनी शर्तों से बंधी है कि अधिकांश महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। योजना में आय सीमा रखकर अधिकांश गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाओं को बाहर कर दिया गया है। केवल कुछ गिनी-चुनी महिलाएं ही इसका लाभ ले पाएंगी, जबकि संकल्प पत्र में सभी महिलाओं को लाभ देने की बात कही गई थी। महिलाओं को वास्तविक सशक्तिकरण और सम्मान की जगह मात्र चुनावी लालच देकर गुमराह किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए ठोस और दीर्घकालीन योजनाएं बनाई जाएं, न कि केवल चुनाव के समय वोट बटोरने के लिए ऐसी घोषणाएं की जाए। कुमारी सैलजा ने कहा है कि इस योजना लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जिनके परिवार की आय एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आय का निर्धारण परिवार पहचान पत्र के आधार पर किया जाएगा। कुमारी सैलजा ने कहा कि इस योजना के तहत आयु सीमा दूसरे राज्यों की अपेक्षा हरियाणा में कम रखी है। दूसरे राज्य में यह आय सीमा 1.20 लाख रुपपे से 2.50 रुपये तक रखी गई है। सांसद कुमारी सैलजा ने भाजपा सरकार से पूछा है कि जब उनका संकल्प पत्र सभी महिलाओं को 2100 रुपये देने का था, तो फिर आय सीमा की शर्त क्यों लगाई गई? क्या भाजपा महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है या केवल चुनावी राजनीति करना चाहती है? क्या महिलाओं की गरिमा और अधिकार महज 2100 रुपये से खरीदे जा सकते हैं? सांसद ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए नीतियां बनाईं और जमीन पर उतारी हैं। आने वाले समय में कांग्रेस महिलाओं को उनका वास्तविक हक और सम्मान दिलाने के लिए संकल्पबद्ध है।

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दो साल से बंद आज़म खान अखिरकार जेल से हुए रिहा सपा नेताओं ने कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

सीतापुर(ईशान टाइम्स ब्यूरो)। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की सीतापुर जेल से रिहाई मंगलवार को आखिरकार हो गई। उनकी रिहाई लंबित अदालती कार्यवाही के कारण तड़के टल गई थी, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।आजम खान की रिहाई के कुछ ही मिनट बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “समाजवादियों को विश्वास है कि अदालत न्याय करेगी। हम न्यायालय का आभार व्यक्त करते हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में भाजपा द्वारा कोई झूठा मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि एक अधिकारी को लगातार सेवा विस्तार दिया जा रहा था, लेकिन आज समाजवादियों के लिए खुशी की बात है कि आजम खान रिहा हो गए हैं।वहीं सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि आजम खान को गलत मामलों में फंसाया गया था। उन्होंने कहा, “सरकार ने उन पर सैकड़ों केस लगाए, लेकिन कोर्ट ने उन्हें राहत दी। इसके लिए हम न्यायालय का स्वागत करते हैं। समाजवादी पार्टी उनकी पूरी मदद कर रही है।”आजम खान की रिहाई को लेकर सीतापुर जेल के बाहर सुबह से ही समर्थकों की भीड़ जुटी रही। उनके बड़े बेटे अदीब खान ने कहा, “आजम खान आज के नायक हैं। हम सब उनका स्वागत करने आए हैं। बाकी बातें वे खुद जेल से बाहर आने के बाद कहेंगे।”रामपुर की सियासत में आजम खान का दबदबा हमेशा से रहा है। वह इतने प्रभावशाली रहे हैं कि इलाके के उम्मीदवारों का ऐलान तक रामपुर स्थित उनके कार्यालय से होता था। अक्टूबर 2023 में जेल जाने के बाद उनके विरोधियों ने सियासी और आर्थिक रूप से अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की, लेकिन आजम के कद को कम नहीं कर पाए।प्रशासन ने रिहाई को लेकर सतर्कता बरती और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सीतापुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई। इसके बावजूद समर्थक वाहनों के साथ जेल के पास पहुंचने में सफल रहे।करीब दो साल की कैद के बाद आजम खान की जमानत पर हुई रिहाई ने सपा खेमे में नई ऊर्जा भर दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आजम खान जेल से बाहर आने के बाद क्या रुख अपनाते हैं और प्रदेश की राजनीति में उनकी क्या नई भूमिका सामने आती है। आजम खां को जेल से रिहा कराने गए 73,सपा समर्थकों की गाडियों का हुआ चालान समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां 23 महीने के बाद मंगलवार को सीतापुर की जेल से रिहा हो गए। लेकिन मंगलवार को उनकी रिहाई कराने गए समर्थक व सपा नेता व कार्यकर्ता बड़ी संख्या मे गाडियों से गए थे. उनमे से पुलिस ने उनकी 73 गाड़ियों का चालान कर दिया है। सभी गाड़ियों का नो पार्किंग में चालान किया गया है और करीब एक लाख 49 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।आजम खां का जेल से बाहर स्वागत करने के लिए उनके दोनों बेटों अब्दुल्ला और अदीब के साथ ही सैकड़ों समर्थक मौजूद रहे। वहीं, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स की तैनाती की गई थी।

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नायब सिंह सैनी ने नई स्टेट एनवायरमेंट प्लान का अनावरण किया

पंचकुला (Ishan Rai,Ishantimes) : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को यहां नई स्टेट एनवायरमेंट प्लान का अनावरण किया। यह महत्वपूर्ण योजना राज्य के पर्यावरणीय परिदृश्य का संपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन, परिवहन, उद्योग, और प्रदूषण (वायु और ध्वनि) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर किया गया है, इसके साथ ही जैव विविधता को भी शामिल किया गया है।यह स्टेट एनवायरमेंट प्लान हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, इंस्टिट्यूट फॉर गवर्नेंस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईजीएसडी), और ऊर्जा और संसाधन संस्थान (TERI) के बीच साझेदारी के माध्यम से विकसित की गई है।इस मौके पर एक उच्च-प्रभाव वाली रिपोर्ट, ‘सततता की ओर डुअल स्ट्रैटेजी स्प्रिंट: हरियाणा के लिए नॉन -CO₂ पाथवे’ भी जारी की गई। यह दस्तावेज़ एक दो-तरफा दृष्टिकोण की मांग करता है। यह CO₂ के अलावा, तेज़ी से सक्रिय होने वाले जलवायु बलों के रूप में नॉन-CO₂ प्रदूषण या शॉर्ट-लिव्ड क्लाइमेट पॉल्यूटेंट्स से निपटने पर जोर देता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि शॉर्ट-लिव्ड क्लाइमेट पॉल्यूटेंट्स न्यूनीकरण तुरंत दोहरा लाभ प्रदान करता है। यह हवा की गुणवत्ता को नाटकीय रूप से सुधारता है और जलवायु परिवर्तन से तेजी से लड़ता है। येथाई स्थिति स्पष्ट है। हरियाणा के 2022 गर्मी तनाव के अनुभव ने पहले से ही फसलों को महत्वपूर्ण नुकसान दिखाया। भविष्य के आकलनों में अनुमान लगाया गया है कि मध्य शताब्दी तक आवश्यक सिंचित चावल और गेहूँ की पैदावार में 15-17% की कमी आएगी। यह राज्य की खाद्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर जोखिम प्रस्तुत करता है। यह रिपोर्ट आईजीएसडी , हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और ऊर्जा और संसाधन संस्थान द्वारा मिलकर विकसित की गई थी।नायब सिंह सैनी ने कहा , “यहां तक कि अगर हमारा जीडीपी दुनिया में सबसे उच्च है, अगर हमारी हवा प्रदूषित है, हमारा पानी प्रदूषित है, और हमारे आवश्यक संसाधन समाप्त हो रहे हैं, तो हमारी ज़िंदगी का कोई अर्थ नहीं होगा, चाहे हमारी अर्थव्यवस्था कागज पर कितनी मजबूत दिखती हो।”मुख्यमंत्री ने कचरा प्रबंधन और नागरिक भागीदारी की दोहरी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 2013 में एकल उपयोग प्लास्टिक पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद, पॉलीथीन अभी भी व्यापक है। कोई भी कानून, अभियान या एनजीओ का प्रयास तब तक सफल नहीं होगा जब तक लोग खुद महसूस नहीं करेंगे कि प्रदूषण जीवन को असहनीय बना रहा है।उन्होंने एकजुट मोर्चे की अपील करते हुए कहा कि मानव जीवन की तीन आवश्यकताएँ—खाद्य, पानी, और ऑक्सीजन—आज सभी प्रदूषित हैं। सरकार अपनी कोशिशें जारी रखेगी, लेकिन जब तक एनजीओ, छात्र, समुदाय और सामान्य नागरिक हाथ नहीं मिलाते, कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं बदलेगा। पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने सार्वजनिक जागरूकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “सर्वाधिक समस्या कचरे का पृथक्करण है। लोग गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण के बारे में अभी भी जागरूक नहीं हैं। केवल जुर्माना और चालान समस्या का समाधान नहीं कर सकते—बदलाव भीतर से आना चाहिए।सदस्य सचिव एचएसपीसीबी प्रदीप कुमार, आईएएस ने राज्य की दीर्घकालिक स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए कहा कि हमारा ध्यान केवल अल्पकालिक लक्ष्यों को प्राप्त करने पर नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर है कि हरियाणा में विकास हमेशा स्थिरता के सिद्धांतों के साथ संरेखित हो। विकास कभी भी हमारे पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन, प्लास्टिक प्रदूषण नियंत्रण, और वायु और जल गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विभागीय प्रयासों का विवरण भी दिया।डायरेक्टर इंडिया प्रोग्राम , ईजीएसडी ज़ेरिन ओशो ने कहा, “हरियाणा का 2025 SEP इसे देश में एक नॉन -CO₂फोकस के साथ पहला बनाता है जो इसके पारंपरिक ढांचे से परे है। स्टेट एनवायरमेंट प्लान की दोहरी रणनीति निकट भविष्य में नॉन -CO₂ उत्सर्जन को कम करना और लंबे समय में CO₂ को कम करना, अन्य लोगों के लिए एक मॉडल है। यह राज्य के लिए दीर्घकालिक खाद्य और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा

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Day One of National Union of Journalists (India) Conference Concludes in Hyderabad with Culture, Poetry, and Passion

Hyderabad, April 12, 2025 — The first day of the National Union of Journalists (India) [NUJ(I)] National Conference 2025 concluded at the prestigious Ravindra Bharathi auditorium in Hyderabad with a vibrant blend of thought-provoking discussions and soul-stirring cultural performances. The day brought together voices from across the country, setting the tone for a dynamic and meaningful two-day event. The morning and afternoon sessions focused on critical issues facing journalism today — from the impact of digital media on grassroots reporting to the growing need to protect regional and vernacular journalism. Delegates from across India, including senior journalists, editors, and correspondents, shared ground-level experiences and explored the challenges of maintaining ethical journalism in today’s rapidly evolving media landscape. However, it was the evening segment that transformed the atmosphere entirely. A celebration of Indian art, culture, and youthful expression, the cultural evening was led not by professional performers, but by talented school students from Hyderabad and nearby regions. The audience was captivated by powerful classical dance performances based on the divine forms of Goddess Durga and Goddess Kali. In the Durga-themed performance, students portrayed the goddess in her Mahishasura Mardini form — a dramatic, graceful depiction of feminine power triumphing over evil. The choreography, complete with symbolic gestures and traditional attire, carried a message of strength, justice, and resilience. Following this, the auditorium fell into a deeper, more intense rhythm as students presented a fierce yet captivating dance dedicated to Goddess Kali. With bold movements and expressive storytelling, the performance brought to life the goddess’s role as a force of destruction against injustice and darkness — a metaphor that resonated deeply with the ideals of fearless journalism. These dances were not just artistic performances but symbolic reflections of what journalism often aspires to be: a voice against oppression, a light in the face of darkness, and a protector of truth. Later in the evening, a poets’ gathering added literary charm to the day. Poets from across the country recited compositions that reflected on society, emotion, justice, and hope. Without theatrics or grand gestures, the poems struck a chord — speaking to shared realities and individual truths. The inclusion of young and emerging voices alongside seasoned poets gave the session a refreshing balance and reinforced the role of creativity in public discourse. The audience, which included journalists, literature enthusiasts, local citizens, teachers, and parents, responded with warmth and admiration. For many, the evening was more than entertainment — it was an immersive reminder of how culture and journalism together form the conscience of a society. As delegates look forward to the sessions of Day Two, there’s a clear sense that this conference is more than just discussions and agendas. It’s a platform where expression, in every form — whether through dance, verse, or reporting — is being honored and celebrated. The message of Day One was powerful and clear: journalism is not just a profession; it is a cultural responsibility.

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