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रक्षा क्षेत्र के लिए चुनौती है तेजस का हादसा

संजय राय

भारतीय युद्धक वायुयान तेजस दुबई में आयोजित हो रही वायुयान कौशल प्रदर्शनी में अज्ञात कारणों से दुर्घटनाग्रस्त होकर भूमि पर गिरा तथा तीव्र ध्वनि विस्फोट के साथ अग्नि गोले में परिवर्तित हो गया। यह दुर्घटना भारतीय समयानुसार अपराह्न 3.40 पर हुई। दुबई के अल मकतूम वायुस्थल पर वायुयान प्रदर्शनी गत 17 नवंबर से आयोजित की जा रही थी। युद्धक तेजस के संचालक पायलेट पैंतीस वर्षीय नमांश स्याल की इस दुर्घटना में दु:खद मृत्यु हो गई है। वायु यानों के उड़ान कौशल की प्रदर्शनी में उपस्थित एक दर्शक ने वक्तव्य दिया है कि दुर्घटनाग्रस्त तेजस के पायलेट ने यान में उत्पन्न त्रुटि को भांपकर भरसक प्रयास किया कि वो प्रदर्शनी देख रहे व्यक्तियों तथा अन्य संरचनाओं से दूर जाकर यान को भूमि पर उतारे। यदि ऐसा है, तो इससे यही सिद्ध होता है कि नमांश ने आत्मरक्षा की तुलना में सार्वजनिक जीवन एवं संरचनाओं की सुरक्षा का विचार ध्यान में रखते हुए ही यान को आपातिक स्थिति में दूर भूमि पर उतारने का प्रयास किया, किंतु भूतल पर गिरने से पहले ही उसमें अग्नि विस्फोट हुआ और वह विस्तृत अग्नि ज्वालाओं में परिवर्तित हो गया। तेजस यान के साथ यह पहली दुर्घटना नहीं है। इससे पूर्व 2024 में पोखरण में भी एक शस्त्र परीक्षण अभियान में तेजस अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है। सैन्य क्षेत्र में सेवारत् अधिसंख्य पदाधिकारिक सैन्य कर्मचारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, युद्धक यानों के परिचालन एवं अपरिचालन संबंधी प्रौद्योगिकियों से परिचित प्रौद्योगिकीविदों के लिए वायुयानों की दुर्घटना हमेशा ही एक जांच का विषय होता है।

तेजस जैसे यान के विषय में विशिष्ट जानकारी रखने वाले तथा ऐसे यान के वास्तविक चालन, परिचालन अथवा संचालन के संपूर्ण विद्याधारक यही मान रहे हैं कि वायु प्रदर्शनी में लडख़ड़ा कर गिरे तेजस के गिरने व अनियंत्रित होने की सघन जांच किए बिना, शीघ्र ही किसी व्यर्थ निष्कर्ष पर पहुंचना अनुचित है। दुर्घटना की जांच हरसंभव कोण से होनी चाहिए। तकनीकी, प्रौद्योगिकीय कोण से तो जांच हो ही, साथ ही षड्यंत्रपरक दृष्टिकोण के साथ भी पड़ताल होना अति आवश्यक है। तेजस यान की अपने क्षेत्र में जो कार्य विशिष्टता है, जो सिंहस्थिति है तथा जो युद्धक प्रभावशीलता है, वह शत्रु देशों के लिए वायु व नौ सैन्य युद्धों की स्थिति में एक भयंकर चुनौती है। अत: यह शंका भी है ही कि वायु प्रदर्शनी में तेजस के प्रभाव को त्रुटिपूर्ण सिद्ध करके इसे युद्धक सामग्रियों के बाजार में निष्प्रभावी कर दिया जाए। ऐसा करने की मंशा रखने वाले, तेजस यान के अंदर और बाहर कोई भी मानवनिर्मित तात्कालिक त्रुटि उत्पन्न कर सकते हैं अथवा करवा सकते हैं। अत: भारत को, विशेषकर भारतीय वायु सेना को तेजस की दुर्घटना के कारणों में एक कारण ऐसे षड्यंत्र को भी मानना चाहिए। अभी तो भारतीय वायु सेना ने यान दुर्घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी घटना पर आश्चर्यमिश्रित दु:ख-शोक प्रकट किया है। गत दस-बारह वर्षों में जिस प्रकार देश में स्वदेशी तकनीक, प्रौद्योगिकी पर आधारित अस्त्रों-शस्त्रों तथा आवश्यक सैन्य सामग्रियों का विनिर्माण हो रहा है और साथ ही साथ रक्षा-सुरक्षा उपकरण बनाने वाली विदेशी कंपनियों के साथ संयुक्ति व सहयोग पर आधारित यानों, विमानों, अस्त्र-शस्त्रों, युद्धक यानों के विनिर्माण व भारत की ओर से इनके निर्यात में भी उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है, उस स्थिति में दुर्घटना के स्वरूप में तेजस की लडख़ड़ाहट भारत के लिए गहन आघात है। चिंता का विषय यह भी है कि तेजस ने अभी किसी युद्धक स्थिति अथवा अभियान में अपना शौर्यमुखी प्रदर्शन करते हुए अपने नवोन्नत कौशल का परिचय नहीं दिया है। देशी-विदेशी यानों के आधुनिक वैशिष्ट्य के प्रदर्शन हेतु दुबई में उड़ान भर रहे तेजस के साथ हुई नवीनतम घटना अति विचारणीय है। यह यान भारत का स्वदेशी उत्पाद है।

अत: इसके नवोन्नत होने के साथ-साथ हर स्थिति में सुरक्षित होने का व्यावहारिक प्रमाण भी अनिवार्य है। यदि इसमें तकनीकी त्रुटियां उभरेंगी तो यह युद्धक विमानों के बाजार में अयोग्य सिद्ध हो सकता है। भविष्य में ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न न हो, जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए। तेजस युद्धक विमान को गत कई वर्षों से एक विश्वसनीय एवं प्रभावी वायुयान माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि तेजस एक मल्टीरोल कम भार वाला, चौथी से भी आगे की पीढ़ी का, डेल्टा विंग धारी, कांमबैट एयरक्रॉफ्ट है। इसका भार 6500 किलोग्राम है। भारतीय मुद्रा में इसका मूल्य चार सौ करोड़ है। वायु सेना के पास कई तेजस हैं, जो युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इसे मूलत: वायु-सुरक्षा, भूमिगत आक्रमण एवं अल्प भौगोलिक दूरी में होने वाली युद्धावधि में विविध सैन्य अभियानों की सफलता की दृष्टि से बनाया गया है। भारतीय विनिर्माता कंपनी हिंदुस्तान एरोनोटिक्स लिमिटेड इसका निर्माण करती है। ऐरोनोटिकल डेवलपमेंट एजेंसी इस विमान की डिजाइनर है। यह भारतीय वायु तथा नौ सेना के लिए निर्मित किया गया सर्वाधिक उन्नत, आधुनिक एवं युद्ध कौशल में आधुनिक मानकों से सुसज्जित विमान है। सन् 2001 में इस विमान ने अपनी पहली उड़ान भरी तथा 2015 में यह भारतीय वायु सेना की सेवा में संलग्न हुआ था। यह अपनी पीढ़ी का सबसे लघु आकार वाला एवं कम भार वाला सुपरसोनिक युद्धक यान है। तेजस संबोधन के साथ इसका आधिकारिक नामकरण 2003 में पहली बार किया गया। यह एचएएल द्वारा एचएफ-24 मारुत के बाद निर्मित द्वितीय यान है, जो काम्बैट तकनीक के साथ वायुक्षेत्र से युद्ध में सम्मिलित होने के लिए शक्तिसंपन्न किया गया है।

जैसा कि इसके बारे में उल्लेखनीय है कि यह भार में हल्का एवं उड़ान में लचीला है तथा इसमें एक विशेषता के रूप में मार्टिन-बेकर की जीरो-जीरो इजेक्शन सीट भी है, जो पायलेट को शून्य गति व शून्य ऊंचाई पर भी सुरक्षित बाहर निकालने की क्षमता से युक्त है, किंतु दुबई में पायलेट को तेजस की ऐसी अंतर्निहित सुविधा से वंचित होकर अपने प्राण गंवाने पड़े हैं। दुर्घटना के संबंध में इस मानवीय पहलू को विस्मृत नहीं किया जा सकता है कि विमान के क्षतिग्रस्त होने की तुलना में भारत की प्रमुख चिंता पायलेट के जीवन के संदर्भ में हो, और यदि वास्तव में नमांश ने यानों का प्रदर्शन देखने वाले लोगों तथा प्रदर्शनी स्थल पर विद्यमान लघु-विशाल संरचनाओं को सुरक्षित रखने की कामना के साथ अनियंत्रित यान को दूर ले जाकर आत्माहुति दी है, तो यह विराट मानवता का परिचय है, जिसकी आशा किसी भारतीय मानव से ही की जा सकती है। तेजस की दुर्घटना के संदर्भ में उत्पन्न होने वाली वर्तमान एवं भावी समस्त आशंकाएं मिटाने के लिए इस विचार पर स्थिर होने की भी आवश्यकता है कि मशीनें शत-प्रतिशत सुरक्षा का आश्वासन कभी नहीं हो सकती हैं। यह विज्ञान का अभिशाप है, जो पहली बार घटित नहीं हुआ है। इसी वर्ष गुजरात से लंदन जा रहे अमेरिका के सबसे उन्नत, मूल्यवान एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त यात्री विमान ड्रीमलाइनर में उड़ान भरने के तुरंत बाद आग लग गई थी। भारत एवं दुनिया में वायुयानों में आने वाली तकनीकी त्रुटियों के कारण अनेक दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और दु:खद है कि अभी तक भी अनेक दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों की खोज नहीं की जा सकी है। तेजस यान के संदर्भ में भी जांचावधि में ऐसी ही उलझन उत्पन्न हो सकती है। अत: इस दुर्घटना को भारत, भारतीय वायु सेना तथा दुनिया के लोगों को तेजस की विशिष्टताओं पर शंका के रूप में नहीं, अपितु अज्ञात तकनीकी कारण के रूप में मानना चाहिए।

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