ishantimes

डिजिटल ठगी का दर्द! बुजुर्ग दंपती की जीवनभर की मेहनत लुट गई

मुंबई/गोरेगांव(इंद्र यादव ,ईशान टाइम्स)। कल्पना कीजिए, जीवनभर की मेहनत से जमा की गई बचत, जो बुढ़ापे की लाठी बननी थी, वो एक झटके में साइबर ठगों के जाल में फंसकर उड़ जाए। गोरेगांव के एक सेवानिवृत्त बुजुर्ग दंपती की कहानी सुनकर दिल दहल जाता है। महज 19 दिनों में 4 करोड़ 5 लाख 80 हजार रुपये की ठगी! यह सिर्फ पैसे की चोरी नहीं, बल्कि विश्वास की हत्या है, सपनों का कत्ल है। डिजिटल दुनिया के इस अंधेरे पक्ष ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारे बुजुर्ग, जो समाज की नींव हैं, कितने असुरक्षित हैं।यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज का आईना है। बुजुर्ग दंपती, जिन्होंने सालों की कड़ी मेहनत से अपना घर बनाया, बच्चों को पढ़ाया-लिखाया, अब रिटायरमेंट के दिनों में शांति की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन एक अनजान कॉल ने सब कुछ उलट दिया। 27 अक्टूबर को शुरू हुआ यह सिलसिला, जहां ठगों ने खुद को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई के अधिकारी बताकर बुजुर्ग को जाल में फंसाया। “आपके दस्तावेज मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहे हैं,” कहकर उन्होंने डराया। वीडियो कॉल पर फर्जी पूछताछ, व्हाट्सएप पर सरकारी लेटरहेड वाले नोटिस, एफआईआर, कोर्ट वारंट,सब कुछ इतना असली लगता था कि बुजुर्ग का दिल धड़क उठा। “पत्नी समेत गिरफ्तारी होगी, डिजिटल अरेस्ट हो जाएगा,” ऐसी धमकियां देकर ठगों ने बुजुर्ग को इतना सहमा दिया कि उन्होंने अपनी सारी बचत,जो बुढ़ापे की दवा, बच्चों की शादी या पोते-पोतियों की पढ़ाई के लिए थी,उनके ‘सीक्रेट अकाउंट’ में ट्रांसफर कर दी। 14 नवंबर तक 4 करोड़ से ज्यादा रुपये गायब! कल्पना कीजिए उस बुजुर्ग की आंखों में आंसू, जब उन्हें एहसास हुआ कि जीवनभर का संघर्ष व्यर्थ हो गया। उनकी पत्नी, जो शायद बीमार या कमजोर होंगी, वो कैसे सहन कर पाईंगी यह सदमा! यह ठगी सिर्फ आर्थिक नहीं, भावनात्मक तबाही है। परिवार टूट जाता है, रिश्ते कमजोर पड़ जाते हैं, और बुजुर्ग अकेलेपन की गहराई में डूब जाते हैं। उत्तर प्रदेश की साइबर सेल ने इस मामले में तीन आरोपियों,विलास गेणू मोरे उर्फ रेहान खान, रिजवान शौकत अली खान और कासिम रिजवान शेख,को गिरफ्तार किया है। ये लोग विदेशी साइबर हैंडलरों के लिए बैंक अकाउंट मुहैया कराते थे, जहां ठगी की रकम जमा होती थी। डीसीपी पुरुषोत्तम कराड और सीनियर पीआई किरण आहेर की टीम इस नेटवर्क को तोड़ने में जुटी है। लेकिन सवाल उठता है,कितने और परिवार ऐसे जाल में फंसेंगे!भारत में साइबर क्राइम की दर हर साल बढ़ रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में ही लाखों मामले दर्ज हुए, और बुजुर्ग सबसे आसान शिकार बन रहे हैं। वे तकनीक से अनजान होते हैं, विश्वास जल्दी कर लेते हैं, और परिवार अक्सर दूर रहता है।यह घटना समाज को झकझोरती है। हमारा समाज, जहां बुजुर्गों को पूज्य माना जाता है, क्या उन्हें अकेला छोड़ सकता है! युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वे अपने माता-पिता को साइबर जागरूक बनाएं। अनजान कॉल पर विश्वास न करें, सरकारी एजेंसियां कभी फोन पर पैसे मांगती नहीं,ऐसी बेसिक बातें सिखाएं। सरकार को भी सख्त कदम उठाने चाहिए: साइबर शिक्षा अभियान चलाएं, बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन बनाएं, और ठगों पर कड़ी सजा दें। क्या हम इंतजार करेंगे अगली त्रासदी का! डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सुरक्षा है। अगर आपके परिवार में बुजुर्ग हैं, तो आज ही बात कीजिए। याद रखिए, ठगी से ज्यादा दर्दनाक है विश्वास का टूटना। समाज एकजुट हो, तभी ऐसे अपराध रुकेंगे।

Scroll to Top