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गड्ढों में सड़कें हैं मुंबई की क्या है हालत पढ़िए

मानों ‘सरकार’ का प्लान है, “सड़कें बनाओ, बारिश आने दो, गड्ढे खुद-ब-खुद तैयार!” अरे, ठेकेदारों को तो ‘गड्ढा स्पेशलिस्ट’ का अवॉर्ड मिलना चाहिए न

मुंबई! अरे भाई, मुंबई को तो भारत की आर्थिक राजधानी कहते हैं ना। हाँ, वही जो बॉलीवुड की चकाचौंध, अमीरों की लग्जरी गाड़ियों और ट्रैफिक जाम की मशहूर है। लेकिन असल में ये शहर एक ‘खूनी डांस फ्लोर’ बन चुका है! सड़कें नहीं, बल्कि गड्ढों का मेला लगता है। सरकार हर साल करोड़ों खर्च करके ‘नई सड़कें’ बनवाती है, लेकिन मानो वो सड़कें कोई जादूगर की ट्रिक हों – बनते ही गायब! साल भर बाद देखो तो पुरानी वाली गड्ढेदार सड़कें फिर से ‘हैलो’ कह रही होती हैं। अरे, क्या बात है! सरकार की सड़कें तो ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ स्टाइल में बनती हैं और ‘गायब एंड मिसिंग’ हो जाती हैं।

महाराष्ट्र में जब एकनाथ शिंदे जी सीएम बने, तो लगा था कि अब तो ‘सख्त फैसले’ वाले नेता आए हैं। लोग सोचने लगे, “अब गड्ढों पर बुलडोजर चलेगा!” शिंदे जी तो निर्णय लेने में ‘रॉकेट’ जैसे तेज माने जाते थे। फिर शिंदे जी सीएम पद से जैसे ही हटे वैसे ही सब वैसा का वैसा। गड्ढे तो और गहरे हो गए, जैसे सरकार कह रही हो, “भाई, हमने तो सड़क बनाई थी, तुम्हारी गाड़ी ने ही खा ली!” ठाणे से नालासोपारा की रिटर्न जर्नी की तो गाड़ी नहीं, लग रहा था कोई भोजपुरी स्टार डांस कर रहा हो – “चलेलु डहरिया त नदी बीचे नईया हिलोर मारे, हिलोर मारे, करीहईयां ऐ गोरी हिलोर मारे!” हाँ, घोडबंदर रोड पर तो गाड़ी हिलती है कि क्या बताएं – स्पीड ब्रेकर नहीं, ‘हिलोर ब्रेकर’ लगे हैं। गड्ढों में पानी भर जाए तो लगता है, सरकार ने ‘स्विमिंग पूल’ प्रोजेक्ट लॉन्च कर दिया! सरकार तो दिन भर मोबाइल पर व्यस्त – अपनी ‘वाह-वाही’ वाली खबरें देखती रहती है। टीवी पर ऐलान: “हमने 1000 किमी सड़कें बनाईं!” लेकिन जमीनी हकीकत? गड्ढों का साम्राज्य! दावे आसमान छूते हैं, वादे हवा में उड़ते हैं, और कर्म? वो तो गड्ढों में दफन हो जाते हैं। मानो सरकार का प्लान हो, “सड़कें बनाओ, बारिश आने दो, गड्ढे खुद-ब-खुद तैयार!” अरे, ठेकेदारों को तो ‘गड्ढा स्पेशलिस्ट’ का अवॉर्ड मिलना चाहिए। हर साल नई टेंडर, नई सड़क, और नई ‘गायब’ कहानी। मुंबई की सड़कें अब ‘टूरिस्ट स्पॉट’ बन गईं – विदेशी आते हैं और कहते हैं, “वाह, इंडियन मून क्रेटर्स!” हे सरकार, जरा मोबाइल नीचे रखो और सड़कों पर उतरो! या फिर अगली बार ऐलान करो “हमारी सड़कें ‘हिलोर वाली’ हैं – फ्री मसाज के साथ!” वरना जनता अगले चुनाव में ‘हिलोर’ मारेगी… तुम्हारी कुर्सी को!

  • इंद्र यादव / स्वतंत्र लेखक,
    indrayadavrti@gmail.com ……🖊️…..🙏
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