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लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में एक 15 साल की किशोरी के साथ दुष्कर्म

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में एक 15 साल की किशोरी के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है, जो न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज की गहरी खामियों को उजागर करता है। किशोरी खुर्दही बाजार में फुफेरी बहन के यहां रह रही थी। परिवार से नाराज होकर देर रात अकेली घर से निकल पड़ी। रास्ते में आरोपी मनोज साहू ने उसे शरण का लालच देकर होटल अमन सागर ले गया और हवस का शिकार बना लिया। होटल मालिक की लापरवाही तो अलग से चर्चा का विषय है – आधी रात नाबालिग लड़की और युवक को बिना किसी आईडी चेक किए रूम दे दिया। अब होटल मालिक भी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। लेकिन असली सवाल यह है: क्या सिर्फ आरोपी और होटल मालिक ही जिम्मेदार हैं? नहीं, इसमें लड़कियों की नादानी और सरकार की घोर नाकामी भी बराबर की भागीदार है। यह किशोरी महज 15 साल की है, लेकिन देर रात अकेली सड़क पर निकलना क्या कोई समझदारी भरा फैसला था? परिवार से नाराजगी होना स्वाभाविक है, खासकर किशोरावस्था में, जहां भावनाएं उफान पर होती हैं। लेकिन क्या गुस्से में घर छोड़कर अंधेरे में भटकना समाधान है? आजकल की लड़कियां सोशल मीडिया और फिल्मों से प्रभावित होकर खुद को ‘स्वतंत्र’ समझती हैं, लेकिन सड़कों पर छिपे भेड़ियों की हकीकत से अनजान रहती हैं। मनोज साहू जैसे शिकारी तो इंतजार में बैठे रहते हैं – एक अकेली, नादान लड़की मिली और मौका हाथ लग गया। यह कोई पहला मामला नहीं। देशभर में हजारों लड़कियां हर साल ऐसी ही नादानी का शिकार होती हैं। स्कूलों में सेक्स एजुकेशन तो दूर, बेसिक सेफ्टी नियम भी नहीं सिखाए जाते। माता-पिता व्यस्तता में बच्चों को भावनात्मक सपोर्ट नहीं देते, नतीजा – बच्चे गलत कदम उठाते हैं। लड़कियां सोचती हैं कि ‘मैं संभाल लूंगी’, लेकिन रात के अंधेरे में अजनबी पर भरोसा करना आत्महत्या के बराबर है। अगर यह किशोरी थोड़ी समझदारी दिखाती, किसी विश्वसनीय रिश्तेदार या पुलिस हेल्पलाइन (1098 या 112) पर कॉल करती, तो शायद यह हादसा टल जाता। नादानी की यह कीमत समाज को चुकानी पड़ रही है – एक मासूम जिंदगी तबाह, परिवार बर्बाद। अब बात सरकार की। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार दावा करती है कि महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। एंटी-रोमियो स्क्वॉड, 1090 हेल्पलाइन, पिंक पेट्रोलिंग – कितने ढोल पीटे गए! लेकिन ग्राउंड पर क्या? लखनऊ जैसे मेट्रो शहर में देर रात सड़कें असुरक्षित, होटल बिना आईडी चेकिंग के रूम बांट रहे हैं। होटल मालिक फरार है, लेकिन सवाल यह है कि होटल लाइसेंस देने वाली पुलिस और प्रशासन ने कभी चेकिंग की क्या? POCSO एक्ट के तहत नाबालिग के साथ ऐसे मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है, लेकिन रोकथाम कहां है। रात में स्ट्रीट लाइट्स खराब, सीसीटीवी कैमरे नाकारा। अकेली लड़की भटक रही थी, कोई पेट्रोलिंग नहीं। बिना आईडी रूम देना अवैध है, फिर भी हजारों होटल धड़ल्ले से चल रहे हैं। लाइसेंस सस्पेंड करने की बजाय, इंस्पेक्शन कभी होते ही नहीं। स्कूलों में लड़कियों को सेफ्टी ट्रेनिंग नहीं, एनजीओ को फंड मिलता है लेकिन जमीन पर कुछ नहीं। निर्भया फंड के अरबों रुपये कहां गायब। घटना के बाद होटल मालिक की तलाश ‘जारी’ है – मतलब अभी तक पकड़ा नहीं। ऐसे कितने केस में आरोपी सालों फरार घूमते हैं। योगी सरकार अपराधियों पर बुलडोजर चलाती है, पर फोकस जीरो। अगर सड़कों पर असली पेट्रोलिंग होती, होटलों पर सख्त नियम लागू होते, तो मनोज साहू जैसे दरिंदे खुलेआम शिकार नहीं करते। केंद्र की मोदी सरकार भी महिलाओं के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, लेकिन पढ़ाई के साथ सुरक्षा की पढ़ाई कहां। लड़कियां नादानी छोड़ें, भावनाओं को काबू में रखें और खतरे की घंटी बजते ही मदद मांगें। माता-पिता जिम्मेदारी लें, बच्चों से बात करें। लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार की है। कानून बनाना आसान, अमल मुश्किल। अगर यूपी सरकार सच में महिलाओं की सुरक्षा चाहती है, तो होटलों पर ताला लगाए, रात की पेट्रोलिंग दोगुनी करे, स्कूलों में अनिवार्य सेफ्टी कोर्स शुरू करे। वरना ऐसे कांड रोज सामने आते रहेंगे, और हम सिर्फ अफसोस करते रह जाएंगे। समय है सुधार का, वरना नादानी और नाकामी की यह चेन कभी नहीं टूटेगी।

  • इंद्र यादव ( ईशान टाइम्स)
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