भदोही के “अधिकारियों” ने ‘ओपन जिम’ के नाम पर किया 50 लाख का “घोटाला”,अब जांच कौन करेगा सरकार!

भदोही(उत्तरप्रदेश):इंद्र यादव । भदोही में नगर पालिका ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरीं, लेकिन इस बार विकास के नाम पर नहीं, बल्कि घोटाले और लापरवाही के लिए। ‘ओपन जिम’ के नाम पर 50 लाख रुपये की सरकारी राशि हवा में उड़ा दी गई, और अब सवाल उठता है—जांच कौन करेगा? जवाब ढूंढने में शायद जितना समय लगे, उतने में नगर पालिका कोई नया ‘विकास’ का नमूना पेश कर दे! नगर पालिका भदोही ने एक ऐसी जमीन पर ओपन जिम बनवाया, जिसका स्वामित्व पहले से ही अदालत में उलझा हुआ था। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका को इस विवाद की पूरी जानकारी थी, फिर भी आंखें मूंदकर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए। यह कोई विकास कार्य नहीं, बल्कि कमीशनखोरी का सुनहरा अवसर था, जिसे भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। और जब बात खुली, तो सरकार का बुलडोजर चल गया—वही बुलडोजर, जो आमतौर पर अवैध निर्माण ढहाने के लिए जाना जाता है, इस बार सरकारी ‘उपलब्धि’ को ध्वस्त करने में जुट गया। जब मीडिया ने नगर अधिशासी अधिकारी धर्मराज सिंह से सवाल पूछने की कोशिश की, तो वे सवालों से बचते हुए ‘भागम-भाग’ मोड में नजर आए। शायद उन्हें लगा कि सवालों का जवाब देने से बेहतर है, दौड़ने की प्रैक्टिस कर ली जाए—आखिर ओपन जिम तो बन नहीं पाया! स्थानीय लोगों ने इसे नगर पालिका की लापरवाही और भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत बताया। स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनका कहना है कि अगर नगर पालिका को विवादित जमीन की जानकारी थी, तो आखिर इतना बड़ा निर्माण क्यों शुरू किया गया? क्या यह सब सिर्फ कमीशन के चक्कर में किया गया? 50 लाख रुपये की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? जनता की मांग है कि इस घोटाले की गहराई तक जांच हो और दोषी अधिकारियों—खासकर चेयरमैन और अधिशासी अधिकारी—से इस राशि की वसूली की जाए। यहां यह बताना जरूरी है कि सीआरएस न्यूज़ ने इस घोटाले के खिलाफ शुरू से आवाज उठाई थी। लेकिन नगर पालिका के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। अब जब बुलडोजर ने ओपन जिम को ध्वस्त कर दिया, तो सवाल उठता है—क्या यह पैसा सिर्फ दिखावे के लिए खर्च किया गया? या फिर यह भदोही नगर पालिका में चल रही ‘बंदरबांट’ का एक और नमूना है! भदोही की जनता अब प्रशासन से जवाब मांग रही है। लोग चाहते हैं कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। साथ ही, यह सवाल भी उठ रहा है कि जब सरकारी योजनाओं पर ही बुलडोजर चल रहा है, तो जनता का भरोसा कैसे बनेगा? शायद भदोही नगर पालिका को अब ‘ओपन जिम’ की जगह ‘ओपन जवाबदेही’ की योजना पर काम करना चाहिए। अंत में, एक सुझाव—अगली बार अगर नगर पालिका को कोई ‘विकास’ करना हो, तो पहले जमीन का मालिकाना हक तो जांच लें, वरना बुलडोजर फिर तैयार रहेगा, और जनता के सवालों का जवाब देने के लिए कोई नया ‘धर्मराज’ ढूंढना पड़ेगा!




