ishantimes

Ishan times

General

पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया फेज वन एवं टू की ग्रीन बेल्ट में लाखों रुपये की लगाई गई ग्रिल एवं ईंटों की चोरी – ओ पी सिहाग

चोरों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए एवं ग्रीन बेल्ट को दोबारा से सुन्दर एवं हरा भरा बनाये जाने की कार्रवाई की जाए । पंचकूला, 23 मार्च (Ishantimes): जननायक जनता पार्टी पंचकूला के जिला अध्यक्ष ओ पी सिहाग ने आज पूर्व पार्षद एवं जजपा पंचकूला के हल्का अध्यक्ष राजेश निषाद के साथ पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया फेज वन एवं इंडस्ट्रियल एरिया फेज टू की ग्रीन बेल्ट जो सेक्टर 14,15 एवं सेक्टर 16 की तरफ लगभग 1.5 किलोमीटर की लम्बाई में बनी हुई है उसका निरीक्षण किया तथा पाया कि तत्कालीन हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा काफी सालो पहले लगाई गई 80 प्रतिशत ग्रिल एवं ईंटे चोरी हो गई हैं । ओ पी सिहाग ने याद करते हुए कहा कि काफी सालों पहले इस ग्रीन बेल्ट में बहुत ज्यादा पेड़ पौधे, सुन्दर घास तथा फ़ूलों के पौधे लगाये गये थे एवं चारों तरफ चारदीवारी करके सुन्दर ग्रिल भी लगाई थी। पिछले कई सालों से सरकार द्वारा इस ग्रीन बेल्ट के रखरखाव का जिम्मा कभी एच एस वी पी तो कभी एच एस आई डी तो कभी पी एम डी ए को सौंपने का काम किया गया। परंतु इन सभी विभागों के अधिकारियों की लापरवाही एवं गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण य़ह ग्रीन बेल्ट उजड़ती गई। ओ पी सिहाग ने कहा कि पिछले 2-3 सालों से तो य़ह ग्रीन बेल्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपेक्षा की बुरी तरह शिकार हुई है।उन्होंने कहा कि इसी बात का फायदा उठा कर नशेड़ी लोगों तथा चोरों ने इस ग्रीन बेल्ट के चारों तरफ लगाई गई ग्रिल एवं ईंटों को चोरी करना शुरू कर दिया तथा आज लाखों रुपये की 80 प्रतिशत से ज्यादा ग्रिल एवं ईंटों की चोरी हो गई है। उन्होंने कहा कि बड़े ही हैरत की बात है कि अब जो विभाग इस की देख रेख कर रहा है उसके अधिकारियों द्वारा भी इस ग्रीन बेल्ट में हर रोज हो रही चोरी एवं बड़े बड़े पेड़ों के काटे जाने को रोकने को लेकर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। जजपा ज़िला अध्यक्ष ओ पी सिहाग एवं जजपा पंचकूला हल्का अध्यक्ष राजेश निषाद ने प्रदेश सरकार एवं मौजूदा समय पर इस ग्रीन बेल्ट की देख रेख कर रहे पंचकूला मेट्रोपोलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि जो बची हुई ग्रिल, ईंट एवं बड़े पेड़ पौधे है उनकी सुरक्षा की जिम्मेवारी सही ढंग से की जाए, जो लाखों रुपये की ग्रिल, ईंटों एवं पेड़ों की चोरी हुई है उस बारे तुरंत एफ आई आर दर्ज करवा कर चोरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा जिन अधिकारियों की लापरवाही की वजह से ग्रीन बेल्ट के ये हालात हुए हैं उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए।जजपा ज़िला अध्यक्ष ओ पी सिहाग एवं हल्का अध्यक्ष राजेश निषाद ने पी एम डी ए के मुख्य प्रशासक से अपील की है इस पूरी ग्रीन बेल्ट को फिर से हरा भरा एवं सुन्दर ग्रिल तथा फूलों वाले पौधे लगाने बारे उचित कार्रवाई की जाए तथा इसके बीच-बीच बह रहे बरसाती नाले की साफ सफाई करवा कर गन्दगी को हटाया जाए ताकि आसपास के सेक्टरो एवं कालोनियों के लोग पहले की तरह सुबह श्याम घूम सके ।

General

Press Club of India Condemns Seizure of Journalist Jehangir Ali’s Mobile Phone in J&K

New Delhi, December 19, 2025 (Ishan Times Bureau): The Press Club of India (PCI) has strongly condemned the Jammu and Kashmir Police for seizing the mobile phone of senior journalist Jehangir Ali, The Wire’s long-time correspondent in the region, from his residence in Budgam on the evening of December 17. Although the phone was returned after 24 hours, the PCI expressed serious concern that the seizure was carried out without any FIR, warrant, court order, or legal documentation, and without disclosing any reason to the journalist. The Club further pointed out that the police failed to follow mandatory legal safeguards laid down by the Supreme Court, including the recording and sharing of the hash value of the seized electronic device, a critical step to ensure data integrity and prevent tampering. The PCI noted with alarm that the action occurred while Jehangir Ali was engaged in investigative reporting on allegations of nepotism and corruption related to a hydropower project in Kishtwar. According to The Wire, Ali was actively pursuing another lead in the same investigation at the time of the police action, raising serious concerns about intimidation and retaliation against journalists involved in public-interest reporting. Describing the incident as part of a broader pattern of harassment of journalists in Jammu and Kashmir, the PCI said such actions have intensified since the abrogation of Article 370 and have created a chilling effect on press freedom in the region. The organisation warned that such practices undermine constitutional guarantees of free speech and the public’s right to information. The Press Club of India urged the Jammu and Kashmir administration to ensure that journalists can carry out their professional duties without fear, intimidation, or unlawful interference.

Breaking News, Political Leadership

Sangeeta Barooah Pisharoty Elected First Woman President of Press Club of India

New Delhi,(Ishan Times):In a landmark development for Indian journalism, senior journalist Sangeeta Barooah Pisharoty was on Sunday elected as the first woman President of the Press Club of India (PCI), marking a historic step toward inclusive leadership and gender representation in one of the country’s most influential media institutions. The elections, held on December 13, witnessed an overwhelming mandate in favor of Pisharoty’s panel, which secured a clean sweep of all 21 positions, including office-bearers and Managing Committee seats. Pisharoty won the presidential race decisively, polling 1,019 votes, while her nearest rivals Atul Mishra and Arun Sharma received 129 and 89 votes, respectively. For the post of Secretary-General, Afzal Imam registered a comprehensive victory with 948 votes, defeating Gyan Prakash, who polled 290 votes.Jatin Gandhi was elected Vice-President with 1,029 votes, winning by a margin of over 900 votes.Meanwhile, Aditi Rajput (Treasurer) and PR Sunil (Joint Secretary) were elected unopposed. Managing Committee Results In the elections for the 16-member Managing Committee, Niraj Kumar topped the list with 932 votes, followed by Abhishek Kumar Singh (911), Jahanvi Sen (903), Ashok Kaushik (892), Kallol Bhattacharjee (882), Praveen Jain (878), Agraj Pratap Singh (865), Manoj Sharma (861), Nyanima Basu (851), PB Suresh (838), VP Pandey (833), Prem Bahukhandi (831), Sneha Bhura (829), Javed Akhtar (823), Rezaul Hasan Laskar (781), and Sunil Kumar (780). The results were formally announced at the PCI lawns by Chief Election Commissioner MMC Sharma in the presence of a large gathering of journalists. Reacting to the outcome, Pisharoty said the verdict reflected the members’ collective confidence in the panel’s vision to uphold the values of free, fair, and responsible journalism. Outgoing PCI President Gautam Lahiri and former Secretary-General Neeraj Thakur welcomed the outcome, calling the election of the first woman President a strong reaffirmation of PCI’s commitment to equality, diversity, and democratic ideals.

Breaking News, Politics

संविधानदिवस पर दिल्ली में ‘तिरंगा’पुस्तक का भव्य विमोचन पूर्व CJI के.जी. बालकृष्णन ने किया

नई दिल्ली(इंद्र यादव,ईशान टाइम्स ग्रुप)।संविधान दिवस के पावन अवसर पर नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के.जी. बालकृष्णन ने जगद्गुरु कृष्णानंद सरस्वती एवं अन्य संभ्रांत अतिथियों की उपस्थिति में चर्चित पुस्तक “तिरंगा” का विधिवत विमोचन किया। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री श्याम जाजू की विशेष उपस्थिति रही। मंच पर जगद्गुरु कृष्णानंद सरस्वती, जस्टिस के.जी. बालकृष्णन तथा अन्य गणमान्य नागरिक एक साथ उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर तिरंगे के प्रतीक चिह्न वाली इस पुस्तक का लोकार्पण किया।पुस्तक “तिरंगा” राष्ट्रीय ध्वज के गौरव, उसके इतिहास और भारतीय संविधान में निहित मूल्यों को समर्पित है। विमोचन के बाद उपस्थित लोगों ने इसे राष्ट्रप्रेम और संवैधानिक चेतना को जगाने वाली महत्वपूर्ण रचना बताया। कार्यक्रम में कांस्टीट्यूशन क्लब के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा उपस्थित रहे। संविधान दिवस और “रत्न” थीम के साथ आयोजित इस समारोह ने राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों को फिर से याद दिलाया। पुस्तक के लेखक ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट श्री अनिल कुमार यादव जी ने विमोचन के बाद कहा कि “तिरंगा सिर्फ़ कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं और बलिदानों का प्रतीक है। इस पुस्तक के माध्यम से नई पीढ़ी तक यह संदेश पहुँचाना मेरा उद्देश्य है।”कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

General

‘विपक्ष-मुक्त लोकतंत्र’ की लहर: राजनीतिक परिदृश्य में एक खतरनाक प्रवृत्ति

संजय राय, भारतीय राजनीति में पिछले एक दशक के दौरान एक ऐसी भाषा और सोच विकसित होती दिखाई दी है, जिसका मूल उद्देश्य व्यवस्था से विपक्ष की प्रभावी भूमिका को धीरे-धीरे समाप्त करना या कमज़ोर करना प्रतीत होता है। इसकी शुरुआत 2013 में उस समय हुई जब गोवा में भाजपा की बैठक के दौरान नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार अभियान का नेतृत्व सौंपा गया और उन्होंने अपने संबोधन में पहली बार “कांग्रेस-मुक्त भारत” का विचार देश के सामने रखा। उसके बाद वही विचार विभिन्न रूपों, नारों और स्वरूपों में बार-बार दोहराया जाता रहा—कभी “कांग्रेस संस्कृति” को खत्म करने की बात, कभी “पंजा-छोड़ो” अभियान, कभी परिवारवाद और भ्रष्टाचार समाप्त करने के नाम पर विपक्ष को लगातार कटघरे में खड़ा करना। हालाँकि 2024 के चुनावों में कांग्रेस ने 99 सीटों के साथ अपनी उपस्थिति दिखाई, फिर भी विपक्ष को कमजोर करने के राजनीतिक प्रयास रुकते नहीं दिखे। उत्साह से भरी भाजपा अब बिहार की जीत के बाद दिल्ली से लेकर दक्षिण भारत तक विपक्षी दलों को राजनीतिक रूप से कमजोर करने में जुटी है। इसी बीच प्रधानमंत्री द्वारा सूरत में दिए एक बयान ने राजनीतिक विमर्श को फिर गर्मा दिया। उन्होंने विपक्षी सांसदों—खासतौर पर कांग्रेस के युवा नेताओं—के “करियर” को लेकर चिंता जताई और दावा किया कि उन्हें पार्टी में बोलने तक का अवसर नहीं मिलता। लेकिन इस बयान ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है: क्या सत्तापक्ष, जो अपने ही वरिष्ठ नेताओं को हाशिए पर धकेलने का लंबा इतिहास रखता है, सच में विपक्षी नेताओं के भविष्य को लेकर चिंतित हो सकता है? राजनीति के भीतर का विरोधाभास प्रधानमंत्री की यह “चिंता” इसलिए भी सवालों के घेरे में है क्योंकि भाजपा के भीतर ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जहाँ वरिष्ठ नेताओं को या तो सक्रिय politics से दूर किया गया या ऐसी स्थिति में पहुँचा दिया गया जहाँ वे औपचारिक रूप से मौजूद तो रहे, पर प्रभावहीन हो गए। 2002 के बाद जब अटल बिहारी वाजपेयी मोदी को गुजरात की कुर्सी से हटाना चाहते थे, तब लालकृष्ण आडवाणी वह नेता थे जिन्होंने मोदी का बचाव किया। लेकिन आगे चलकर आडवाणी स्वयं ऐसे “मार्गदर्शन मंडल” में पहुँचा दिए गए, जिसकी कोई वास्तविक भूमिका नहीं थी। मुरली मनोहर जोशी को वाराणसी में मोदी की उम्मीदवारी के लिए सीट छोड़नी पड़ी, बाद में वे भी इसी मंडल का हिस्सा बन गए। यही तर्क 75 वर्ष की उम्र सीमा पर भी लागू हुआ—लेकिन वही सीमा आज स्वयं मोदी के लिए अप्रासंगिक हो चुकी है। दूसरी ओर 80 वर्ष से अधिक उम्र के कई नेताओं को राज्यपाल या मंत्री बनाया गया। परन्तु सुब्रमण्यम स्वामी, शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी जैसे नेताओं को दरकिनार करने में कोई झिझक नहीं दिखाई गई। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक था कि यदि भाजपा अपने ही वरिष्ठों के राजनीतिक भविष्य की परवाह नहीं करती, तो विपक्ष के करियर को लेकर उसकी “विचारशीलता” कैसे वास्तविक हो सकती है? सत्ता बनाम आवाज़: संसद में क्या होता है? प्रधानमंत्री के इस बयान का एक दूसरा पहलू भी है। वे कहते हैं कि विपक्षी सांसदों को बोलने नहीं दिया जाता—पर देश ने कई बार यह भी देखा है कि जब विपक्ष सवाल उठाता है, तो सत्ता पक्ष के व्यवधानों के कारण बहस अधूरी रह जाती है। जहाँ तक राहुल गांधी का सवाल है—उनका बोलना इसलिए खटकता है क्योंकि वे भ्रष्टाचार, उद्योगपति-पक्षपात, नोटबंदी, जीएसटी, संस्थाओं पर नियंत्रण, चुनावी प्रक्रियाएँ, किसान आंदोलन, जातीय जनगणना और आर्थिक असमानता जैसे विषयों को खुलकर उठाते हैं। यह वे मुद्दे हैं जिनसे सत्ता पक्ष असहज रहता है। और शायद यही वजह है कि राहुल गांधी के खिलाफ लगातार वैचारिक व राजनीतिक मोर्चेबंदी की जा रही है—नवीनतम उदाहरण 272 पूर्व अधिकारियों के हस्ताक्षर वाला वह पत्र है जिसमें राहुल पर “संविधान-विरोधी” टिप्पणियों का आरोप लगाया गया। लेकिन कांग्रेस ने उसी पत्र में शामिल कई अधिकारियों पर गंभीर अनैतिक आचरण और भ्रष्टाचार के आरोप उजागर कर दिए, जिससे इस कथित नैतिक अभियान की विश्वसनीयता स्वयं संदिग्ध हो गई। परिवारवादी राजनीति पर “रणनीतिक हस्तक्षेप” इन दिनों बिहार की राजनीति में भी यही प्रवृत्ति देखी जा रही है। लालू यादव के परिवार में उठे मतभेदों को हवा देने की कोशिशें साफ दिखाई देती हैं। इन प्रयासों के पीछे विपक्ष को कमजोर करने की उसी बड़ी रणनीति का संकेत मिलता है, जिसकी जड़ें 2013 के “कांग्रेस-मुक्त भारत” नारे में ही छिपी हुई हैं। वास्तविक चुनौती: लोकतंत्र को विपक्ष की आवश्यकता है लोकतंत्र की सेहत तभी मजबूत होती है जब उसमें सत्ता का दुरुपयोग न हो और विपक्ष निर्भय होकर सवाल पूछ सके।आज स्थिति उल्टी दिखती है— विपक्षी दलों को कमजोर करने के प्रयास उनके नेताओं को तोड़ने की राजनीति आलोचनाओं को संस्थागत हमलों के रूप में चित्रित करना असहमति को “देश-विरोध” या “अस्थिरता” से जोड़ना ये सब संकेत हैं कि लोकतंत्र को विपक्ष से नहीं, बल्कि विपक्ष-मुक्त वातावरण बनाने की कोशिशों से खतरा है। प्रधानमंत्री द्वारा विपक्षी सांसदों के “राजनीतिक भविष्य” को लेकर जताई गई चिंता न तो स्वाभाविक लगती है और न ही परिस्थितियों से मेल खाती है। यह उन लगातार चल रहे प्रयासों की अगली कड़ी लगती है जो देश के राजनीतिक संतुलन को एक-दलीय प्रभुत्व की ओर ढकेलना चाहते हैं। विपक्ष, चाहे वह कांग्रेस हो, क्षेत्रीय दल हों या कोई अन्य राजनीतिक शक्ति—लोकतंत्र का सुरक्षा कवच होता है।और यही कारण है कि आज असली खतरा किसी एक नेता या दल में नहीं, बल्कि उस सोच में है जो विपक्ष-मुक्त राजनीति को लोकतंत्र की उपलब्धि मानती है।

Breaking News

सत्य को आत्मसात करना ही वीरेंद्र सेंगर को सच्ची श्रद्धांजलि : सोमपाल शास्त्री

नई दिल्ली, 7 नवम्बर (Ishantimes)। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री ने कहा है कि वरिष्ठ पत्रकार स्व. वीरेंद्र सेंगर एक खांटी पत्रकार थे। वे बेहद संवेदनशील थे और विपरीत परिस्थितियों में भी कभी विचलित नहीं हुए। उन्होंने हमेशा सच लिखा। उनके लिखे सत्य को आत्मसात करना ही वीरेंद्र सेंगर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। सोमपाल शास्त्री ने ये बात निडर और बेबाक पत्रकार स्व. वीरेंद्र सेंगर द्वारा लिखी गई दो पुस्तकों, सच के सिवाय व आगे और आग है के विमोचन के अवसर पर कही। नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री ने की। पूर्व डीजीपी सेवानिवृत्त आईपीएस विभूति नारायण राय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे और वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी की इस मौके पर गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर प्रसिद्ध लेखक व विचारक प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल मुख्य वक्ता थे। इस अवसर पर वीरेंद्र सेंगर के साथ काम कर चुके पत्रकारों और उनके अत्यंत घनिष्ठ मित्रों द्वारा लिखी गई स्मारिका स्मृतियां वीरेंद्र सेंगर की भी जारी की गई। देश के प्रख्यात पत्रकारों ने इस आयोजन में भाग लिया। इस मौके पर विभूति नारायण राय ने कहा कि सच लिखने में बहुत बाधाएं हैं लेकिन वीरेंद्र सेंगर इन बाधाओं से तनिक भी नहीं घबराए। इस अवसर पर कमर वहीद नकवी ने कहा कि सच न बोलना ठगना है। वीरेंद्र सेंगर सच्चे पत्रकार थे। वे पक्षपाती नहीं थे। दिल्ली के सुधा गोयल हत्याकांड की उन्होंने जो रिपोर्टिंग की वो बेमिसाल है। प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि देश में माहौल ऐसा है कि मूर्ख होना गर्व का विषय हो गया है। विरेंद्र सेंगर ने सच को सच लिखने की हिम्मत की। यही वजह है कि वे कालजयी पत्रकार बन गए हैं। गौरतलब है कि 1955 में उत्तरप्रदेश के कानपुर के गांव खांडेपुर में जन्में वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सेंगर का 26 मार्च 2025 को उत्तराखंड नैनीताल जिले के नौकिछियाताल में निधन हो गया था। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत कानपुर से की थी और उसके बाद दिल्ली आकर चार दशक तक उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी निर्भीक पत्रकारिता की धाक जमाई। सेंगर चौथी दुनिया समाचार पत्र के आधार स्तंभ रहे, अमर उजाला व संडे मेल आदि अनेक नामी गिरामी अखबारों में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। जब उत्तरप्रदेश के हाशिमपुरा कांड की खबर को कोई हाथ लगाने को तैयार नहीं था तब उस खबर को वीरेंद्र सेंगर ने सबूतों के साथ छापा। इससे पूरी दुनिया को आजाद भारत में हुए इस वीभत्स नरसंहार का पता चला। पूरे देश को भी पहली बार इस रिपोर्टिंग से वीरेंद्र सेंगर की प्रतिभा, पत्रकारिता और जज्बे का पता चला। प्रसिद्ध किसान नेता स्व. महेंद्र सिंह टिकैत द्वारा चलाये गए किसान आंदोलन की वीरेंद्र सेंगर द्वारा की गई रिपोर्टिंग को मील का पत्थर माना जाता है। इसी तरह उन्होंने गुजरात दंगों पर भी बेहतरीन रिपोर्टिंग की थी। वीरेंद्र सेंगर द्वारा लिखी गई दो पुस्तकों सच के सिवाय व आगे और आग विमोचन के अवसर पर उनकी पत्नी रीता भदौरिया, बेटी ऋतंभरा, आलोक भदौरिया, संतोष भारतीय, विनोद अग्निहोत्री, के एम सिंह, धर्मपाल धनखड़, अमरनाथ सिंह, ममता सिंह, अमित नेहरा, अमरेंद्र राय, संजय राय, उमेश जोशी व शिवाजी सरकार आदि अनेक जाने-माने पत्रकारों ने हिस्सा लिया।

Breaking News

करनाल में सरकारी धान घोटाले में लगातार एक्शन जारी

अब जिला प्रबंधक (डीएम) अमित कुमार को निलंबित किया करनाल (ईशान राय)।जिले में सरकारी धान घोटाले का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। धान खरीद में हुई गड़बड़ी के बाद अब हैफेड विभाग में बड़ा एक्शन लिया गया है। विभाग के प्रबंध निदेशक ने जिला प्रबंधक (डीएम) अमित कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हैफेड मुख्यालय पंचकूला से 4 नवंबर 2025 को जारी आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि के दौरान वे नियम अनुसार वेतन और भत्ते प्राप्त करेंगे। इस दौरान उनका मुख्यालय पंचकूला रहेगा। करनाल और तरावड़ी मंडियों में धान खरीद में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पहले ही कई अधिकारी नप चुके हैं। फूड एंड सप्लाई विभाग के 4 इंस्पेक्टर, 1 सब इंस्पेक्टर,तरावड़ी मार्केट कमेटी के सचिव संजीव सचदेवा,करनाल मंडी की सचिव आशा रानी, 2 मंडी सुपरवाइजर, 1 ऑक्शन रिकॉर्डर और 3 ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। अब हैफेड के जिला प्रबंधक अमित कुमार पर भी गाज गिरी है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और भी अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना है।

Breaking News, General

राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने गुरुग्राम में “इंटरनेशनल रिलेशंस” पुस्तक का द्वितीय संस्करण किया लॉन्च

21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण: राज्यपाल गुरुग्राम, 4 नवंबर (Sanjay Rai): हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने मंगलवार को गुरुग्राम स्थित साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर आधारित पुस्तक “इंटरनेशनल रिलेशंस – सिविल सेवा एवं राज्य सेवा परीक्षाओं हेतु” के दूसरे संस्करण का विमोचन किया। कार्यक्रम में भारत सरकार के पूर्व विदेश मंत्रालय सचिव दामु रवि विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस पुस्तक के लेखक हैं स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी हरियाणा के कुलपति प्रो. अशोक कुमार और गुरुग्राम के डीसीपी ट्रैफिक डॉ. राजेश मोहन। विमोचन से पहले राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि 21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने बताया कि भौगोलिक सीमाओं के बावजूद आज की दुनिया अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, संचार और पर्यावरण के स्तर पर आपस में गहराई से जुड़ी हुई है। जलवायु परिवर्तन, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे अब किसी भी देश तक सीमित नहीं रह गए हैं। राज्यपाल ने पुस्तक को केवल एक शैक्षणिक मार्गदर्शिका नहीं बताया, बल्कि इसे जीवन दृष्टिकोण और नेतृत्व कौशल विकसित करने वाली कृति कहा। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक युवाओं को विवेकशील सोच, विचारशीलता और राष्ट्र सेवा के भाव से प्रेरित करेगी। प्रो. घोष ने आगे कहा कि पुस्तक में अनुभवसंपन्न प्रशासनिक और कूटनीतिक विशेषज्ञों की ज्ञान संपदा निहित है, जो विद्यार्थियों और नीति निर्माताओं के लिए मार्गदर्शन का कार्य करेगी। विशिष्ट अतिथि दामु रवि ने पुस्तक के नवीनतम संस्करण की सराहना करते हुए इसे समसामयिक और अत्यंत उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इसमें भारत की विदेश नीति में आए नए बदलाव और वैश्विक घटनाक्रमों का समावेश किया गया है। यह न केवल सिविल सेवा अभ्यर्थियों, बल्कि नीति निर्माता, शोधकर्ता और आम पाठकों के लिए भी लाभकारी होगी। पुस्तक के सह लेखक प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि पुस्तक भारत की विदेश नीति, इंडो-पैसिफिक रणनीति, क्वाड सहयोग, कोविड संकट में मानवीय नेतृत्व और बहुपक्षीय मंचों जैसे जी-20 और ब्रिक्स पर भारत के बढ़ते प्रभाव का विश्लेषण करती है। वहीं, डॉ. राजेश मोहन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध अब केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल युग में यह निरंतर बदलती प्रक्रिया बन गई है। विमोचन समारोह में राज्यपाल की धर्मपत्नी श्रीमती मित्रा घोष, हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान के महानिदेशक मनोज यादव, साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय की प्रोवोस्ट प्रोफेसर एलायस फिलिप्स, गुरुग्राम विश्वविद्यालय के वीसी डॉ. संजय कौशिक, मैकग्रा हिल एजुकेशन के प्रोडक्ट डायरेक्टर तनवीर अहमद, एसडीएम बादशाहपुर संजीव सिंगला, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Breaking News

आत्ममंथन’ की ज्योति से आलोकित निरंकारी संत समागम की तैयारियाँ समापन की ओर

चंडीगढ़/ पंचकूला /मोहाली, 24 अक्टूबर, 2025(ईशान टाइम्स):- सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी की पावन छत्रछाया में 78वां वार्षिक निरंकारी संत समागम 31 अक्टूबर से 3 नवम्बर, 2025 तक संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा (हरियाणा) में अद्भुत दिव्यता और भव्यता के साथ आयोजित होने जा रहा है। आत्मीयता के इस उत्सव में देश-विदेश से असंख्य श्रद्धालु भाग लेकर आनंद का अनुभव प्राप्त करेंगे। श्रद्धा, समर्पण के साथ हज़ारों श्रद्धालुजन अपने-अपने क्षेत्रों से आकर पूर्ण तन्मयता और समर्पण भाव के साथ दिन रात सेवाओं में रत हैं; जिससे यह आयोजन अपनी अंतिम तैयारियों की ओर अग्रसर है। यह समागम केवल एक धार्मिक या वार्षिक आयोजन नहीं, अपितु ज्ञान, प्रेम और भक्ति का ऐसा पावन संगम है, जो ब्रह्मज्ञान द्वारा आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनता है। यहाँ श्रद्धालु न केवल आध्यात्मिक जागृति पाते हैं, बल्कि मानवता, विश्वबंधुत्व और आपसी सौहार्द की भावनाओं को भी आत्मसात करते हैं। यह आयोजन ‘आत्ममंथन’ की वह दिव्य भूमि है, जहाँ प्रत्येक साधक अपने अंतर्मन में झाँकने, आत्मचिंतन करने और आत्मिक चेतना को जागृत करने की प्रेरणा प्राप्त करता है। यह सम्पूर्ण आयोजन सतगुरु माता जी की दिव्य प्रेरणा और आशीर्वाद से संचालित हो रहा है। सतगुरु की यही मंगलकामना रहती है कि हर श्रद्धालु इस समागम में प्रेम, सम्मान और समुचित सुविधा का अनुभव करते हुए आध्यात्मिक रूप से परिपूर्ण हो। संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा के अनुसार एक समय पर जो स्थल केवल एक सामान्य मैदान था, वह अब संतो की कर्मठ सेवा भावना के कारण एक भव्य शामियानों की सुंदर नगरी में परिवर्तित हो चुका है। यह दिव्य वातावरण प्रत्येक आगंतुक को अपनी ओर आकर्षित करता है। समागम स्थल को एक दिव्य नगरी का रूप दिया गया है। विशाल पंडालों में भक्तों के लिए सुव्यवस्थित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। समागम मंच पर हो रहे प्रेरणादायक प्रवचन, भावपूर्ण भजन और विचारों को समूचे परिसर में और अधिक प्रभावी रूप से दर्शाने हेतु समूचे परिसर में अत्याधुनिक एल.ई.डी. स्क्रिनें स्थापित की जा रही हैं, जिससे दूरस्थ स्थानों पर बैठे श्रद्धालु भी उसी भाव, ऊर्जा और अनुभूति से सत्संग का लाभ प्राप्त कर सकें। पूरे समागम परिसर को चार प्रमुख खंडों में विभाजित किया गया है, जिससे संचालन, आवागमन और सुविधाओं का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। पिछले वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, इस वर्ष भी मुंबई के श्रद्धालु भक्तों द्वारा निर्मित मुख्य स्वागत द्वार अपनी कलात्मक भव्यता के साथ समागम की आध्यात्मिक रूपरेखा का प्रतिबिंब बनकर उभरा है। यह द्वार न केवल सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि समर्पण, सेवा और सृजनशीलता का सजीव उदाहरण भी है। जैसे-जैसे समागम में श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह स्वागत द्वार भी अपने स्वरूप, विेस्तार और गरिमा में और अधिक भव्यता धारण करता जा रहा है, मानो यह समस्त मानवता को प्रेम, अपनत्व और समभाव से आमंत्रित करने हेतु तत्पर हो। इस पावन संत समागम में हर सज्जन महात्मा एवं श्रद्धालु भक्त का सादर आमंत्रण है। आइए, इस आत्मिक मिलन और भक्ति के महासंगम का हिस्सा बनें, सतगुरु के दिव्य दर्शन करें, उनके अमृतमय प्रवचनों का लाभ प्राप्त करें, और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की इस अनुपम यात्रा में सहभागी बनकर जीवन को धन्य करें। निसंदेह यह संत समागम केवल एक आयोजन नहीं बल्कि आत्म मंथन, आत्मबोध और आंतरिक शुद्धि का अवसर है।

Breaking News

100 टीबी से ग्रस्त मरीज़ो के लिए विश्वास फाउंडेशन ने डोनेट की प्रोटीनयुक्त पोषक डाइट

पंचकूला 10 अक्टूबर ( संजय राय,ईशान टाइम्स)। स्टेट टीबी ऑफिसर राजेश राजू व सीएमओ मुक्ता कुमार की अध्यक्षता में विश्वास फाउंडेशन द्वारा गुरुदेव श्री विश्वास जी के आशीर्वाद से 100 टीबी से ग्रस्त मरीज़ों के लिए प्रोटीन युक्त पोषण डाइट दी गई। डिटीओ संदीप छाबड़ा द्वारा सभी सदस्यों का आभार जताते हुए टीबी मुक्त अभियान के लिए एक सराहनीय कदम बताया।विश्वास फाउंडेशन की अध्यक्ष साध्वी नीलिमा विश्वास ने बताया कि यह पोषण डाइट के 16 पैकेट पीएससी ओल्ड पंचकूला, गाँव नाड़ा की डिस्पेंसरी में 7 पैकेट दिए गए, यूडी 19 में 30 पैकेट, गवर्नमेंट डिस्पेंसरी 12 ए में 12 पैकेट व 15 पोषण किट पॉलीक्लिनिक 26 में मरीजों के लिए दिए गए। वहीँ गवर्नमेंट डिस्पेंसरी 8 में 6 पैकेट, जीडी 21 में 8 पैकेट व सेक्टर 6 टीबी हट में 6 पैकेट दिए गए। इस अवसर पर विश्वास फाउंडेशन से ऋषि सरल विश्वास, रणधीर सिंह, मदन नागपाल व टीबी विभाग से सतीश वत्स मौजूद रहे।उन्होंने बताया कि इस पैक्ड किट में मरीजों के लिए 1 किलो सोया दाल, 1 किलो सोया आटा, 500 ग्राम सोयाबीन बड़ी, 500 ग्राम भूना चना, 500 ग्राम गुड़ व 1 डिब्बा प्रोटीन पाउडर होता है। संस्था द्वारा जून 2022 से मरीजों को डाइट देनी शुरू की गई थी और यह प्रक्रिया आगे भी इसी तरह जारी रहेगी। संस्था ने टीबी के मरीजों को अतिरिक्त पोषण, सोशल, मोरल सपोर्ट व टीबी मुक्त भारत के लिए कम्युनिटी सपोर्ट देने का काम किया है।

Scroll to Top