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लाड़ो लक्ष्मी योजना महिलाओं के साथ बड़ा छलावा” – सुधा भारद्वाज

: पंचकुला 27 सितंबर (ईशान राय ईशान टाइम्स हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुधा भारद्वाज ने भाजपा सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई “दीन दयाल लाड़ो लक्ष्मी योजना” को महिलाओं के साथ चुनावी छलावा और धोखा करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले यह वादा किया था कि हरियाणा की हर महिला को 2100 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे, लेकिन योजना में लगाई गई कड़ी शर्तों ने अधिकांश महिलाओं को इससे बाहर कर दिया है। मुख्य आपत्तियां: आय सीमा केवल 1 लाख – जबकि हरियाणा में बीपीएल की सीमा 1.80 लाख है। इससे बीपीएल परिवार की महिलाएं भी योजना से वंचित हो जाएंगी। अनावश्यक शर्तें – हर महीने मोबाइल ऐप पर जाकर फेस रिकॉग्निशन और बायोमेट्रिक के ज़रिए जीवित होने का प्रमाण देना होगा। पेंशनधारियों को बाहर – बुजुर्ग पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन लेने वाली महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा। लाभ की देरी – योजना का पैसा 1 नवंबर से नहीं, बल्कि आईडी बनने के एक महीने बाद से मिलेगा। सीमित दायरा – हरियाणा की 1.4 करोड़ महिलाओं में से मुश्किल से 10–12% महिलाओं को ही लाभ मिलेगा। सुधा भारद्वाज ने कहा: “यह योजना महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय उन्हें कागज़ों और शर्तों की बेड़ियों में जकड़ने का प्रयास है। भाजपा सरकार ने महिलाओं से किया वादा तोड़ा है और अब केवल चुनावी लाभ के लिए योजनाओं का ढोल पीटा जा रहा है। यह महिलाओं के अधिकारों का सीधा अपमान है।” कांग्रेस का संकल्प हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस का मानना है कि महिला सशक्तिकरण का मतलब बिना शर्त सहायता और सम्मानजनक समर्थन देना है।कांग्रेस पार्टी हरियाणा की हर महिला को उसके अधिकार और सुरक्षा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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रामलीला को परिवार सहित लोगों का देखने आना हमारी संस्कृति और धर्म के लिए अच्छी बात: जगद्गुरु कुमार स्वामी

पंचकूला में महिलाओं द्वारा किया जा रहा श्री रामलीला का मंचन रामलीला को परिवार सहित लोगों का देखने आना हमारी संस्कृति और धर्म के लिए अच्छी बात:महाराजधर्म,संस्कृति और महिलाओं को समान और सम्मान को बरकरार रखना ही हमारी प्राथमिकता:नागपालदर्शकों की तालियां और जय श्रीराम जयघोष कलाकारों के लिए पुरूस्कार से कम नहीं:अरुण सूद पंचकूला,(ईशान टाइम्स ) ” प्रभु श्री राम की असीम कृपा से गत चार दिनों से 6 माह से लेकर 83 वर्ष की बुजुर्ग महिलाओं द्वारा मंचित की जा रही श्री रामलीला में सभी कलाकारों का जोश देखते ही बनता है। उनके अदम्य अभिनय को देखने के उपरान्त उपस्थित सभी दर्शकगण आत्मविभोर हुए बिना नहीं रहते।” ये बात जगद्गुरु महाब्रह्मऋषिश्री कुमार स्वामी महाराज ने पत्रकार वार्ता के दौरान कही। इस वार्ता में उनके साथ संस्थापक एकता नागपाल और अध्यक्ष अरुण सूद, परवीन सरदाना, उपस्थित थे।महाराज ने कहा कि हाल ही में जिस प्रकार से रामलीलाओं का मंचन बढ़ा है और लोग इनको देखने के लिए अपने परिवारों के साथ निकल रहे हैं ये एक अच्छी बात है, ये हिन्दू धर्म और हमारी संस्कृति के प्रचार और प्रसार के लिए बहुत ही उत्तम है।वार्ता के दौरान एकता नागपाल ने बताया कि 91 महिलाओं की टोली ने अभी तक नारद कथा, राम कथा सुनाते शिवजी, रावण वेदवती संवाद, रावण नंदी व् शिव जी संवाद, राजा दशरथ द्वारा संतान प्राप्ति का यज्ञ, राम जन्म, अहिल्या को शिला से मुक्ति, सीता स्वयंवर, लक्ष्मण परशुराम संवाद, राम विवाह, विवाह उपरान्त अयोध्या आगमन, मंदता कैकेयी संवाद, दशरथ के 2 वचन, राम बनवास का सफल मंचन किया है जिसको दर्शकों ने खूब सराहा। उन्होंने कहा कि इस अनूठी रामलीला में हम सभी महिलाओं का एक लक्ष्य है कि महिला सशक्तिकरण अभियान में देश की सभी महिलाओं को इसके लिए प्रेरित करना और जिस प्रकार से हमारे वेद पुराणों में हमारे धर्म और संस्कृति के महत्व और महिलाओं को समानता, सम्मानता का स्थान प्राप्त है उसको बनाये रखना और भावी पीढ़ी को मंचन के माध्यम से संजोय रखना और उसकी अनुपालना करने के लिए प्रेरित करना है।इस मौके पर रामलीला आयोजन समिति के अध्यक्ष अरुण सूद ने पत्रकारों के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि जिस प्रकार से हमारी मातृ शक्ति अपनी अद्भुत प्रतिभा के चलते श्री रामलीला का मंचन कर रही हैं उसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम है।महिलाओं द्वारा रचित इस राम लीला को देखने के लिए लगातार लोगों का तांता लगा रहता है। उन्होंने कहा हजारों की संख्या में लोग इसका मंचन देखने के उपरान्त अपने भावों को नहीं रोक पा रहे और जब दर्शकगण पुरजोर आवाज के साथ जय श्री राम के जय घोष और तालियों के साथ खड़े होकर सभी कलाकारों का अभिवादन करते हैं तो मुझे लगता है इस से बड़ा पुरस्कार किसी कलाकार के लिए और कोई नहीं हो सकता। रामलीला के सभी सदस्यगण पारस्परिक तालमेल के साथ इसके आयोजन को सफल बनाने में दिन रात एक किये हुए है।जिसका परिणाम आज ये है कि महिलाओं द्वारा मंचित इस राम लीला को देखने चंडीगढ़, पंचकूला मोहाली और आसपास तो छोड़िये अन्य क्षेत्रों से भी इसको देखने आ रहे है। हमारा भी यही उद्देश्य है कि देश में सभी लोगों को राम लीला को देखने के लिए जाना चाहिए और प्रभु श्री राम द्वारा दर्शाये मार्ग पर चलने का स्वयं और अपने बच्चों को भी उसका अनुसरण करने के लिए प्रेरित करना चाहिए |उन्होंने बताया कि महिलाओं द्वारा मंचित इस रामलीला को देखने के लिए आमजन के अलावा विभिन्न प्रबुद्ध लोग हरियाणा के राज्यपाल माहिम की धर्मपत्नी प्रथम प्रदेश महिला नागरिक मित्रा घोष, विश्वविख्यात सुप्रसिद्ध जगद्गुरु महाब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी महाराज, हरियाणा विधानसभा के उप स्पीकर कृष्णा लाल मिड्डा, राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू, हरियाणा भाजपा पंचकुला के जिलाध्यक्ष अजय मित्तल और नगर निगम चंडीगढ़ की महापौर हरप्रीत कौर बबला, जी बी रियलिटी के चेयरमैन गुरवींदेट भट्टी, हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी सुमन सैनी, भारतीय जनता पार्टी हरियाणा उपाध्यक्ष बन्तो कटारिया, सामाजिक समरसता उत्तर क्षेत्र के प्रमोद कुमार और महामंडलेश्वर सोनाक्षी महाराज,गौरव गौतम, खेल मंत्री हरियाणा और चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ आई पी एस, आई जी पुलिस, पुष्पेंद्र कुमार,चंडीगढ़ सासंद मनीष तिवारी, स्वामी रमणीक जी महाराज, वागीश स्वरूप स्वामी जी , पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के जज जगमोहन बंसल,पूर्व हरियाणा विधानसभा स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता, एस.एस.पी चंडीगढ़ कंवरदीप कौर आई.पी.एस रोशन लाल जिंदल, जगदगुरु स्वामी विकास दास महाराज, मां कमली माई पीठा हरिश्वर श्री श्री 1008 महा मंडलेश्वर, मां कमलीनंद गिरी महाराज,डॉक्टर दिनेश गर्ग, काशी विद्युत परिषद कोषाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता, रमणीक महाराज रोशन लाल जिंदल ने रामलीला में मुख्यातिथि के रूप में भाग लिया।

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लद्दाख : आंदोलन की आग या शांति का संदेश?

संजय राय, लद्दाख, जिसे आमतौर पर शांति, ठंडे मौसम और आध्यात्मिक सुकून की धरती माना जाता है, हाल के दिनों में अचानक चर्चा का केंद्र बन गया। लेह-कारगिल की ऊँचाइयों पर जहां अब तक बौद्ध मठों की घंटियाँ और पर्यटकों की चहल-पहल सुनाई देती थी, वहीं अब पत्थरबाज़ी, सरकारी गाड़ियों में आगज़नी और तनावपूर्ण नारे गूंज उठे। यह वही इलाका है, जो भारत-चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नज़दीक है और जहाँ कुछ समय पहले तक दोनों देशों की सेनाएँ आमने-सामने खड़ी थीं। हालाँकि अब हालात सामान्य बनाने के लिए कई दौर की वार्ताएँ हो चुकी हैं। लेकिन लद्दाख के भीतर का असंतोष एक अलग ही कहानी कह रहा है। आंदोलन की जड़ें स्थानीय लोगों की मुख्य मांगें हैं—लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए और उसे संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत विशेष संरक्षण मिले। 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग कर जब लद्दाख को केंद्रशासित क्षेत्र बनाया गया, तब लोगों ने सोचा था कि अब क्षेत्र का विकास तेजी से होगा और स्थानीय आकांक्षाएँ पूरी होंगी। लेकिन राज्य का दर्जा न मिलने और राजनीतिक अधिकारों के सीमित होने से असंतोष लगातार पनपता रहा। सोनम वांगचुक की भूमिका प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पर्यावरण चिंतक सोनम वांगचुक का आमरण अनशन इस असंतोष का प्रतीक बना। हालांकि उन्होंने शांति की अपील करते हुए अपना अनशन तोड़ा, लेकिन उनके आंदोलन ने युवाओं में उबाल पैदा किया। हाल की हिंसक घटनाओं को देखकर यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर शांत माने जाने वाले लद्दाख में इस तरह की आग कैसे भड़क उठी? प्रशासनिक सख्ती विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों में कई लोगों की जान गई और दर्जनों घायल हुए। हालात काबू में रखने के लिए प्रशासन को कर्फ़्यू और इंटरनेट बंदी जैसे कदम उठाने पड़े। लेह और कारगिल में अब रैलियों और बड़े जमावड़ों पर पाबंदी लागू है। इस बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। आगे का रास्ता लद्दाख भले ही भौगोलिक रूप से छोटा और जनसंख्या के लिहाज़ से सीमित क्षेत्र हो, लेकिन इसकी सामरिक और सांस्कृतिक अहमियत बेहद बड़ी है। भारत सरकार के लिए यह आसान नहीं होगा कि वह इसे पूर्ण राज्य बना दे, क्योंकि इसी तरह की मांगें जम्मू-कश्मीर और दिल्ली से भी उठ रही हैं। फिर भी लद्दाख के लोगों की उम्मीदें और उनका आक्रोश अनदेखा भी नहीं किया जा सकता। निष्कर्ष लद्दाख के मौजूदा हालात हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या हिंसक प्रदर्शन वास्तव में किसी समाधान की ओर ले जाएंगे, या फिर संवाद और धैर्य ही इस ठंडी धरती की असल पहचान को बनाए रख पाएंगे। सवाल यही है—लद्दाख का भविष्य ‘जेन ज़ी’ अंदाज़ की सड़क पर तय होगा, या फिर वह अपनी प्राचीन शांति और धैर्य की परंपरा को जीवित रखेगा?

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श्री राम जी ने उठाया शिव धनुष पंडाल में गूंज उठे जयकारे

सीता स्वयंवर की लीला ने मन मोहा चंडीगढ़ (ईशान राय , ईशान टाईम्स): उत्तराखंड जनसेवा एवं सांस्कृतिक मंच चंडीगढ़ द्वारा,आज सैक्टर 28 बी में रामलीला के तीसरे दिन के सीता स्वयंवर,अहिल्या उद्धार,दिखाया गया जिसे देखने जन सैलाब उमड़ पड़ा।आधुनिक तकनीक, प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुति और भक्ति माहौल ने रामलीलाओं को सभी के लिए अविस्मरणीय बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। रामलीला मंचन देखने के लिएआसपास के सेक्टरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धा और भक्ति के इस माहौल में मंचन देर रात तक चलता रहा। जनकपुरी में राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर की घोषणा की और शर्त रखी कि जो शिव जी के धनुष को उठा कर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता से विवाह करेगा। बड़े-बड़े राजाओं ने प्रयास किया, पर धनुष हिला तक न सके। इसी बीच प्रभु श्रीराम ने सहजता से धनुष उठा लिया, जो टूट गया। शहर में पहली बार पारम्‍परिक एवं आधुनिक नाट्य प्रस्‍तुति के संगम से आयोजित यह रामलीला शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी ​हुई है।मुख्य अतिथि साहिब सिंह पंवार व जब्बर सिंह नेगी  रामलीला की तारीफ की और खुशी जताई कि रामलीला मंचन कर रहे कलाकारों ने मर्यादित भाषाशैली का प्रयोग कर जनता का मन मोहा लिया । इस मौके पर सभा के समस्त पदाधिकारी, सदस्य मौजूद थे।

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70 पुलिस कर्मियों व आमजन ने किया रक्तदान

पंचकूला,कमल कलसी, 26 सितंबर सेवा पखवाड़ा के तहत सेक्टर-1 स्थित पुलिस उपायुक्त कार्यालय के बाहर पंचकूला पुलिस की ओर से भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। पुलिस कमिश्नर शिवास कविराज के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में इंस्पेक्टर रैंक से लेकर सिपाही रैंक तक के पुलिसकर्मियों सहित आम नागरिकों ने भी स्वेच्छा से रक्तदान किया। कार्यक्रम की शुरुआत डीसीपी श्रीमती सृष्टि गुप्ता ने की। उन्होंने रक्तदान करने वालों से मुलाकात कर उनकी सराहना की और उन्हें असली ‘दानवीर’ बताया। इस दौरान जिला उपायुक्त सतपाल शर्मा भी शिविर में पहुंचे और रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाया। कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा संगठन का भी विशेष योगदान रहा, जिसमें अध्यक्ष अंकुर कपूर ने सक्रिय भागीदारी निभाई। वहीं सेक्टर-32, चंडीगढ़ स्थित सरकारी मेडिकल अस्पताल की टीम ने संपूर्ण चिकित्सकीय सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर एसीपी दिनेश भी मौजूद रहे।शिविर में पुलिस कर्मियों और नागरिकों सहित 70 ने रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। कार्यक्रम के समापन पर डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने रक्तदाताओं को सर्टिफिकेट वितरित किए और उनका धन्यवाद व्यक्त किया।डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने कहा– “रक्तदान सेवा का सबसे सुंदर तरीका है, जो न केवल जीवन बचाता है बल्कि समाज में मानवता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करता है। मैं उन सभी का आभार व्यक्त करती हूँ जिन्होंने इस नेक कार्य में भाग लेकर दूसरों के जीवन में रोशनी बिखेरने का संकल्प लिया।,

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नेताओं के चमचे और भक्त मानव समाज के लिए खतरा है

इंद्र यादव – स्वतंत्र लेखक,भदोही ( यूपी ), भारत की राजनीति एक रंगमंच है, और इस मंच पर दो ऐसे पात्र हैं जो बिना स्क्रिप्ट के भी हर दृश्य में चमकते हैं—चमचे और भक्त। ये वो लोग हैं जो न तो संविधान में दर्ज हैं, न ही सरकारी रजिस्टर में, मगर फिर भी हर रैली, हर टीवी डिबेट, और हर सोशल मीडिया थ्रेड में इनकी उपस्थिति अनिवार्य है।चमचा बोले तो वफादारी का दूसरा नाम है गुरु। चमचा कोई नई प्रजाति नहीं है। ये वो लोग हैं जो अपने नेता के हर फैसले को, चाहे वह कितना भी अव्यवहारिक हो, सिर-आंखों पर चढ़ाते हैं। अगर नेता कहे कि चांद पर खेती होगी, तो चमचा तुरंत ट्रैक्टर की बुकिंग शुरू कर देगा। इनकी खासियत है कि ये सवाल नहीं करते, सिर्फ तारीफ करते हैं। चाहे नेता जी की नीति से महंगाई आसमान छूए या सड़कों पर गड्ढे गहरे हों, चमचा हर हाल में कहेगा, “ये सब तो दीर्घकालिक रणनीति है, तुम्हें क्या समझ आएगा!” चमचे हर पार्टी में हैं। ये रंग-बिरंगे झंडों के पीछे एकजुट होकर नारे लगाते हैं, और अगर मौका मिले तो विरोधियों को ट्रोल करने में भी पीछे नहीं हटते। इनका सबसे बड़ा हथियार है—तर्कहीन तर्क। जैसे, “हमारे नेता ने ये गलत किया, लेकिन तुम्हारे नेता ने तो वो गलत किया था!” इस तर्क का जवाब देना वैसा ही है जैसे समुद्र में नमक की मात्रा गिनना। चमचे का उन्नत संस्करण है। जहां चमचा वफादारी में डूबा रहता है, वहीं भक्त आस्था के सागर में गोते लगाता है। भक्त के लिए नेता सिर्फ एक इंसान नहीं, बल्कि एक अवतार है। अगर नेता जी ने ट्वीट किया कि “सूरज आज नीला है,” तो भक्त न सिर्फ नीले सूरज की तस्वीरें ढूंढ लेगा, बल्कि विरोधियों को “सूरज-अंधा” भी करार दे देगा। भक्तों की खासियत है कि वे हर आलोचना को देशद्रोह और हर सवाल को साजिश मानते हैं। अगर आप कहें कि “नेता जी की नीति से बेरोजगारी बढ़ी,” तो भक्त तुरंत जवाब देगा, “तुम्हें क्या पता, ये सब 2047 के विकसित भारत का मास्टरप्लान है!” भक्तों का सोशल मीडिया अकाउंट एक तीर्थस्थल है, जहां हर पोस्ट में “जय श्री” से लेकर “विकास की गंगा” तक का जिक्र होता है। चमचे और भक्त में अंतर समझना मुश्किल है, लेकिन अगर गौर करें तो चमचा जमीनी स्तर का सिपाही है, जो रैलियों में पानी की बोतलें बांटता है और स्थानीय कार्यकर्ताओं को खुश रखता है। वहीं भक्त डिजिटल योद्धा है, जो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से डिग्री लेकर हर ऑनलाइन बहस में कूद पड़ता है। चमचा ज्यादातर व्यक्तिगत लाभ के लिए निष्ठा दिखाता है—शायद एक टिकट, एक ठेका, या कम से कम एक सेल्फी। भक्त का मकसद बड़ा होता है—वो अपने नेता को इतिहास के पन्नों में अमर करना चाहता है, भले ही इसके लिए उसे तथ्यों को थोड़ा मोड़ना पड़े। ऐसा लगता है जैसे स्कूल में जब ज्ञान बंट रहा था तो उस समय चमचे और भक्त नेताजी के रैली की तैयारी में जुटे थे।चमचे और भक्त भारतीय राजनीति के मसाले हैं। बिना इनके, रैलियां सूनी, टीवी डिबेट बेस्वाद, और ट्विटर शांत होता। लेकिन इनकी अतिशयोक्ति कई बार लोकतंत्र के लिए चुनौती बन जाती है। जब सवाल पूछने की जगह तारीफ करने की होड़ लगती है, तो जवाबदेही कमजोर पड़ती है। फिर चाहे सड़क पर गड्ढा हो या नीति में खामियां, सब “नेता जी की माया” में ढक जाता है। हमें लगता है जैसे चमचे और भक्त, दोनों ही भारतीय राजनीति के रंग हैं। इनके बिना शायद हमारा लोकतंत्र इतना जीवंत न होता। लेकिन अगर आप भी कभी चमचागिरी या भक्ति के रास्ते पर निकलें, तो एक बार रुककर सोच लें—क्या आप अपने नेता के लिए बोल रहे हैं, या अपने विवेक के लिए।

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उपायुक्त ने अधिकारियों को लंबित शिकायतों का त्वरित समाधान करने के दिए निर्देश

आयुक्त एव सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी उपायुक्तों के साथ समाधान शिविरों में लंबित शिकायतों को लेकर समीक्षा बैठक की करी अध्यक्षता पंचकूला, 26 सितंबर(ईशान राय )। हरियाणा हाउसिंग फॉर आल विभाग के आयुक्त एव सचिव मोहम्मद शाईन ने आज चंडीगढ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी उपायुक्तों के साथ समाधान शिविरों में लंबित शिकायतों को लेकर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होने प्रदेश के सभी उपायुक्तों को लंबित शिकायतों का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि प्रत्येक शिकायत का एक तय समय सीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाए। वीडियो कांफ्रेंसिंग के उपरांत उपायुक्त श्री सतपाल शर्मा ने लघु सचिवालय के सभागार में विभिन्न विभागों के जिला अधिकारियों की बैठक ली। उन्होने संबंधित विभाग के नोडल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि वे समाधान शिविर में आने वाली शिकायतों का बारीकी से अध्ययन कर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। उन्होने कहा कि वे रि-ओपन शिकायतों की शीघ्र ही समीक्षा करेंगे ताकि ऐसी शिकायतों का स्थाई समाधान किया जा सके। उन्होने निर्देश दिए कि अधिकारी एसडीएम कालका से मिलकर कालका उपमंडल से संबंधित शिकायतों का निवारण करवाएं ताकि कोई शिकायत लंबित न रहे। उपायुक्त ने कहा कि लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर प्रत्येक सोमवार और वीरवार को प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक लघु सचिवालय के सभागार में समाधान शिविर का आयोजन किया जाता है। इस दौरान सभी विभागों के संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहते हैं। उन्होने कहा कि समाधान शिविर का उदेश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को अपनी समस्याओं के निवारण के लिए अलग अलग कार्यालयों में न जाना पड़े और एक स्थान पर उनकी समस्याओं का एक तय समय सीमा में समाधान हो । उन्होने अधिकारियों से आहवान किया कि वे समाधान शिविर में आने वाली प्रत्येक समस्या को गंभीरता से लें और उसका प्राथमिकता के आधार पर समाधान करें। मुख्यमंत्री का सपना समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े गरीब से गरीब व्यक्ति तक सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहंुचाना है। इस अवसर पर एसडीएम पंचकूला चंद्रकांत कटारिया, एसडीएम कालका संयम गर्ग, तहसीलदार सुरेश कुमार, नायब तहसीलदार हरदेव, जनस्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग के कार्यकारी अभियंता समीर शर्मा सहित अन्य विभागों के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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भाजपा का महिलाओं के साथ छलावा, 2100 रुपये की घोषणा केवल चुनावी जुमला: कुमारी सैलजा

क्या भाजपा महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है या केवल चुनावी राजनीति करना चाहती है? चंडीगढ़, 26 सितंबर(संजय राय )।अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा सहित देशभर की करोड़ों महिलाओं के साथ भाजपा सरकार बार-बार छलावा कर रही है। अब लाड़ो लक्ष्मी योजना और 2100 रुपये देने का जो शोर मचाया जा रहा है, वह भी जनता को गुमराह करने का एक और चुनावी हथकंडा है। योजना में आय सीमा रखकर अधिकतर गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाओं को बाहर कर दिया गया है। मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा का संकल्प पत्र सभी महिलाओं को 2100 रुपये देने की बात करता है, लेकिन हकीकत में योजना इतनी शर्तों से बंधी है कि अधिकांश महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। योजना में आय सीमा रखकर अधिकांश गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाओं को बाहर कर दिया गया है। केवल कुछ गिनी-चुनी महिलाएं ही इसका लाभ ले पाएंगी, जबकि संकल्प पत्र में सभी महिलाओं को लाभ देने की बात कही गई थी। महिलाओं को वास्तविक सशक्तिकरण और सम्मान की जगह मात्र चुनावी लालच देकर गुमराह किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए ठोस और दीर्घकालीन योजनाएं बनाई जाएं, न कि केवल चुनाव के समय वोट बटोरने के लिए ऐसी घोषणाएं की जाए। कुमारी सैलजा ने कहा है कि इस योजना लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जिनके परिवार की आय एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आय का निर्धारण परिवार पहचान पत्र के आधार पर किया जाएगा। कुमारी सैलजा ने कहा कि इस योजना के तहत आयु सीमा दूसरे राज्यों की अपेक्षा हरियाणा में कम रखी है। दूसरे राज्य में यह आय सीमा 1.20 लाख रुपपे से 2.50 रुपये तक रखी गई है। सांसद कुमारी सैलजा ने भाजपा सरकार से पूछा है कि जब उनका संकल्प पत्र सभी महिलाओं को 2100 रुपये देने का था, तो फिर आय सीमा की शर्त क्यों लगाई गई? क्या भाजपा महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है या केवल चुनावी राजनीति करना चाहती है? क्या महिलाओं की गरिमा और अधिकार महज 2100 रुपये से खरीदे जा सकते हैं? सांसद ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए नीतियां बनाईं और जमीन पर उतारी हैं। आने वाले समय में कांग्रेस महिलाओं को उनका वास्तविक हक और सम्मान दिलाने के लिए संकल्पबद्ध है।

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मेडिकल कॉलेज में चल रही निःशुल्क चिकित्सा शिविर की समय सीमा बढ़ी

मऊ,(निमेष राय ईशान टाइम्स)। कसारा स्थिति कल्पनाथ राय मेडिकल कॉलेज मऊ में अनवरत चल रहे निःशुल्क चिकित्सा शिविर जिसका 24 सितम्बर को ही समापन होना था उसे बढ़ा कर अब 2 अक्टूबर तक कर दिया गया है इसकी जानकारी देते हुए मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ मनीष राय ने बताया कि मेडिकल कॉलेज पर चल रहा निःशुल्क चिकित्सा शिविर 24 सितंबर को ही समाप्त होने वाला था परंतु मरीजों की शिविर के प्रति जागरूकता और उत्सुकता को देखते हुए इसकी समय सीमा बढ़ा कर 2अक्टूबर तक कर दी गई है .अब जन सेवा के संकल्प के साथ मेडिकल कॉलेज में हम मरीजों को 2अक्टूबर तक निःशुल्क सेवाएं प्रदान कर सकेंगे। ज्ञात हो कि अब तक एक सप्ताह के शिविर में लगभग 15 हज़ार से अधिक मरीजों ने निःशुल्क परामर्श जांच व दवाएं दी गई हैं साथ ही 47 मरीजों का सफ़ल ऑपरेशन भी मेडिकल कॉलेज के कुशल चिकित्सकों द्वारा किया जा चुका है और अभी 2अक्टूबर तक यह निशुल्क चिकित्सा शिविर चलता रहेगा l

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एनआईएस परीक्षा में प्रभाकर की सफलता, मास्टर अमिता मारवाह के मार्गदर्शन का नतीजा

पंचकूला,(कमल कलसीईशान टाइम्स)।खेल जगत में पंचकूला के ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बेंगलुरु स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) में आयोजित प्रतिष्ठित एनआईएस (NIS) परीक्षा में प्रभाकर ने शानदार सफलता प्राप्त की है। इस कठिन परीक्षा में शामिल हुए 81 शिक्षकों में से केवल 35 ही सफल हो पाए है, जिनमें प्रभाकर भी शामिल हैं।प्रभाकर की यह उपलब्धि केवल उनकी मेहनत और लगन का परिणाम नहीं, बल्कि उनके कोच मास्टर अमिता मारवाह के उत्कृष्ट प्रशिक्षण का भी नतीजा है। प्रभाकर की उपलब्धि अब कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। प्रभाकर की उपलब्धियां *ताइक्वांडो में 3 बार राज्य स्तरीय स्वर्ण पदक विजेता *नॉर्थ ताइक्वांडो कप में स्वर्ण पदक और नेपाल में रजत पदक हासिल *एथलेटिक्स में राष्ट्रीय प्रो-नेशनल खिलाड़ी के रूप में पहचान *एनसीसी कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई पदक *खेल और शिक्षा दोनों में संतुलन, 35 से अधिक पदकों के साथ पढ़ाई में भी हमेशा अव्वल मास्टर अमिता मारवाह: प्रेरणा और सशक्तिकरण की मिसाल *ताइक्वांडो में चौथी डिग्री की ब्लैक बेल्ट और अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक विजेता मास्टर अमिता मारवाह बीते 13 वर्षों से अपनी संस्था एएमएटी ताइक्वांडो के माध्यम से हजारों बच्चों का भविष्य संवार रही हैं। अब तक 10,000 से अधिक बच्चों को मुफ्त प्रशिक्षण। *5,000 से अधिक छात्रों के लिए प्रायोजन सुनिश्चित। *उनके शिष्य आज कोच, शिक्षक और सैन्य कर्मी बनकर समाज की सेवा कर रहे हैं। *अमिता मारवाह का स्पष्ट संदेश है–“कड़ी मेहनत करो और बच्चों को कुशल बनाओ।”

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