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किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. नीरज गोयल को ‘इमर्जिंग स्टार इन रीनल ट्रांसप्लांट एक्सीलेंस’ अवार्ड से सम्मानित

पंचकुला, ईशान राय: अल्केमिस्ट हॉस्पिटल, पंचकुला के एसोसिएट डायरेक्टर एवं चीफ किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. नीरज गोयल को नई दिल्ली में आयोजित स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन 2025 के दौरान ‘इमर्जिंग स्टार इन रीनल ट्रांसप्लांट एक्सीलेंस’ अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार इस क्षेत्र से किसी किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन को मिली अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय मान्यता है। डॉ. गोयल को क्षेत्र में किडनी ट्रांसप्लांटेशन प्रोग्राम की स्थापना और उसे निरंतर आगे बढ़ाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। अपने करियर में वे अब तक 1000 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक कर चुके हैं। इस अवसर पर डॉ. गोयल ने कहा, “पहले क्षेत्र के मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली-एनसीआर या अन्य मेट्रो शहरों की यात्रा करनी पड़ती थी, जिससे उन्हें लंबी प्रतीक्षा सूची, लॉजिस्टिक कठिनाइयों और भावनात्मक तनाव का सामना करना पड़ता था। अब पंचकुला में ट्रांसप्लांट सेवाओं की उपलब्धता ने हरियाणा के साथ-साथ चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और यूपी के मरीजों के लिए नई उम्मीद जगाई है।” इससे पहले, नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर भी डॉ. नीरज गोयल को किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

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वोट” और “मतदान” का मतलब है की आप नेता के गुलाम हो

“ भारत के लोकतंत्र में मतदान को सबसे शक्तिशाली हथियार माना जाता है। यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से नागरिक अपने नेताओं का चयन करते हैं और देश के भविष्य को आकार देने में अपनी भूमिका निभाते हैं। लेकिन क्या मतदान का मतलब केवल एक वोट डालना है, या इसके पीछे कोई गहरा अर्थ छिपा है? कुछ लोग कहते हैं कि मतदान करना यानी नेताओं के गुलाम बनना, क्योंकि हम अपनी स्वतंत्र इच्छा से चुने गए नेताओं के निर्णयों पर निर्भर हो जाते हैं। मतदान केवल एक कागजी प्रक्रिया या इलेक्ट्रॉनिक बटन दबाने का कार्य नहीं है। यह एक नागरिक का अधिकार, कर्तव्य और जिम्मेदारी है। मतदान के जरिए हम अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं, जो हमारी आवाज को सरकार तक पहुंचाते हैं। लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या हम वास्तव में स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद व्यक्त करते हैं, या फिर हम सामाजिक दबाव, प्रचार, या भावनात्मक प्रभावों के गुलाम बन जाते हैं? कई बार लोग नेताओं के वादों, जाति, धर्म, या क्षेत्रीय भावनाओं के आधार पर वोट देते हैं। ऐसे में मतदान स्वतंत्र इच्छा की अभिव्यक्ति कम और बाहरी प्रभावों का परिणाम ज्यादा बन जाता है। अगर हम बिना सोचे-समझे वोट डालते हैं, तो यह संभव है कि हम उन नेताओं के हाथों में शक्ति सौंप दें जो हमारे हितों की बजाय अपने निजी स्वार्थों को प्राथमिकता दें। इस दृष्टि से, मतदान हमें नेताओं का “गुलाम” बना सकता है, अगर हम अपनी शक्ति का उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से नहीं करते। मतदान की कीमत को दो दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है: एक, वह मूल्य जो यह लोकतंत्र को देता है, और दूसरा, वह लागत जो इसके गलत उपयोग से समाज को चुकानी पड़ती है।मतदान लोकतंत्र का आधार है। इसके जरिए हर नागरिक को समान अधिकार मिलता है, चाहे वह किसी भी सामाजिक, आर्थिक या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से हो। एक वोट की कीमत एक पूरे देश के भविष्य को बदलने की ताकत रखती है। यह वह शक्ति है जो सरकारों को बनाती और गिराती है। इतिहास में कई उदाहरण हैं जहां एक-एक वोट ने बड़े बदलाव लाए। मतदान करने का मतलब केवल एक दिन के लिए मतदान केंद्र जाना नहीं है। यह एक ऐसी जिम्मेदारी है जो हमें अपने नेताओं के प्रति जवाबदेह बनाती है। अगर हम गलत व्यक्ति को चुनते हैं, तो हमें अगले पांच साल तक उनके निर्णयों का परिणाम भुगतना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, भ्रष्टाचार, नीतिगत असफलताएं, या सामाजिक अस्थिरता जैसी समस्याएं गलत मतदान का परिणाम हो सकती हैं। कई बार लोग वोट देने के लिए समय, पैसा, और मेहनत खर्च करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग लंबी दूरी तय करके मतदान केंद्रों तक जाते हैं। लेकिन अगर मतदान का परिणाम अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होता, तो यह निराशा और अविश्वास को जन्म देता है। इसके अलावा, गलत नेतृत्व के कारण समाज में असमानता, बेरोजगारी, और अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं, जो मतदान की गलत पसंद की कीमत होती हैं। ऐसे में हमें मतदान को गुलामी से बचानें की जरूरत है।मतदान को नेताओं की गुलामी बनने से बचाने के लिए हमें जागरूक और विवेकपूर्ण होना होगा। निम्नलिखित कदम मदद कर सकते है,जैसे कि उम्मीदवारों के पिछले कार्यों, उनके दृष्टिकोण, और नीतियों का अध्ययन करें। प्रचार और भावनात्मक भाषणों से प्रभावित होने की बजाय तथ्यों पर ध्यान दें। जाति, धर्म, या क्षेत्रीयता के आधार पर वोट देने से बचें। अपने और समाज के हित को प्राथमिकता दें,मतदान के बाद भी नेताओं के कामकाज पर नजर रखें। लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका केवल वोट देने तक सीमित नहीं है। मतदान के महत्व और इसके प्रभाव को समझाने के लिए समाज में जागरूकता फैलाएं। मतदान कोई गुलामी नहीं है, बल्कि यह हमारी शक्ति और स्वतंत्रता का प्रतीक है। लेकिन इस शक्ति का सही उपयोग तभी संभव है जब हम जागरूक, शिक्षित, और विवेकपूर्ण ढंग से अपने वोट का उपयोग करें। मतदान की कीमत तब सार्थक होती है जब यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाए, न कि नेताओं के गलत इरादों को बढ़ावा दे। आइए, हम अपने मत का उपयोग एक मजबूत, समावेशी, और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए करें, न कि किसी की गुलामी स्वीकार करने के लिए।एक वोट बदल सकता है सब कुछ, बशर्ते वह सोच-समझकर डाला जाए। -इंद्र यादव – स्वतंत्र लेखक,महाराष्ट्रindrayadavrti@gmail.com

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मुंबई का “वड़ा पाव” प्रवासी मजदूरों की “महाराजा थाली” है

मुंबई एक ऐसा शहर जो सपनों का पीछा करने वालों का घर है। यहाँ की सड़कों पर भागमभाग, ट्रेनों की रफ्तार और लोगों की जिंदगी का रंग हर कोने में बिखरा हुआ है। इस शहर की आत्मा में बस्ता है उसका वड़ा पाव, जो न सिर्फ़ एक नाश्ता है, बल्कि मुंबई की संस्कृति और प्रवासी श्रमिकों की जिंदगी का एक अनमोल हिस्सा है। लेकिन समय बदल रहा है, और इसके साथ ही मुंबई की गलियों में स्वाद का स्वरूप भी बदलता नजर आ रहा है। मुंबई की सड़कों पर चलते हुए अगर आपको भूख लगे, तो वड़ा पाव से बेहतर और सस्ता विकल्प शायद ही मिले। यह मसालेदार आलू का वड़ा, जिसे नरम पाव में लपेटकर लाल चटनी और हरी मिर्च के साथ परोसा जाता है, हर प्रवासी श्रमिक की थाली का हिस्सा रहा है। चाहे वह दिहाड़ी मजदूर हो,रिक्शावाला हो, या फिर ऑफिस जाने वाला कर्मचारी, वड़ा पाव ने सबके पेट और दिल को जीता है। जयराम वालनकर, जिन्हें लोग प्यार से “वड़ा पाव वाले मामा” कहते हैं, पिछले 25 सालों से मुंबई में वड़ा पाव बेच रहे हैं। वह बताते हैं सुबह-शाम मजदूर भाई लोग 10-15 रुपये में पेट भर लेते थे। वड़ा पाव उनका भोजन था, उनका साथी था। लेकिन अब समय बदल रहा है। जयराम मामा की बातों में एक सच्चाई छिपी है। आज की युवा पीढ़ी और नई जनरेशन के प्रवासी श्रमिकों की पसंद बदल रही है। मुंबई की गलियों में अब वड़ा पाव के साथ-साथ पिज्जा, बर्गर और चायनीज खाने की खुशबू भी तैरने लगी है। मॉल्स, फूड कोर्ट्स और फास्ट-फूड चेन्स ने युवाओं को अपनी ओर खींच लिया है। जयराम मामा कहते हैं, “अब लोग वड़ा पाव के साथ-साथ नूडल्स, मंचूरियन और पिज्जा माँगते हैं। मेरे कुछ ग्राहक तो कहते हैं, ‘मामा, कुछ नया लाओ! यह बदलाव सिर्फ़ स्वाद का नहीं, बल्कि जीवनशैली का एक हिसा भी है। पहले जहाँ प्रवासी श्रमिक अपनी मेहनत की कमाई से सस्ता और पेट भरने वाला खाना ढूँढते थे, वहीं अब नई पीढ़ी के श्रमिक, जो स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के साथ बड़े हुए हैं, वैश्विक स्वाद का अनुभव चाहते हैं। पिज्जा और बर्गर उनके लिए सिर्फ़ खाना नहीं, बल्कि एक स्टेटस और आधुनिकता का प्रतीक बन गया है। हालाँकि, इस बदलते स्वाद का असर प्रवासी श्रमिकों की जेब पर भी पड़ रहा है। वड़ा पाव, जो 10-15 रुपये में मिल जाता है, अब भी उनके लिए सबसे किफायती विकल्प है। वहीं, एक पिज्जा या बर्गर की कीमत 100 रुपये से शुरू होती है, जो कई श्रमिकों के लिए रोज़मर्रा का खर्च नहीं हो सकता। जयराम मामा कहते हैं, “कई मजदूर भाई मेरे पास आते हैं और कहते हैं, ‘मामा, वड़ा पाव ही दे दो, बाकी चीज़ें तो सपना हैं। इसके बावजूद, कुछ युवा प्रवासी श्रमिक, जो बेहतर आय और नौकरियों के साथ शहर में आए हैं, फास्ट फूड को अपनाने लगे हैं। यह उनके लिए सिर्फ़ खाना नहीं, बल्कि मुंबई की चकाचौंध भरी ज़िंदगी का हिस्सा बनने का एक तरीका है। हमनें पूछा क्या वड़ा पाव अपनी जगह खो रहा है? जयराम मामा मुस्कुराते हुए कहते हैं, “नहीं, वड़ा पाव तो मुंबई की जान है। लोग पिज्जा खाएँ, बर्गर खाएँ, लेकिन जब पेट और जेब दोनों को संतुष्ट करना हो, तो वड़ा पाव ही याद आता है।” वह यह भी मानते हैं कि बदलते समय के साथ उन्हें भी कुछ नया करना होगा। अब वह अपनी गुमटी में वड़ा पाव के साथ-साथ चायनीज वड़ा और पाव-भाजी जैसे नए व्यंजन भी शामिल करने की सोच रहे हैं।मुंबई का वड़ा पाव सिर्फ़ एक खाना नहीं, बल्कि इस शहर की विविधता, मेहनत और सपनों का प्रतीक है। यह प्रवासी श्रमिकों की थाली का आधार रहा है और रहेगा। लेकिन बदलते समय और नई पीढ़ी की पसंद ने यह दिखा दिया है कि मुंबई की गलियाँ अब सिर्फ़ वड़ा पाव की खुशबू से नहीं, बल्कि पिज्जा, बर्गर और चायनीज के स्वाद से भी महक रही हैं। जयराम मामा जैसे लोग इस बदलाव को अपनाने को तैयार हैं, लेकिन उनका मानना है कि वड़ा पाव का स्थान कोई नहीं ले सकता। आखिर, यह मुंबई की धड़कन है, जो हर प्रवासी के दिल में बसती है।

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वन औषधीय पौधारोपण कार्यक्रम किया आरोग्यभारती चंडीगढ़ ने

BREAKING NEWS चंडीगढ़ (ईशान टाइम्स )।आरोग्य भारती चंडीगढ़ महानगर द्वारा वन औषधि वाटिका पौधारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया किया गया, कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन समाज में वन औषधि पौधों ,वृक्षों का प्रचार प्रसार व इनके अध्यात्मिक धार्मिक व वैज्ञानिक गुणों को हर भारतीय के घर तक पहुंचा जाये। आज लोग इन्हें खर पतवार समझकर काट रहे है, प्राचीन समय से औषधीय विज्ञान भारतीय संस्कृति की धरोहर रही है ।इसलिए आरोग्य भारती पूरे भारत वर्ष में इस धरोहर को संजोय रखने के लिए प्रयासरत है। हर्बल पौधों में तुलसी, इल्लाची, ब्रह्मी, लैमन ग्रास,अश्वगंधा, शतावरी व लाजवंती और पीपल,नीम व वरगद की त्रिवेणी लगाई। कार्यक्रम में आरोग्य भारती के राजस्थान एवं उत्तर क्षेत्र संयोजक, राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य व आरोग्य मित्र योजना के अखिल भारतीय प्रमुख संजीवन कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे । चंडीगढ़ म्युनिस्पल कॉरपोरेशन के कमिश्नर अमित कुमार मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित रहे । प्रितपाल सिंह एक्सियन आरोग्य भारती चंडीगढ़ महानगर के अध्यक्ष डॉक्टर संतोष कुमार व सचिव प्रोफेसर शिवानी शर्मा व उपाध्यक्ष अधिवक्ता करमजीत चौधरी , पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर सुशील कुमार तौमर, प्रोफेसर श्री मति अनुपम बाहरी संयोजिका पंजाब विश्वविद्यालय, सुरिंदर पाल चौहान चंडीगढ़ व हरियाणा प्रांत प्रचार प्रसार व सम्पर्क प्रमुख, कार्यालय प्रमुख जगत राम , अमित दीवान संयोजक पीजीआईएमईआर चण्डीगढ़ कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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पारदर्शिता व जनभागीदारी की दिशा में हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया ‘म्हारी सड़क मोबाइल एप’

डिजिटल एप से नागरिक सीधे सरकार तक पहुँचा सकेंगे सड़क से संबंधित समस्याएं ‘म्हारी सड़क ऐप’में जी.आई.एस आधारित डिजिटल मैपिंग से सड़क की स्थिति पर होगी सीधी नजर पंचकूला, 4 अक्टूबर (संजय राय)– हरियाणा में ढांचागत विकास को नई गति देने के लिए पारदर्शिता व जनभागीदारी की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आज म्हारी सड़क मोबाइल एप्लीकेशन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐप नागरिक और सरकार के बीच सेतु का काम करेगा। सरकार का लक्ष्य प्रदेश में बेहतर सड़कों का जाल बिछाकर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों को मजबूत आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सड़कें विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं और इस दिशा में हरियाणा सरकार दृढ़ संकल्पित है। पंचकूला में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐप नागरिकों को सड़कों की स्थिति की जानकारी सीधे सरकार तक पहुंचाने का माध्यम है। इस ऐप के माध्यम से नागरिक सड़कों पर गड्ढे, टूटी सड़क या सड़क पर जलभराव की समस्या की लोकेशन के साथ शिकायत दर्ज कर सकेंगे। संबंधित विभाग को तत्काल सूचना मिलते ही सड़क के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाएगा। इस ऐप के माध्यम से शिकायत की टाइम बाउंड मॉनिटरिंग होगी। म्हारी सड़क ऐप में जी.आई.एस आधारित डिजिटल मैपिंग से सड़क की स्थिति पर होगी सीधी नजर उन्होंने कहा कि हरियाणा के आधारभूत ढांचे को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है और पारदर्शिता, जवाबदेही एवं जनभागीदारी को अपनी प्राथमिकता बना रही है। उन्होंने कहा कि हमने एक नया हरियाणा बनाने का संकल्प लिया है, एक ऐसा हरियाणा जहां हर नागरिक को बेहतर जीवन मिले, जहां विकास की गति कभी न थमे और विकास की गति के लिए सबसे पहली जरूरत है अच्छी सड़कें। सड़कें किसी भी राज्य की जीवन रेखा होती हैं। ये न सिर्फ लोगों को जोड़ती हैं, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी गति देती हैं। उन्होंने कहा कि म्हारी सड़क ऐप में जी.आई.एस-आधारित तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे राज्य की सभी सड़कों का डिजिटल मानचित्रण संभव हुआ है। इससे नागरिकों को सड़कों की स्थिति की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। प्रादेशिक सड़क उत्थान परियोजना बनेगी विकसित हरियाणा का आधारस्तंभ नायब सिंह सैनी ने कहा कि गत 21 सितम्बर को हिसार में ‘प्रादेशिक सड़क उत्थान परियोजना’ का शुभारंभ किया था। यह परियोजना आने वाले वर्षों में ‘विकसित भारत-विकसित हरियाणा’ के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। इस परियोजना के तहत चालू वित्त वर्ष में 4,827 करोड़ रुपये की लागत से 9,410 किलोमीटर लंबी 4,227 सड़कों की मरम्मत एवं उत्थान का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि ‘यदि देश को गति देनी है, तो सड़कों को मजबूती देनी होगी। सड़कें सिर्फ यात्रा का साधन नहीं होतीं, बल्कि यह अर्थव्यवस्था की धमनियां होती हैं।’ इसी सोच के तहत, पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में भारत ने सड़क अवसंरचना में अभूतपूर्व क्रांति देखी है। आज, देशभर में डिफेंस कॉरिडोर से लेकर फ्रेट कॉरिडोर तक, भारतमाला से सागरमाला तक, रोडवेज, रेलवेज और एयरवेज कनेक्टिविटी का जाल पूरे देश में मिशन मोड पर काम कर रहे हैं। साथ ही, पी.एम. गतिशक्ति के माध्यम से आधारभूत परियोजनाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदेश में पिछले 11 वर्षों में 28,651 करोड़ रुपये की लागत से 43,703 किलोमीटर लंबी सड़कों का सुधार किया है। इसके साथ ही, 2,534 करोड़ रुपये की लागत से 2,417 किलोमीटर लंबी नई सड़कों का निर्माण भी किया है। इनके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रदेश में 1, 077 करोड़ रुपये की लागत से 2,432 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। हरियाणा में 21 नये राष्ट्रीय राजमार्ग स्वीकृत किए हैं। इनमें से 12 राजमार्ग बन चुके हैं। प्रदेश में पिछले 11 वर्षों में 28,582 करोड़ रुपये की लागत से 1,719 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है। जबकि, 2014 से पहले की सरकार के 10 साल के शासनकाल में 1,713 करोड़ रुपये की लागत से 451 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए गए। इतना ही नहीं, यातायात को सुगम बनाने के लिए 27 टोल टैक्स बैरियर हटाने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिक टेक्नोलॉजी से जुड़े, उनकी भागीदारी इस ऐप को सफल बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी। हर स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी में इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘हरियाणा ए.आई. मिशन’ के तहत ई-गवर्नेस को बढ़ावा दे रही है। इस मिशन के तहत गुरुग्राम और पंचकूला में ए.आई. हब स्थापित किए जाएंगे, जहां 50 हजार से अधिक युवाओं को उन्नत तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस डिजिटल पहल से न केवल सड़कें बेहतर होंगी, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत होगा – लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि किसी भी प्रदेश के विकास का आंकलन उसकी सड़कों की स्थिति से लगाया जा सकता है और हरियाणा लगातार अपने सड़क तंत्र को मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग प्रदेश में सड़कों की रिपेयर, नवनिर्माण, सुदृढ़ीकरण और पैच-वर्क के कार्य को युद्ध स्तर पर कररहा है। उन्होंने कहा कि गत दिनों ही मुख्यमंत्री द्वारा प्रादेशिक सड़क उत्थान परियोजना का शुभारंभ किया गया। ये परियोजना विकसित हरियाणा के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल यातायात का साधन नहीं हैं, बल्कि यह गांवों और शहरों को जोड़ने के साथ-साथ राज्य के समग्र विकास की धुरी भी हैं। रणबीर गंगवा ने कहा कि नागरिक फोटो के साथ सड़क संबंधित शिकायतें इस एप पर अपलोड कर सकते हैं। इस डिजिटल सिस्टम में जेई से लेकर विभागाध्यक्ष तक सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की गई है। शिकायत प्राप्त होने के बाद निर्धारित समय में संबंधित अधिकारी सड़क सुधार कार्य पूरा करने के बाद की फोटो भी एप पर अपलोड करेंगे और शिकायतकर्ता को सूचित किया जाएगा। इस पहल से न केवल सड़कें बेहतर होंगी, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत होगा। इस अवसर पर

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17 अक्टूबर को सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर सोनीपत में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रदेशवासियों को करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आयोजित हुई कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक हरियाणा सरकार की एक वर्ष की उपलब्धियों और विकास कार्यों पर हुई विस्तृत चर्चा चंडीगढ़, 4 अक्टूबर(संजय राय),हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज राज्य कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश सरकार की एक वर्ष की उपलब्धियों, विकास कार्यों, और विभिन्न प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया। यह बैठक सेवा पखवाड़े के सफल समापन के उपरांत आयोजित हुई, जिसमें कैबिनेट सदस्यों ने न केवल प्रदेश की प्रगति का मूल्यांकन किया बल्कि आगामी योजनाओं और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भी चर्चा की। बैठक में हरियाणा सरकार के गठन के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 अक्टूबर को सोनीपत में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन को लेकर विशेष चर्चा हुई। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोनीपत में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे और इस अवसर पर प्रदेशवासियों को करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात प्रदान करेंगे। यह कार्यक्रम वर्तमान सरकार की उपलब्धियों और विकास पहलों सहित जनता के समर्थन को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गत वर्ष अक्टूबर में हरियाणा की जनता ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार को लगातार तीसरी बार मजबूत जनादेश से चुना था। अब जब सरकार का एक वर्ष पूरा हो रहा है, इस उपलब्धि को विशेष रूप से मनाने के लिए सोनीपत में 17 अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि होंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री द्वारा प्रदेश की जनता के लिए विकास की नई योजनाओं और परियोजनाओं की सौगात दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हरियाणा प्रदेश के प्रति विशेष लगाव रहा है। पिछले एक वर्ष में उन्होंने प्रदेश में दो बार आकर विकास कार्यों को नई दिशा दी है। 8 दिसंबर 2024 को पानीपत में उन्होंने “बीमा सखी योजना” का शुभारंभ किया, वहीं 14 अप्रैल 2025 को बाबा भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर हिसार से हरियाणा के पहले महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट से अयोध्या के लिए पहली फ्लाइट रवाना की। उसी दिन यमुनानगर में 7 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रही 800 मेगावाट की थर्मल प्लांट की नई इकाई का शिलान्यास भी किया गया। इन परियोजनाओं ने प्रदेश के विकास को नई गति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब एक बार फिर प्रधानमंत्री के आगमन से हरियाणा में चल रहे नॉनस्टॉप विकास कार्यों को और तेजी मिलेगी। बैठक में कैबिनेट मंत्री अनिल विज, कृष्णलाल पंवार, डॉ अरविंद शर्मा, श्याम सिंह राणा, रणबीर गंगवा, कृष्ण बेदी और कुमारी आरती सिंह राव सहित अन्य मंत्रिगण भी उपस्थित रहे।

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मोदी सरकार की नीतियों के कारण ही देश के 8 करोड़ किसान डेयरी सेक्टर से जुड़ गए हैं:अमित शाह

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज हरियाणा के रोहतक में साबर डेयरी प्लांट का लोकार्पण किया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सहकारिता की मजबूत नींव रखी जा रही है, वर्ष 2029 से पहले देश की हर पंचायत में एक सहकारिता समिति बनेगी साबर डेयरी ने हरियाणा के दूध उत्पादक किसानों के कल्याण के लिए 350 करोड़ रुपए की लागत से देश का सबसे बड़ा दही, दूध और मिठाई बनाने का प्लांट लगाया प्रतिदिन 150 मीट्रिक टन दही, 10 मीट्रिक टन योगर्ट, 3 लाख लीटर छाछ और 10 हज़ार किलो मिठाई बनाने वाली साबर प्लांट डेयरी किसानों की समृद्धि का प्रतीक बनेगा मोदी जी के नेतृत्व में 70 फीसद की गति से देश का डेयरी सेक्टर दुनिया में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला सेक्टर बना है आज देश की दुग्ध प्रसंस्करण की क्षमता 660 लाख लीटर प्रतिदिन है, जिसे 2028-29 में 1 हजार लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुँचाना है मोदी सरकार डेयरी संयंत्र निर्माण और उससे जुड़े रिसर्च व डेवलपमेंट के सेक्टर में तीन गुना तेजी लाकर डेयरी सेक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही है रोहतक , 3 अक्टूबर(संजय राय, ईशान टाइम्स)। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज हरियाणा के रोहतक में साबर डेयरी प्लांट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, केन्द्रीय सहकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर और केन्द्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के किसानों की दशकों पुरानी अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन की मांग को पूरा करने का काम किया है और इसके लिए पूरे देश की ओर से उनका आभार है। उन्होंने कहा कि पिछले 4 सालों में देश की सभी राज्य सरकारों को साथ लेकर सहकारिता मंत्रालय ने सहकारिता की नींव को गहरा करने का काम किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2029 से पहले देश की एक भी पंचायत ऐसी नहीं रहेगी, जहां एक भी सहकारिता समिति न हो।अमित शाह ने कहा कि आज साबर डेयरी के माध्यम से दूध उत्पादकों के कल्याण के लिए लगभग 350 करोड़ रुपए की लागत से पूरे देश का सबसे बड़ा दही, छाछ और योगर्ट बनाने के प्लांट का काम पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा से ही पूरे दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) की दुग्ध उत्पादों की जरूरत पूरी होगी। साबर डेयरी ने गुजरात के साबरकांठा जिले से शुरूआत कर 9 राज्यों के दुग्ध उत्पादकों के लिए बहुत बड़े मौके का सृजन किया है। श्री शाह ने कहा कि गुजरात में त्रिभुवन भाई, भूरा भाई और गलबा भाई ने डेयरियों की नींव रखी और आज कोऑपरेटिव डेयरी के माध्यम से गुजरात की 35 लाख बहनें सालाना 85 हज़ार करोड़ रुपए का व्यापार कर रही हैं।केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि साबर प्लांट में प्रतिदिन 150 मीट्रिक टन दही, 10 मीट्रिक टन योगर्ट, 3 लाख लीटर छाछ और प्रतिदिन 10 हज़ार किलो मिठाई बनेंगे औऱ इससे किसानों की समृद्धि का रास्ता खुलेगा। उन्होने कहा कि आज हमारी साबर डेयरी राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की सेवा कर रही है। अमूल के नेतृत्व में गुजरात में आधुनिक प्रजनन तकनीकों – भ्रूण स्थानांतरण औऱ लिंग निर्धारण – पर काफी वैज्ञानिक काम हुआ है। ये दोनों तकनीकें हरियाणा के पशुपालकों को भी उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ मधुमक्खी पालन औऱ जैविक खेती को भी राज्य में बढ़ावा देने की ज़रूरत है। गुजरात में गोबर गैस के लिए कई अच्छे प्रयोग हुए हैं और हरियाणा में भी इन प्रयोगों को लागू करने की जरूरत है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत का डेयरी सेक्टर पिछले 11 साल में 70 प्रतिशत की क्षमता से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत का डेयरी सेक्टर विश्व में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला डेयरी सेक्टर बना है। उन्होंने कहा कि 2014-15 में भारत में दूध देने वाले पशुओं की संख्या 86 मिलियन थी जो अब बढ़कर 112 मिलियन हो गई है। इसी प्रकार, दुग्ध उत्पादन 146 मिलियन टन से बढ़कर 239 मिलियन टन हो गया है। उन्होंने कहा कि देसी नस्ल की गाय के दूध का उत्पादन 29 मिलियन टन से बढ़कर 50 मिलियन टन तक पहुंच गया है। अमित शाह ने कहा कि आज भारत के लगभग 8 करोड़ किसान डेयरी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता को 124 ग्राम से बढ़ाकर 471 ग्राम करने का काम हमारे देश के किसानों ने किया है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 साल में भारत के डेयरी सेक्टर में कई बदलाव हुए हैं और इसके कारण हमारे किसान समृद्ध हुए हैं।केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि श्वेत क्रांति 2.0 के तहत आने वाले दिनों में देशभर में 75 हज़ार से अधिक डेयरी समितियों की स्थापना होगी और सरकार 46 हज़ार डेयरी कोऑपरेटिव समितियों को मज़बूत भी करेगी। सहकारिता मंत्री शाह ने कहा कि हमारा वर्तमान दुग्ध प्रोक्योरमेंट 660 लाख लीटर प्रतिदिन है और वर्ष 2028-29 तक इसे बढ़ाकर 1 हज़ार लाख मीट्रिक टन तक करने का हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य हासिल करने पर सारा मुनाफा दुग्ध उत्पादन करने वाली हमारी किसान माताओं बहनों को मिलता है। एक साल में ही लगभग 33 हज़ार कोऑपेरेटिव्स को पंजीकृत कर दिया गया है।अमित शाह ने कहा कि हाल ही में मोदी सरकार ने तीन राष्ट्रीय सहकारी समितियां बनाईं हैं – पशु आहार के उत्पादन के लिए, गोबर के प्रबंधन के लिए औऱ मृत पशुओं के अवशेषों का सर्कुलर इकोनॉमी में उपयोग करने के लिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम शुरू किया, पशुपालन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड बनाया और राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम चलाया। शाह ने कहा कि आने वाले दिनों में हम डेयरी संयंत्र के निर्माण की दृष्टि से भी आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं और इसके लिए NDDB और बाकी सभी डेयरियां मिलतर संयंत्र निर्माण में 3 गुना कैपेसिटी एक्सपेंशन का काम करेंगे।

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केंद्र सरकार ने एक बार फिर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की कार्यशैली की करी सराहना

नायब सिंह के नेतृत्व में हरियाणा में युवाओं को योग्यता के आधार पर पारदर्शी व निष्पक्ष रूप से मिल रही सरकारी नौकरियाँ चंडीगढ़, 3 अक्टूबर(संजय राय) – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की एक बार फिर प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में प्रदेश में युवाओं को योग्यता के आधार पर बिना खर्ची-पर्ची के पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सरकारी नौकरियाँ प्रदान की जा रही हैं। अमित शाह ने इस पहल को एक सराहनीय कदम बताते हुए मुख्यमंत्री को प्रदेश की जनता की ओर से बधाई एवं साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की व्यवस्था प्रदेश के युवाओं में सरकारी तंत्र के प्रति विश्वास और पारदर्शिता की भावना को मजबूत कर रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज कुरुक्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में तीन नए आपराधिक कानूनों से संबंधित प्रदर्शनी के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने राज्य सरकार की पारदर्शी भर्ती प्रणाली की विशेष रूप से प्रशंसा की।

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क्त फूल सिंह के नाम से यूनिवर्सिटी में चेयर स्थापित की जाए : डॉ मलिक

पंचकुला , 2 अक्तूबर – हरियाणा पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं जाट सभा के अध्यक्ष डॉ महेंद्र सिंह मलिक ने प्रदेश सरकार से मांग की कि भक्त फूल सिंह विश्वविद्यालय खानपुर कलां में भक्त फूल सिंह के नाम से एक चेयर स्थापित की जानी चाहिए ताकि विद्यार्थी उनके जीवन पर शोध कर सकें और युवा पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके। डॉ मलिक आज यहां चौधरी छोटूराम जाट भवन में भक्त फूल सिंह की याद में आयोजित एक विचार गोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जाट समाज के विवाह योग्य युवक एवं युवतियों का परिचय-सम्मेलन भी आयोजित किया गया। गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए महेंद्र सिंह मलिक ने कहा कि भक्त फूल सिंह ने नारी शिक्षा के लिए जो कार्य किया , वह एक अनूठा उदाहरण है। आर्य समाज के प्रभाव में आकर उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी को छोड़कर मात्र तीन लड़कियों की संख्या से कन्या गुरुकुल आरम्भ किया था। उनके द्वारा लगाया गया शिक्षा का वह पौधा अब विश्वविद्यालय के रूप में वट वृक्ष बन चुका है। उन्होंने भक्त फूल सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने पर प्रदेश सरकार का धन्यवाद किया , साथ ही उन्होंने मांग की कि भक्त फूल सिंह द्वारा शुरू किया गया गुरुकुल को पुनः मॉडर्न स्वरूप में आरम्भ किया जाए।डॉ मलिक ने लोगों को आज दशहरा पर्व की बधाई दी और महात्मा गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर दोनों महापुरुषों को भी नमन किया।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि तथा गुरुकुल खानपुर कलां एवं भैंसवाल कलां की पूर्व चेयरमैन कृष्णा मलिक ने भक्त फूल सिंह को देहाती गांधी की संज्ञा देते हुए कहा कि उन्होंने जिस समय में लड़कियों को पढ़ाने के लिए गुरुकुल की स्थापना की थी उस समय नारी शिक्षा की कल्पना करना भी मुश्किल था। लेकिन भक्त फूल सिंह अपने दृढ निश्चय पर डटे रहे और बेटियों को शिक्षा दिलाने के लिए आगे आए।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गुरुकुल खानपुर कलां के पूर्व महासचिव जय सिंह ठेकेदार ने भी भक्त फूल सिंह को सच्चा गांधीवादी विचारधारा का व्यक्ति बताया। उन्होंने कन्या गुरुकुल की स्थापना से लेकर लड़कियों की पढाई के लिए किए गए कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।इस अवसर पर भक्त फूल सिंह पॉलिटेक्निक एवं अन्य शैक्षणिक संस्थाओं में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए पूर्व प्राचार्या किरण जिंदल , सुमन दलाल , डॉ ज्ञानवती , साहब कौर समेत अन्य शिक्षविदों को सम्मानित भी किया गया।गोष्ठी के बाद जाट समाज के विवाह योग्य युवक एवं युवतियों के लिए एक “जाट परिवार परिचय सम्मेलन” भी आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में 200 से अधिक युवाओं का बायोडाटा एकत्रित हुआ जिसको लेकर विभिन्न परिवारों ने परस्पर चर्चा की। कुछ परिवारों की मौके पर ही मीटिंग करके बातचीत को आगे बढ़ाया गया।इस अवसर पर जाट सभा के उपाध्यक्ष जयपाल पुनिया , सचिव बीएस गिल , एचएसएससी के सदस्य साधु राम जाखड़ ,राजेंद्र खर्ब , नरेश दहिया , रणबीर सिंह राठी , ईश्वर सिंह दुहन , राज सिंह कादयान ,अनिल आर्य , जगबीर कादयान , राकेश गिल, सुरेन्द्र कुंडू, आजाद मलिक, प्रोमिला सांगवान , प्रोमिला नैन , संदीप गोयत , प्रेम सिंह ,आनंद लाठर के अलावा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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ठाणे के वागले स्टेट में बच्चों का अनोखा भंडारा,2000 भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

०३ अक्टूबर २०२५ (इंद्र यादव – स्वतंत्र लेखक,ठाणे ( महाराष्ट्र )),महाराष्ट्र के ठाणे जिले के वागले स्टेट में इस बार नवरात्रि उत्सव ने एक अनोखा रंग बिखेरा। यहाँ के छोटे-छोटे बच्चों ने अपनी श्रद्धा और साहस का परिचय देते हुए 2000 भक्तों के लिए भंडारा आयोजित किया। इस नेक कार्य के लिए बच्चों ने न केवल चंदा इकट्ठा किया, बल्कि पूरे उत्साह और समर्पण के साथ भंडारे की व्यवस्था को भी संभाला। उनकी इस पहल ने न सिर्फ स्थानीय लोगों का दिल जीता, बल्कि समाजसेवी श्री.महेंद्र सोडारी जी का भी ध्यान आकर्षित किया। “बिन पगारी, मोटा अधिकारी की तर्ज पर मासूम बच्चों द्वारा बनाया गया नया संगठन “कालरात्रि मित्रं मंडल” के अध्यक्ष १५ वर्षीय अनमोल सरोज जी ने बताया कि हम बच्चों नें अनुराग सरोज (१३),विशाल जैसवार (१६),प्रतीक चौहान (१२)आदित्य जैसवार (१४),अयूब जैसवार (१३),यश जोशी (१२),अंश प्रजापति (11),रुद चौहान (१२),अनुन जैसवार (८),अविनाश मौर्या,अर्णव सहानी,विराज गौरव,देव शर्मा ने मिलकर इस भंडारे का विचार बनाया और इसे साकार करने के लिए दिन-रात मेहनत की। अनमोल सरोज ने कहा, “हम चाहते थे कि नवरात्रि के इस पवित्र अवसर पर माता रानी के भक्तों की सेवा करें। हमने घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा किया और सामूहिक प्रयास से भंडारे की तैयारी की।” बच्चों की यह पहल देखकर हर कोई हैरान था कि इतनी कम उम्र में वे इतना बड़ा आयोजन कैसे कर पाए।इस आयोजन की खबर जब समाजसेवी श्री.महेंद्र सोडारी जी तक पहुँची, तो वे बच्चों के उत्साह और श्रद्धा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत ₹10,000 का योगदान दिया। इसके साथ ही, उन्होंने बच्चों की सराहना करते हुए कहा इस मौके पर किसी भी प्रकार की सहायता के लिए मैं सदैव खड़ा हूं, इन बच्चों ने साबित कर दिया कि उम्र कोई मायने नहीं रखती, जब दिल में श्रद्धा और सेवा का जज्बा हो। इनका यह प्रयास समाज के लिए एक मिसाल है।” भंडारे में 2000 भक्तों ने प्रसाद के रूप में काबुली चनें की सब्जी,जीरा राईस, बुनियाँ माता रानी का प्रसाद ग्रहण किया। बच्चों ने न केवल भोजन की व्यवस्था की, बल्कि स्वच्छता और अनुशासन का भी विशेष ध्यान रखा। स्थानीय लोगों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताया और बच्चों की एकता और मेहनत की जमकर तारीफ की। यह आयोजन न केवल नवरात्रि के उत्सव को और भी खास बनाया, बल्कि यह भी दिखाया कि छोटी उम्र में भी बड़े सपने और सेवा का जज्बा समाज में बदलाव ला सकता है। बच्चों का यह प्रयास निश्चित रूप से वागले स्टेट के लिए गर्व का विषय बन गया है।

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