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संविधानदिवस पर दिल्ली में ‘तिरंगा’पुस्तक का भव्य विमोचन पूर्व CJI के.जी. बालकृष्णन ने किया

नई दिल्ली(इंद्र यादव,ईशान टाइम्स ग्रुप)।संविधान दिवस के पावन अवसर पर नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के.जी. बालकृष्णन ने जगद्गुरु कृष्णानंद सरस्वती एवं अन्य संभ्रांत अतिथियों की उपस्थिति में चर्चित पुस्तक “तिरंगा” का विधिवत विमोचन किया। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री श्याम जाजू की विशेष उपस्थिति रही। मंच पर जगद्गुरु कृष्णानंद सरस्वती, जस्टिस के.जी. बालकृष्णन तथा अन्य गणमान्य नागरिक एक साथ उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर तिरंगे के प्रतीक चिह्न वाली इस पुस्तक का लोकार्पण किया।पुस्तक “तिरंगा” राष्ट्रीय ध्वज के गौरव, उसके इतिहास और भारतीय संविधान में निहित मूल्यों को समर्पित है। विमोचन के बाद उपस्थित लोगों ने इसे राष्ट्रप्रेम और संवैधानिक चेतना को जगाने वाली महत्वपूर्ण रचना बताया। कार्यक्रम में कांस्टीट्यूशन क्लब के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा उपस्थित रहे। संविधान दिवस और “रत्न” थीम के साथ आयोजित इस समारोह ने राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों को फिर से याद दिलाया। पुस्तक के लेखक ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट श्री अनिल कुमार यादव जी ने विमोचन के बाद कहा कि “तिरंगा सिर्फ़ कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं और बलिदानों का प्रतीक है। इस पुस्तक के माध्यम से नई पीढ़ी तक यह संदेश पहुँचाना मेरा उद्देश्य है।”कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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करनाल में सरकारी धान घोटाले में लगातार एक्शन जारी

अब जिला प्रबंधक (डीएम) अमित कुमार को निलंबित किया करनाल (ईशान राय)।जिले में सरकारी धान घोटाले का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। धान खरीद में हुई गड़बड़ी के बाद अब हैफेड विभाग में बड़ा एक्शन लिया गया है। विभाग के प्रबंध निदेशक ने जिला प्रबंधक (डीएम) अमित कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हैफेड मुख्यालय पंचकूला से 4 नवंबर 2025 को जारी आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि के दौरान वे नियम अनुसार वेतन और भत्ते प्राप्त करेंगे। इस दौरान उनका मुख्यालय पंचकूला रहेगा। करनाल और तरावड़ी मंडियों में धान खरीद में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पहले ही कई अधिकारी नप चुके हैं। फूड एंड सप्लाई विभाग के 4 इंस्पेक्टर, 1 सब इंस्पेक्टर,तरावड़ी मार्केट कमेटी के सचिव संजीव सचदेवा,करनाल मंडी की सचिव आशा रानी, 2 मंडी सुपरवाइजर, 1 ऑक्शन रिकॉर्डर और 3 ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। अब हैफेड के जिला प्रबंधक अमित कुमार पर भी गाज गिरी है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और भी अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना है।

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राजेश निषाद बनाये गये जननायक जनता पार्टी के पंचकूला हल्का अध्यक्ष ।

पंचकूला, 4 नवंबर (Ishantimes): जननायक जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने पंचकूला नगर निगम के वार्ड नंबर 9 के पार्षद राजेश कुमार निषाद को पंचकूला हल्के का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उल्लेखनीय है कि जजपा लगातार अपने संघठन में कुछ बदलाव के साथ विस्तार कर रही है इसी कड़ी में अपने मोजूदा हल्का प्रधान सोहन लाल गुर्जर को पार्टी के किसान प्रकोष्ठ का प्रदेश सचिव नियुक्त किया है तथा जिले में संगठन की ज्यादा मजबूती के लिए पंचकूला के प्रमुख एवं प्रखर जजपा नेता एवं जिले में रहने वाले हज़ारों पूर्वांचल के लोगों में विशेष रूप से लोकप्रिय राजेश निषाद को पंचकूला हल्के की कमान सौंपी है। राजेश निषाद ने हल्का अध्यक्ष बनाये जाने पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अजय सिंह चौटाला, पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दुष्यंत चौटाला, पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष बृज शर्मा, पंचकूला जिला अध्यक्ष ओ पी सिहाग तथा शीर्ष नेतृत्व का धन्यवाद किया।नवनियुक्त हल्का अध्यक्ष ने शीर्ष नेतृत्व को विश्वास दिलाया कि वो पार्टी को पंचकूला में आगे ले जाने के लिए अपनी तरफ से कोई कोर- कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे। वो सबको साथ लेकर दिन रात संगठन की मजबूती के लिए काम करेंगे।

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राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने गुरुग्राम में “इंटरनेशनल रिलेशंस” पुस्तक का द्वितीय संस्करण किया लॉन्च

21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण: राज्यपाल गुरुग्राम, 4 नवंबर (Sanjay Rai): हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने मंगलवार को गुरुग्राम स्थित साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर आधारित पुस्तक “इंटरनेशनल रिलेशंस – सिविल सेवा एवं राज्य सेवा परीक्षाओं हेतु” के दूसरे संस्करण का विमोचन किया। कार्यक्रम में भारत सरकार के पूर्व विदेश मंत्रालय सचिव दामु रवि विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस पुस्तक के लेखक हैं स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी हरियाणा के कुलपति प्रो. अशोक कुमार और गुरुग्राम के डीसीपी ट्रैफिक डॉ. राजेश मोहन। विमोचन से पहले राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि 21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों का अध्ययन पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने बताया कि भौगोलिक सीमाओं के बावजूद आज की दुनिया अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, संचार और पर्यावरण के स्तर पर आपस में गहराई से जुड़ी हुई है। जलवायु परिवर्तन, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे अब किसी भी देश तक सीमित नहीं रह गए हैं। राज्यपाल ने पुस्तक को केवल एक शैक्षणिक मार्गदर्शिका नहीं बताया, बल्कि इसे जीवन दृष्टिकोण और नेतृत्व कौशल विकसित करने वाली कृति कहा। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक युवाओं को विवेकशील सोच, विचारशीलता और राष्ट्र सेवा के भाव से प्रेरित करेगी। प्रो. घोष ने आगे कहा कि पुस्तक में अनुभवसंपन्न प्रशासनिक और कूटनीतिक विशेषज्ञों की ज्ञान संपदा निहित है, जो विद्यार्थियों और नीति निर्माताओं के लिए मार्गदर्शन का कार्य करेगी। विशिष्ट अतिथि दामु रवि ने पुस्तक के नवीनतम संस्करण की सराहना करते हुए इसे समसामयिक और अत्यंत उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इसमें भारत की विदेश नीति में आए नए बदलाव और वैश्विक घटनाक्रमों का समावेश किया गया है। यह न केवल सिविल सेवा अभ्यर्थियों, बल्कि नीति निर्माता, शोधकर्ता और आम पाठकों के लिए भी लाभकारी होगी। पुस्तक के सह लेखक प्रो. अशोक कुमार ने बताया कि पुस्तक भारत की विदेश नीति, इंडो-पैसिफिक रणनीति, क्वाड सहयोग, कोविड संकट में मानवीय नेतृत्व और बहुपक्षीय मंचों जैसे जी-20 और ब्रिक्स पर भारत के बढ़ते प्रभाव का विश्लेषण करती है। वहीं, डॉ. राजेश मोहन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध अब केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल युग में यह निरंतर बदलती प्रक्रिया बन गई है। विमोचन समारोह में राज्यपाल की धर्मपत्नी श्रीमती मित्रा घोष, हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान के महानिदेशक मनोज यादव, साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय की प्रोवोस्ट प्रोफेसर एलायस फिलिप्स, गुरुग्राम विश्वविद्यालय के वीसी डॉ. संजय कौशिक, मैकग्रा हिल एजुकेशन के प्रोडक्ट डायरेक्टर तनवीर अहमद, एसडीएम बादशाहपुर संजीव सिंगला, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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नेशनल लेवर पार्टी” ने की चंडीगढ़ से नई पार्टी की शुरूआत

“पंचकूला,(कमल कलसी, ईशान टाइम्स)।राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान पुत्र नीरज राय ने चंडीगढ़ के सेक्टर 27 प्रैस क्लब वार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि देश के श्रमिकों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं की आवाज़ को सशक्त बनाने तथा सामाजिक और आर्थिक न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाने के उद्देश्य से नेशनल लेबर पार्टी (National Labour Party) का गठन किया गया है। इस अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के सुप्रीम प्रेसीडेंट डॉ. दलजीत सिंह चौहान और राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज राय ने संयुक्त रूप से पार्टी की नीति, उद्देश्य और मिशन की घोषणा की। डॉ. दलजीत सिंह चौहान ने कहा कि —“देश में आज मेहनतकश वर्ग सबसे बड़ा लेकिन सबसे उपेक्षित वर्ग है। नेशनल लेबर पार्टी इस वर्ग की आवाज़ को संसद और विधानसभाओं तक पहुंचाएगी। हमारी पार्टी का सिद्धांत है — ‘कामगार भारत, सम्मानित भारत।’ हम ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जिसमें हर मेहनतकश नागरिक को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर मिले।” राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान पुत्र नीरज राय ने कहा कि नेशनल लेबर पार्टी का उद्देश्य राजनीति को जनसेवा से जोड़ना है, न कि सत्ता की होड़ से। उन्होंने कहा कि पार्टी जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत कर रही है और प्रत्येक राज्य में जनसंवाद यात्रा शुरू करने की योजना बना रही है ताकि आम जनता की समस्याओं को सीधे समझकर समाधान के लिए ठोस नीति बनाई जा सके। उन्होंने आगे कहा कि —“देश के मजदूर, किसान, युवा और महिलाएँ अब मौन नहीं रहेंगे। नेशनल लेबर पार्टी उन्हें एक मज़बूत मंच देगी, जो केवल वादे नहीं बल्कि परिणाम देगा।” 📢 संदेश जनता के नाम:नेशनल लेबर पार्टी सभी नागरिकों से अपील करती है कि वे जाति, धर्म और राजनीति से ऊपर उठकर देश के विकास और मेहनतकश वर्ग के सम्मान के लिए एकजुट हों।पार्टी का उद्देश्य है —“हर मेहनतकश का मान, यही है सच्चा हिन्दुस्तान।” 🔴 पार्टी का मुख्य एजेंडा और नीति आज निम्न राष्ट्रीय पदाधिकारियों को नामित किया गया..राष्ट्रीय सलाहकार-परविंदर सिंह सेठीसुप्रीम अध्यक्ष-डॉ दलजीत सिंह चौहानराष्ट्रीय अध्यक्ष – नीरज रायराष्ट्रीय उपाध्यक्ष- संजीव कौशिकराष्ट्रीय महासचिव-कंचन कुमारी सहित अनेकों पार्टी सदस्य मौजूद रहे।

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धर्म,जाति या राजनीति के आधार पर फर्जी खबर, भड़काऊ पोस्ट , अफवाह फैलाई तो कार्रवाई तय: डीसीपी सृष्टि गुप्ता

साइबर मॉनिटरिंग टीम गठित, 24 घंटे सक्रियता से प्रत्येक प्लेटफॉर्म पर रहेगी निगरानी सोशल मीडिया एक सकारात्मक और जिम्मेदार संवाद का मंच बने, न कि अफवाहों और नफरत का अड्डा: डीसीपी सृष्टि गुप्ता पंचकूला,(कमल कलसी, ईशान टाइम्स)। सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग पर अब पंचकूला पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। डीसीपी सृष्टि गुप्ता के आदेशानुसार जिला पंचकूला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कीमत पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपराध और नफरत फैलाने का माध्यम नहीं बनने दिया जाएगा।डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने कहा कि धर्म, जाति या राजनीति के आधार पर सोशल मीडिया पर भड़काऊ, झूठी या अफवाह फैलाने वाली पोस्ट करने वालों के खिलाफ अब सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि फॉरवर्ड करने वाला भी दोषी माना जाएगा और ग्रुप एडमिन को विशेषकर जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसके साथ ही अनावश्यक कमेंट, लाइक या फॉरवर्ड करने वालो को भी पुलिस कानून के दायरे मे लाएगी।डीसीपी ने बताया कि पंचकूला पुलिस ने सोशल मीडिया पर निगरानी के लिए एक विशेष साइबर मॉनिटरिंग टीम गठित की है, जो 24 घंटे सक्रिय रहकर हर प्लेटफॉर्म — व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), यूट्यूब आदि पर नजर रख रही है। इस टीम का उद्देश्य समाज में शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर नफरत, अफवाह, या दहशत फैलाने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ आईटी एक्ट व भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं के तहत तुरंत मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी।डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की फर्जी खबर, एडिटेड वीडियो, भड़काऊ मैसेज या उकसाने वाली पोस्ट शेयर न करें। उन्होंने कहा कि “फॉरवर्डेड” लिखकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश अब नहीं चलेगी — कानून हर उस व्यक्ति तक पहुंचेगा जो ऐसी सामग्री को फैलाने में शामिल है। सोशल मीडिया एक सकारात्मक और जिम्मेदार संवाद का मंच बने, न कि अफवाहों और नफरत का अड्डा।डीसीपी ने अंत में कहा कि सोशल मीडिया पर आज़ादी के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है। कोई भी व्यक्ति यदि समाज की शांति व सद्भावना भंग करेगा, तो उसे कानून का सामना करना पड़ेगा।” इसलिए भड़काऊ पोस्ट डालने या फॉरवर्ड करने से पहले सोचें, वरना कार्रवाई तय है।

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प्रधानमंत्री मोदी का स्वच्छता अभियान अब बन गया है जन आंदोलन : मोहन लाल बड़ौली

चंडीगढ़, 11 अक्टूबर(ईशान टाइम्स)। हरियाणा में भाजपा सरकार के 11 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भाजपा युवा मोर्चा द्वारा शनिवार को बड़ा स्वच्छता अभियान चलाया गया। भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने सफाई कर्मचारियों के साथ मिलकर प्रदेश के 11 नगर निगम क्षेत्रों में साफ सफाई की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंडित मोहन लाल बड़ौली ने सेक्टर-5 पंचकूला में स्वच्छता अभियान का शुभारंभ किया और खुद भी साफ सफाई की। इस मौके पर उन्होंने मीडिया से बातचीत कर सवालों के जवाब भी दिए।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंडित मोहन लाल बड़ौली ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छता अभियान के माध्यम से साफ-सफाई के प्रति देश को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। पीएम मोदी का स्वच्छता अभियान अब जन आंदोलन बन गया है।  उन्होंने कहा कि आज भाजपा के युवा मोर्चा ने निगम सफाई कर्मचारियों के साथ मिलकर 11 नगर निगम क्षेत्रों में बड़ा स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छता का संदेश दिया है।श्री बड़ौली ने कहा कि हरियाणा की जनता ने लगातार तीसरी बार भाजपा को आशीर्वाद दिया है। उन्होंने कहा कि 17 अक्टूबर को नायब सरकार का एक वर्ष पूरा हो रहा है। नायब सरकार की पहली वर्ष गांठ पर लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोनीपत की राई विधानसभा स्थित स्पोर्टस यूनीवर्सिटी में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे।एक सवाल पर बोलते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बड़ौली ने कहा कि नायब सरकार का यह एक वर्ष उपलब्धियों से भरा हुआ है। नायब सरकार के निर्णयों और योजनाओं से हरियाणा का जन-जन खुश है। इसलिए पीएम मोदी की ‘‘जन विकास- जन विश्वास’’ रैली में लाखों लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र को सुनने पहुंचेंगे। श्री बड़ौली ने कहा कि यह रैली भव्य और ऐतिहासिक होगीं।आईपीएस ऑफिसर वाई पूरन सिंह के निधन पर पूछे गए सवाल पर श्री बड़ौली ने कहा कि आईपीएस पूरन सिंह का निधन एक बड़ी दुखद घटना है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार व खुद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी लगातार पीड़ित परिवार के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय आईपीएस अधिकारी पूरन सिंह के परिवार ने जो बातें सरकार के सामने रखी है उन पर सरकार निष्पक्षता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आईपीएस अधिकारी पूरन सिंह के परिवार को सरकार न्याय दिलाने का काम करेगी।इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष अजय मित्तल, महापौर कुलभूषण गोयल, प्रदेश उपाध्यक्ष बंतो कटारिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता, भाजपा प्रदेश मीडिया सह प्रभारी नवीन गर्ग, युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष योगेन्द्र शर्मा, पार्षद, पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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सरकारी नौकरी का मोह : स्थिरता के नाम पर स्थिर सोच

– संजय राय , संपादक भारत के युवाओं के बीच सरकारी नौकरी की चाहत किसी जुनून से कम नहीं। हाल ही में उत्तराखंड में हुए पेपर लीक आंदोलन ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सरकारी नौकरी सिर्फ एक रोजगार नहीं, बल्कि एक सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुकी है। जब परीक्षा में गड़बड़ी हुई, तो युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा और सरकार को अंततः सीबीआई जांच की घोषणा करनी पड़ी। लेकिन यह कहानी केवल उत्तराखंड की नहीं है – यह उस मानसिकता की कहानी है, जिसमें सरकारी नौकरी को जीवन की अंतिम मंज़िल मान लिया गया है। 🎯 नौकरी या सुरक्षा का भ्रम? देश में सरकारी नौकरियों की संख्या करीब 1.4 करोड़ है, यानी कामकाजी आबादी का सिर्फ 1.4 प्रतिशत हिस्सा ही सरकारी कर्मचारी है। फिर भी हर साल लाखों युवा इसी दिशा में दौड़ लगाते हैं। वजह साफ़ है — सरकारी नौकरी में स्थिरता, पेंशन, सुरक्षा और सम्मान की गारंटी दिखती है।दूसरी ओर, निजी क्षेत्र में अस्थिरता, लक्ष्य का दबाव और छँटनी का डर हावी है।लेकिन विडंबना यह है कि जिन सरकारी व्यवस्थाओं को हम “धीमी, भ्रष्ट और अकुशल” कहकर कोसते हैं, उन्हीं में शामिल होने के लिए करोड़ों युवा सालों तक तैयारी करते हैं। 🧩 आंकड़े जो सोचने पर मजबूर करते हैं संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा को ही देखें — हर साल लगभग 15 लाख अभ्यर्थी आवेदन करते हैं। प्रारंभिक परीक्षा से मुख्य परीक्षा तक पहुँचते हैं लगभग 12,000, साक्षात्कार के लिए बुलाए जाते हैं करीब 3,000, और अंत में सफलता पाते हैं मात्र 900 से 1000 उम्मीदवार।आईएएस जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए यह संख्या 100 के आसपास सिमट जाती है।यानी सफलता की संभावना 0.006 प्रतिशत से भी कम।फिर भी हर साल लाखों युवा अपनी युवावस्था, समय और ऊर्जा इसी एक संभावना के पीछे लगा देते हैं। राजस्थान में हाल ही में ग्रुप–डी की 53,747 नौकरियों के लिए 21 लाख आवेदन आए। इनमें अधिकांश उम्मीदवार स्नातक या परास्नातक थे। यह आँकड़ा बताता है कि आज सरकारी नौकरी केवल आजीविका नहीं रही — यह मानसिक सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुकी है। 🧠 कोचिंग संस्कृति और “माई-बाप सरकार” की सोच भारत में कोचिंग संस्थान अब एक समानांतर शिक्षा व्यवस्था बन चुके हैं। लाखों छात्र सालों तक “सरकारी नौकरी” के लिए तैयारी करते हुए अपनी युवावस्था का सबसे ऊर्जावान दौर कक्षाओं और टेस्ट सीरीज में गुज़ार देते हैं।समस्या यह है कि शिक्षा और कोचिंग प्रणाली दोनों ने युवाओं में यह धारणा मजबूत की है कि “सरकार ही सब कुछ देगी।” यही “माई-बाप सरकार” वाली सोच आत्मनिर्भर भारत की राह में सबसे बड़ी बाधा है। 🚀 बदलते भारत में बदलनी होगी सोच भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ रहा है। लेकिन अगर हमारे युवा सिर्फ सरकारी कुर्सी की प्रतीक्षा करते रहेंगे, तो देश का निजी क्षेत्र, स्टार्टअप और नवाचार कौन संभालेगा?सरकारी नौकरी सीमित हैं, पर अवसर असीमित — कृषि, तकनीक, सेवा क्षेत्र, डिजिटल उद्यम और कौशल-आधारित कार्य अब नए करियर मार्ग खोल रहे हैं। सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह युवाओं को नौकरी की प्रतीक्षा से बाहर निकालकर कौशल विकास, स्व-रोजगार और उद्यमिता की दिशा में मार्गदर्शन दे। वहीं युवाओं को भी समझना होगा कि स्थिरता की चाह अगर प्रगति की गति को रोक दे, तो वह स्थिरता नहीं, ठहराव बन जाती है। सरकारी नौकरी कोई बुरी चीज़ नहीं, लेकिन उसे जीवन का अंतिम लक्ष्य बना लेना, अपने सामर्थ्य का अपमान है।समय आ गया है कि युवा सरकारी नौकरी के भ्रम से बाहर निकलें और यह समझें कि असली सफलता किसी पद पर नहीं, बल्कि अपनी योग्यता से अवसर बनाने में है। “सरकारी नौकरी स्थिर कर सकती है, पर बढ़ा नहीं सकती।बढ़ना हो, तो जोखिम लेना ही पड़ेगा।”

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हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान जन चेतना ट्रस्ट बनेगा दलितों के हकों की आवाज : सुदेश कटारिया

नारायणगढ़ से शुरू हुआ विधानसभा स्तर पर हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान सम्मेलन का आगाज चण्डीगढ़(ईशान टाइम्स) : केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के मुख्य मीडिया सलाहकार सुदेश कटारिया ने कहा कि कांग्रेस राज में हर 18वें मिनट में दलित उत्पीड़न होता था। मगर वर्ष 2014 में जब मनोहर लाल ने हरियाणा प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभाली तो उन्होंने दलितों की सबसे पुरानी मांग को पूरा करते हुए एससी कमीशन का गठन किया। आज एससी कमीशन दलितों की सुनवाई का सबसे बड़ा मंच गया है। इसके साथ ही दलितों के हकों की आवाज बुलंद करने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान जनचेतना ट्रस्ट का गठन किया गया है, जिसके जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की जा चुकी है।केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के मुख्य मीडिया सलाहकार नारायणगढ़ में आयोजित हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान समारोह में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। नारायणगढ़ से हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान समारोह का विधानसभा स्तर पर आयोजन का सिलसिला शुरू हुआ। नारायणगढ़ विधानसभा में आयोजित समारोह के आयोजक गौरव जौली थी। इसके साथ ही डॉ. कपूर सिंह और रवि चौधरी भी प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।समारोह में पहुंचने पर लोगों ने हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान जन चेतना ट्रस्ट के अध्यक्ष सुदेश कटारिया का फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया। वहीं, आयोजक गौरव जौली ने मुख्यातिथि को संविधान निर्माता बाबा साहेब का चित्र और शॉल भेंट कर सम्मानित किया।हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान जन चेतना ट्रस्ट के अध्यक्ष सुदेश कटारिया ने कहा कि वर्ष 2014 से पहली की सरकारों में क्षेत्रवाद, परिवारवाद और भाई-भतीजावाद का बोल-बोला था। धौलकपड़िये और कमीशनखोरी के जरिये जनता के काम होते थे। मगर जब वर्ष 2014 में मनोहर लाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री की बागडोर संभाली तो उन्होंने सबसे पहले क्षेत्रवाद, परिवारवाद और भाई-भतीजावाद को समाप्त करते हुए हरियाणा एक-हरियाणवीं एक का नारा दिया और उन्होंने पूरे प्रदेश में समान विकास कराया। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों में दलितों की अनदेखी होती थी, दलित मंत्री जरूर बनते थे, लेकिन वे पॉवर लेस डम्मी मंत्री होते थे। मगर मनोहर लाल ने उन्हें सीएमओ में अपनी बराबर वाली कुर्सी पर बैठाकर राजनीति में नई मिसाल पेश की, उनके लिए हर वर्ग सम्मान है, चाहे वह दलित हो या फिर पिछड़ा। यही नहीं, मनोहर लाल ने उन्हें दलितों के काम करने की पॉवर भी दी, जिससे उन्होंने अपनी कलम को दलितों के हित में प्रयोग किया है। कांग्रेस ने वोट चोरी करके हराया बाबा साहेब कोहमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान जन चेतना ट्रस्ट के अध्यक्ष सुदेश कटारिया ने कांग्रेस के वोट चोरी के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि वर्ष 1952 में कांग्रेस ने वोट चोरी करके संविधान निर्माता बाबा साहेब को हराया था। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 74 हजार वोट रद्द करवाकर दलितों के सम्मान को ठेस पहुंचाने के साथ लोकतंत्र की हत्या की थी। आज वही लोग संविधान हाथ में लेकर संविधान को खतरा होने और वोट चोरी के नाम पर दलितों को गुमराह कर रहे हैं। मगर संविधान कोई दस्तावेज नहीं है, यह लोकतंत्र और दलितों की आत्मा है, जिससे बाबा साहेब से अपने खून-पसीने से सींचा है।उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने दलितों को गुमराह करके वोट हासिल किए, लेकिन विधानसभा चुनाव में दलित कांग्रेस के झांसे में नहीं आए और उनके हितों की रक्षा करने वाली भाजपा की प्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाई।

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पीओके की पुकार: दमन के खिलाफ इंसाफ़ का आह्वान

संजय राय, पाकिस्तान की स्थापना धर्म-आधारित विचारधारा पर हुई थी, पर उसके छह दशकों से अधिक के राजनीतिक सफर ने यह भी दिखाया है कि केवल विचार से पक्की रजवाड़ीय स्थिरता कायम नहीं रहती। बांग्लादेश का विभाजन, अफगानिस्तान से जुड़ी जटिलताएँ और सीमाओं के भीतर उठते विद्रोह—इन सबने पाकिस्तान की अस्थिरता की तस्वीर उकेरी है। इसी अस्थिरता के बीच पाकिस्तान-नियंत्रित कश्मीर, यानी पीओके, लंबे समय से दबे और उदासीन स्थानीय संकट का केंद्र बना हुआ है। हाल के दिनों में पीओके में जो विरोध-प्रदर्शन उभरे हैं—बिजली और आधारभूत सेवाओं की कमी, महंगे बिल, इंटरनेट कटौती और व्यापक आर्थिक उपेक्षा के खिलाफ—उनका मंसूबा नागरिक शिकायतों को आवाज़ देना था। परन्तु जब सुरक्षा बलों का दमन और गोलियों की आवाज़ें सुनाई दें, जब गिरफ्तारी और अज्ञात विलुप्तियों की रिपोर्टें सामने आएँ, तो यह स्थानीय समस्या अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार जाँच का विषय बन जाती है। जिनेवा में यूनाइटेड कश्मीर पीपुल नेशनल पार्टी द्वारा उठाए गए आरोप —हिंसा, प्रवर्तन एजेंसियों की बर्बरता, और लोगों के अधिकारों का हनन—इन सब पर विश्व समुदाय का ध्यान खींचना आवश्यक है। पीओके के लोग बार-बार यही मांग करते आए हैं कि उनके लिए बुनियादी सुविधाएँ और न्याय सुनिश्चित किया जाए। जब देश की नागरिकता का अर्थ केवल शासन-व्यवस्था तक सीमित रह जाए और लोगों की ज़रूरतों, आवाज़ों और आज़ादी का ध्यान न रखा जाए, तो विद्रोह और असंतोष पनपना स्वाभाविक है। स्थानीय नेताओं और नागरिक संगठनों के अनुसार 29 सितंबर से चले प्रदर्शनों में दर्ज होने वाली मौतें और गिरफ्तारी की खबरें एक चिंता-जाग्रत स्थिति का संकेत हैं — हर जीवन की कीमत अनमोल है और कोई भी शक्ति इसे मामूली नहीं कर सकती। यह समय भावनाओं के बहाव में आकर नारे लगाने का नहीं, बल्कि संयम और ठोस कूटनीतिक और मानवीय जवाब तलाशने का है। भारत के लिए पीओके का मुद्दा संवेदनशील है — ऐतिहासिक, मानवीय और राजनीतिक कारणों से। पर किसी भी कार्रवाई का स्वरूप और उद्देश्य स्पष्ट, कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होना चाहिए। हिंसा का हर रूप—चाहे वह राज्य-हिंसा हो या सशस्त्र विद्रोह—नागरिकों के जीवन और अधिकारों पर प्रतिकूल असर डालता है। इसलिए भारत, जैसे किसी भी क्षेत्रीय शक्ति के, सर्वप्रथम कूटनीतिक मोर्चे पर आवाज उठानी चाहिए: संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार मंच और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष पीओके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों का तथ्यात्मक ब्यौरा पेश करना चाहिए और त्वरित मानवतावादी पहुँच की माँग करनी चाहिए। इसके साथ ही भारत को आवश्यक है कि वह अपनी नीतियों को ठोस तर्क और सहानुभूति के साथ पेश करे — केवल विरोध प्रदर्शन दिखाने या आक्रामक बयानबाज़ी से इस मुद्दे का समाधान असंभव है। बांग्लादेश के विभाजन से मिली सबक ने यह सिखाया है कि जटिल कूटनीति, अन्तरराष्ट्रीय समर्थन और स्थानीय जनभावनाओं का संयोजन ही ठोस और दीर्घकालिक समाधान देता है। पीओके के लोग अगर भारत के साथ समावेशन की मंशा रखते हैं, तो उनकी आवाज़ों को सुने जाने, उनकी सुरक्षा के लिए ठोस अंतरराष्ट्रीय कवायद और उनके मानवीय संकट के त्वरित समाधान की व्यवस्था की जानी चाहिए। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि सीमा-विवादों और क्षेत्रीय दावों के बीच सबसे अधिक प्रभावित वही लोग होते हैं जो रोज़मर्रा की जिंदगी जीते हैं—किसान, दुकानदार, छात्र, परिवार। इसलिए समाधान का केंद्र भी नागरिक की गरिमा, अधिकारों की रक्षा और विकास-अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए। पाकिस्तान के भीतर लोकतांत्रिक दबाव, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं की निष्पक्ष जाँच और स्थानीय मामलों में पारदर्शिता—ये सभी पीओके के हालात बदलने में सहायक हो सकते हैं। अंततः, पीओके की पुकार सिर्फ़ भौगोलिक पुनरावेदन की माँग नहीं है—यह मानवाधिकार, न्याय और गरिमा की माँग है। जो भी बाहरी हित हो, उससे ऊपर उठकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय, क्षेत्रीय शक्तियाँ और स्थानीय नेता इस बात पर सहमत हों कि पीओके के लोग हिंसा और उपेक्षा के चक्र से मुक्त हों। भारत के लिए यह अवसर है कि वह मानवतावादी दृष्टिकोण से इस संकट को रेखांकित करे, और संयुक्त रूप से ऐसे कदम उठाये जाएँ जो पीओके में स्थायी शांति, न्याय और समावेशी विकास की राह खोलें।

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