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साथी को इजेक्ट कर खुद उड़ाया जगुआर और घनी आबादी को बचाते हुए रेवाड़ी का जवान शहीद

गुजरात के जामनगर में विमान हादसे में रेवाड़ी के सेक्टर-18 निवासी पायलट सिद्धार्थ यादव शहीद हो गए. उन्होंने 23 मार्च को ही सगाई की थी और 31 मार्च को अपनी ड्यूटी पर लौट गए थे. शुक्रवार सुबह उनका शव घर लाने की संभावना है।

गुजरात के जामनगर में बुधवार को भारतीय वायुसेना के जगुआर लड़ाकू विमान क्रैश में रेवाड़ी के रहने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव शहीद हो गए. 28 वर्षीय सिद्धार्थ की 23 मार्च को सगाई हुई थी. वह इकलौते बेटे थे. 31 मार्च को वह रेवाड़ी से छुट्टी पूरी कर जामनगर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे थे. रेवाड़ी में जब इस दुर्घटना की सूचना मिली तो शोक की लहर दौड़ गई. कल सुबह उनकी पार्थिव देह रेवाड़ी के सेक्टर-18 में पहुंचने की उम्मीद है. इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव भालखी-माजरा ले जाया जाएगा, जहां सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

साथी को बचाया और खुद हुए वीरगति को प्राप्त- फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ
शहीद लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव के पिता सुशील यादव ने बताया है कि 2 अप्रैल की रात फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ रुटीन सॉर्टी के लिए जगुआर विमान लेकर निकले थे. उनके साथ दूसरा साथी भी था. इसी दौरान जगुआर में कुछ तकनीकी खराबी आई. इसके बाद इसे सही से लैंड करने की तमाम कोशिशें की गईं, लेकिन एक समय ऐसा आया जब पता चल गया कि विमान क्रैश होना निश्चित है. इसके बाद अपनी जान की परवाह किए बगैर सिद्धार्थ ने साथी को इजेक्ट कराया और विमान कहीं घनी आबादी में न गिरे, इसके लिए प्रयास शुरू किया. वह विमान को खाली जगह में ले गए और वीरगति को प्राप्त हुए. उनकी इस वीरता पर सभी को गर्व है।

2 साल पहले मिला था प्रमोशन
सिद्धार्थ के परदादा बंगाल इंजीनियर्स में कार्यरत थे,जिन्होंने ब्रिटिश काल में काम किया था. सिद्धार्थ के दादा पैरा मिलिट्री फोर्सेस में थे. इसके बाद इनके पिता भी एयरफोर्स में रहे. वर्तमान में वह LIC में कार्यरत हैं. यह चौथी पीढ़ी थी जो सेना में सेवाएं दे रही थी. सिद्धार्थ ने 2016 में NDA की परीक्षा पास की थी. इसके बाद वह 3 साल का प्रशिक्षण लेकर बतौर फाइटर पायलट वायुसेना जॉइन की थी।उन्हें 2 साल बाद प्रमोशन मिला था, जिससे वह फ्लाइट लेफ्टिनेंट बन गए थे।

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