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कार्यक्रम का उद्देश्य इतिहास को दोहराना नहीं था, बल्कि छात्रों को उनके राष्ट्र के संघर्षमय अतीत से जोड़ना : रीकृत सेराई

सतलुजवासियों ने शहीदों को अनूठे अंदाज़ में श्रद्धांजलि दी : रीकृत सेराई

पंचकूला : (राजकुमार) सेक्टर-4 स्थित सतलुज पब्लिक स्कूल में बुधवार को एक ऐसा क्षण साक्षात हुआ जब छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर जलियांवाला बाग के शहीदों को अनूठे अंदाज़ में श्रद्धांजलि दी।
सतलुज ग्रुप ऑफ स्कूल्स के प्रबंध निदेशक रीकृत सेराई ने साझा किया किया कि
स्कूल प्रांगण में आयोजित विशेष कार्यक्रम में इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक – जलियांवाला बाग हत्याकांड – को जीवंत किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य प्रस्तुति एक भावपूर्ण नाटक थी, जिसमें छात्रों ने 13 अप्रैल 1919 की उस विभीषिका को मंच पर उतारा। क्रूरता, अन्याय और बलिदान की उस त्रासदी को बच्चों ने इतनी तीव्रता और संवेदनशीलता से निभाया कि दर्शक भावविभोर हो उठे। नाटक के साथ ही देशभक्ति से ओतप्रोत कविताओं और कहानियों ने पूरे माहौल को गहराई से भावुक कर दिया।

प्रबंध निदेशक रीक्रिट सेराई ने कहा,
“जलियांवाला बाग हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता कभी भी मुफ़्त नहीं मिलती। आज हमारे छात्रों ने न केवल उस पीड़ा को याद किया, बल्कि उससे आत्मिक जुड़ाव भी स्थापित किया। यही सतलुज की शिक्षा का मूल है – उद्देश्यपूर्ण और संवेदनशील सीख।”

कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ इतिहास को दोहराना नहीं था, बल्कि छात्रों को उनके राष्ट्र के संघर्षमय अतीत से जोड़ना और उन्हें भविष्य का जिम्मेदार नागरिक बनाना था। सतलुज पब्लिक स्कूल का यह प्रयास दर्शाता है कि यहां शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि यह संस्कारों और स्मृतियों से सजी एक जीवंत यात्रा है।

यहां इतिहास पढ़ाया नहीं गया — उसे महसूस कराया गया।
क्योंकि सतलुज में हर बच्चा न केवल भारत के अतीत का कहानीकार है, बल्कि उसके उज्ज्वल भविष्य का निर्माता भी।

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