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लखनऊ के राजस्व में ऐतिहासिक उछाल! निकायों ने किया 44.5% की वृद्धि

लखनऊ( ईशान टाइम्स)। बीते वित्तीय वर्ष में शहरी स्थानीय निकायों ने 44.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5568 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया है, जबकि शहरी विकास विभाग के तहत 17 प्रमुख नगर निगमों ने संयुक्त रूप से 4,140 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य के मुकाबले 4,586 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया, जो 11 प्रतिशत अधिक है।

कुल राजस्व में लखनऊ ने सबसे बड़ा योगदान दिया है। इस उछाल को निकायों के आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का संकेत माना जा रहा है और बेहतर सुविधाओं की उम्मीद भी जाग रही है।

प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों का संयुक्त राजस्व वर्ष 2023-24 में 3,140 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में 4,586 करोड़ रुपये हो गया। कर राजस्व 2,235.48 करोड़ से 28 प्रतिशत बढ़कर 2,870.4 करोड़ पर पहुंचा। गैर-कर राजस्व में भी सबसे ज्यादा वृद्धि हुई। यह 904.73 करोड़ रुपये से 90 प्रतिशत बढ़कर 1,715.27 करोड़ रुपये हो गया। कुल राजस्व में लखनऊ ने 1,355.32 करोड़ रुपये, कानपुर ने 720.62 करोड़ रुपये और गाजियाबाद 609.89 करोड़ रुपये का योगदान किया।

वहीं, प्रतिशत वृद्धि में मथुरा सबसे आगे रहा। मथुरा ने 106 प्रतिशत, झांसी ने 85 प्रतिशत और गाजियाबाद ने 72 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है। नगर निगमों में गाजियाबाद ने 336 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की। गैर कर राजस्व में 29 प्रतिशत की कमी के साथ मुरादाबाद सबसे फिसड्डी रहा।

शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि राजस्व संग्रह में वृद्धि शहरी स्थानीय निकायों में किए गए रणनीतिक बदलावों और डिजिटल कदमों का परिणाम है। प्रदेश के सभी 762 शहरी स्थानीय निकायों में बीते चार वर्षों से राजस्व संग्रह में लगातार वृद्धि हो रही है। अधिक राजस्व मिलने से नगरीय निकाय आत्मनिर्भर बन रहे हैं, जिससे बेहतर नागरिक सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी।

चार वर्ष में 123 प्रतिशत की वृद्धि नगर विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021-22 में कुल राजस्व 2,494.42 करोड़ रुपये रहा था। वर्ष 2022-23 के दौरान यह 2,915.01 करोड़ रुपये पहुंचा था। इसके बाद वर्ष 2023-24 में 3,853.23 करोड़ रुपये और बीते वर्ष में 5,568 करोड़ रुपये रहा। इस हिसाब से चार वर्षों में 123 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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