अयोध्या/इंद्र यादव/उत्तर प्रदेश,भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए देशभर के सिंधी समाज ने अपनी आस्था का जो नजराना पेश किया था, आज वही नजराना बड़ा सवाल बन चुका है। जनवरी 2021 में सिंधी समाज ने मंदिर ट्रस्ट को 200 किलो शुद्ध चांदी की ईंटें सौंपी थीं, लेकिन आज तक उन ईंटों का कोई अता-पता नहीं है।
क्या है पूरा मामला
जनवरी 2021 में राम मंदिर निर्माण के लिए सिंधी समाज ने चंपत राय बंसल को 200 किलो चांदी की ईंटें सौंपीं।
आस्था का प्रतीक: प्रत्येक ईंट पर इष्ट गुरु साईं झूलेलाल जी की फोटो उकेरी गई थी।
अंधेरे में दानदाता: आरोप है कि इतनी बड़ी मात्रा में दान देने के बावजूद, सिंधी समाज को न तो इसकी रसीद दी गई और न ही उन्हें यह बताया गया कि उन ईंटों का उपयोग कहाँ किया गया।
सिंधी समाज का आक्रोश
दान देने वालों का कहना है कि उस वक्त करीब 1.5 करोड़ की लागत वाली उन ईंटों की आज कीमत 6-7 करोड़ के पार पहुँच चुकी है। समाज को बस यह जानना है कि उनकी मेहनत और आस्था की कमाई का आखिर हुआ क्या? क्या उन्हें मंदिर में लगाया गया है या कहीं और
अब इस मामले की गूंज हर तरफ है। समाज का कहना है कि वे इस पर योगी सरकार द्वारा गठित SIT से सच्चाई सामने आने की उम्मीद करते हैं, ताकि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सके।


