इंसान ही इंसान के साथ अन्याय करे, तो किससे शिकाय ! धर्मेंद्र-अमिताभ की मुलाकात से उपजा दर्द !

मुंबई! बॉलीवुड के धाकड़ हीरो धर्मेंद्र अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर लौटे, तो उनकी मुस्कान में छिपी थकान किसी को नजर नहीं आई। लेकिन अगले ही दिन, उनके चिरपरिचित दोस्त अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली, जो दिल को छू गई। “धर्मेंद्र से मिलने के बाद… इंसान ही इंसान के साथ अन्याय करे, तो किससे शिकायत करें! ” ये शब्द सिर्फ एक पोस्ट नहीं, बल्कि एक गहरा दर्द थे। अमिताभ की आंखों में आंसू और आवाज में कंपकंपी, धर्मेंद्र की कमजोर हालत देखकर उमड़ी थी। दो दिग्गजों की ये मुलाकात हमें याद दिलाती है कि जिंदगी की जंग में सबसे बड़ा दुश्मन कभी-कभी हमारा अपना शरीर ही बन जाता है , और उससे लड़ते हुए इंसान अकेला पड़ जाता है।/कल्पना कीजिए, वो धर्मेंद्र जो कभी स्क्रीन पर घोड़ों को दौड़ाते, दुश्मनों को धूल चटाते नजर आते थे, आज अस्पताल की चारदीवारी में कैद हैं। उम्र का बोझ, बीमारियों का साया , ये वो अन्याय है जो प्रकृति करती है, लेकिन अमिताभ का सवाल इससे कहीं गहरा है। इंसान ही इंसान के साथ अन्याय करे… शायद वो उस दर्द की बात कर रहे हैं जो अपनों से मिलता है। बॉलीवुड की चकाचौंध दुनिया में कितने ही सितारे अकेले लड़ते हैं। धर्मेंद्र जैसे योद्धा को देखकर अमिताभ को अपना दर्द याद आया होगा, वो दौर जब वो खुद कोमा में थे, और दुनिया ने उन्हें अलविदा कह दिया था। लेकिन असल अन्याय तो वो है जब अपनों की उदासीनता घाव पर नमक छिड़कती है। दोस्ती की ये मुलाकात बताती है कि सच्ची दोस्ती में दर्द बांटा जाता है, न कि छिपाया। समाज में देखिए तो ये दर्द हर घर में बिखरा पड़ा है। बुजुर्ग माता-पिता अस्पताल के बिस्तर पर तड़पते हैं, और बच्चे फोन पर व्यस्त। पड़ोसी की बीमारी पर हम सहानुभूति जताते हैं, लेकिन मदद की हाथ नहीं बढ़ाते। इंसान का इंसान के साथ अन्याय यही है ,भावनात्मक उपेक्षा। अमिताभ की पोस्ट एक आईना है, जो हमें पूछती है, किससे शिकायत करें! सरकार से! डॉक्टरों से! या खुद से! धर्मेंद्र की डिस्चार्ज की खुशी में भी एक सबक है , जिंदगी क्षणभंगुर है। वो 12 नवंबर का दिन हमें सिखाता है कि स्वास्थ्य खोने के बाद पैसा, शोहरत कुछ नहीं रह जाता। बस अपनों का साथ चाहिए, जो दर्द में साथ खड़ा हो।
ये कहानी सिर्फ दो सितारों की नहीं, हम सबकी है। हर उस इंसान की जो अकेले लड़ रहा है। अमिताभ का भावुक संदेश चेतावनी है, अन्याय मत करो, क्योंकि कल तुम्हारा नंबर आ सकता है। धर्मेंद्र को देखकर रोएं नहीं, बल्कि अपने बुजुर्गों से मिलें, दोस्तों को गले लगाएं। क्योंकि इंसानियत का असली धर्म यही है , दर्द में साथ निभाना। वरना, किससे शिकायत करेंगे हम !

  • indra Yadav / Ishan times

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