अजित पवार’ के ‘बेटे’ पार्थ पर ₹1800 ‘करोड़’ जमीन घोटाला ! सौदा रद्द, जांच तेज, विपक्षी हमला जारी !

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महाराष्ट्र की राजनीति में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के परिवार से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है। उनके बेटे पार्थ पवार पर पुणे में सरकारी जमीन की खरीद में ₹1800 करोड़ के घोटाले का आरोप लगा है। इस मामले ने सत्ता गठबंधन महायुति और विपक्ष के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। अजित पवार ने अपने बेटे का बचाव करते हुए कहा कि पार्थ को जमीन के सरकारी होने की कोई जानकारी नहीं थी, जबकि ₹300 करोड़ का विवादित सौदा रद्द कर दिया गया है। राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है, जिसकी रिपोर्ट एक महीने में आने की उम्मीद है। पार्थ को नहीं थी जानकारी-अजित पवार का दावा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद अजित पवार ने मीडिया को संबोधित किया। एनसीपी (अजित पवार गुट) के नेता ने स्पष्ट किया कि पार्थ पवार और उनके साथी दिग्विजय पाटिल को पुणे की उस जमीन के सरकारी स्वामित्व का पता नहीं था। पवार ने कहा, “यह जमीन सरकारी है और इसे बेचा नहीं जा सकता। मेरे बेटे को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ और कौन जिम्मेदार है, इसकी पूरी जांच होगी। “उन्होंने जोर दिया कि पार्थ की कंपनी अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी पर किसी अधिकारी को दबाव नहीं डाला गया। एफआईआर में तीन लोगों के नाम हैं, जिनमें दिग्विजय पाटिल शामिल हैं, लेकिन पार्थ का नाम नहीं है। कारण बताते हुए पवार ने कहा कि केवल ये तीन लोग ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने रजिस्ट्रार कार्यालय गए थे।
₹300 करोड़ सौदा रद्द, ₹1800 करोड़ नुकसान का आरोप
विवाद पुणे की सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसे पार्थ की कंपनी ने कथित रूप से बाजार मूल्य से कम कीमत पर खरीदा। आरोपों के मुताबिक, इससे सरकारी खजाने को ₹1800 करोड़ का नुकसान हुआ। हालांकि, अजित पवार ने बताया कि ₹300 करोड़ का सौदा अब पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। उन्होंने खुद और अपने बेटे को मामले से अलग रखते हुए कहा कि उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। विपक्ष का तीखा प्रहार और इस्तीफे की मांग-विपक्षी दल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) ने इस मुद्दे को हथियार बना लिया है। वे अजित पवार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और इसे ‘परिवारवाद का चरम’ बता रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकारी जमीन की अवैध हस्तांतरण में उच्चस्तरीय मिलीभगत है और जांच को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि यह महायुति सरकार की भ्रष्टाचार की मिसाल है।जांच समिति गठित, रिपोर्ट का इंतजार
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खारगे की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई है। समिति एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। अजित पवार ने आश्वासन दिया कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे कोई भी हों।/यह घोटाला महाराष्ट्र की सियासत में नया मोड़ ला रहा है। सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज है, जबकि जांच के नतीजे आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। क्या यह परिवारवाद पर लगाम लगाएगा या सिर्फ एक और विवाद बनकर रह जाएगा, यह देखना बाकी है।

  • संजय राय / ईशान टाइम्स

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