




मुंबई/इंद्र यादव/अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या जानवरों और इंसानों के बीच भी दोस्ती हो सकती है? हमारे संपादक श्री संजय राय जी और उनके प्यारे तोते का रिश्ता इस सवाल का सबसे खूबसूरत जवाब है।
एक पत्रकार की जिंदगी बहुत भागदौड़ और तनाव वाली होती है। खबरों की दुनिया में हमेशा कुछ न कुछ घटता रहता है। लेकिन जब संजय जी घर पहुंचते हैं, तो उनका नन्हा सा तोता सारी थकान मिटा देता है। तोते का उनके कंधे पर बैठना, उनसे दुलार पाना और उनके साथ घुल-मिलकर रहना यह दिखाता है कि इस दुनिया में प्यार से बड़ी कोई भाषा नहीं है।
यह रिश्ता सिर्फ एक ‘मालिक’ और ‘पालतू जानवर’ का नहीं है, बल्कि यह भरोसे और दोस्ती का एक अनूठा उदाहरण है। यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि जो व्यक्ति दिन भर समाज की बड़ी समस्याओं पर अपनी कलम चलाता है, वह घर में एक छोटे से पक्षी के साथ इतना कोमल और प्यार भरा व्यवहार करता है।
संजय जी का यह रूप हमें सिखाता है कि हम चाहे कितने भी व्यस्त क्यों न हों, हमें अपने आसपास के जीव-जंतुओं के लिए हमेशा समय और प्यार रखना चाहिए। एक छोटे से पक्षी के प्रति उनकी यह ममता उनके बड़े और उदार दिल की पहचान है।
सच्ची खुशी बड़ी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि ऐसी छोटी-छोटी खुशियों में छिपी होती है। संजय जी और उनके तोते का यह साथ हम सभी के लिए एक प्रेरणा है—हमें भी बेजुबान जानवरों के प्रति दया और प्रेम रखना चाहिए, क्योंकि यही मानवता का असली अर्थ है।
आप क्या सोचते हैं, क्या आप भी अपने किसी पालतू जानवर के साथ ऐसा ही जुड़ाव महसूस करते हैं!


