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पंचकूला धार्मिक नगरी से बनता जा रहा है घोटालों का शहर- ओ पी सिहाग

दोनों बैंकों के 750 करोड़ रुपयों के घोटालों एवं गबन में राजनीतिक एवं रसूखदार लोगों के संलिप्त होने की आशंका। पूरे मामले की जांच सी बी आई से करवाई जाए।

पंचकूला, 27 मार्च: जननायक जनता पार्टी पंचकूला के जिला अध्यक्ष ओ पी सिहाग का कहना है कि कुछ सालों पहले पंचकूला एक सुन्दर,स्वच्छ, शांत एवं व्यवस्थित शहर के नाम से जाना जाता था। परंतु पिछले 6-7 सालों से यहां की आबो हवा एवं फिजा बिल्कुल बदल गई है। जहा इस पूरे क्षेत्र में क्राइम बढ़ा है वहीं य़ह शहर तरक्की एवं साफ़ सफाई के मामले में दूसरे शहरो से पिछड़ते जा रहा है। दूसरी ओर य़ह शहर पूरे प्रदेश एवं क्षेत्र में धार्मिक कार्यक्रमों का हब बनता जा रहा है ।यहां लोग हर तरह के होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में भाग लेने के अलावा आयोजकों एवं बाबाओं को मोटा चंदा एवं दान देते हैं। इसी वज़ह से धार्मिक गुरुओं , बाबाओं , कथा वाचको एवं मठाधीशों का ज्यादा झुकाव इस शहर की तरफ बढता जा रहा है। जिसकी वजह से लोग पंचकूला को धार्मिक नगरी भी कहने लगे हैं।
जजपा ज़िला अध्यक्ष ओ पी सिहाग ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से विभिन्न सरकारी विभागों एवं बैंकों में लगातार हो रहे घोटालों ने इस धार्मिक नगरी को घोटालों का शहर बना दिया है। सिहाग ने कहा कि पंचकूला जिले में करोडों रुपये के खेर के पेड़ों की अवैध रूप से काट कर बेचने के घोटाले की स्याही अभी सूखी ही नहीं थी 590 करोड़ रुपये का आई डी एफ सी फर्स्ट बैंक का घोटाला हुआ जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत से बैंक कर्मियों ने य़ह घोटाला किया।अभी इस घोटाले की जांच चल ही रही थी कि इसी दौरान नगर निगम पंचकूला के 159 करोड़ रुपये की एफ डी जो कोटक महिंद्रा बैंक मे सालो पहले जमा करायी गयी थी , वो पैसे भी घोटाला करने वाले बैंक कर्मियों , सम्भवतः कुछ नगर निगम के कर्मचारियों एवं दलाल किस्म के लोगों ने आपस में बन्दर बांट करके हजम कर लिए । इतने बड़े घोटाले में रसूखदार एवं राजनीतिक रूप से ताक़तवर लोगों के शामिल होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
जजपा ज़िला अध्यक्ष सिहाग ने कहा कि नगर निगम पंचकूला के सफाई ठेके की , रोड़ स्वीपिंग मशीनो एवं कई दूसरे विभागों में छोटे मोटे घोटालों की शिकायतें गाहे बगाहे आती रहती है जिस ओर किसी का ज्यादा ध्यान नहीं जाता।

अब सवाल यह उठता है कि सेंकड़ों करोड़ रुपये की इतनी बड़ी राशि क्या बैंक या सरकारी विभागों के कर्मचारी अकेले हजम कर गए या राजनीतिक रसूख रखने वाले लोग एवं सरकार के बड़े अधिकारी भी इस नेक्सस में शामिल हैं। य़ह एक जांच का विषय है। जजपा ज़िला अध्यक्ष सिहाग ने सरकार से मांग की है कि इन दोनों बैंकों के इतने बड़े घोटाले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से करवाई जाए जिसमें लगभग 750 करोड़ का गबन होने बारे आशंका है तथा इसमे छोटे कर्मचारियों के अतिरिक्त बड़ी बड़ी मछलियां शामिल होने बारे चर्चाओं का बाज़ार गर्म है । उन्होंने कहा कि जजपा य़ह मांग करती है इस सारे मामले को तुरंत सी बी आई के हवाले कर देना चाहिए ताकि कोई भी कितना भी बड़ा व्यक्ति इन दोनों घोटालों में शामिल हो वो बच न पाये।

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