बुलडोजर की भक्ति और सरकार के विकास का नया मंत्र!

मध्य प्रदेश! इंदौर के मालवीय नगर में तो कमाल हो गया! सड़क बनाने के नाम पर 140 मकानों पर बुलडोजर चला दिया गया। विकास की लहर इतनी तेज़ आई कि घरों की नींव हिल गई, और लोगों की आँखें नम हो गईं। लेकिन असली ड्रामा तो तब शुरू हुआ जब कैमरे की नज़र पड़ी एक ऐसी महिला की बेटियों पर, जो 30 साल से भाजपा विधायक रमेश मंडोला उर्फ बाबा दयालु की ‘भक्त’ कार्यकर्ता रही हैं। बेचारी बेटियाँ रोती-बिलखती नज़र आईं , जैसे कोई बॉलीवुड फिल्म का क्लाइमेक्स सीन हो! महिला की बड़ी बेटी (रोते हुए, बुलडोजर की ओर इशारा करते हुए): “अरे बाबा दयालु! 30 साल हमने तुम्हारी रैलियों में नारे लगाए, झंडे लहराए, चाय-पानी पिलाया। अब विकास के नाम पर हमारा घर उड़ा दिया! ये कैसा दयालुता है भाई, हम तो तुम्हारी ‘कार्यकर्ता’ थीं, न कि ‘बाधक’!”छोटी बेटी (हाथ जोड़कर, विधायक के पोस्टर की ओर देखते हुए) “बाबा जी, आप तो कहते थे ‘सबका साथ, सबका विकास’! अब ये सबका घर उजाड़ना क्या है! सड़क तो बन रही है, लेकिन हमारी ज़िंदगी की गाड़ी कहाँ पार्क करेंगे! अगली बार वोट माँगने आएँ तो बुलडोजर साथ लाना, कम से कम ईमानदारी तो दिखे!”
और विधायक जी! वो तो शायद किसी ‘विकास सम्मेलन’ में व्यस्त होंगे। उनके समर्थक कहेंगे, “अरे, ये तो कानूनी कार्रवाई है! अवैध निर्माण थे ना!” हाँ भाई, 30 साल पुरानी ‘भक्ति’ भी अवैध हो गई क्या!या फिर विकास का मतलब सिर्फ़ सड़कें चौड़ी करना है, दिल नहीं! ये तो वही पुरानी कहानी है, ऊपर से चमचमाती सड़कें, नीचे से उजड़े आशियाने। भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार में बुलडोजर तीसरा इंजन बन गया है! अगली बार चुनाव में नारा लगेगा “बुलडोजर चलाओ, वोट पाओ!” लेकिन उन रोती बेटियों की आँखें याद रखना, क्योंकि विकास की चकाचौंध में इंसानियत कहीं खो न जाए।सोचिए ज़रा, अगर यही ‘दयालु’ बाबा अपनी कार्यकर्ता के घर पर बुलडोजर रोक लेते, तो कितना ‘सच्चा विकास’ होता! फिलहाल, सड़क बन रही है… लेकिन रिश्तों की दीवारें गिर रही हैं। जय हो बुलडोजर बाबा की..!

  • इंद्र यादव / ईशान टाइम्स ग्रुप
    indrayadavrti@gmail.com ……🖊️…..🙏

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