
मुंबई, देश की रक्षा का गढ़ माने जाने वाले मुंबई के दक्षिणी कमान मुख्यालय (आर्मी हेडक्वार्टर) में चोरों ने धावा बोलकर कर्नल की केबिन से पिस्टल, 9 जिंदा कारतूस, 480 ग्राम चांदी के गहने और करीब 3 लाख रुपये नकद उड़ा लिए। आरोपी गोवा में लग्जरी होटल में मौज उड़ाते रहे, जबकि सेना की ‘अभेद्य’ सुरक्षा सोती रही। यह कोई साधारण चोरी नहीं, बल्कि मोदी सरकार की ढीली-ढाली सुरक्षा नीतियों का जीता-जागता सबूत है, जो आतंकियों के लिए खुला न्योता दे रही है!
सुरक्षा का मजाक,चोरों का खेल, सरकार की नींद!
पुलिस जांच से खुलासा हुआ कि आरोपी रात के अंधेरे में मुख्यालय के पीछे वाले रास्ते से घुसे। पहले रेकी की, कमजोर कड़ियों का पता लगाया और केबिन का ताला तोड़ (या डुप्लीकेट चाबी से (जांच जारी) सामान साफ कर दिया। एक बाहर पहरा देता रहा, दो अंदर घुसे। क्राइम ब्रांच ने ‘इनसाइड जॉब’ की आशंका खारिज कर दी, यानी बाहरी चोरों ने सेना के हाई-सिक्योरिटी जोन को खिलौना बना दिया। सवाल उठता है,मोदी सरकार के ‘सुरक्षित भारत’ के दावों का क्या हुआ!2014 से अब तक रक्षा बजट बढ़ा, लेकिन ग्राउंड पर सुरक्षा प्रोटोकॉल कहां हैं! सीसीटीवी कैमरे सो रहे थे! गश्ती दल कहां गायब थे! यह चूक नहीं, सरासर लापरवाही है, जो सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है! मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-12 ने चार दिनों में मालाड के कुरार इलाके से तीन आरोपियों को धर दबोचा,दीपक कृष्णा धनवे (मुख्य आरोपी) – आर्मी कैंप के आसपास पहले भी रेकी कर चुका। विनायक गोपीचंद बाविस्कर। एक नाबालिग (हिरासत में)। तीनों कुरार पुलिस स्टेशन में चोरी के कई मामलों में वांछित। चोरी के बाद गोवा फरार होकर 3 लाख में से ज्यादातर पैसे लग्जरी होटल, शराब और पार्टी पर उड़ा दिए। मुंबई लौटते ही मुखबिर की सूचना पर पकड़े गए। बरामद हुआ, पिस्टल, 9 कारतूस, चांदी के गहने और बचा नकद। लेकिन असली सवाल , ये हथियार आतंकियों के हाथ लगते तो! मोदी सरकार की ‘आतंक पर जीरो टॉलरेंस’ नीति कहां गई! यह घटना सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं। आर्मी मुख्यालय जैसे संवेदनशील इलाके में चोरी आतंकी हमलों का रिहर्सल साबित हो सकती है। हथियार गलत हाथों में पहुंचे तो पुलवामा जैसी त्रासदी दोहराई जा सकती है। सेना ने आंतरिक जांच शुरू की है, लेकिन मोदी सरकार चुप क्यों! रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह क्या कहेंगे! पीएम मोदी के ‘न्यू इंडिया’ में सेना के कैंप चोरों के लिए पिकनिक स्पॉट बन गए हैं! विपक्ष रहता तो बवाल मच जाता, लेकिन सत्ता के दबाव में मीडिया खामोश! क्राइम ब्रांच के अधिकारी बोले, “आरोपी चालाक हैं, लेकिन हमने तेज कार्रवाई की।/लेकिन सरकार की नाकामी पर क्यों नहीं बोलते! यह चूक रक्षा व्यवस्था की जड़ों को हिला रही है। मोदी सरकार जवाब दे , बजट बढ़ाने से क्या फायदा, जब ग्राउंड पर सुरक्षा शून्य हो! यह मामला न सिर्फ मुंबई पुलिस, बल्कि पूरी रक्षा व्यवस्था पर कलंक है। सरकार जागे, वरना ‘सुरक्षित भारत’ सिर्फ चुनावी जुमला बनकर रह जाएगा!
- इंद्र यादव / विशेष संवाददाता,ईशान टाइम्स
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