ishantimes

Upcoming Games

Follow Us On

माँ' की 'ममता' और टूटते 'रिश्ते' की करुण गाथा

चार मासूम ‘बच्चों’ की ‘माँ’ मुकेश यादव के साथ नया घर बसाने चली! ‘!

उत्तर प्रदेश के एटा जिले की एक छोटी-सी दुनिया में, जहां जीवन की सादगी और संघर्ष रोज की कहानी बनते हैं, वहां एक मां का दिल पत्थर हो गया। मनीषा, चार मासूम बच्चों की मां, जिसके आंचल में कभी विहान (दो साल), सचिन (तीन साल), निखिल (सात साल) और प्राची (पांच साल) की हंसी गूंजती थी, आज उनसे दूर चली गई। इंस्टाग्राम के एक फ्रेंड मुकेश यादव के साथ नया घर बसाने की चाह में उसने पुराना आशियाना छोड़ दिया। पति भूप सिंह पर शराब पीने का आरोप लगाकर वह कोर्ट से सीधे प्रेमी के साथ निकल गई। लेकिन पीछे छूट गए चार बच्चे, जो बिलख-बिलख कर मां को पुकार रहे हैं। मां का दिल नहीं पसीजा। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि ममता की उस पवित्र भावना की है, जो कभी-कभी जीवन की कठोर सच्चाइयों में खो जाती है। ममता क्या है वह धागा जो मां और बच्चे को जन्म से पहले ही बांध देता है। गर्भ में पलते शिशु की पहली धड़कन से लेकर जीवन की आखिरी सांस तक, मां का प्यार अटूट होता है। वह भूखे बच्चे के लिए रोटी छोड़ती है, बीमार संतान के लिए रातें जागती है, और दुनिया की हर तूफान से उसे बचाती है। लेकिन एटा की इस घटना में मनीषा की ममता कहां खो गई? क्या इंस्टाग्राम की चमकदार दुनिया ने उसके दिल को इतना कठोर कर दिया कि चार मासूमों की आंसू भरी पुकार अनसुनी रह गई? विहान, जो अभी चलना सीख रहा है, सचिन जो खेल-खेल में मां की गोद मांगता है, निखिल जो स्कूल की कहानियां सुनाता है, और प्राची जो गुड़िया से मां बनने का सपना देखती है—ये बच्चे अब अनाथ जैसे हो गए। उनके बापू भूप सिंह शराब के आरोपों से घिरे हैं, लेकिन बच्चों का क्या? उनकी आंखों में मां की छवि अब धुंधली हो रही है। यह दर्द सिर्फ एटा का नहीं, बल्कि हर उस घर का है जहां मां का जाना परिवार को तोड़ देता है। मनीषा ने कोर्ट में साफ कहा, “मैं मुकेश के साथ रहूंगी।” लेकिन क्या प्रेम की यह आग बच्चों की मासूमियत को जला सकती है? पति की कमजोरी—शराब—को आधार बनाकर भागना आसान है, लेकिन मां का फर्ज? वह तो बच्चों की जिंदगी का आधार होती है। 25 दिन की तलाश के बाद पुलिस ने मनीषा को ढूंढ लिया, लेकिन मां को वापस लाना पुलिस के बस में नहीं। कोर्ट की दीवारों के बाहर बच्चे रोते रहे, मां अंदर प्रेमी का हाथ थामे चली गई। यह दृश्य दिल दहला देता है। क्या सोशल मीडिया की दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि खून के रिश्ते भूल गए। ममता की यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है। आज की दुनिया में जहां इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म रिश्तों को जोड़ते-तोड़ते हैं, वहां मां का प्यार परीक्षा की घड़ियों में टिकता है या नहीं? मनीषा जैसे मामले बढ़ रहे हैं, जहां वैवाहिक कलह में बच्चे पीसते हैं। पति की गलती हो या पत्नी की, लेकिन मां का जाना बच्चों के लिए मौत समान है। विहान की दो साल की उम्र में मां की गोद की गर्माहट खो जाना, प्राची की पांच साल की दुनिया में मां का साथ छिन जाना—यह दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। बच्चे बिलख उठे, लेकिन मां का दिल पत्थर बन गया। क्या यह ममता की हार है या समाज की। ओ मां, तेरी ममता अमर है, लेकिन कभी-कभी जीवन की लहरें उसे बहा ले जाती हैं। एटा के इन चार मासूमों की आंसू हमें जगाती हैं—रिश्तों को संभालो, ममता को जीवित रखो। नहीं तो टूटे दिलों की यह गाथा अनंत तक चलती रहेगी। बच्चों की पुकार अनसुनी न रह जाए, यही प्रार्थना है।

  • इंद्र यादव / स्वतंत्र लेखक,
    indrayadavrti@gmail.com ……🖊️…..🙏
Scroll to Top