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नकली डॉक्टर दे रहा था अवैध गर्भपात की गोलियाँ, पुलिस ने दर्ज किया केस!

मुंबई। पालघर,नालासोपारा पूर्व के शाहीना क्लिनिक में उस वक्त हड़कंप मच गया जब वसई-विरार महानगरपालिका की स्वास्थ्य टीम ने अचानक छापा मारा। क्लिनिक चलाने वाले डॉ. खान झभीउल्ला उब्दुला के पास न तो स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) की डिग्री थी और न ही गर्भपात कराने का कानूनी अधिकार, फिर भी वे महीनों से महिलाओं को खतरनाक गर्भपात की गोलियाँ बेच रहे थे।
महानगरपालिका के वैद्यकीय अधिकारी डॉ. कृष्णा गोस्वामी की शिकायत पर पेल्हार पुलिस ने तुरंत डॉ. खान के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। उन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा ३१८ (धोखाधड़ी से नुकसान पहुँचाना) और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
गरीब और डरी हुई महिलाएँ बन रही थीं शिकार!
इलाके की कई महिलाओं ने बताया कि वे शर्म या परिवार के डर से बड़े अस्पताल नहीं जाना चाहती थीं। डॉ. खान कम पैसे में (करीब २-३ हजार रुपए) “दो गोली खाओ, घर पर ही सब हो जाएगा” कहकर दवा दे देते थे। कई महिलाएँ तो इस प्रक्रिया के बाद भयंकर रक्तस्राव और दर्द से अस्पताल पहुँचीं। कुछ की हालत इतनी गंभीर हो गई कि जान पर बन आई।
कानून क्या कहता है!
भारत में गर्भपात पूरी तरह कानूनी है, लेकिन सिर्फ २४ हफ्ते तक और केवल रजिस्टर्ड गायनेकोलॉजिस्ट या प्रशिक्षित डॉक्टर ही दवा दे सकते हैं या ऑपरेशन कर सकते हैं। बिना योग्यता वाला कोई भी व्यक्ति अगर गर्भपात की दवा देता है तो यह अपराध है और उसकी सजा ७ साल तक की कैद हो सकती है।
असुरक्षित गर्भपात हर साल हजारों भारतीय महिलाओं की जान ले लेता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में हर साल करीब १५-२० लाख असुरक्षित गर्भपात होते हैं जिनमें ज्यादातर गरीब और ग्रामीण इलाकों की महिलाएँ होती हैं।
प्रशासन की सख्ती, मगर सवाल अभी भी बाकी!
यह कार्रवाई महानगरपालिका आयुक्त मनोज कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भक्ति चौधरी के नेतृत्व में हुई। टीम ने क्लिनिक से अवैध दवाएँ, नकली प्रिस्क्रिप्शन पैड और बिना बिल की हजारों गोलियाँ जब्त कीं।
लोग पूछ रहे हैं!
आखिर इतने दिन तक यह क्लिनिक कैसे चलता रहा?
आस-पास के दूसरे फर्जी क्लिनिकों पर कब कार्रवाई होगी?
गरीब महिलाओं को सुरक्षित और मुफ्त गर्भपात की सुविधा सरकारी अस्पतालों में क्यों नहीं मिलती, इसलिए वे ऐसे झोला-छाप डॉक्टरों के पास जाती हैं – इस समस्या का हल कब निकलेगा?
पुलिस अब डॉ. खान से पूछताछ कर रही है कि ये गोलियाँ वे कहाँ से लाते थे और कितनी महिलाओं को दे चुके हैं। उम्मीद है कि यह मामला सिर्फ एक क्लिनिक तक सीमित न रहे और पूरे इलाके में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ बड़ा अभियान चले।
महिलाओं से अपील है – अपनी जान को जोखिम में न डालें। अगर गर्भपात कराना ही है तो सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पताल में ही जाएँ, जहाँ मुफ्त और सुरक्षित सुविधा मिलती है। आपातकाल में १०८ या १०२ नंबर पर कॉल करें।
आपकी जान अनमोल है। उसे झोला-छाप के हाथों न सौंपें

  • Indra yadav
  • Correspondent – Ishan Times..🙏
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