इंद्र यादव (ईशान टाइम्स) भारत/हैदराबाद में 28 नवंबर 2025 को आयोजित ‘भारत गौरव सम्मान 2025’ समारोह में जब मुंबई के वरिष्ठ भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी एवं कमिश्नर डॉ. कुंदन यादव को मंच पर बुलाया गया, तो तालियों की गड़गड़ाहट ने साफ बता दिया कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस संपूर्ण मूल्य-व्यवस्था का सम्मान है जिसे वे अपने जीवन में जीते हैं।

डॉ. यादव सिर्फ एक ईमानदार और सख्त अफसर नहीं हैं। वे एक ऐसे दुर्लभ अधिकारी हैं जिन्होंने सरकारी दायित्वों के साथ-साथ भारतीय संस्कृति के संरक्षण, शिक्षा के प्रसार और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान को भी अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाया है।तस्करी के खिलाफ जंग और स्वच्छ चुनाव, दोहरी जिम्मेदारी! मुंबई कस्टम्स में कमिश्नर के रूप में डॉ. यादव ने सोने, नशीले पदार्थों और विदेशी मुद्रा की तस्करी के खिलाफ अभूतपूर्व कार्रवाइयाँ की हैं। करोड़ों-अरबों की अवैध संपत्ति जब्त करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोहों को नेस्तनाबूद करने तक उनकी भूमिका को वित्त मंत्रालय से लेकर गृह मंत्रालय तक सराहा गया है। पर इससे भी बड़ी उनकी भूमिका रही है चुनाव आयोग के कड़े पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में। कई राज्यों के विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों में उन्होंने पैसे और शराब के दम पर होने वाली खरीद-फरोख्त को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई। नतीजा यह हुआ कि उनके क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत बढ़ा और मतदाताओं का विश्वास लोकतंत्र पर लौटा। विदेश में हिंदी और भारतीय संस्कृति का दूत ,अमेरिका के इलिनॉय विश्वविद्यालय, शिकागो में फुलब्राइट स्कॉलर के रूप में डॉ. यादव ने हिंदी साहित्य और भारतीय दर्शन पढ़ाया। सैकड़ों अमेरिकी छात्रों ने पहली बार कबीर, तुलसी, प्रेमचंद और गांधी को उनकी क्लास में जाना। आज भी वे उन छात्रों के साथ लगातार संपर्क में हैं और भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। डॉ. कुंदन यादव के समाजसेवा की बात करे तो ! चुपचाप, लेकिन गहरा असर! बनारस और मुंबई में जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त कोचिंग एवं किताबें उपलब्ध कराना
, कोविड काल में सैकड़ों प्रवासी मजदूरों को राशन एवं दवाइयाँ पहुँचाना!ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण में व्यक्तिगत योगदान !महिला सशक्तीकरण के लिए कई एनजीओ के साथ मिलकर कौशल प्रशिक्षण शिविर !ये सभी कार्य वे बिना किसी प्रचार के करते रहे। उनकी मान्यता है!“सम्मान तब मिलना चाहिए जब काम पूरा हो जाए, काम के बीच में नहीं! एक संदेश युवा पीढ़ी के लिए! डॉ. कुंदन यादव बार-बार कहते हैं, “IAS-IPS-IRS बनना सिर्फ नौकरी है, बल्कि यह देश को बेहतर बनाने का अवसर है। यदि हम अपने पद का उपयोग केवल सुख-सुविधा के लिए करेंगे तो हमारा चयन व्यर्थ है। आज जब भ्रष्टाचार और स्वार्थ की खबरें आम है, तब डॉ. यादव जैसे अधिकारी यह साबित करते हैं कि सिस्टम में अभी भी ऐसे लोग हैं जो रीढ़ की हड्डी बने हुए हैं। उनका ‘भारत गौरव सम्मान 2025’ केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम की जीत है।डॉ. यादव ने सम्मान मिलने के बाद कहा था ,“यह सम्मान मेरे अकेले का नहीं है। यह उन सभी साथियों का है जो रात-दिन बिना नाम के देश सेवा करते हैं। मैं इसे उन माँ-बाप को समर्पित करता हूँ जिन्होंने मुझे काशी की गलियों में संस्कार दिए और उन गुरुओं को जिन्होंने इलाहाबाद, BHU और JNU में मुझे सोचने का रास्ता दिखाया। ऐसे अधिकारी जब तक हमारे सिस्टम में हैं, तब तक भारत का गौरव अटल है। डॉ. कुंदन यादव सिर्फ एक नाम नहीं, एक प्रेरणा हैं , आने वाली पीढ़ियों के लिए। जय हिंद !


