मरा हुआ था, फिर भी ज़िन्दा बच गया! उत्तर प्रदेश का नया विश्व रिकॉर्ड”!



गढ़मुक्तेश्वर(उत्तर प्रदेश) इंद्र यादव ,ईशान टाइम्स ।उत्तरप्रदेश तो पहले से ही विश्व रिकॉर्ड धारक था , सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री, सबसे ज्यादा बिजली चोरी, सबसे ज्यादा गोबर ,लेकिन अब एक और कीर्तिमान जोड़ लिया ,दुनिया का पहला ऐसा अंतिम संस्कार जहाँ मुर्दा खुद जलने से बचकर निकल गया। बधाई हो हमें! मंगलवार को गढ़मुक्तेश्वर के घाट पर दो होनहार युवा एक कार में “शव” लेकर पहुँचे। कार का डिग्गी खोला, कंधा दिया, लकड़ी सजाई, अगरबत्ती जलाने ही वाले थे कि एक सजग नागरिक को शक हुआ। भाईसाहब ने कफनखी से देखा – कफन के नीचे से प्लास्टिक की चमक दिख रही थी। कफन हटाया तो सामने था एकदम ताज़ा-ताज़ा प्लास्टिक का पुतला, जो शायद अलीएक्सप्रेस से “डेड बॉडी रिप्लिका – फ्री शिपिंग” पर मंगाया गया था। लोगों ने तुरंत दोनों कलाकारों को दबोच लिया। पुलिस आई। पूछताछ शुरू हुई। अब सवाल ये है कि ये दोनों महानुभाव आखिर करना क्या चाहते थे। तीन संभावनाएँ सबसे मज़बूत चल रही हैं । बीमा घोटाला, प्रीमियम वर्ज़न,किसी रिश्तेदार को ज़िंदा रखो, पुतला जला दो, बीमा कंपनी को बिल्कुल हाई-डेफिनिशन में रोते हुए फोटो भेज दो। कंपनी वाले तो वैसे भी पोस्टमार्टम नहीं करवाते, बस फोटो देखकर पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। नया बिज़ , “प्लास्टिक की लाश, असली मुनाफा।”कोई गैंगस्टर भागा हुआ है, पुलिस तलाश कर रही है। तो उसका पुतला जला दो, ढोल नगाड़े बजाओ, अंतिम संस्कार कर दो। अगले दिन अखबार में हेडलाइन , “कुख्यात गुंडा अग्नि को समाहित।” गुंडा हँसते हुए दुबई में बिरयानी खा रहा होता है। शायद ये दोनों स्टार्टअप वाले थे। नाम सोच लिया था , “अन्तिमयात्राडॉटकाम”। स्लोगन ,“अब अपने दुश्मन को भी ज़िंदा जलाए बिना जेल गए।” सर्विस पैकेज , बेसिक : सिर्फ पुतला – ₹8,999 , प्रीमियम : पुतला + कफन + रोने वाली औरतें – ₹24,999, अल्ट्रा प्रीमियम : पुतला + फेक पोस्टमार्टम रिपोर्ट + अखबार में विज्ञापन , ₹99,999- पुलिस अब पूछ रही है ,“पुतला कहाँ से लाये।जवाब मिला , “सर, लोकल मार्केट से। वहाँ लिखा था , ‘ह्यूमन लाइक फिगर, बहुत रियलिस्टिक, शादी-ब्याह और अंतिम संस्कार दोनों के लिए परफेक्ट’।अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर ये पुतला सच में जल जाता तो क्या होता।गंगा मैया को पहली बार प्लास्टिक प्रदूषण नहीं, प्लास्टिक मुर्दा प्रदूषण झेलना पड़ता। मछलियाँ खातीं, हम खाते, फिर हम भी प्लास्टिक बन जाते। पूरी मानवजाति अमर हो जाती – क्योंकि प्लास्टिक तो सड़ता नहीं। फिर भी, हमारे दोनों नवोदित कलाकारों को सलाम। कम से कम उन्होंने साबित कर दिया कि इस देश में “मेक इन इंडिया” नहीं, “फेक इन इंडिया” ज़्यादा चल रहा है।
पुतला जलाने से पहले पुलिस पकड़ ले, वरना आज गढ़मुक्तेश्वर में अंतिम संस्कार होता एक ऐसे शव का जिसने कभी जन्म ही नहीं लिया था। सचमुच, हमारा देश अद्भुत है , यहाँ मरने के लिए भी ओरिजनल होना पड़ता है, नकली चलता नहीं। जय हो प्लास्टिक मुक्त भारत की… नहीं-नहीं, प्लास्टिक मुर्दा मुक्त भारत की!
- indra Yadav we


