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सत्य को आत्मसात करना ही वीरेंद्र सेंगर को सच्ची श्रद्धांजलि : सोमपाल शास्त्री

नई दिल्ली, 7 नवम्बर (Ishantimes)। पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री ने कहा है कि वरिष्ठ पत्रकार स्व. वीरेंद्र सेंगर एक खांटी पत्रकार थे। वे बेहद संवेदनशील थे और विपरीत परिस्थितियों में भी कभी विचलित नहीं हुए। उन्होंने हमेशा सच लिखा। उनके लिखे सत्य को आत्मसात करना ही वीरेंद्र सेंगर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


सोमपाल शास्त्री ने ये बात निडर और बेबाक पत्रकार स्व. वीरेंद्र सेंगर द्वारा लिखी गई दो पुस्तकों, सच के सिवाय व आगे और आग है के विमोचन के अवसर पर कही। नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री ने की। पूर्व डीजीपी सेवानिवृत्त आईपीएस विभूति नारायण राय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे और वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी की इस मौके पर गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर प्रसिद्ध लेखक व विचारक प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल मुख्य वक्ता थे। इस अवसर पर वीरेंद्र सेंगर के साथ काम कर चुके पत्रकारों और उनके अत्यंत घनिष्ठ मित्रों द्वारा लिखी गई स्मारिका स्मृतियां वीरेंद्र सेंगर की भी जारी की गई। देश के प्रख्यात पत्रकारों ने इस आयोजन में भाग लिया। इस मौके पर विभूति नारायण राय ने कहा कि सच लिखने में बहुत बाधाएं हैं लेकिन वीरेंद्र सेंगर इन बाधाओं से तनिक भी नहीं घबराए।


इस अवसर पर कमर वहीद नकवी ने कहा कि सच न बोलना ठगना है। वीरेंद्र सेंगर सच्चे पत्रकार थे। वे पक्षपाती नहीं थे। दिल्ली के सुधा गोयल हत्याकांड की उन्होंने जो रिपोर्टिंग की वो बेमिसाल है। प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा कि देश में माहौल ऐसा है कि मूर्ख होना गर्व का विषय हो गया है। विरेंद्र सेंगर ने सच को सच लिखने की हिम्मत की। यही वजह है कि वे कालजयी पत्रकार बन गए हैं।


गौरतलब है कि 1955 में उत्तरप्रदेश के कानपुर के गांव खांडेपुर में जन्में वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सेंगर का 26 मार्च 2025 को उत्तराखंड नैनीताल जिले के नौकिछियाताल में निधन हो गया था। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत कानपुर से की थी और उसके बाद दिल्ली आकर चार दशक तक उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी निर्भीक पत्रकारिता की धाक जमाई। सेंगर चौथी दुनिया समाचार पत्र के आधार स्तंभ रहे, अमर उजाला व संडे मेल आदि अनेक नामी गिरामी अखबारों में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।


जब उत्तरप्रदेश के हाशिमपुरा कांड की खबर को कोई हाथ लगाने को तैयार नहीं था तब उस खबर को वीरेंद्र सेंगर ने सबूतों के साथ छापा। इससे पूरी दुनिया को आजाद भारत में हुए इस वीभत्स नरसंहार का पता चला। पूरे देश को भी पहली बार इस रिपोर्टिंग से वीरेंद्र सेंगर की प्रतिभा, पत्रकारिता और जज्बे का पता चला। प्रसिद्ध किसान नेता स्व. महेंद्र सिंह टिकैत द्वारा चलाये गए किसान आंदोलन की वीरेंद्र सेंगर द्वारा की गई रिपोर्टिंग को मील का पत्थर माना जाता है। इसी तरह उन्होंने गुजरात दंगों पर भी बेहतरीन रिपोर्टिंग की थी।


वीरेंद्र सेंगर द्वारा लिखी गई दो पुस्तकों सच के सिवाय व आगे और आग विमोचन के अवसर पर उनकी पत्नी रीता भदौरिया, बेटी ऋतंभरा, आलोक भदौरिया, संतोष भारतीय, विनोद अग्निहोत्री, के एम सिंह, धर्मपाल धनखड़, अमरनाथ सिंह, ममता सिंह, अमित नेहरा, अमरेंद्र राय, संजय राय, उमेश जोशी व शिवाजी सरकार आदि अनेक जाने-माने पत्रकारों ने हिस्सा लिया।

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