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विनयना बैंक के मैनेजर पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगाया

सपा ‘नेता’ के दम पर ‘लाखों’ रूपए हज़म करने को आमादा है मैनेजर! विधवा बूढ़ी मां ने पुलिस अधीक्षक से लगाई न्याय की गुहार !

उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था का काला अध्याय है यह घटना भदोही जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने फिर साबित कर दिया है कि सत्ता के गलियारों में बैठे कुछ लोग गरीबों की आहों को कुचलने का कुत्सित इरादा रखते हैं। जलालपुर के निवासी मेहंदी हसन ने विनयना बैंक के मैनेजर पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगाया है। लोन की किस्तें चुकाईं, बीमा का पैसा जमा किया, लेकिन जब रकम वापसी की बारी आई तो मैनेजर ने साफ इंकार कर दिया। ऊपर से धमकियां, जान से मारने की धमकी और फर्जी मुकदमों का भय दिखाकर गरीब परिवार को बर्बाद करने की साजिश! और इस सबके पीछे छिपा है सपा नेता का ‘दम’, जो मैनेजर को बेखौफ हत्यारा बना रहा है। क्या यही है समाजवादी पार्टी का ‘समाजवाद’, जहां गरीब विधवा मां की गुहार को ठुकरा दिया जाता है! मेहंदी हसन की कहानी किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के उन लाखों गरीबों की पीड़ा का प्रतीक है। उन्होंने लोन चुकाए, ब्याज सहित 3.72 लाख रुपये ट्रांसफर किए, यहां तक कि बीमा के नाम पर रोजाना 500 रुपये जमा किए। मैनेजर ने वादा किया था कि एक साल बाद 20% ब्याज के साथ पैसा लौटेगा, जो बिटिया की शादी के लिए काम आएगा। लेकिन अब। मैनेजर के मुंह से निकलता है, ‘तुम्हारा कोई पैसा हमारे पास नहीं!’ ऊपर से पुलिस की वर्दी का रौब दिखाकर बेटे को डराना, ब्लैंक चेकों का दुरुपयोग कर फंसाने की धमकी। मेहंदी हसन ने भदोही कोतवाली में शिकायत की, मुख्यमंत्री पोर्टल पर गुहार लगाई, लेकिन क्या हुआ। खामोशी! सपा नेता का साया मैनेजर पर इस कदर है कि कानून की किताबें भी कागज के टुकड़े बन गईं। क्या सपा नेता खुद को ‘समाज का रक्षक’ मानते हैं, जो बैंक मैनेजर को हत्यारे की तरह बेलगाम छोड़ देते हैं। यह आलोचना नहीं, सच्चाई है कि सपा का ‘दम’ भ्रष्टाचार को पनपने का खतरा बन गया है, जहां गरीबों का खून-पसीना हजम करना आसान हो जाता है। उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर यह घटना तीखा प्रहार है। पुलिस कीतवाली में शिकायत दब जाती है, सीएम पोर्टल पर भी कार्रवाई का नामोनिशान नहीं। मैनेजर खुले आम धमकी देता है, सपा नेता के भरोसे पर पुलिस का हाथ साफ! क्या यूपी में कानून सिर्फ अमीरों-ताकतवरों के लिए है। विधवा बूढ़ी मां की आंखों में आंसू, बिटिया की शादी का सपना टूटा, लेकिन व्यवस्था सोती रही। सपा नेता का दबाव हो या राजनीतिक संरक्षण, यह साफ है कि भ्रष्टाचार के कीड़े कानून के जाल को चबा रहे हैं। मुख्यमंत्री पोर्टल जैसी डिजिटल पहल का मजाक उड़ाया जा रहा है, जहां शिकायतें दर्ज तो होती हैं लेकिन न्याय की जगह धमकियां मिलती हैं। क्या यूपी की जनता हमेशा ऐसी लाचारी झेलेगी। सपा का ‘दम’ अगर गरीबों के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है, तो यह पार्टी की नैतिक हार है।नमेहंदी हसन जैसे पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए। पुलिस अधीक्षक से लेकर उच्च अधिकारियों तक को जागना होगा। सपा नेता को जवाब देना पड़ेगा कि उनका ‘दम’ किसके हित में लगाया जा रहा है – गरीबों के या भ्रष्टाचारियों के। उत्तर प्रदेश को चाहिए एक ऐसी व्यवस्था जहां कानून सबके लिए बराबर हो, न कि सत्ता के गुलाम। अन्यथा, ऐसी घटनाएं राज्य की छवि को और काला करती रहेंगी। न्याय की गुहार सुन ली जाए, वरना जनता का सब्र टूटेगा!

  • इंद्र यादव / स्वतंत्र लेखक,
    indrayadavrti@gmail.com ……🖊️…..🙏
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