
दिनेश यादव पत्रकार
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार तो मानो पत्रकारों के लिए ‘विशेष सुरक्षा कवच’ बना रही है! देखिए न, दिनेश कुमार यादव जैसे साहसी पत्रकार को असलील धमकी देने वाले को पकड़ने की बजाय, पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली – धमकी देने वाले की नहीं, बल्कि पत्रकार की शिकायत पर! वाह रे यूपी पुलिस, क्या खूब ‘न्याय’ बांट रही हो! ये तो वही बात हुई कि चोर की बजाय पीड़ित को ही जेल भेज दो, क्योंकि उसने शोर मचाया। समझिए जरा इस ‘महान’ प्रकरण को। जनपद भदोही के सुरियावां थाना क्षेत्र में रहने वाले दिनेश कुमार यादव, जो ‘दैनिक अमर स्तंभ’ जैसे बड़े अखबार के लिए खबरें लिखते हैं, को फेसबुक पर कोई सज्जन धमकी दे रहा है – असलील भाषा, गंदी तस्वीरें, और क्या-क्या नहीं! पत्रकार महोदय ने सोचा, चलो पुलिस से गुहार लगाएं। लेकिन यूपी की ‘रामराज्य’ पुलिस ने क्या किया? प्राथमिकी दर्ज की तो सही, मगर धमकी देने वाले के खिलाफ नहीं – बल्कि ये कहकर कि ‘बातचीत चल रही है’! अरे भाई, बातचीत तो हम भी कर सकते हैं, इसके लिए थाना खोल रखा है क्या। ऊपर से धमकी देने वाला कोई आम आदमी नहीं, बल्कि फेसबुक के माध्यम से ‘बदनाम’ करने की साजिश रच रहा है। लेकिन सरकार की नजर में ये ‘छोटी-मोटी’ बात है। आखिर पत्रकार तो ‘समाजसेवी’ हैं न, थोड़ी धमकी से क्या फर्क पड़ता है। और हंसी तब आती है जब पुलिस कहती है कि दोनों पक्षों से बात हो रही है। मतलब, धमकी देने वाले को बुलाओ, चाय-पानी पिलाओ, और समझौता कराओ। यूपी में अपराधियों को तो ‘एनकाउंटर’ का डर दिखाते हो, लेकिन पत्रकारों को धमकाने वालों को ‘समझौते’ का ऑफर! क्या यही है योगी जी का ‘जीरो टॉलरेंस’ वाला मॉडल। जहां गुंडे-मवाली फेसबुक पर बैठकर मनमानी करें, और पुलिस ‘मध्यस्थता’ करे। दिनेश यादव जैसे पत्रकार, जो ग्रामीण इलाकों में सच्चाई की लड़ाई लड़ते हैं, उनकी आवाज दबाने की कोशिश हो रही है, और सरकार मूकदर्शक बनी है। ये तो वही पुरानी कहावत है – ‘बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद’, यहां तो ‘सरकार क्या जाने पत्रकार की पीड़ा’! याद कीजिए, यूपी में पत्रकारों पर हमले, धमकियां, मुकदमे – ये कोई नई बात नहीं। लेकिन हर बार यही ढोल – ‘जांच होगी, कार्रवाई होगी’। कार्रवाई होती भी है तो ‘चुनिंदा, वो भी तब जब मामला वायरल हो जाए। दिनेश कुमार यादव का मामला तो अभी छोटा है, लेकिन अगर यही चलता रहा तो कल को कोई बड़ा पत्रकार भी फेसबुक पर ‘असलील’ हो जाएगा! सरकार जी, पत्रकारों को सुरक्षा दो, न कि ‘समझौता’ का लॉलीपॉप। वरना जनता पूछेगी – यूपी में ‘रामराज्य’ है या ‘धमकीराज्य’। और हां, लोकतंत्र सेनानी जयदत सिंह अमृत सरोवर बड़ोखर – छत पूजा के लिए किया गया साफ-सफाई! क्या बात है, सरोवर साफ तो पत्रकार गंदे रहें। यूपी सरकार, जागो! पत्रकारों का शोषण बंद करो, वरना जनता का ‘वोट एनकाउंटर’ तैयार है!

- इंद्र यादव/स्वतंत्र लेखक/ indrayadavrti@gmail.com/




