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यूपी की 'पवित्र' प्रेम कहानी: मामी-भांजे का 'अमर' इश्क, पुलिस चौकी में 'बलिदान' का ड्रामा!

अरे वाह, उत्तर प्रदेश की मिट्टी में प्रेम की ऐसी फसल उग रही है कि बॉलीवुड वाले भी शर्मा जाएं! सीतापुर जिले से आई ये ताजा खबर तो जैसे ‘फैमिली ड्रामा’ का नया चैप्टर है – जहां रिश्तों की पवित्रता को ‘अवैध इश्क’ की खाद से इतना हरा-भरा किया गया कि अब उसमें रुसवाई के कांटे उग आए हैं। मामी पूजा मिश्रा और उनके 15 साल छोटे भांजे आलोक मिश्रा की ये ‘रोमांटिक’ सागा सुनकर आपका दिल धड़क उठेगा… या शायद हंसते-हंसते फट जाएगा!…कहानी शुरू होती है क्लासिक तरीके से – पति ललित मिश्रा, जो शायद सोचते होंगे कि परिवार को मजबूत बनाने के लिए भांजे को घर बुलाना अच्छा आइडिया है। काम में हाथ बंटाने के बहाने आलोक गांव से शहर आया, और ललित मिश्रा जी काम पर निकलते, तो घर में ‘अय्याशी’ का फुल-टाइम प्रोग्राम चलता। अरे भाई, दिन भर क्या-क्या करते थे ये दोनों। घर संभालते। या ‘फैमिली टाइम’ को नए लेवल पर ले जाते। खैर, जब ये राज खुला, तो ललित मिश्रा ने भांजे को भगा दिया – सही भी है, कौन रखे ऐसे ‘हेल्पर’ को जो घर की ‘मालकिन’ को ही हेल्प कर दे!

लेकिन यहीं ट्विस्ट आता है, दो बच्चों की मां पूजा मिश्रा का दिल तो युवा आलोक मिश्रा पर आ ही गया था। ‘प्यार अंधा होता है’ – यहां तो इतना अंधा कि रिश्ते की सारी लकीरें मिटा दीं। दोनों घर से भाग निकले और 7 महीने बरेली में ‘हनीमून’ मनाया। सोचिए, कितना रोमांटिक! एक तरफ दो बच्चे घर पर मां का इंतजार कर रहे होंगे, दूसरी तरफ मामी-भांजे का ‘लाइव-इन’ रिलेशनशिप। यूपी में ऐसे ‘मॉडर्न’ परिवार कहां मिलते हैं। शायद ये वो ‘सांस्कृतिक क्रांति’ है जिसकी बात नेता लोग करते रहते हैं!…फिर आया क्लाइमैक्स – आलोक मिश्रा ने कहा, “बस हो गया, अब नहीं अपनाऊंगा!” उम्र का फर्क। या शायद ‘अय्याशी’ की एक्सपायरी डेट आ गई। विवाद हुआ, मामला पुलिस चौकी पहुंचा। वहां भांजे ने फिर दोहराया कि अब नहीं चलेगा ये सब। और मामी पूजा मिश्रा । वो तो ‘ट्रू लव’ की दीवानी! चौकी में ही ब्लेड निकाला और कलाई काट ली। वाह, क्या डेडिकेशन! बॉलीवुड की हीरोइनों को चैलेंज है – पुलिस स्टेशन में सुसाइड अटेम्प्ट से बड़ा ‘सैक्रिफाइस’ क्या हो सकता है। अब वो अस्पताल में एडमिट हैं, शायद सोच रही होंगी कि अगला एपिसोड क्या होगा।… ये कहानी हमें क्या सिखाती है? कि यूपी में प्रेम की कोई सीमा नहीं – न उम्र की, न रिश्तों की, न कानून की। एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ’ चला रही है, दूसरी तरफ ऐसे ‘फैमिली अफेयर्स’ से समाज ‘बचाओ’ चिल्ला रहा है। आलोक मिश्रा जैसे ‘युवा’ तो बस ‘एक्सपीरियंस’ लेते हैं और भाग जाते हैं, लेकिन पूजा मिश्रा जैसी ‘एक्सपीरियंस्ड’ महिलाएं। वो तो दिल की सुनती हैं, भले पुलिस चौकी में ‘ब्लड डोनेशन’ क्यों न करना पड़े!…खैर, मजाक एक तरफ – ये घटना दुखद है, लेकिन सोचिए, अगर ऐसे रिश्तों को ‘नॉर्मल’ मान लिया जाए तो क्या होगा? शायद अगली बार कोई ‘मामा-भांजी’ की स्टोरी आएगी! समाज को आईना दिखाने वाली ये खबर बताती है कि ‘प्यार’ के नाम पर कितनी आसानी से रिश्ते तार-तार हो जाते हैं। सीतापुर पुलिस अब क्या करेगी। जांच। या नया ‘लव जिहाद’ कानून बना देगी ‘फैमिली जिहाद’ के लिए। इसलिए आप लोगों से निवेदन है कि असल जीवन में ऐसे रिश्तों से दूर रहें, वरना पुलिस चौकी आपका अगला ‘डेट स्पॉट’ बन सकता है!

  • इंद्र यादव,स्वतंत्र लेखक
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