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मुंबई में बदमाशों ने दिनदहाड़े मारी गोली

मुंबई के चारकोप में दिनदहाड़े गोलीबारी ! कानून-व्यवस्था की खुली पोल! पीड़ित खून से लथपथ सड़क पर गिर पड़ा !

मुंबई ! दुनिया की आर्थिक राजधानी, सपनों का शहर, “सुरक्षित महानगर” कहलाने वाला मुंबई एक बार फिर अपराधियों के हौसले की शिकार बन गया। कांदिवली पूर्व के चारकोप सेक्टर-4 में दोपहर के उजाले में बाइक सवार दो बदमाशों ने एक व्यक्ति पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। पीड़ित खून से लथपथ सड़क पर गिर पड़ा, आसपास के लोग सहम गए, लेकिन बदमाश बेधड़क भाग निकले। पूरा वाकया सीसीटीवी में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। यह कोई पहली घटना नहीं है, पर हर बार की तरह यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है , आखिर मुंबई पुलिस सोई हुई है या अपराधियों को खुली छूट दे दी गई है! दिन के 2-3 बजे, जब सड़कों पर आम लोग, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग आते-जाते हैं, उस वक्त भी बदमाशों को इतना हौसला कि वे बिना मास्क, बिना नंबर प्लेट की बाइक पर आते हैं, गोली चलाते हैं और चले जाते हैं ,यह सिर्फ आपराधिक मानसिकता नहीं, पुलिसिंग की भयंकर नाकामी का प्रमाण है। पिछले कुछ महीनों में मुंबई और उपनगरों में गोलीबारी की दर्जनों घटनाएं हो चुकी हैं , बोरिवली, दहिसर, मलाड, गोरेगांव, कांदिवली… कहीं रंगदारी, कहीं पुरानी रंजिश, कहीं गैंगवार। हर बार पुलिस कहती है “हम जांच कर रहे हैं, जल्द पकड़ लेंगे”। पर बदमाश पकड़े भी जाते हैं तो जमानत पर बाहर आ जाते है। यह सिलसिला कब थमेगा! मुंबई पुलिस के पास दुनिया का सबसे बड़ा पुलिस बल है, हजारों सीसीटीवी कैमरे हैं, हाई-टेक कंट्रोल रूम हैं, फिर भी अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं। इसका सीधा कारण है राजनीतिक संरक्षण और पुलिस-गैंगस्टर नेक्सस। कई गैंग्स के सरगना आज भी जेल से बाहर धंधा चला रहे हैं या जमानत पर घूम रहे हैं। अवैध हथियारों की सप्लाई रुकने का नाम नहीं ले रही। स्थानीय पुलिस स्टेशन स्तर पर खुफिया तंत्र नाममात्र को रह गया है। नाकाबंदी, गश्त, बीट मार्शल सिस्टम ,सब कागजों में हैं, धरातल पर नजर नहीं आते। सवाल सिर्फ पुलिस का नहीं, हमारी पूरी व्यवस्था का है। जब तक अपराधियों को त्वरित और कड़ी सजा नहीं मिलेगी, जब तक गैंगस्टरों को राजनीतिक पार्टियों का खुला संरक्षण मिलता रहेगा, जब तक अवैध हथियार और ड्रग्स का कारोबार फलता-फूलता रहेगा, तब तक ऐसे दिनदहाड़े हमले होते रहेंगे। आम मुंबईकर, जो सुबह घर से निकलता है और शाम को सकुशल लौटना चाहता है, उसकी जान सस्ती हो गई है।
मुंबई की जनता अब थक चुकी है। हर घटना के बाद मोमबत्ती मार्च, सोशल मीडिया पर आक्रोश और फिर भूल जाना – यह चक्र बंद होना चाहिए। जरूरत है सख्त कानून की, तेज जांच की, और सबसे ऊपर राजनीतिक इच्छाशक्ति की। अगर महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस अभी नहीं चेती, तो आने वाले दिनों में चारकोप की यह घटना सिर्फ एक और आंकड़ा बनकर रह जाएगी।क्या हम इंतजार करेंगे अगली गोली का, या अब आवाज उठाएंगे!आम मुंबईकर की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं। वक्त है कि सरकार और पुलिस महकमे इसे गंभीरता से लें, वरना “सपनों का शहर” धीरे-धीरे “डर का शहर” बनता चला जाएगा।

  • indra Yadav / Independent Journalist
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