मालवण में “पैसा बोलता है” का लाइव डेमो: शिवसेना-भाजपा का नया रियलिटी शो!

इंद्र यादव ( ईशान टाइम्स )
महाराष्ट्र/मुंम्बई की राजनीति तो अब रोज़ नया सीज़न लॉन्च कर रही है। इस बार एपिसोड का टाइटल है ,“ऑपरेशन ग्रीन बैग”। हीरो हैं हमारे एकनाथ शिंदे गुट के विधायक निलेश राणे, जो अचानक सीधे भाजपा नेता के घर में घुस गए और एक हरा बैग पकड़ लिया। बैग खोला तो अंदर से निकले चमचमाते नोटों की बारिश! लगभग 25 लाख रुपये। निलेश भाई तुरंत चिल्लाए , “देखो-देखो, लोकतंत्र को लूटने का सामान मिल गया!” अब सबसे मज़ेदार ट्विस्ट तो ये है कि निलेश राणे के पिताजी नारायण राणे और भाई नितेश राणे दोनों भाजपा में बड़े-बड़े कुर्सियों पर विराजमान हैं। मतलब घर में भाजपा का झंडा लहरा रहा है और बेटा बाहर भाजपा को ही “चोर-चोर” चिल्ला रहा है। ये क्या है! फैमिली ड्रामा का महाराष्ट्र वर्ज़न! पापा-भाई कह रहे होंगे ,“बेटा, कम से कम घर में तो चुप रहता, बाहर जाके शोर मचा रहा है! निलेश भाई ने तो स्टिंग ऑपरेशन का पूरा क्रेडिट ले लिया। बोले, “मैंने भंडाफोड़ कर दिया। ये पैसा वोटरों को बांटने के लिए था।” अरे भाई, स्टिंग ऑपरेशन में कैमरा छिपाकर किया जाता है, आप तो सीधे घंटी बजाकर, “सरप्राइज़!” बोलते हुए घुस गए। ये स्टिंग नहीं, “होम डिलीवरी रेड” है! भाजपा वाले भी पीछे कहाँ रहने वाले। विजय किंजवडेकर जी ने तपाक से जवाब दिया ,“अरे ये पैसा तो मेरे बिज़नेस का है भाई, चुनाव का नहीं।” वाह! क्या बिज़नेस है जनाब! हरे बैग में 25-25 लाख रखकर घर में स्टोर करते हैं! कोई नया स्टार्टअप है क्या ,“कैश होम डिलीवरी सर्विस”! और वो भी ठीक नगर परिषद चुनाव के पहले! ग्राहक तो तैयार बैठे होंगे, “भैया, दो हज़ार का नोट चाहिए, UPI से नहीं, कैश में!” फिर आशीष शेलार जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा , “ये सब झूठ है, निलेश राणे ड्रामा कर रहे हैं।” अरे भाई, ड्रामा तो पूरा महाराष्ट्र कर रहा है! एक तरफ़ शिवसेना (शिंदे) और भाजपा गले-गले मिलकर सरकार चला रहे हैं, दूसरी तरफ़ लोकल चुनाव में एक-दूसरे के घर में छापा मार रहे हैं। ये गठबंधन नहीं, “लव-हेट रिलेशनशिप” है , दिन में साथ खाना, रात में साथ मारपीट! सबसे हास्यास्पद बात , निलेश राणे बोले, “अगर भाजपा जीती तो नगर परिषद में लूट होगी।” अरे भाई, आप भी तो उसी महायुति में हो! यानी अगर आपकी गठबंधन सरकार जीतेगी तो लूट होगी! मतलब वोटरों को सीधा मैसेज ,“चाहे जिसे वोट दो, लूट तो पक्की है!”/अंत में चुनाव आयोग और पुलिस वाले वहाँ पहुँचे, वीडियो बन रहे हैं, फोटो खिंच रहे हैं, पर अभी तक FIR तक नहीं हुई। क्यों! क्योंकि सबको पता है ,ये पैसा किसी का भी हो, अंत में तो “सेटिंग” में चला जाएगा। बैग हरा था ना! शायद इसलिए ग्रीन सिग्नल मिल गया हो! महाराष्ट्र की जनता अब थक चुकी है भाई। रोज़ नया ड्रामा, नया स्टिंग, नया बैग। बस एक ही सवाल है , अगले एपिसोड में कौन सा रंग का बैग खुलेगा! लाल, केसरी या फिर नीला!-2 दिसंबर को वोट डालिए, पर याद रखिए – जिसे भी डालोगे, बैग तो किसी न किसी के घर में भरा ही मिलेगा!


