



उत्तर प्रदेश! भदोही जिले के पार्वती हॉस्पिटल में हुई एक प्रसूता की मौत ने न केवल अस्पताल प्रबंधन को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों के आरोपों के बीच, यह घटना ग्रामीण भारत में व्याप्त स्वास्थ्य संकट की एक और मिसाल बनकर उभरी है, जहां सरकारी निगरानी की कमी और निजी अस्पतालों की मनमानी गरीब परिवारों को मौत के मुंह में धकेल रही है। विशेषज्ञों का दावा है कि ऐसी घटनाएं मातृ मृत्यु दर (MMR) को कम करने के सरकारी दावों की पोल खोलती हैं, और अधिकारियों की उदासीनता इस समस्या को और गहरा बना रही है। पूरा मामला – एक मौत जो सिस्टम की विफलता का प्रतीक बन गई
मंगलवार देर रात, भदोही के पार्वती हॉस्पिटल में भर्ती एक प्रसूता महिला की प्रसव के दौरान मौत हो गई। परिजनों का दावा है कि अस्पताल ने ऑपरेशन में देरी की, खून की कमी का हवाला देकर परिवार को खुद व्यवस्था करने को कहा, और स्थिति बिगड़ने पर समय से रेफर नहीं किया। हालांकि नवजात शिशु को बचाया गया और उसका इलाज जारी है, लेकिन इस मौत ने स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया है।
यह घटना कोई अलग-थलग नहीं है, यह उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्वास्थ्य प्रणाली की जड़ों में सड़न को दर्शाती है।
भारत का वर्तमान MMR (88) वैश्विक औसत (लगभग 197-223) से काफी कम है। भारत ने मातृ मृत्यु दर में भारी गिरावट देखी है, जो वैश्विक औसत गिरावट से कहीं अधिक है।
हालांकि, भारत का लक्ष्य सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2030 तक MMR को 70 से नीचे लाना है!
जो वैश्विक औसत से काफी ऊपर है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में निजी अस्पतालों पर निर्भरता बढ़ रही है, लेकिन सरकारी अस्पतालों की कमी और गुणवत्ता की गिरावट इस संकट को बढ़ावा दे रही है। भदोही जैसे जिलों में, जहां सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं अपर्याप्त हैं, निजी अस्पताल अक्सर गरीब मरीजों को ‘कैश काऊ’ के रूप में देखते हैं, जिससे लापरवाही के मामले बढ़ते जा रहे हैं। परिजनों के आरोप, अस्पताल की लापरवाही से आगे, सिस्टम की नाकामी!/मृतका के परिवार ने अस्पताल पर निम्न आरोप लगाए हैं,- ऑपरेशन में अनावश्यक देरी, जिससे रक्तस्राव बढ़ा! खून की व्यवस्था के लिए कोई सहायता न प्रदान करना, जबकि अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा का दावा किया जाता है। मरीज की हालत बिगड़ने पर तुरंत उच्च स्तरीय अस्पताल में रेफर न करना। पूर्व में भी अस्पताल की लापरवाही के कई मामले, जैसे स्टाफ द्वारा अनुचित व्यवहार और छेड़छाड़ के आरोप।परिजनों का दर्द बयां करते हुए एक सदस्य ने कहा, “हम गरीब हैं, इसलिए हमारी जान की कोई कीमत नहीं? अधिकारियों को पता है कि ऐसे अस्पताल कैसे चल रहे हैं, फिर भी कुछ नहीं करते।” यह आरोप न केवल अस्पताल पर हैं, बल्कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और जिला प्रशासन पर भी, जो नियमित निरीक्षण और शिकायतों पर कार्रवाई में कथित रूप से ढिलाई बरतते हैं।
अधिकारियों की ‘क्लास’, निगरानी की कमी और जवाबदेही का अभाव
इस घटना ने स्वास्थ्य अधिकारियों की कार्यशैली पर सीधा हमला किया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि CMO कार्यालय को पार्वती हॉस्पिटल की पूर्व शिकायतों की जानकारी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। क्या जिला स्वास्थ्य विभाग नियमित ऑडिट करता है? क्या निजी अस्पतालों के लाइसेंस की समीक्षा समय पर होती है? ये सवाल अब जोर पकड़ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाएं कागजों पर तो प्रभावी हैं, लेकिन ग्रामीण स्तर पर क्रियान्वयन में भारी खामियां हैं। एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “अधिकारी अस्पतालों से ‘समझौते’ करते हैं, जिससे लापरवाही बढ़ती है। मातृ स्वास्थ्य में रक्तस्राव (hemorrhage) सबसे बड़ा कारण है, जो 25% मौतों के लिए जिम्मेदार है, लेकिन ब्लड बैंक की कमी और इमरजेंसी प्रोटोकॉल की अनदेखी अधिकारियों की नाकामी है।”
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के दिशानिर्देशों के बावजूद, ग्रामीण इलाकों में प्रसव केंद्रों की कमी है। भदोही में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों की कमी 30% है, जिससे मरीज निजी अस्पतालों की ओर रुख करते हैं। अधिकारियों पर आरोप है कि वे राजनीतिक दबाव में जांच को दबा देते हैं, जिससे दोषी बच निकलते हैं। यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लापरवाही साबित होती है, तो क्या CMO और जिला मजिस्ट्रेट जवाबदेह होंगे! स्थानीय नागरिकों की मांग है कि उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जाए, और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो।
स्वास्थ्य समस्या की गहराई,मातृ स्वास्थ्य संकट का व्यापक परिदृश्य! यह मौत मातृ स्वास्थ्य की बड़ी तस्वीर का हिस्सा है। विश्वनस्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित 80% से अधिक मौतें रोकी जा सकती हैं, यदि समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सहायता मिले।
प्रमुख समस्याएं!
रक्तस्राव और एनीमिया,ग्रामीण महिलाओं में एनीमिया की दर 50% से अधिक है, जो प्रसव में जोखिम बढ़ाता है। सरकारी कार्यक्रम जैसे ‘अनमोल’ (एनीमिया मुक्त भारत) कागजों पर हैं, लेकिन ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ASHA) अपर्याप्त संसाधनों से जूझते हैं।
निजी अस्पतालों का अनियमित विनियमन!
निजी अस्पताल अक्सर ओवरचार्जिंग और अनावश्यक सर्जरी करते हैं। क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के बावजूद, कई राज्यों में इसका पालन नहीं होता। भदोही जैसे जिलों में, निजी अस्पतालों की संख्या सरकारी से दोगुनी है, लेकिन गुणवत्ता नियंत्रण शून्य है।
गरीबी और पहुंच की असमानता!
गरीब परिवार आयुष्मान कार्ड का लाभ नहीं उठा पाते, क्योंकि कई अस्पताल इसमें शामिल नहीं होते। NFHS डेटा दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 40% प्रसव अस्पतालों में होते हैं, और उनमें भी लापरवाही के मामले बढ़ रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य प्रभाव!
ऐसी मौतें परिवार पर गहरा असर डालती हैं, जिससे अवसाद और आर्थिक संकट बढ़ता है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सरकार को मातृ स्वास्थ्य के लिए अलग बजट और ट्रेनिंग प्रोग्राम बढ़ाने चाहिए। यह संकट कोरोना महामारी के बाद और गहराया है, जब स्वास्थ्य बजट में कटौती हुई। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसी घटनाओं को रोकें, लेकिन बार-बार होने वाली मौतें उनकी विफलता को उजागर करती हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया और कार्रवाई की मांग!
घटना के बाद अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए, जहां लोगों ने अधिकारियों के खिलाफ नारे लगाए। मांगें हैं!
CMO द्वारा तत्काल जांच और अस्पताल सील। मेडिकल बोर्ड से स्वतंत्र पोस्टमार्टम। स्वास्थ्य मंत्री स्तर पर ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार!दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई।फिलहाल, अस्पताल प्रशासन या अधिकारियों का आधिकारिक बयान नहीं आया है।
निष्कर्ष!
सिस्टम सुधार की जरूरत, वरना मौतें जारी रहेंगी
भदोही की यह घटना स्वास्थ्य अधिकारियों की क्लास लेते हुए पूरे सिस्टम पर सवाल उठाती है। यदि निगरानी मजबूत होती, तो शायद यह मौत टाली जा सकती थी। परिजन न्याय की प्रतीक्षा में हैं, लेकिन बड़ा सवाल है – क्या अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे! मातृ स्वास्थ्य संकट को हल करने के लिए तत्काल सुधार जरूरी हैं, वरना गरीब परिवार ऐसी त्रासदियों का शिकार होते रहेंगे।
- Indra yadav/indrayadaveditor@gmail.com/
- Correspondent – Ishan Times..🙏


