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बच्चा माँ की लाश के पास रोता रहा !प्रेमी ने कर दी हत्या

प्यार का लेटेस्ट ऑफर ! शादी फ्री, जान एक्स्ट्रा चार्ज ! बच्चा माँ की लाश के पास रोता रहा !

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक और “लव स्टोरी” का दर्दनाक अंत हो गया। नाम है प्रीति, उम्र कोई 25-26 साल, पहले से शादीशुदा, दो साल का मासूम बच्चा भी है। लेकिन दिल तो बच्चा है जी, मानता नहीं। दिल ने कहा , “पति से क्या होता है, असली वाला तो दिलीप भैया हैं।” दिलीप कुमार अग्रहरि, 37 साल के परिपक्व प्रेमी, जो शायद अभी तक “सेटल” होने की उम्र में भी सेटल नहीं होना चाहते थे। प्रीति गर्भवती थीं। अब गर्भवती औरत का दिमाग तो आप जानते ही हैं , या तो आइसक्रीम खाने का मन करता है, या शादी करने का। प्रीति का नंबर दूसरा आया। उन्होंने दिलीप भैया को अल्टीमेटम दे दिया , “शादी करो वरना…”। दिलीप भैया के लिए ये “वरना” सुनना बहुत भारी पड़ गया। वो बोले, “अरे बहन जी (या जो भी संबोधन चलता हो), शादी क्यों! हम तो ऐसे ही अच्छे हैं ना! बच्चा भी हो जाएगा, नाम मेरा डाल देना।” लेकिन प्रीति जी नहीं मानीं। उन्होंने दबाव बढ़ाया। अब दबाव जब प्रेमी पर पड़ता है, तो दो रास्ते होते हैं , या तो हार मानकर घोड़ी चढ़ जाओ, या फिर… चाकू चढ़ा दो। दिलीप भैया ने दूसरा वाला सस्ता और स्थायी विकल्प चुना। फोन किया , “आजो प्रीति, आज भाग चलते हैं, शादी कर लेते हैं।” प्रीति खुशी-खुशी दो साल के बच्चे को गोद में लेकर निकल पड़ीं। सपनों में शायद लाल जोड़े और बैंड-बाजा चल रहा था। पहुँची तो दिलीप भैया ने बड़े प्यार से गले लगाया… फिर चाकू। एक, दो, तीन… जितने लगे, लगते रहे। प्रीति मौके पर ही “हमेशा के लिए दिलीप की” हो गईं। बच्चा माँ की लाश के पास रोता रहा। पुलिस आई, दिलीप भागे, अब तक पकड़े नहीं गए हैं। कहते हैं कहीं नया ठिकाना और नया नकली प्रोफाइल बना रहे हैं। अब समाज के ठेकेदारों की बारी। वो चिल्ला रहे हैं , “देखा! इसलिए लड़कियों को पढ़ाओ-लिखाओ नहीं, शादी के बाद भी प्रेम प्रसंग करेंगी तो यही होगा।” वो भूल गए कि प्रीति को मारने वाला कोई अनपढ़ गुंडा नहीं, 37 साल का “परिपक्व” पुरुष था। वो ये भी भूल गए कि शादी का वादा करके औरत को बुलाना और फिर चाकू घोंप देना, ये कोई “परंपरा” नहीं, कातिलाना मानसिकता है। हमारा समाज बड़ा अजीब है साहब। लड़की अगर अविवाहित प्रेमी के साथ भाग जाए तो “बदचलन”, शादीशुदा होकर भी प्रेम करे तो “चरित्रहीन”, और अगर प्रेमी उसकी हत्या कर दे तो… “लड़की ने दबाव डाला था, उसकी भी गलती है।” यानी औरत चाहे जो करे, अंत में दोष उसका।दिलीप जैसे “आशिक” हमारे यहाँ कम नहीं।
वो शादी का लालच देकर सालों संबंध रखते हैं, बच्चे तक पैदा कर लेते हैं, लेकिन जैसे ही जिम्मेदारी की बात आती है , “भाई हम तो मजाक कर रहे थे।” और जब मजाक का खुलासा होता है तो चाकू निकाल लेते हैं। क्योंकि उनके लिए औरत की जान से बड़ी उनकी “आजादी” है। आजादी समझिए , बिना जिम्मेदारी के सेक्स करने की, बिना पापा बने बच्चे पैदा करने की, और जरूरत पड़े तो बिना सजा भुगते हत्या करने की।सबसे बड़ी विडंबना ये कि दो साल का बच्चा अब अनाथ हो गया। माँ मर गई क्योंकि वो माँ बनना चाहती थी। और जिसने माँ बनाया, वही कातिल बन गया। हमारे यहाँ “प्यार” का मतलब ही बदल गया है ,प्यार अब वो नहीं जो जीवन देता है, प्यार वो है जो वादे करता है, इस्तेमाल करता है, और अंत में जान ले लेता है।
और समाज! समाज तमाशा देख रहा है। कभी लव जिहाद के नाम पर, कभी ऑनर किलिंग के नाम पर, कभी “उसने दबाव डाला था” के नाम पर। प्रीति अब नहीं है। उसका दो साल का बच्चा जब बड़ा होगा तो पूछेगा ,“मम्मी को किसने मारा?”
हम क्या जवाब देंगे! “बेटा, तेरी मम्मी ने शादी माँगी थी… इसलिए मर गई।”बस यही है हमारा “सुसंस्कृत” समाज।
जहाँ औरत की सबसे बड़ी गलती ये है कि वो अपने बच्चे के लिए एक पिता चाहती है। और पुरुष की सबसे बड़ी कला ये है कि वो पिता बने बिना भी बच्चे पैदा कर सकता है… और माँ को मारकर भी बच सकता है।

  • indra Yadav / Ishan Times
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