ishantimes

Upcoming Games

Follow Us On

पत्नी की डिमांड बढ़ रही थी राहुल झूल गया फंदे से

Image

उत्तर प्रदेश की मिट्टी फिर से खून से लाल हो गई। बदायूं में 22 साल का राहुल दुबे, जो जागरण पार्टी में गाता था और ईको गाड़ी चलाकर परिवार पालता था, फांसी के फंदे पर लटक गया। मौत से ठीक पहले उसने ऑडियो रिकॉर्ड किया “पत्नी दुर्गा और ससुराल वाले जिम्मेदार हैं। सात लाख मांग रही है, दिल्ली में भाइयों के साथ रहने का दबाव, दहेज केस की धमकी, तलाक की जिद!” भाई शिवम रोते हुए कहता है, “भाई मेहनती था, लेकिन भाभी नहीं रहना चाहती थीं।” पुलिस पोस्टमॉर्टम करा रही है, ऑडियो फॉरेंसिक में जाएगा, और ससुराल पर केस बनेगा। घर में कोहराम, मातम का माहौल। लेकिन हे सरकार! हे हमारे “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” वाले महानायकों! यह सब देखकर आपकी हंसी नहीं रुकती! आखिर यह तो आपकी “महिला सशक्तिकरण” नीति का जीता-जागता प्रमाण है न!
सोचिए जरा, शादी के दो साल भी नहीं हुए, 21 मई 2023 को ब्याह हुआ, और पत्नी सीधे दिल्ली भाग गई भाइयों के पास। राहुल अकेला कमरे में बंद, तीन लाख देने को तैयार, लेकिन नहीं! सात लाख चाहिए, वरना दहेज उत्पीड़न का मुकदमा, घरेलू हिंसा का केस, पूरे परिवार को जेल! अरे, क्या खूबसूरत “सशक्तिकरण” है यह! सरकार जी, आपने तो कानून बनाए हैं, IPC 498A, दहेज निषेध अधिनियम, घरेलू हिंसा कानून। लेकिन ये कानून तो सिर्फ एक तरफ की तलवार हैं न! पति की गर्दन पर लटकती है, पत्नी की हाथ में चाबुक। राहुल जैसे हजारों युवक रोज आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन आंकड़े! ओह, वो तो “महिलाओं के खिलाफ अपराध” में गिने जाते हैं। पुरुषों की आत्महत्या! वो तो “मानसिक तनाव” है, “व्यक्तिगत समस्या”। सरकार की रिपोर्ट्स में “दहेज से मौत” सिर्फ बहू की होती है, दामाद की नहीं। राहुल का ऑडियो सुना! वो चीख रहा है ,”मैं तंग आ गया!” लेकिन कानून कहता है, “महिला की बात पहले मानो, सबूत बाद में। हे माननीयों! आपकी सभाओं में भाषण देते हो, “महिलाओं को अधिकार दो!” लेकिन अधिकार के नाम पर धमकी! सात लाख की मांग को “अधिकार” कहोगे! दिल्ली में भाई-भाभी के साथ रहने की जिद को “स्वतंत्रता”! और अगर पति ने तीन लाख दिए, तो क्या! वो तो “दहेज देना” अपराध है न! कानून कहता है, दहेज लेना-देना दोनों गुनाह। लेकिन पत्नी मांगती है तो “उसका हक”, पति देता है तो “अपराधी”। राहुल ने नहीं दिया, तो फंदा लगा लिया। अगर दे देता, तो जेल जाता। दोनों तरफ मौत! सरकार जी, आपकी यह “लैंगिक समानता” क्या है! पुरुषों के लिए फांसी का फंदा, महिलाओं के लिए धमकी का हथियार! परिवार बिखर रहे हैं, युवक मर रहे हैं। बदायूं का यह मामला अकेला नहीं ,हरियाणा, राजस्थान, यूपी में रोज ऐसी खबरें। लेकिन आप क्या कर रहे हो? “महिला हेल्पलाइन” तो है, “पुरुष हेल्पलाइन” कहां! कानून में संशोधन कब, कि झूठे केस पर सजा हो! नहीं, आप तो वोटबैंक की राजनीति में व्यस्त हो। “बेटियों को सशक्त बनाओ” कहकर कानून एकतरफा बनाए, अब बेटों की लाशें गिनो। राहुल का भाई रो रहा है, मां बेसुध है, लेकिन ससुराल वाले, शायद दिल्ली में पार्टी मना रहे होंगे “जीत गए! दहेज का दानव कानून के कठघरे में छिपा है, और आप चुप हो। राहुल जैसे युवकों की आत्मा चीख रही है, “न्याय दो!” लेकिन न्याय! वो तो सिर्फ बहू के लिए है न! हे सरकार, जागो! वरना अगला फंदा कोई और राहुल लगाएगा, और तुम्हारी “सशक्त भारत” की इमारत लाशों पर खड़ी होगी। दर्दभरा सत्य यह कि कानून सुधारो, वरना यह व्यंग्य शोकगीत बन जाएगा , हर घर का। जय हिंद! नहीं, जय न्याय!

  • इंद्र यादव / ईशान टाइम्स ग्रुप
Scroll to Top